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चिदंबरम


आज वो चिदंबरम जेल में है और उसे गिरफ्तार करते हुए हम सबने टीवी पर लाइव देखा.

चिदंबरम ने कुछ गलत किया है ये तो सब जानते हैं लेकिन… वो किस मामले में जेल में है… और, असल में उसने किया क्या है … ये बहुत ही कम लोगों को मालूम होगा.

असल में ये सारा खेल 2006 में शुरू हुआ था…. जब, पीटर मुखर्जी और इंद्राणी मुखर्जी ने मिलकर INX MEDIA नामक एक कंपनी शुरू की जिसके लिए उन दोनों विदेशी निवेश की आवश्यकता थी.

अब नियम यह है कि…. अगर, आप को अपना बिजनेस चलाने के लिये विदेशी फंड की आवश्यकता है तो आप Direct route से पैसे ले सकते हैं.

लेकिन…. अगर आपको देश की सुरक्षा या सम्प्रभुता से जुड़े किसी बिजनेस जैसे कि…. रक्षा, बैंकिग या फिर मीडिया जैसे कार्यों के लिये विदेशी निवेश चाहिये तो उसके लिये आपको सरकार के FIPB (Foreign Investment Promotion Board) से मंजूरी लेनी पड़ती है.

सरकारी भाषा में इसे Approved Route कहते हैं.

तो, नियम के तहत…. पीटर मुखर्जी और इंद्राणी मुखर्जी FIPB के पास गए और और दो चीजों की परमिशन माँगी….!

जिसमें से पहला…. विदेशी निवेश की.

और, दूसरा…. उस निवेश का 26% पैसा अपने ही किसी और बिजनेस ( INX News ) में लगाने की.

लेकिन…. FIPB ने मुखर्जी को सिर्फ 4.62 करोड़ रूपये की ही विदेशी निवेश की परमिशन दी तथा 26% पैसा INX news में लगाने की मंजूरी नहीं दी और उसके लिए मना कर दिया.

लेकिन…. मुखर्जीयों ने 4.62 करोड़ की मंजूरी को नजरअंदाज कर 305 करोड़ का विदेशी निवेश ले आये… जिससे, यह कानून का उल्लंघन हुआ … और, यह अवैध मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बन गया.

इसके साथ ही मुखर्जीयों ने FIPB के मंजूरी के खिलाफ जाकर विदेशी निवेश का 26% पैसा INX news में लगा दिया.

लेकिन… आयकर विभाग को गड़बड़ की भनक लगी और इसकी जाँच शुरू हुई.

आयकर के जाँच में जब…. मुखर्जी फंसने लगे तो, उन्होंने सोचा किसी बड़े आदमी को अगर अपने बिजनेस से जोड़ लें तो हम बच सकते हैं.

और, इस काम के लिए उन्होंने पकड़ा तत्कालीन वित्तमंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम को और कार्ति चिदंबरम के बेटे की कंपनी Chess Management Services limited को अपनी कंपनी का Consultant बना दिया.

पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम के INX Media से जुड़ते ही मुखर्जी के खिलाफ चल रही Revenue Department की सारी जाँच बंद हो गयी क्योंकि कार्ति की पिता पी चिदंबरम देश के वित्त मंत्री थे और देश के सारे REVENUE DEPARTMENT उनके ही अधीन थे.

सिर्फ इतना ही नहीं…. कार्ति चिदंबरम के जुड़ने के बाद …. अब FIPB ने भी INX Media को नया प्रपोजल भेजने कहा और उनकी विदेशी निवेश की लिमिट बढा दी.

यह सब कुछ इसलिये हो रहा था क्योंकि…. पी चिदंबरम भारत के वित्त मंत्री थे.

अब…. कार्ति की कंपनी CMSL को कंसल्टंट होने की वजह से 3.5 करोड़ दिये जाने थे… लेकिन, कार्ति चिदंबरम सयाना था और उसे लगा कि पैसा अगर डायरेक्ट अपनी कंपनी लिया तो आगे चलकर फँस सकता हूँ…. इसलिये, उसने एक बेनामी कंपनी Advanced Consulting Limited and Services के द्वारा पैसा लिया।

बस… यहीं से सारा घोटाला फंस गया.

