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ery Good Information:- India completely changed its foreign policy and security strategy very quickly in a response to China.

Common People must understand How Narendra Modi made India secure which was earlier wide open to get threatened.

👉 India built military base in Seychelles 🇸🇨

👉 India built military base in Mauritius 🇲🇺

👉 India got access to Iran Port for Trade & Access.

👉 India got access to Oman Port for Military Access.

👉 India got access to build Trincomalee Port in Srilanka.

👉 India is in agreement to build Payra Port in Bangladesh & Bangladesh cancels Agreement with China to develop its Port. India have access to monitor in Bangladesh too.

👉 India develop Andaman & Nicobar Infrastructure at great speed making it epicentre of Security monitoring.

👉 India building Diamond Quadrilateral joining Bangladesh, Nepal, Bhutan with India by Road.

👉 India touching Thailand via Myanmar from Assam via Road.

👉 India also got access in Vietnam monitoring.

All of this happen Post 2014 and If you know the Geography of all places then you will understand How Narendra Modi cracked China’s String Of Pearls by Navy Chakravyuh.

On the other hand India is building longest ever Coastal Roads from Gujarat to Kerala passing through Maharashtra, Goa, Karnataka & then extending it from Kerala, Tamil Nadu till the coast of Odisha – Read Sagarmala Project & Bharat Mala Project. All of this Project are getting build at very rapid speed.

Narendra Modi always worked with #IndiaFirst Approach which was expected from previous Government but unfortunately they were sleeping when China was circling us.

This Government has completely ignored Pakistan & treated it just as same Neighbouring state, destroyed Pakistan’s Foreign Policy & Relations with all Gulf Countries.

This Government shows Why India can be a Global Player and can’t restrict itself to engaging with Pakistan alone. Previous governments narrowed our foreign policy and vision just to Pakistan.

Today India is dynamically strategizing its Foreign Policy & repositioning its priorities from a narrowly focused ‘local’ player to that of a Global Player with a long range perspective.

This is one of the biggest reasons for my Vote for PM again

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बात सितम्बर 2016 की है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाई प्रहलाद मोदी की बेटी निकुंजबेन का को निधन हो गया था। वो 41 साल की थीं l दरअसल उ निकुंजबेन को कई सालों से हार्ट की बीमारी थी और जब मोदी जी को उनके मौत की ख़बर मिली तो उनकी आखें भर आई l लेकिन इन सब के बाद भी पीएम ने अपने काम के प्रति पूरी निष्ठा दिखाई l  

पीएम के भाई प्रहलाद मोदी के मुताबिक नरेन्द्र मोदी उस समय चीन में हो रहे जी -20 समिट में भाग लेने गये हुए थे और समिट खत्म होते ही भारत लौटने के बाद निकुंज की सेहत के बारे में पूछा था l इतना ही नही उन्होंने अंतिम संस्कार के बाद भी फोन करके जानकारी ली थी। इनके परिवार का आत्म-सम्मान ही इनका आत्म-गौरव है l निकुंजबेन की आर्थिक स्थिति सही नहीं थी, उनके पति जगदीश कुमार एक निजी कंपनी में काम करते हैं और निकुंज इनकम बढ़ाने के लिए सिलाई और बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती थी l वो सब अपने परिवार के साथ किराए के मकान में रहते थे लेकिन ये इनका आत्म गौरव समझिए या बड़प्पन, देश के प्रधानमंत्री की भतीजी होने के बावजूद भी कभी भी किसी के सामने अपने चाचा का नाम नही लिया, और न ही कभी किसी से किसी प्रकार की सहायता मांगी । इतना सब कुछ होने के बावजूद भी इस महान शख्सियत ने कभी भी छुट्टी नही ली l नरेंद्र मोदी के सबसे बड़े भाई सोमाभाई गुजरात के स्वास्थ्य विभाग में कर्मचारी थे, और अमृत जी उनके दूसरे भाई हैं। प्रहलाद जी राशन एसोसिएशन डीलर है, और पंकज भाई मोदी सबसे छोटे हैं। मोदी के पिता दामोदर दास मोदी चाय की दुकान चलाते थे।

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“मोदी” को “दलाई लामा”  समझने की भूल न करे चीन |


