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साईं मार्केटिंग का दुष्परिणाम


साईं मार्केटिंग का दुष्परिणाम कहें या कुछ हिन्दुओं की अज्ञानता जो खुद को तो कट्टर हिन्दू कहते है मगर बड़ी ही फक्र के साथ एक मुसलमान की कब्र पे माथा झुका कर पुरे सनातम धर्म को शर्मिंदा कर रहे है..

हिन्दुओं की इसी अज्ञानता का एक सच्चा उदहारण बता रहा हूँ-
====================

कुछ दिन पहले शिर्डी से घूम कर आये एक साईं भक्त जो मेरे दूर के रिश्तेदार है उनसे मेरी मुलाकात हुई थी, कुछ निजी कारणों की वजह से वो बेचारे काफी परेशान थे। 
बातों ही बातों में मैंने उनसे पूछा कि अगर आपसे अल्लाह को पूजने के लिए कहा जाय तो क्या आप अल्लाह को पूजना शुरू कर दोगे ??? मेरी बात सुन कर वो कहने लगे कि मैं एक हिन्दू हूँ और मेरे धर्म में बहुत सारे भगवान है मैं अपने भगवान को छोड़ कर अल्लाह की पूजा क्यूँ करू..

फिर मैंने उनसे कहा कि ‘चाँद मियां नाम का एक बहुत ही चमत्कारी मुस्लमान था, बहुत सारे हिन्दू उसे पूजते है.. कहा जाता है कि चाँद मियां को पूजने वालों की ज़िन्दगी में कभी भी दुखो का सामना नहीं करना पड़ता, आप चाँद मियां को पूजना शुरू कर दो आपके सारे दुःख दूर हो जायेंगे’ …. इसपर उस महानुभाव का जवाब था-
पागल हो गए हो क्या, मैं एक कट्टर हिन्दू, मुझे अपने दुःख मंजूर है मगर किसी मुल्ले-ठुल्ले को पूजना मंजूर नहीं।

फिर मैंने उनसे पूछा कि ‘साईं बाबा’ के बारे में आपकी क्या राय है?? तो उनका जवाब था- 
अरे साईं बाबा तो साक्षात् भगवान है उनके बारे में क्या कहना, पुरे जगत के पालनहार वही है..

दोस्तों, अब आप ही बताओं ये महाशय बिना सच जाने अपनी अज्ञानता के कारण चाँद मियां को पूज रहे थे लेकिन उनलोगों का क्या जो सारी सच्चाई जान कर भी चाँद मियां को पूज रहे है ???

साईं मार्केटिंग का दुष्परिणाम कहें या कुछ हिन्दुओं की अज्ञानता जो खुद को तो कट्टर हिन्दू कहते है मगर बड़ी ही फक्र के साथ एक मुसलमान की कब्र पे माथा झुका कर पुरे सनातम धर्म को शर्मिंदा कर रहे है..

हिन्दुओं की इसी अज्ञानता का एक सच्चा उदहारण बता रहा हूँ-
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कुछ दिन पहले शिर्डी से घूम कर आये एक साईं भक्त जो मेरे दूर के रिश्तेदार है उनसे मेरी मुलाकात हुई थी, कुछ निजी कारणों की वजह से वो बेचारे काफी परेशान थे। 
बातों ही बातों में मैंने उनसे पूछा कि अगर आपसे अल्लाह को पूजने के लिए कहा जाय तो क्या आप अल्लाह को पूजना शुरू कर दोगे ??? मेरी बात सुन कर वो कहने लगे कि मैं एक हिन्दू हूँ और मेरे धर्म में बहुत सारे भगवान है मैं अपने भगवान को छोड़ कर अल्लाह की पूजा क्यूँ करू..
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फिर मैंने उनसे कहा कि 'चाँद मियां नाम का एक बहुत ही चमत्कारी मुस्लमान था, बहुत सारे हिन्दू उसे पूजते है.. कहा जाता है कि चाँद मियां को पूजने वालों की ज़िन्दगी में कभी भी दुखो का सामना नहीं करना पड़ता, आप चाँद मियां को पूजना शुरू कर दो आपके सारे दुःख दूर हो जायेंगे' .... इसपर उस महानुभाव का जवाब था-
पागल हो गए हो क्या, मैं एक कट्टर हिन्दू, मुझे अपने दुःख मंजूर है मगर किसी मुल्ले-ठुल्ले को पूजना मंजूर नहीं।
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फिर मैंने उनसे पूछा कि 'साईं बाबा' के बारे में आपकी क्या राय है?? तो उनका जवाब था- 
अरे साईं बाबा तो साक्षात् भगवान है उनके बारे में क्या कहना, पुरे जगत के पालनहार वही है..
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दोस्तों, अब आप ही बताओं ये महाशय बिना सच जाने अपनी अज्ञानता के कारण चाँद मियां को पूज रहे थे लेकिन उनलोगों का क्या जो सारी सच्चाई जान कर भी चाँद मियां को पूज रहे है ???
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धीरज धरके पढना


 

धीरज धरके पढना और 108 अम्बुलेंस को फ़ोन करके पढना कही हार्ट फेल ना होजाए बीच में …..
असल में सेकुलरिज्म मुस्लिमो के लिए सबसे बड़ा हथियार हे अपनी करतूतों को छुपाने का और हिन्दुओ को मूर्ख बनाने का क्यों की हिन्दू तो साइंस के रट्टे लगाता हे जब उसे अपने 10 साल पुराना इतिहास नहीं पता होता हो अपने पूर्वजो को कांधार से सिमटते क्यों गए क्या होगा…..ये तब भी सेकुलार का नारा लगाते थे और आज भी …..चलो आगे बढ़ते हे……अब जाने की कोई मुस्लिम यदि आपके मोह्हाले या सहर में आजाये तो क्या करता हे ………….को केसे केसे ये आपकी संपत्ति और जमीन और अधिकार हदापते हे…

मुस्लिम पोपुलेशन- –जब तक मुस्लिमों की जनसंख्या किसी देश/प्रदेश/क्षेत्र में लगभग 2% के आसपास होती है, तब वे एकदम शांतिप्रिय, कानूनपसन्द अल्पसंख्यक बनकर रहते हैं और किसी को विशेष शिकायत का मौका नहीं देते, जैसे –

अमेरिका – मुस्लिम 0.6%

ऑस्ट्रेलिया – मुस्लिम 1.5%

कनाडा – मुस्लिम 1.9%

चीन – मुस्लिम 1.8%

इटली – मुस्लिम 1.5%

नॉर्वे – मुस्लिम 1.8%

जब मुस्लिम जनसंख्या 2% से 5% के बीच तक पहुँच जाती है, तब वे अन्य धर्मावलम्बियों में अपना “धर्मप्रचार” शुरु कर देते हैं, जिनमें अक्सर समाज का निचला तबका और अन्य धर्मों से असंतुष्ट हुए लोग होते हैं, जैसे कि –

डेनमार्क – मुस्लिम 2%

जर्मनी – मुस्लिम 3.7%

ब्रिटेन – मुस्लिम 2.7%

स्पेन – मुस्लिम 4%

थाईलैण्ड – मुस्लिम 4.6%

मुस्लिम जनसंख्या के 5% से ऊपर हो जाने पर वे अपने अनुपात के हिसाब से अन्य धर्मावलम्बियों पर दबाव बढ़ाने लगते हैं और अपना “प्रभाव” जमाने की कोशिश करने लगते हैं। उदाहरण के लिये वे सरकारों और शॉपिंग मॉल पर “हलाल” का माँस रखने का दबाव बनाने लगते हैं, वे कहते हैं कि “हलाल” का माँस न खाने से उनकी धार्मिक मान्यतायें प्रभावित होती हैं। इस कदम से कई पश्चिमी देशों में “खाद्य वस्तुओं” के बाजार में मुस्लिमों की तगड़ी पैठ बनी। उन्होंने कई देशों के सुपरमार्केट के मालिकों को दबाव डालकर अपने यहाँ “हलाल” का माँस रखने को बाध्य किया। दुकानदार भी “धंधे” को देखते हुए उनका कहा मान लेता है (अधिक जनसंख्या होने का “फ़ैक्टर” यहाँ से मजबूत होना शुरु हो जाता है), ऐसा जिन देशों में हो चुका वह हैं –

फ़्रांस – मुस्लिम 8%

फ़िलीपीन्स – मुस्लिम 6%

स्वीडन – मुस्लिम 5.5%

स्विटजरलैण्ड – मुस्लिम 5.3%

नीडरलैण्ड – मुस्लिम 5.8%

त्रिनिदाद और टोबैगो – मुस्लिम 6%

इस बिन्दु पर आकर “मुस्लिम” सरकारों पर यह दबाव बनाने लगते हैं कि उन्हें उनके “क्षेत्रों” में शरीयत कानून (इस्लामिक कानून) के मुताबिक चलने दिया जाये (क्योंकि उनका अन्तिम लक्ष्य तो यही है कि समूचा विश्व “शरीयत” कानून के हिसाब से चले)। जब मुस्लिम जनसंख्या 10% से अधिक हो जाती है तब वे उस देश/प्रदेश/राज्य/क्षेत्र विशेष में कानून-व्यवस्था के लिये परेशानी पैदा करना शुरु कर देते हैं, शिकायतें करना शुरु कर देते हैं, उनकी “आर्थिक परिस्थिति” का रोना लेकर बैठ जाते हैं, छोटी-छोटी बातों को सहिष्णुता से लेने की बजाय दंगे, तोड़फ़ोड़ आदि पर उतर आते हैं, चाहे वह फ़्रांस के दंगे हों, डेनमार्क का कार्टून विवाद हो, या फ़िर एम्स्टर्डम में कारों का जलाना हो, हरेक विवाद को समझबूझ, बातचीत से खत्म करने की बजाय खामख्वाह और गहरा किया जाता है, जैसे कि –

गुयाना – मुस्लिम 10%

इसराइल – मुस्लिम 16%

केन्या – मुस्लिम 11%

रूस – मुस्लिम 15% (चेचन्या – मुस्लिम आबादी 70%)

