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एनडीटीवी के विवादास्पद मामलें :-

#पहले_भी_विवादों_में_रहा_NDTV

एनडीटीवी के विवादास्पद मामलें :-

1. भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश का आरोप
20 जनवरी 1998 को केंद्रीय जांच ब्यूरो ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी के तहत नई दिल्ली टेलीविजन ( एनडीटीवी) के प्रबंध निदेशक प्रणय रॉय , दूरदर्शन के पूर्व महानिदेशक आर बसु और पांच अन्य शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने के लिए और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामले दर्ज किया ।

2. राडिया टेप विवाद
नवंबर, 2010 में ओपन मैगज़ीन ने एक कहानी पप्रकाशित की जिसमें वरिष्ठ पत्रकारों , राजनेताओं, और कॉर्पोरेट घरानों के साथ नीरा राडिया की टेलीफोन पर बातचीत के ट्रांसक्रिप्ट्स की सूचना दी। राडिया टेप मामले में 2G स्पेक्ट्रम तथा अन्य कई लोगो के राजनैतिक दुराचार की खबर सामने आयी। टेप प्रदर्शित करतीं हैं कि कैसे राडिया ने एनडीटीवी की बरखा दत्त सहित कुछ मीडिया व्यक्तियों का उपयोग दूरसंचार मंत्री के रूप में ए राजा को नियुक्त करने के निर्णय को प्रभावित किया ।

3. टैक्स धोखाधड़ी का आरोप
एनडीटीवी पर अपनी विदेशी सहायक कंपनियों के माध्यम से , भारतीय कर और कॉरपोरेट कानूनों का उल्लंघन करने का आरोप है । हालांकि एनडीटीवी ने इन आरोपों का खंडन किया है । ‘द संडे गार्डियन’ ने एक कहानी प्रकाशित की जिसने आईसीआईसीआई बैंक के साथ मिलीभगत में एनडीटीवी के वित्तीय दुराचार और कदाचार को उजागर किया। हालांकि कंपनी ने कहा कि यह सलाह दी गई है कि इन आरोपों का कानूनी तौर पर तर्कसंगत नहीं हैं।

4. कॉमन वेल्थ गेम्स कॉन्ट्रैक्ट

5 अगस्त 2011 को भारत के सी.ऐ.जी द्वारा उन्नीसवीं कॉमन वेल्थ गेम्स की रिपोर्ट को संसद में पेश किया गया था। रिपोर्ट की धारा 14.4.2 में सी.ऐ.जी ने आरोप लगाया कि जब उत्पादन औरविज्ञापनों के प्रसारण के लिए एनडीटीवी और सीएनएन-आईबीएन को कॉमन वेल्थ गेम्स-2010 को बढ़ावा देने के लिए 37.8 करोड़ रुपये मूल्य के कॉन्ट्रैक्ट दिए गए ,कॉमन वेल्थ गेम्स के आयोजन समिति ने एक मनमाना दृष्टिकोण का पालन किया ।

5. टैम इंडिया के खिलाफ मुकदमा
समाचार प्रसारक कंपनी ने मुकदमा टेलीविजन ऑडियंस मेज़रमेंट कंपनी टैम इंडिया और उसके श्विक माता पिता कंपनियों पर न्यू यॉर्क के सुप्रीम कोर्ट में 6800 करोड़ का मुकदमा दर्ज़ किया, उसके अधिकारियों को रिश्वत के बदले में टैम रेटिंग्स जोड़ तोड़ का आरोप लगाते हुए ।

6. इनकम टैक्स धोखाधड़ी :-
16 मई , 2016 को भारत के आयकर विभाग (आईटीडी) को बेवकूफ बनाने के लिए और 2008 में लेनदेन के माध्यम से अर्जित आय 642 करोड़ रुपये से अधिक छिपाने के ज़ुर्म में नई दिल्ली टेलीविजन लिमिटेड ( एनडीटीवी ) पर Rs.525 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया है। पकड़े जाने पर कि कैसे 642 करोड़ से भी अधिक अस्पष्टीकृत रकम बरमूडा के माध्यम से उसकी किटी पहुँचें ,एनडीटीवी ने दावा किया कि उन्होंने ” एक सपना बेचा” हैं । इस उत्सुक जवाब में एनडीटीवी ने दावा किया है कि यह अस्पष्टीकृत पैसे कुछ इनफ्लैटेड शेयर ट्रांसफर और एक हेवन स्थित टैक्स कंपनी से लाभांश/डिविडेंड के माध्यम से आए गए थे। आयकर विभाग के अनुसार $ 150 मिलियन की इन्वेस्टमेंट/निवेश को छुपाने के लिए एक विचारपूर्वक प्रयास एनडीटीवी द्वारा किया गया है।

