Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

एक बार एक राजा के राज्य में महामारी फैल गयी। चारो ओर लोग मरने लगे। राजा ने इसे रोकने के लिये बहुत सारे उपाय करवाये मगर कुछ असर न हुआ और लोग मरते रहे। दुखी राजा ईश्वर से प्रार्थना करने लगा। तभी अचानक आकाशवाणी हुई। आसमान से आवाज़ आयी कि हे राजा तुम्हारी राजधानी के बीचो बीच जो पुराना सूखा कुंआ है अगर अमावस्या की रात को राज्य के प्रत्येक घर से एक – एक बाल्टी दूध उस कुएं में डाला जाये तो अगली ही सुबह ये महामारी समाप्त हो जायेगी और लोगों का मरना बन्द हो जायेगा। राजा ने तुरन्त ही पूरे राज्य में यह घोषणा करवा दी कि महामारी से बचने के लिए अमावस्या की रात को हर घर से कुएं में एक-एक बाल्टी दूध डाला जाना अनिवार्य है ।

अमावस्या की रात जब लोगों को कुएं में दूध डालना था उसी रात राज्य में रहने वाली एक चालाक एवं कंजूस बुढ़िया ने सोंचा कि सारे लोग तो कुंए में दूध डालेंगे अगर मै अकेली एक बाल्टी पानी डाल दूं तो किसी को क्या पता चलेगा। इसी विचार से उस कंजूस बुढ़िया ने रात में चुपचाप एक बाल्टी पानी कुंए में डाल दिया। अगले दिन जब सुबह हुई तो लोग वैसे ही मर रहे थे। कुछ भी नहीं बदला था क्योंकि महामारी समाप्त नहीं हुयी थी। राजा ने जब कुंए के पास जाकर इसका कारण जानना चाहा तो उसने देखा कि सारा कुंआ पानी से भरा हुआ है। दूध की एक बूंद भी वहां नहीं थी। राजा समझ गया कि इसी कारण से महामारी दूर नहीं हुई और लोग अभी भी मर रहे हैं।

दरअसल ऐसा इसलिये हुआ क्योंकि जो विचार उस बुढ़िया के मन में आया था वही विचार पूरे राज्य के लोगों के मन में आ गया और किसी ने भी कुंए में दूध नहीं डाला।

मित्रों , जैसा इस कहानी में हुआ वैसा ही हमारे जीवन में भी होता है। जब भी कोई ऐसा काम आता है जिसे बहुत सारे लोगों को मिल कर करना होता है तो अक्सर हम अपनी जिम्मेदारियों से यह सोच कर पीछे हट जाते हैं कि कोई न कोई तो कर ही देगा और हमारी इसी सोच की वजह से स्थितियां वैसी की वैसी बनी रहती हैं।

तो मित्रों..! सरकार ने… प्रशासन ने…डॉक्टरों ने….

आप सभी को सलाह दे रहे है इस विपदा से निकलने के लिए, यह भी एक प्रकार से ईश्वर का ही रूप है।

इनकी सलाह को ईश्वर की सलाह मानकर इनकी बातों पर अमल करें.!

यह सब हमारी भलाई के लिए है…. जान है तो जहान है….!!

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

3️⃣0️⃣❗0️⃣3️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣0️⃣
नियम का महत्व

