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એક જંગલ હતું. તેમાં એક હરણી ગર્ભવતી હતી

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એક જંગલ હતું. તેમાં એક હરણી ગર્ભવતી હતી અને તેનું બચ્ચુ જન્મવાની તૈયારીમાં જ હતું. દૂર દેખાઈ રહેલું નદી પાસેનું એક ઘાસનું
મેદાન તેને સુરક્ષિત જણાતા, તેણે ત્યાં જઈ બચ્ચાને જન્મ આપવાનો નિર્ણય કર્યો. તે ધીમે ધીમે ત્યાં જવા આગળ વધી અને ત્યાં જ તેને પ્રસૂતિની પીડા શરૂ થઈ ગઈ.
તે જ ક્ષણે અચાનક તે વિસ્તારના આકાશમાં કાળા ડિબાંગ વાદળા છવાઈ ગયાં અને વિજળીનો ગડગડાટ શરૂ થઈ ગયો. વિજળી પડતા ત્યાં દાવાનળ ફેલાઈ ગયો.
હરણીએ ગભરાયેલી નજરે ડાબી બાજુ જોયું તો ત્યાં તેને એક શિકારી પોતાના તરફ તીરનું નિશાન તાકતો દેખાયો.
તે જમણી તરફ ફરી ઝડપથી એ દિશામાં આગળ વધવા ગઈ ત્યાં તેને એક ભૂખ્યો વિકરાળ સિંહ પોતાની દિશામાં આવતો દેખાયો.
આ સ્થિતીમાં ગર્ભવતી હરણી શું કરી શકે કારણ તેને પ્રસૂતિની પીડા શરૂ થઈ ચૂકી છે. તમને શું લાગે છે? તેનું શું થશે? શું હરણી બચી જશે?
શું તે પોતાના બચ્ચાને જન્મ આપી શકશે? શું તેનું બચ્ચુ બચી શકશે?
કે પછી દાવાનળમાં બધું સળગીને ભસ્મીભૂત થઈ જશે?
શું હરણી ડાબી તરફ ગઈ હશે? ના, ત્યાં તો શિકારી તેના તરફ બાણનું
નિશાન તાકી ઉભો હતો.
શું હરણી જમણી તરફ ગઈ હશે?ના, ત્યાં સિંહ તેને ખાઈ જવા તૈયાર હતો.
શું હરણી આગળ જઈ શકે તેમ હતી? ના,ત્યાં ધસમસ્તી નદી તેને તાણી જઈ શકે એમ હતી.
શું હરણી પાછળ જઈ શકે તેમ હતી? ના, ત્યાં દાવાનળ તેને બાળીને
ભસ્મ કરી દઈ શકે તેમ હતો.
જવાબ : આ ઘટના સ્ટોકેઇસ્ટીક પ્રોબેબીલીટી થિયરીનું એક ઉદાહરણ છે.
તે કંઈજ કરતી નથી.તે માત્ર પોતાના બચ્ચાને, એક નવા જીવને જન્મ આપવા પર જ ધ્યાન કેન્દ્રિત કરે છે. એ ક્ષણ પછીની ફક્ત એક જ બીજી ક્ષણમાં આ પ્રમાણે ઘટનાક્રમ બનવા પામે છે.
એક ક્ષણમાં શિકારી પર વિજળી પડે છે અને તે અંધ બની જાય છે.
આકસ્મિક બનેલી આ ઘટનાને લીધે શિકારી નિશાન ચૂકી જાય છે
અને તીર હરણીની બાજુમાંથી પસાર થઈ જાય છે.
તીર સિંહના શરીરમાં ઘૂસી જાય છે અને તે બૂરી રીતે ઘાયલ થઈ જાય છે. એ જ ક્ષણે મૂશળધાર વર્ષા વરસે છે અને દાવાનળને બૂઝાવી નાંખે છે.
એ જ ક્ષણે હરણી એક સુંદર, તંદુરસ્ત બચ્ચાને જન્મ આપે છે.
આપણા સૌના જીવનમાં એવી કેટલીક ક્ષણો આવે છે જ્યારે બધી દિશાઓમાંથી નકારાત્મક વિચારો અને સંજોગો આપણને
ઘેરી વળે છે.
એમાંના કેટલાક વિચારો તો એટલા શક્તિશાળી હોય છે કે તે આપણા પર હાવી થઈ જાય છે અને આપણને શૂન્યમનસ્ક બનાવી મૂકે છે.
પણ જીવનમાં એક જ ક્ષણમાં પરિસ્થીતી તદ્દન બદલાઈ જઈ શકે છે.
ચારેબાજુ નકારાત્મકતા જોવા મળે તો પણ દ્રઢ નિશ્ચય રાખીએ તો અવશ્ય સફળતા મળે જ છે. Be Positive
ગમે તો આ સ્ટોરી તમારા ફ્રેન્ડ્સને શેર જરૂર કરજો, જેથી તેમના વિચારો પણ પોઝીટીવ અને ડગમગીયા વગર શક્તિશાળી બને..