2014 में सरकार बदली.

और… 2017 में ED ने कार्ति चिंदबरम, INX Media उसके Directors पर केस दर्ज किया.

और, उसकी CBI जाँच हुई तथा कार्ति एक महीना जेल में भी रहा.

जाँच चलती रही…. और, जांच में देश विदेश में इसके पास 54 करोड़ की आय से ज्यादा संपत्ति का भी पता लगा.

अब तक तो केवल कार्ति ही लपेटे में था…. लेकिन, पी चिदंबरम तब फँस गया जब इंद्राणी मुखर्जी ने सरकारी गवाह बन यह कह दिया कि मैंने पी चिंदबरम को रिश्वत दी थी.

चिदंबरम ने केस दर्ज होने से ही पहले Anticipatory bail ले लिया और हर बार बचता रहता तथा, जाँच में सहयोग नहीं किया.

लेकिन इस बार दिल्ली HC के जज ने बेल से मना कर दिया और अरेस्ट वारंट जारी हो गया और इस तरह अब पी चिदंबरम फिलहाल जेल में है.

वैसे मेरा निजी तौर पर मानना है कि…. राजदंड सबपर समान रूप से लागू होना बिल्कुल न्यायसंगत है क्योंकि हमारा संविधान ही कहता है कि…. राजा हो या रंक… कानून की नजर में सब बराबर है.

जय महाकाल…!!!

नोट : जानकार बताते हैं कि चिदंबरम साहब बहुत गुणवान है और उनकी उपलब्धियां बहुत बड़ी बड़ी है….
और, ये inx media केस तो बहुत ही छोटी है उन कारनामों के सामने.

Posted in संस्कृत साहित्य

जय श्री कृष्ण ।

हम लोग हवेली में या मंदिर में दर्शन करने जाते हैं,। दर्शन करने के बाद बाहर आकर मंदिर की पैड़ी पर या ओटले पर थोड़ी देर बैठते हैं। इस परंपरा का कारण क्या है ?
अभी तो लोग वहां बैठकर अपने घर की, व्यापार की, राजनीति की चर्चा करते हैं। परंतु यह परंपरा एक विशेष उद्देश्य के लिए बनाई गई है।

वास्तव में वहां मंदिर की पैड़ी पर बैठ कर के और एक श्लोक बोलना चाहिए ।यह श्लोक हम भूल गए हैं। इस श्लोक को सुने और याद करें ।और आने वाली पीढ़ी को भी इसे बता कर जाएं ।
श्लोक इस प्रकार है

अनायासेन मरणम ,बिना दैन्येन जीवनम ।
देहान्ते तव सानिध्यम ,देहिमे परमेश्वरम।।

जब हम मंदिर में दर्शन करने जाएं तो खुली आंखों से ठाकुर जी का दर्शन करें । कुछ लोग वहां नेत्र बंद करके खड़े रहते हैं ।आंखें बंद क्यों करना ।हम तो दर्शन करने आए हैं ।ठाकुर जी के स्वरूप का ,श्री चरणों, का मुखारविंद का ,श्रंगार का संपूर्ण आनंद लें । आंखों में भर लें इस स्वरूप को । दर्शन करें और दर्शन करने के बाद जब बाहर आकर बैठें तब नेत्र बंद करके ,जो दर्शन किए हैं, उस स्वरूप का ध्यान करें ।मंदिर में नैत्र नहीं बंद करना, बाहर आने के बाद पैड़ी पर बैठकर जब ठाकुर जी का ध्यान करें तब नेत्र बंद करें, और अगर ठाकुर जी का स्वरूप ध्यान में नहीं आए तो दोबारा मंदिर में जाएं ।

यह प्रार्थना है याचना नहीं है। याचना सांसारिक पदार्थों के लिए होती है, घर ,व्यापार ,नौकरी ,पुत्र पुत्री, दुकान ,सांसारिक सुख या अन्य बातों के लिए जो मांग की जाती है, वह याचना है ।वह भीख है ।

