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કાના તારી મોરલીએ મારું મન મોહ્યું ( એક સત્ય ઘટના) …

ઇટાલીના સરમુખત્યાર મુસોલિનીની આત્મકથામાં પડેલો આ પ્રસંગ વાંચીને દરેક ભારતવાસી પોતાની પ્રાચીન સંસ્કૃતિ માટે ગૌરવનો અનુભવ કરી શકે તેમ છે.

*ભારતના મહાન સંગીતકાર ઓમકારનાથ ઠાકુર એ દિવસોમાં ઇટાલીના પ્રવાસે ગયેલા. *

*ભારતના એ મહાન સંગીતજ્ઞના માનમાં મુસોલિનીએ એક ભોજન સમારંભનું આયોજન કરેલ. *

આ રાજકીય ભોજન સમારંભમાં ઓમકારનાથ ઠાકુરની સાથે ઇટાલીમાં વસેલા ઘણા અગ્રગણ્ય ભારતીયો તથા ભારતના દૂતાવાસના સભ્યોને પણ ઉપસ્થિત હતા..

સમારંભમાં મુસોલિનીએ ભારતની પાંચ હજાર જૂની સંસ્કૃતિની મજાક કરતા બધા મહેમાનોની વચ્ચે ઓમકારનાથ ઠાકુરને કહ્યું કે, ‘મી. ઠાકુર મેં સાંભળ્યું છે કે તમારા દેશમાં કૃષ્ણ જ્યારે વાંસળી વગાડતા ત્યારે આજુબાજુના વિસ્તારની બધી ગાયો નાચવા લાગતી, મોર કળા કરવા લાગતા, ગોપીઓ સૂધબૂધ ખોઈને કૃષ્ણ જ્યાં વાંસળી વગાડતા હોય ત્યાં દોડી આવતી,શું તમે આ વાતને માનો છો?’

*ઇટાલીના સરમુખત્યારને ભારતના એ સપૂતે ભોજન સમારંભમાં બધાની વચ્ચે જે કરી બતાવ્યું તે જાણીને પ્રત્યેક ભારતીયનું મસ્તક ગૌરવથી ઊંચું થઈ જશે… *

*ઠાકુરે કહ્યું, ‘કૃષ્ણ જેટલું તો મારું સાર્મથ્ય નથી કે નથી સંગીતની બાબતમાં મારી તેમના જેટલી સમજણ. *

*સાચું તો એ છે કે સંગીત સંબંધે આ પૃથ્વી ઉપર આજ સુધીમાં કૃષ્ણ જેટલી સમજણવાળો કોઈ બીજો પેદા થયો હોવાનું પણ જાણવા મળતું નથી. *

પરંતુ, સંગીતનું જે થોડું ઘણુ જ્ઞાન મને છે, તે તમે કહો તો તમને કહું અથવા કરી બતાવું…’

મુસોલિનીએ મજાકમાં જ કહ્યું કે, ‘જો કે સંગીતના કોઈ સાધનો અહીં ઉપલબ્ધ નથી છતાં પણ જો શક્ય હોય તો કંઈક કરી બતાવો તો અહીં ઉપસ્થિત મહાનુભાવોને પણ ભારતીય સંસ્કૃતિનો પરિચય મળે.’

*ઓમકારનાથ ઠાકુરે ડાઈનીંગ ટેબલ ઉપર પડેલા કાચના જુદા જુદા પ્યાલામાં ઓછું વધારે પાણી ભરીને તેના ઉપર છરી કાંટાથી જલતરંગની જેમ વગાડવું શરૂ કર્યું. બે મિનિટમાં તો ભોજન સમારંભની હવા ફરી ગઈ. *

*વાતાવરણમાં એક પ્રકારની ઠંડક વર્તાવા લાગી. પાંચ મિનિટ, સાત મિનિટ અને મુસોલિનીની આંખો ઘેરાવા લાગી. વાતાવરણમાં એક પ્રકારનો નશો છવાવા લાગ્યો. *

મદારી બીન વગાડે અને અવસ થઈને જેમ સાપ ડોલવા લાગે તેમ મુસોલીની ડોલવા લાગ્યો અને તેનું માથું જોરથી ટેબલ સાથે અથડાયું.

