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कश्मीर में हुआ था बडा नरसंहार
डोडा नरसंहार – अगस्त १४, १९९३ को बस रोककर १५ हिंदुओं की हत्या कर दी गई ।

संग्रामपुर नरसंहार – मार्च २१, १९९७ घर में घुसकर ७ कश्मीरी पंडितों का अपहरण कर मार डाला गया ।

वंधामा नरसंहार – जनवरी २५, १९९८ को हथियारबंद आतंकियों ने ४ कश्मीरी परिवार के २३ लोगों को गोलियों से भून कर मार डाला ।

प्रानकोट नरसंहार – अप्रैल १७, १९९८ को उधमपुर जिले के प्रानकोट गांव में एक कश्मीरी हिन्दू परिवार के २७ लोगोंको माैत के घाट उतार दिया था, इसमें ११ बच्चे भी थे । इस नरसंहार के बाद डर से पौनी और रियासी के १००० हिंदुओं ने पलायन किया था ।

२००० में अनंतनाग के पहलगाम में ३० अमरनाथ यात्रियों की आतंकियों ने हत्या कर दी थी ।

२० मार्च २००० चित्ती सिंघपोरा नरसंहार होला मना रहे ३६ सिखों की गुरुद्वारे के सामने आतंकियों ने गोली मार कर हत्या कर दी ।

२००१ में डोडा में ६ हिंदुओं की आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी ।

२००१ जम्मू कश्मीर रेलवे स्टेशन नरसंहार, सेना के रूप में आतंकियों ने रेलवे स्टेशन पर गोलीबारी कर दी, इसमें ११ लोगों की मृत्यु हो गई ।

२००२ में जम्मू के रघुनाथ मंदिर पर आतंकियों ने दो बार आक्रमण किया, पहला ३० मार्च और दूसरा २४ नवंबर को । इन दोनों आक्रमणों में १५ से ज्यादा लोगों की मृत्यु हो गई ।

२००२ क्वासिम नगर नरसंहार, २९ हिन्दू मजदूरों को मारा गया । इनमें १३ महिलाएं और एक बच्चा था ।

२००३ नदिमार्ग नरसंहार, पुलवामा जिले के नदिमार्ग गांव में आतंकियों ने २४ हिंदुओं को मृत्यु के घाट उतार दिया था ।

स्त्रोत : दैनिक भास्कर

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