हम प्रार्थना करते हैं। प्रार्थना का विशेष अर्थ है ।
प्र अर्थात विशिष्ट, श्रेष्ठ ।अर्थना अर्थात निवेदन ।ठाकुर जी से प्रार्थना करें ,और प्रार्थना क्या करना है ,यह श्लोक बोलना है ।

श्लोक का अर्थ है

“अनायासेना मरणम” अर्थात बिना तकलीफ के हमारी मृत्यु हो, बीमार होकर बिस्तर पर पड़े पड़े ,कष्ट उठाकर मृत्यु नहीं चाहिए ।चलते चलते ही श्री जी शरण हो जाएं।

” बिना दैन्येन जीवनम ” अर्थात परवशता का जीवन न हो। किसी के सहारे न रहना पड़े ,।जैसे लकवा हो जाता है ,और व्यक्ति पर आश्रित हो जाता है ।वैसे परवश, बेबस न हों। ठाकुर जी की कृपा से बिना भीख मांगे जीवन बसर हो सके।

” देहान्ते तव सानिध्यम ” अर्थात जब मृत्यु हो तब ठाकुर जी सन्मुख खड़े हो। जब प्राण तन से निकले , आप सामने खड़े हों। जैसे भीष्म पितामह की मृत्यु के समय स्वयं ठाकुर जी उनके सम्मुख जाकर खड़े हो गए । उनके दर्शन करते हुए प्राण निकले।

यह प्रार्थना करें । गाड़ी ,लाड़ी ,लड़का, लड़की पति, पत्नी ,घर ,धन यह मांगना नहीं ।यह तो ठाकुर जी आपकी पात्रता के हिसाब से खुद आपको दे देते हैं ।तो दर्शन करने के बाद बाहर बैठकर यह प्रार्थना अवश्य पढ़ें ।

जय श्री कृष्ण

Posted in Nehru Family

अरुण सुक्ला

आप लोगों ने लगान फिल्म अवश्य देखी होगी। एक अँगरेज़ अधिकारी उन गंवारों से क्रिकेट मैच जीतने की शर्त लगाता है जिन्हे क्रिकेट की ए, बी, सी, डी तक नहीं आती थी। दुष्ट अँगरेज़ मैच जीतने पर लगान माफ़ करने का प्रलोभन देता है और मैच हारने पर तिगुना लगान वसूलने की बात कहता है। उस अँगरेज़ की बहन दयालु प्रकृति की है और वो ग्रामीणों को चोरी छिपे क्रिकेट के नियम बताने से लेकर उन्हें क्रिकेट के उपकरण भी उपलब्ध कराती है और अंत में यही गंवार विजयी होते हैं जिसका पूरा श्रेय उस अँगरेज़ लड़की को जाता है।
ऐसा ही एक दयालु था पीटर विली जो एक अँगरेज़ था। छोटे, मोटे अख़बार का पत्रकार होने के साथ साथ वो एक चित्रकार भी था। उसे भारतीयों से बड़ी सहानुभूति थी। सन 1962 में वो भारत ये देखने के लिए आया कि आजादी के बाद का भारत कैसा है? पर उसे भारतीयों की दशा देखकर कोई विशेष ख़ुशी नहीं हुई। दुर्भाग्य से उसी समय चीन से युद्ध भी छिड़ गया। सेना के जवानों को देखकर वो हैरत में आ गया। हिमालय की भीषण ठंड में कुछ लोग चप्पल में तो कुछ नँगे पैर। कुछ लोग स्वेटर में तो कुछ केवल शर्ट में और शर्ट के अंदर रुई के टुकड़े। गोलियां भी गिनकर दी जा रही थी। उसने एक बेहद गरीब जवान को अपनी जैकेट देनी चाही, पर उसने ये कहकर लेने से मनाकर दिया कि उसके अन्य साथी भी उसके जैसी स्थिति में लड़ रहे हैं। पीटर विली ने फौरन एक तैल चित्र बनाया जिसमे एक जवान एक हाथ में बन्दूक और एक हाथ में गिनती की गोलियां लिए हुए दीन दरिद्र अवस्था में हिम्मत और स्वाभिमान से लबरेज पर्वतीय क्षेत्र में खड़ा हुआ था।
उस चित्रकार महाशय ने वो तैल चित्र नेहरू जी को भेंट करने की सोचा। पर नेहरू जी से उसकी मुलाकात न हो सकी। पता लगता नेहरू जी अपने स्टडी रूम में कभी कोई नॉवेल लिख रहे हैं तो कभी इधर उधर मीटिंग में व्यस्त रहते। चीन युद्ध को भी वो अपने रक्षा मंत्री मेनन के जिम्मे डालकर पूर्ण निश्चिन्त थे और वैसे भी उनका मानना था कि चीन एक पुराना दोस्त है जो फिलहाल कुछ समय के लिए नाराज़ चल रहा है, शीघ्र ही वो रूठे हुए दोस्त को मना लेंगे।
उस पत्रकार को लगा कि वो अपना दुर्लभ चित्र एक अयोग्य व्यक्ति को भेंट कर रहा है। भारतीय जवान इस हिमालय की हाड़ कँपाती ठंड में नँगे पैर युद्ध लड़ने जा रहे हैं और ये साहब नॉवेल पूरा कर रहे हैं। वो अँगरेज़ महाशय उस चित्र को अपने साथ इंग्लैण्ड ले गये, जहां कई लोगों ने उस चित्र को मुंहमांगे दामों पर लेने की पेशकश की पर उन्होंने वो चित्र किसी को नहीं बेचा। उनके मरने के बाद वो चित्र भी चोरी हो गया। उनकी डॉयरी के एक पन्ने पर लिखा था भारतीय सेना दुनिया की सबसे महान सेना है पर उनकी महानता को समझने वाले लोग भारत में नहीं हैं।