एक संत थे। एक दिन वे एक जाट के घर गए। जाट ने उनकी बड़ी सेवा की। सन्त ने उसे कहा कि रोजाना नाम -जप करने का कुछ नियम ले लो। जाट ने कहा बाबा, हमारे को वक्त नहीं मिलता। सन्त ने कहा कि अच्छा, रोजाना ठाकुर जी की मूर्ति के दर्शन कर आया करो। जाट ने कहा मैं तो खेत में रहता हूं और ठाकुर जी की मूर्ति गांव के मंदिर में है, कैसे करूँ ? संत ने उसे कई साधन बताये, कि वह कुछ -न-कुछ नियम ले लें। पर वह यही कहता रहा कि मेरे से यह बनेगा नहीं, मैं खेत में काम करू या माला लेकर जप करूँ। इतना समय मेरे पास कहाँ है ? बाल -बच्चों का पालन पोषण करना है। आपके जैसे बाबा जी थोड़े ही हूँ कि बैठकर भजन करूँ। संत ने कहा कि अच्छा तू क्या कर सकता है ? जाट बोला कि पड़ोस में एक कुम्हार रहता है। उसके साथ मेरी मित्रता है। उसके और मेरे खेत भी पास -पास है और घर भी पास-पास है। रोजाना एक बार उसको देख लिया करूगाँ। सन्त ने कहा कि ठीक है। उसको देखे बिना भोजन मत करना। जाट ने स्वीकार कर लिया। जब उसकी पत्नी कहती कि भोजन कर लो। तो वह चट बाड़ पर चढ़कर कुम्हार को देख लेता और भोजन कर लेता। इस नियम में वह पक्का रहा। एक दिन जाट को खेत में जल्दी जाना था। इसलिए भोजन जल्दी तैयार कर लिया। उसने बाड पर चढ़कर देखा तो कुम्हार दीखा नहीं। पूछने पर पता लगा कि वह तो मिट्टी खोदने बाहर गया है। जाट बोला कि कहां मर गया, कम से कम देख तो लेता। अब जाट उसको देखने के लिए तेजी से भागा। उधर कुम्हार को मिट्टी खोदते-खोदते एक हाँडी मिल गई। जिसमें तरह-तरह के रत्न, अशर्फियाँ भरी हुई थी। उसके मन में आया कि कोई देख लेगा तो मुश्किल हो जायेगी। अतः वह देखने के लिए ऊपर चढा तो सामने वह जाट आ गया। कुम्हार को देखते ही जाट वापस भागा, तो कुम्हार ने समझा कि उसने वह हाँडी देख ली। और अब वह आफत पैदा करेगा। कुम्हार ने उसे रूकने के लिए आवाज लगाई। जाट बोला कि बस देख लिया, देख लिया।कुम्हार बोला कि अच्छा, देख लिया तो आधा तेरा आधा मेरा, पर किसी से कहना मत। जाट वापस आया तो उसको धन मिल गया। उसके मन में विचार आया कि संत से अपना मनचाहा नियम लेने में इतनी बात है। अगर सदा उनकी आज्ञा का पालन करू तो कितना लाभ है। ऐसा विचार करके वह जाट और उसका मित्र कुम्हार दोनों ही भगवान् के भक्त बन गए।
तात्पर्य यह है कि हम दृढता से अपना एक उद्देश्य बना ले और नियम ले ले..!!
🙏🏾🙏🏿🙏🏼जय जय श्री राधे🙏🏽🙏🏻🙏

Posted in Ebooks & Blogspot

પુસ્તકપ્રેમીઓ માટે ઉપયોગી વેબસાઈટસ

[1] Readgujarati.com :-

  • ટૂંકી વાર્તા, પ્રવાસવર્ણન, નિબંધ, હાસ્ય-લેખ, કાવ્ય, ગઝલ, બાળસાહિત્ય, લઘુકથા, વિજ્ઞાનકથા સહિત વિવિધ પ્રકારના ગુજરાતી સાહિત્યનો રસથાળ. રોજેરોજ પ્રકાશિત થતી બે કૃતિઓ સાથે 3000થી વધુ લેખોનો સંગ્રહ.

[2] mavjibhai.com :-

  • ગુજરાતી સુગમ સંગીત, લોકગીત, ગઝલ તેમજ કાવ્યનો સમન્વય. મનગમતા ગીતો સરળતાથી શોધવા માટે કક્કાવાર અનુક્રમણિકા. 300 થી વધુ કવિઓ, 75થી વધુ સંગીતકારોની 1500થી વધુ કૃતિઓ.