*બંધ કરો… બંધ કરો… મુસોલિની બૂમ પાડી ઉઠ્યો. સમારંભમાં સન્નાટો છવાઈ ગયો. *

બધા લોકોએ જોયું તો મુસોલિનીના કપાળમાં ફૂટ પડી હતી અને તેમાંથી લોહી વહેતું હતું.

*મુસોલિનીએ આત્મકથામાં લખાવ્યું છે કે ભારતની સંસ્કૃતિ માટે મેં કરેલ મજાક માટે હું ભારતની જનતાની માફી માંગું છું. *

ફક્ત છરીકાંટા વડે પાણી ભરેલા કાચના વાસણોમાંથી ઉદભવેલા એ અદભૂત સંગીતથી જો આ સભ્ય સમાજનો મારા જેવો મજબૂત મનનો માનવી પણ ડોલવા લાગે તો હું જરૂર માનું છું કે એ જમાનામાં કૃષ્ણની વાંસળી સાંભળીને જંગલના જાનવરો પણ શાંત થઈ જતાં હશે અને માનવીઓ પણ સૂધબૂધ ખોઈને ભેળા થઈ જતાં હશે.

*ભારતના ઋષિઓએ હજારો વર્ષ પૂર્વે ધ્વનિશાસ્ત્ર – નાદબ્રહ્મની સાધના કરી અને મંત્રયોગ દ્વારા માનવીના ચિત્તના તરંગોને અનેક પ્રકારે રૂપાંતરિત કરવાની પ્રક્રિયાઓ શોધેલ. *

*ધ્વનિ અને મંત્રોમાં એવી અદભૂત શક્તિઓ ભરી પડી છે કે તે જડ તત્વોને ચૈતન્યમય બનાવી શકે છે. *

ઓમકારનાથ ઠાકુરે તેનો એક નાનકડો પ્રયોગ ઇટાલીમાં કરીને ત્યાં ઉપસ્થિત બધાને આશ્ચર્ય ચકિત કરી દીધા હતા

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माता पिता की मंशा


माता पिता की मंशा ))))))))