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​पृथ्वीराज चौहान की बेटी का बदला

पृथ्वीराज चौहान की बेटी का बदला

क्या आप जानते हैं कि….. नराधम नरपिशाच जेहादी गोरी द्वारा …. छलपूर्वक पृथ्वीराज चौहान की हत्या के बाद क्या हुआ था…?????

दरअसल…. जब नराधम जेहादी गोरी …… हमारे हिंदुस्तान में जिहाद फैलाकर एवं लूट-खसोट कर …..जब वह अपने वतन गजनी गया तो….. वो अपने साथ बहुत सारी हिन्दू लड़कियों और महिलाओं के साथ-साथ……… बेला और कल्याणी को भी ले गया था…!

असल में ….. बेला हिन्दू सम्राट पृथ्वीराज चौहान की बेटी और कल्याणी जयचंद की पौत्री थी….!

ध्यान देने की बात है कि….. जहाँ पृथ्वीराज चौहान महान देशभक्त थे…. वहीँ जयचंद ने देश के साथ गद्दारी की थी… लेकिन , उसकी पौत्री कल्याणी एक महान राष्ट्रभक्त थी।

खैर….

जब वो जेहादी गोरी अपने गजनी पहुंचा तो….. उसके गुरु ने “काजी निजामुल्क” ने उसका भरपूर स्वागत किया ….

और, उससे कहा कि….

आओ गौरी आओ…… हमें तुम पर नाज है कि …..तुमने हिन्दुस्तान पर फतह करके इस्लाम का नाम रोशन किया है…!

कहो…. सोने की चिड़िया हिन्दुस्तान के कितने पर कतर कर लाए हो….???’’

इस पर जेहादी गोरी ने कुटिलता से मुस्कुराते हुए कहा कि…..

‘‘काजी साहब! मैं हिन्दुस्तान से सत्तर करोड़ दिरहम मूल्य के सोने के सिक्के, पचास लाख चार सौ मन सोना और चांदी, इसके अतिरिक्त मूल्यवान आभूषणों, मोतियों, हीरा, पन्ना, जरीदार वस्त्र और ढाके की मल-मल की लूट-खसोट कर भारत से गजनी की सेवा में लाया हूं।’’

काजी :‘‘बहुत अच्छा! लेकिन वहां के लोगों को कुछ दीन-ईमान का पाठ पढ़ाया या नहीं?’’

गोरी :‘‘बहुत से लोग इस्लाम में दीक्षित हो गए हैं।’’

काजी : ‘‘और बंदियों का क्या किया?’’

गोरी : ‘‘बंदियों को गुलाम बनाकर गजनी लाया गया है और, अब तो गजनी में बंदियों की सार्वजनिक बिक्री की जा रही है।

रौननाहर, इराक, खुरासान आदि देशों के व्यापारी गजनी से गुलामों को खरीदकर ले जा रहे हैं।

एक-एक गुलाम दो-दो या तीन-तीन दिरहम में बिक रहा है।’’

काजी : ‘‘हिन्दुस्तान के मंदिरों का क्या किया?’’