“मोदी” को “दलाई लामा”  समझने की भूल न करे चीन |
सभी जानते हैं “दलाई लामा” ही तिब्बत के राष्ट्राध्यक्ष और आध्यात्मिक गुरू हैं। लेकिन  वर्ष 1949 में चीन द्वारा अपने साम्राज्य विस्तार के लिय शांतिप्रय आध्यात्मिक बौद्ध राष्ट्र तिब्बत पर चीन ने हमला कर दिया और तिब्बत की पूर्ण राजनीतिक सत्ता अपने हाथ में ले ली । 1954 में तिब्बत के निष्कासित राष्ट्राध्यक्ष “दलाई लामा” माओ जेडांग, डेंग जियोपिंग जैसे कई बड़े चीनी नेताओं से बातचीत करने के लिए बीजिंग भी गए । लेकिन उनकी बात किसी ने नहीं सुनी |
आखिरकार वर्ष 1959 में “ल्हासा” में चीनी सेनाओं द्वारा “तिब्बती राष्ट्रीय आंदोलन” को बेरहमी से कुचले जाने के बाद “दलाई लामा” अपना देश छोड़ कर भागने को मजबूर हो गये और विश्व के किसी भी राष्ट्र ने न तो उन्हें संरक्षण दिया और न ही उनकी कोई मदद की |
“दलाई लामा” ने तिब्बत पर चीन के हमले के बाद “संयुक्त राष्ट्र” से भी तिब्बत मुद्दे को सुलझाने की अपील की है। जिस पर “संयुक्त राष्ट्र संघ” द्वारा इस संबंध में 1959, 1961 और 1965 में तीन प्रस्ताव पारित किए | किन्तु इन्हें भी चीन ने नहीं माना |
तब भारत ने उत्तर भारत के हिमाचल प्रदेश प्रान्त के एक शहर  “धर्मशाला” में उन्हें रहने का स्थाई स्थान दिया | जहाँ आज भी वह रह रहे हैं और यही से “केंद्रीय तिब्बती प्रशासन का मुख्यालय” बना का अपने अस्तित्व की पहचान बनाये हुये हैं | चीन इस वजह से भी भारत से चिड़ता है |
“दलाई लामा” की इस पूरी कूटनीतिक असफलता का मूल कारण था उनका “आध्यात्मिक राष्ट्र अध्यक्ष” होना | अति आध्यात्मिक होने के कारण “दलाई लामा” ने कभी भी अपने देश की रक्षा के लिए विश्व स्तर पर किसी भी राष्ट्र के साथ कूटनीतिक संबंध स्थापित नहीं किये और न ही कभी किसी राष्ट्र को इतना विश्वास में लिया कि विपत्ति काल में वह राष्ट्र उनकी रक्षा के लिए खड़ा हो सके |
किंतु भारत की स्थिति से सर्वथा भिन्न है | भारत आध्यात्मिक होने के साथ-साथ कुशल राजनीतिज्ञ व कूटनीतिक राष्ट्र है | चीन के चारों ओर जो भी राष्ट्र हैं, वह सभी आज भारत के मित्र हैं | अगर भारत के ऊपर चीन अनावश्यक रुप से युद्ध थोपता है, तो भारत तो अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए लड़ेगा ही साथ में भारत के मित्र राष्ट्र भी चीन पर राजनीतिक व कूटनीतिक दबाव बनाएंगे | जिससे चीन विश्व में अलग-थलग पड़ जाएगा और बहुत संभव है कि विश्व की अंतर्राष्ट्रीय शक्तियां ही चीन के कई टुकड़ों कर डालें | क्योंकि चीन अब एक महाशक्ति के रूप में विश्व के लिए अपनी अति महत्वाकांक्षा के कारण बहुत बड़ा खतरा बनता जा रहा है | जिससे सभी विकसित राष्ट्र चिन्तित हैं |
“जब भी कोई राष्ट्र एक मर्यादा से अधिक अपने साम्राज्य के विस्तार की कल्पना करता है तो वह राष्ट्र अपने शासक सहित नष्ट हो जाता है |” यह प्रकृति का नियम है | इसीलिए “जियो और जीने दो” का सिद्धांत ही मानवता के लिये श्रेष्ठ है |