Jyoti Agrawaal
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क्लास छठी के बच्चे बड़े उत्साहित थे , इस बार उन्हें पिकनिक पे पास के वाइल्डलाइफ नेशनल पार्क ले जाया जा रहा था .
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तय दिन सभी बच्चे ढेर सारे खाने -पीने के सामान और खेलने -कूदने की चीजें लेकर तैयार थे .
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बस सुबह चार बजे निकली और 2-3 घंटों में नेशनल पार्क पहुँच गयी .
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वहां उन्हें एक बड़ी सी कैंटर में बैठा दिया गया और एक गाइड उन्हें जंगल के भीतर ले जाने लगा .
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मास्टर जी भी बच्चों के साथ थे और बीच -बीच में उन्हें जंगल और वन्य – जीवों के बारे में बता रहे थे . बच्चों को बहुत मजा आ रहा था ;
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वे ढेर सारे हिरनों , बंदरों और जंगली पक्षियों को देखकर रोमांचित हो रहे थे.
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वे धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे कि तभी गाइड ने सभी को शांत होने का इशारा करते हुए कहा , “ शशशश…. आप लोग बिलकुल चुप हो जाइए … और उस तरफ देखिये ….
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यह एक दुर्लभ दृश्य है , एक मादा जिराफ़ अपने बच्चे को जन्म दे रही है ….
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फिर क्या था ; गाड़ी वहीँ रोक दी गयी , और सभी बड़ी उत्सुकता से वह दृश्य देखने लगे .
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मादा जिराफ़ बहुत लम्बी थी और जन्म लेते हुए बच्चा करीब दस फुट की ऊंचाई से जमीन पर गिरा और गिरते ही अपने पाँव अंदर की तरफ मोड़ लिए, मानो वो अभी भी अपनी माँ की कोख में हो …
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इसके बाद माँ ने सर झुकाया और बच्चे को देखने लगी. सभी लोग बड़ी उत्सुकता से ये सब होते देख रहे थे की अचानक ही कुछ अप्रत्याशित सा घटा , माँ ने बच्चे को जोर से एक लात मारी ,
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और बच्चा अपनी जगह से पलट गया .
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कैंटर में बैठे बच्चे मास्टर जी से कहने लगे ,
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सर, आप उस जिराफ़ को रोकिये नहीं तो वो बच्चे को मार डालेगी ….
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पर मास्टर जी ने उन्हें शांत रहने को कहा और पुनः उस तरफ देखने लगे .
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बच्चा अभी भी जमीन पर पड़ा हुआ था कि तभी एक बार फिर माँ ने उसे जोर से लात मारी ….
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इस बार बच्चा उठ खड़ा हुआ और डगमगा कर चलने लगा….
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धीरे -धीरे माँ और बच्चा झाड़ियों में ओझल हो गए .
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उनके जाते ही बच्चों ने पुछा , सर , वो जिराफ़ अपने ही बच्चे को लात क्यों मार रही थी … अगर बच्चे को कुछ हो जाता तो ?
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मास्टर जी बोले , बच्चों , जंगल में शेर – चीतों जैसे बहुत से खूंखार जानवर होते हैं ;
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यहाँ किसी बच्चे का जीवन इसी बात पर निर्भर करता है की वो कितनी जल्दी अपने पैरों पर चलना सीख लेता है .
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अगर उसकी माँ उसे इसी तरह पड़े रहने देती और लात नहीं मारती तो शायद वो अभी भी वहीँ पड़ा रहता और कोई जंगली जानवर उसे अपना शिकार बना लेता .
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बच्चों , ठीक इसी तरह से आपके माता – पिता भी कई बार आपको डांटते – डपटते हैं , उस वक़्त तो ये सब बहुत बुरा लगता है ,
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पर जब आप बाद में पीछे मुड़कर देखते हैं तो कहीं न कहीं ये एहसास होता है की मम्मी – पापा की डांट की वजह से ही आप लाइफ में कुछ बन पाये हैं.
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इसलिए कभी भी अपने बड़ों की सख्ती को दिल से ना लें ,बल्कि उसके पीछे जो आपका भला करने की उन की मंशा है उसके बारे में सोचें .
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(((((((((( जय जय श्री राधे ))))))))))

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भगवान_की_दुविधा


#भगवानकीदुविधा

Jyoti Agrawaal

 

