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किरण राव


सुनने में आ रहा है कि..
आमिर खान अपने पांव की पुरानी “जूती” किरण राव को उतारकर! !…”नई जूती” फातिमा शेख को पहनने जा रहा है…!!!…
इससे पहले भी! !..रीमा नाम की पुरानी ” जूती” को हटाकर!..”नई जूती” किरण राव को पहना था!!…

सैफ अली ने भी अमृता सिंह को उताकर करीना कपूर को पहन रखा है !!..कुछ सालों बाद वो भी नई जूती पसन्द आने पर करीना को उतार फेकेगा !!!….

दोष सिर्फ इन जैसे लोगों का ही नहीं !..बल्कि हमारे समाज में ही ऐसी बेगेरत औरतें है!!..जिन्हें इज्जतदार बहू बनने की बजाय “पांव की जूती” बनना पसन्द है!!!

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प्राचीन भारतीय ग्रंथो मे चुम्बक ओर दुरबीन का वर्णन चुम्बक का उल्लेख:-


प्राचीन भारतीय ग्रंथो मे चुम्बक
ओर दुरबीन का वर्णन
चुम्बक का उल्लेख:-


चुम्बक का उल्लेख

मणिगमनं सूच्यभिसर्पण मित्यदृष्ट कारणं कम्||
वैशेषिक दर्शन ५/१/१५||

अर्थात् तृणो का मणि की ओर चलना ओर सुई
का चुम्बक की ओर चलना,अदृश्य कर्षण
शक्ति के कारण है।

दुरदर्शी यंत्र अर्थात् दुरबीन का उल्लेख:-

गुजरात के अन्हिलपुर नगर के जेैन ग्रंथालय मे
संस्कृत भाषा मे रचित ‘शिल्प संहिता नामक ‘
प्राचीन ग्रंथ है जिसमे कई यंत्रो को बनाने
की विधि है-

१ तेल ,पारा,ओर जल द्वारा तापमापी बनाने
का उल्लेख है।

२ – दुरबीन का उल्लेख

” मनोर्वाक्यं समाधाय तेन शिल्पीन्द्र शाश्वत:|
यन्त्र चकार सहसा दृष्टर्थ्य दूरदर्शनम्||
पललाग्नौ दग्धमृदा कृत्वा काचमनश्वरं|
शोधयित्वा तु शिल्पीन्द्रो नैमत्य क्रियते च||
चकार बलवत्स्वच्छं पातनं सूपविष्कृतम्|
वंशपर्वसमाकारं धातुदण्ड कल्पत्तम्|
तत्पश्पादग्रमध्येषु मुकुरं च विवेश सः|

अर्थात् ” मिट्टी भून के उससे प्रथम कांच
बनती है| एक पोली नलिका के दोनो नुक्कड पर वह
कांच लगाई जाती है| दूर के नक्षत्रादि देखने मे
इसका उपयोग किया जाता है।

||●|| वंदेमातृसंस्कृतम् ||●||

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पहली ट्रेन पाकिस्तान से (15.8.1947)


देखो कैसे पाकिस्तानी मूस्लिमो ने हिंदूऔ को काटा था

जिन लोगों को इस्लाम की गंदी और डरावनी हकीकत पता नहीं है उन्हें बटवारे के समय पाकिस्तान से भारत आए भीष्म साहनी के द्वारा आंखों देखा मंजर जो उन्होंने अपने तमाम उपन्यास और किताबों में कहानियों में लिखा है वह पढ़ना चाहिए…गजवा-ए-हिन्द कोई कोरी कल्पना नही है

भीष्म साहनी और उनके भाई बलराज साहनी किसी तरह सब कुछ अपना गवा कर भारत आ गए भीष्म साहनी उस जमाने में आल इंडिया रेडियो के महानिदेशक थे और उस समय ऑल इंडिया रेडियो का हेड क्वार्टर लाहौर में था बाद में वह दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हो गए और उनके भाई बलराज साहनी मुंबई में अभिनेता बन गए

आप भी पढ़िए उनकी कहानी अमृतसर आ गया है के कुछ हिस्से

पहली ट्रेन पाकिस्तान से (15.8.1947)