 

अतः “मोदी” की तुलना “दलाई लामा से” करना चीन की बहुत बड़ी भूल होगी | भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक कुशल राजनीतिज्ञ ही नहीं “अंतरराष्ट्रीय कूटनीति” में भी पारंगत हैं | यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन काल में चीन भारत से लड़ने का निर्णय लेता है तो निश्चित रुप से भारत को एक बड़ी क्षति का सामना करना पड़ेगा | लेकिन बहुत संभावना है कि चीन के भी कई टुकड़े हो जाएं | चीन का अधिकाशं हिस्सा टूटकर रूस में चला जाए |

 

“संयुक्त राष्ट्र संघ” नये समीकरण में अपने पुराने आदेशों की अनुपूर्ति कराने के लिए “मित्र राष्ट्र सेना” के सहयोग से “दलाई लामा” को पुनः तिब्बत में स्थापित करने का निर्णय ले सकता है | जापान भी तकनीकी में चीन से कम नहीं है और चीन के साथ उसके राजनीतिक संबंध बहुत अच्छे नहीं हैं | ऐसी स्थिति में जापान चीन को एक बड़ी आर्थिक और तकनीकी टक्कर दे सकता है | अफगानिस्तान भी भारत का मित्र है | उसे भी सीमा क्षेत्र में चीन से खतरा है |  इसराइल भी इस युद्ध में कूटनीतिक सम्बन्धों के कारण भारत के साथ खड़ा होगा | ऐसी स्थिति में चीन को “मोदी” को “दलाई लामा” समझने की भूल नहीं करनी चाहिए वरना इसके परिणाम  चीन के लिए भी बहुत भयंकर होंगे |

 

 