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एक बार भगवान दुविधा में पड़ गए! कोई भी मनुष्य जब मुसीबत में पड़ता, तो भगवान के पास भागा-भागा आता और उन्हें अपनी परेशानियां बताता, उनसे कुछ न कुछ मांगने लगता!
अंतत: उन्होंने इस समस्या के निराकरण के लिए देवताओं की बैठक बुलाई और बोले- देवताओं, मैं मनुष्य की रचना करके कष्ट में पड़ गया हूं। कोई न कोई मनुष्य हर समय शिकायत ही करता रहता हैं, जबकी मै उन्हे उसके कर्मानुसार सब कुछ दे रहा हुँ। फिर भी थोड़े से कष्ट मे ही मेरे पास आ जाता हैं। जिससे न तो मैं कहीं शांति पूर्वक रह सकता हूं, न ही तपस्या कर सकता हूं। आप लोग मुझे कृपया ऐसा स्थान बताएं, जहां मनुष्य नाम का प्राणी कदापि न पहुंच सके।
प्रभू के विचारों का आदर करते हुए देवताओं ने अपने-अपने विचार प्रकट किए। गणेश जी बोले- आप हिमालय पर्वत की चोटी पर चले जाएं। भगवान ने कहा- यह स्थान तो मनुष्य की पहुंच में हैं। उसे वहां पहुंचने में अधिक समय नहीं लगेगा। इंद्रदेव ने सलाह दी- कि वह किसी महासागर में चले जाएं। वरुण देव बोले- आप अंतरिक्ष में चले जाइए।
भगवान ने कहा- एक दिन मनुष्य वहां भी अवश्य पहुंच जाएगा। भगवान निराश होने लगे थे। वह मन ही मन सोचने लगे- “क्या मेरे लिए कोई भी ऐसा गुप्त स्थान नहीं हैं, जहां मैं शांतिपूर्वक रह सकूं”।
अंत में सूर्य देव बोले- प्रभू! आप ऐसा करें कि मनुष्य के हृदय में बैठ जाएं! मनुष्य अनेक स्थान पर आपको ढूंढने में सदा उलझा रहेगा, पर वह यहाँ आपको कदापि न तलाश करेगा। ईश्वर को सूर्य देव की बात पसंद आ गई। उन्होंने ऐसा ही किया और वह मनुष्य के हृदय में जाकर बैठ गए।
उस दिन से मनुष्य अपना दुख व्यक्त करने के लिए ईश्वर को मन्दिर, ऊपर, नीचे, आकाश, पाताल में ढूंढ रहा है पर वह मिल नहीं रहें हैं।
परंतु मनुष्य कभी भी अपने भीतर- “हृदय रूपी मन्दिर” में बैठे हुए ईश्वर को नहीं देख पाता🌸🌸🙏🏻🙏🏻राधे राधे जय श्री कृष्णा 🌹

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नीरज आर्य

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” जम्मू में एक वृद्ध सन्यासी जी एक योगाश्रम में रहते थे । मैं उनके पास 10 महीने रहा । वे आर्य सन्यासी न थे मगर उनके पास सारी पुस्तकें आर्य समाज की थी । वे राजनेता टाइप सन्यासी थे । वे सन्ध्या रोज करते थे । कई बार वे रात को 11 बजे आते मगर सन्ध्या जरूर करते थे । वे अपना भोजन खुद बनाते थे । भोजन बनाते रहते और सन्ध्या करते रहते जोर जोर से बोलकर । सुबह कई बार 10-11 बजे भी सन्ध्या करते थे । उनका एक ही तरीका था कि भोजन से पहले सन्ध्या करनी ही करनी ।

उनके पांच पुत्र थे , सभी अरब पति थे । जम्मू के सबसे बड़े रधुनाथ बाजार में उनके शोरूम थे । पांचों बेटों के अपना अपना करोड़ों का कारोबार था । उनका एक बेटा जम्मू में ही जज था । एक दिन ।।।।।

एक दिन वे दौड़ते दौड़ते मेरे पास आए और बोले – ओ ईश्वरा ! देख मेरे बेटे का नाम अखबार में आया है । खबर का हैडिंग पढा तो लिखा था – (यदि सारे जज ऐसे हो जाएं तो यह देश स्वर्ग बन जाए )

अखबार में उनके बेटे की ईमानदारी पर बड़ा लेख छपा था । स्वामी जी ने बताया कि मैंने अपने जज बेटे को बोल रखा है कि जिस दिन मुझे किसी ने झूठ से भी कह दिया कि तेरे जज बेटे ने रिश्वत ली है तो मैं जीते जी मर जाऊंगा । फिर कभी मुझे पिता जी न कहना और मुझसे मिलने भी न आना ।

स्वामी जी बोले – जब यह छोटे वाला लड़का नया नया जज बना तो एक दिन अपनी पत्नी के साथ सरकारी गाड़ी में मुझे मिलने आया तो मैंने मिलने से , बात करने से मना कर दिया । मैं बोला – मुझसे मिलना है तो अपनी गाड़ी में आया करो , अब जाओ । उस दिन के बाद अपनी गाड़ी में आता है ।

