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🔴नानक के जीवन में ऐसा उल्लेख है कि वे अपनी अनंत यात्राओं में–बहुत यात्राएं कीं उन्होंने। भारत में तो कीं ही, भारत के बाहर भी कीं। काबा और मक्का तक भी गये।–वे एक ऐसे गांव के पास पहुंचे जो फकीरों की ही बस्ती थी। सूफियों का गांव था। और उन सूफी दरवेशों का जो प्रमुख था, उसे खबर मिली कि भारत से एक फकीर आया है, पहुंचा हुआ सिद्ध है, गांव के बाहर ठहरा हुआ है–गांव के बाहर ही सरहद पर, एक कुएं के पास, एक वृक्ष की छाया में।
रात नानक ने और उनके शिष्य मरदाना ने विश्राम किया था।
नानक चलते थे तो मरदाना सदा उनके साथ चलता था। मरदाना उनका एक मात्र संगी-साथी था। नानक गाते गीत,मरदाना धुन बजाता। नानक गुनगुनाते, मरदाना ताल देता। नानक प्रभु के गुणों के गीत उतारते, मरदाना स्वर साधता। मरदाना के बिना नानक अधूरे से थे। गीत तो उनके पास थे, मरदाना जैसे उनकी बांसुरी था।
सुबह-सुबह नानक गा रहे थे, सूरज उग रहा था और मरदाना ताल दे रहा था, तभी उस फकीर का संदेशवाहक आया। उस फकीर ने सांकेतिक रूप से–सूफियों का ढंग, अलमस्तों का ढंग, अल्हड़ों का ढंग–एक स्वर्ण पात्र में दूध भरकर भेज दिया था। इतना भर दिया था दूध कि एक बूंद भी उसमें अब और न समा सके। जो लेकिन आया था पात्र, उसे भी बड़ा संभालकर लाना पड़ा थी। क्योंकि अब छलका तब छलका। इतना भरा था। ऐसा लबालब था।
पात्र लाकर उसने नानक को भेंट दिया और कहा, मेरे सदगुरु ने भेजा है; भेंट भेजी है। नानक ने एक क्षण पात्र को देखा, मरदाना सुबह-सुबह ही नानक के चरणों पर लाकर कुछ फूल चढ़ाया था, उन्होंने एक फूल उठाया और दूध से भरे पात्र में तैरा दिया। अब फूल का कोई वजन ही न था, वह तैर गया दूध पर। एक बूंद दूध भी बाहर न गिरा। और कहा नानक ने, ले जाओ वापिस, मैंने भेंट में कुछ जोड़ दिया; तुम न समझ सकोगे, तुम्हारा गुरु समझ लेगा।
और गुरु समझा।
भागा हुआ आया, नानक के चरणों में गिरा और कहा कि आप मेहमान बनें। मैंने पात्र भेजा था भर कर यह कहने कि अब और फकीरों की इस बस्ती में जरूरत नहीं। यह बस्ती फकीरों से लबालब है। यह मस्तों की बस्ती है, अब आप यहां किसलिए आए हैं। लेकिन आपने गजब कर दिया। आपने एक फूल तैरा दिया। यह तो मैंने सोचा भी न था, इसकी तो कल्पना भी न की थी, कि फूल तैर सकता है। क्योंकि फूल कुछ डूबेगा नहीं–ऊपर ऊपर ही रहा। रहा होगा हलका-फूलका फूल। टेसू का फूल। कि चांदनी का फूल। डूबा ही नहीं तो पात्र से दूध गिरने का सवाल ही न उठा! समझ गया आपका संदेश कि आप आए हैं बस्ती में, फूल की तरह समा जाएंगे। आएं, स्वागत हैं! बस्ती में कितने ही फकीर हों, आपके लिए जगह है। फूल ने खबर दे दी।

ओशो – साहिब मिल साहिब भये
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🔴सेठ चंदूलाल किसी सरकारी कार्य से इंग्लैंड भेजे गए। लंदन में बहुत बड़ी और खूबसूरत इमारत को देख कर ठिठक कर रह गए। उन्होंने पास ही में देखा कि एक आदमी खड़ा है, जो लगातार एक के बाद एक सिगरेट पीए जा रहा है। चंदूलाल ऐसा अवसर नहीं छोड़ सकते थे। बड़े सैद्धांतिक आदमी हैं। भारतीय और सैद्धांतिक न हो, ऐसा होता ही नहीं। उस आदमी के पास जाकर पूछा, महोदय, मैंने अभी-अभी निरीक्षण किया कि आपने दस मिनट के अंदर तीन सिगरेटें फूंक डालीं। अरे कुछ तो सोचो! इस तरह अपने आचरण को भ्रष्ट कर रहे हो? धुएं में उड़ा रहे हो?

वह अंग्रेज बोला, हां, मैं चेन-स्मोकर हूं। शृंखलाबद्ध सिगरेट पीता हूं। दुनिया के सबसे बढ़िया सिगरेट पीने का आदी हूं।

चंदूलाल ने पूछा, इस सिगरेट का एक पैकेट कितने में आता है?

जवाब मिला, भारतीय मुद्रा के हिसाब से पचास रुपए में।
चंदूलाल ने कहा, बाप रे बाप! पचास रुपए में एक पैकेट! आप दिन भर में कितने पैकेट पी जाते हैं?
उस आदमी ने कहा, करीब दस पैकेट।
चंदूलाल बोले, गोविंद! गोविंद!! आप एक दिन में पांच सौ रुपयों का धुआं उड़ाते हैं! अर्थात एक माह में पंद्रह हजार का और एक साल में एक लाख अस्सी हजार का!
मारवाड़ी तो मारवाड़ी! हिसाब फैला दिया, पूरा बही-खाता खोल दिया। जरा यह तो बताइए कि आप कितने वर्षों से धूम्रपान कर रहे हैं?
उत्तर मिला, बीस वर्षों से।
चंदूलाल ने कहा, हद हो गई। हे प्रभु, अब तो तू ही बचा। इसका मतलब यह कि आप अब तक छत्तीस लाख रुपयों की सिगरेट पी चुके। अरे जरा सोचिए…। ब्रह्म सत्य, जगत मिथ्या! यह जगत तो मिथ्या है, ब्रह्म सत्य है। और मिथ्या को फूंक-फूंक कर धुएं में खराब कर रहे हो! छत्तीस लाख गंवा दिए! आपकी यह धूम्रपान की आदत, यह गंदी आदत न होती तो यह सामने जो शानदार इमारत खड़ी है, यह आपकी हो सकती थी।
अब देखना, जगत मिथ्या और सामने खड़ी हुई शानदार इमारत, यह आपकी हो सकती थी! उस अंग्रेज ने पूछा, श्रीमान जी, क्या आप सिगरेट नहीं पीते?
चंदूलाल ने कहा, छीः-छीः! पीने की बात, मैं कभी छूता तक नहीं, मैं सनातनधर्मी, सदाचारी, चरित्रवान भारतीय हूं। तुम जैसा फिरंगी नहीं, मलेच्छ कहीं के!
अंग्रेज ने कहा, क्या आपके पास ऐसा शानदार बेशकीमती भवन है? चंदूलाल ने कहा कि नहीं भाई, ऐसा भवन तो मेरे पास नहीं है। मैं तो एक गरीब भारतीय हूं।
उस अंग्रेज ने नई सिगरेट सुलगाते हुए कहा, लेकिन यह भवन मेरा है।

मत पीओ सिगरेट, मत खाओ पान; इससे होगा क्या? थोथी बातों में यह देश अटका है। पानी छान कर पीओ। पर्यूषण में व्रत रखो। नमाज पढ़ो, हज कर आओ। काशी हो आओ। गंगा-स्नान करो। मगर इससे तुम्हारे जीवन में सुख तो न हुआ, न होगा। सुख हो सकता है, लेकिन यह सारी व्यर्थ की धारणाओं को छोड़ देना पड़ेगा। और चूंकि मैं इन धारणाओं को छोड़ने को कह रहा हूं, तुम्हें दुश्मन जैसा मालूम पड़ता हूं।
मैं तुम्हारा कल्याण-मित्र हूं। भीतर पहले आजादी आए तो बाहर भी आजादी फैल सकती है। स्वतंत्रता का सूत्रपात तुम्हारे केंद्र से होना चाहिए। फिर उसकी किरणें बाहर विकीर्ण हो सकती हैं। उसी क्रांति के मैं आधार रख रहा हूं।

नारायण प्रसाद, हिम्मत करो। अगर सच में तुम्हें अनुभव होता है कि यह कैसी आजादी है, तो मैं तुम्हें आजादी देना चाहता हूं। उस आजादी को चखो। अगर तुम कहते हो, यहां हर आदमी दुखी है और सुख के कोई आसार नजर नहीं आते, अगर सच में ही आसार नजर नहीं आते तो मैं तुम्हें आसार नजर दिला सकता हूं। न केवल आसार, बल्कि अनुभव करा सकता हूं। फिर हिम्मत करो। फिर डूबो। फिर इस गैरिक गंगा में उतरो। फिर संन्यास की स्वतंत्रता का स्वाद लो। संन्यास ही स्वतंत्रता है–एकमात्र स्वतंत्रता।