Posted in Nehru Family

Forwarded as received..

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नेहरू की….
१ गलती—सन १९५१ में नेपाल के राजा गिरिभुवन ने नेपाल को भारत में बिलय करने की प्रस्ताव दिया था। चाचा ने इन्कार कर दिया था।
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नेहरू की….
२ नम्बर गलती — बलुचिस्तान के नवाब खान ने चाचा को पत्र लिखकर बाकायदा अनुरोध किया था कि बलुचिस्तान को भारत के साथ शामिल करने की कृपा करें।
हम भारत के साथ रहना चाहते हैं।शुअर ने इन्कार कर दिया।
नतीजा पाकिस्तान ने बंदुक के बल पर बलुचिस्तान को कब्जा कर लिया। सोचिए कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी हमें।
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नेहरू की….
३ नम्बर गलती—- सन् १९४७ में ओमान देश ने ग्वादर पोर्ट को भारत देश को लेने के लिए ओफर दिया था। नेहरू ने यह ओफर ठुकरा दिया था।
नतीजा पाकिस्तान ने ले लिया, फिर चीन को दे दिया।आज चीन हमारे ऊपर डन्डा घुमा रहा है।
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नेहरू की….
४ नम्बर — सन् १९५० में चाचा नेहरू ने कोको आइलैंड को बर्मा को दान में दे दिया। जैसे कि उसके बाप की सम्पत्ति है।
बर्मा ने चीन को बेच दिया।
नतीजा आज चीन हमारे नौसेना की जासूसी करता है।
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नेहरू की….
५ नम्बर — १९५२ में चाचा ने अपने स्वार्थ में २२३२७ बर्ग किलोमीटर का एरिया बर्मा को दान कर दिया था। इस स्थान का नाम है कावाओ valley. ये कश्मीर के जैसा ही सुंदर और रमणीक स्थल था।बाद में बर्मा ने चीन को बेच दिया।
नतीजा आज चीन वहां से हमारे ऊपर जासूसी करता है और आंखें दिखाता है।
सोचिए कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है।
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नेहरू की….
७ नम्बर गलती—- देश की आजादी के तुरंत बाद में अमेरिका के राष्ट्रपति ने नेहरू को कहा था कि आप न्युक्लियर पावर का देश बनने के लिए प्लांट लगाए UNO का स्थाई सदस्य बन जाओगे चाचा गद्दार ने इन्कार कर दिया और चीन को सदस्य बनाया। कितनी बड़ी क्षति हुई है अंदाजा लगाइए।
इसने केवल भारत को क्षतिग्रस्त ही किया है।
अफसोस होता है।
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नेहरू की….😡
6 no गलती—- सन् ६२ के चीन के साथ युद्ध में भारत के वायुसेना के प्लान के मुताबिक युद्ध लड़ने के लिए मना कर दिया और आत्मसमर्पण कर दिया। और चीन को १४००० बर्ग किलोमीटर का एरिया चीन को सौंप दिया भेंट स्वरूप। इस युद्ध में ३००० से अधिक भारत के जवान शहीद हुए थे।
इसी एरिया को अक्साई चिन कहते हैं। सोचिए इस गद्दार नेहरू ने हमारे देश को कितना क्षतिग्रस्त किया है।
👺👺😎😎😡😡