[3] Layastaro.com :-

  • રોજેરોજ કવિતા, કવિતાનો આસ્વાદ અને વિવિધ પ્રકારના પદ્યસાહિત્યનું રસપાન કરાવતી વેબસાઈટ. સુપ્રસિદ્ધ કવિઓ તેમજ ગઝલકારોની ઉત્તમ રચનાઓ.

[4] Aksharnaad.com :-
ચૂંટેલા સાહિત્ય-લેખો, વાર્તાઓ, ગીરના પ્રવાસવર્ણનો, પુસ્તક સમીક્ષા તેમજ અનુવાદીત કૃતિઓ સહિત પ્રાર્થના-ગરબા-ભજનનું મનનીય સંપાદન.

[5] Gujaratilexicon.com :-

  • આશરે 25 લાખ શબ્દો ધરાવતો ઓનલાઈન ગુજરાતી શબ્દકોષ. ગુજરાતીથી અંગ્રેજી અને અંગ્રેજીથી ગુજરાતી શબ્દાર્થ શોધવાની સુવિધા. ગુજરાતી જોડણી તપાસવા સહિત વિવિધ પ્રકારની અન્ય ઉપયોગી સુવિધાઓ.

[6] Bhagwadgomandal.com :-

  • ૨.૮૧ લાખ શબ્દો અને ૮.૨૨ લાખ અર્થોને સમાવિષ્ટ કરતો ગુજરાતી ભાષાના સાંસ્કૃતિક સીમાસ્તંભરૂપ જ્ઞાનનો વ્યાપક, વૈજ્ઞાનિક અને ઉત્તમ ખજાનો. ડિજિટલરૂપમાં ઇન્ટરનેટ અને સીડી માધ્યમ દ્વારા ઉપલબ્ધ. સંપૂર્ણ રીતે યુનિકોડમાં ઓનલાઈન નિ:શુલ્ક ઉપલબ્ધ.

[7] Vmtailor.com :-

  • ડૉ. વિવેક ટેલરના સ્વરચિત કાવ્યોની સૌપ્રથમ બ્લોગ પ્રકારની વેબસાઈટ. સુંદર ગઝલો, ગીતો, હાઈકુ અને કાવ્યો. સચિત્ર ગઝલો સાથે પ્રત્યેક સપ્તાહે એક નવી કૃતિનું આચમન.
    (8) dadabhagwan.in
    આધ્યાત્મિક ક્ષેત્રે ગુજરાતનો ડંકો દેશ પરદેશ માં વગાડનાર દાદા ભગવાન વડોદરા ના જ હતા. તેમના બધાજ પુસ્તકો ઉપલબ્ધ છે. Free download.
    [8] Vicharo.com :-
  • વ્યાખ્યાતા શ્રી કલ્પેશ સોનીના સ્વરચિત ચિંતનલેખોનું સરનામું. એ સાથે કવિતા, ગીત, જીવનપ્રસંગ અને હાસ્યલેખનો સમાવેશ. દર સપ્તાહે એક નવી કૃતિનું પ્રકાશન.

[9] Mitixa.com :-

  • કાવ્ય અને સંગીત સ્વરૂપે ગુજરાતી લોકગીતો, ભક્તિગીતો, શૌર્યગીતો, ગઝલો, ફિલ્મી ગીતો તેમજ અન્ય સુપ્રસિદ્ધ રચનાઓ.

[10] Sheetalsangeet.com :-

  • ઈન્ટરનેટ પર 24 કલાક પ્રસારીત થતો ગુજરાતી રેડિયો.

[11] Rankaar.com :-

  • પ્રાચીન-અર્વાચીન ગીતો, ગઝલો, કાવ્ય, ભજન, બાળગીતો, લગ્નગીત, સ્તુતિ, હાલરડાં સહિત નિયમિત પ્રકાશિત થતી સંગીતબદ્ધ રચનાઓનો સમન્વય.

[12] Urmisaagar.com :-

  • સ્વરચિત ઊર્મિકાવ્યો તેમજ ગુજરાતી સાહિત્યના કેટલાક ચૂંટેલા કાવ્યો,ગઝલોનું સંપાદન.