योगेश कुमार मिश्र

9451252162

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इजराइल


*प्रसंगवश – प्रधानमंत्री जी की इजराइल यात्रा*

– प्रशांत पोल
मैं तीन बार इजराइल गया हूँ. तीनों बार अलग अलग रास्तों से. पहली बार लंदन से गया था. दूसरी बार पेरिस से. लेकिन तीसरी बार मुझे जाने का अवसर मिला, पडौसी राष्ट्र जॉर्डन से. राजधानी अम्मान से, रॉयल जॉर्डन एयरलाइन्स के छोटेसे एयरक्राफ्ट से तेल अवीव की दूरी मात्र चालीस मिनट की हैं. मुझे खिड़की की सीट मिली और हवाई जहाज छोटा होने से, तुलना में काफी नीचे से उड़ रहा था. आसमान साफ़ था. मैं नीचे देख रहा था. मटमैले, कत्थे और भूरे रंग का अथाह फैला रेगिस्तान दिख रहा था. पायलट ने घोषणा की, कि ‘थोड़ी ही देर में हम नीचे उतरने लगेंगे’. और अचानक नीचे का दृश्य बदलने लगा. मटमैले, कत्थे और भूरे रंग का स्थान हरे रंग ने लिया. अपनी अनेक छटाओं को समेटा हरा रंग..!
रेगिस्तान तो वही था. मिटटी भी वही थी. *लेकिन जॉर्डन की सीमा का इजराइल को स्पर्श होते ही मिटटी ने रंग बदलना प्रारंभ किया. यह कमाल इजरायल का हैं. उनके मेहनत का हैं. उनके जज्बे का हैं.* रेगिस्तान में खेती करनेवाला इजराइल आज दुनिया को उन्नत कृषि तकनिकी निर्यात कर रहा हैं. रोज टनों से फूल और सब्जियां यूरोप को भेज रहा हैं. आज सारी दुनिया जिसे अपना रही हैं, वह ‘ड्रिप इरीगेशन सिस्टम’, इजराइल की ही देन हैं.
*इजराइल प्रतीक हैं स्वाभिमान का, आत्मसम्मान का और आत्मविश्वास का..!*
मात्र अस्सी लाख जनसँख्या का यह देश. तीन से चार घंटे में देश के एक कोने से दुसरे कोने की यात्रा संपन्न होती हैं. मात्र दो प्रतिशत पानी के भण्डार वाला देश. प्राकृतिक संसाधन नहीं के बराबर. ईश्वर ने भी थोड़ा अन्याय ही किया हैं. आजु बाजू के अरब देशों में तेल निकला हैं, लेकिन इजराइल में वह भी नहीं..!
इजराइल यह राजनितीक जीवंतता और राजनीतिक समझ की पराकाष्ठा का देश हैं. इस छोटे से देश में कुल १२ दल हैं. आजतक कोई भी दल अपने बलबूते पर सरकार नहीं बना पाया हैं. *पर एक बात हैं – देश की सुरक्षा, देश का सम्मान, देश का स्वाभिमान और देश हित… इन बातों पर पूर्ण एका हैं.* इन मुद्दों पर कोई भी दल न समझौता करता हैं, और न ही सरकार गिराने की धमकी देता हैं. इजराइल का अपना ‘नॅशनल अजेंडा’, जिसका सम्मान सभी दल करते हैं.
१४ मई, १९४८ को जब इजराइल बना, तब दुनिया के सभी देशों से यहूदी (ज्यू) वहां आये थे. अपने भारत से भी ‘बेने इजराइल’ समुदाय के हजारों लोग वहां स्थलांतरित हुए थे. अनेक देशों से आने वाले लोगों की बोली भाषाएं भी अलग अलग थी. अब प्रश्न उठा की देश की भाषा क्या होना चाहिए..? उनकी अपनी हिब्रू भाषा तो पिछले दो हजार वर्षों से मृतवत पडी थी. बहुत कम लोग हिब्रू जानते थे. इस भाषा में साहित्य बहुत कम था. नया तो था ही नहीं. अतः किसी ने सुझाव दिया की अंग्रेजी को देश की संपर्क भाषा बनाई जाए. पर स्वाभिमानी ज्यू इसे कैसे बर्दाश्त करते..? उन्होंने कहा, ‘हमारी अपनी हिब्रू भाषा ही इस देश के बोलचाल की राष्ट्रीय भाषा बनेगी.’
निर्णय तो लिया. लेकिन व्यवहारिक कठिनाइयां सामने थी. बहुत कम लोग हिब्रू जानते थे. इसलिए इजराइल सरकार ने मात्र दो महीने में हिब्रू सिखाने का पाठ्यक्रम बनाया. और फिर शुरू हुआ, दुनिया का एक बड़ा भाषाई अभियान..! पाँच वर्ष का.
इस अभियान के अंतर्गत पूरे इजराइल में जो भी व्यक्ति हिब्रू जानती था, वह दिन में ११ बजे से १ बजे तक अपने निकट के शाला में जाकर हिब्रू पढ़ाता था. अब इससे बच्चे तो पाँच वर्षों में हिब्रू सीख जायेंगे. बड़ों का क्या..? 
इस का उत्तर भी था. शाला में पढने वाले बच्चे प्रतिदिन शाम ७ से ८ बजे तक अपने माता-पिता और आस पड़ोस के बुजुर्गों को हिब्रू पढ़ाते थे. अब बच्चों ने पढ़ाने में गलती की तो..? जो सहज स्वाभाविक भी था. इसका उत्तर भी उनके पास था. अगस्त १९४८ से मई १९५३ तक प्रतिदिन हिब्रू का मानक (स्टैण्डर्ड) पाठ, इजराइल के रेडियो से प्रसारित होता था. अर्थात जहां बच्चे गलती करेंगे, वहां पर बुजुर्ग रेडियो के माध्यम से ठीक से समझ सकेंगे.
*और मात्र पाँच वर्षों में, सन १९५३ में, इस अभियान के बंद होने के समय, सारा इजराइल हिब्रू के मामले में शत प्रतिशत साक्षर हो चुका था..!*
आज हिब्रू में अनेक शोध प्रबंध लिखे जा चुके हैं. इतने छोटे से राष्ट्र में इंजीनियरिंग और मेडिकल से लेकर सारी उच्च शिक्षा हिब्रू में होती हैं. इजराइल को समझने के लिए बाहर के छात्र हिब्रू पढने लगे हैं..!
*ये हैं इजराइल..! जीवटता, जिजीविषा और स्वाभिमान का जिवंत प्रतीक..!* ऐसे राष्ट्र में पहली बार हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी राजनयीक दौरे पर जा रहे हैं. 
हम सब के लिए यह निश्चित ही ऐतिहासिक घटना हैं..!