Posted in छोटी कहानिया - १००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक, वर्णाश्रमव्यवस्था:

पति पत्नी गाड़ी के ऐसे पहिये होते है जो ऊँचे नीचे टेड़े मेढे रास्ते से होकर भी अपनी ज़िन्दगी की गाड़ी कितने आराम से खीचते है और उसमे नोक झोंक हँसी मज़ाक गुस्सा सब होता है । जो जरुरी भी है । वरना ज़िन्दगी नीरस लगने लगेगी । पति पत्नी की नोक झोंक का एक छोटा सा किस्सा

बीवी के जन्मदिन का तोहफ़ा हर साल का सबसे बड़ा सवाल होता है...
पति ने
तोहफे में घड़ी दी
बीवी: समय देखने से क्या मिलेगा… मेरा समय तो तभी से खराब हो गया जब मैंने तुमसे शादी करी।
पति : shocked
तोहफे में गह़ना दिया
बीवी: फालतू पैसों की बर्बादी करी… पुरानी डिजाइन के है। वैसे भी मैं कौन सा कुछ पहन पाती हूँ… आखिरी बार तो तुम्हारी बुआ के बेटी की शादी में 2 महिने पहले पहने थे।
पति : confused
तोहफे में मोबाइल दिया
बीवी: मेरे पास तो पहले से हैं, और वैसे भी तुम्हारा वाला ज्यादा अच्छा है।
पति: ठीक हैं, तो मैं बदल कर मेरे जैसा ला देता हूँ ।
बीवी: रहने दो, महंगा होगा। चोचले हैं… और ये मुझे देकर साबित क्या करना चाहते हो?
पति का सिर चकराया
तोहफे में रेशमी साड़ी दी
बीवी: ये कौन पहनता है आजकल? कभी कभार किसी त्योहार या शादी ब्याह में पहनेंगे फिर रखी रहेगी।
पति के दिमाग का दही
तोहफे में सूट दिया
बीवी: फिर पैसों की बर्बादी… इतने सारे सूट पड़े पड़े सड़ रहे हैं। इसको भी रखने का सिर दर्द ले आए…
पति के सिर मे दर्द
तोहफे में गुलदस्ता दिया
बीवी: ये फूल पत्ती में क्यों पैसे बहा आए? इससे अच्छे फूल तो बाहर गमले में लगे है।
पति बाहर गमले से फूल ले आया
बीवी: ये क्यों तोड़ दिया? दिखने में कितने अच्छे
लगते थे और वैसे भी मैंने इसे कल सुबह की पूजा के लिए छोड़ा था।
पति की हालत खराब
तोहफे में कुछ नहीं दिया
बीवी: आज क्या दिन है?
पति : रविवार
बीवी: हम्म…. तारीख?
पति : 22 जनवरी
बीवी: तो??!
पति : तो, हैप्पी बर्थडे!!!
बीवी: बस!!! मेरा तोहफ़ा कहाँ है?
पति ?????😂😂😂😂😂
यही प्यार है इसलिये हसबैंड वाइफ इतना सब होते हुए भी एक दूसरे का साथ कभी नहीं छोड़ते । Agree….