अमृतसर का लाल इंटो वाला रेलवे स्टेशन अच्छा खासा शरणार्थियों कैम्प बना हुआ था!पंजाब के पाकिस्तानी हिस्से से भागकर आये हुए हज़ारों हिन्दुओ-सिखों को यहाँ से दूसरे ठिकानों पर भेजा जाता था ! वे धर्मशालाओं में, टिकट की खिड़की के पास, प्लेट फार्मों पर भीड़ लगाये अपने खोये हुए मित्रों और रिश्तेदारों को हर आने वाली गाड़ी मै खोजते थे…15 अगस्त 1947 को तीसरे पहर के बाद स्टेशन मास्टर छैनी सिंह अपनी नीली टोपी और हाथ में सधी हुई लाल झंडी का सारा रौब दिखाते हुए पागलों की तरह रोती-बिलखती भीड़ को चीरकर आगे बढे…थोड़ी ही देर में 10 डाउन,पंजाब मेल के पहुँचने पर जो द्रश्य सामने आने वाला था,उसके लिये वे पूरी तरह तैयार थे….मर्द और औरतें थर्ड क्लास के धूल से भरे पीले रंग के डिब्बों की और झपट पडेंगे और बौखलाए हुए उस भीड़ में किसी ऐसे बच्चे को खोजेंगे, जिसे भागने की जल्दी में पीछे छोड़ आये थे ! चिल्ला चिल्ला कर लोगों के नाम पुकारेंगे और व्यथा और उन्माद से विहल होकर भीड़ में एक दूसरे को ढकेलकर-रौंदकर आगे बढ़ जाने का प्रयास करेंगे ! आँखो में आँसू भरे हुए एक डिब्बे से दूसरे डिब्बे तक भाग भाग कर अपने किसी खोये हुए रिश्तेदार का नाम पुकारेंगे! अपने गाँव के किसी आदमी को खोजेंगे कि शायद कोई समाचार लाया हो ! आवश्यक सामग्री के ढेर पर बैठा कोई माँ बाप से बिछडा हुआ कोई बच्चा रो रह होगा, इस भगदड़ के दौरान पैदा होने वाले किसी बच्चे को उसकी माँ इस भीड़-भाड़ के बीच अपना ढूध पिलाने की कोशिश कर रही होगी….
स्टेशन मास्टर ने प्लेट फार्म एक सिरे पर खड़े होकर लाल झंडी दिखा ट्रेन रुकवाई ….जैसे ही वह फौलादी दैत्याकार गाड़ी रुकी, छैनी सिंह ने एक विचित्र द्रश्य देखा..चार हथियार बंद सिपाही, उदास चेहरे वाले इंजन ड्राइवर के पास अपनी बंदूकें सम्भाले खड़े थे !! जब भाप की सीटी और ब्रेको के रगड़ने की कर्कश आवाज बंद हुई तो स्टेशन मास्टर को लगा की कोई बहुत बड़ी गड़बड़ है…प्लेट फार्म पर खचाखच भरी भीड़ को मानो साँप सुंघ गया हो..उनकी आँखो के सामने जो द्रश्य था उसे देखकर वह सन्नाटे में आ गये थे !