[13] Cybersafar.com

  • કોલમિસ્ટ શ્રી હિમાંશુ કિકાણીની ટેકનોલોજીના વિષયોને સરળ ભાષામાં સમજાવતી વેબસાઈટ.

[14] Saurabh-shah.com :-

  • જાણીતા પત્રકાર-લેખક શ્રી સૌરભ શાહની વેબસાઈટ.

[15] Jhaverchandmeghani.com :-

  • રાષ્ટ્રીય શાયર શ્રી ઝવેરચંદ મેઘાણીની વેબસાઈટ.

[16] Anand-ashram.com :-

  • સંતવાણી અને સંતસાહિત્ય ક્ષેત્રે કાર્ય કરનાર ડૉ. નિરંજન રાજ્યગુરુની વેબસાઈટ.

[17] Adilmansuri.com :-

  • કવિ શ્રી આદિલ મન્સૂરીની વેબસાઈટ.

[18] Rajendrashukla.com :-

  • જાણીતા કવિ-ગઝલકાર શ્રી રાજેન્દ્ર શુક્લની વેબસાઈટ.

[19] Manojkhanderia.com :-

  • કવિશ્રી મનોજ ખંડેરિયાની વેબસાઈટ.

[20] Pannanaik.com :-

  • કવિયત્રી પન્ના નાયકની વેબસાઈટ.

[21] Rameshparekh.in :-

  • કવિશ્રી રમેશ પારેખની વેબસાઈટ.

[22] Harilalupadhyay.org :-

  • સાહિત્યકાર શ્રી હરિલાલ ઉપાધ્યાયની વેબસાઈટ.

[23] Gujaratisahityaparishad.org :-

  • ગુજરાતી સાહિત્ય પરિષદની વેબસાઈટ.

[24] Nirmishthaker.com :-

  • સુપ્રસિદ્ધ કવિ, કાર્ટૂનિસ્ટ અને હાસ્યલેખક શ્રી નિર્મિશ ઠાકરની વેબસાઈટ.

[25] Vicharvalonu.com :-

  • જાણીતા સામાયિક ‘વિગેરે

[26] http://pustakalay.com/sahitya.htm :-

પુસ્તક ભેટ મેળવવા માટે Like કરો અમારું ફેસબુક પેઈજ અને ભાગ લો પુસ્તક ભેટમાં
http://www.fb.com/impustakpremi
ઈન્સ્ટાગ્રામ
Www.instagram.com/impustakpremi

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

Her her mahadev her Ji
Om namah shivaye Ji
(((सकारात्मक सोच का जाद,)))
एक ऋषि के दो शिष्य थे जिनमें से एक शिष्य सकारात्मक सोच वाला था वह हमेशा दूसरों की भलाई का सोचता था और दूसरा बहुत नकारात्मक सोच रखता था और स्वभाव से बहुत क्रोधी भी था एक दिन महात्मा जी अपने दोनों शिष्यों की परीक्षा लेने के लिए उनको जंगल में ले गये

जंगल में एक आम का पेड़ था जिस पर बहुत सारे खट्टे और मीठे आम लटके हुए थे ऋषि ने पेड़ की ओर देखा और शिष्यों से कहा की इस पेड़ को ध्यान से देखो फिर उन्होंने पहले शिष्य से पूछा की तुम्हें क्या दिखाई देता है

शिष्य ने कहा कि ये पेड़ बहुत ही विनम्र है लोग इसको पत्थर मारते हैं फिर भी ये बिना कुछ कहे फल देता है इसी तरह इंसान को भी होना चाहिए, कितनी भी परेशानी हो विनम्रता और त्याग की भावना नहीं छोड़नी चाहिए फिर दूसरे शिष्या से पूछा कि तुम क्या देखते हो, उसने क्रोधित होते हुए कहा की ये पेड़ बहुत धूर्त है बिना पत्थर मारे ये कभी फल नहीं देता इससे फल लेने के लिए इसे मारना ही पड़ेगा