हाल ही में पीजी गुरु द्वारा प्रकाशित एक ख़बर में बताया गया कि कैसे 642,54,2200 रुपय की छिपि और अस्पष्टीकृत रकम ( 150 मिलियन यूएस $ ) एनबीसी यूनिवर्सल इंक और यूनिवर्सल स्टूडियो इंटरनेशनल बी.वी. से प्राप्त की गयी थी और यह पैसे एनडीटीवी नेटवर्क इंटरनेशनल होल्डिंग्स बी.वी. के माध्यम से जाहिर तौर पर आयकर भुगतान से बचने के लिए करवाए गए थे।

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एक पोस्ट .. मेमोरी से जो प्रणव रॉय और सागरिका की गंदी हकीकत बताती है
#राजदीप_सरदेसाई और उसकी पत्नी #सागरिका_घोष का काला सच ….”
टाइम्स ऑफ इंडिया के मालिक समीर जैन के ऊपर एक ताकतवर नौकरशाह प्रसार भारती के महानिदेशक ‘भास्कर घोष’ का बार बार दबाव आता था की मेरी बेटी सागरिका घोष और मेरे दामाद राजदीप सरदेसाई को टाइम्स ऑफ़ इंडिया का सम्पादक बनाओ ..बदले में सरकारी फायदा लो .. टाइम्स ऑफ इंडिया के मालिक समीर जैन ने मजबूरी में अपने सम्पादक को बुलाया और कहा- ‘‘पडगांवकर जी, अब आपकी छुट्टी की जाती है …. क्योकि मुझे भी अपना बिजनस चलाना है .. एक नौकरशाह की बेटी और उसके बेरोजगार पति जिससे उसने प्रेम विवाह किया है उसे नौकरी देनी है वरना सरकारी विज्ञापन मिलने बंद हो जायेंगे ….
भास्कर घोष का एक और सगा रिश्तेदार था प्रणव रॉय. … ये प्रणव रॉय अपने अंकल भास्कर घोष की मेहरबानी से दूरदर्शन पर हर रविवार “इंडिया दिस वीक” नामक कार्यक्रम करते थे …. उसकी पत्नी घोर वामपंथी नेता वृंदा करात की सगी बहन थी … उस समय दूरदर्शन के लिए खूब सारे नये नये उपकरण और साजोसमान खरीदे जा रहे थे ..उस समय विपक्ष के नाम पर सिर्फ वामपथी पार्टी ही थी बीजेपी के सिर्फ दो सांसद थे .. प्रणव रॉय ने अपने अंकल भाष्कर घोष के कहने पर न्यू देहली टेलीविजन कम्पनी लिमिटेड [एनडीटीवी] नामक कम्पनी बनाई और दूरदर्शन के लिए खरीदे जा रहे तमाम उपकरण धीरे धीरे एनडीटीवी के दफ्तर में लगने लगे … और एक दिन अचानक एनडीटीवी नामक चैनेल बन गया …
बाद में भास्कर घोष पर भ्रष्टाचार के तमाम आरोप लगे जिससे उन्हें पद छोड़ना पड़ा लेकिन जाते जाते उन्होंने अपनी बेटी सागरिका और उसके बेरोजगार प्रेमी से पति बने राजदीप सरदेसाई की जिन्दगी बना दी थी … फिर कुछ दिन दोनों मियां बीबी एनडीटीवी में रहे .. बाद में राघव बहल नामक एक कारोबारी ने “चैनेल-7” जो बाद में ‘आईबीएन-7’ बना उसे लांच किया और ये दोनों मियां बीबी आईबीएन-7 में आ गये … इन दोनों बंटी और बबली की जोड़ी ने अपने पारिवारिक रसूख का खूब फायदा उठाया …आईबीएन में सागरिका घोष की मर्जी के बिना पत्ता भी नही हिलता था क्योकि सागरिका घोष की सगी आंटी अरुंधती घोष हैं -अरुंधती घोष संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थाई प्रतिनिधि थी -CNN-IBN का “ग्लोबल बिजनेस नेटवर्क” (GBN) से व्यावसायिक समझौता है। -GBN टर्नर इंटरनेशनल और नेटवर्क-18 की एक कम्पनी है। भारत में सीएनएन के पीछे अरुंधती घोष की ही लाबिंग थी जिसका फायदा राजदीप और सागरिका ने खूब उठाया | सागरिका घोष की बड़ी आंटी रुमा पाल थी जिनके रसूख का फायदा भी इन दोनों बंटी और बबली की जोड़ी ने कांग्रेसी नेताओ के बीच पैठ जमाकर उठाया … रुमा पाल भले ही सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ जज थी लेकिन उनके फैसले के पीछे सागरिका घोष और राजदीप की दलाली होती थी …
बाद में वक्त का पहिया घुमा … देश में मोदीवाद उभरा .. आईबीएन को मुकेश अंबानी ने खरीद लिया .. और इन दोनों दलालों बंटी राजदीप और बबली सागरिका को लात मारकर भगा दिया … कुछ दिनों तक दोनों गायब रहे फिर बाद में अरुण पूरी के चैनेल आजतक पर नजर आने लगे.

