Posted in छोटी कहानिया - १००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

आज हिंदी बोलने का शौक हुआ


आज हिंदी बोलने का शौक हुआ,
घर से निकला और एक ऑटो वाले से पूछा,
“त्री चक्रीय चालक पूरे सुभाष नगर के परिभ्रमण में कितनी मुद्रायें व्यय होंगी ?”
ऑटो वाले ने कहा 😇,  “अबे हिंदी में बोल रे..”
मैंने कहा, “श्रीमान,  मै हिंदी में ही वार्तालाप कर रहा हूँ।”
ऑटो वाले ने कहा, “मोदी जी पागल करके ही मानेंगे । चलो बैठो, कहाँ चलोगे?”
मैंने कहा, “परिसदन चलो”
ऑटो वाला फिर चकराया !😇
“अब ये परिसदन क्या है?”
बगल वाले श्रीमान ने कहा, “अरे सर्किट हाउस जाएगा”
ऑटो वाले ने सर खुजाया और बोला, “बैठिये प्रभु”
रास्ते में मैंने पूछा, “इस नगर में कितने छवि गृह हैं ??”
ऑटो वाले ने कहा, “छवि गृह मतलब ??”
मैंने कहा, “चलचित्र मंदिर”
उसने कहा, “यहाँ बहुत मंदिर हैं … राम मंदिर, हनुमान मंदिर, जगन्नाथ मंदिर, शिव मंदिर”
मैंने कहा, “भाई मैं तो चलचित्र मंदिर की

बात कर रहा हूँ जिसमें नायक तथा नायिका प्रेमालाप करते हैं.”
ऑटो वाला फिर चकराया, “ये चलचित्र मंदिर क्या होता है ??”
यही सोचते सोचते उसने सामने वाली गाडी में टक्कर मार दी।
ऑटो का अगला चक्का टेढ़ा हो गया और हवा निकल गई।
मैंने कहा, “त्री चक्रीय चालक तुम्हारा अग्र चक्र तो वक्र हो गया”
ऑटो वाले ने मुझे घूर कर देखा और कहा, “उतर जल्दी उतर !”
आगे पंक्चरवाले की दुकान थी। हम ने दुकान वाले से कहा….
“हे त्रिचक्र वाहिनी सुधारक महोदय, कृपया अपने वायु ठूंसक यंत्र से मेरे त्रिचक्र वाहिनी के द्वितीय चक्र में वायु ठूंस दीजिये। धन्यवाद।”
दूकानदार बोला कमीने सुबह से बोनी नहीं हुई और तू श्लोक सुना रहा है।
आनंद ही आनंद

😬😬😬😬😬
मजा आये तो हँसने और दुसरे व्यक्तियों मे अग्रसारित करने  में कंजुसी बिल्कुल मत करियेगा।

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*तीन कांग्रेसियों की कहानी*

1. मुफ्ती मोहम्मद सैयद केंद्र में गृह मंत्री ||

December 8 1989 मुफ्ती की बेटी रूबिया सैयद का अफहरण|| *नतीजा 13 आतंकियों की रिहाई ||*

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2 . सेैफुदीन सौज .. पार्टी के वरिष्ट नेता ..

August 1991 को सौजी की बेटी नाहीदा सौज का अपरहण || 

*नतिजा जेल में बंद 7 आतंकियों की रिहाई ||*

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3 गुलाम नबी आजाद …तब कांग्रेस के सीएम उम्मीदवार .. अब राज्यसभा में विपक्ष के नेता ||

September 22,1991 आजाद के साले तासादुक्क का अपहरण ||

*नतीजा 21 आतंकियों की रिहाई ||*
आओ आज इन सबके महान कार्यों को याद करें ||

और हां पोस्ट शेयर करने में हिचकिचाहट हो तो धर्म परिवर्तन करने में ही भलाई है ||

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भील-भीलनी की शिव भक्ति


(((( भील-भीलनी की शिव भक्ति ))))

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सिंहकेतु पांचाल देश का एक राजा था. राजा बहुत बड़ा शिवभक्त था. शिव आराधना और शिकार उसके दो चीजें प्यारी थीं. वह शिकार खेलने रोज जंगल जाता था.

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एक दिन घने जंगल में सिंहकेतु को एक ध्वस्त मंदिर दिखा. राजा शिकार की धुन में आगे बढ गया पर सेवक भील ने ध्यान से देखा तो वह शिव मंदिर था जिसके भीतर लता, पत्रों में एक शिवलिंग था.

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भील का नाम चंड था. सिंहकेतु के सानिध्य और उसके राज्य में रहने से वह भी धार्मिक प्रवृत्ति का हो गया था. चबूतरे पर स्थापित शिवलिंग जो कि अपनी जलहरी से लगभग अलग ही हो गया था वह उसे उखाड़ लाया.

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चंड ने राजा से कहा- महाराज यह निर्जन में पड़ा था. आप आज्ञा दें तो इसे मैं रख लूं, पर कृपा कर पूजन विधि भी बता दें ताकि मैं रोज इसकी पूजा कर पुण्य कमा सकूं.