गोरी : ‘‘मंदिरों को लूटकर 17000 हजार सोने और चांदी की मूर्तियां लायी गयी हैं, दो हजार से अधिक कीमती पत्थरों की मूर्तियां और शिवलिंग भी लाए गये हैं और

बहुत से पूजा स्थलों को नेप्था और आग से जलाकर जमीदोज कर दिया गया है।’’

‘‘ये तो तुमने बहुत ही रहमत का काम किया है!’’

फिर मंद-मंद मुस्कान के साथ बड़बड़ाया ….. ‘‘गोर और काले…..धनी और निर्धन…… गुलाम बनने के प्रसंग में सभी भारतीय एक हो गये हैं।

जो भारत में प्रतिष्ठित समझे जाते थे, आज वे गजनी में मामूली दुकानदारों के गुलाम बने हुए हैं।’’

फिर थोड़ा रुककर कहा : ‘‘लेकिन हमारे लिए कोई खास तोहफा लाए हो या नहीं?’’

गोरी : ‘‘लाया हूं ना काजी साहब!’’

काजी :‘‘क्या…???’’

गोरी :‘‘जन्नत की हूरों से भी सुंदर जयचंद की पौत्री कल्याणी और पृथ्वीराज चौहान की पुत्री बेला।’’

काजी :‘‘तो फिर देर किस बात की है..???’’

गोरी :‘‘बस आपके इशारे भर की।’’

काजी :‘‘माशा अल्लाह! आज ही खिला दो ना हमारे हरम में नये गुल।’’

गोरी :‘‘ईंशा अल्लाह!’’

और ……तत्पश्चात्, काजी की इजाजत पाते ही शाहबुद्दीन गौरी ने कल्याणी और बेला को काजी के हरम में पहुंचा दिया।

जहाँ …..कल्याणी और बेला की अदभुत सुंदरता को देखकर काजी अचम्भे में आ गया …..और, उसे लगा कि स्वर्ग से अप्सराएं आ गयी हैं।

तथा, उस काजी ने उसने दोनों राजकुमारियों से विवाह का प्रस्ताव रखा तो

बेला बोली-‘‘काजी साहब! आपकी बेगमें बनना तो हमारी खुशकिस्मती होगी, लेकिन हमारी दो शर्तें हैं!’’

काजी :‘‘कहो..कहो.. क्या शर्तें हैं तुम्हारी! तुम जैसी हूरों के लिए तो मैं कोई भी शर्त मानने के लिए तैयार हूं।

बेला : ‘‘पहली शर्त से तो यह है कि शादी होने तक हमें अपवित्र न किया जाए….. क्या आपको मंजूर है..?????’’

काजी : ‘‘हमें मंजूर है! दूसरी शर्त का बखान करो।’’

बेला : ‘‘हमारे यहां प्रथा है कि …..लड़की के लिए लड़का और लड़के लिए लड़की के यहां से विवाह के कपड़े आते हैं।

अतः , दूल्हे का जोड़ा और जोड़े की रकम हम भारत भूमि से मंगवाना चाहती हैं।’’

काजी :‘‘मुझे तुम्हारी दोनों शर्तें मंजूर हैं।’’

और फिर………. बेला और कल्याणी ने कविचंद के नाम एक रहस्यमयी खत लिखकर भारत भूमि से शादी का जोड़ा मंगवा लिया…. और, काजी के साथ उनके निकाह का दिन

निश्चित हो गया……. साथ ही , रहमत झील के किनारे बनाये गए नए महल में विवाह की तैयारी शुरू हुई।

निकाह के दिन …. वो नराधम काजी ….कवि चंद द्वारा भेजे गये कपड़े पहनकर काजी साहब विवाह मंडप में आया…… और, कल्याणी और बेला ने भी काजी द्वारा दिये गये कपड़े

पहन रखे थे।

इस निकाह के बारे में सबको इतनी उत्सुकता हो गई थी कि…..शादी को देखने के लिए बाहर जनता की भीड़ इकट्ठी हो गयी थी।