संजय द्विवेदी

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एनडीटीवी

एनडीटीवी पर सीबीआई छापे के विरोध में उसके बकैत एंकर रवीश कुमार ने अपने फेसबुक पोस्ट के जरिए फिर से लफ्फाजी कर शहीद बनने की कोशिश की है! वह NDTV पर सवाल उठाने वाले सोशल मीडिया के लोगों को चंपू कह रहा है! जो मीडिया एनडीटीवी के मालिक प्रणव राय/ राधिका राय व चैनल के शेयर होल्डर्स पर छापे की खबर दिखा रही है, उसे ‘गोदी मीडिया’ कह रहा है! कार्रवाई करने वाली सरकार को आमने-सामने लाइव बहस की चुनौती दे रहा है! लाइव बहस कर तो रहे थे भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा, फिर इस बकैत के एनडीटीवी को बर्दाश्त क्यों नहीं हुआ? इसे सोशल मीडिया द्वारा सवाल पूछना मंजूर नहीं, क्योंकि 10 साल से NDTV के भ्रष्टाचार पर कोई सवाल नहीं पूछता था! इसे वो मीडिया हाउस पसंद नहीं जो इसके खिलाफ खबर दिखाते हैं, क्योंकि इससे पहले मीडिया के नाम पर पावर ब्रोकिंग का पूरा नेक्सस चल रहा था! इसके फेसबुक पोस्ट का Point-To-Point मैंने जवाब दिया है! यदि वास्तव में यह पत्रकार है तो लाइव कर ले और केवल लफ्फाज है तो ‘फ्री स्पीच’ के पेटिकोट घुस जाए! वामपंथी पत्रकारों और अवार्ड वापसी बुद्धिजीवी गिरोह का दोगलापन अब जनता बर्दाश्त नहीं करेगी!
1) रब्बिश-तो आप डराइये, धमकाइये, आयकर विभाग से लेकर सबको लगा दीजिये। ये लीजिये हम डर से थर थर काँप रहे हैं!
जवाबः क्या तुम्हें देश की अदालत पर भरोसा नहीं है जो डरने का नाटक कर रहे हो? अभी तक कार्रवाई नहीं हो रही थी तो कहते थे सरकार तुम्हारी है कार्रवाई क्यों नहीं करते? आज सीबीआई ने छापा मारा है तो कह रहे हो कि एजेंसियों को पीछे लगाकर डरा रहे हैं! अरे जब इस देश की सरकार से तुम अफलज, याकूब, कन्हैया, उमर खालिद जैसे भारत के टुकड़े करने वालों के लिए लड़ लेते हो तो इतनी भी कूबत नहीं है कि अपने लिए अदालत में लड़ सको? इसलिए यह दोगलापंथी छोड़ो और कानून का सम्मान करो।
सरकार गलत है या तुम्हारा टीवी यह अदालत तय करेगी, तुम्हारी बकैती नहीं! शहीद बनने की कोशिश मत करो। हम बनने नहीं देंगे! याद रखना, एनडीटीवी का मतलब इंडिया नहीं होता, पत्रकारिता नहीं होता! पिछले एक दशक में एनडीटीवी का मतलब हो गया है- पावर ब्रोकिंग, हवाला करोबार और मनी लाउंड्रिंग! इन आरोपों को मिटाने के लिए अदालत पर भरोसा करो! रात के दो बजे अदालत खुलवाने वाले लोग जब बकैती करें तो समझ में आ जाता है कि उनके मन में चोर छिपा है।
VIDEO : CBI conducts raid at NDTV co-founder Prannoy Roy’s residence in alleged bank default case
News
2) रब्बिश- सोशल मीडिया और चंपुओं को लगाकर बदनामी चालू कर दीजिये लेकिन इसी वक्त में जब सब ‘गोदी मीडिया’ बने हुए हैं , एक ऐसा भी है जो गोद में नहीं खेल रहा है। आपकी यही कामयाबी होगी कि लोग गीत गाया करेंगे- गोदी में खेलती हैं इंडिया की हजारों मीडिया।
जवाब- सोनिया, राहुल और चिदंबरम की गोद में जब 10 साल खेलते रहे तो याद नहीं आ रहा था- ‘गोदी में खेलती है इंडिया की हजारों मीडिया!’ कितने बड़े दोगले और मक्कार हो तुम! एनडीटीवी पर केवल वामपंथियों को बोलने की आजादी थी, आज सोशल मीडिया ने जब हर किसी को बोलने की आजादी दी है तो तुम इन्हें चंपू कह रहे हो! क्या तुम्हें केवल अपने लिए अभिव्यक्ति की आजादी चाहिए थी? देश की बांकी जनता क्या गूंगी है?