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राजा ने कहा कि चंड भील इसे रोज नहला कर इसकी फूल-बेल पत्तियों से सजाना, अक्षत, फल मीठा चढाना. जय भोले शंकर बोल कर पूजा करना और उसके बाद इसे धूप-दीप दिखाना.

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राजा ने कुछ मजाक में कहा कि इस शिवलिंग को चिता भस्म जरूर चढ़ाना और वो भस्म ताजी चिता राख की ही हो. फिर भोग लगाकर बाजा बजाकर खूब नाच-गाना किया करना.

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शिकार से राजा तो लौट गया पर भील जो उसी जंगल में रहता था, उसने अपने घर जाकर अपनी बुद्धि के मुताबिक एक साफ सुथरे स्थान पर शिवलिंग की स्थापना की और रोज ही पूजा करने का अटूट नियम बनाया.

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भीलनी के लिए यह नयी बात थी. उसने कभी पूजा-पाठ न देखी थी. भील के रोज पूजा करने से ऐसे संस्कार जगे की कुछ दिन बाद वह खुद तो पूजा न करती पर भील की सहायता करने लगी.

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कुछ दिन और बीते तो भीलनी पूजा में पर्याप्त रुचि लेने लगी. एक दिन भील पूजा पर बैठा तो देखा कि सारी पूजन सामग्री तो मौजूद है पर लगता है वह चिता भस्म लाना तो भूल ही गया.

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वह भागता हुआ जंगल के बाहर स्थित श्मशान गया. आश्चर्य आज तो कोई चिता जल ही नहीं रही थी. पिछली रात जली चिता का भी कोई नामो निशान न था जबकि उसे लगता था कि रात को मैं यहां से भस्म ले गया हूं.

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भील भागता हुआ उलटे पांव घर पहुंचा. भस्म की डिबिया उलटायी पलटाई पर चिता भस्म तनिक भी न थी. चिंता और निराशा में उसने अपनी भीलनी को पुकारा जिसने सारी तैयारी की थी.

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पत्नी ने कहा- आज बिना भस्म के ही पूजा कर लें, शेष तो सब तैयार है. पर भील ने कहा नहीं राजा ने कहा था कि चिता भस्म बहुत ज़रूरी है. वह मिली नहीं. क्या करूं ! भील चिंतित हो बैठ गया.

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भील ने भीलनी से कहा- प्रिये यदि मैं आज पूजा न कर पाया तो मैं जिंदा न रहूंगा, मेरा मन बड़ा दुःखी है और चिन्तित है. भीलनी ने भील को इस तरह चिंतित देख एक उपाय सुझाया.

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भीलनी बोली, यह घर पुराना हो चुका है. मैं इसमें आग लगाकर इसमें घुस जाती हूं. आपकी पूजा के लिए मेरे जल जाने के बाद बहुत सारी भस्म बन जायेगी. मेरी भस्म का पूजा में इस्तेमाल कर लें.

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भील न माना बहुत विवाद हुआ. भीलनी ने कहा मैं अपने पतिदेव और देवों के देव महादेव के काम आने के इस अवसर को न छोड़ूंगी. भीलनी की ज़िद पर भील मान गया.

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भीलनी ने स्नान किया. घर में आग लगायी. घर की तीन बार परिक्रमा की. भगवान का ध्यान किया और भोलेनाथ का नाम लेकर जलते घर में घुस गयी. ज्यादा समय न बीता कि शिव भक्ति में लीन वह भीलनी जलकर भस्म हो गई.

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भील ने भस्म उठाई. भली भांति भगवान भूतनाथ का पूजन किया. शिवभक्ति में घर सहित घरवाली खो देने का कोई दुःख तो भील के मन में तो था नहीं सो पूजा के बाद बड़े उत्साह से उसने भीलनी को प्रसाद लेने के लिये आवाज दी.

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क्षण के भीतर ही उसकी पत्नी समीप बने घर से आती दिखी. जब वह पास आयी तो भील को उसको और अपने घर के जलने का ख्याल आया. उसने पूछा यह कैसे हुआ. तुम कैसे आयीं ? यह घर कैसे वापस बन गया ?

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भीलनी ने सारी कथा कह सुनायी. जब धधकती आग में घुसी तो लगा जल में घुसती जा रही हूं और मुझे नींद आ रही है. जगने पर देखा कि मैं घर में ही हूं और आप प्रसाद के लिए आवाज लगा रहे हैं.

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वे यह सब बातें कर ही रहे थे कि अचानक आकाश से एक विमान वहां उतरा, उसमें भगवान के चार गण थे. उन्होंने अपने हाथों से उठा कर उन्हें विमान में बैठा लिया.

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गणों का हाथ लगते ही दोनों के शरीर दिव्य हो गए. दोनों ने शिव-महिमा का गुणगान किया और फिर वे अत्यंत श्रद्धायुक्त भगवान की आराधना का फल भोगने शिव लोक चले गये.