– प्रशांत पोल #Modi-in_Israel, #Israel

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कृपया तसल्ली से पूरा मेसेज पढ़ें…
उसने टोपी नहीं पहनी मुस्लिमों को नाराज किया….
उसने 1% टैक्स लगा कर स्वर्णकारों को नाराज किया….
उसने होटल वालों के सर्विस चार्ज पर हथौड़ा चला के ग्राहकों के हित के लिए होटलवालों से पंगा लिया…
उसने 500 और 1000 के नोट बन्द कर के अपने ही परम्परागत वोट बैंक को नाराज किया….
कैश लेस को बढ़ावा दे कर वो टैक्स चोरों के रास्तों का रोड़ा बन गया है….
रेडा जैसा क़ानून कर के बिल्डरों को नाराज़ किया…
बेनामी संपत्ति का क़ानून पारित कर के ज़मीन के काला बाजारियों को बेनक़ाब कर रहा है…
स्पेक्ट्रम, कोयला आदि का भ्रष्टाचार दूर कर, देश को लाखों करोड़ों का फ़ायदा देने के लिए बड़े उद्योगपतियों से पंगा लिया….
गैस सब्सिडी, मनरेगा आदि का पैसा सीधे बैंक खाते में जमा करने के कारण सभी बिचौलियों की दुकानें बंद कर दी….
युरिया को नीम कोटिंग करने से केमिकल फ़ैक्टरियों का गोरख धंदा चौपट कर दिया…
लगभग हर क्षेत्र में भ्रष्टाचार कम करने के नये नये तरीक़ों का आग़ाज़ कर रहा है….
सभी सरकारी कामों में टेक्नॉलजी के कारण गति लाने के प्रयास के कारण दलालों का ‘स्पीड-मनी’ बंद कर रहा है…
और न जाने कितनों को वो रोज़ नाराज़ कर रहा है….

हो सकता है आप भी उस के किसी क़दम से नाराज़ चल रहे हो, आप का भी कुछ नुक़सान हुआ हो….
वो सही में पागल बन गया है क्या? वो चाहता तो आराम से किसी का दिल दुखाए बिना राज कर सकता है…
वह हर रोज़ नये नये क़दम उठा कर देश के हर क्षेत्र की बुराइयाँ दूर करने की रात दिन मेहनत कर रहा है…
क्योंकि…
उसे कुर्सी से प्रेम नहीं है । उसे सिर्फ अपने देश और सवा सौ करोड देशवासियों से प्रेम है…वो अपने देश को दुनियाँ में सबसे समृद्ध बनाना चाहता है…हर बुराई को ख़त्म करना चाहता है…वो भी इसी जनरेशन में…
अब भले ही आप उसे वोट न दें….

हो सकता है उस की कुर्सी 2019 में चली जाएँ लेकिन उसे उस की चिंता नहीं है….
आज जो उसका या उस के समर्थकों का मजाक उडा रहा है वो वास्तव में खुद का और खुद की भावी पीढी का मजाक उडा रहा है…। 
देश बेचकर अपना जेब भरनेवाले चंद दोगले नेताओं, टीवी चैनलों और ब्युरोक्रेट्स की बातों में आकर उसका साथ छोडा तो खुद को मजाक बनने से तुम्हें कोई नहीं रोक सकता। 
सरकार की कुछ कमियों को, कुछ अब तक न हुए कामों को बढ़ा चढ़ा कर बोल कर ये लोग आप को गुमराह कर रहे है…
इस स्थिति में सभी खूनी भेडिये उसके खिलाफ लामबंद हो रहे हैं…
लेकिन देश के लिए उसे हमारे साथ की जरुरत है…

इस से भी ज्यादा हमें उस की ज़रूरत है। आप ने उसे हटा दिया तो उस का कुछ नहीं बिगड़नेवाला…वो तो हिमालय चला जाएगा…
लेकिन हमारी अगली नस्लें हमें सैकड़ों सालों तक कोसेगी….
जागो भाइयों, 

हमें अपने प्रधानमंत्री का साथ हर हाल में देना ही होगा..हमें उसकी आवाज बननी है…अपने और अपने बच्चों के भविष्य के लिए….
बाकि आपको जो अच्छा लगे कीजिए लेकिन एकबार यह ज़रूर सोचिए कि आखिर वह यह सब काम किसके लिए कर रहा है…हमारे लिए या अपने लिए???