यूपीए सरकार की ‘गोदी मीडिया’ तो तुम थे! 4 जून 2011 को रामलीला मैदान में एक शांतिपूर्ण ढंग से हो रहे बाबा रामदेव के आंदोलन को यूपीए सरकार ने कुचल दिया था और तुम या तुम्हारा चैनल 4 जून की रात और पूरे 5 जून को इस पर एक खबर तक नहीं दिखाया। एक बाप की औलाद हो तो 4-5 जून 2011 का एक भी फुटेज दिखा दो जिसमें तुमने रामदेव के आंदोलन को कुचलने वाली यूपीए सरकार के खिलाफ एक भी खबर का प्रसारण किया हो। सोनिया गांधी और अहमद पटेल की गोदी तब तुम्हें कितनी प्यारी थी, इससे बड़ा दूसरा उदाहरण और क्या होगा?
यूपीए सरकार की ‘गोदी मीडिया’ तो तुम हो रब्बिश, जिसने 2जी में यूपीए सरकार के साथ मिलकर देश लूटा। पहले सीएजी और बाद में सुप्रीम कोर्ट तक ने 2जी में लूट को स्वीकार किया है। अरे तुम तो संवैधनिक संस्थाओं द्वारा सर्टिफाई कांग्रेस की ‘गोदी मीडिया’ हो! 2जी ही क्यों, कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाले में तो सीएजी ने एक तरह से लिखित रूप से एनडीटीवी को कांग्रेस की यूपीए सरकार का चंपू व ‘गोदी मीडिया’ करार दिया था। 2011 में संवैधनिक संस्था सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि करीब 37 करोड़ की खैरात तुम्हारे चैनल ने कांग्रेस की यूपीए सरकार से कॉमनवेल्थ की लूट में हासिल किया था। अपने दोगलेपन को कहां-कहां छुपाओगे? तुम्हारा और तुम्हारे चैनल का चरित्र ही कांग्रेस की गोदी में बैठना रहा है!
यूपीए सरकार के दौरान पी.चिदंबरम के 5000 करोड़ के हवाला मनी की ‘गोदी’ का आनंद तुम्हारे चैनल ने उठाया! विदेश में फर्जी कंपनियां बनाकर करोड़ों-अरबों के काले धन को सफेद करने का ‘गोदी आनंद’ तुम्हारे मालिक ने लिया! और आज दूसरों को ‘गोदी मीडिया’ कह रहे हो? अरे पहले गिरेबान में झांकना सीखो! शर्म आती है या नहीं? और हां, यह मत कहना कि यह सब आरोप हैं, अभी तक साबित कुछ नहीं हुआ! आरोपमुक्त तो कन्हैया, उमर भी नहीं हुआ था, अफजल को तो अदालत ने फांसी की सजा दे दी थी, लेकिन इनके लिए तो तुमने पूरे चैनल को ‘पंचायत’ बना रखा था!
कांग्रेस-कम्युनिस्टों का चंपू पत्रकार तो तुम हो! अपनी मालनिक राधिका राय की बहन वृंदाकरात के कहने पर बाबा रामदेव की फैक्टरी के खिलाफ खबर चलाई। दवा में मानव खोपड़ी की हडडी बताया था, लेकिन जब कांग्रेस की ही उत्तराखंड सरकार की जांच रिपोर्ट इस बारे में आई और पतंजलि को क्लिन चिट मिली तो तुमने खबर ही दबा दिया! इससे भी बड़ी चंपूगिरी की मिसाल होती है क्या?
चंपू तो तुम हो रब्बिश, जो अफजल गिरोह को अदालत से क्लिन चिट मिले बगैर हीरो बनाने पर तुले हुए थे। शायद अपने पाकिस्तानी आकाओं की ‘गोदी में खेलने’ को आतुर तुम और तुम्हारी बरखा बहन ने कन्हैया और उमर जैसों को हीरो बनाने के लिए जेएनयू में डेरा डाल दिया था! आतंकी हाफिज सईद ने तुम्हारी बहन बरखा दत्त की खुलेआम तारीफ भी की थी! पाकिस्तानी चंपू तो तुम और तुम्हारा पूरा चैनल रहा है! कारगिल और 26/11 में सैनिकों को मरवाने और पठानकोट में आतंकियों को सूचना पहुंचाने तक का आरोप तुम्हारे चैनल पर है! दोगले शर्म नहीं आती बकैती करते हुए?
