Posted in रामायण - Ramayan

जब हनुमान पहुंचे रावण के कक्ष में तो अद्भुत
था वहां का दृश्य

सीता की खोज करते हुए
हनुमानजी रावण के अंत:पुर
यानी शयनकक्ष में पहुंच गए तो वहां उन्होंने रावण
की हजारों पत्नियां देखीं।
हनुमानजी ने पहले
कभी भी सीता को देखा नहीं था,
उन्हें यह मालूम
नहीं था कि सीता दिखती कैसी हैं,
इस कारण सीता को खोजने
का आसान काम नहीं था। रावण की कई
पत्नियां बहुत सुंदर
थीं और हनुमानजी जिस सुंदर
स्त्री को देखते तो यही सोचते
कि कहीं यही सीता तो नहीं हैं।
यहां जानिए हनुमान किस प्रकार
समुद्र लांघकर लंका पहुंचे और हनुमान जब रावण के
शयनकक्ष में पहुंचे तो वहां का दृश्य कैसा था…

सीता की खोज के बाद श्रीराम के
अतिप्रिय हो गए हनुमान
सीता की खोज, हनुमानजी के
इस एक काम के कारण श्रीराम
भी उनके वश में हो गए। हनुमानजी ने
लंका जाकर जिस प्रकार
अपनी बुद्धिमानी से
सीता की खोज
की थी, उससे श्रीराम
भी अतिप्रभावित हो गए थे। श्रीराम ने
हनुमानजी से
कहा भी था कि मैं तुम्हारे ऋण से
कभी भी उऋण नहीं हो पाउंगा।
मैं सदा तुम्हारा ऋणी रहुंगा।
आगे जानिए हनुमानजी के इस महत्वपूर्ण कार्य से
जुड़े कुछ
रोचक प्रसंग…

– जांबवान् ने हनुमान से कहा था रावण को मारना नहीं,
लंका को जलाना नहीं
– लंका में प्रवेश से पहले हनुमान ने हराया किन तीन
राक्षसियों कोजांबवान् ने हनुमान से कहा था रावण
को मारना नहीं,
लंका को जलाना नहीं
समुद्र लांघने से पहले हनुमान
को अपनी शक्तियों का ध्यान
नहीं था। उस समय जांबवान ने हनुमान को उनके
सामर्थ्य और
शक्तियों का स्मरण करवाया। अपनी शक्तियां याद आते
ही हनुमानजी अत्यधिक उत्तेजित हो गए
और कहने लगे
कि अब तो मैं ऐसे सैकड़ों समुद्र लांघ सकता हूं, रावण और
उसकी पूरी लंका को उखाड़कर समुद्र में
डुबो सकता हूं, रावण
को किसी मच्छर के समान मार सकता हूं।

जब हनुमान इस प्रकार की बातें करने लगे तब जांबवान
ने
सोचा कि केसरीनंदन आवश्यकता से अधिक उत्तेजित
हो गए
हैं। जांबवान ने हनुमानजी को समझाया कि हम
श्रीराम के दूत हैं
और दूत को अपनी मर्यादा में
ही रहना चाहिए। दूत को लड़ाई-
झगड़ा करने का अधिकार नहीं है। अत: तुम सिर्फ
सीता की खोज करके आना। रावण
को मारना नहीं है और
ना ही लंका को जलाना है, साथ
ही किसी को नुकसान
भी नहीं पहुंचाना है। जब तुम्हें
सीता का पता मिल
जाएगा तो स्वयं श्रीराम सेना सहित रावण
की लंका पर
आक्रमण करेंगे और उसका नाश करेंगे।
वही कीर्ति और
प्रतिष्ठा के अनुरूप होगा। अत: हनुमान तुम इस बात का ध्यान
रखना।

आगे पढ़िए इसके बाद क्या हुआ…अपनी रक्षा के लिए
कर
सकते
हैं युद्ध
जब इस प्रकार जांबवान ने समझाया तो हनुमानजी ने
प्रश्न
किया कि यदि कोई खुद आगे होकर मुझ पर प्रहार करे तब
भी युद्ध ना करूं?
इस प्रश्न के जवाब में जांबवान ने हंसकर
कहा कि अपनी आत्म रक्षा के लिए युद्ध
किया जा सकता है।
इस प्रकार बातचीत होने के बाद
हनुमानजी ने सभी से
आज्ञा ली और वे समुद्र को लांघकर
लंका की ओर उड़ चले।
हनुमानजी को लंका के रास्ते में सबसे पहले मैनाक
पर्वत मिला।
मैनाक पर्वत ने हनुमान को विश्राम करने के लिए कहा। इस
बात पर हनुमान ने कहा कि जब तक श्रीराम का काम
पूरा नहीं हो जाता, मैं विश्राम नहीं कर
सकता।