लेकिन तभी ………बेला ने काजी साहब से कहा-‘‘हमारे होने वाले सरताज , हम कलमा और निकाह पढ़ने से पहले जनता को झरोखे से दर्शन देना चाहती हैं, क्योंकि विवाह से

पहले जनता को दर्शन देने की हमारे यहां प्रथा है …..और ,फिर गजनी वालों को भी तो पता चले कि… आप बुढ़ापे में जन्नत की सबसे सुंदर हूरों से शादी रचा रहे हैं।

और, शादी के बाद तो हमें जीवनभर बुरका पहनना ही है, तब हमारी सुंदरता का होना ….न के बराबर ही होगा…. क्योंकि… नकाब में छिपी हुई सुंदरता भला तब किस काम

की।’’

‘‘हां..हां..क्यों नहीं।’’

काजी ने उत्तर दिया और कल्याणी और बेला के साथ राजमहल के कंगूरे पर गया, लेकिन वहां पहुंचते-पहुंचते ही उस “”नराधम जेहादी”” काजी के दाहिने कंधे से आग की लपटें निकलने लगी, क्योंकि क्योंकि कविचंद ने बेला और कल्याणी का रहस्यमयी पत्र समझकर बड़े तीक्ष्ण विष में सने हुए कपड़े भेजे थे।

इस तरह …. वो “”नराधम जेहादी”” काजी विष की ज्वाला से पागलों की तरह इधर-उधर भागने लगा,

तब बेला ने उससे कहा-‘‘तुमने ही गौरी को भारत पर आक्रमण करने के लिए उकसाया था ना….. इसीलिए ,हमने तुझे मारने का षड्यंत्र रचकर अपने देश को लूटने

का बदला ले लिया है।

हम हिन्दू कुमारियां हैं …….और, किसी नराधम में इतनी साहस नहीं है कि वो….. जीते जी हमारे शरीर को हाथ भी लगा दे।’’

कल्याणी ने कहा, ‘‘नालायक…..! बहुत मजहबी बनते हो, और जेहाद का ढोल पीटने के नाम पर लोगों को लूटते हो और शांति से रहने वाले

लोगों पर जुल्म ढाहते हो,

थू! धिक्कार है तुम पर।’’

इतना कहकर……..उन दोनों बालिकाओं ने महल की छत के बिल्कुल किनारे खड़ी होकर एक-दूसरी की छाती में विष बुझी कटार जोर से भोंक दी और उनके प्राणहीन देह उस उंची छत से नीचे लुढ़क गये।

वही दूसरी तरफ ….. उस विष के प्रभाव से “”नराधम जेहादी”” काजी …… पागलों की तरह इधर-उधर भागता हुआ भी तड़प-तड़प कुत्ते की मौत मर गया।

इस तरह….. भारत की इन दोनों बहादुर बेटियों ने विदेशी धरती पराधीन रहते हुए भी बलिदान की जिस गाथा का निर्माण किया, वह सराहने

योग्य है …….. और, आज सारा भारत इन बेटियों के बलिदान को श्रद्धा के साथ याद करता है…।

नमन है ऐसी हिन्दू वीरांगनाओं को..