तुमने अपने भाई पर लगे बलात्कार की खबर को दबाया और बहन पर लगे भ्रष्टाचार के खबर को भी! देखो न तुम्हारी सैलरी भी तो 2जी, चिदंबरम की 5000 करोड़ की हवाला मनी, कॉमनवेल्थ लूट, टैक्स चोरी, मनी लाउंडरिंग जैसे कमाई से ही आई होगी न? खून फिर कहां से साफ होगा! खून की जांच कराओ! कहीं गटर न हो गया हो!
3) रब्बिश- एन डी टी वी इतनी आसानी से नहीं बना है, ये वो भी जानते हैं।
जवाब- यह बात तुमने बिल्कुल सही कहा है। दूरदर्शन पर डाका डालकर एनडीटीवी बना है, यह वो भी और हम भी जानते हैं! प्रणव राय, दूरदर्शन के पूर्व महानिदेशक आर.बसु और डीडी के ही पांच अन्य अधिकारियों की लूट और भ्रष्टाचार से एनडीटीवी का साम्राज्य खड़ा हुआ है, यह इस देश का पूरा मीडिया बिरादरी जानता है!
20 जनवरी 1998 को सीबीआई ने आपराधिक षड़यंत्र रचने और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत तुम्हारे वर्तमान मालिक प्रणव राय सहित दूरदर्शन के कई अधिकारियों पर आपराधिक मामला दर्ज किया था। दूरदर्शन को लूट कर और उसका टेप चुरा कर एनडीटीवी बना है! इतना बेईमानी और डाका डालकर कोई न्यूज चैनल आज तक खड़ा नहीं हुआ! इसलिए तुम्हारी इस बात से तो हम सब सहमत हैं कि एनडीटीवी इतनी आसानी से नहीं बना है! इसे बनने में बड़े पैमाने पर लूट का खेल रचा गया और दूरदर्शन को बर्बाद किया गया! तुम्हारा ही मालिक प्रणव राय था न जो दूरदर्शन के लिए ‘वर्ल्ड दिस वीक’ बनाता था और यही बनाते-बनाते NDTV चैनल का मालिक हो गया! देश को मूर्ख समझते हो क्या जो एक प्रोडक्शन हाउस के इतने बड़े चैनल बनने के पीछे की वह कहानी को न समझें?
4) रब्बिश- मिटाने की इतनी ही खुशी हैं तो हुजूर किसी दिन कुर्सी पर आमने सामने हो जाइयेगा। हम होंगे, आप होंगे और कैमरा लाइव होगा।
जवाब- कुर्सी पर भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा आमने-सामने ही तो थे, लेकिन जब तुम्हारे एनडीटीवी की पोल खुलने लगी, गाय को बैल बता कर NDTV की कांग्रेस की चंपूगिरी का एजेंडा खुलने लगा तो तुम्हारी एंकर बहन निधि राजदान ने उन्हें अपमानित करके भगा दिया। निष्पक्ष बहस करने की हैसियत नहीं और बात करते हो आमने-सामने कैमरा लाइव की?
दुनिया ने देखा है तुम एनडीटीवी वालों को कि किस तरह से बहस में एजेंडा सेट करते हो, उसे एकतरफा रखते हो और जब विरोधी पक्ष कुछ भी बोलने लगता है तो उसे बोलने से पहले ही चुप करा देते हो! तुम चैनल का पर्दा काला कर, केवल लफ्फाजी में ही माहिर हो! ढंग का पत्रकार होते तो दशकों से एक ही चैनल में पड़े सड़ नहीं रहे होते? ढंग का सवाल-जवाब करना आता तो इतने लंबे पत्रकारिता के करियर में तुम्हारे हाथ भी कोई न कोई भ्रष्टाचार खोलने की रिपोर्ट होती? माफ करना, रिपोर्ट पत्रकारों के हाथ मे होती है, दलालों के हाथ में नहीं! इसीलिए तो न तो तुम्हारे हाथ आज तक एक भी भ्रष्टाचार की रिपोर्ट लगी और न ही पूरे एनडीटीवी के हाथ!
अफसोस, रवीश पांडे, तुम्हारे पास बकैती करने के अलावा कुछ नहीं है! मुंह बिचकाते, कुटिल मुस्कान लिए लफ्फाजी करते यह सब अपने मालिक प्रणय व राधिका राय के लिए लिखते रहो, नौकरी से नहीं भगाएगा! क्योंकि तुम भी जानते हो कि एनडीटीवी के अलावा तुम जैसे लफ्फाज को कोई और नौकरी नहीं देगा! इसलिए प्रणव राय को तेल लगाते रहना तुम्हारी मजबूरी है! आखिर पापी पेट का जो सवाल है! इतना दोगलपन लाते कहां से हो?

