Posted in ज्योतिष - Astrology

शमी :

शमी के पौधे के बारे में तमाम भ्रांतियां मौजूद हैं और

लोग आम तौर पर इस पौधे को लगाने से डरते-बचते हैं।

ज्योतिष में इसका संबंध शनि से माना जाता है और शनि

की कृपा पाने के लिए इस पौधे को लगाकर

इसकी पूजा-उपसना की जाती

है।

पूजन-लाभ : इसका पौधा घर के मुख्य द्वार के बाईं ओर लगाना

शुभ है। शमी वृक्ष के नीचे नियमित रूप

से सरसों के तेल का दीपक जलाएं, इससे शनि का

प्रकोप और पीड़ा कम होगी और आपका

स्वास्थ्य बेहतर बना रहेगा।

विजयादशमी के दिन शमी की

विशेष पूजा-आराधना करने से व्यक्ति को कभी

भी धन-धान्य का अभाव नहीं होता।

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क्या आप चिन्ताओं से मुक्ति पाना चाहते हैं…

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अगर आप चाहते हैं कि आपका पूरा दिन अच्छा गुजरे आपके

सारे काम बनते चले जाएं तो चिन्ताओं को स्वयं से दूर रखने

का आप तुरन्त कारगर उपाय कीजिए।

1 प्रतिदिन नहाने के पश्चात एक सुंदर बर्तन में साफ जल

भरकर उसमें सफेद फूल डालकर घर के मुख्य दरवाज़े पर रखें

ताकि जब आप काम पर जाएं तो घर से निकलते समय

आपकी नज़र उस पर पड़े देखिए कुछ

ही दिनों में आपके सारे बिगड़े काम कैसे बनने लगते

हैं।

2 घर का कोई नल टपक रहा हो अथवा छत पर

रखी पानी की टंकी लीक

कर रही हो तो उसे ठीक करवाएं

क्योंकि इससे घर में धन नहीं रुकता और आप

जो कमाते हैं उससे ज्यादा खर्च हो जाता है।

3 मानसिक परेशानी जरूरत से ज्यादा बढ़

गयी हो तो आज से ही नित्य हनुमान

चालीसा या राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करना शुरू करें।

4 अपनी पहनी हुई चप्पल

या जूता शनिवार के दिन किसी गरीब

व्यक्ति को दान करें।

5 अगर

आपकी बीमारी ठीक

नहीं हो रही है, आप

हमेशा रोगग्रस्त रहते हैं तो कुछ दिनों के लिए

अपना सिरहाना पूर्व की तरफ़ कर लें।

6 अगर व्यवसाय में लगातार नुकसान हो रहा है तो अपने वजन

के बराबर कच्चा कोयला नदी में प्रवाहित करें।

7 अगर आपका मन विचलित रहता है तो पारद शिवलिंग पर

प्रत्येक सोमवार को कच्चा दूध, सफेद फूल चढ़ाएं एवं चंदन

का लेपन शिवलिंग पर करें।

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कर्ज से मुक्ति :

* बरगद के एक पत्ते पर आटे का दीया जलाकर उसे

मंगलवार को किसी भी हनुमान मंदिर या

पीपल के वृक्ष के नीचे रख आएं। इस

उपाय से कर्ज से छुटकारा मिलेगा।

* एक नारियल पर चमेली का तेल मिले सिन्दूर से

स्वस्तिक का चिह्न बनाएं। कुछ भोग (लड्डू अथवा गुड़-चना) के

साथ हनुमानजी के मंदिर में जाकर उनके चरणों में

अर्पित करके ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ करें। तत्काल लाभ

प्राप्त होगा।

* श्मशान के कुएं का जल लाकर किसी

पीपल के वृक्ष पर चढ़ाना चाहिए। यह कार्य

नियमित रूप से 7 शनिवार को किया जाना चाहिए।

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बिल्व वृक्ष के विषय में कुछ जानकारी :-

