Posted in नहेरु परिवार - Nehru Family

‎ModiPhenomenon


 

 

‪#‎ModiPhenomenon

अभीतकघान्दी-नेहरूपरिवारकीरंगरेलियोंऔररहस्योंकेबारेमेंसार्वजनिकमंचसेकिसीभीभाजपानेतानेकोईबातनहींकहीहै. इसपरिवारकीतमामगन्दगीकाखुलासासोशलमीडियाअथवाइक्का-दुक्कान्यूज़वेबसाईटोंअथवानिजीलेखकोंकेलेखनमेंदिखाईदेताथा.

कल “भोंदूयुवराज” नेअपनेभाषणमेंबाकायदानरेंद्रमोदीकीपत्नीवालेविषयकोघसीटकरभारतमेंस्थापितराजनैतिकमर्यादाभंगकरदीहै. मुझेलगताहैकिभाजपाकोइसमामलेमेंनैतिकता(?) कोथोड़ाबाजूमेंरखकर “जैसेकोतैसा” अथवा “शठेशाठ्यमसमाचरेत” वालीपद्धतिअपनातेहुएकुछकानूनीकिस्मकेसवालसार्वजनिकमंचोंसेउठानेचाहिए. ध्यानरखनाहोगाकियेशाब्दिकहमलेव्यक्तिगतनाहों, बल्किकानूनीअथवा “रहस्यमयी” किस्मकेहों.

उदाहरणार्थ :-
१) सोनियागाँधीअपनीहवाईयात्राओं, विदेशयात्राओं, पासपोर्टडीटेल्स, आयकरविवरणीक्योंछिपातीहैं??
२) सोनियागाँधीनेपिछलेचुनावोंमेंगलतशपथपत्रभरकरअपनीशिक्षाकेबारेझूठक्योंबोलाथा, औरबादमेंएकपूरकशपथपत्रदायरकरकेगलतीक्योंसुधारी?
३) “पप्पू” नेउसकीएम.फिल. डिग्रीकेबारेमेंझूठाहलफनामाक्योंदिया? औरडॉस्वामीद्वारामाँगेजानेपरडिग्रीकीछायाप्रतिअबतकक्योंनहींदी?
४) सोनियागाँधीने1983 मेंइटलीकीनागरिकतात्यागी (हालांकिअभीयेभीसंशयास्पदहीहै), फिरउनकानाम1979 मेंहीगाँधीपरिवारकेराशनकार्डमेंकैसेजुड़गया?

येतोपक्काहैकिअबनरेंद्रमोदीउचितसमयपरतमाम “सेकुलरबंदरों” कीपूँछपरजूतारखकरमसलेंगेजरूर… लेकिनउम्मीदकरताहूँकिआनेवालेदिनोंमेंभाजपाकेभाषणोंमेंकुछ “मिर्चीयुक्तआलूबडे” भीशामिलहोंगे… जोकांग्रेसियोंकोउठनेऔरबैठनेदोनोंमेंतकलीफदेंगे…

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सोनिया गाँधी



फेसबुक मीडिया

आज कांग्रेस के कई लोगों ने नरेंद्र मोदी की पर्सनल लाइफ पर सवाल उठाये तो अब इन कांग्रेसियों से भी कुछ पर्सनल सवाल पूछना चाहता हूँ।

  1. ‪#‎सोनिया गाँधी से क्वात्रोची का क्या रिश्ता था ? जहाँ तक पूरी दुनिया जानती है वो सोनिया गाँधी के रिश्ते में दूर दूर तक कुछ नही लगता था … फिर वो किस रिश्ते से सोनिया गाँधी के घर में 10 सालो तक रहा ? सोनिया का आखिर क्वात्रोची से कौन सा वैध-अवैध रिश्ता था की बोफोर्स घोटाले मे उसे बचाने ले लिए सोनिया ने पूरी भारत के कानून का मजाक बना दिया था ?

