Posted in भारत का गुप्त - Bharat Ka rahasyamay Itihaas

19वीं सदी में ब्रिटिश गवर्मेंट के अधिकारी और लेखक विलियम लोगान ने अपनी किताब ‘मालाबार मैनुअल’ में लिखा है कि कैसे टीपू सुल्तान ने अपने 30,000 सैनिकों के दल के साथ कालीकट में तबाही मचाई थी. टीपू सुल्तान हाथी पर सवार था और उसके पीछे उसकी विशाल सेना चल रही थी. पुरुषों और महिलाओं को सरेआम फांसी दी गई. उनके बच्चों को उन्हीं के गले में बांध पर लटकाया गया.
2. इसी किताब में विलियम यह भी लिखते हैं कि शहर के मंदिर और चर्चों को तोड़ने के आदेश दिए गए. यहीं नहीं, हिंदू और इसाई महिलाओं की शादी जबरन मुस्लिम युवकों से कराई गई. पुरुषों से मुस्लिम धर्म अपनाने को कहा गया और जिसने भी इससे इंकार किया उसे मार डालने का आदेश दिया गया.
3. कई जगहों पर उस पत्र का भी जिक्र मिलता है, जिसे टीपू सुल्तान ने सईद अब्दुल दुलाई और अपने एक अधिकारी जमान खान के नाम लिखा है. पत्र के अनुसार टीपू सुल्तान लिखता है, ‘पैगंबर मोहम्मद और अल्लाह के करम से कालीकट के सभी हिंदूओं को मुसलमान बना दिया है. केवल कोचिन स्टेट के सीमवर्ती इलाकों के कुछ लोगों का धर्म परिवर्तन अभी नहीं कराया जा सका है. मैं जल्द ही इसमें भी कामयाबी हासिल कर लूंगा.’
4. यहां 1964 में प्रकाशित किताब ‘लाइफ ऑफ टीपू सुल्तान’ का जिक्र भी जरूरी है. इसमें लिखा गया है कि उसने तब मालाबार क्षेत्र में एक लाख से ज्यादा हिंदुओं और 70,000 से ज्यादा ईसाइयों को मुस्लिम धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया.
5. इस किताब के अनुसार धर्म परिवर्तन टीपू सुल्तान का असल मकसद था, इसलिए उसने इसे बढ़ावा दिया. जिन लोगों ने इस्लाम स्वीकार किया, उन्हें मजबूरी में अपने बच्चों की शिक्षा भी इस्लाम के अनुसार देनी पड़ी. इनमें से कई लोगों को बाद में टीपू सुल्तान की सेना में शामिल किया गया और अच्छे ओहदे दिए गए.
6. टीपू सुल्तान के ऐसे पत्रों का भी जिक्र मिलता है, जिसमें उसने फ्रेंच शासकों के साथ मिलकर अंग्रेजों को भगाने और फिर उनके साथ भारत के बंटवारे की बात की. ऐसा भी जिक्र मिलता है कि उसने तब अफगान शासक जमान शाह को भारत पर चढ़ाई करने का निमंत्रण दिया, ताकि यहां इस्लाम को और बढ़ावा मिल सके.

संजय कुमार

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💐🌷🌺💐🌷🌺💐🌷सहसा विदधीत न क्रियामविवेकः परमापदां पदम् |

वृणते हि विमृश्यकारिणं गुणलुब्धाः स्वयमेव संपदः ||
अर्थात् : अचानक ( आवेश में आ कर बिना सोचे समझे ) कोई कार्य नहीं करना चाहिए कयोंकि विवेकशून्यता सबसे बड़ी विपत्तियों का घर होती है | ( इसके विपरीत ) जो व्यक्ति सोच –समझकर कार्य करता है ; गुणों से आकृष्ट होने वाली माँ लक्ष्मी स्वयं ही उसका चुनाव कर लेती है

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*ओशो* से किसी ने पूछा-

*”राजनैतिक लुच्चों-लफंगों से देश को छुटकारा कब मिलेगा…?”*

*ओशो* ने जवाब दिया,

*”बहुत कठिन है, क्योंकि प्रश्न “छुटकारे” का नहीं है, प्रश्न तो तुम्हारे “अज्ञान के मिटने” का है…!*

*तुम जब तक “अज्ञानी” हो, कोई न कोई तुम्हारा “शोषण” करता रहेगा!*

*कोई न कोई तुम्हें चूसेगा!*

*पंडित चूसेंगे, पुरोहित चूसेंगे, मौलाना चूसेंगे, राजनेता चूसेंगे!*

*तुम जब तक जागृत नही होंगे, तब तक लुटोगे ही!*

*फिर, किसने लूटा? क्या फर्क पड़ता है…??*

*किस झण्डे की आड़ में लुटे, क्या फर्क पड़ता है…?*

*समाजवादियों से लुटे कि, साम्यवादियों से….?*

*क्या फर्क पड़ता है…!*

*तुम लुटोगे ही….!*

*बस, लुटेरों के नाम बदलते रहेंगे और तुम लुटते रहोगे…!*

*यह मत पूछो कि, राजनीतिक लुच्चों-लफंगों से देश को छुटकारा कब मिलेगा…?*

*यह प्रश्न अर्थहीन है!*

*यह पूछो कि, मैं कब इतना जाग सकूँगा कि, झूठ को झूठ की तरह पहचान सकूँ,ताकि मैं ‘असत्य’ की गिरफ्त में ना आ सकूँ।।*

*और* 

*जब तक सारी मनुष्य जाति “झूठ” को “झूठ” की भाँति नहीं पहचानती, तब तक ‘छुटकारे” का कोई उपाय नहीं है…।”*

          *~ ओशो*

          🙏✍🙏

~(योगिअंश रमेश चन्द्र भार्गव)