जब मुस्लिम जनसंख्या 20% से ऊपर हो जाती है तब विभिन्न “सैनिक शाखायें” जेहाद के नारे लगाने लगती हैं, असहिष्णुता और धार्मिक हत्याओं का दौर शुरु हो जाता है, जैसे-

इथियोपिया – मुस्लिम 32.8%

भारत – मुस्लिम 22%

मुस्लिम जनसंख्या के 40% के स्तर से ऊपर पहुँच जाने पर बड़ी संख्या में सामूहिक हत्याऐं, आतंकवादी कार्रवाईयाँ आदि चलने लगते हैं, जैसे –

बोस्निया – मुस्लिम 40%

चाड – मुस्लिम 54.2%

लेबनान – मुस्लिम 59%

जब मुस्लिम जनसंख्या 60% से ऊपर हो जाती है तब अन्य धर्मावलंबियों का “जातीय सफ़ाया” शुरु किया जाता है (उदाहरण भारत का कश्मीर), जबरिया मुस्लिम बनाना, अन्य धर्मों के धार्मिक स्थल तोड़ना, जजिया जैसा कोई अन्य कर वसूलना आदि किया जाता है, जैसे –

अल्बानिया – मुस्लिम 70%

मलेशिया – मुस्लिम 62%

कतर – मुस्लिम 78%

सूडान – मुस्लिम 75%

जनसंख्या के 80% से ऊपर हो जाने के बाद तो सत्ता/शासन प्रायोजित जातीय सफ़ाई की जाती है, अन्य धर्मों के अल्पसंख्यकों को उनके मूल नागरिक अधिकारों से भी वंचित कर दिया जाता है, सभी प्रकार के हथकण्डे/हथियार अपनाकर जनसंख्या को 100% तक ले जाने का लक्ष्य रखा जाता है, जैसे –

बांग्लादेश – मुस्लिम 83%

मिस्त्र – मुस्लिम 90%

गाज़ा पट्टी – मुस्लिम 98%

ईरान – मुस्लिम 98%

ईराक – मुस्लिम 97%

जोर्डन – मुस्लिम 93%

मोरक्को – मुस्लिम 98%

पाकिस्तान – मुस्लिम 97%

सीरिया – मुस्लिम 90%

संयुक्त अरब अमीरात – मुस्लिम 96%

बनती कोशिश पूरी 100% जनसंख्या मुस्लिम बन जाने, यानी कि दार-ए-स्सलाम होने की स्थिति में वहाँ सिर्फ़ मदरसे होते हैं और सिर्फ़ कुरान पढ़ाई जाती है और उसे ही अन्तिम सत्य माना जाता है, जैसे –

अफ़गानिस्तान – मुस्लिम 100%

सऊदी अरब – मुस्लिम 100%

सोमालिया – मुस्लिम 100%a

यमन – मुस्लिम 100%

आज की स्थिति में मुस्लिमों की जनसंख्या समूचे विश्व की जनसंख्या का 22-24% है, लेकिन ईसाईयों, हिन्दुओं और यहूदियों के मुकाबले उनकी जन्मदर को देखते हुए कहा जा सकता है कि इस शताब्दी के अन्त से पहले ही मुस्लिम जनसंख्या विश्व की 50% हो जायेगी (यदि तब तक धरती बची तो)… भारत में कुल मुस्लिम जनसंख्या 15% के आसपास मानी जाती है, जबकि हकीकत यह है कि उत्तरप्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और केरल के कई जिलों में यह आँकड़ा 60 से 80% तक पहुँच चुका है… अब देश में आगे चलकर क्या परिस्थितियाँ बनेंगी यह कोई भी (“सेकुलरों” को छोड़कर) आसानी से सोच-समझ सकता है…

(सभी सन्दर्भ और आँकड़े : डॉ पीटर हैमण्ड की पुस्तक “स्लेवरी, टेररिज़्म एण्ड इस्लाम – द हिस्टोरिकल रूट्स एण्ड कण्टेम्पररी थ्रेट तथा लियोन यूरिस – “द हज”, से साभार)

भारतमाता की कुछ सेवा करना चाहते हैं तो अधिक से अधिक लोगों को ये मैसेज फॉरवर्ड कीजिये

 — with Mangesh Gaunkar and Jani Kumar Bose.

 
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“सेक्युलर इंडिया” का इतिहास


“सेक्युलर इंडिया” का इतिहास

 

” वह भारत में पैदा हो कर भी पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगा रहे हैं ….हम कुछ नहीं कह रहे है … हम बहुत उदार हैं … हम सांस्कृतिक हिन्दू हैं … हम अपनी संस्कृति पर चोट को चुपचाप सह लेते हैं … हम उदार हैं … जम्मू कश्मीर से खदेड़े गए हजारों हिन्दू शरणार्थी शिविरों में २३ सालों से रह रहे हैं हम कभी उनसे मिलने भी नहीं गए क्यों कि हम सांस्कृतिक हिन्दू हैं, बहुत उदार हैं … हम राजनीतिक हिन्दू कभी नहीं थे हम सांस्कृतिक हिन्दू थे ।।। मुग़ल हमारी लडकियां उठा ले गए हम चुप रहे क्योंकि हम बहुत उदार हैं … औरंगजेब ने राम जन्म भूमि , कृष्ण जन्म भूमि , काशी ज्ञानवापी , भोपाल में भोजशाला पर मंदिर तोड़ कर मस्जिद बना दीं, लेकिन हम ठहरे सांस्कृतिक हिन्दू … हम कुछ नहीं बोले क्योंकि हम उदार हैं … गुजरे दशक में जम्मू -कश्मीर में तोड़े गए ५०० से भी अधिक मंदिर, पर हम ठहरे सांस्कृतिक हिन्दू , हम कुछ नहीं बोले क्योंकि हम बहुत उदार हैं … हम तो भारतीय सेना के जवान हेमराज का सर कटा शव देख कर भी कुछ नहीं बोले, क्योंकि हम बहुत उदार हैं … विश्व में हर संस्कृति की एक राजनीति रही है …रोम की …मंगोलिया की …परसिया की …अरब में मोबीन बनाम मुहम्मद की …बेरुत की …जेरूसलम की …जर्मनी की …वेटिकन के चर्च की …अमेरिका में अपाचे और मेया की !!! वैदिक संस्कृति की भी राजनीती थी …त्रेता में राम की संस्कृति की भी राजनीति थी …द्वापर में कृष्ण की संस्कृति की भी राजनीती थी …याद रहे कल की राजनीति ही आज का आध्यात्म है …और आज की राजनीती से ही हम आने वाले कल के आध्यात्म का सृजन कर रहे हैं .

कलियुग में जो संगठित है उनके पास ही शक्ति रहेगी अतः संगठन में ही शक्ति है। ५२ देश पर राज कर के भी ये मुसलमान है मजबूर, हिन्दूअों का हिन्दुस्तान गँवा कर हम सेक्युलरिता में मशहूर ???
बड़े बड़े इतिहासकार, लेखक, बुद्धिजीवी, सेक्युलर राजनैतिक गिरोह व सेक्युलरिस्म कि दुहाई देनेवाले लज्जाहीन बेशर्म हिन्दुओं ने यदि सच न बोलने की, सच को न स्वीकारने की गौ, गंगा, गीता की कसम खा रखी है तो दीगर बात है अगर सेकुलर बुर्के और जालीदार टोपी की आड़ में हिन्दू विरोधी दोगली दलाल राष्ट्रीय मीडिया जिसमे ABP, IBN7, CNN, NDTV, AAJ TAK सबसे आगे हैं साम्प्रदायिकता को कानी आँख से देखने की कसम खा रखी है तो दीगर बात है। ये राष्ट्रद्रोही जब भी हिंदू व मुसलमानों के द्वेषभाव के कारण बताते है तो वे सब एक ही बात कहते हैं कि, अंग्रेजों ने भारत में राज्य स्थापित करने के लिए हिंदू व मुसलमानों को आपस में लड़ाया । उन सभी भद्रजनों की ये बातें ह्रदय को बहुत ज्यादा ठेस पहुंचाती है, मानो कि अंग्रेजों के भारत आने से पहले हिंदू व मुसलमान बहुत प्रेम के साथ रह रहे थे। इस बात पे सबसे बड़ा आघात तो तब होता है जब सोचता हूँ की मुस्लिम सल्तनत में हिंदू हमेशा दोयम दर्जे का नागरिक रहा, तथा उसे अपना धर्म बचाए रखने के लिए जजिया कर भी देना पड़ता था । वे सभी भद्रजन अपनी बात कहकर लगभग १२०० वर्षों के उस इतिहास को समाप्त ही कर देते है जिसमे हिंदू समाज ने अपने अस्तित्व को बचाने के लिए निरंतर मुसलमानों से धर्म युद्ध जारी रक्खा तथा लाखों की संख्या में अपना बलिदान दिया। सोमनाथ के मन्दिर को बचाने व अयोध्या के मन्दिर को वापस लेने के लिए ही लगभग ५ लाख हिन्दुओं ने अपना बलिदान दिया। मोहम्मद बिन कासिम के पहले आक्रमण से लेकर टीपू सुलतान तक सैकडो नरपिशाचों ने लगभग १० करोड़ हिन्दुओं को तलवार की धार पर मुसलमान बनाया। करोड़ों हिंदू महिलाओं के बलात्कार हुए, लाखों मन्दिर तोडे गए ।। मोहम्मद बिन कासिम, महमूद गजनवी, सलार महमुद गाजी, गोरी, कुतुबुद्दीन, बलबन, खिलजी वंश, तुगलक वंश, लोदी वंश, शेरशाह सूरी, मुग़ल वंश , अब्ब्दाली, नादिरशाह व टीपू सुलतान जैसे नर पिशाचों ने लगातार हिंदू समाज को प्रताडित किया। परन्तु तथागत भारतीय बुद्धिजीवी हिंदू समाज के १२०० वर्षों के प्रतारण को व उन वीर हिंदू सेनापतियों के उस साहस को जो कि राजा दाहिर, बाप्पा रावल, गुर्जर नरेश नाग भट्ट, जयपाल, अनंगपाल, विद्द्याधर चंदेल, प्रथ्विराज चौहान, हेमू, महाराणा सांगा, सुहेल सिंह देव पासी, महाराणा प्रताप, अमर सिंह राठोड, दुर्गादास, राणा रतन सिंह, गुरु तेग बहादुर, गुरु गोविन्द सिंह, वीर बन्दा बैरागी, महाराज शिवाजी, वीर छत्रसाल, महाराजा रणजीत, हरी सिंह नलवा जैसे सैकडो वीरों ने दिखाया तथा अपने पूरे जीवन में स्वतंत्रता की ज्वाला को दहकाए रक्खा।।