स्टेशन मास्टर छेनी सिंह आठ डिब्बों की लाहौर से आई उस गाड़ी को आँखे फाड़े घूर रहे थे! हर डिब्बे की सारी खिड़कियां खुली हुई थी, लेकिन उनमें से किसी के पास कोई चेहरा झाँकता हुआ दिखाई नहीँ दे रहा था, एक भी दरवाजा नहीँ खुला.. एक भी आदमी नीचे नहीँ उतरा,उस गाड़ी में इंसान नहीँ #भूत आये थे..स्टेशन मास्टर ने आगे बढ़कर एक झटके के साथ पहले डिब्बे के द्वार खोला और अंदर गये..एक सेकिंड में उनकी समझ में आ गया कि उस रात न.10 डाउन पंजाब मेल से एक भी शरणार्थी क्यों नही उतरा था..वह भूतों की नहीँ बल्कि #लाशों की गाड़ी थी..उनके सामने डिब्बे के फर्श पर इंसानी कटे-फटे जिस्मों का ढेर लगा हुआ था..किसी का गला कटा हुआ था.किसी की खोपडी चकनाचूर थी ! किसी की आते बाहर निकल आई थी…डिब्बों के आने जाने वाले रास्ते मे कटे हुए हाथ-टांगे और धड़ इधर उधर बिखरे पड़े थे..इंसानों के उस भयानक ढेर के बीच से छैनी सिंह को अचानक किसी की घुटी.घुटी आवाज सुनाई दी ! यह सोचकर की उनमें से शायद कोई जिन्दा बच गया हो उन्होने जोर से आवाज़ लगाई..”अमृतसर आ गया है यहाँ सब हिंदू और सिख है.पुलिस मौजूद है, डरो नहीँ”..उनके ये शब्द सुनकर कुछ मुरदे हिलने डुलने लगे..इसके बाद छैनी सिंह ने जो द्रश्य देखा वह उनके दिमाग पर एक भयानक स्वप्न की तरह हमेशा के लिये अंकित हो गया …एक स्त्री ने अपने पास पड़ा हुआ अपने पति का ‘कटा सर’ उठाया और उसे अपने सीने से दबोच कर चीखें मारकर रोने लगी…उन्होंने बच्चों को अपनी मरी हुई माओ के सीने से चिपट्कर रोते बिलखते देखा..कोई मर्द लाशों के ढेर में से किसी बच्चे की लाश निकालकर उसे फटी फटी आँखों से देख रहा था..जब प्लेट फार्म पर जमा भीड़ को आभास हुआ कि हुआ क्या है तो उन्माद की लहर दौड़ गयी…स्टेशन मास्टर का सारा शरीर सुन्न पड़ गया था वह लाशों की कतारो के बीच गुजर रहा था…हर डिब्बे में यही द्रश्य था अंतिम डिब्बे तक पहुँचते पहुँचते उसे मतली होने लगी और जब वह ट्रेन से उतरा तो उसका सर चकरा रहा था उनकी नाक में मौत की बदबू बसी हुई थी और वह सोच रहे थे की रब ने यह सब कुछ होने कैसे दिया ? मुस्लिम कौम इतनी निर्दयी हो सकती है कोई सोच भी नहीँ सकता था….उन्होने पीछे मुड़कर एक बार फ़िर ट्रेन पर नज़र डाली…हत्यारों ने अपना परिचय देने के लिये अंतिम डिब्बे पर मोटे मोटे सफेद अक्षरों से लिखा था…..”यह पटेल और नेहरू को हमारी ओर से आज़ादी का नज़राना है ” !

तो यह है वह ‘गज़वा ए हिन्द’ का सच जो कांग्रेसियों व सेकुलर गिरोह ने हिन्दुओ के सामने कभी आने नही दिया..

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#कांग्रेस_मुक्त_भारत के सैकड़ों असंख्य कारणों में से कुछ : –


#कांग्रेस_मुक्त_भारत के सैकड़ों असंख्य कारणों में से कुछ : –
1- मैं रहन सहन से ईसाई संस्कृति से मुसलमान और गलती से हिंदू हूँ—: जवाहरलाल नेहरू

2-राम एक काल्पनिक पात्र हैं और राम भारत में कभी पैदा ही नहीं हुए: सुप्रीम कोर्ट के हलफनामे में कांग्रेस

3-रामसेतु से किसी की आस्था वास्था नहीं जुड़ी है,अतः रामसेतु को तोड़ देना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के हलफनामे में कांग्रेस

4-देश के संसाधनों पर अल्पसंख्यकों का पहला अधिकार है..पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह

5-हिंदू आतंकवाद सैफरॉन टेररिज्म भगवा आतंकवाद शब्द के जनक पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे कांग्रेस के

6-कांग्रेस के हर कार्यालय में गाय काटी जाएगी और गौ मांस परोसा जाएगा। अखिलेश प्रताप सिंह (पूर्व कांग्रेसी विधायक और प्रवक्ता।)

7-हिंदुओं को गुलाम बनाने एवं अपने ही देश में दोयम दर्जे का नागरिक बनाने वाला कम्युनल वायलेंस बिल सोनिया गांधी की अध्यक्षता में बनाया गया था।

8-लोग मंदिर में लड़की छेड़ने जाते हैं। राहुल गांधी

9-26/11 के मुंबई हमले, RSS और हिंदुओं ने कराए थे दिग्विजय सिंह पूर्व कांग्रेसी मुख्यमंत्री

10-निर्दोष हिंदू साध्वी को जेल में डालकर निर्वस्त्र करके मुंह में गौ मांस खिलाने वाली जबरिया अश्लील फिल्में दिखाने वाली पार्टी कांग्रेस है ।

11- 7 नवम्बर 1966 में गोपाल अष्टमी के दिन गौ हत्या के विरोध में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे संतो को पर गोली चलवाकर हजारो हिंदुओं की हत्या करवाने वाली पार्टी कांग्रेस। इस मामले को दबा दिया गया.