स्वामी जी बोले – जवानी में मैं गरीब था , मैं भगवान से केवल धन मांगता था । आज उस बात पर हंसी आती है । लगभग 40 साल की उम्र में मैंने सन्ध्या करनी शुरू की । आज तक एक भी दिन ऐसा नहीं आया कि मैंने सन्ध्या न की हो । सन्ध्या करने वाले का भगवान बड़ा ध्यान रखते हैं , प्रभु उसे संसार के सर्वोत्तम सुख के साधन प्रदान करते हैं । जिस प्रकार किसी आदमी की देश के प्रधानमंत्री से दोस्ती हो जाए तो वह आदमी अपने को भाग्यवान समझता है , भगवान तो सारी दुनिया के प्रधानमंत्रियों के भी बाप हैं , उनसे दोस्ती का स्वाद लेना है तो सन्ध्या करनी चाहिए । ”

________✍🏻वैदिक ।

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एक खूबसूरत दास्तां👌🏻
व्यवस्था पर एक कटाक्ष

आज इमरजेंसी में ड्यूटी थी,रात का समय था एक आदमी को उसके घर वाले ले कर के आये,शायद दो पक्षों के विवाद में उसको चोटे आई थी जांच करने पर पता चला उसके पैर की हड्डी में फ्रैक्चर था ।
मरीज को भर्ती किया गया और आगे का उपचार शुरू हुआ।
चूँकि फ्रैक्चर इतना गंभीर नहीं था तो कुछ दिनों बाद उसे छुट्टी दे दी गयी और घर पर ही रहने की सलाह दी गयी हालांकि वो अभी भी बिना सहारे के चल पाने में असमर्थ था तो डॉक्टरों ने उसके इस समस्या के हल के रूप में उसे बैसाखी दे दी जो सरकारी अस्पताल में मुफ़्त में मिलती थी और बैसाखी देते वक़्त बोला गया कि ये सरकार की तरफ से है इसलिए इसकी उपलब्धता की संख्या और सीमा निर्धारित है तो जब आप खुद से चलने में समर्थ हो जाना तो इस बैसाखी को लौटा देंना ताकि ये भविष्य में आने वाले आप जैसे लोगों के भी काम आ सके
फिर उसको कुछ जरुरी दवाये लिख के छुट्टी दे दी गयी।
दवा लेने सरकारी दवाखाने पंहुचा तो वहाँ लम्बी लाइन लगी थी तो वो भी लाइन में लग गया,लाइन में लगे बाकि लोगो ने जब उसके पैर में प्लास्टर बंधा और बैसाखी के सहारे खड़े देखा तो मानवता के चलते उसे आगे जाने दिया और उसे दवा जल्दी ही मिल गयी .
बाहर निकला स्टेशन जाना था तो ऑटो पकड़ने पंहुचा,ऑटो रुकी तो ऑटो वाले ने भी उसकी लाचारी को देखते हुए उसके सामान को उठा के रख दिया और उसको भी चढ़ने में मदद कि और स्टेशन तक छोड़ा.
ट्रेन पकड़ने पहुंचा तो ट्रेन में बहुत भीड़ थी किसी तरह ट्रेन में चढ़ा तो बैठने की जगह ना होने से खड़ा रहना पड़ा फिर लोगो ने देखा कि बेचारा बैसाखी के सहारे एक आदमी खड़ा है तो एक आदमी ने उठ कर उसे अपनी सीट दे दी और वो घर आराम से पहुच गया .
रात बीती, मेडिकल लीव भी ख़त्म हो चुकी थी तो ऑफिस जाना था,सुबह तैयार हो के बाहर निकला और बस का वेट करने लगा। पड़ोसी ने देखा कि बेचारा बैसाखी के सहारे चल रहा है तो उसे ऑफिस तक अपने स्कूटर पर छोड़ आये.
इतने दिन बाद ऑफिस पंहुचा था तो काम बहुत था लेकिन ऑफिस कलीग्स ने भी उसके लाचारी पर सहानभूति दिखाई और उसके ज्यादातर काम उन्होंने करके उसका हाथ बटाया मतलब ऑफिस में भी आराम रहा आज तो .
घर लौटा तो साथ वाले कर्मचारी ने घर तक छोड़ दिया .
दिन बड़ा आराम से बीता उसका,ना बस से आने जाने की किच किच हुई ना ही ऑफिस में काम के लिए कुछ कहा गया .खाना खा के सोने गया तो नींद नहीं आ रही थी शायद दिमाग में कुछ चल रहा था…