Sandeep Deo जी का लेख–

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NDTV

जब एम जे अकबर और मधु किश्वर पर प्रणय राय ने कानूनी हमला किया, तब कहां था एडिटर्स गिल्ड?

एडिटर्स गिल्ड मतलब मीडिया के माफियाओं का गिरोह! कल एक अंडरवर्ल्ड गिल्ड बनेगा और कहेगा शाहबुद्दीन के खिलाफ कार्रवाई बंद करो!

एडिटर्स गिल्ड ने आजतक पत्रकारिता और मीडिया के भले के लिए एक कदम नहीं उठाया है! यह गिरोहबाज लुटियन मीडिया का क्लब है, इससे ज्यादा कुछ नहीं! कालाबजारी, मनी लाउंडर प्रणय राय के पक्ष में खड़े इस गिरोह को हासिए पर ढकेलना शुरू कर दो सोशल मीडिया के धुरंधरो!

और हां, #NDTV को एक्सपोज करने वाले कौन लोग हैं, आप जानते हैं? जी नहीं यह मोदी सरकार नहीं है, बल्कि दृढ़ता से जुटे- आईआरएस संजय श्रीवास्तव, एस. गुरूमूर्ति, सुब्रहमणियम स्वामी, मधु किश्वर, एम.जे.अकबर और पी गुरू के श्री नायर जैसे लोग हैं।

संजय श्रीवास्तव को खत्म करने के लिए अभी एबीपी न्यूज में जो एंकर अभिसार शर्मा है, उसकी आईआरएस बीबी तक का प्रणय राय व उसकी कंपनी ने उपयोग किया। सेक्सुअल ह्रासमेंट जैसे घटिया मामले दर्ज कराए गये!

Madhu Purnima Kishwar पर राय ने 5 करोड़ की मानहानि का मुकदमा किया, जिसे वो अभी लड़ रही हैं। एम.जे अकबर, आलोक तोमर, भड़ासी यशवंत सिंह को कानूनी नोटिस भेजा गया। नायर को गुंडों से धमकी दिलाई गयी।

हर उस शख्स को दबाने की कोशिश हुई, जिसने प्रणय राय के काले साम्राज्य को चुनौती दी! माफिया जैसा आचरण करने वाला राय गिरोह क्या कहीं से पत्रकार लगता है? और तब यह गिरोहबाज एडिटर्स गिल्ड खामोश था, जबकि जिन पर प्रणय राय और एनडीटीवी हमला कर रहे थे उनमें अधिकांश किसी न किसी रूप में पत्रकारिता के पेशे से ही जुड़े थे! इस एडिटर्स गिल्ड के लुटियन एडिटरों को सरेआम नंगा करने का वक्त आ गया है!

प्रणय राय को नंगा करने वालों में से एक एस. गुरूमूर्ति ने कल ट्वीट कर कहा था- इस सरकार में कुछ लोग एनडीटीवी को बचाने में लगे थे, अन्यथा यह कार्रवाई बहुत पहले हो जाती। आज यह एडिटर्स गिल्ड फिर से सरकार में बैठे उन ताकतवर शख्सों से गोटी बिठा रहा है ताकि प्रणय जेम्स राय का काला साम्राज्य बना रहे, ढंका रहे। उठ खड़े होइए, इन सफेदपोश माफियाओं के खिलाफ!
#संदीपदेव #SandeepDeo
(साभार -संदीप देव )