ओशो – सहज आशिकी नाहीं (7)
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हनुमान जी की विनयशीलता

हनुमान जी की विनयशीलता

भगवान श्रीराम वनवास काल के दौरान संकट में हनुमान जी द्वारा की गई अनूठी सहायता से अभिभूत थे। एक दिन उन्होंने कहा, ‘हे हनुमान, संकट के समय तुमने मेरी जो सहायता की, मैं उसे याद कर गदगद हो उठा हूं। सीता जी का पता लगाने का दुष्कर कार्य तुम्हारे बिना असंभव था। लंका जलाकर तुमने रावण का अहंकार चूर-चूर किया, वह कार्य अनूठा था। घायल लक्ष्मण के प्राण बचाने के लिए यदि तुम संजीवनी बूटी न लाते, तो न जाने क्या होता?’ तमाम बातों का वर्णन करके श्रीराम ने कहा, ‘तेरे समान उपकारी सुर, नर, मुनि कोई भी शरीरधारी नहीं है। मैंने मन में खूब विचार कर देख लिया, मैं तुमसे उॠण नहीं हो सकता।’

सीता जी ने कहा, ‘तीनों लोकों में कोई ऐसी वस्तु नहीं है, जो हनुमान जी को उनके उपकारों के बदले में दी जा सके।’

श्रीराम ने पुन: जैसे ही कहा, ‘हनुमान, तुम स्वयं बताओ कि मैं तुम्हारे अनंत उपकारों के बदले क्या दूं, जिससे मैं ॠण मुक्त हो सकूं।’

श्री हनुमान जी ने हर्षित होकर, प्रेम में व्याकुल होकर कहा, ‘भगवन, मेरी रक्षा कीजिए- मेरी रक्षा कीजिए, अभिमान रूपी शत्रु कहीं मेरे तमाम सत्कर्मों को नष्ट नहीं कर डाले। प्रशंसा ऐसा दुर्गुण है, जो अभिमान पैदा कर तमाम संचित पुण्यों को नष्ट कर डालता है।’ कहते-कहते वह श्रीराम जी के चरणों में लोट गए। हनुमान जी की विनयशीलता देखकर सभी हतप्रभ हो उठे।
|| जय श्री राम जय हनुमान प्रातः वंदन मंगल नमन सभी हरी राम भक्तों को जय हनुमान जय श्री राम
|| जय श्री राम ||
|| जय श्री राम ||

भवानी संकर

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स्त्रियों से दूर रहने वाले हनुमान को इस मंदिर में स्त्री रूप में पूजा जाता है, जानिए कहां है यह मंदिर और क्या है इसका रहस्य
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पवन पुत्र व राम भक्त हनुमान को युगों से लोग पूजते आ रहे हैं. उन्हें बाल ब्रह्मचारी भी कहा जाता है जिस कारण स्त्रियों को उनकी किसी भी मूर्ति को छूने से मना किया गया है. वे देवता रूप में विभिन्न मंदिरों में पूजे जाते हैं लेकिन एक ऐसा मंदिर भी है जहां पर हनुमान को पुरुष नहीं बल्कि स्त्री के रूप में पूजा जाता है.
अद्भुत है यह मंदिर जहां हनुमान को स्त्री स्वरूप में देखा जाता है. छत्तीसगड़ के बिलासपुर में प्रसिद्ध यह मंदिर एक प्रचीन मंदिर है जहां पर हनुमान के स्त्री के रूप के पीछे छिपी दस हजार साल पुरानी एक कथा प्रचलित है.

कहां है ये मंदिर
यह मंदिर छत्तीसगड़ के बिलासपुर जिले से 25 कि. मी. दूर रतनपुर में है. कहा जाता है कि यह एक महत्वपूर्ण जगह है जो काफी महान है. इतना ही नहीं, इस नगरी को महामाया नगरी भी कहा जाता है क्योंकि यहां पर मां महामाया देवी मंदिर और गिरजाबंध में स्थित हनुमानजी का मंदिर है.

इस छोटी सी नगरी में स्थित हनुमान जी का यह विश्व में इकलौता ऐसा मंदिर है जहां हनुमान का नारी रूप में पूजन किया जाता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मंदिर में आने वाला हर एक भक्त हजारों मन्नतें लेकर आता है और इस स्थान से वो कभी भी निराश होकर नहीं लौटता. लोगों की श्रद्धा व भावना से भरपूर इस मंदिर में हर समय लोगों का आना-जाना लगा रहता है.
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लेकिन क्यों होती है स्त्री रूप में पूजा?
कहा जाता है कि हनुमान का स्त्री रूप में यहां पूजा जाना एक कथा का परिणाम है जो हजारों वर्षों पुरानी है. तकरीबन दस हजार वर्ष पुरानी बात है जब एक दिन रतनपुर के राजा पृथ्वी देवजू जिन्हें एक शारीरिक कोढ़ था वे इस रोग के कारण काफी उदास हो गए. इस रोग की वजह से वे ना तो कोई काम कर सकते थे और ना ही जिंदगी का आनंद उठा सकते थे. उदासी में बैठे-बैठे राजा को नींद आ गई.

नींद के दौरान उन्होंने एक सपना देखा जिसमें उन्हें एक ऐसे रूप के दर्शन हुए जो वास्तव में है ही नहीं. उन्होंने संकटमोचन हनुमान को देखा लेकिन स्त्री रूप में. वे लंगूर की भांति दिख रहे थे लेकिन पूंछ नहीं थी, उनके एक हाथ में लड्डू से भरी थाली थी और दूसरे हाथ में राम मुद्रा. कानों में भव्य कुंडल व माथे पर सुंदर मुकुट माला भी थी. उनका यह दृश्य देख राजा अचंभित हो उठा.
एक अप्सरा के पुत्र थे हनुमान पर फिर भी लोग उन्हें वानरी की संतान कहते हैं….जानिए पुराणों में छिपे इस अद्भुत रहस्य को
इसीलिए बना ऐसा मंदिर
सपने में हनुमान के स्त्री रूप ने राजा से एक बात कही. हनुमान ने राजा से कहा कि “हे राजन् मैं तेरी भक्ति से अत्यंत प्रसन्न हूं और मैं तुम्हारा कष्ट अवश्य दूर करूंगा. तू एक मंदिर का निर्माण करवा और उसमें मुझे बैठा. मंदिर के पीछे एक तालाब भी खुदवा जिसमें मेरी विधिवत पूजा करते हुए तू स्नान करना. इससे तुम्हारे शरीर का यह कोढ़ रोग आवश्य दूर हो जाएगा.”
नींद खुलते आते ही राजा ने गिरजाबन्ध में ठीक वैसा ही मंदिर बनवाना शुरु कर दिया जैसा कि हनुमान ने उसके सपने में बताया था लेकिन मंदिर पूरा होते ही राजा को उसमें रखने के लिए मूर्ति कहां से लाई जाए यह चिंता सताने लगी. इसका उपाय भी संकटमोचन हनुमान ने दोबारा से राजा के स्वप्न में आकर दिया.

एक रात हनुमान राजा के सपने में फिर से आए और कहा कि “मां महामाया के कुण्ड में मेरी मूर्ति रखी हुई है. हे राजन् तू उसी मूर्ति को यहां लाकर मंदिर में स्थापित करवा.” अगले दिन ही राजा अपने परिजनों और पुरोहितों के साथ देवी महामाया के मंदिर में गए लेकिन बहुत ढूंढने पर भी उन्हें मूर्ति नहीं मिली. राजा काफी बेचेन हो गया.
हताश राजा इसी चिंता में विश्राम करने के लिए अपने कक्ष में आया और सो गया. नींद आते ही हनुमान फिर से राजा के सपने में आए और बोले “राजन तू हताश न हो मैं वहीं हूं तूने ठीक से तलाश नहीं किया. उस मंदिर में जहां लोग स्नान करते हैं उसी में मेरी मूर्ति है.”