2. आखिर इस बात की जानकारी सोनिया क्यूँ नहीं देती की वो राजीव गांधी से विवाह से पहले बियर बार मे बार डांसर का काम करती थी।

3. खुद इंदिरा गाँधी जब प्रधानमन्त्री बन गयी तब अपने पति ‪#‎फिरोज को लात मारकर घर से भगा दिया और उनके मरने पर उसके अंतिम संस्कार तक में नही गयी |

4. आखिर क्या कारण रहा की प्रियंका गाँधी के शादी के बाद राबर्ट बढेरा ने बकायदा पेपर में विज्ञापन देकर जिसमे उसने अपने बाप का फोटो तक छपवाया था घोषणा किया की मेरे सगे बाप से मेरा कोई सम्बन्ध नही है … फिर एक के बाद राबर्ट की बहन एक्सीडेंट में मरी , भाई और बाप होटल में मरे पाए गये ..माँ छत से गिरकर मरी .. एक भाई का आजतक कुछ पता नही की जिन्दा है भी या नही|

5. खुद ‪#‎इंदिरा ने पहली शादी अपने साथ पढने वाले मुहम्मद युनुस से लन्दन की एक मस्जिद में मैमुदा बेगम बनकर की थी … मुसलमानों के मसीहा ‪#‎जवाहर बहुत परेशान हुए क्योकि उनकी इकलौती बेटी इस्लाम कुबूल करके मुसलमान बन गयी थी … फिर गाँधी के द्वारा इंदिरा को समझाया गया और सर तेज बहादुर सप्रू के द्वारा इलाहबाद हाईकोर्ट में एक एफिडेविट इंदिरा के तरफ से डाला गया की मैने जो मैमुदा बेगम बनकर निकाह किया है उसे फेक घोषित किया जाये|

6. पिछले एक दशक से ब्राजीलियन ड्रग माफिया की बेटी वेरोनिका के साथ ‪#‎राहुल ‪#‎गांधीके साथ चल रहा सम्बन्ध वैध है या अवैध ?

Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

सिकंदर


सिकंदर कभी भी भारत मे जीता ही नहीं भारतीय
इतिहास कार आज जिन बातो के आधार पर सिकंदर
को महान बताते है वे सारी बाते यूनानी ,ग्रीक इतिहास
कर की बाते है ,इसके उल्टे चीनी और जापानी विद्वान
और कुछ ही सही तथ्य रख रहे है उनका कहना है की
सिकंदर ने अपने पिता की मृत्यु के पश्चात अपने सोतेले और
चचेरे भाइयो को निर्मम तरीके से मौत के घाट उतार
दिया था और खुद गद्दी पर बैठ गया था यह सिकंदर
औरंगजेब जैसा ही मार काट प्रिय व्यक्ति था इस ने
छोटी छोटी बातों पर अपने
साथियो को मरवा दिया ऐसा सिकंदर अगर मान भी ले
जो की सत्या नहीं है की पुरू राजा हारे थे और फिर इसने
उन्हे जीवन दान दे दिया ऐसा व्यक्ति जो छोटी सी बात
अपने साथियो की हत्या कर देता है वह अचानक अपने शत्रु
को कैसे ज़िंदा छोड़ सकता है
खैर आगे देखिये इतिहास कारो के नजरिए से —————
इतिहास को निष्पक्ष लिखने वाले प्लूटार्क ने लिखा-
‘सिकंदर सम्राट पुरु की 20,000 की सेना के सामने
तो ठहर नहीं पाया। आगे विश्व की महानतम
राजधानी मगध के महान सम्राट धनानंद
की सेना 3,50,000 की सेना उसका स्वागत करने के लिए
तैयार थी जिसमें 80,000 घुड़सवार, 80,000 युद्धक रथ
एवं 70,000 विध्वंसक हाथी सेना थी। उसके क्रूर सैनिक
दुश्मन के सैनिकों को मुर्गी-तीतर जैसा काट देते हैं।
अब आप खुद सोचिए की एक तरफ खच्चरों की फौज और एक
तरफ हाथी घोड़ो और बैलो से लेस दहाड़ती हुई भारतीय
सेनाए (महाराजा पुरू की सेना )कही भी फिट बैठती है
क्या
इतिहासकारों के अनुसार सिकंदर ने
कभी भी उदारता नहीं दिखाई। उसने अपने अनेक
सहयोगियों को उनकी छोटी-सी भूल से रुष्ट होकर तड़पा-
तड़पाकर मारा था। इसमें उसका एक योद्धा बसूस,
अपनी धाय का भाई क्लीटोस और पर्मीनियन
आदि का नाम उल्लेखनीय है। क्या एक क्रूर और
हत्यारा व्यक्ति महान कहलाने लायक है? गांधार के
राजा आम्भी ने सिकंदर का स्वागत किया। आम्भी ने भारत
के साथ गद्दारी की।
हारे हुए सिकंदर का सम्मान और उसकी प्रतिष्ठा बनाए
रखने के लिए यूनानी लेखकों ने यह सारा झूठा जाल रचा।
स्ट्रेबो, श्वानबेक आदि विदेशी विद्वानों ने तो कई
स्थानों पर इस बात का उल्लेख किया है कि मेगस्थनीज
आदि प्राचीन यूनानी लेखकों के विवरण झूठे हैं। ऐसे
विवरणों के कारण ही सिकंदर को महान समझा जाने
लगा और पोरस को एक हारा हुआ योद्धा, जबकि सचाई
इसके ठीक उलट थी। सिकंदर को हराने के बाद पोरस ने उसे
छोड़ दिया था और बाद में चाणक्य के साथ मिलकर उसने
मगध पर आक्रमण किया था।
सिकंदर कभी भी भारत मे जीता ही नहीं भारतीय
इतिहास कार आज जिन बातो के आधार पर सिकंदर
को महान बताते है वे सारी बाते यूनानी ,ग्रीक इतिहास
कर की बाते है ,इसके उल्टे चीनी और जापानी विद्वान
और कुछ ही सही तथ्य रख रहे है उनका कहना है की
सिकंदर ने अपने पिता की मृत्यु के पश्चात अपने सोतेले और
चचेरे भाइयो को निर्मम तरीके से मौत के घाट उतार
दिया था और खुद गद्दी पर बैठ गया था यह सिकंदर
औरंगजेब जैसा ही मार काट प्रिय व्यक्ति था इस ने
छोटी छोटी बातों पर अपने
साथियो को मरवा दिया ऐसा सिकंदर अगर मान भी ले
जो की सत्या नहीं है की पुरू राजा हारे थे और फिर इसने
उन्हे जीवन दान दे दिया ऐसा व्यक्ति जो छोटी सी बात
अपने साथियो की हत्या कर देता है वह अचानक अपने शत्रु
को कैसे ज़िंदा छोड़ सकता है
खैर आगे देखिये इतिहास कारो के नजरिए से ---------------
इतिहास को निष्पक्ष लिखने वाले प्लूटार्क ने लिखा-
'सिकंदर सम्राट पुरु की 20,000 की सेना के सामने
तो ठहर नहीं पाया। आगे विश्व की महानतम
राजधानी मगध के महान सम्राट धनानंद
की सेना 3,50,000 की सेना उसका स्वागत करने के लिए
तैयार थी जिसमें 80,000 घुड़सवार, 80,000 युद्धक रथ
एवं 70,000 विध्वंसक हाथी सेना थी। उसके क्रूर सैनिक
दुश्मन के सैनिकों को मुर्गी-तीतर जैसा काट देते हैं।
अब आप खुद सोचिए की एक तरफ खच्चरों की फौज और एक
तरफ हाथी घोड़ो और बैलो से लेस दहाड़ती हुई भारतीय
सेनाए (महाराजा पुरू की सेना )कही भी फिट बैठती है
क्या
इतिहासकारों के अनुसार सिकंदर ने
कभी भी उदारता नहीं दिखाई। उसने अपने अनेक
सहयोगियों को उनकी छोटी-सी भूल से रुष्ट होकर तड़पा-
तड़पाकर मारा था। इसमें उसका एक योद्धा बसूस,
अपनी धाय का भाई क्लीटोस और पर्मीनियन
आदि का नाम उल्लेखनीय है। क्या एक क्रूर और
हत्यारा व्यक्ति महान कहलाने लायक है? गांधार के
राजा आम्भी ने सिकंदर का स्वागत किया। आम्भी ने भारत
के साथ गद्दारी की।
हारे हुए सिकंदर का सम्मान और उसकी प्रतिष्ठा बनाए
रखने के लिए यूनानी लेखकों ने यह सारा झूठा जाल रचा।
स्ट्रेबो, श्वानबेक आदि विदेशी विद्वानों ने तो कई
स्थानों पर इस बात का उल्लेख किया है कि मेगस्थनीज
आदि प्राचीन यूनानी लेखकों के विवरण झूठे हैं। ऐसे
विवरणों के कारण ही सिकंदर को महान समझा जाने
लगा और पोरस को एक हारा हुआ योद्धा, जबकि सचाई
इसके ठीक उलट थी। सिकंदर को हराने के बाद पोरस ने उसे
छोड़ दिया था और बाद में चाणक्य के साथ मिलकर उसने
मगध पर आक्रमण किया था।
Posted in Sai conspiracy