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NDTV एक मीडिया चैनल नहीं बल्कि एक दानव था जो की हिन्दुओ और भारत के खिलाफ बुरी तरह से लगा हुआ था, वामपंथियों द्वारा संचालित NDTV आतंकवादियों और नक्सलियों से भी अधिक नुक्सान भारत का पहुंचा रहा था, और अभी भी पहुंचा रहा है चूँकि NDTV अभीतक बंद नहीं हुआ है।
NDTV के कुछ कारनामे हम आपको याद दिलाना चाहते है –
* NDTV ने हमेशा भारत की सेना की छवि को ख़राब करने का एजेंडा चलाया, हमेशा देशद्रोही पत्थरबाजों का समर्थन किया, मेजर गोगोई को विलन बताया वहीँ पत्थरबाजों के लीडर फारुख अहमद डार को मासूम कश्मीरी, एक शॉल बनाने वाला अच्छा कारीगर
* इस NDTV ने आतंकवादी को मासूम बताया, आतंकी के बाप को हेडमास्टर बताया जो कहता है की, “2 बेटे भेज दिए तीसरा भी भारत के खिलाफ जिहाद में भेजूंगा”
* इसी NDTV ने आतंकी ज़ाकिर मूसा को इंजीनियर बताया, आतंकियो की तारीफ और महिमामंडल तो कोई NDTV से सीखे
* इस NDTV ने पाकिस्तानी कलाकारों का समर्थन किया, पाकिस्तान की छवि भारत में चमकाने के एजेंडे चलाये, पाकिस्तान का समर्थन किया
* NDTV ने कई मौकों पर पाकिस्तानी सेना की मदद की, चाहे वो पठानकोट हमला हो चाहे 1999 कारगिल युद्ध, और कई अन्य मौकों पर NDTV की गतिविधियां संदिग्ध रही
* NDTV ने JNU के देशद्रोहियों का बचाव किया, उन्हें हीरो की तरह पेश किया, NDTV हमेशा से नक्सलियों का बचाव करती आयी है। NDTV वामपंथियों द्वारा चलाया जाता है, नक्सली भी वामपंथी होते है वो जंगल के वामपंथी तो NDTV शहर वाली बिना हथियारों की वामपंथी।
* इस NDTV ने हमेशा से हुर्रियत का समर्थन किया, अलगाववादियों का बचाव किया, उनकी गतिविधियों का बचाव किया , पत्थरबाजों के मानवाधिकार गिनाये।
* NDTV ने गौहत्या का भी समर्थन किया, गाय की बात करने वाली की छवि एक गुंडे के रूप में, आतंकी के रूप में पेश की, वहीँ NDTV ने अफ़ज़ल गुरु, याकूब मेमन जैसों के महिमामंडन का एक भी मौका नहीं छोड़ा।
NDTV के बारे में कहा जाता है कि इसे आप लगातार कुछ दिनों तक देख लें तो आपको लगेगा कि भारतीय देना अत्याचारी है और वही पत्थरबाज और अलगाववादी मासूम है।
ऐसे NDTV पर आज मोदी सरकार ने कार्यवाही की है मोदी सरकार सच में बधाई की पात्र है। देश के लोग NDTV पर कार्यवाही के बाद मोदी सरकार को धन्यवाद दे रहे है, मोदी सरकार ने हिम्मत की, पत्रकारों के रूप में बैठे दलालों पर कार्यवाही की ये एक मजबूत सरकार ही कर सकती है और मोदी सरकार ने कर दिखाया।
सभार Mukesh भाई के वाल से

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अरुंधती राय

क्या आपको पता है कि 2002 के गुजरात दंगे में नरोदा पाटिया में एक महिला का गर्भ फाड़ने और एहसान जाफरी की बेटी को नंगा कर जलाने का झूठ पूरी दुनिया में अरुंधती राय ने ही फैलाया था? पुस्तक, ‘निशाने पर नरेंद्र मोदी: सजिश की कहानी तथ्यों की जुबानी’ में अरुंधती के झूठ को तथ्यों के आधार पर नंगा किया था। आज यह कश्मीर, भारतीय सेना और भारत को लेकर झूठ फैला रही है।

दरअसल अरुंधती का बदबूदार व्यक्तित्व ही झूठ पर टिका है! वामपंथियों का सारा प्रोपोगंडा ही झूठ के सहारे रचा और फैेलाया जाता है। आप सच उजागर कर दीजिए, इनकी धरातल खिसक जाती है।

हमारे पास अंग्रेजी और हिंदी, दोनों भाषा में ऐसे राष्ट्रवादी लेखक और पत्रकार होने चाहिए जो इनके हर झूठ को बेनकाब कर सके, ये जड़ सहित उखड़ जाएंगे।