जब राजा ने वह मूर्ति खोजे तो यह वही मूर्ति थी जिसे राजा ने अपने स्वप्न में देखा था. मूर्ति को पाते ही राजा प्रसन्न हो उठा और जल्द से जल्द उसकी स्थापना मंदिर में करवाई. हनुमान के निर्देश अनुसार इस मंदिर के पीछे तालाब भी खुदवाया गया. प्रसन्नता भरे राजा ने हनुमान से वरदान भी मांगा था कि जो भी यहां दर्शन को आए उसकी हर इच्छा अवश्य पूरी हो.
एक अद्भुत तेज है इस मूर्ति में
राजा को मिली इस मूर्ति में अनेक विशेषताएं हैं. इसका मुख दक्षिण की ओर है और साथ ही मूर्ति में पाताल लोक़ का चित्रण भी है. मूर्ति में हनुमान को रावण के पुत्र अहिरावण का संहार करते हुए दर्शाया गया है. यहां हनुमान के बाएं पैर के नीचे अहिरावण और दाएं पैर के नीचे कसाई दबा हुआ है. हनुमान के कंधों पर भगवान राम और लक्ष्मण की झलक है. उनके एक हाथ में माला और दूसरे हाथ में लड्डू से भरी थाली है. कहा जाता है कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगभग 84 किलोमीटर दूर रमई पाट में भी एक ऐसी ही मूर्ति स्थापित है।
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ϒ निरंतर प्रयास। ϒ

महात्मा बुद्ध ज्ञान प्राप्ति के लिए घोर तप में लगे थे। उन्होंने शरीर को काफी कष्ट दिया, यात्राएं की घने जंगलों में कड़ी साधना की, पर आत्मज्ञान की प्राप्ति नही हुई। एक दिन बुद्ध निराश होकर सोचने लगे मैंने अभी तक कुछ भी प्राप्त नही किया। अब आगे क्या कर पाउँगा? निराशा, अविश्वास के इन नकारात्मक भावों ने उन्हें क्षुब्ध कर दिया। कुछ ही क्षणों बाद उन्हें प्यास लगी। वे थोड़ी दूर स्थित एक झील तक पहुंचे। वहां उन्होंने एक दृश्य देखा कि एक नन्ही सी गिलहरी के दो बच्चे झील में डूब रहे है। पहले ताे वह गिलहरी जड़वत बैठी रही, फिर कुछ देर बाद उठकर झील के पास गई, अपना सारा शरीर झील के पानी में भिगोया और फिर बाहर आकर पानी झाड़ने लगी। ऐसा वह बार – बार करने लगी।

बुद्ध सोचने लगे, इस गिलहरी का प्रयास कितना मूर्खतापूर्ण है। क्या कभी यह इस झील को सुखा सकेगी? किन्तु गिलहरी का यह क्रम लगातार जारी था। “बुद्ध को लगा मानो गिलहरी कह रही हो – यह झील कभी खाली होगी या नहीं, यह मैं नहीं जानती, किन्तु मैं अपना प्रयास नहीं छोडूंगी।” अंततः उस छाेटी सी गिलहरी ने महात्मा बुद्ध को अपने लक्ष्य-मार्ग से विचलित होने से बचा लिया। वे सोचने लगे कि जब यह नन्ही गिलहरी अपने लघु सामर्थ्य से झील को सूखा देने के लिए कृत संकल्पित है तो मुझमें क्या कमी है? मैं तो इससे हजार गुना अधिक क्षमता रखता हूँ। यह सोचकर महात्मा बुद्ध पुनः अपनी साधना में लग गए और एक दिन बाेधि-वृक्ष तले उन्हें ज्ञान का आलोक प्राप्त हुआ।

सीख – असफलताओं के बावजूद, असफलताओं से सीख लेकर – लगातार प्रयास जारी रखना चाहिए। यदि हम प्रयास करना न छोड़े तो एक न एक दिन लक्ष्य की प्राप्ति हो ही जाती है। शांत दिमाग से धैर्य के साथ प्रयास जारी रखें। परिवर्तन व risk लेने से घबराये नहीं। Life में Growth करना है तो परिवर्तन जरूरी है। सफलता प्राप्त करने के लिए अपने Comfort Zone से बाहर निकले। प्रयासों के छोटे-छोटे सकारात्मक step के साथ आगे बढ़े। सफलता आपको अवश्य मिलेगी।

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राजस्थान के लोकगीत-

  1. मोरिया

इस लोकगीत में ऐसी लड़की की व्यथा है, जिसका विवाह संबंध निश्चित हो गया है किन्तु विवाह होने में देरी है।

  1. औळ्यू

ओळ्यूू का मतलब ‘याद आना’ है। दाम्पत्य प्रेम से परिपूर्ण विलापयुक्त लयबद्ध गीत जिसमें पति के लिए भंवरजी, कँवरजी का तथा पत्नी के लिए मरवण व गौरी का प्रयोग किया गया है।

  1. घूमर

गणगौर अथवा तीज त्यौहारों के अवसर पर स्त्रियों द्वारा घूमर नृत्य के साथ गाया जाने वाला गीत है, जिसके माध्यम से नायिका अपने प्रियतम से श्रृंगारिक साधनों की मांग करती है।

  1. गोरबंध

गोरबंध, ऊंट के गले का आभूषण है। मारवाड़ तथा शेखावटी क्षेत्र में इस आभूषण पर गीत गोरबंध नखरालो गीत गाया जाता है। इस गीत से ऊँट के शृंगार का वर्णन मिलता है।

5.कुरजां

यह लोकप्रिय गीत में कुरजां पक्षी को संबोधित करते हुए विरहणियों द्वारा अपने प्रियतम की याद में गाया जाता है, जिसमें नायिका अपने परदेश स्थित पति के लिए कुरजां को सन्देश देने का कहती है।

6.झोरावा

जैसलमेर क्षेत्र का लोकप्रिय गीत जो पत्नी अपने पति के वियोग में गाती है।

  1. कागा

कौवे का घर की छत पर आना मेहमान आने का शगुन माना जाता है। कौवे को संबोधित करके प्रेयसी अपने प्रिय के आने का शगुन मानती है और कौवे को लालच देकर उड़ने की कहती है।

8.कांगसियों

यह राजस्थान का एक लोकप्रिय श्रृंगारिक गीत है।

  1. सुवटिया

उत्तरी मेवाड़ में भील जाति की स्त्रियां पति -वियोग में तोते (सूवे) को संबोधित करते हुए यह गीत गाती है।

10.जीरो

इस लोकप्रिय गीत में स्त्री अपने पति से जीरा न बोने का अनुनय-विनय करती है।

11.लांगुरिया

करौली की कैला देवी की आराधना में गाये जाने वाले भक्तिगीत लांगुरिया कहलाते हैं।

  1. मूमल

यह जैसलमेर क्षेत्र का लोकप्रिय गीत है, जिसमें लोद्रवा की राजकुमारी मूमल के सौन्दर्य का वर्णन किया गया है। यह एक श्रृंगारिक गीत है।

13.पावणा

विवाह के पश्चात् दामाद के ससुराल जाने पर भोजन के समय अथवा भोजन के उपरान्त स्त्रियों द्वारा गया जाने वाला गीत है।

  1. सिठणें

यह विवाह के उपलक्ष्य में गाया जाने वाला गाली गीत है जो विवाह के समय स्त्रियां हंसी-मजाक के उद्देश्य से समधी और उसके अन्य सम्बन्धियों को संबोधित करते हुए गाती है।

  1. हिचकी

मेवात क्षेत्र अथवा अलवर क्षेत्र का लोकप्रिय गीत दाम्पत्य प्रेम से परिपूर्ण जिसमें प्रियतम की याद को दर्शाया जाता है।

16.कामण

कामण का अर्थ है – जादू-टोना। पति को अन्य स्त्री के जादू-टोने से बचाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में स्त्रियों द्वारा गाया जाने वाला गीत है।

  1. पीपली

मारवाड़ बीकानेर तथा शेखावटी क्षेत्र में वर्षा ऋतु के समय स्त्रियों द्वारा गया जाने वाला गीत है।

  1. सेंजा

यह एक विवाह गीत है, जो अच्छे वर की कामना हेतु महिलाओं द्वारा गया जाता है।

19.जच्चा

यह बच्चे के जन्म के अवसर पर गाया जाने वाला गीत है, जिसे होलरगीत भी कहते हैं।

  1. चिरमी

चिरमी एक पौधा है जिसके बीज आभूषण तौलने में प्रयुक्त होते थे। चिरमी के पौधे को सम्बोधित कर नायिका द्वारा आल्हादित भाव से ससुराल में आभूषणों व चुनरी का वर्णन करते हुए स्वयं को चिरमी मान कर पिता की लाडली बताती है। इसमें पीहर की याद की भी झलक है।

  1. केसरिया बालम

राजस्थान के इस अत्यंत लोकप्रिय गीत में नायिका विरह से युक्त होकर विदेश गए हुए अपने पति की याद करती है तथा देश में आने की अनुनय करती है।

22.हिण्डोल्या

राजस्थानी स्त्रियां श्रावण मास में झूला-झूलते हुए यह गीत गाती है।

  1. हमसीढो

भील स्त्री तथा पुरूष दोनों द्वारा सम्मिलित रूप से मांगलिक अवसरों पर गाया जाने वाला गीत है।

  1. ढोला-मारू

सिरोही क्षेत्र का यह लोकप्रिय गीत ढोला-मारू के प्रेम-प्रसंग पर आधारित है तथा इसे ढाढ़ी लोग गाते हैं।

  1. रसिया

रसिया होली के अवसर पर ब्रज, भरतपुर व धौलपुर क्षेत्रों के अलावा नाथद्वारा के श्रीनाथजी के मंदिर में गए जाने वाले गीत है जिनमें अधिकतर कृष्ण भक्ति पर आधारित होते हैं।