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आरक्षण

“करता हूं अनुरोध आज मैं , भारत की सरकार से ,”
“प्रतिभाओं को मत काटो , आरक्षण की तलवार से………”
“वर्ना रेल पटरियों पर जो , फैला आज तमाशा है ,”
“जाट आन्दोलन से फैली , चारो ओर निराशा है………”
“अगला कदम पंजाबी बैठेंगे , महाविकट हडताल पर ,”
“महाराष्ट में प्रबल मराठा , चढ़ जाएंगे भाल पर………”
“राजपूत भी मचल उठेंगे , भुजबल के हथियार से ,”
“प्रतिभाओं को मत काटो , आरक्षण की तलवार से………”
“निर्धन ब्राम्हण वंश एक , दिन परशुराम बन जाएगा ,”
“अपने ही घर के दीपक से , अपना घर जल जाएगा……..”
“भडक उठा गृह युध्द अगर , भूकम्प भयानक आएगा ,”
“आरक्षण वादी नेताओं का , सर्वस्व मिटाके जायेगा……..”
“अभी सम्भल जाओ मित्रों , इस स्वार्थ भरे व्यापार से ,”
“प्रतिभाओं को मत काटो , आरक्षण की तलवार से……..”
“जातिवाद की नही , समस्या मात्र गरीबी वाद है ,”
“जो सवर्ण है पर गरीब है , उनका क्या अपराध है………”
“कुचले दबे लोग जिनके , घर मे न चूल्हा जलता है ,”
“भूखा बच्चा जिस कुटिया में , लोरी खाकर पलता है……..”
“समय आ गया है उनका , उत्थान कीजिये प्यार से ,”
“प्रतिभाओं को मत काटो , आरक्षण की तलवार से………”
“जाति गरीबी की कोई भी , नही मित्रवर होती है ,”
“वह अधिकारी है जिसके घर , भूखी मुनिया सोती है……..”
“भूखे माता-पिता , दवाई बिना तडपते रहते है ,”
“जातिवाद के कारण , कितने लोग वेदना सहते है………”
“उन्हे न वंचित करो मित्र , संरक्षण के अधिकार से ,”
“प्रतिभाओं को मत काटो , आरक्षण की तलवार से………”
भारत माता की जय,

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एक मारवाड़ी रोज़ बैंक

एक मारवाड़ी रोज़ बैंक

जाया करता था,

कभी

2 लाख तो कभी

3 लाख और

ऐसी बड़ी-बड़ी रकम.

जमा किया करता था।

 

बैंक का मैनेजर उसे हमेशा संशय

की दृष्टि से देखता था।

 

उसे

समझ

नहीं आता था कि यह

मारवाड़ी रोज़

इतना पैसा कहाँ से लाता है।

 

अंत में एक दिन उसने उस

व्यक्ति को बुलाया और

कहा,

“ लाला तुम रोज़

इतना पैसा कहाँ से लाते हो,

आखिर

क्या काम करते हो तुम?”

,

मारवाड़ी ने कहा

“भाई

मेरा तो बस एक ही काम है,

मैं शर्त लगाता हूँ और

जीतता हूँ”

,

मैनेजर को यक़ीन नहीं हुआ

तो उसने कहा,

“ऐसा कैसे

हो सकता है कि आदमी रोज़

कोई शर्ती जीते?”

,

मारवाड़ी. ने कहा,

“चलिए मैं

आपके साथ एक शर्त

लगाता हूँ कि आपके कुले पर

एक फोड़ा है,

 

अब शर्त यह

है कि कल सुबह मैं अपने साथ

दो आदमियों को लाऊँगा और

आपको अपनी पैंट उतार कर

उन्हें अपने कूल्हे दिखाने होंगे,

,

यदि आपके कुले पर

फोड़ा होगा तो आप मुझे 10

लाख दे दीजिएगा,

 

और

अगर नहीं हुआ तो मैं

 

आपको 10 लाख दे दूँगा,

बताइए मंज़ूर है?”

 

मैनेजर जानता था कि उसके

कूल्हों पर फोड़ा नहीं है,

इसलिए उसे शर्त जीतने

की पूरी उम्मीद थी,

 

लिहाज़ा वह तैयार हो गया।

 

अगली सुबह

मारवाड़ी दो व्यक्तियों के

साथ बैंक आया।

,

उन्हें देखते ही मैनेजर की बाँछें

खिल गईं और वह उन्हें झटपट

अपने केबिन में ले आया।

,

इसके

बाद मैनेजर ने उनके सामने

अपनी पैंट उतार दी और

मारवाड़ी से कहा “देखो मेरे

कूल्हों पर कोई

फोड़ा नहीं है,

,

तुम शर्त हार

गए अब निकालो 10

लाख रुपए”।

 

मारवाड़ी के साथ आए

दोनों व्यक्ति यह दृश्य देख

बेहोश हो चुके थे।

 

मारवाड़ी ने हँसते हुए मैनेजर

को 10 लाख

रुपयों से भरा बैग

थमा दिया और ज़ोर-ज़ोर से

हँसने लगा।

 

मैनेजर को कुछ समझ

नहीं आया तो उसने पूछा.