हिंदू व मुस्लमान दो अलग अलग सभ्यताएं है। ये दो विपरीत ध्रुव है, जो कभी न तो एक थे और न ही एक हो सकते हैं। जिस दिन भारत की धरती पर पहले मुसलमान ने कदम रक्खा था, ये धर्म युद्ध उसी दिन शुरू हो गया था। इस धर्म युद्ध में पहली जीत मुसलमानों की १९४७ में हुयी,जब उन्होंने भारत का बटवारा कराकर पाकिस्तान बना दिया। १९४७ के बाद भी हिंदू समाज इस धर्मयुद्ध को लगातार हारता अारहा है। कश्मीर भारत के हाथ से लगभग निकल चुका है, आसाम की स्थिति दयनीय हो चुकी है, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, केरल, बिहार, पुर्वी बंगाल अगले निशाने पर है। इन छेत्र में रहने वाले मुस्लमान इस्लामिक आतंकवाद के पूर्ण रूप से समर्थक है। ऐसे में हिंदू-मुस्लिम एकता की बातें करना राष्ट्रद्रोह नही तो और क्या है।
सामान नागरिक कानून, जनसँख्या कानून, राम मन्दिर, धारा३७० को चुनाव में मुद्दे बनने वाली बी जे पी भी चुनाव समाप्त होने के बाद विपक्ष में गाँधी का बन्दर बन जाती है।
मुसलमान कुरान की शिक्षा के अनुसार ही भारत को तोड़ने की साजिश में लगा हुआ है। कुरान में साफ लिखा है की “दारूल हरब” यानि शत्रु के देश को “दारूल इस्लाम” यानि मुस्लिम राज्य में बदलना हर मुसलमान का परम कर्तव्य है। कुरान के अनुसार राष्ट्रवाद की बातें करना भी पाप है। मुस्लिम आतंकी इस्लाम के लिए शहीद होते है। मुसलमानों के धार्मिक गुरु मस्जिद, मदरसे से आतंकवाद को बढावा देते है। कोई भी राजनैतिक दल इनका विरोध नही करता। मुस्लिम आतंकी के जनाजे में हजारों मुसलमानों का एकत्र होना तथा उन्ही जनाजो में राजनेताओं का पहुंच कर शामिल होना राष्ट्रद्रोह की पराकाष्ठा है। गुजरात में तो कुछ वर्ष पहले एक ऐसे ही जनाजे में एक कांग्रेसी नेता शामिल भी हुए और आतंकी के परिवार को ५ लाख रूपये देने की घोषणा भी कर डाली। अभी हाल ही में मारे गए एक आतंकी के मारे जाने पर जामा मस्जिद का इमाम बुखारी आजमगद उसके घर गया और उसे कोम का शहीद बताया। किसी भी राजनेता ने इस बात पर आपति नही जताई।
मुसलमानों की बदती जनसँख्या को बंगलादेशी घुसपैठ ने १९४७ के हिंदू-मुस्लिम अनुपात को १:१२ से १:६ कर दिया है। हिंदू समाज में कब जाग्रति आएगी ??? अपने राष्ट्र के और कितने टुकड़े देखना चाहता है सोया हुआ हिंदू समाज ??? मेरी ये बातें कड़वी जरूर है पर सोचो, जहाँ पिछले १२०० वर्षों में १९४७ तक १३ करोड़ मुसलमानो की बढोतरी यानि १०० वर्षों में लगभग १ करोड़ की बढोतरी। वही भारत के बटवारे के बाद केवल ६० वर्षों में मुसलमानों की जनसँख्या ३ करोड़ से २० करोड़ हो गई है। अर्थार्त ४.५ वर्ष में १ करोड़।।। आगे ये जनसँख्या और भी तेजी से बढने वाली है। १९४७ में ३३% होने पर पकिस्तान बना, तो क्या दोबारा से भारत बटवारे की और नही बढ रहा है ??? नहीं, क्यो की मुस्लिम विद्वान् व नेता अब भारत का बटवारा नही चाहते। उनका ध्येय तो अब पूरा भारत हड़पने का बन चुका है। आने वाले २० वर्षों में भारत में मुस्लिम आबादी लगभग ४०% हो जायेगी। और भारत में शुरू होगा दोबारा मुस्लिम शासन। भारत में लागू होगी शरीय कानून व्यवस्था यानि धर्म युद्ध में हिंदू समाज की दूसरी बड़ी पराजय ।।।
दुनिया के उन सभी देशों में जहाँ मुसलमानों की आबादी ४०% से उपर है वहाँ हर जगह गृहयुद्ध चल रहा है। सीरिया, लीबिया व सूडान में तो मुसलमान इसाई लोगो को दास बनाकर आज भी बेचते है।
मित्रों… वास्तव में अब सोशल मीडिया द्वारा लगातार “नंगा” किए जाने की वजह से दलालगिरी करने वाले घबरा रहे हैं अत: हे हिंदूअों जागो, मुसलमानों के जनसँख्या, घुसपैठ, आतंकी फैक्ट्री मदरसों का खुलकर विरोध करो। इस समय का बलिदान ही आपकी आने वाली पीढियों को प्रसन्न व संपन्न बनाये रख सकता है और आपका दब्बूपन भविष्य की पीढियों को अंधकारमय जीवन ही दे सकता है। “अहिंसा परमोधर्मः, धर्म हिंसा तथैव च” जबतक भारतीय हिन्दू समाज इस सनातन सिद्धांत को अंगीकार कर चरितार्थ करना प्रारम्भ नहीं कर देते, तबतक हिन्दू धर्म, संस्कृति, हिन्दू समाज एवं राष्ट्र कि सुरक्षा सुनिश्चित हो पाना सम्भव नहीं है !!! हिन्दू विरोधी मानसिकता अौर राष्ट्रद्रोह की जडें इनके साम्प्रदाय (इस्लाम) में है।

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सम्पूर्ण भारत में हिन्दुओ के पवित्र तीर्थ स्थल


सम्पूर्ण भारत में हिन्दुओ के पवित्र तीर्थ स्थल

 