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70 साल हो गए कोई भारतीय PM इजराइल नहीं आया, मेरे मित्र मोदी आएंगे : बेंजामिन नेतन्याहू                                                  अभी जो आप नीचे पढ़ने वाले है, हो सकता है आपको जानकर बहुत गुस्सा आये आप यकीन न कर पाएं पर ये चीजें सच है अगर एक सवाल किया जाये कि भारत का इस दुनिया में सबसे करीबी मित्र देश कौन सा है तो फटाक से आपके मुँह से इजराइल का नाम निकल आएगा !  1999 में कारगिल युद्ध हो रहा था, दुश्मन पहाड़ी के ऊपर था भारत के पास लेजर गाइडेड मिसाइल नहीं थे, रूस ने भी नहीं दिया और न ही अमरीका ने , इजराइल ने हमे लेजर गाइडेड मिसाइल दिया, अमेरिका के ऐतराज़ के बाबजूद दिया, और हमने उसका इस्तेमाल किया इजराइल भारत का सबसे करीबी मित्र रहा है, पर आपको हम बताएं कि 1947 से आजतक भारत का कोई भी प्रधानमंत्री इजराइल कभी गया ही नहीं तो आपको शायद यकीन न हो, अरे आजतक कोई प्रधानमंत्री इजराइल गया ही नहीं देखिये इजराइल प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के ऑफिस के आधिकारिक ट्वीट्स — बैंजामिन नेतन्याहू ने कहा, “मेरे मित्र मोदी अगले हफ्ते इजराइल आ रहे हैं, ये एक ऐतहासिक यात्रा है, 70 साल हो गए पर आजतक कोई भी भारतीय प्रधानमंत्री इजराइल नहीं आया, मोदी आ रहे हैं”, मोदी अभी अमरीका की यात्रा पर है, वहां से नीदरलैंड और इजराइल की यात्रा है आप देख रहे है इजराइल के प्रधानमंत्री ने क्या बोला है, उन्होंने हमारे देश के सेकुलरिज्म की पोल खोल दी है इजराइल भारत का सबसे करीबी मित्र है, युद्ध के समय भारत का साथ देने वाला मित्र और आजतक कोई भारतीय प्रधानमंत्री इजराइल ही नहीं गया क्यों नहीं गया उसका कारण देखिये कोई भी प्रधानमंत्री  इजराइल नहीं गया क्यूंकि इस से भारत में मुस्लिम नाराज हो सकते है क्यूंकि मुस्लिमो की आस्था फिलिस्तीन में है, इजराइल से नफरत करते है, और हमारे वोट बैंक वाले प्रधानमंत्रियों ने इसी कारण कभी इजराइल की यात्रा की ही नहीं हमारे देश के नेताओं ने भारत का लाभ नहीं बल्कि वोटबैंक देखा, देशहित से अधिक वरीयता तुष्टिकरण को दी नरेंद्र मोदी ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने तुष्टिकरण को नहीं बल्कि भारत को वरीयता दी, इजराइल से भारत की करीबी का साफ़ मतलब है भारत का फायदा क्यूं कि इजराइल दुनिया में युद्ध तकनीक में नंबर 1 है हम एक बात आज पक्के दावे से कह सकते है नरेंद्र मोदी भारत के आज तक के सबसे सर्वश्रेष्ठ प्रधानमंत्री हैं, और ये चीज अब स्पष्ट हो चुकी है क्यूंकि पहले के प्रधानमंत्री ( लाल बहादुर शास्त्री को छोड़कर क्योंकि उनको इतना समय नहीं मिला था ) वोटबैंक के सामने देशहित की अवहेलना करते रहे, पर मोदी ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने तुष्टिकरण नहीं बल्कि देशहित को वरीयता दी !!
गोविंद दिक्सित