(स्कंद पुराण की कथा)

🙏🌹

दिनेशभाई केडल

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Seeking God


*Seeking God!*
There is a story about a *Sea Captain* who in his retirement skippered a boat taking day-trippers to Islands.
On one trip, the boat was full of young people.
They laughed at the old captain when they saw him *say a prayer* before sailing out, because the day was fine and the sea was calm.
However, they weren’t long at sea when a storm suddenly blew up and the boat began to roll & pitch violently.
The terrified passengers came to the captain and *asked him to join them in prayer.*
But he replied, *”I say my prayers when it’s calm. When it’s rough I attend to my ship.”*
*Here is a lesson for us…*
If we cannot *seek God* in quiet moments of our lives; we are not likely to find him when trouble strikes.
We are more likely to panic.
But if we have *learnt to seek him and trust him in quiet moments, then most certainly we will find him when the going gets rough.*                          😊 Keep smiling 😊.

कैप्टन अभिषेख

Posted in संस्कृत साहित्य

शयन विधान


💐 *शयन विधान*💐
*सूर्यास्त के एक प्रहर (लगभग 3 घंटे) के बाद ही शयन करना।*
*🌻सोने की मुद्रा:*

*उल्टा सोये भोगी,*

*सीधा सोये योगी,*

*डाबा सोये निरोगी,*

*जीमना सोये रोगी।*
*🌻शास्त्रीय विधान भी है।*

*आयुर्वेद में ‘वामकुक्षि’ की     बात आती हैं,*

*बायीं करवट सोना स्वास्थ्य के लिये हितकर हैं।*
*शरीर विज्ञान के अनुसार चित सोने से रीढ़ की हड्डी को नुकसान और औधा या ऊल्टा सोने से आँखे बिगडती है।*
*सोते समय कितने गायत्री मंन्त्र /नवकार मंन्त्र गिने जाए :-*

*”सूतां सात, उठता आठ”सोते वक्त सात भय को दूर करने के लिए सात मंन्त्र गिनें और उठते वक्त आठ कर्मो को दूर करने के लिए आठ मंन्त्र गिनें।*
*”सात भय:-“*

*इहलोक,परलोक,आदान,*

*अकस्मात ,वेदना,मरण ,*

*अश्लोक (भय)*
*🌻दिशा घ्यान:-*

*दक्षिणदिशा (South) में पाँव रखकर कभी सोना नहीं । यम और दुष्टदेवों का निवास है ।कान में हवा भरती है । मस्तिष्क  में रक्त का संचार कम को जाता है स्मृति- भ्रंश,मौत व असंख्य बीमारियाँ होती है।*
*✌यह बात वैज्ञानिकों ने एवं वास्तुविदों ने भी जाहिर की है।*
*1:- पूर्व ( E ) दिशा में मस्तक रखकर सोने से विद्या की प्राप्ति होती है।*
*2:-दक्षिण ( S ) में मस्तक रखकर सोने से धनलाभ व आरोग्य लाभ होता है ।*
*3:-पश्चिम( W ) में मस्तक रखकर सोने से प्रबल चिंता होती है ।*

 

*4:-उत्तर ( N ) में मस्तक रखकर  सोने से मृत्यु और हानि होती है ।*
*अन्य धर्गग्रंथों में शयनविधि में और भी बातें सावधानी के तौर पर बताई गई है ।*
*विशेष शयन की सावधानियाँ:-*
*1:-मस्तक और पाँव की तरफ दीपक रखना नहीं। दीपक बायीं या दायीं और कम से कम 5 हाथ दूर होना चाहिये।*

*2:-सोते समय मस्तक दिवार से कम से कम 3 हाथ दूर होना चाहिये।*

*3:-संध्याकाल में निद्रा नहीं लेनी।*

*4:-शय्या पर बैठे-बैठे निद्रा नहीं लेनी।*

*5:-द्वार के उंबरे/ देहरी/थलेटी/चौकट पर मस्तक रखकर नींद न लें।*

*6:-ह्रदय पर हाथ रखकर,छत के पाट या बीम के नीचें और पाँव पर पाँव चढ़ाकर निद्रा न लें।*

*7:-सूर्यास्त के पहले सोना नहीं।*

*7:-पाँव की और शय्या ऊँची हो  तो  अशुभ  है।  केवल चिकित्स  उपचार हेतु छूट हैं ।*

*8:- शय्या पर बैठकर खाना-पीना अशुभ है। (बेड टी पीने वाले सावधान)*

*9:- सोते सोते पढना नहीं।*

*10:-सोते-सोते तंम्बाकू चबाना नहीं। (मुंह में गुटखा रखकर सोने वाले चेत जाएँ )*

*11:-ललाट पर तिलक रखकर सोना अशुभ है (इसलिये सोते वक्त तिलक मिटाने का कहा जाता है। )*

*12:-शय्या पर बैठकर सरोता से सुपारी के टुकड़े करना अशुभ हैं।*

– डॉक्टर वैद्य पंडित विनय कुमार उपाध्याय

*🙏🏼 प्रत्येक व्यक्ति यह ज्ञान को प्राप्त कर सके इसलिए शेयर अवश्य करे | 👏🏼👏🏼💐*