हमारे देश भारत में यूँ तो अनेकों तीर्थ है पर इनमें जो सबसे प्रमुख माने जाते है वो है इक्यावन शक्ति पीठ, बारह ज्योतिर्लिंग, सात सप्तपुरी और चार धाम।
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इस पोस्ट में आपको इन सभी जगहों के बारे में जानकारी देंगे तथा इक्यावन शक्ति पीठों के राज्यवार नाम बताएँगे।
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12 ज्योतिर्लिंग :
धरती पर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग माने गए हैं। हिंदू धार्मिक पुराणों के अनुसार इन्हीं 12 जगहों पर भगवान शिव स्वयं प्रकट हुए।
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1. सोमनाथ
यह शिवलिंग गुजरात के सौराष्ट्र में स्थापित है।
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2. श्री शैल मल्लिकार्जुन
मद्रास में कृष्णा नदी के किनारे पर्वत पर स्थापित है श्री शैल मल्लिकार्जुन शिवलिंग।
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3. महाकाल
उज्जैन में स्थापित महाकालेश्वर शिवलिंग, जहां शिवजी ने दैत्यों का नाश किया था।
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4. ओंकारेश्वर ममलेश्वर
मध्यप्रदेश के धार्मिक स्थल ओंकारेश्वर में नर्मदा तट पर पर्वतराज विंध्य की कठोर तपस्या से खुश होकर वरदान देने यहां प्रकट हुए थे शिवजी। जहां ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थापित हो गया।
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5. नागेश्वर
गुजरात के दारूका वन के निकट स्थापित नागेश्वर ज्योतिर्लिंग।
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6. बैद्यनाथ
झारखंड के देवघर में बैद्यनाथ धाम में स्थापित शिवलिंग।
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7. भीमशंकर
महाराष्ट्र की भीमा नदी के किनारे स्थापित भीमशंकर ज्योतिर्लिंग।
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8. त्र्यंम्बकेश्वर
नासिक (महाराष्ट्र) से 25 किलोमीटर दूर त्र्यंम्बकेश्वर में स्थापित ज्योतिर्लिंग।
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9. घुष्मेश्वर
महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में एलोरा गुफा के समीप वेसल गांव में स्थापित घुष्मेश्वर ज्योतिर्लिंग।
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10. केदारनाथ
हिमालय का दुर्गम केदारनाथ ज्योतिर्लिंग। उत्तराखंड में स्थित है।
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11. विश्वनाथ
बनारस के काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थापित विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग।
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12. रामेश्वरम्‌
त्रिचनापल्ली (मद्रास) समुद्र तट पर भगवान श्रीराम द्वारा स्थापित रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग।
:
7 सप्तपुरी :
सनातन धर्म सात नगरों को बहुत पवित्र मानता है जिन्हें सप्तपुरी कहा जाता है।
:
1. अयोध्या,
2. मथुरा,
3. हरिद्वार,
4. काशी,
5. कांची,
6. उज्जैन
7. द्वारका
:
चारधाम
:
चारधाम की स्थापना आद्य शंकराचार्य ने की। उद्देश्य था उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम चार दिशाओं में स्थित इन धामों की यात्रा कर मनुष्य भारत की सांस्कृतिक विरासत को जाने-समझें।
:
1. बदरीनाथ धाम
:
कहां है- उत्तर दिशा में हिमालय पर अलकनंदा नदी के पास
प्रतिमा- विष्णु की शालिग्राम शिला से बनी चतुर्भुज मूर्ति। इसके आसपास बाईं ओर उद्धवजी तथा दाईं ओर कुबेर की प्रतिमा।
:
2. द्वारका धाम
:
कहां है- पश्चिम दिशा में गुजरात के जामनगर के पास समुद्र तट पर।
प्रतिमा- भगवान श्रीकृष्ण।
:
3. रामेश्वरम
:
कहां है- दक्षिण दिशा में तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में समुद्र के बीच रामेश्वर द्वीप।
प्रतिमा- शिवलिंग
:
4. जगन्नाथपुरी
:
कहां है- पूर्व दिशा में उड़ीसा राज्य के पुरी में।
प्रतिमा- विष्णु की नीलमाधव प्रतिमा जो जगन्नाथ कहलाती है। सुभद्रा और बलभद्र की प्रतिमाएं भी।
:
51 शक्तिपीठ :
ये देश भर में स्थित देवी के वो मंदिर है जहाँ देवी के शरीर क़े अंग या आभूषण गीरे थे। सबसे ज्यादा शक्ति पीठ बंगाल में है। शक्तिपीठों के बारे में सम्पूर्ण जानकारी आप हमारे पिछले लेख 51 शक्ति पीठ पर प्राप्त कर सकते है।
:
बंगाल के शक्तिपीठ
1. काली मंदिर – कोलकाता
2. युगाद्या- वर्धमान (बर्दमान)
3. त्रिस्त्रोता- जलपाइगुड़ी
4. बहुला- केतुग्राम
5. वक्त्रेश्वर- दुब्राजपुर
6. नलहटी- नलहटी
7. नन्दीपुर- नन्दीपुर
8. अट्टहास- लाबपुर
9. किरीट- बड़नगर
10. विभाष- मिदनापुर
:
मध्यप्रदेश के शक्तिपीठ
12. हरसिद्धि- उज्जैन
13. शारदा मंदिर- मेहर
14. ताराचंडी मंदिर- अमरकंटक
:
तमिलनाडु के शक्तिपीठ
15. शुचि- कन्याकुमारी
16. रत्नावली- अज्ञात
17. भद्रकाली मंदिर- संगमस्थल
18. कामाक्षीदेवी- शिवकांची
:
बिहार के शक्तिपीठ
19. मिथिला- अज्ञात
20. वैद्यनाथ- बी. देवघर
21. पटनेश्वरी देवी- पटना
:
उत्तरप्रदेश के शक्तिपीठ
22. चामुण्डा माता- मथुरा
23. विशालाक्षी- मीरघाट
24. ललितादेवी मंदिर- प्रयाग
:
राजस्थान के शक्तिपीठ
25. सावित्रीदेवी- पुष्कर
26. वैराट- जयपुर
:
गुजरात के शक्तिपीठ
27. अम्बिक देवी मंदिर- गिरनार
11. भैरव पर्वत- गिरनार
:
आंध्रप्रदेश के शक्तिपीठ
28. गोदावरीतट- गोदावरी स्टेशन
29. भ्रमराम्बादेवी- श्रीशैल
:
महाराष्ट्र के शक्तिपीठ
30. करवीर- कोल्हापुर
31. भद्रकाली- नासिक
:
कश्मीर के शक्तिपीठ
32. श्रीपर्वत- लद्दाख
33. पार्वतीपीठ- अमरनाथ गुफा
:
पंजाब के शक्तिपीठ
34. विश्वमुखी मंदिर- जालंधर
:
उड़ीसा के शक्तिपीठ
35. विरजादेवी- पुरी
:
हिमाचल प्रदेश के शक्तिपीठ
36. ज्वालामुखी शक्तिपीठ- कांगड़ा
:
असम के शक्तिपीठ
37. कामाख्यादेवी- गुवाहाटी
:
मेघालय के शक्तिपीठ
38. जयंती- शिलांग
:
त्रिपुरा के शक्तिपीठ
39. राजराजेश्वरी त्रिपुरासुंदरी- राधाकिशोरपुर
:
हरियाणा के शक्तिपीठ
40. कुरुक्षेत्र शक्तिपीठ- कुरुक्षेत्र
41. कालमाधव शक्तिपीठ- अज्ञात
:
नेपाल के शक्तिपीठ
42. गण्डकी- गण्डकी
43. भगवती गुहेश्वरी- पशुपतिनाथ
:
पाकिस्तान के शक्तिपीठ
44. हिंगलाजदेवी- हिंगलाज
:
श्रीलंका के शक्तिपीठ
45. लंका शक्तिपीठ- अज्ञात
:
तिब्बत के शक्तिपीठ
46. मानस शक्तिपीठ- मानसरोवर
:
बांगलादेश के शक्तिपीठ
47. यशोर- जैशौर
48. भवानी मंदिर- चटगांव
49. करतोयातट- भवानीपुर
50. उग्रतारा देवी- बारीसाल
:
51 वीं पंचसागर शक्तिपीठ है। यह कहां स्थित है इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है।

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“”महाभारत कालीन युद्धक विमान””


 
""महाभारत कालीन युद्धक विमान"" 

#जनजागरण_लाना_है_तो_पोस्ट_को_शेयर_करना_है
5000 साल पहले का "विमान" मिला है ओसामा बिन लादेन नामक इस्लामी आतंकवादी को खोजते हुए अमेरिका के सैनिकों को अफगानिस्तान (कंधार) की एक गुफा में 5000 साल पहले का "विमान" मिला है ,जिसे महाभारत काल का बताया जा गया है !
सिर्फ इतना ही नहीं वरन् Russian Foreign Intelligence ने साफ़ साफ़ बताया है कि ये वही विमान है जो संस्कृत रचित महाभारत में वर्णित है |जब इसका इंजन शुरू होता है तो बड़ी मात्रा में प्रकाश का उत्सर्जन होता है। हालाँकि इस न्यूज़ को भारत के बिकाऊ मिडिया ने महत्व नहीं दिया क्यों कि, उनकी नजर में भारत के हम हिंदूओ ( आर्यो ) की महिमा बढ़ाने वाली ये खबर
सांप्रदायिक है !!
ज्ञातव्य है कि Russian Foreign Intelligence Service (SVR) report द्वारा 21 December 2010 को एक रिपोर्ट प्रस्तुत की गयी जिसमे बताया गया था कि ये विमान द्वारा उत्पन्न एक
रहस्यमयी Time Well क्षेत्र है - जिसकी खतरनाक electromagnetic shockwave से ये अमेरिका के कमांडो मारे गये या गायब हो गये तथा इस की वजह से कोई गुफा में नहीं जा पा रहा।
शायद आप लोगों को याद होगा कि महाराज धृतराष्ट्र की पत्नी गांधारी एवं मामा शकुनि गंधार के ही थे | महाभारत में इस विमान का वर्णन करते हुए कहा गया है कि...
हम एक विमान जिसमे कि चार मजबूत पहिये लगे हुए हैं, एवं परिधि में बारह हाथ के हैं | इसके अलावा 'प्रज्वलन पक्षेपात्रों ' से सुसज्जित है | परिपत्र 'परावर्तक' के माध्यम से संचालित होता है और उसके अन्य घातक हथियारों का इस्तेमाल करते हैं ! जब उसे किसी भी लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित कर पक्षेपित किया जाता है तो, तुरंत वह अपनी शक्ति के साथ लक्ष्य को भस्म कर देता है यह जाते समय एक 'प्रकाश पुंज' का उत्पादन करता हैं !
( स्पष्ट बात है कि यहां महाभारत काल में विमान एवं मिसाइल की बात की जा रही है )
हमारे महाभारत के इसी बात को US Military के scientists सत्यापित करते हुए यह बताते हैं कि ये विमान 5000 हज़ार पुराना (महाभारत कालीन) है, और जब कमांडो इसे निकालने का प्रयास कर रहे थे तो ये सक्रिय हो गया जिससे इसके चारों और Time Well क्षेत्र उत्पन्न हो गया और यही क्षेत्र विमान को पकडे हुए है इसीलिए इस Time Well क्षेत्र के सक्रिय होने के बाद 8 सील कमांडो गायब हो गए। जानकारी के लिए बता दूँ की Time Well क्षेत्र " विद्युत-चुम्बकीय " क्षेत्र होता है जो हमारे आकाश गंगा की तरह सर्पिलाकार होता है ।
वहीं एक कदम आगे बढ़ कर Russian Foreign Intelligence ने तो साफ़ साफ़ बताया कि ये वही विमान है जो संस्कृत रचित महाभारत में वर्णित है।
सिर्फ इतना ही नहीं SVR report का कहना है कि यह क्षेत्र 5 August को फिर सक्रिय हुआ था जिससे एक बार फिर electromagnetic shockwave नामक खतरनाक किरणें उत्पन्न हुई और ये इतनी खतरनाक थी कि इससे 40 सिपाही तथा trained German Shepherd dogs भी इसकी चपेट में आ गए।
ये प्रत्यक्ष प्रमाण है हमारे हिन्दू(आर्य) सनातन धर्म के उत्कृष्ट विज्ञान का और यह साफ साफ तमाचा है उन सेकुलरों( मुस्लिमों / ईसाईयों के हिमायतीयो ) के मुंह पर जो हमारे हिन्दू सनातन धर्म पर उंगली उठाते हैं और जिन्हें रामायण और महाभारत एक काल्पनिक कथा मात्र लगती है..!