अगर मैं ठीक ना होने का नाटक करूं तो ऐसे ही लोगों की सहानभूति मिलती रहेगी

या फिर ये बैसाखी ही ना छोड़ूं तो ?? इसके साथ होता हूं तो सारे काम आसानी से हो जाते है

और फिर ये बैसाखी अपने बच्चे को दे दूं तो..??वो भी मेरी तरह फायदा उठा पायेगा

और फिर उसने अस्पताल में बैसाखी वापस नहीं की .

ऐसे ही कई मरीजो ने किया और कुछ दिनों में ही सरकारी बैसाखियां जो लोगो के मदद के लिए थी ख़त्म हो गयी और हर बैसाखी कुछ चंद लोगो की व्यक्तिगत बन चुकी थी जिसे वो अपने बच्चों को थमाने का प्लान बना चुके थे…

और उसके जैसे दूसरे मरीज़ बैसाखियों के आस में बैठे है..

आखिर कब तक लोग उसके झूठ को सहते और अनदेखा करते,एक दिन विरोध तो होना ही था…

फिर आगे क्या हुआ वो हम सब देख और महसूस कर रहे हैं……

Posted in सुभाषित - Subhasit

हिन्दी दिवस पर थोडा़ आनंद लीजिये
मुस्कराइये

हिंदी के मुहावरे, बड़े ही बावरे हैं
खाने पीने की चीजों से भरे हैं
कहीं पर फल है तो कहीं आटा-दालें हैं
कहीं पर मिठाई है, कहीं पर मसाले हैं
चलो, फलों से ही शुरू कर लेते हैं
एक एक कर सबके मजे लेते हैं

आम के आम और गुठलियों के भी दाम मिलते हैं,
कभी अंगूर खट्टे हैं
कभी खरबूजे, खरबूजे को देख कर रंग बदलते हैं
कहीं दाल में काला है
तो कहीं किसी की दाल ही नहीं गलती है

कोई डेड़ चावल की खिचड़ी पकाता है
तो कोई लोहे के चने चबाता है
कोई घर बैठा रोटियां तोड़ता है
कोई दाल भात में मूसरचंद बन जाता है
मुफलिसी में जब आटा गीला होता है
तो आटे दाल का भाव मालूम पड़ जाता है

सफलता के लिए कई पापड़ बेलने पड़ते है
आटे में नमक तो चल जाता है
पर गेंहू के साथ, घुन भी पिस जाता है
अपना हाल तो बेहाल है, ये मुंह और मसूर की दाल है

गुड़ खाते हैं और गुलगुले से परहेज करते हैं,
और कभी गुड़ का गोबर कर बैठते हैं
कभी तिल का ताड़, कभी राई का पहाड़ बनता है
कभी ऊँट के मुंह में जीरा है
कभी कोई जले पर नमक छिड़कता है,
किसी के दांत दूध के हैं
तो कई दूध के धुले हैं

कोई जामुन के रंग सी चमड़ी पा के रोई है
तो किसी की चमड़ी जैसे मैदे की लोई है
किसी को छटी का दूध याद आ जाता है
दूध का जला छाछ को भी फूंक फूंक पीता है
और दूध का दूध और पानी का पानी हो जाता है

शादी बूरे के लड्डू हैं, जिसने खाए वो भी पछताए
और जिसने नहीं खाए, वो भी पछताते हैं
पर शादी की बात सुन, मन में लड्डू फूटते है
और शादी के बाद, दोनों हाथों में लड्डू आते हैं