धर्म युद्ध की पूर्ण स्थिति बन सकती है साईं पूजा


धर्म युद्ध की पूर्ण स्थिति बन सकती है साईं पूजा पर शुरू हुआ विवाद आने वाले दिनो इस विवाद में अब नागा साधु भी कूदने वाले हैं।
इलाहाबाद और हरिद्वार के अखाड़ों ने नागा साधुओं से आह्वान किया है कि साईं पूजा के मामले में शंकराचार्य के मत को समर्थन देने के लिए वे एकजुट हों। अब इन दोनों ही जगहों पर नागा साधुओं का जमावड़ा लग सकता है। इस दौरान ऐसी रणनीति बनाई जाएगी, जिसका मकसद इस बात का खंडन करना होगा कि साईं भगवान थे।
अखाड़ों ने कहा- धार्मिक आपातकाल की स्थिति है
अग्नि अखाड़ा के सेक्रेटरी गोविंदानंद ब्रह्मचारी ने कहा, ‘यह धार्मिक आपातकाल की स्थिति है और नागा साधु सनातन धर्म के रक्षक के तौर पर जल्द ही शंकराचार्य के समर्थन में उतर सकते हैं। हमने उसने प्रयाग और हरिद्वार में जमा होने को कहा है।’ निरंजनी अखाड़ा के सेक्रेटरी आचार्य नरेंद्र गिरि ने कहा, ‘हमारे कुछ सदस्यों ने मंदिरों से साईं बाबा की मूर्तियों को हटाना शुरू भी कर दिया है। साईं भक्तों ने शंकराचार्य का जिस तरह अनादर किया है, उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हथियारों से लैस हमारे साधु जल्द ही इस मामले का संज्ञान लेंगे।’
हर हर महादेव ॐ
धर्म युद्ध की पूर्ण स्थिति बन सकती है साईं पूजा पर शुरू हुआ विवाद आने वाले दिनो इस विवाद में अब नागा साधु भी कूदने वाले हैं।
इलाहाबाद और हरिद्वार के अखाड़ों ने नागा साधुओं से आह्वान किया है कि साईं पूजा के मामले में शंकराचार्य के मत को समर्थन देने के लिए वे एकजुट हों। अब इन दोनों ही जगहों पर नागा साधुओं का जमावड़ा लग सकता है। इस दौरान ऐसी रणनीति बनाई जाएगी, जिसका मकसद इस बात का खंडन करना होगा कि साईं भगवान थे।
अखाड़ों ने कहा- धार्मिक आपातकाल की स्थिति है
अग्नि अखाड़ा के सेक्रेटरी गोविंदानंद ब्रह्मचारी ने कहा, 'यह धार्मिक आपातकाल की स्थिति है और नागा साधु सनातन धर्म के रक्षक के तौर पर जल्द ही शंकराचार्य के समर्थन में उतर सकते हैं। हमने उसने प्रयाग और हरिद्वार में जमा होने को कहा है।' निरंजनी अखाड़ा के सेक्रेटरी आचार्य नरेंद्र गिरि ने कहा, 'हमारे कुछ सदस्यों ने मंदिरों से साईं बाबा की मूर्तियों को हटाना शुरू भी कर दिया है। साईं भक्तों ने शंकराचार्य का जिस तरह अनादर किया है, उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हथियारों से लैस हमारे साधु जल्द ही इस मामले का संज्ञान लेंगे।'
हर हर महादेव ॐ
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शिर्डी संस्थान को भंग करो.