“”महाभारत कालीन युद्धक विमान””

‪#‎जनजागरण_लाना_है_तो_पोस्ट_को_शेयर_करना_है‬
5000 साल पहले का “विमान” मिला है ओसामा बिन लादेन नामक इस्लामी आतंकवादी को खोजते हुएअमेरिका के सैनिकों को अफगानिस्तान (कंधार) की एक गुफा में 5000 साल पहले का “विमान” मिला है ,जिसे महाभारत काल का बताया जा गया है !
सिर्फ इतना ही नहीं वरन् Russian Foreign Intelligence ने साफ़ साफ़ बताया है कि ये वही विमान है जो संस्कृत रचित महाभारत में वर्णित है |जब इसका इंजन शुरू होता है तो बड़ी मात्रा में प्रकाश का उत्सर्जन होता है। हालाँकि इस न्यूज़ को भारत के बिकाऊ मिडिया ने महत्व नहीं दिया क्यों कि, उनकी नजर में भारत के हम हिंदूओ ( आर्यो ) की महिमा बढ़ाने वाली ये खबर
सांप्रदायिक है !!
ज्ञातव्य है कि Russian Foreign Intelligence Service (SVR) report द्वारा 21 December 2010 को एक रिपोर्ट प्रस्तुत की गयी जिसमे बताया गया था कि ये विमान द्वारा उत्पन्न एक
रहस्यमयी Time Well क्षेत्र है – जिसकी खतरनाक electromagnetic shockwave से ये अमेरिका के कमांडो मारे गये या गायब हो गये तथा इस की वजह से कोई गुफा में नहीं जा पा रहा।
शायद आप लोगों को याद होगा कि महाराज धृतराष्ट्र की पत्नी गांधारी एवं मामा शकुनि गंधार के ही थे | महाभारत में इस विमान का वर्णन करते हुए कहा गया है कि…
हम एक विमान जिसमे कि चार मजबूत पहिये लगे हुए हैं, एवं परिधि में बारह हाथ के हैं | इसके अलावा ‘प्रज्वलन पक्षेपात्रों ‘ से सुसज्जित है | परिपत्र ‘परावर्तक’ के माध्यम से संचालित होता है और उसके अन्य घातक हथियारों का इस्तेमाल करते हैं ! जब उसे किसी भी लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित कर पक्षेपित किया जाता है तो, तुरंत वह अपनी शक्ति के साथ लक्ष्य को भस्म कर देता है यह जाते समय एक ‘प्रकाश पुंज’ का उत्पादन करता हैं !
( स्पष्ट बात है कि यहां महाभारत काल में विमान एवं मिसाइल की बात की जा रही है )
हमारे महाभारत के इसी बात को US Military के scientists सत्यापित करते हुए यह बताते हैं कि ये विमान 5000 हज़ार पुराना (महाभारत कालीन) है, और जब कमांडो इसे निकालने का प्रयास कर रहे थे तो ये सक्रिय हो गया जिससे इसके चारों और Time Well क्षेत्र उत्पन्न हो गया और यही क्षेत्र विमान को पकडे हुए है इसीलिए इस Time Well क्षेत्र के सक्रिय होने के बाद 8 सील कमांडो गायब हो गए। जानकारी के लिए बता दूँ की Time Well क्षेत्र ” विद्युत-चुम्बकीय ” क्षेत्र होता है जो हमारे आकाश गंगा की तरह सर्पिलाकार होता है ।
वहीं एक कदम आगे बढ़ कर Russian Foreign Intelligence ने तो साफ़ साफ़ बताया कि ये वही विमान है जो संस्कृत रचित महाभारत में वर्णित है।
सिर्फ इतना ही नहीं SVR report का कहना है कि यह क्षेत्र 5 August को फिर सक्रिय हुआ था जिससे एक बार फिर electromagnetic shockwave नामक खतरनाक किरणें उत्पन्न हुई और ये इतनी खतरनाक थी कि इससे 40 सिपाही तथा trained German Shepherd dogs भी इसकी चपेट में आ गए।
ये प्रत्यक्ष प्रमाण है हमारे हिन्दू(आर्य) सनातन धर्म के उत्कृष्ट विज्ञान का और यह साफ साफ तमाचा है उन सेकुलरों( मुस्लिमों / ईसाईयों के हिमायतीयो ) के मुंह पर जो हमारे हिन्दू सनातन धर्म पर उंगली उठाते हैं और जिन्हें रामायण और महाभारत एक काल्पनिक कथा मात्र लगती है..!

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आप को कभी आश्चर्य हुआ कि कोका कोला वास्तव में क्या है ?