ऐसे सैकड़ो उदाहरण है, कुछ की बानगी सिर्फ इसलिए दी गई है क्योंकि ये कुछ कार्यकर्ताओं की गलती नहीं,यह वह कुत्सित हिंदू विरोधी मानसिकता है जो कांग्रेस के DNA में इसकी स्थापना के समय से ही भरी गई है,और कांग्रेस के पिंडदान तक ये कांग्रेसी हिन्दू मान्यताओं का मजाक बनाना,हिंदुओं की बेइज्जती करना जारी रखेंगे.. और इनका पिंडदान हम भारतीय ही करेंगे !

इतना सब कुछ होने के बाद भी यदि कोई हिन्दू कांग्रेस को वोट देता है तो मैं उसे यही सलाह दूंगा की वो अपना DNA टेस्ट करवाए !

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किरण राव


ये खबर मशहूर अखबार इंडियन एक्सप्रेस में छपा है …शायद आमिर खान ने सना फातिमा शेख से निकाह कर लिया है ..वैसे इस्लाम इसकी इजाजत देता है आमिर खान चाहे तो पांच निकाह और कर सकते हैं

मुझे याद आता है 1987 में मैंने दूरदर्शन पर आमिर खान और उनकी पहली पत्नी रीना दत्ता का इंटरव्यू देखा था आमिर खान ने अपनी पत्नी की आंखों में देखते हुए कहा था आज मैं जो कुछ भी हूं अपनी पत्नी रीना दत्ता की वजह से हूं उन्होंने और भी बहुत सी बातें बताई थी कि कैसे वह 8 घंटे तक खिड़की पर खड़े खड़े रहते थे सिर्फ इसलिए कि उन्हें एक झलक रीना दत्ता की मिल जाए अंत में उनके सामने यह परेशानी आई कि रीना दत्ता के मां-बाप एक मुस्लिम से शादी नहीं करना चाहते थे रीना दत्ता के पिताजी ने मुझसे (आमिर खान) से कहा कि तुम मुस्लिम हो तुम्हारे घर में कभी भी महिलाओं को तलाक दे दिया जाता है फिर मैंने यानी आमिर खान ने रीना दत्ता के पिताजी से कहा कि मैं कुरान-ए-पाक की कसम खाकर कहता हूं कि मैं कभी भी रीना दत्ता का साथ नहीं छोडूंगा और फिर रीना दत्ता के पिता ने हमारी शादी के लिए हामी भर ली

मित्रों आमिर खान और रीना दत्ता का इंटरव्यू का टेप आज भी दूरदर्शनन के आर्काइव में है

फिर वक्त के साथ रीना दत्ता का हुस्न ढलने लगा तो आमिर खान को अपनी सह निर्देशक किरण राव से प्यार हो गया फिर 6 सालों तक किरण राव को भोगने के बाद जब किरन राव का भी हुस्न ढलने लगा तो आमिर खान को अपनी फिल्म की अभिनेत्री सना फातिमा शेख से प्यार हो गया
यही इस्लाम का सच्चा दर्शन है
साभार जीतेंद्र प्रताप सिंह जी..
….
वैसे इन सेकुलर हिन्दू कुतियो के साथ ऐसा ही होना चाहिए ।

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हेमू


jai hind,…..
#deshdrohimusalman
#मित्रो हेमू नाम आपने सुना होगा! अंतिम हिन्दू राजा , जिन्होंने अपना सिर कटा लिया, पर इस्लाम कबूल नही किया । लगातार 22 युद्ध मे मुगलो को हराकर विक्रमादित्य की उपाधि धारण करने वाले हेमू उर्फ हेमचन्द्र विक्रमादित्य की समाधी पर ” अबु -बिन- कासिम ” बदरे इमाम की दरगाह बना दी गयी है । 

यह समाधी पानीपत के सोदापुर गांव में है । और इसके लिए अभी हम लड़ाई भी लड़ रहे है । आप भी इस समाधी के बारे में जानिए, ओर आवाज उठाइये इसके लिए वे हिंदू दोषी है,जो हर बृहस्पतिवार​ को इस दरगाह पर मत्था फोड़ते हैं।

और इतना समझ लो

जिस दिन पर इस पर से मुसलमानों का कब्जा हटवाने की कोशिश करेंगे।

तो 22 %मुसलमान विरोध करेंगे।

जबकि 98 %हिंदू ही इसका विरोध करेंगे…!!