“तुम तो शर्त हार गए फिर

क्यों इतना हँसे जा रहे हो?”

 

मारवाड़ी ने कहा, “तुम्हें

पता है,

ये

दोनों आदमी इसलिए बेहोश

हो गए क्योंकि मैंने इनसे 40

लाख रूपयों की शर्त लगाई

थी कि बैंक का मैनेजर तुम्हारे

सामने पैंट उतारेगा,

 

इसलिए अगर मैंने तुम्हें 10

लाख दे भी दिए

तो क्या फ़र्क पड़ता है, 30

तो फिर भी बचे न…!

 

याद रहे

कभी भी मारवाड़ी से

पंगा न लेनl ।

the great मारवाड़ी

 

जहां ना पहुचे रेलगाडी वहां पहुचे मारवाड़ी 😄😄

🌹मारवाड़ी Tiger🌹

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पुरुष का श्रृंगार तो स्वयम् प्रकृति ने किया है..

पुरुष का श्रृंगार तो स्वयम् प्रकृति ने किया है..

स्त्रियाँ कांच का टुकड़ा है..जो मेकअप की रौशनी पड़ने पर ही चमकती हैं..

किन्तु पुरुष हीरा है जो अँधेरे में भी चमकता है और उसे मेकअप की कोई आवश्यकता नहीं होती।

खूबसूरत मोर होता है मोरनी नहीं..

मोर रंग बिरंगा और हरे नीले रंग से सुशोभित..जबकि मोरनी काली सफ़ेद..

मोर के पंख होते हैँ इसीलिए उन्हें मोरपंख कहते है..मोरनी के पंख नहीं होते..

दांत हाथी के होते है,हथिनी के नहीं। हांथी के दांत बेशकीमती होते हैँ। नर हाथी मादा हाथी के मुकाबले बहुत खूबसूरत होता है।

कस्तूरी नर हिरन में पायी जाती है। मादा हिरन में नहीं।

नर हिरन मादा हिरन के मुकाबले बहुत सुन्दर होता है।

मणि नाग के पास होती है ,नागिन के पास नहीं।

नागिन ऐसे नागों की दीवानी होती हैं जिनके पास मणि होती है।

रत्न महासागर में पाये जाते हैँ, नदियों में नहीं..और अंत में नदियों को उसी महासागर में गिरना पड़ता है।

संसार की बेशकीमती तत्व इस प्रकृति ने पुरुषों को सौंपे..

प्रकृति ने पुरुष के साथ अन्याय नहीं किया..

9 महीने स्त्री के गर्भ में रहने के बावजूद भी औलाद का चेहरा स्वाभाव पिता की तरह होना,

ये संसार का सबसे बड़ा आश्चर्य है..

क्योंकि

पुरुष का श्रृंगार प्रकृति ने करके भेजा है,उसे श्रृंगार की आवश्यकता नहीं…

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केवट भगवान के चरण धो रहा है.

उस समय का प्रसंग है जब

केवट भगवान के चरण धो रहा है.

बड़ा प्यारा दृश्य है, भगवान का एक पैर धोता का उसे निकलकर कठौती से बाहर रख देता है,

और जब दूसरा धोने लगता है तो

पहला वाला पैर गीला होने से

जमीन पर रखने से धूल भरा हो जाता है,

🍃केवट दूसरा पैर बाहर रखता है फिर पहले वाले को धोता है,

एक-एक पैर को सात-सात बार धोता है.

कहता है प्रभु एक पैर कठौती मे रखिये दूसरा मेरे हाथ पर रखिये, ताकि मैला ना हो.