कृपया (India से भारत की ओर) पेज को LIKE करें.
आप को कभी आश्चर्य हुआ कि कोका कोला वास्तव में क्या है ? नही ?
कोइ बात नही, स्टेप बाय स्टेप समजीये, हो जायेगा आश्चर्य ।
पीने के 10 मिनट के बाद, कोला की एक गिलास में रही चीनी के दस
चम्मच, शरीर के चयापचय की क्रिया के अवरोध से उल्टि का कारण बनता है लेकिन
फोस्फोरिक एसिड चीनी की इस कार्रवाई को रोकता है । 20 मिनट के बाद ः
खून में इंसुलिन का स्तर बढ जाता है । लिवर चीनी को फॅट में बदल देता है ।
40 मिनट के बाद ः कैफीन की घूस शरीर में पूरी तरह हो जाती है
। आंख में भारीपन आता है । लिवर और खून की चीनी को निपने की प्रक्रिया के कारण रक्त दबाव बढ जाता है । Adenosine रिसेप्टर्स को अवरोध मिलता है, जीस से
तंद्रावस्था या उनींदापन रोका जाता है और इस
अवस्था को नकली ताजगी बताया जाता है।
45 मिनट के बाद ः
शरीर डोपामाइन हार्मोन के उत्पादन
को जन्म देता है, जो मस्तिष्क में रहे
खुशी का अनुभव कराते केंद्र को उत्तेजित
करता है, हेरोइन आपरेशन का ही ये एक
सिद्धांत है ।
1 घंटे के बाद ः
फॉस्फोरिक एसिड, कैल्शियम, मैग्नीशियम और
जिन्क के मेल से पाचनतंत्र के मार्ग में
चयापचय की क्रिया को बढा देता है । मूत्र
के माध्यम से कैल्शियम का विमोचन भी बढ़
जाता है ।
बाद के समय में ः
मूत्रवर्धक प्रभाव का “खेल” शुरु होता है ।
कैल्शियम, मैग्नीशियम और जिन्क,
जो हमारी हड्डियों का हिस्सा है, साथ में
सोडियम भी, शरीर से बाहर निकालने
की क्रिया शुरु हो जाती है । एक
कोका कोला में निहित पानी की पूरी मात्रा,
मूत्र द्वारा निकाल दिया जाता है । मतलब
हड्डी की धुलाई ।
क्या नकली ताजगी का आनंद उठाने के लिये
कोक का एक ठंडा बोतल उठाते समय हम
अपने गले में क्या रासायनिक “कॉकटेल”
उतार रहे हैं हमें पता है ?
कोका कोला का सक्रिय संघटक
orthophosphoric एसिड है । इसकी उच्च
एसिडिटी के कारण, माल सडता नही है भले
वो कंपनी के विशेष स्टोर में हो, हेर फेर के
दरम्यान रास्ते के टेंकर में हो या दुकान में
रही बोतलों में हो ।
कंपनी एक ऍड में बहुत होंशियारी मारती है
“कोका कोला लाइट विधाउट कैफिन” ।
जरा इस का पोस्ट मोर्टम करते हैं ।
इस में ऍक्वा कार्बोनेटेड E150D, E952,
E951, E338, E330, Aromas, E211
होता है ।
एक्वा कार्बोनेटेड – एक शानदार पानी है ।
यह गैस्ट्रिक स्राव में हलचल पैदा करता है,
आमाशय रस की अम्लता बढ़ जाती है और
गैस होने से पेट फुलता है । इसके अलावा,
इस्तेमाल होनेवाला पानी कोइ मिनरल वॉटर
नही, लेकिन नियमित रूप से उपयोग
होता फ़िल्टर्ड पानी का इस्तेमाल
किया जाता है ।
E150D – ये एक खाद्य कलर है जो खास
तापमान पर चीनी के प्रसंस्करण के माध्यम
से प्राप्त किया जाता है, और केमिकल के
साथ या बिना कोइ केमिकल ।
कोका कोला बनाने के समय अमोनियम
सल्फेट जोड़ा जाता है ।
E952 – सोडियम Cyclamate
चीनी का विकल्प है । Cyclamate, एक
ऐसा सिंथेटिक रासायन है जो चीनी से 200
गुना मीठा है, और एक कृत्रिम स्वीटनर के रूप
में प्रयोग किया जाता है । Cyclamate,
साकारीन और aspartame, जो प्रयोग के
दौरान चूहों के मूत्राशय में कैंसर पैदा करने के
कारण साबित हुए, तो 1969 में इन सब पर
एफडीए द्वारा प्रतिबंधित डाला गया था ।
1975 में जापान, दक्षिण कोरिया और
सिंगापुर ने प्रतिबंध लगाया और सारा माल
जब्त कर लिया था । 1979 में, डब्ल्यूएचओ
(विश्व स्वास्थ्य संगठन (इल्ल्युमिनिटी)),
क्या मालुम क्यों, cyclamates का पूनर्जन्म
करवाया और सुरक्षित होने का सर्टिफिकेट
भी दे दिया ।
E950 – Acesulfame पोटेशियम । ये मिथाइल
ईथर युक्त पदार्थ है और ये भी चीनी से 200
गुना अधिक मीठा है । यह हृदय प्रणाली के
संचालन में छेड छाड करता है । इसी तरह,
हमारे चेतातंत्र पर भी उत्तेजक प्रभाव
पैदा कर सकता है और समय जाते यह लत
का कारण बन सकता है । Acesulfame शरीर
में बहुत बुरी तरह घुल जाता है, बच्चों और
गर्भवती महिलाओं के लिए इस का प्रयोग
सलामत नहीं है ।
E951 – ये है Aspartame, मधुमेह रोगियों के
लिए चीनी का एक विकल्प है पर रासायनिक
द्रष्टि से अस्थिर है : ऊंचे तापमान पर यह
मेथनॉल और फेनिलएलनिन में विभाजित
हो जाता है । मेथनॉल बहुत खतरनाक है :
5-10ml मेथनॉल ऑप्टिक तंत्रिका पर
ऐसा असर करता है की असाध्य अंधापन आ
जाता है । Aspartame की जहरिली असर
किन मामलों देख सकते हैं: बेहोशी , सिर दर्द ,
थकान , चक्कर आना, उल्टी , घबराहट ,
वजन, चिड़चिड़ापन , घबराहट , स्मृति हानि ,
धुंधली दृष्टि , बेहोशी , जोड़ों में दर्द ,
अवसाद , प्रजनन , सुनने में हानि आदि ।
Aspartame इन रोगों को उत्तेजित कर
सकता है – ब्रेन ट्यूमर , एमएस ( मल्टीपल
स्केलेरोसिस ) , मिर्गी , ‘कब्र रोग , क्रोनिक
थकान , अल्जाइमर , मधुमेह , मानसिक
कमी और तपेदिक । निचा या नोर्मल तापमान
पर नूकसान नही ।
E338 – Orthophosphoric एसिड । यह
त्वचा और आंखों की जलन पैदा कर सकता है
। यह अमोनिया , सोडियम , कैल्शियम ,
एल्यूमीनियम का फॉस्फोरिक एसिड सोल्ट के
उत्पादन के लिए प्रयोग किया जाता है । और
भी उपयोग, लकड़ी का कोयला और फिल्म
टेप के उत्पादन के लिए कार्बनिक संश्लेषण में,
आग रोकने की सामग्री , मिट्टी के बरतन ,
गिलास , उर्वरक , सिंथेटिक डिटर्जेंट , दवा ,
धातु के उत्पादन के लिए , कपड़ा और तेल
उद्योग, कार्बोनेटेड पानी के उत्पादन,
पेस्ट्री में सामग्री को तैयार करने के लिए
प्रयोग किया जाता है । यह
orthophosphoric एसिड
हड्डियों की कमजोरी पैदा कर सकता है ,
शरीर से कैल्शियम और लोहे के अवशोषण के
साथ हस्तक्षेप कर सकता है । अन्य
दुष्प्रभाव, प्यास और त्वचा पर चकत्ते हैं ।
E330 – साइट्रिक एसिड । यह व्यापक रूप से
प्रकृति में फैला हुआ है और दवा और खाद्य
उद्योग में प्रयोग किया जाता है । खून के
संरक्षण के लिए – साइट्रिक एसिड
( citrates ) के साल्ट एसिड , संरक्षक ,
स्टेबलाइजर्स , और चिकित्सा क्षेत्र में और
खाद्य उद्योग में उपयोग किया जाता है ।
बिलकुल सलामत है, लस्सी, छास, दही, खट्टे
फल में भी होता है ।
Aromas – अज्ञात खुशबूदार योजक ।
अज्ञात इस लिए की इसे छुपाना है ।
बहाना मोनोपोली का बताया गया है,
स्पर्धा के कारण दुसरा कोइ ईसका उपयोग
ना करे । लेकिन बात इस तरह लिक हुई है
की ये पदार्थ मानव भ्रुण के किडनी के सेल्स
से बना है । लिक की गई बात सच या जुठ, उस
के पिछे वर्ल्ड पोलिटिक्स का एजन्डा काम
कर रहा है । दुनिया के
देशों की जनता का धर्म भ्रष्ट करना है ।
जैसे १८५७ में भारतिय सनिकों का धर्म भ्रष्ट
करने के लिए कारतूस में गाय और डुक्कर
की चरबी मिलाई गई थी । वो कारतूस सिल
मुंह से तोडना होता था ।
E211 – सोडियम Benzoate । यह बैक्टीरियल
और एंटी फंगल एजेंट के रूप में कुछ खाद्य
उत्पादन में प्रयोग किया जाता है । यह
एस्पिरिन के प्रति संवेदनशील हैं , जीन
को अस्थमा है ऐसे लोगों के लिए सिफारिश
नहीं है । ब्रिटेन के शेफील्ड विश्वविद्यालय के
पीटर पाईपर द्वारा किए गए एक अध्ययन से
पता चला है कि ये डीएनए के लिए महत्वपूर्ण
नुकसान का कारण बनता है । उनके शब्दों के
अनुसार , इस प्रिजर्वेटिव में एक सक्रिय घटक
सोडियम बेंजोएट है वो डीएनए को नष्ट
नही करता लेकिन उसे निष्क्रिय करता है । यह
सिरोसिस और पार्किंसंस रोग जैसे
अपक्षयी रोगों को जन्म दे सकता है ।
तो, क्या समज में आया ?
खैर, यह कोका कोला का “गुप्त नुस्खा”
सिर्फ एक विज्ञापन का खेल है और कुछ
नही । कैसा भी सिक्रिट हो हम जान गये हैं
की ये प्रिजर्वेटिव, खाद्य कलर,
स्टेबिलाईजर्स आदी कोकीन का एक कमजोर
समाधान है और हमारे लिए तो ये लिगल
कोकेन ऍडिक्शन और शुद्ध जहर है ।
अगर, आप कोका कोला के बिना जीवन
की कल्पना नहीं कर सकते, तो निम्न
सिफारिशों का लाभ उठाओ:
– अमेरिका में खूद कोका कोला के कई
वितरक इस पेयजल से अपने ट्रक
इंजनों की सफाई करते हैं तो भारत में आप
को कौन रोकता है ।
अमेरिका में कई पुलिस अधिकारी अपनी कार
में कोका कोला की बोतल रखते हैं । कोइ
दुर्घटना होती है तो वो इस से सड़क से खून
के दाग साफ करते हैं ।
– कोका कोला कारों के क्रोम सतहों पर से
जंग के दाग को हटाने के लिए एक महान
प्रवाही है । कार बैटरी से जंग हटाने के लिए,
कोक के साथ यह डालना और जंग गायब
हो जाएगा ।
– इसमें डुबाया कपडा कुछ मिनिट जंग खाये
नट-बोल्ट के उपर घुमाओं वो आसानिसे खुल
जायेगा ।
-अच्छा डिटर्जन्ट है, कपड़े से दाग को साफ
करने के लिए, गंदे कपड़े पर
कोका कोला डालना, वाशिंग पाउडर जोड़
सकते हैं । और सामान्य रूप से कपड़े धोने
की मशीन चला सकते हैं । आप परिणाम से
आश्चर्यचकित हो जाएगी ।
– यह सस्ता है और प्रभाव पूरी तरह से
संतोषजनक है इस लिए भारत के कुछ किसान,
कीटनाशक की जगह
कोका कोला का उपयोग कर रहे हैं । आप
भी करिये ।
कोइ शक नही कि कोका कोला एक बेहतरिन
प्रोडक्ट है । लेकिन पीने के लिए नही, अन्य
उपयोग के लिए । प्रोपर उपयोग ढूंढ लो,
मजा आयेगा इस के उपयोग से ।
यहां कोका कोला के बारे में एक वीडियो है !
http://www.youtube.com/watch?v=gVyZiYbsvL
अधिक से अधिक शेयर कीजिये मित्रों।
पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए आपका तह दिल से धन्यवाद.
वन्दे मातरम्
इन्कलाब जिंदाबाद..
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Posted in हिन्दू पतन, Rajiv Dixit

गुलामी का प्रतीक हमारा राष्ट्रगान जन गन मन


गुलामी का प्रतीक हमारा राष्ट्रगान जन गन मन
July 22, 2014 at 2:39pm
जन गन मन गुलामी का प्रतीक……..!!