  1. इडुणी

इडुणी पानी भरने के लिए मटके के नीचे व सर के ऊपर रखे जाने वाली सज्जा युक्त वलयाकार वस्तु को कहते हैं। यह गीत पानी भरने जाते समय स्त्रियों द्वारा गाया जाता है। इसमें इडुणी के खो जाने का जिक्र होता है।

  1. पणिहारी

यह पनघट से जुड़े लोक गीतों में सर्वाधिक प्रसिद्ध है। पणिहारी गीत में राजस्थानी स्त्री का पतिव्रता धर्म पर अटल रहना बताया गया है। इसमें पतिव्रत धर्म पर अटल पणिहारिन व पथिक के संवाद को गीत रूप में गाया जाता है। जैसे – कुण रे खुदाया कुआँ, बावड़ी ए पणिहारी जी रे लो।

  1. चौमासा(वर्षा ऋतु )के गीत

वर्षा ऋतु से संबंधित गीत वर्षा ‘चौमासा गीत’ कहलाते है। वर्षा ऋतु में बहुत से सुन्दर गीत गाये जाते हैं। इस गीत में वर्षा ऋतु को सुरंगी ऋतु की उपमा दी गई है।

  1. मोरियो

विरहनी स्त्री द्वारा मोर को सम्बोधि करते हुए गाए जाने वाले गीत को मोरिया गीत कहते है। यह प्रमुख लोकगीत है। मोरियों आछौ बोल्यौ रे ठलती रात मां…

  1. वन्याक (विनायक)

गणेशजी (विनायक) मांगलिक कार्यो के देवता है। अत: मांगलिक कार्य एवं विवाह के अवसर पर सर्वप्रथम विनायक जी का गीत गाया जाता है।

31.बना-बनी

राजस्थानी संस्कृति के अनुसार जिस युवक व युवती की शादी होने वाली होती है, उस युवक को बना तथा युवती को बनी कहा जाता है। विवाह के अवसर बना-बनी बनकर जो गीत गाये जाते है, वे ‘बना-बनी’ कहलाते है।

  1. घुड़ला

मारवाड़ क्षेत्र का लोकप्रिय गीत है, जो स्त्रियों द्वारा घुड़ला पर्व पर गाया जाता है। गीत है -‘घुड़लो घूमैला जी घूमैला।’ यह गाते समय स्त्रियाँ अपने सर पर मिट्टी का छेद वाला छोटा घड़ा रखती है जिसमें दीपक जला होता है।

33.जलो और जलाल

विवाह के समय वधू पक्ष की स्त्रियां जब वर की बारात का डेरा देखने आती है तब यह गीत गाती है।

  1. जकडि़या

पीरों की प्रशंसा में गाए जाने वाले गीत जकडि़या गीत कहलाते है।

35.दुप्पटा

विवाह के समय दूल्हे की सालियों द्वारा गया जाने वाला गीत है।

  1. हरजस

हरजस का अर्थ है हरि का यश अर्थात हरजस भगवान राम व श्रीकृष्ण की भक्ति में गाए जाने वाले भक्ति गीत है।

  1. पपीहा(पपैया)

यह पपीहा पक्षी को सम्बोधित करते हुए गाया जाने वाला गीत है। जिसमें प्रेमिका अपने प्रेमी को उपवन में आकर मिलने की प्रार्थना करती है।

  1. बिच्छुड़ो

यह हाडौती क्षेत्र का लोकप्रिय गीत जिसमें एक स्त्री जिसे बिच्छु ने काट लिया है और उसे मृत्यु तुल्य कष्ट होता जिस कारण वह पति को दूसरा विवाह करने का संदेश देती है।

  1. पंछीडा गीत

हाडौती तथा ढूढाड़ क्षेत्र का लोकप्रिय गीत जो त्यौहारों तथा मेलों के समय गाया जाता है।

  1. लावणी

लावणी से अभिप्राय बुलावे से है। नायक द्वारा नायिका को बुलाने के सन्दर्भ में लावणी गाई जाती है।

  1. पीठी

‘पीठी’ गीत विवाह के अवसर पर विनायक स्थापना के पश्चात् भावी वर वधू को नियमत: उबटन (पीठी) लगाते समय गाया जाता है – ‘मगेर रा मूँग मँगायो ए म्हाँ री पीठी मगर चढ़ावो ए’।

  1. मेहँदी

विवाह होने के पूर्ववाली रात को यहाँ ‘मेहँदी की रात’ कहा जाता है। उस समय कन्या एवं वर को मेहँदी लगाई जाती है और मेहँदी गीत गाया जाता है – ‘मँहदी वाई वाई बालड़ा री रेत प्रेम रस मँहदी राजणी।

  1. बधावा

विवाह के अवसर पर बधाई के लिए गाये जाने वाले गीत।

  1. झडूलो

‘झडूलो’ मुंडन के गीतों को कहते हैं।

  1. सेवरो

विवाह में वर के माथे पर मौर बाँधते समय ‘सेवरो’ (सेहरा) गाया जाता है – ‘म्हाँरे रंग बनड़े रा सेवरा’।

  1. भात व माहेरा

भात भरना राजस्थान की एक महत्वपूर्ण प्रथा है। इसे ‘माहेरा या मायरा’ भी कहते हैं। जिस स्त्री के घर पुत्र या पुत्री का विवाह पड़ता है वह घर की अन्य स्त्रियों के साथ परात में गेहूँ और गुड़ लेकर पीहरवालों को निमंत्रण देने जाती है। इसको ‘भात’ कहते हैं। मेवाड़ में इसे बत्तीसी कहते हैं। मूल रूप में भात भाई को दिया जाता है। भाई के अभाव में पीहर के अन्य लोग’माहेरा’ स्वीकार कर वस्त्र तथा धन सहायता के रूप में देते हैं। इस अवसर पर भात गीत की तरह अनेक गीत गाए जाते हैं।

  1. राती जोगो

जब बारात ब्याह के लिए चली जाती है तो वर पक्ष की स्त्रियाँ रात के पिछले पहर में ‘राती जोगो’ नामक गीत गाती हैं। देवी देवताओं के गीतों में ‘माता जी’, ‘बालाजी’ (हनुमान जी),भेरूँ जी, सेड़ल माता, सतीराणी, पितराणी आदि को प्रसन्न करने की भावना छिपी है। सबके अलग अलग गीत होते हैं। इसके अलावा विशेष अवसर पर देवों को प्रसन्न करने के लिए भी रात भर जागरण करके महिलाओं द्वारा राती जोगा के गीत गाये जाते हैं।

  1. पंखेरू गीत

राजस्थानी अंचल में कई अत्यंत प्रिय एवं प्रसिद्ध पंखेरू गीत गाये जाते हैं, जैसे- ‘आड,कबूतर, कमेड़ी, काग, कागली, काबर, काळचिड़ी, कुरजां, कोचरी, कोयल, गिरज, गेगरी,गोडावण, चकवा-चकवी, चमचेड़, टींटोड़ी, तिलोर, तीतर, दौडो, पटेबड़ी, पीयल, बइयो,बुगलो, मोर, सांवळी, सारस, सुगनचिड़ी, सूवो, होळावो आदि । इनमें से कुछ अंचल विशेष तक सीमित है और कुछ सार्वभौम स्वरूप् लिए हुए है। विषय वस्तु की दृष्टि से इन पंखेरू गीतों को इन श्रेणियों में विभक्त किया जा सकता है -1. वर्णनात्मक गीत, 2. शकुन गीत और3. प्रेम भरे सम्बोधन गीत ।

  1. बारेती

प्रातःकाल 4 बजे जब शीतकाल में किसान बैलों की सहायता से पानी निकालते हैं तो वह गीत गाया करते हैं । इन्हें ‘बारेती’ गीत कहते हैं । इन गीतों में भक्ति से संबंधित गीत भी होते हें । बारेती गीतों में नीति तथा श्रृंगार आदि के दोहे से होते हैं।

  1. धमार/ धमाल

‘धमाल’ या ‘धमार’ एक गायन शैली है, जिसको होली के दिनों में ही गाने की प्रथा है, चाहे वह लौकिक हो अथवा शास्त्रीय । धमाल के गीतों में नृत्य तत्व होने से लोग इन गीतों की लय के अनुसार नाचते भी हैं । शेंखावाटी क्षेत्र में ‘धमाल’ गाने की परंपरा है जिसमंे ‘डफ’ बादन की संगति की जाती है।

  1. नारंगी

गर्भावस्था में खट्टी वस्तुएं पसंद होती है इसी तथ्य पर आधारित गीत।

  1. हरणी

मेवाड़ में बालकों द्वारा दीपावली के पूर्व नवरात्रि के दिनों से प्रारंभ होकर दीपावली तक गाँव के प्रत्येक द्वार-द्वार जा कर गाये जाने वाले गीतों को हरणी कहते है। जिस घर के बाहर हरणी गायी जाती है उस घर वाले इन बच्चों को अनाज आदि उपहार देते हैं।