इसी तरह मनुष्य को भी अपने मतलब की चीज़ें दूसरों से छीन लेनी चाहिए गुरु जी हँसते हुए पहले शिष्य की बढ़ाई की और दूसरे शिष्य से भी उससे सीख लेने के लिए कहा सकारात्मक सोच हमारे जीवन पर बहुत गहरा असर डालती है नकारात्मक सोच के व्यक्ति अच्छी चीज़ों मे भी बुराई ही ढूंढते हैं

उदाहरण के लिए:- गुलाब के फूल को काँटों से घिरा देखकर नकारात्मक सोच वाला व्यक्ति सोचता है की “इस फूल की इतनी खूबसूरती का क्या फ़ायदा इतना सुंदर होने पर भी ये काँटों से घिरा है ” जबकि उसी फूल को देखकर सकारात्मक सोच वाला व्यक्ति बोलता है की “वाह! प्रकर्ती का कितना सुंदर कार्य है की इतने काँटों के बीच भी इतना सुंदर फूल खिला दिया” बात एक ही है लेकिन फ़र्क है केवल सोच का
Her her mahadev her Ji

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

महान लेखक टालस्टाय की एक कहानी है – “शर्त “

इस कहानी में दो मित्रो में आपस मे शर्त लगती है कि, यदि उसने 1 माह एकांत में बिना किसी से मिले,बातचीत किये एक कमरे में बिता देता है, तो उसे 10 लाख नकद वो देगा । इस बीच, यदि वो शर्त पूरी नहीं करता, तो वो हार जाएगा ।
पहला मित्र ये शर्त स्वीकार कर लेता है । उसे दूर एक खाली मकान में बंद करके रख दिया जाता है । बस दो जून का भोजन और कुछ किताबें उसे दी गई ।

उसने जब वहां अकेले रहना शुरू किया तो 1 दिन 2 दिन किताबो से मन बहल गया फिर वो खीझने लगा । उसे बताया गया था कि थोड़ा भी बर्दाश्त से बाहर हो तो वो घण्टी बजा के संकेत दे सकता है और उसे वहां से निकाल लिया जाएगा ।
जैसे जैसे दिन बीतने लगे उसे एक एक घण्टे युगों से लगने लगे । वो चीखता, चिल्लाता लेकिन शर्त का खयाल कर बाहर किसी को नही बुलाता । वोअपने बाल नोचता, रोता, गालियां देता तड़फ जाता,मतलब अकेलेपन की पीड़ा उसे भयानक लगने लगी पर वो शर्त की याद कर अपने को रोक लेता ।

कुछ दिन और बीते तो धीरे धीरे उसके भीतर एक अजीब शांति घटित होने लगी।अब उसे किसी की आवश्यकता का अनुभव नही होने लगा। वो बस मौन बैठा रहता। एकदम शांत उसका चीखना चिल्लाना बंद हो गया।

इधर, उसके दोस्त को चिंता होने लगी कि एक माह के दिन पर दिन बीत रहे हैं पर उसका दोस्त है कि बाहर ही नही आ रहा है ।
माह के अब अंतिम 2 दिन शेष थे,इधर उस दोस्त का व्यापार चौपट हो गया वो दिवालिया हो गया।उसे अब चिंता होने लगी कि यदि उसके मित्र ने शर्त जीत ली तो इतने पैसे वो उसे कहाँ से देगा ।
वो उसे गोली मारने की योजना बनाता है और उसे मारने के लिये जाता है ।