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अम्बानी ,अदानी, सिंघवी, टाटा, बिरला, माल्या, ललित मोदी, 

*ये मोदी के कार्यकाल में अरबपति बने थे क्या ???*
क्या 85 अरबपतियों को जो 90 हजार करोड़ का लोन दिया गया था 

*क्या वो मोदी के समय दिया गया …??*
जिस भी अफसर के घर छापा डाला जाए… तो करोड़ रुपये तो उसके गद्दे के नीचे ही मिल जाते है …

*क्या ये मोदी के काल में कमाए गये ….????*
*किस हद की मूर्खता पूर्ण देश भर में बातें है .*
मोदी के काल में तो माल्या के 8000 करोड़ के लोन के जवाब में ED ने उसकी 9120 करोड़ की संम्पत्ति को कब्जे में ले लिया है ..
*बस यही गलती हुई है कि मोदी अकेला भ्रष्ट लोगो के खिलाफ लड़ रहा है…*
और 
*हमारे देश में नमक और नमकहराम दोनों पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं ….*
व्यक्तिगत रूप से आप *बीजेपी के विरोधी* हो सकते हैं।

बीजेपी की नीतियों के विरोधी हो सकते हैं ये एक सामान्य प्रकिया है.. 

और इसमें कुछ गलत भी नहीं है…
           परंतु आप आलोचक की हद को पार करके *घृणित-निंदक* बनकर *PM की आलोचना* कैसे कर सकते हैं…?😳
               आप उस व्यक्ति की आलोचना कर रहे हैं जो लगभग 15 सालों से CM के बाद, अब PM रहते हुए  भी अपनी सैलेरी राष्ट्र को दान करता आ रहा है PM हाउस में अपना खर्चा स्वं उठाता आ रहा है..।
             *Pm की निंदा-रस* में डूबते समय क्या आपको खयाल आया है कि क्या आपने कभी 1 महीने की सैलेरी राष्ट्र को दान किया है…?🤔😳🤔
    ₹-240 की LPG-Subsidy तो आप छोड़ नहीं पाते, बाकी.. क्या आप में हिम्मत है 1 साल की सैलेरी *राष्ट्र को दान कर दें…?*
         तो फिर आप उस व्यक्ति की निंदा कैसे कर सकते हैं जो 15 सालों  से ये सब करता आ रहा है….?🤔😳😰😡
            3 बार गुजरात का CM रहने के बावजूद किसके पास कोई *बड़ी संपत्ति नहीं* है, परिवार को भी जिसने VIP सुविधाओं से महरूम कर रखा है ।
       जिस PM के विदेशी दौरों को  आप सिर्फ घूमने फिरने  का नाम देते हैं जबकि असली उदेश्य *व्यापारिक समझौते और आपसी सम्बन्ध को सुधारना* होता है।
        एक 66 साल का व्यक्ति 6 दिन में 5 देशों की यात्रा करता 40 महत्वपूर्ण मीटिंग में भाग लेता है। *देश का पैसा बचाने के लिए* ऐसी प्लानिंग करता है जिससे होटल में कम से कम रुका जाए, और, फ्लाइट में नींद पूरी की जाये….

उसके दौरे को आप सिर्फ भ्रमण का नाम देते हैं..

🤔😳🤔
                  अगली बार PM की निंदा करने से पहले *अपने गिरेबान में झांककर देखें* और-

अपने आप से तुलना करें कि जिसकी आप निंदा कर रहे हैं, क्या उसके *पैरों की धूल के बराबर* आप हैं या नहीं..?🤔
अपने देश के प्रधानमंत्री की गरिमा को मज़बूत बनायें  *निवेदन है, यह मैसेज अपने सभी व्हाट्सएप्प कांटेक्ट ओर फेसबुक पर जरूर शेयर करे..* और *उन सभी को कहे की आप भी अपने व्हाट्सएप्प कांटेक्ट ओर फेसबुक दोस्तों में शेयर करे*, हम सब *बलिदान* ना सही पर *देश के लिए इस छोटा सा काम तो कर ही सकते हैं ना:*
*देश को नहीं, पहले खुद को बदलें।*