Posted in छोटी कहानिया - १००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

ठगने का नया तरीका


सावधान : ठगने का नया तरीका :-‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬
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एक दिन जब मै ड्राइविंग करते हुए जल्दी-जल्दी ऑफिस जा रहा था,
एक फोन आया जिसमें मुझे 3 घंटे के लिए फोन स्विच ऑफ करने के लिए कहा गया और बताया कि 4G अपलोड करने के लिए यह जरूरी है.

थोड़ी देर बाद जब किसी जरूरी फोन करने के लिए मैंने फोन स्विच ऑन किया तो देखा कि कई मिस कॉल आए हुए हैं और उस में सबसे ज्यादा मेरे घर से कॉल आए थे.

मैंने तुरंत घर फोन किया तो देखा कि घर के सारे लोग घबराए हुए हैं.

मुझे मालूम पड़ा कि उनके पास एक कॉल आया था जिसमें मुझे किडनैप किये जाने की सूचना थी और एक अच्छी रकम फिरौती के रूप में मांगी गई थी.

प्रमाण के लिए उन्हें मेरी आवाज भी सुनाई गई थी.

घरवालों ने कई बार मुझे फोन किया पर वह हमेशा स्विच ऑफ मिला.

मेरे पापा घबराकर अपहरणकर्ताओं के बताये खाते में पैसा ट्रांसफर करने के लिए बैंक गये हुये थे.

जब मैं पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचा तो मालुम हुआ कि सुबह से इस तरह के कई केस आ चुके हैं और कई लोगो ने जो पैसा ट्रांसफर कर दिया है, वह किसी विदेशी खाते में गया है और किसी कीमत पर वापस नहीं आ सकता।

(नोट : यह लेख एक पीड़ीत द्वारा भेजी गयी शिकायत पर आधारित है।)

निष्कर्ष :
यह है माफिया का बिना किडनैप किये पैसा बनाने का नया, रिस्क फ्री तरीका।

अत: आप से आग्रह है कि जनहित में इस मैसेज को अवश्य प्रेषित करें।

अपना ज्यादा से ज्यादा ध्यान रखें।

ऐसा किसी के साथ हो,
उससे पहले ही सबको सतर्क करें।

निवेदक :-
सुरेश शुक्ला
डायरेक्टर जनरल
राष्ट्रीय अपराध जांच ब्यूरो
नागरिक अधिकार सुरक्षा परिषद

Posted in छोटी कहानिया - १००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

Byश्री संजय सिन्हा*
कल दिल्ली से गोवा की उड़ान में एक सरदारजी मिले।
साथ में उनकी
पत्नि भी थीं।

सरदारजी की उम्र करीब 80 साल रही होगी। मैंने पूछा नहीं लेकिन सरदारनी भी 75 पार ही रही होंगी।

उम्र के सहज प्रभाव को छोड़ दें, तो दोनों करीब करीब फिट थे।

सरदारनी खिड़की की ओर बैठी थीं, सरदारजी बीच में और
मै सबसे किनारे वाली
सीट पर था।

उड़ान भरने के साथ ही सरदारनी ने कुछ खाने का सामान निकाला और सरदारजी की ओर किया। सरदार जी कांपते हाथों से धीरे-धीरे खाने लगे।

फिर फ्लाइट में जब भोजन सर्व होना शुरू हुआ तो उन लोगों ने राजमा-चावल का ऑर्डर किया।

दोनों बहुत आराम से राजमा-चावल खाते रहे। मैंने पता नहीं क्यों पास्ता ऑर्डर कर दिया था। खैर, मेरे साथ अक्सर ऐसा होता है कि मैं जो ऑर्डर करता हूं, मुझे लगता है कि सामने वाले ने मुझसे बेहतर ऑर्डर किया है।
अब बारी थी
कोल्ड ड्रिंक की।

पीने में मैंने कोक का ऑर्डर दिया था।

अपने कैन के ढक्कन को मैंने खोला और धीरे-धीरे पीने लगा।

सरदार जी ने कोई जूस लिया था।

खाना खाने के बाद जब उन्होंने जूस की बोतल के ढक्कन को खोलना शुरू किया तो ढक्कन खुले ही नहीं।