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1. बिल्व वृक्ष के आसपास सांप नहीं आते।
2. अगर किसी की शव यात्रा बिल्व वृक्ष की छाया से होकर गुजरे तो उसका मोक्ष हो जाता है।
3. वायुमंडल में व्याप्त अशुध्दियों को सोखने की क्षमता सबसे ज्यादा बिल्व वृक्ष में होती है।
4. चार पांच छः या सात पत्तो वाले बिल्व पत्रक पाने वाला परम भाग्यशाली और शिव को अर्पण करने से अनंत गुना फल मिलता है।
5. बेल वृक्ष को काटने से वंश का नाश होता है। और बेल वृक्ष लगाने से वंश की वृद्धि होती है।
6. सुबह शाम बेल वृक्ष के दर्शन मात्र से पापो का नाश होता है।
7. बेल वृक्ष को सींचने से पितर तृप्त होते है।
8. बेल वृक्ष और सफ़ेद आक् को जोड़े से लगाने पर अटूट लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
9. बेल पत्र और ताम्र धातु के एक विशेष प्रयोग से ऋषि मुनि स्वर्ण धातु का उत्पादन करते थे।
10. जीवन में सिर्फ एक बार और वो भी यदि भूल से भी शिवलिंग पर बेल पत्र चढ़ा दिया हो तो भी उसके सारे पाप मुक्त हो जाते है।
11. बेल वृक्ष का रोपण, पोषण और संवर्धन करने से महादेव से साक्षात्कार करने का अवश्य लाभ मिलता है।
कृपया बिल्व पत्र का पेड़ जरूर लगाये । बिल्व पत्र के लिए पेड़ को क्षति न पहुचाएं !
   – डाक्टर वैद्य पंडित विनय कुमार उपाध्याय 
   🌹🌹 ।। जय श्री महाकाल जी ।।🌹🌹

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आश्चर्य इस बात का नहीं है कि कांग्रेसी कौमी दोगलों ने गाय को केरल में सरेआम सरेशाम काटा

आश्चर्य इस बात का भी नहीं है कि एनडीटीवी जैसे दोगले मीडिया संस्थानों ने तुरंत ही गाय की जगह भैंस ( Cow slaughter को Buffalo slaughter) के कत्ल से बदल दिया।

हैरानी इस बात की भी नहीं है कि इस मुल्क का नपुंसक हिंदू चुप रहा। यदि हिंदुओं का ऐसा हाल नहीं रहता, तो यह मुल्क शायद ही 1200 वर्षों तक गुलाम रहता।

….मालदा से लेकर टोंक तक, कैराणा से लेकर दिल्ली तक, हिंदुओं का यही हाल है। इनको दीवार से सटाए जाने पर भी बुद्धि नहीं खुलती है, लेकिन जात पांत के रंग में ज़रूर दुनिया की हरेक चीज रंगी नज़र आती है।

….केरल से पहले महाराष्ट्र में जैन मंदिरों के सामने भी कुछ दोगलों ने मांस पकाया और खाया था, उसके पहले बंगाल में भी। आश्चर्य इस बात का भी नहीं है कि मोदी सरकार ने कोई नया कानून नहीं बनाया है। भारतीय संविधान (जो भीमराव अंबेडकर ने सहेजा था) में उल्लिखित कानून को ही बस अमली जामा पहनाया है।

—-मोहम्मडन पेंटर हुसैन ने सरस्वती की नंगी तस्वीर बनायी, कल परसों कुछ हरामज़ादों ने हनुमानजी की तस्वीर पर जूते चप्पल चलाए। इस देश का कानून सो रहा है।

अगर अब भी समझ नहीं आ रहा है, तो जान लीजिए। हम युद्धक्षेत्र में हैं और चौतरफा घिरे हुए। दुश्मन हमारे बीच भी हैं और चारों ओर भी। कुल मिलाकर यह एक युद्ध है

….नरेंद्र दामोदर दास मोदी हों या योगी आदित्यनाथ, इनको घेरने के लिए हिंजड़ों की फौज इकट्ठा हो गयी है। यह वक्त बिना किसी प्रश्न के, बिना किसी आशंका के इन दोनों और सभी राष्ट्रवादियों के अथक और निरंतर समर्थन का है। सहारनपुर को आग में झुलसाना हो या रामपुर में 10 ‘निरीह’ मोहम्मडन लड़कों द्वारा सरेशाम छेड़खानी, ये सब एक लोकतांत्रिक सरकार से विश्वास हिलाने और किसी भी तरह एक राष्ट्रवादी सरकार को उखाड़ फेंकने की है।

आश्चर्य यह है कि हम जैसे समर्थक भी मोदी सरकार को तीन साल के आधार पर जांचने आंकने लगते हैं।

…यह समय आकलन का नहीं, समर्थन का है, तर्क का नहीं, समर्पण का है, कथनी का नहीं, करनी का है और युद्ध की तैयारी का है।

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बुआ बनाम बेटी


बुआ बनाम बेटी
कल फोन आया था वो एक बजे ट्रेन से आ रही है. किसी को स्टेशन भेजने की बात चल ऱही थी आज रिया ससुराल से दुसरी बार दामाद जी के साथ आ रही हैं घर के माहौल में एक उत्साह सा महसूस हो रहा हैं

इसी बीच …..एक तेज आवाज आती हैं
“इतना सब देने की क्या जरूरत है ??