जब वो वहां पहुँचता है तो उसके आश्चर्य का ठिकाना नही रहता ।
वो दोस्त शर्त के एक माह के ठीक एक दिन पहले वहां से चला जाता है और एक खत अपने दोस्त के नाम छोड़ जाता है ।
खत में लिखा होता है-
प्यारे दोस्त इन एक महीनों में मैंने वो चीज पा ली है जिसका कोई मोल नही चुका सकता । मैंने अकेले मे रहकर असीम शांति का सुख पा लिया है और मैं ये भी जान चुका हूं कि जितनी जरूरतें हमारी कम होती जाती हैं उतना हमें असीम आनंद और शांति मिलती है मैंने इन दिनों परमात्मा के असीम प्यार को जान लिया है । इसीलिए मैं अपनी ओर से यह शर्त तोड़ रहा हूँ अब मुझे तुम्हारे शर्त के पैसे की कोई जरूरत नही। इस उद्धरण से समझें कि लॉकडाउन के इस परीक्षा की घड़ी में खुद को झुंझलाहट,चिंता और भय में न डालें,उस परमात्मा की निकटता को महसूस करें और जीवन को नए दृष्टिकोण से देखने का प्रयत्न कीजिये,

इसमे भी कोई अच्छाई होगी यह मानकर सब कुछ भगवान को समर्पण कर दें।
विश्वास मानिए अच्छा ही होगा ।
लॉक डाउन का पालन करे।स्वयं सुरक्षित रहें,परिवार,समाज और राष्ट्र को सुरक्षित रखें।
लॉक डाउन के बाद जी तोड़ मेहनत करना है,स्वयं,परिवार और राष्ट्र के लिए…देश की गिरती अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए👍🏻👍🏻👍🏻

सभी को🙏🏻🙏🏻🙏🏻

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

[यह जापान में घटी, एक सच्ची घटना है।]

अपने मकान का नवीनीकरण करने के लिये, एक जापानी अपने मकान की दीवारों को तोड़ रहा था। जापान में लकड़ी की दीवारों के बीच ख़ाली जगह होती हैं, यानी दीवारें अंदर से पोली होती हैं।

जब वह लकड़ी की दीवारों को चीर-तोड़ रहा था, तभी उसने देखा कि दीवार के अंदर की तरफ लकड़ी पर एक छिपकली, बाहर से उसके पैर पर ठुकी कील के कारण, एक ही जगह पर जमी पड़ी है।

जब उसने यह दृश्य देखा तो उसे बहुत दया आई पर साथ ही वह जिज्ञासु भी हो गया। जब उसने आगे जाँच की तो पाया कि वह कील तो उसके मकान बनते समय पाँच साल पहले ठोंका गई थी!

एक छिपकली इस स्थिति में पाँच साल तक जीवित थी! दीवार के अँधेरे पार्टीशन के बीच, बिना हिले-डुले? यह अविश्वसनीय, असंभव और चौंका देने वाला था!

उसकी समझ से यह परे था कि एक छिपकली, जिसका एक पैर, एक ही स्थान पर पिछले पाँच साल से कील के कारण चिपका हुआ था और जो अपनी जगह से एक इंच भी न हिली थी, वह कैसे जीवित रह सकती है?

अब उसने यह देखने के लिये कि वह छिपकली अब तक क्या करती रही है और कैसे अपने भोजन की जरुरत को पूरा करती रही है, अपना काम रोक दिया।

थोड़ी ही देर बाद, पता नहीं कहाँ से, एक दूसरी छिपकली प्रकट हुई, वह अपने मुँह में भोजन दबाये हुये थी – उस फँसी हुई छिपकली को खिलाने के लिये! उफ़्फ़! वह सन्न रह गया! यह दृश्य उसके दिल को अंदर तक छू गया!

एक छिपकली, जिसका एक पैर कील से ठुका हुआ था, को, एक दूसरी छिपकली पिछले पाँच साल से भोजन खिला रही थी!

अद्भुत! दूसरी छिपकली ने अपने साथी के बचने की उम्मीद नहीं छोड़ी थी, वह पहली छिपकली को पिछले पाँच साल से भोजन करवा रही थी।

अजीब है, एक छोटा-सा जंतु तो यह कर सकता है, पर हम मनुष्य जैसे प्राणी, जिसे बुद्धि में सर्वश्रेष्ठ होने का आशीर्वाद मिला हुआ है, नहीं कर सकता!