सरदारजी कांपते हाथों से उसे खोलने की कोशिश कर रहे थे।
मैं लगातार उनकी ओर देख रहा था। मुझे लगा कि ढक्कन खोलने में उन्हें मुश्किल आ रही है तो मैंने शिष्टाचार हेतु
कहा कि लाइए…
” मैं खोल देता हूं।”

सरदारजी ने मेरी ओर देखा, फिर मुस्कुराते हुए कहने लगे कि…

“बेटा ढक्कन तो मुझे ही खोलना होगा।

मैंने कुछ पूछा नहीं,
लेकिन
सवाल भरी निगाहों से उनकी ओर देखा।

यह देख,
सरदारजी ने आगे कहा

बेटाजी, आज तो आप खोल देंगे।

लेकिन अगली बार..?
कौन खोलेगा.?

इसलिए मुझे खुद खोलना आना चाहिए।

सरदारनी भी सरदारजी की ओर देख रही थीं।

जूस की बोतल का ढक्कन उनसे अभी भी नहीं खुला था।

पर सरदारजी लगे रहे और बहुत बार कोशिश कर के उन्होंने ढक्कन खोल ही दिया।

दोनों आराम से
जूस पी रहे थे।

मुझे दिल्ली से गोवा की इस उड़ान में
ज़िंदगी का एक सबक मिला।

सरदारजी ने मुझे बताया कि उन्होंने..
ये नियम बना रखा है,

कि अपना हर काम वो खुद करेंगे।
घर में बच्चे हैं,
भरा पूरा परिवार है।

सब साथ ही रहते हैं। पर अपनी रोज़ की ज़रूरत के लिये
वे सिर्फ सरदारनी की मदद ही लेते हैं, बाकी किसी की नहीं।

वो दोनों एक दूसरे की ज़रूरतों को समझते हैं

सरदारजी ने मुझसे कहा कि जितना संभव हो, अपना काम खुद करना चाहिए।

एक बार अगर काम करना छोड़ दूंगा, दूसरों पर निर्भर हुआ तो समझो बेटा कि बिस्तर पर ही पड़ जाऊंगा।

फिर मन हमेशा यही कहेगा कि ये काम इससे करा लूं,

वो काम उससे।

फिर तो चलने के लिए भी दूसरों का सहारा लेना पड़ेगा।

अभी चलने में पांव कांपते हैं, खाने में भी हाथ कांपते हैं, पर जब तक आत्मनिर्भर रह सको, रहना चाहिए।

हम गोवा जा रहे हैं,
दो दिन वहीं रहेंगे।

हम महीने में
एक दो बार ऐसे ही घूमने निकल जाते हैं।

बेटे-बहू कहते हैं कि अकेले मुश्किल होगी,

पर उन्हें कौन समझाए
कि
मुश्किल तो तब होगी
जब हम घूमना-फिरना बंद करके खुद को घर में कैद कर लेंगे।
पूरी ज़िंदगी खूब काम किया। अब सब बेटों को दे कर अपने लिए महीने के पैसे तय कर रखे हैं।

और हम दोनों उसी में आराम से घूमते हैं।

जहां जाना होता है एजेंट टिकट बुक करा देते हैं। घर पर टैक्सी आ जाती है। वापिसी में एयरपोर्ट पर भी टैक्सी ही आ जाती है।

होटल में कोई तकलीफ होनी नहीं है।

स्वास्थ्य, उम्रनुसार, एकदम ठीक है।

कभी-कभी जूस की बोतल ही नहीं खुलती।

पर थोड़ा दम लगाओ,

तो वो भी खुल ही जाती है।

मेरी तो आखेँ ही
खुल की खुली रह गई।

मैंने तय किया था
कि इस बार की
उड़ान में लैपटॉप पर एक पूरी फिल्म देख लूंगा।
पर यहां तो मैंने जीवन की फिल्म ही देख ली।

एक वो फिल्म जिसमें जीवन जीने का संदेश छिपा था।

“जब तक हो सके,
आत्मनिर्भर रहो।”
अपना काम,
जहाँ तक संभव हो,
स्वयम् ही करो।
———और😅
पसंद आए तो,
FORWARD करो।👍