अर्णव गोस्वामी पर यह चिढ़े ही इसलिए हैं कि अंग्रेजी में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलाए इन वामंथियों के झूठ को वह उसी तेजी से उनकी ही भाषा में नंगा कर देता है। हिंदी में सुधीर चौधरी, रोहित सरदाना जैसे पत्रकार साहसिक प्रयास कर रहे हैं।

अब एकेडमिक रूप से इन्हें तबाह करने के लिए बड़े पैमाने पर पुस्तक लेखन की जरूरत है। पुस्तक एक विश्वसनीय और स्थायी आधार होता है और वह 100-1000 साल बाद भी सबसे बड़ा संदर्भ साबित होता है। सल्तनत और मुगल काल में हम बच ही इसलिए गये कि बड़े पैमाने पर भक्ति आंदोलन और भक्ति साहित्य का निर्माण हुआ। अंग्रेजी काल में हम सांस्कृतिक रूप से मुकाबला नहीं कर सके, क्योंकि अंग्रेजों व मार्क्सवादियों ने अपने हिसाब के लेखक पैदा कर उनसे अपने अनुरूप साहित्य का निर्माण कराया।

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मीडिया

सैनिको पर पत्थर –           अहिंसक आंदोलन 
लव जिहाद पर कार्यवाही-  गुंडागर्दी
पत्थरबाज-                       भटके हुए नौजवान
भारत तेरे टुकडे –              अभिव्यक्ति आजादी
भंसाली को थप्पड़ –           हिन्दू आतंकवाद 
गौमांस भक्षण    –              भोजन का अधिकार 
ईद पर बकरा काटना –      धार्मिक स्वतंत्रता 
तीन तलाक हलाला   –      धार्मिक अंदरूनी मामला 
दीवाली पटाखे         –        पर्यावरण प्रदूषण 
न्यू इयर पटाखे         –       जश्न का माहौल
मटकी फोड में बच्चे –        असंवैधानिक
खतना मे बच्चे    –             धार्मिक अंदरूनी 
मामला 
प्लेटफार्म पर नमाज –        धार्मिक अधिकार 
सड़क पर पंडाल –             सड़क जाम का केस
मस्जिद लाउडस्पीकर   –   धार्मिक स्वतंत्रता 
मंदिर मे लाउडस्पीकर –     ध्वनि प्रदूषण 
करवाचौथ         –               ढकोसला 
वैलेंटाइनडे         –              प्यार का पर्व 
चार शादियां        –             धार्मिक स्वतंत्रता
हिन्दू दो शादी       –            केस दर्ज 
गणेश विसर्जन, होली  –     जल प्रदूषण 
ताजिया विसर्जन   –            संविधान अधिकार 
आजम,ओवैसी,केजरी-      राष्ट्र पुरुष
मोदी,योगी,स्वामी-             हिन्दू आतंकवादी
भगत सिंह सुखदेव राजगुरु-आतंकवादी
अफजल,कसाब,बुरहान-     शहीद
15 मिनिट पुलिस हटालो-     सहिष्णुता
भाजपा चुनाव जीती-             असहिष्णुता
कश्मीर,असम केरल दंगे-      देश शांत
अख़लाक़,गुजरात दंगे-          अवार्ड वापसी,असहिष्णु देश
शिव लिंग पर दूध चढ़ाना-      दूध की बर्बादी
बकरे काटना,चादर चढ़ाना-  धार्मिक मान्यता
राम मंदिर-                             गुंडाराज
बाबरी मस्जिद-                      देश में अमन चैन
ताज महल-                            प्रेम की निशानी

 

राम सेतु-                                राम काल्पनिक है राम थे ही नही
आतंकियों की फांसी पर-        रात में कोर्ट खुलवाते है आंदोलन होते है,दया याचिका दायर की जाती है,भारत विरोधी नारे लगाये जाते है ।
किसी कुलभूषण की फांसी पर- सब मौन
भारत में हिन्दुओ पर अत्याचार- कोई आवाज नही उठाता..सब मौन हो जाते है सांप सूंघ जाता है
हिन्दुओ द्वारा प्रतिक्रिया पर- भगवा आतंकवादी देश में असहिष्णुता का माहौल,अवार्ड वापसी जैसे ढोंग
देवी देवताओ का अपमान  –    अभिव्यक्ति की आजादी
मोहम्मद पर बयान  –          रासुका धारा

तोडफोड 

          *ये है भारत की सच्चाई*
क्या हो रहा है इस देश में ?

कहाँ है समान अधिकार ? सोचना सभी को होगा क्या ये है ??.. *वाह साहेब वाह*

मजा आ गया बात का 
😡😡😡😡😡😡

*भाण्ड साले* वाह मीडिया वाह