बेकार फिजूलखर्ची क्यों करना ??

और हाँ आ भी रही है तो कहो कि टैक्सी करके आ जाये स्टेशन से।”

(बहन के आने की बात सुनकर अश्विन भुनभुनाया )

माँ तो एक दम से सकते में आ गई

की आखिर यह हो क्या रहा हैं ????

माँ बोली …..
“जब घर में दो-दो गाड़ियाँ हैं तो टैक्सी करके क्यों आएगी मेरी बेटी ??
और दामाद जी का कोई मान सम्मान है कि नहीं ???
पिता जी ने कहा की ससुराल में उसे कुछ सुनना न पड़े।

मैं खुद चला जाऊंगा उसे लेने, तुम्हे तकलीफ है तो तुम रहने दो।”
पिता गुस्से से एक सांस में यह सब बोल गए
“और ये इतना सारा सामान का खर्चा क्यों? शादी में दे दिया न। अब और पैसा फूँकने से क्या मतलब।”

अश्विन ने बहन बहनोई के लिए आये कीमती उपहारों की ओर देखकर ताना कसा ….
पिता जी बोले बकवास बंद कर

“तुमसे तो नहीं माँग रहे हैं। मेरा पैसा है, मैं अपनी बेटी को चाहे जो दूँ। तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है क्या जो ऐसी बातें कर रहे हो।” पिता फिर से  गुस्से में बोले।
अश्विन दबी आवाज में फिर बोला
“चाहे जब चली आती है मुँह उठाये।”
पिता अब अपने गुस्से पर काबू नही कर पाये और चिल्ला कर बोले

“क्यों न आएगी ????

हाँ इस घर की बेटी है वो।

मेरी बेटी हैं वो ये उसका भी घर है। जब चाहे जितने दिन के लिए चाहे वह रह सकती हैं। बराबरी का हक है उसका।

आखिर  तुम्हे हो क्या गया है जो ऐसा अनाप-शनाप बके जा रहे हो।”
अब बारी अश्विन की थी …
“मुझे कुछ नही हुआ है पिताजी। आज मैं बस वही बोल रहा हूँ जो आप हमेशा #बुआ के लिए बोलते थे।

आज अपनी बेटी के लिए आज आपको बड़ा दर्द हो रहा है लेकिन कभी #दादाजी के दर्द के बारे में सोचा हैं ?????

कभी बुआ की ससुराल और #फूफाजी के मान-सम्मान की बात नहीं सोची ???

माँ और पिता जी एक दम से सन्नाटे में चले गए …

अश्विन लगातार बोल जा रहा हैं
“दादाजी ने कभी आपसे एक ढेला नहीं मांगा वो खुद आपसे ज्यादा सक्षम थे फिर भी आपको बुआ का आना, दादाजी का उन्हें कुछ देना नहीं सुहाया….क्यों ???
और हाँ बात अगर बराबरी और हक की ही हैं तो आपकी बेटी से भी पहले बुआ का हक है इस घर पर।”
अश्विन की आवाज आंसूओ की भर्रा सी गई थी अफसोस भरे स्वर में बोला।
पिता की गर्दन शर्म से नीची हो गयी

पर अश्विन नही रूका
“आपके खुदगर्ज स्वभाव के कारण बुआ ने यहाँ आना ही छोड़ दिया।

दादाजी इसी गम में घुलकर मर गए …
और हाँ में खुद जा रहा हूँ स्टेशन रिया को लेने पर मुझे आज भी खुशी है कि मैं कम से कम आपके जैसा खुदगर्ज भाई तो नहीं हूँ।”
कहते हुए अश्विन कार की चाबी उठाकर स्टेशन जाने के लिए निकल गया।

पिता आसूँ पौंछते हुए अपनी बहन सरिता को फोन लगाने लगे।
दीवार पर लगी दादाजी की तसवीर जैसे मुस्कुरा रही थी।

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