  1. संतान उत्पत्ति के गीत ( बाळुन्डो)

बच्चे के जन्म के बाद जच्चा गीत, पीपली, सूरज-पूजा, जलमा आदि गीत गाये जाते हैं।

  1. बिनोलो(बन्दोळो)

विवाह से पूर्व वर या वधू को अपने सम्बन्धियों द्वारा भोजन के लिए आमंत्रित किया जाता है जिसे बिनोला या बिन्दौरा कहते हैं। इस समय गाये जाने वाले गीतों को बिनोलो कहते हैं।

  1. परभातिया🌄

विवाह के अवसर पर प्रातःकाल में ब्रह्म मुहूर्त में गाये जाने वाले गीत।

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मित्रो आज देवउठनी एकादशी है, आज के दिन तुलसी विवाह हुआ था,,,

हिन्दू पुराणों में तुलसी जी को “विष्णु प्रिया” कहा गया है। विष्णु जी की पूजा में तुलसी दल यानि तुलसी के पत्तों का प्रयोग अनिवार्य माना जाता है। इसके बिना विष्णु जी की पूजा अधूरी मानी जाती है। दोनों को हिन्दू धर्म में पति-पत्नी के रूप में देखा जाता है। मान्यतानुसार कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन तुलसी जी और विष्णु जी का विवाह कराने की प्रथा है।

तुलसी विवाह में तुलसी के पौधे और विष्णु जी की मूर्ति या शालिग्राम पाषाण का पूर्ण वैदिक रूप से विवाह कराया जाता है। पद्म पुराण के अनुसार तुलसी विवाह का कार्य एकादशी को करना शुभ होता है। तुलसी विवाह विधि बेहद सरल है और इसे जातक चाहें तो अपने आप भी कर सकते हैं।

तुलसी विवाह संपन्न कराने के लिए एकादशी के दिन व्रत करना चाहिए और तुलसी जी के साथ विष्णु जी की मूर्ति घर में स्थापित करनी चाहिए। तुलसी के पौधे और विष्णु जी की मूर्ति को पीले वस्त्रों से सजाना चाहिए। पीला विष्णु जी की प्रिय रंग है।

तुलसी विवाह के लिए तुलसी के पौधे को सजाकर उसके चारों तरफ गन्ने का मंडप बनाना चाहिए। तुलसी जी के पौधे पर चुनरी या ओढ़नी चढ़ानी चाहिए। इसके बाद जिस प्रकार एक विवाह के रिवाज होते हैं उसी तरह तुलसी विवाह की भी रस्में निभानी चाहिए।

अगर चाहें तो पंडित या ब्राह्मण की सहायता से भी विधिवत रूप से तुलसी विवाह संपन्न कराया जा सकता है अन्यथा मंत्रोच्चारण (ऊं तुलस्यै नम:) के साथ स्वयं भी तुलसी विवाह किया जा सकता है।

द्वादशी के दिन पुन: तुलसी जी और विष्णु जी की पूजा कर और व्रत का पारण करना चाहिए। भोजन के पश्चात तुलसी के स्वत: गलकर या टूटकर गिरे हुए पत्तों को खाना शुभ होता है। इस दिन गन्ना, आंवला और बेर का फल खाने से जातक के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।

नोट: शालिग्राम मूर्ति यानि विष्णु जी की काले पत्थर की मूर्ति मिलना दुर्लभ होता है। इसके ना मिलने पर जातक विष्णु जी की मूर्ति या तस्वीर को भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

तुलसी जी को हिन्दू धर्म में बेहद पवित्र और पूजनीय माना जाता है। तुलसी के पेड़ और इसके पत्तों का धार्मिक महत्त्व होने के साथ वैज्ञानिक महत्त्व भी है। तुलसी के पौधे को एंटी-बैक्टीरियल माना जाता है, स्वास्थ्य के नजरिए से यह बेहद लाभकारी होती हैं।

हिन्दू पुराणों में तुलसी जी को भगवान श्री हरी विष्णु को बहुत प्रिय हैं। तुलसी के पौधे को घर में लगाने, उसकी पूजा करने और कार्तिक माह में तुलसी विवाह आदि से जुड़ी कई कथाएं हिन्दू पुराणों में वर्णित हैं।
तुलसी जी से जुड़ी पौराणिक कथा

श्रीमद देवी भागवत के अनुसार प्राचीन समय में एक राजा था धर्मध्वज और उसकी पत्नी माधवी, दोनों गंधमादन पर्वत पर रहते थे। माधवी हमेशा सुंदर उपवन में आनंद किया करती थी। ऐसे ही काफी समय बीत गया और उन्हें इस बात का बिलकुल भी ध्यान नहीं रहा। परंतु कुछ समय पश्चात धर्मध्वज के हृदय में ज्ञान का उदय हुआ और उन्होंने विलास से अलग होने की इच्छा की। दूसरी तरफ माधवी गर्भ से थी। कार्तिक पूर्णिमा के दिन माधवी के गर्भ से एक सुंदर कन्या का जन्म हुआ। इस कन्या की सुंदरता देख इसका नाम तुलसी रखा गया।

तुलसी विवाह,,,बालिका तुलसी बचपन से ही परम विष्णु भक्त थी। कुछ समय के बाद तुलसी बदरीवन में कठोर तप करने चली गई। वह नारायण को अपना स्वामी बनाना चाहती थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने उनसे वर मांगने को कहा, तब तुलसी जी भगवान विष्णु को अपने पति रूप में प्राप्त करने की इच्छा प्रकट की। ब्रह्मा जी ने उन्हें मनोवांछित वर दिया।

इसके बाद उनका विवाह शंखचूड से हुआ। शंखचूड एक परम ज्ञानी और शक्तिशाली राजा था उसने देवताओं के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया था। शंखचूड के पास अपनी शक्ति के साथ तुलसी के पतिव्रत धर्म की भी शक्ति थी। देवताओं ने तुलसी का पतिव्रत भंग करने के लिए एक योजना बनाई और उसके सूत्रधार बने श्री हरि विष्णु जी।

भगवान विष्णु जी ने माया से शंखचूड का रूप धारण कर तुलसी के पतिव्रत भंग कर दिया। जब देवी तुलसी को इस बात की जानकारी मिली तो वह बेहद क्रोधित हुईं और उन्होंने विष्णु जी को पाषाण यानि पत्थर का बन जाने का श्राप दिया। तभी से विष्णु जी शालिग्राम के रूप में पूजे जाने लगे। तुलसी जी की उत्पत्ति के विषय में कई अन्य कथाएं भी हैं लेकिन समय के साथ बदलने वाली इन कथाओं का मर्म एक ही है।

भगवान विष्णु की प्राण प्रिय,,,जब देवी तुलसी ने विष्णु जी को श्राप दिया तो विष्णु जी ने उनका क्रोध शांत करने के लिए उन्हें वरदान दिया कि देवी तुलसी के केशों से तुलसी वृक्ष उत्पन्न होंगे जो आने वाले समय में पूजनीय और विष्णु जी को प्रिय माने जाएंगे। विष्णु जी की कोई भी पूजा बिना तुलसी के पत्तों के अधूरी मानी जाएगी। साथ ही उन्हें वरदान दिया कि आने वाले युग में लोग खुशी से विष्णु जी के पत्थर स्वरूप और तुलसी जी का विवाह कराएंगे। (अधिक जानकारी के लिए तुलसी विवाह कथा पढ़े)

तुलसी से जुड़ी मुख्य बातें * तुलसी जी को सभी पौधों की प्रधान देवी माना जाता है।

  • तुलसी के पत्तों के बिना विष्णु जी की पूजा अधूरी होती है।
  • पतिव्रता स्त्रियों के लिए तुलसी के पौधे की पूजा करना पुण्यकारी माना जाता है।

  • कार्तिक माह में तुलसी विवाह का त्यौहार मनाया जाता है जिसमें विष्णु जी के शालिग्राम रूप का विवाह तुलसी जी के साथ कराया जाता है।

तुलसी जी का परिवार,,,तुलसी की माता का नाम माधवी तथा पिता का नाम धर्मध्वज था। उनका विवाह भगवान विष्णु के अंश से उत्पन्न शंखचूड़ से हुआ था।

तुलसी जी के अन्य नाम और उनके अर्थ ,,,

वृंदा – सभी वनस्पति व वृक्षों की आधि देवी

वृन्दावनी – जिनका उद्भव व्रज में हुआ

विश्वपूजिता – समस्त जगत द्वारा पूजित

विश्व पावनी – त्रिलोकी को पावन करने वाली

पुष्पसारा – हर पुष्प का सार

नंदिनी – ऋषि मुनियों को आनंद प्रदान करने वाली

कृष्ण-जीवनी – श्री कृष्ण की प्राण जीवनी

तुलसी – अद्वितीय

तुलसी जी के मंत्र,,,मान्यतानुसार कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि के दिन जो जातक तुलसी जी पूजा करता है उसे कई जन्मों का पुण्य फल प्राप्त होता है। इस दिन तुलसी जी की पूजा में निम्न मंत्र का प्रयोग किया जा सकता है:

वृन्दा वृन्दावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी। पुष्पसारा नन्दिनी च तुलसी कृष्ण जीवनी।।

एतन्नामाष्टंक चैव स्त्रोत्रं नामार्थसंयुतमू । यः पठेत् तां च सम्पूज्य सोडश्वमेधफलं लभेत।।

तुलसी जी को हिन्दू धर्म में अति पूजनीय माना जाता है। पद्मपुराण के अनुसार तुलसी का नाम मात्र उच्चारण करने से भगवान विष्णु बहुत प्रसन्न होते हैं। साथ ही मान्यता है कि जिस घर के आंगन में तुलसी होती हैं वहां कभी कोई कष्ट नहीं आता है।

तुलसी स्तोत्र पढ़ने का महत्व,,,तुलसी जी की पूजा में कई मंत्रों के साथ तुलसी स्तोत्र का भी पाठ किया जाता है। पद्मपुराण के अनुसार द्वादशी की रात को जागरण करते हुए तुलसी स्तोत्र को पढ़ना चाहिए। इस दिन भगवान विष्णु जातक के सभी अपराध क्षमा कर देते हैं। तुलसी स्त्रोत को सुनने से भी समान पुण्य मिलता है।

तुलसी स्त्रोत निम्न हैं तुलसी स्तोत्रम्

जगद्धात्रि नमस्तुभ्यं विष्णोश्च प्रियवल्लभे।
यतो ब्रह्मादयो देवाः सृष्टिस्थित्यन्तकारिणः ॥1॥

नमस्तुलसि कल्याणि नमो विष्णुप्रिये शुभे।
नमो मोक्षप्रदे देवि नमः सम्पत्प्रदायिके ॥2॥

तुलसी पातु मां नित्यं सर्वापद्भ्योऽपि सर्वदा ।
कीर्तितापि स्मृता वापि पवित्रयति मानवम् ॥3॥

नमामि शिरसा देवीं तुलसीं विलसत्तनुम् ।
यां दृष्ट्वा पापिनो मर्त्या मुच्यन्ते सर्वकिल्बिषात् ॥4॥

तुलस्या रक्षितं सर्वं जगदेतच्चराचरम् ।
या विनिहन्ति पापानि दृष्ट्वा वा पापिभिर्नरैः ॥5॥

नमस्तुलस्यतितरां यस्यै बद्ध्वाजलिं कलौ ।
कलयन्ति सुखं सर्वं स्त्रियो वैश्यास्तथाऽपरे ॥6॥

तुलस्या नापरं किञ्चिद् दैवतं जगतीतले ।
यथा पवित्रितो लोको विष्णुसङ्गेन वैष्णवः ॥7॥

तुलस्याः पल्लवं विष्णोः शिरस्यारोपितं कलौ ।
आरोपयति सर्वाणि श्रेयांसि वरमस्तके ॥8॥

तुलस्यां सकला देवा वसन्ति सततं यतः ।
अतस्तामर्चयेल्लोके सर्वान् देवान् समर्चयन् ॥9॥

नमस्तुलसि सर्वज्ञे पुरुषोत्तमवल्लभे ।
पाहि मां सर्वपापेभ्यः सर्वसम्पत्प्रदायिके ॥10॥

इति स्तोत्रं पुरा गीतं पुण्डरीकेण धीमता ।
विष्णुमर्चयता नित्यं शोभनैस्तुलसीदलैः ॥11॥

तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी ।
धर्म्या धर्नानना देवी देवीदेवमनःप्रिया ॥12॥

लक्ष्मीप्रियसखी देवी द्यौर्भूमिरचला चला ।
षोडशैतानि नामानि तुलस्याः कीर्तयन्नरः ॥13॥

लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत् ।
तुलसी भूर्महालक्ष्मीः पद्मिनी श्रीर्हरिप्रिया ॥14॥

तुलसि श्रीसखि शुभे पापहारिणि पुण्यदे ।
नमस्ते नारदनुते नारायणमनःप्रिये ॥15॥

इति श्रीपुण्डरीककृतं तुलसीस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

तुलसी पूजा के मंत्र

तुलसी जी को जल चढ़ाते समय इस मंत्र का जाप करना चाहिए-

महाप्रसाद जननी, सर्व सौभाग्यवर्धिनी
आधि व्याधि हरा नित्यं, तुलसी त्वं नमोस्तुते।।

इस मंत्र द्वारा तुलसी जी का ध्यान करना चाहिए

देवी त्वं निर्मिता पूर्वमर्चितासि मुनीश्वरैः
नमो नमस्ते तुलसी पापं हर हरिप्रिये।।

तुलसी की पूजा करते समय इस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए
तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी।
धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमन: प्रिया।।

लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्।
तुलसी भूर्महालक्ष्मी: पद्मिनी श्रीर्हरप्रिया।।

धन-संपदा, वैभव, सुख, समृद्धि की प्राप्ति के लिए तुलसी नामाष्टक मंत्र का जाप करना चाहिए-

वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी।
पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।।

एतभामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम।
य: पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलमेता।।

तुलसी के पत्ते तोड़ते समय इस मंत्र का जाप करना चाहिए-
ॐ सुभद्राय नमः
ॐ सुप्रभाय नमः
– मातस्तुलसि गोविन्द हृदयानन्द कारिणी
नारायणस्य पूजार्थं चिनोमि त्वां नमोस्तुते ।।

तुलसी जी की पूजा-साधना में तुलसी स्तोत्र का भी अहम स्थान है।

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[31/10, 5:54 p.m.] harshad30.wordpress.com: ધરતી પુત્ર /જગત નો તાત

કાલે જ બસમાં Baroda જઇ રહ્યો હતો. બાજુની સીટવાળા પટેલ ભાઈએ પુછ્યું :
કઇ જ્ઞાતિનાં છો સાહેબ..?

મેં કહ્યું : સૌરાષ્ટ્ર ના ધરતી પુત્ર !!!🙂

તેમણે આગળ પુછ્યું : ધરતી પુત્ર શેમાં આવે..?

મેં કહ્યું : પૈસા હોય તો ઓડી * માં આવે અને ન હોય તો *બસમાં આવે , પણ આદોલન કરી ને અનામત લેવા ના આવે ..!!! એ જગત ના તાત નો દિકરો ના હોયએ ભિખારી ના પેટનો હોય ..!!!
😀🚗😜
Son of પાટીદાર…( પટેલ સાહબ ને જન્મદિન પર સત સત નમન:)
रसिक पटेल नि वाल परथी
[31/10, 5:59 p.m.] harshad30.wordpress.com: (मंजरी महाजन ની વૉલ પર થી કોપી)

રજવાડા નવા ઊભા થઈ ગયા,

સરદાર તમે એક વાર પાછા આવોને.

કોઈ દલિત નેતા, ને કોઈ છે ઓબીસી,
આદીવાસી,સવર્ણ તો કોઈ પાટીદાર,
ચોકા રચે છે અહી લોકશાહી લજવવા ,
કર્તવ્યો ભૂલીને સહુ માંગે અધિકાર.

આ હૂંસાતૂંસીમાં સમાજના ટુકડા થઈ ગયા,
સરદાર તમે પાછા આવોને.

રજવાડા નવા ઊભા થઈ ગયા,
સરદાર તમે પાછા આવોને.

કોઈ કાશ્મીર માંગે, કોઈ માંગે બોડોલેન્ડ,
કોઈ બુંદેલખંડ માંગે,તો કોઈ ગોરખાલેન્ડ,
કોઈ મરાઠી માણુષ થઈ ધમકીઓ આપે,
સહુ ભૂલી ગયા ભારત છે અવર મધરલેન્ડ.

સહુ દેશદાઝ વતનપ્રેમથી સૂકા થઈ ગયા,
સરદાર તમે એક વાર પાછા આવોને તમ .વિનવે તમારો દાસ નમો…
#અજ્ઞાત

#સરદાર_જયંતિ…
#નમન #પ્રણામ #વંદન
#Patel Rasik
[31/10, 5:59 p.m.] harshad30.wordpress.com: 🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔
એક ગામડામાં એક ડોસી મા ના ઘરમાં મીન્દળી(બિલાડી) વિયાણી એના બચ્ચા જન્મતાં વેંત બોલવા લાગ્યા કોગ્રેસ જીતેગા કોગ્રેસ જીતેગા………આ વાત વાયુ વેગે બધે ફેલાઈ ગઈ.

દશ પંદર દિવસ પછી કોગ્રેસ ના નેતા ઓ આ વાત ની ખરાઈ કરવા તે ગામમાં આવ્યા અને ડોસી મા ને કહે કયાં છે બિલાડી ના બચ્ચાં અમને બતાવો ડોસી મા એ જુના મકાનમાં લઈ જઈને બતાવ્યા.