1911 मे जॉर्ज पंचम जब भारत आए तब उनके स्वागत में ये गीत गाया गया था ।।
——————————————————–
जन-गण-मन की पूरी कहानी
* जॉर्ज पंचम का भारत मे आगमन
“ सन1911 तक भारत की राजधानी बंगाल हुआ करता था , सन 1905 में जब बंगाल विभाजन को लेकर अंग्रेजो के खिलाफ बंग-भंग आन्दोलन के विरोध में बंगाल के लोग उठ खड़े हुए तो अंग्रेजो ने अपने आपको बचाने के लिए के कलकत्ता से हटाकर राजधानी को दिल्ली ले गए और 1911 में दिल्ली को राजधानी घोषित कर दिया ,पूरे भारत में उस समय लोग विद्रोह से भरे हुए थे तो अंग्रेजो ने अपने इंग्लॅण्ड के राजा को भारत आमंत्रित किया ताकि लोग शांत हो जाये ,इंग्लैंड का राजा जोर्ज पंचम 1911 में भारत में आया “
* टागोर के परिवार का पैसा “ ईस्ट इंडिया कंपनी” मे लगा हुवा था
“ रविंद्रनाथ टैगोर पर दबाव बनाया गया कि तुम्हे एक गीत जोर्ज पंचम के स्वागत में लिखना ही होगा , उस समय टैगोर का परिवार अंग्रेजों के काफी नजदीक हुआ करता था, उनके परिवार के बहुत से लोग ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए काम किया करते थे, उनके बड़े भाई अवनींद्र नाथ टैगोर बहुत दिनों तक ईस्ट इंडिया कंपनी के कलकत्ता डिविजन के निदेशक(Director) रहे, उनके परिवार का बहुत पैसा ईस्ट इंडिया कंपनी में लगा हुआ था और खुद रविन्द्र नाथ टैगोर की बहुत सहानुभूति थी अंग्रेजों के लिए रविंद्रनाथ टैगोर ने मन से या बेमन से जो गीत लिखा उसके बोल है “जन गण मन अधिनायक जय हे भारत भाग्य विधाता” … इस गीत के सारे के सारे शब्दों में अंग्रेजी राजा जोर्ज पंचम का गुणगान है, जिसका अर्थ समझने पर पता लगेगा कि ये तो हकीक़त में ही अंग्रेजो की खुशामद में लिखा गया था “
इस राष्ट्रगान का अर्थ कुछ इस तरह से होता है
“भारत के नागरिक,भारत की जनता अपने मन से आपको भारत का भाग्य विधाता समझती है और मानती है … हे अधिनायक(Superhero) तुम्ही भारत के भाग्य विधाता हो | तुम्हारी जय हो ! जय हो! जय हो ! तुम्हारे भारत आने से सभी प्रान्त पंजाब, सिंध, गुजरात,मराठा मतलब महारास्त्र,द्रविड़ मतलब दक्षिण भारत, उत्कल मतलब उड़ीसा, बंगाल आदि और जितनी भी नदिया जैसे यमुना और गंगा ये सभी हर्षित है, खुश है, प्रसन्न है, तुम्हारा नाम लेकर ही हम जागते है और तुम्हारे नाम का आशीर्वाद चाहते है , तुम्हारी ही हम गाथा गाते है | हे भारत के भाग्य विधाता(सुपर हीरो ) तुम्हारी जय हो जय हो जय हो | “
* 1911 मे जॉर्ज पंचम भारत आए
“ जोर्ज पंचम भारत आया 1911 में और उसके स्वागत में ये गीत गाया गया ,जब वो इंग्लैंड चला गया तो उसने उस जन गण मन का अंग्रेजी में अनुवाद करवाया , क्योंकि जब भारत में उसका इस गीत से स्वागत हुआ था तब उसके समझ में नहीं आया था कि ये गीत क्यों गाया गया और इसका अर्थ क्या है ,जब अंग्रेजी अनुवाद उसने सुना तो वह बोला कि इतना सम्मान और इतनी खुशामद तो मेरी आज तक इंग्लॅण्ड में भी किसी ने नहीं की ,वह बहुत खुश हुआ ओर उसने आदेश दिया कि जिसने भी ये गीत उसके(जोर्ज पंचम के) लिए लिखा है उसे इंग्लैंड बुलाया जाये , रविन्द्र नाथ टैगोर इंग्लैंड गए .. जोर्ज पंचम उस समय नोबल पुरस्कार समिति का अध्यक्ष भी था | “
* नोबल एवार्ड की बात इस तरहा थी
“ उसने रविन्द्र नाथ टैगोर को नोबल पुरस्कार से सम्मानित करने का फैसला किया टैगोर ने कहा की आप मुझे नोबल पुरस्कार देना ही चाहते हैं तो मैंने एक गीतांजलि नामक रचना लिखी है उस पर मुझे दे दो लेकिन इस गीत के नाम पर मत दो और यही प्रचारित किया जाये क़ि मुझे जो नोबेल पुरस्कार दिया गया है वो गीतांजलि नामक रचना के ऊपर दिया गया है ,जोर्ज पंचम मान गया और रविन्द्र नाथ टैगोर को सन 1913 में गीतांजलि नामक रचना के ऊपर नोबल पुरस्कार दिया गया |
* एक हत्याकांड ओर गांधी का खत
“ रविन्द्र नाथ टैगोर की अंग्रेजों के प्रति ये सहानुभूति ख़त्म हुई 1919 में जब जलियावाला कांड हुआ और गाँधी जी ने उनको पत्र लिखा और कहा क़ि अभी भी तुम्हारी आँखों से अंग्रेजियत का पर्दा नहीं उतरेगा तो कब उतरेगा, तुम अंग्रेजों के इतने चाटुकार कैसे हो गए, तुम इनके इतने समर्थक कैसे हो गए ? फिर गाँधीजी स्वयं रविन्द्र नाथ टैगोर से मिलने गए और कहा कि अभी तक तुम अंग्रेजो की अंध भक्ति में डूबे हुए हो ? तब जाकर रविंद्रनाथ टैगोर की नीद खुली| इस काण्ड का टैगोर ने विरोध किया और नोबल पुरस्कार अंग्रेजी हुकूमत को लौटा दिया|
रबीन्द्रनाथ टागोर ने लिखा खत ओर किया इकरार

“ सन1919 से पहले जितना कुछ भी रविन्द्र नाथ टैगोर ने लिखा वो अंग्रेजी सरकार के पक्ष में था और 1919 के बाद उनके लेख कुछ कुछ अंग्रेजो के खिलाफ होने लगे थे | रविन्द्र नाथ टेगोर के बहनोई,सुरेन्द्र नाथ बनर्जी लन्दन में रहते थे और ICS ऑफिसर थे| अपने बहनोई को उन्होंने एक पत्र लिखा था (ये 1919 के बाद की घटना है) | इसमें उन्होंने लिखा है कि ये गीत ‘जन गण मन’ अंग्रेजो के द्वारा मुझ पर दबाव डलवाकर लिखवाया गया है ,इसके शब्दों का अर्थ अच्छा नहीं है ,इस गीत को नहीं गाया जाये तो अच्छा है ,लेकिन अंत में उन्होंने लिख दिया कि इस चिठ्ठी को किसी को नहीं दिखाए क्योंकि मैं इसे सिर्फ आप तक सीमित रखना चाहता हूँ लेकिन जब कभी मेरी म्रत्यु हो जाये तो सबको बता दे | 7 अगस्त 1941 को रबिन्द्र नाथ टैगोर की मृत्यु के बाद इस पत्र को सुरेन्द्र नाथ बनर्जी ने ये पत्र सार्वजनिक किया,और सारे देश को ये कहा क़ि ये जन गन मन गीत न गाया जाये|
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जन-गन-मन गाकर देश को अपमानित ना करे

गुलामी का प्रतीक हमारा राष्ट्रगान जन गन मन
July 22, 2014 at 2:39pm
जन गन मन गुलामी का प्रतीक........!!
 
1911 मे जॉर्ज पंचम जब भारत आए तब उनके स्वागत में ये गीत गाया गया था ।।
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जन-गण-मन की पूरी कहानी
* जॉर्ज पंचम का भारत मे आगमन
“ सन1911 तक भारत की राजधानी बंगाल हुआ करता था , सन 1905 में जब बंगाल विभाजन को लेकर अंग्रेजो के खिलाफ बंग-भंग आन्दोलन के विरोध में बंगाल के लोग उठ खड़े हुए तो अंग्रेजो ने अपने आपको बचाने के लिए के कलकत्ता से हटाकर राजधानी को दिल्ली ले गए और 1911 में दिल्ली को राजधानी घोषित कर दिया ,पूरे भारत में उस समय लोग विद्रोह से भरे हुए थे तो अंग्रेजो ने अपने इंग्लॅण्ड के राजा को भारत आमंत्रित किया ताकि लोग शांत हो जाये ,इंग्लैंड का राजा जोर्ज पंचम 1911 में भारत में आया “
* टागोर के परिवार का पैसा “ ईस्ट इंडिया कंपनी” मे लगा हुवा था
“ रविंद्रनाथ टैगोर पर दबाव बनाया गया कि तुम्हे एक गीत जोर्ज पंचम के स्वागत में लिखना ही होगा , उस समय टैगोर का परिवार अंग्रेजों के काफी नजदीक हुआ करता था, उनके परिवार के बहुत से लोग ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए काम किया करते थे, उनके बड़े भाई अवनींद्र नाथ टैगोर बहुत दिनों तक ईस्ट इंडिया कंपनी के कलकत्ता डिविजन के निदेशक(Director) रहे, उनके परिवार का बहुत पैसा ईस्ट इंडिया कंपनी में लगा हुआ था और खुद रविन्द्र नाथ टैगोर की बहुत सहानुभूति थी अंग्रेजों के लिए रविंद्रनाथ टैगोर ने मन से या बेमन से जो गीत लिखा उसके बोल है "जन गण मन अधिनायक जय हे भारत भाग्य विधाता" ... इस गीत के सारे के सारे शब्दों में अंग्रेजी राजा जोर्ज पंचम का गुणगान है, जिसका अर्थ समझने पर पता लगेगा कि ये तो हकीक़त में ही अंग्रेजो की खुशामद में लिखा गया था “
इस राष्ट्रगान का अर्थ कुछ इस तरह से होता है
"भारत के नागरिक,भारत की जनता अपने मन से आपको भारत का भाग्य विधाता समझती है और मानती है ... हे अधिनायक(Superhero) तुम्ही भारत के भाग्य विधाता हो | तुम्हारी जय हो ! जय हो! जय हो ! तुम्हारे भारत आने से सभी प्रान्त पंजाब, सिंध, गुजरात,मराठा मतलब महारास्त्र,द्रविड़ मतलब दक्षिण भारत, उत्कल मतलब उड़ीसा, बंगाल आदि और जितनी भी नदिया जैसे यमुना और गंगा ये सभी हर्षित है, खुश है, प्रसन्न है, तुम्हारा नाम लेकर ही हम जागते है और तुम्हारे नाम का आशीर्वाद चाहते है , तुम्हारी ही हम गाथा गाते है | हे भारत के भाग्य विधाता(सुपर हीरो ) तुम्हारी जय हो जय हो जय हो | "
* 1911 मे जॉर्ज पंचम भारत आए
“ जोर्ज पंचम भारत आया 1911 में और उसके स्वागत में ये गीत गाया गया ,जब वो इंग्लैंड चला गया तो उसने उस जन गण मन का अंग्रेजी में अनुवाद करवाया , क्योंकि जब भारत में उसका इस गीत से स्वागत हुआ था तब उसके समझ में नहीं आया था कि ये गीत क्यों गाया गया और इसका अर्थ क्या है ,जब अंग्रेजी अनुवाद उसने सुना तो वह बोला कि इतना सम्मान और इतनी खुशामद तो मेरी आज तक इंग्लॅण्ड में भी किसी ने नहीं की ,वह बहुत खुश हुआ ओर उसने आदेश दिया कि जिसने भी ये गीत उसके(जोर्ज पंचम के) लिए लिखा है उसे इंग्लैंड बुलाया जाये , रविन्द्र नाथ टैगोर इंग्लैंड गए .. जोर्ज पंचम उस समय नोबल पुरस्कार समिति का अध्यक्ष भी था | “
* नोबल एवार्ड की बात इस तरहा थी
“ उसने रविन्द्र नाथ टैगोर को नोबल पुरस्कार से सम्मानित करने का फैसला किया टैगोर ने कहा की आप मुझे नोबल पुरस्कार देना ही चाहते हैं तो मैंने एक गीतांजलि नामक रचना लिखी है उस पर मुझे दे दो लेकिन इस गीत के नाम पर मत दो और यही प्रचारित किया जाये क़ि मुझे जो नोबेल पुरस्कार दिया गया है वो गीतांजलि नामक रचना के ऊपर दिया गया है ,जोर्ज पंचम मान गया और रविन्द्र नाथ टैगोर को सन 1913 में गीतांजलि नामक रचना के ऊपर नोबल पुरस्कार दिया गया |
* एक हत्याकांड ओर गांधी का खत
“ रविन्द्र नाथ टैगोर की अंग्रेजों के प्रति ये सहानुभूति ख़त्म हुई 1919 में जब जलियावाला कांड हुआ और गाँधी जी ने उनको पत्र लिखा और कहा क़ि अभी भी तुम्हारी आँखों से अंग्रेजियत का पर्दा नहीं उतरेगा तो कब उतरेगा, तुम अंग्रेजों के इतने चाटुकार कैसे हो गए, तुम इनके इतने समर्थक कैसे हो गए ? फिर गाँधीजी स्वयं रविन्द्र नाथ टैगोर से मिलने गए और कहा कि अभी तक तुम अंग्रेजो की अंध भक्ति में डूबे हुए हो ? तब जाकर रविंद्रनाथ टैगोर की नीद खुली| इस काण्ड का टैगोर ने विरोध किया और नोबल पुरस्कार अंग्रेजी हुकूमत को लौटा दिया|
रबीन्द्रनाथ टागोर ने लिखा खत ओर किया इकरार
 