कृपया अपने प्रिय लोगों को कभी न छोड़ें! लोगों को उनकी तकलीफ़ के समय अपनी पीठ न दिखायें! अपने आप को महाज्ञानी या सर्वश्रेष्ठ समझने की भूल न करें! आज आप सौभाग्यशाली हो सकते हैं पर कल तो अनिश्चित ही है और कल चीज़ें बदल भी सकती हैं!

प्रकृति ने हमारी अंगुलियों के बीच शायद जगह भी इसीलिये दी है ताकि हम किसी दूसरे का हाथ थाम सकें!

आप आज किसी का साथ दीजिये, कल कोई-न-कोई दूसरा आपको साथ दे देगा!

धर्म चाहे जो भी हो बस अच्छे जीवन ही धर्मपाल, मालिक हमारे कर्म देखता है धर्म नहीं..

Copied ..

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

एक बार की बात है कि किसी तालाब में दो मेंढक रहते थे जिनमें से एक बहुत मोटा था और दूसरा पतला| सुबह सवेरे जब वे दोनों खाने की तलाश में निकले थे, अचानक वे दोनों एक दूध के बड़े बर्तन में गिर गये, जिसके किनारे बहुत चिकने थे और इसी वजह से वो उसमें से बाहर नहीं निकल पा रहे थे|दोनों काफ़ी देर तक दूध में तैरते रहे उन्हें लगा कि कोई इंसान आएगा और उनको वहाँ से निकाल देगा लेकिन घंटों तक वहाँ कोई नहीं आया अब तो उनकी जान निकली जा रही थी | मोटा मेढक जो अब पैर चलाते चलाते थक गया था, बोला कि मेरे से अब तैरा नहीं जा रहा और कोई बचाने भी नहीं आ रहा है| अब तो डूबने के अलावा और कोई चारा ही नहीं बचा है|
पतले वाले ने उसे थोड़ा ढाँढस बंधाते हुए कहा कि मित्र कुछ देर और मेहनत से तैरते रहो ज़रूर कुछ देर बाद कोई ना कोई हल निकलेगा| इसी तरह फिर से कुछ घंटे बीत गये, मोटे मेंढक ने अब बिल्कुल उम्मीद छोड़ दी और बोला मित्र मैं अब पूरी तरह थक चुका हूँ और अब नहीं तैर सकता मैं तो डूबने जा रहा हूँ|
दूसरे मेंढक ने उसे बहुत रोका लेकिन वह जिंदगी से हार चुका था और खुद ही तैरना छोड़ दिया और डूब कर मर गया| पतले मेंढक ने अभी तक हार नहीं मानी थी और वो पैर चलाता रहा कुछ देर बाद उसने महसूस कि ज्यादा देर दूध के मथे जाने से उसका मक्खन बन चुका है|
और अब उसके पैरों के नीचे ठोस जगह हो चुकी थी| उसी का सहारा लेकर मेंढक ने छलाँग मारी और बाहर आ गया और अंत में उसकी जान बच गयी| अपने मित्र की मौत का उसे बड़ा दुख था, काश कुछ देर और संघर्ष करता तो वे दोनों बच सकते थे|शिक्षा-तो मित्रों, परेशानियाँ हर इंसान की जिन्दगी में आती हैं और कई बार तो हमारे सामने इतनी कठिन परिस्थितियां होती हैं जिनसे बाहर निकलना असंभव सा प्रतीत होता है, लेकिन यकीन मानिये हालात चाहे कितने भी बुरे क्यों ना हों, अगर आप हिम्मत ना हारें तो कोई ना कोई हल जरुर निकल सकता है| इसलिए कभी उम्मीद ना छोड़ें और समस्या कितनी भी बड़ी हो कभी उससे हारना नहीं चाहिए, प्रयास करते रहिए एक ना एक बार आप ज़रूर सफल होंगे यही इस कहानी की शिक्षा है|*