ત્યાં જઈ ને જોયુ તો ત્યાં તે બચ્ચાં ભાજપ જીતેગા…ભાજપ જીતેગા…..એમ બોલતા હતા બધાજ નેતાઓ એ ભેગા થઈ ને ડોસી મા ને કહયું તમે તો કહેતા હતા ને કોગ્રેસ જીતસે એમ બોલતા હતા ને હવે કેમ આમ બોલે છે

ડોસી માએ કહયું દિકરાવો ત્યારે તેની આંખો ઉઘડી નહોતી અને હવે એની આંખો ઉઘડી ગઇ છે.

મ્યાવ……😁
[31/10, 6:00 p.m.] harshad30.wordpress.com: સત્ય ઘટના

અમારી બાજુનો ફ્લેટ NRIએ વર્ષોથી લીધેલ છે…
છ મહિનાથી ઘર ખોલી કાકા કાકી રહેતા હતા….

તેમના બાળકો USA સેટ થઈ ગયા હોવાથી હવેની
બાકી રહેલ જીંદગી… ઇન્ડિયામાં કાઢવી તેવું નક્કી કરી તેઓ અહીં રહેવા આવેલ…

મેં પણ તેઓ એકલા હોવાથી ..કીધું હતુ.. તમને કાંઈ કામકાજ હોય તો કહેજો…..ચિંતા કરતા નહીં..
કાકા કાકી આનંદી સ્વભાવના હતાં..
કોઈ..કોઈ વખત રાત્રે બેસવા આવે…. અને પૂર્વ અને પશ્ચિમની સંસ્ક્રુતિ વિશે વાતો કરે…

છ મહિના પુરા થયા હશે…એક દિવસ.. કાકા કાકી અમારે ત્યાં રાત્રે બેસવા આવ્યા ….

છ મહિના પહેલાની વાતો અને આજની તેમની વાતોમાં તફાવત દેખાતો હતો….

બેટા… હવે.. અમે ગમે ત્યારે
પાછા USA દીકરા પાસે જવાની તૈયારી કરીએ છીએે…

મેં કિધુ.. કેમ કાકા..અમારી સાથે ના ફાવ્યું….?
તમે તો કહેતા હતા હવે… અમેરિકા ફરીથી નથી જવું.. અહીંના લોકો માયાળુ..છે..
સગા.. સંબંધી… બધા અહીંયા..છે
દીકરી પણ ગામમાં… છે..
મારા જેવો પાડોશી છે…તો કઈ વાતે તમને તકલીફ પડી…

બેટા.. આ વીતેલા છ મહિનામાં.. મને બધો અનુભવ
થઇ ગયો….મને એમ હતું…અહીં આવી એક બીજાને મળશું…
સુખ દુઃખ ની વાતો કરશું…

કોઈને મળવા જઈએ તો પહેલી વખત સારો આવકાર મળ્યો…
બીજી વખત જાએ…
એટલે..ઠંડો આવકાર..TV ચાલુ રાખી..વચ્ચે વચ્ચે થોડી વાત કરી લે…આપણે મનમાં બેઈજ્જતી થાય..કે આપણે અહીં ક્યાં આવ્યા….

ગામમાં દીકરી છે તો અવારનવાર આવશે..મળશે…તેવા ખ્યાલોમા હતા…પણ દિકરી મોબાઇલ કરી ખબર અંતર પૂછી લે છે…
ફોન ઉપર બધા લાગણી બતાવે ડાહી..ડાહી વાતો કરે…બેટા રૂબરૂ જઈએ ત્યારે.વર્તન બદલાઇ ગયું હોય છે..

બધા પોતપોતાની જીંદગીમા મશગુલ છે..બેટા….
નકામા લાગણીશીલ થઈને દુઃખી થવા અહીં આવ્યા..
એવું લાગી રહ્યું છે.
તેના કરતાં જેવા છે તેવા દેખાતા…ધોળીયા સારા..બાહ્ય આડંબર તો જરા પણ નથી…

અરે શુ વાત કરું બેટા… થોડા દિવશ પહેલા….હું ગ્રીન સિગ્નલ થયા પછી…જિબ્રા..રોડ ક્રોસ કરતો હતો… તો પણ એક ગાડી સડસડાટ આવી મને ઉડાવતા રહી ગઇ.. પાછો… બારીમાથી યુવાન લાગતો છોકરો બોલ્યો..

“એ..એ…ડોહા..જોતો નથી…મરવા નીકળ્યો છે…..”

હું તો બે મિનિટ સ્તબ્ધ થઈ ગયો…આ મારી કલ્પનાનો ભારત દેશ…જ્યાં યુવા પેઢીને બોલવાની પણ ભાન નથી…નાના મોટાનું જ્ઞાન નથી….ટ્રાફિક સેન્સનું નામ જ નહીં….હું શું કલ્પના કરી અહીં આવ્યો હતો….

ત્યાં ઘરડા કે બાળકને જોઈ ગમે તે સ્પીડથી વાહન આવતું હોય..બ્રેક મારી.. તમને.. માન સાથે પહેલા જવા દે…ને અહીં..
મારા વાંક ગુના વગર ગાળો.. સાંભળવાની..
વિચારતો વિચારતો જતો હતો..ત્યાં પથ્થર જોડે મારો પગ ભટકાયો… મારા ચશ્માં પડી ગયા..હું ગોતતો હતો…

ત્યાં એક મીઠો આવાજ આવ્યો…
અંકલ ..” મે આઈ હેલ્પ યુ ?”

બેટા.. સોગંદથી કહું છું…
મને બે મિનિટ તો
રણમા કોઈ ગુલાબ ખીલ્યું હોય ..તેવો ભાશ થયો…
અહીં છ મહિનાથી આવ્યો છું….બેટા
May I help you ? જેવો શબ્દ મેં નથી સાંભળ્યો..
મેં આવો મધુર ટહુકો કરનાર સામે જોયું…એક 10 થી 12 વર્ષનું બાળક હતું….અંકલ આ તમારા ચશ્મા….
મેં માથે હાથ ફેરવી thank you કીધું….
બેટા ક્યાં રહે છે ?
અહીં હું મારા દાદા ને ત્યાં
ક્રિસમશ વેકેશનમાં આવ્યો…છું.

એટલે ઇન્ડિયામા નથી રહેતો ?
ના અંકલ ..અમે વાતો કરતા હતા ત્યાં તેના પાપા મમ્મી આવ્યા..હાથ જોડી બોલ્યા ..નમસ્તે અંકલ…
એકબીજાએ વાતો…કરી…છેલ્લે ઘર સુધી પણ મૂકી ગયા…

બેટા હું વિચારતો હતો…નાહકના પશ્ચિમની સંસ્ક્રુતિને આપણે વખોડયે છીયે….ખરેખર સંસ્કાર, ડિસિપ્લિન, ભાષા..તો તે ધોળીયાઓની સારી છે…
[31/10, 6:01 p.m.] harshad30.wordpress.com: પાટીદાર પુત્ર ની એક જલક
સરદાર વલ્લભભાઇ પટેલ ગાંધીજીની સાથે યરવડા જેલમાં હતા. એક્દિવસ બધા કાર્યકરો સાથે ગાંધીજી બેઠા હતા ત્યારે દેશમાં સ્વરાજ આવ્યા બાદ ક્યા નેતાને ક્યુ ખાતુ આપવુ જોઇએ એની વાતો નીકળી. આ વાતોમાં બધાને સવિશેષ રસ પડ્યો કારણકે કેટલીક વખત કલ્પનાઓની દુનિયામાં આંટા મારવાથી વાસ્તવિક દુ:ખોમાં થોડી રાહત થતી હોય છે. સરદાર મુંગા બેઠા બેઠા ખાતાની ફાળવણીની વાતો સાંભળી રહ્યા હતા.

ગાંધીજીએ સરદારને પુછ્યુ, “ વલ્લભભાઇ, આ સ્વતંત્ર ભારતની સરકારમાં તમને ક્યુ ખાતુ આપીશુ ?” ગાંધીજી સહીત બધાને સરદારનો જવાબ સાંભળવાની ઇચ્છા હતી બધા સાવધાન થઇ ગયા અને સરદારે ખુબ સહજતાથી કહ્યુ, “ બાપુ સ્વરાજમાં હું તો ચીપિયો અને તૂમડી લઇશ.” ( મલતબ કે સન્યાસી બનીશ) સરદાર સાહેબની આ વાત સાંભળી બધા ખડખડાટ હસી પડ્યા.

સરદારે મજાકમાં કહેલી આ વાતને એમણે સ્વરાજ મળ્યા પછી સાચી સાબિત કરીને બતાવી. સમગ્ર દેશ જેને વડાપ્રધાન તરીકે જોવા ઇચ્છતો હોય, 15 પ્રાંતિક સભાઓમાંથી 12 પ્રાંતિક સભાઓ પણ સરદારના શીરે જ રાજમુટુક મુકવાની દરખાસ્ત રજુ કરતી હોય એવા સમયે હસતા હસતા વડાપ્રધાન પદ કોઇ બીજાને આપી દે એના જેવો મોટો વૈરાગી બીજે ક્યાં જોવા મળે ? આ ગામના સરપંચનું પદ જતુ કરવાની વાત નહોતી. વિશ્વના સૌથી મોટા લોકશાહી દેશના વડાપ્રધાનનું પદ જતુ કરવાનું હતુ અને સરદાર પટેલે બહુ સહજતાથી ગાંધીજીના એક ઇશારે આ પદ જતુ કરી દીધુ.