इसके बाद हनुमानजी को सुरसा नाम
की राक्षसी मिली,
जो कि सर्पों की माता थी। देवताओं ने हनुमान
की बुद्धि और
बल की परीक्षा लेने का दायित्व
सुरसा को सौंपा था। देवताओं
के मन में संशय था कि हनुमान श्रीराम के काम
को पूरा कर
पाएंगे या नहीं। इस संशय को दूर करने के लिए उन्होंने
सुरसा की मदद ली थी।इस
प्रकार समझाया सुरसा को
सुरसा ने हवा में उड़ते हुए हनुमान को रोका और कहा कि तुम
मेरा आहार हो और तुम्हें मैं खाउंगी। तब हनुमान ने
कहा कि जब
मैं लौटकर आऊं, तब खा लेना, अभी मुझे जाने दो। इस
प्रकार
कहने के बाद भी जब
सुरसा नहीं मानी तो हनुमान ने
कहा कि ठीक है अपना मुंह खोलों, मैं तुम्हारे मुंह में
प्रवेश
करता हूं।

सुरसा ने जितना बड़ा मुंह खोला, हनुमान ने उससे कई
गुना बड़ा स्वयं का आकार कर लिया। फिर सुरसा ने बड़ा मुंह
किया तो हनुमान ने भी शरीर का आकार
बड़ा कर लिया। इस
प्रकार जब सुरसा का मुंह करीब सौ योजन के बराबर
हो गया तो हनुमान ने स्वयं का रूप छोटा सा किया और वे उस
राक्षसी के मुंह में प्रवेश करके, स्पर्श करके पुन:
बाहर आ
गए। इस प्रकार हनुमानजी को खाने
की सुरसा की बात
भी पूरी हो गई और वह शांत हुई।
हनुमान की बुद्धि देखकर
सुरसा प्रसन्न हो गई और मार्ग छोड़ दिया।
इसके बाद क्या हुआ, आगे पढ़िए…छाया से
प्राणी को पकड़
लेती थी ये राक्षसी
सुरसा को हराने के बाद हनुमान के मार्ग में सिंहिका नाम
की राक्षसी आई। यह
राक्षसी मायावी थी और छाया से
किसी भी प्राणी को पकड़
लेती थी। इस प्रकार
प्राणी को पकडऩे के बाद उसे
खा जाती थी। हनुमान उसके
क्षेत्र में पहुंचते ही सारी स्थिति समझ
गए थे और
सिंहिका कुछ करती, इसके पहले ही मुक्के
के एक ही प्रहार से
सिंहिका की जीवन लीला समाप्त
कर दी।
इसके बाद मिली लंकिनी
सिंहिका को हराने के बाद हनुमान का सामना हुआ
लंकिनी से।
लंकिनी लंका की रक्षा किया करती थी।
वह बहुत
शक्तिशाली और सर्तक रहने
वाली राक्षसी थी। लंका में
प्रवेश करने के लिए हनुमान ने बहुत ही छोटा सा रूप
बनाया था,
फिर भी लंकिनी ने हनुमान को रोक लिया था।
हनुमान ने
लंकिनी को मुक्के से प्रहार किया और वह अचेत
हो गई। इसके
बाद लंकिनी ने हनुमान से कहा कि बहुत पहले
ब्रह्माजी ने मुझे
बताया था कि जब किसी वानर के प्रहार से तू अचेत
हो जाएगी,
तब समझ लेना कि लंका का अंत करीब आ गया है।
ऐसा था रावण
के शयन कक्ष का दृश्य
लंकिनी को हराने के बाद हनुमान ने लंका में प्रवेश किया।
लंका बहुत बड़ी थी। इधर-उधर देख-
देखकर हनुमान
सीता की खोज करने लगे।
काफी जगह तलाश करने के बाद
हनुमान रावण के शयनकक्ष में पहुंच गए। रावण के अंत:पुर
का दृश्य अद्भुत था। रावण स्वर्ण मंडित यानी सोने से
बने हुए
पलंग पर सो रहा था। नीचे जमीन पर शानदार
गलीचा बिछा हुआ था। इस गलीचे पर रावण
की सहस्त्रों (हजारों) पत्नियां बेसुध होकर
सो रही थीं।
किसी स्त्री का मुख खुला हुआ
था तो किसी के मुंह से लार गिर
रही थी। कोई जोर-जोर से खर्राटे ले
रही थी तो कोई
बड़बड़ा रही थी। कोई स्त्री पान
खाते-खाते सो गई
थी तो उसके मुंह से पान पीक टपक
रही थी।
रावण की सभी पत्नियां एक से बढ़कर एक
सुंदर थीं और बेसुध
होकर सो रही थीं। हनुमान उनमें एक-एक
सुंदर
स्त्री को देखकर यही सोच रहे थे
कि कहीं यही सीता तो नहीं है।
हनुमान ने सीता को देखा नहीं था, इस कारण
वे
हजारों स्त्रियों में सीता को खोज नहीं पा रहे
थे। जब हनुमान
को यह लगा कि इन स्त्रियों में
सीता नहीं है तो वे वहां से अन्य
स्थानों पर सीता को खोजने लगे।
इसके कुछ समय बाद हनुमान की भेंट
विभीषण से हुई। विभीषण
ने हनुमान को बताया कि सीता को रावण
की अशोक वाटिका में
बंदी बनाकर रखा गया है। इसके बाद हनुमान ने
सीता से भेंट की,
लंका को जलाया। श्रीराम के पास लौटकर
सीता को किस
प्रकार खोजा, पूरी कथा सुनाई। —

विक्रम प्रकाश राइसोनय

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