जब भगवान ऐसा करते है

तो जरा सोचिये क्या स्थिति होगी , यदि एक पैर कठौती में है दूसरा केवट के हाथो में, भगवान दोनों पैरों से खड़े नहीं हो पाते बोले – केवट मै गिर जाऊँगा ?

🍃केवट बोला – चिंता क्यों करते हो सरकार !

दोनों हाथो को मेरे सिर पर रखकर खड़े हो जाईये, फिर नहीं गिरेगे ,

जैसे कोई छोटा बच्चा है जब उसकी माँ उसे स्नान कराती है तो बच्चा माँ के सिर पर हाथ रखकर खड़ा हो जाता है,भगवान भी आज वैसे ही खड़े है.

🍃भगवान केवट से बोले – भईया केवट !

मेरे अंदर का अभिमान आज टूट गया.

केवट बोला – प्रभु ! क्या कह रहे है ?

🍃भगवान बोले – सच कह रहा हूँ केवट,

अभी तक मेरे अंदर अभिमान था, कि

मै भक्तो को गिरने से बचाता हूँ पर

🍃आज पता चला कि,

भक्त भी भगवान को गिरने से बचाता है.

 

😄🌴🍃🌿🌸

🌹 प्रभु तू मेरा

मे तेरा   🌹

।।। जय राम जी की ।।।

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दो सुन्दर प्रसंग एक श्रीकृष्ण की और एक श्री राम की

दो सुन्दर प्रसंग एक श्रीकृष्ण की और एक श्री राम की

 

माखन चोरी का….

 

माखन चोर नटखट श्री कृष्ण को रंगे हाथों पकड़ने के लिये एक ग्वालिन ने एक अनोखी जुगत भिड़ाई।

 

उसने माखन की मटकी के साथ एक घंटी बाँध दी, कि जैसे ही बाल कृष्ण माखन-मटकी को हाथ लगायेगा, घंटी बज उठेगी और मैं उसे रंगे हाथों पकड़ लूँगी।

 

बाल कृष्ण अपने सखाओं के साथ दबे पाँव घर में घुसे।

 

श्री दामा की दृष्टि तुरन्त घंटी पर पड़ गई और उन्होंने बाल कृष्ण को संकेत किया।

 

बाल कृष्ण ने सभी को निश्चिंत रहने का संकेत करते हुये, घंटी से फुसफसाते हुये कहा:-

 

“देखो घंटी, हम माखन चुरायेंगे, तुम बिल्कुल मत बजना”

 

घंटी बोली “जैसी आज्ञा प्रभु, नहीं बजूँगी”

 

बाल कृष्ण ने ख़ूब माखन चुराया अपने सखाओं को खिलाया – घंटी नहीं बजी।

 

ख़ूब बंदरों को खिलाया – घंटी नहीं बजी।

 

अंत में ज्यों हीं बाल कृष्ण ने माखन से भरा हाथ अपने मुँह से लगाया , त्यों ही घंटी बज उठी।

 

घंटी की आवाज़ सुन कर ग्वालिन दौड़ी आई।

ग्वाल बालों में भगदड़ मच गई।

सारे भाग गये बस श्री कृष्ण पकड़ाई में आ गये।

 

बाल कृष्ण बोले – “तनिक ठहर गोपी , तुझे जो सज़ा देनी है वो दे दीजो , पर उससे पहले मैं ज़रा इस घंटी से निबट लूँ…क्यों री घंटी…तू बजी क्यो…मैंने मना किया था न…?”

 

घंटी क्षमा माँगती हुई बोली – “प्रभु आपके सखाओं ने माखन खाया , मैं नहीं बजी…आपने बंदरों को ख़ूब माखन खिलाया , मैं नहीं बजी , किन्तु जैसे ही आपने माखन खाया तब तो मुझे बजना ही था…मुझे आदत पड़ी हुई है प्रभु…मंदिर में जब पुजारी  भगवान को भोग लगाते हैं तब घंटियाँ बजाते हैं…इसलिये प्रभु मैं आदतन बज उठी और बजी…”

 

श्री गिरिराज धरण की जय…

श्री बाल कृष्ण की जय