સરદાર સાહેબના અવસાન પછી એમના અંગત નામે માત્ર 237 રૂપિયાની બેંક બેલેન્સ હતી ( આ રકમ બધા જુદી જુદી બતાવે છે પણ 250 રૂપિયાથી વધતી નથી) આનાથી મોટો બીજો ક્યો સન્યાસી હોય ? ભારતના નાયબ વડાપ્રધાન અને ગૃહપ્રધાન પદ પર 3 વર્ષથી વધુ સમય સુધી કામ કર્યા પછી પણ એની મીલ્કત માત્ર આટલી જ હોય એની કોઇ કલ્પના પણ કરી શકે ખરા ? સરદાર પટેલ જ્યાં સુધી જીવ્યા ત્યાં સુધી એ કોંગ્રેસ પક્ષના ખજાનચી હતા. પક્ષની તમામ નાણાકીય વ્યવસ્થા સરદાર સાહેબ સંભાળતા હતા.

પિતાજીના અવસાન બાદ જ્યારે દિકરી મણીબેને પક્ષના હીસાબની બધી જ વિગતો પક્ષના નેતાઓને આપી ત્યારે કેટલાકના મોઢા પહોળા થઇ ગયા હતા એટલુ મોટુ ફંડ સરદારે પોતાના સંબંધોના આધારે ભેગુ કરેલુ હતુ પરંતુ ક્યારેય એક રાતી પાઇ પણ એમણે પોતાના માટે નથી વાપરી. પહેરવાના ચશ્મા પણ 30-30 વર્ષથી એકના એક ચલાવે. વાંચવાના ચશ્માની દાંડી તુટી જાય તો દોરી બાંધીને ખેંચ્યે રાખે પણ નવા ચશ્મા લેવાનું નામ નહી. એકવાર ત્યાગીજીએ આવી કંજુસાઇ કેમ કરો છો ? એવુ કહ્યુ ત્યારે સરદાર પટેલે કહ્યુ હતુ કે આ કંજુસાઇ નહી કરકસર છે. હું કે મણીબેન ક્યાંય કમાવા માટે જતા નથી આ તો બધા પ્રજાના પૈસા છે એટલે બને એટલા ઓછા વાપરવા જોઇએ.

બહુ ઓછા લોકોને ખબર હશે કે કામચલાઉ સરકારમાં સરદાર પટેલને જ્યારે ગૃહખાતુ સોંપવામાં આવ્યુ ત્યારે સૌથી મોટો પ્રશ્ન તો એ હતો કે સરદારને રહેવું ક્યા ? કારણકે દિલ્હીમાં સરદારનો પોતાનો કોઇ બંગલો તો ઠીક એક નાનુ સરખુ મકાન પણ નહોતું. અરે દિલ્હીની ક્યાં વાત કરો છો આખા દેશમાં ક્યાંય કોઇ સ્થવર મિલ્કત વલ્લભભાઇ પટેલના નામે નહોતી. બાપુજીની મિલ્કતમાંથી પણ એમણે ભાગ જતો કર્યો હતો. દિલ્હીના ઉદ્યોગપતિ બનવારીલાલ શેઠે સરદાર સાહેબને રહેવા માટે પોતાનો ખાલી બંગલો આપ્યો અને ઓરંગઝેબ રોડ પરનો આ બંગલો સરદાર સાહેબની સાધુતાનો સાક્ષી બનીને રહ્યો.

કંચન અર્થાત ધનસંપતિ માટે જગતભરમાં કેવા ખેલ ચાલી રહ્યા હતા એ આપણે ઇતિહાસમાં વાંચ્યુ છે અને આજે ચાલી રહ્યા છે એ આપણે રોજે રોજ જોઇએ છીએ ત્યારે સરદાર સાહેબ ખરા અર્થમાં કંચનના ત્યાગી હતા.

વલ્લભભાઇએ પોતાના જીવનસંગીની ઝવેરબાનો સાથ ગુમાવ્યો ત્યારે એમની ઉંમર 33 વર્ષની હતી. એ સમયમાં તો પાટીદારમાં એક ઉપર બીજી પત્નિ પણ લાવવામાં આવતી મતલબ કે એક પત્નિ જીવતી હોવા છતા બીજી સ્ત્રી સાથે લગ્ન કરવામાં આવતા. વલ્લભભાઇની તો ઉંમર પણ બહુ નાની હતી અને સાવ નાના બે સંતાનોની જવાબદારી પણ એમના માથે હતી આથી એમના પુન:લગ્ન માટે પરીવારમાંથી દબાણ શરુ થયુ પણ વલ્લભભાઇ આ માટે તૈયાર ન હતા.

વલ્લભભાઇના ચારિત્ર્ય પર કોઇએ આંચળી ચીંધી હોય. આ 42 વર્ષનો ઇતિહાસ તપાસો તો પણ ખબર પડે કે સરદાર સાહેબે એમના જીવનની કોઇ અંગત પળો રહેવા દીધી જ નહોતી. બહાર હોય ત્યારે લોકો અને કાર્યકરોથી ઘેરાયેલા હોય અને જ્યારે ઘરે હોય ત્યારે દિકરી મણીબેન સાથે હોય. પુરુષ તરીકે તમારી પાસે પદ અને પ્રતિષ્ઠા બંને હોય ત્યારે સ્ત્રીથી પોતાની જાતને દુર રાખવી એ કોઇ સાચો સાધુ જ કરી શકે બાકી કોઇનું કામ નહી.
સાચા ત્યાગી સરદાર વલ્લભભાઇ પટેલને એમની 142મી જન્મજયંતીના પાવન પ્રસંગે કોટી કોટી વંદન… 🙏🏼…. 💐…… (જે પનોતા પુત્ર એ અંગ્રેજો અને 565 રજવાડા ને બેવડી ના વારી દીધા એજ વંશ ના ડફોર કાનખજુરીયા ઓ પાટીદાર સમાજ ની આબરુ ની લીલામી કરી નાખી …સરદાર સાહેબ કકળાતા રુદયે માફી માગુ છુ )

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एक स्त्री और उसका पति सर्कस में काम करते थे। स्त्री स्टेज में एक जगह खड़ी हो जाती थी और पति बिना देखे तीर उसकी ओर मारता था जिससे उसके चारो ओर तीरों की डिजाइन बन जाती थी। उसके हर तीर के साथ तालियाँ बजती थी। एक दिन दोनों में तकरार हो गई। पति को इतना गुस्सा आया कि उसने सर्कस के खेल में उसे मारने का मन बना लिया। रोज़ की तरह तमाशा शुरू हुआ। व्यक्ति ने स्त्री को मारने के लक्ष्य करके तीर मारा। पर यह क्या, फिर तालियों की गडगड़ाहट। उसने आँखे खोली तो हैरान रह गया। तीर पहले की तरह ही स्त्री को छूते हुए किनारे लग जाता था।

यह है अभ्यास। उसको ऐसे ही अभ्यास था तो वह चाहकर भी गलत तीर नही मार सका। इस प्रकार जब सकारात्मक सोचने का अभ्यास हो जाता है तो मन अपने आप ही वश में रह कर परमात्मा की ओर लग जाता है। और चाह कर भी गलत रास्ते पर नहीं चलता।

ठीक इसी तरह हम ये भूल गए हैं कि वास्तव में हम आत्मा है, इस शरीर को चलाने वाली हैं, परमात्मा की सन्तान हैं, सुख, शांति, प्रेम, आनन्द, पवित्र, शक्ति और ज्ञान स्वरूप हैं ,इस धरा पर खेल खेलने आते है। इसलिए सदैव सकारात्मक रहे और खुश रहे।

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કલ કરે સો આજ


“કલ કરે સો આજ” મહારાજ યુધિષ્ઠિરે એક દિવસ દાન લેવા આવેલા યાચકને આવતી કાલે દાન આપવાનું વચન આપ્યું. આ સાંભળીને ભીમે અત્યંત આનંદમાં આવી જઇ દુદુંભિ નાદ કર્યો.જાણે હસ્તિનાપુરમાં પાંડવોના નિવાસ સ્થાને હર્ષોલ્લાસનું વાતાવરણ છવાઇ ગયું. ભીમને થયેલા આ અતિ ઉમંગનું કારણ પુછયું તો ભીમે જણાવ્યું “અમારા જ્યેષ્ઠ બાંધવ મહારાજા યુધિષ્ઠિરે આજે દાન લેવા આવેલા યાચકને […]

via હકારાત્મક અભિગમ- કલ કરે સો આજ — “બેઠક” Bethak