कोई जलेबी की तरह सीधा है, कोई टेढ़ी खीर है
किसी के मुंह में घी शक्कर है, सबकी अपनी अपनी तकदीर है
कभी कोई चाय-पानी करवाता है
कोई मख्खन लगाता है
और जब छप्पर फाड़ कर कुछ मिलता है
तो सभी के मुंह में पानी आ जाता है

भाई साहब अब कुछ भी हो
घी तो खिचड़ी में ही जाता है, जितने मुंह है उतनी बातें हैं
सब अपनी-अपनी बीन बजाते हैं
पर नक्कारखाने में तूती की आवाज कौन सुनता है,
सभी बहरे है
बावरें है ये सब हिंदी के मुहावरें हैं

ये गज़ब मुहावरे नहीं बुजुर्गों के अनुभवों की खान है
सच पूछो तो हिन्दी भाषा की जान हैं

Posted in छोटी कहानिया - १००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

एक राजा था ।.. उसने एक सर्वे करनेका सोचा कि
मेरे राज्य के लोगों की घर गृहस्थि पति से चलती है या पत्नि से..।
उसने एक ईनाम रखा कि ” जिसके घर में पतिका हुकम चलता हो उसे मनपसंद घोडा़ ईनाम में मिलेगा और जिसके घर में पत्नि की सरकार हो वह एक सेब ले जाए.. ।
एक के बाद एक सभी नगरजन सेब उठाकर जाने लगे । राजाको चिंता होने लगी.. क्या मेरे राज्य में सभी सेब ही हैं ?
इतने में एक लम्बी लम्बी मुछों वाला, मोटा तगडा़ और लाल लाल आखोंवाला जवान आया और बोला
” राजा जी मेरे घर में मेरा ही हुकम चलता है .. ला ओ घोडा़ मुझे दिजीए ..”
राजा खुश हो गए और कहा जा अपना मनपसंद घोडा़ ले जा ..। जवान काला घोडा़ लेकर रवाना हो गया ।
घर गया और फिर थोडी़ देरमें दरबार में वापिस लौट आया।
राजा: ” क्या हुआ जवामर्द ? वापिस क्यों आया !
जवान : ” महाराज, घरवाली कहती है काला रंग अशुभ होता है, सफेद रंग शांति का प्रतिक होता है तो आप मुझे सफेद रंग का घोडा़ दिजिए
राजा: ” घोडा़ रख ..और सेब लेकर चलती पकड़ ।
इसी तरह रात हो गई .. दरबार खाली हो गया लोग सेब लेकर चले गए ।
आधी रात को महामंत्री ने दरवाजा खटखटाया..
राजा :
” बोलो महामंत्री कैसे आना हुआ ?

महामंत्री : ” महाराज आपने सेब और घोडा़ ईनाम में रखा ,इसकी जगह एक मण अनाज या सोना महोर रखा होता तो लोग लोग कुछ दिन खा सकते या जेवर बना सकते ।

राजा :” मुझे तो ईनाम में यही रखना था लेकिन महारानी ने कहा कि सेब और घोडा़ ही ठीक है इसलिए वही रखा ।

महामंत्री : ” महाराज आपके लिए सेब काट दुँ..!!

राजा को हँसी आ गई । और पुछा यह सवाल तुम दरबारमें या कल सुबह भी पुछ सकते थे । तो आधी रात को क्यों आये ??
महामंत्री : ” मेरी धर्मपत्नि ने कहा अभी जाओ और पुछ के आओ सच्ची घटना का पता चले ..।

राजा ( बात काटकर ) :
“महामंत्री जी , सेब आप खुद ले लोगे या घर भेज दिया जाए।”

Moral of the story..

समाज चाहे पुरुषप्रधान हो लेकिन संसार स्त्रीप्रधान है

दोस्तो आपका यह दोस्त भी अभी सेब खा रहा है।
😀😀