“ सन1919 से पहले जितना कुछ भी रविन्द्र नाथ टैगोर ने लिखा वो अंग्रेजी सरकार के पक्ष में था और 1919 के बाद उनके लेख कुछ कुछ अंग्रेजो के खिलाफ होने लगे थे | रविन्द्र नाथ टेगोर के बहनोई,सुरेन्द्र नाथ बनर्जी लन्दन में रहते थे और ICS ऑफिसर थे| अपने बहनोई को उन्होंने एक पत्र लिखा था (ये 1919 के बाद की घटना है) | इसमें उन्होंने लिखा है कि ये गीत 'जन गण मन' अंग्रेजो के द्वारा मुझ पर दबाव डलवाकर लिखवाया गया है ,इसके शब्दों का अर्थ अच्छा नहीं है ,इस गीत को नहीं गाया जाये तो अच्छा है ,लेकिन अंत में उन्होंने लिख दिया कि इस चिठ्ठी को किसी को नहीं दिखाए क्योंकि मैं इसे सिर्फ आप तक सीमित रखना चाहता हूँ लेकिन जब कभी मेरी म्रत्यु हो जाये तो सबको बता दे | 7 अगस्त 1941 को रबिन्द्र नाथ टैगोर की मृत्यु के बाद इस पत्र को सुरेन्द्र नाथ बनर्जी ने ये पत्र सार्वजनिक किया,और सारे देश को ये कहा क़ि ये जन गन मन गीत न गाया जाये|
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जन-गन-मन गाकर देश को अपमानित ना करे
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एक वर्ग सेंटीमीटर की किताब पर लिख डाली है हनुमान चालीसा


एक वर्ग सेंटीमीटर की किताब पर लिख डाली है हनुमान चालीसा

गोरखपुर. गोरखपुर के रहने वाले राजकुमार वर्मा कला के आशिक हैं। उनकी रग-रग में हुनर बसा है। वे तस्वीरों और कलाकृतियों को चावल और दाल के दानों पर उकरते हैं। इन्हें देखने के लिए लोगों को मैगनीफाइंग ग्लास का इस्तेमाल करना पड़ता है। उन्होंने एक वर्ग सेंटीमीटर की किताब पर हनुमान चालीसा भी लिखी है।

खास बात यह है कि यह काम उन्होंने तीन महीनों में 62 साल की उम्र में नंगी आंखों से किया है। वे पिछले 35 सालों में लगभग 300 तिल, रामदाना, दाल, चावल, खरबूजे के दानों पर लिखने के साथ तस्वीरें उकेर चुके हैं। इनकी कला की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वह दानों पर चित्र नंगी आंखों से बनाते हैं और उस पर लिखते हैं।

गोरखपुर के राजघाट इलाके के बसंतपुर निवासी राज कुमार वर्मा के इस हुनर के कायल सीएम अखिलेश यादव भी हैं। उन्होंने पिछले साल संपन्न हुए सैफई महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री की तस्वीर को दाल के एक फाक पर उकेर कर उन्हें सौंपी थी। सीएम ने खुश होकर एलान किया था कि उन्हें राज्य सरकार की तरफ से 15 हजार रुपए हर महीने दिया जाए।

एक वर्ग सेंटीमीटर की किताब पर लिख डाली है हनुमान चालीसा

गोरखपुर. गोरखपुर के रहने वाले राजकुमार वर्मा कला के आशिक हैं। उनकी रग-रग में हुनर बसा है। वे तस्वीरों और कलाकृतियों को चावल और दाल के दानों पर उकरते हैं। इन्हें देखने के लिए लोगों को मैगनीफाइंग ग्लास का इस्तेमाल करना पड़ता है। उन्होंने एक वर्ग सेंटीमीटर की किताब पर हनुमान चालीसा भी लिखी है।

खास बात यह है कि यह काम उन्होंने तीन महीनों में 62 साल की उम्र में नंगी आंखों से किया है। वे पिछले 35 सालों में लगभग 300 तिल, रामदाना, दाल, चावल, खरबूजे के दानों पर लिखने के साथ तस्वीरें उकेर चुके हैं। इनकी कला की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वह दानों पर चित्र नंगी आंखों से बनाते हैं और उस पर लिखते हैं।

गोरखपुर के राजघाट इलाके के बसंतपुर निवासी राज कुमार वर्मा के इस हुनर के कायल सीएम अखिलेश यादव भी हैं। उन्होंने पिछले साल संपन्न हुए सैफई महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री की तस्वीर को दाल के एक फाक पर उकेर कर उन्हें सौंपी थी। सीएम ने खुश होकर एलान किया था कि उन्हें राज्य सरकार की तरफ से 15 हजार रुपए हर महीने दिया जाए।
 
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कसग्रेस सरकार के समय तेल कंपनियों ने वसूले 26 हजार करोड़ ज्यादा!


कसग्रेस सरकार के समय तेल कंपनियों ने वसूले 26 हजार करोड़ ज्यादा!
मोदी सरकार ने सोमवार को कहा कि वह देश के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) की उस रिपोर्ट का अध्ययन कर रही है, जिसमें कहा गया है कि सरकारी तेल कंपनियों ने पिछले पांच सालों के दौरान ग्राहकों से 26 हजार 626 करोड़ रुपये अधिक कीमत वसूली है। एक सवाल के जवाब में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने लोकसभा में कहा कि इस विषय पर सरकार अध्ययन कर रही है।
सीएजी ने पिछले सप्ताह रिपोर्ट में कहा कि कंपनियों ने देश में बेचे जाने वाले पेट्रोलियम ईंधन की वास्तविक लागत में सीमा शुल्क जैसे कल्पित शुल्क जोड़ कर ग्राहकों से अधिक कीमत वसूली है। यही नहीं उन्होंने एस्सार और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी निजी रिफाइनिंग कंपनियों से जरूरत से अधिक मूल्य देकर ईंधन खरीदे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और मिट्टी के तेल का मूल्य तय करते वक्त इन उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय कीमत में सीमा शुल्क, माल ढुलाई, बीमा, समुद्री नुकसान जैसे कई शुल्क जोड़े जाते हैं। यह मुद्दा मार्क्ससवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सांसद पी. करुणाकरण ने प्रश्नकाल में उठाया था।

कसग्रेस सरकार के समय तेल कंपनियों ने वसूले 26 हजार करोड़ ज्यादा!
मोदी सरकार ने सोमवार को कहा कि वह देश के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) की उस रिपोर्ट का अध्ययन कर रही है, जिसमें कहा गया है कि सरकारी तेल कंपनियों ने पिछले पांच सालों के दौरान ग्राहकों से 26 हजार 626 करोड़ रुपये अधिक कीमत वसूली है। एक सवाल के जवाब में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने लोकसभा में कहा कि इस विषय पर सरकार अध्ययन कर रही है।
सीएजी ने पिछले सप्ताह रिपोर्ट में कहा कि कंपनियों ने देश में बेचे जाने वाले पेट्रोलियम ईंधन की वास्तविक लागत में सीमा शुल्क जैसे कल्पित शुल्क जोड़ कर ग्राहकों से अधिक कीमत वसूली है। यही नहीं उन्होंने एस्सार और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी निजी रिफाइनिंग कंपनियों से जरूरत से अधिक मूल्य देकर ईंधन खरीदे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और मिट्टी के तेल का मूल्य तय करते वक्त इन उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय कीमत में सीमा शुल्क, माल ढुलाई, बीमा, समुद्री नुकसान जैसे कई शुल्क जोड़े जाते हैं। यह मुद्दा मार्क्ससवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सांसद पी. करुणाकरण ने प्रश्नकाल में उठाया था।
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Devi’s Foot Fell During Dance Tripurasundari Temple


Ramani's blog

Legend has it that Goddess Uma’s right foot fell during Her Dance competition with Lord Shiva.

Lalitha Tripura Sundari.jpg Lalitha Tripura Sundari.Image credit.Sivanis kitchen

The temple in Tripura, North East of India, dedicated to Tripurasundari is also one of the SakthiPeetas, where Sati‘s right foot fell.

There are two identical images of the same deity inside the temple.

They are known as Tripura Sundari (5 feet high) and Chhotima (2 feet high) in Tripura.

The idol of Maa Kali is worshiped at the temple of Tripura Sundari in the form of ‘Soroshi’.

One is made of kasti stone which is reddish black in colour.

It is believed that the idol was Chhotima was carried by king in battlefield.

This temple is also known as Kurma Pitha because it the temple premises resembles kurma i.e. tortoise.

Goddess Parvati (also spelt as Partvathi) is worshipped here as Tripurasundari, Tripureshwari and “Soroshi” (a local…

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