शिर्डी संस्थान को भंग करो. पुरानी खबर आज भी हैं असरदार..,
क्योंकि देश में हो रहा हैं धर्म का व्यापार.
देश में कमिटी (COME+EATY) शब्द घातक हैं. आओं खाओं व लूटो…, यह देश में कमिटी का हाल हैं. यदि इसमें राजनितिक तड़का लग जाये, यदि वह धर्म का व्यापार बन जाये तो जनता भी अंधविश्वास से पागल हो जाती है.
इस कमिटी (COME+EATY) ने देश के हिन्दू व मुस्लिम के वफ्फ़ बोर्ड, सिख व इसाई धर्मो की जमीन कब सरका दी. धर्म की आड़ से जनता को पता ही नहीं चलता हैं |
आस्था शब्द का मूल हैं ”आ और स्थापित हो जा”, यदि हमें उसे ग्रहण करने की धनात्मक शक्ति होगी तो पत्थर की आस्था भी हममे समाहित होगी.
शुरू में तो शिर्डी का मंदिर भी धुल फाक रहा था. शिर्डी के साईं बाबा की चमक १९७७ में मनोज कुमार द्वारा बने गई फिल्म शिर्डी के साईं बाबा से बनी. धर्म के नाम से व्यापार का हुजूम शुरू हुआ. १९७५ में जय संतोषी माता फिल्म जो १ लाख से भी कम में बनी थी…इस फिल्म ने आस्था से ७ करोड़ से ज्यादा कमाए, तथा खासकर देश के महिलाओं में यह आस्था धर कर , लोगों में गहरे प्रभाव से मन्नते पुरी हो रही थी …, तथा मनोज कुमार के फिल्म की चमक ने धीरे –धीरे फीका कर संतोषी माता को पछाड़ दिया.
१९९० के दशक में मीडिया का दौर शुरू हो रहा था , इस प्रचार से, इसका राजनैतिक करण से मुम्बई के शिर्डी के मंदिर ने, आज सिद्धीविनायक मंदिर को भी पछाड़ दिया
आज भी देश में हजारो शिर्डी जैसे आस्थात्मक प्रतीक हैं. वे सुदूर व सड़क क्षेत्र से काफी बाहर हैं…, उनका व्यापारिक व्यवसाय में कठिनाई होने से.., आज भी जनता अनजान है. इसका एक कारण है कि, यदि यह हजारो आस्था के प्रतीक लोगों में श्रद्धा का सबक बने तो देश में तिरुपति, साई बाबा मंदिर व अन्य धनाड्य मंदिरों के दान खटाई में पढ़ जाएँगे. याद रहे आज पद्मानाभन मंदिर दुनिया के अमीर मंदिरों में हैं .., जिसकी संपत्ती का राज हाल में ही खुला है , कारण राजा द्वारा प्रजा की जमा पूंजी को अंग्रेजों के हाथ में न जाने देने व अपने स्वाभिमान से अंग्रेजो के पिछलग्गू नही बनें, नहीं तो आज की तरह देश की राजनीति में जो नरेशो के महल को लूट कर उन्हें अंग्रेज काल से आज तक देश के सत्ता की भागेदारी मिली हैं उसमे पद्मनाभम के राजा का भी नाम होता था .
जनता हैं…, भूख की लाचारी से, आस्था के नाम से अपने अगले जनम के कर्म उन्नत करने के लिए अन्धविश्वास में देश की कमिटी (COME+EATY) के हाथो अपने व देश को लूटवा रही है.
स्वामी दयानंद सरस्वती ने कहा था, गंगा निर्मल हैं पानी की गुणवत्ता का कोई सानी नहीं है. हिन्दुओ को आवाहन किया था इस माँ कि पवित्रता का सन्मान करो और दूषित करने से बचाओ. अन्धविश्वास पर कहा था यदि गंगा में राख व मुर्दे बहाने से व आत्महत्या करने से स्वर्ग मिलता हैं तो गंगा में पैदा होने वाली मछली को स्वर्ग प्राप्ति होती हैं?. धर्म को विज्ञान की दृष्टी का शोध ही सनातन धर्म है.
बड़े दुःख के साथ लिखना पढ़ रहा है, हम अपने अतीत पर गर्व करते रहे लेकिन शोध को आगे न बढाते हुए वर्त्तमान में अतीत के भ्रम से अपने अगले जन्मो की सीढ़ी बना कर ऊपर चढ़ने के चक्कर में, और उसके ऊपर से राजनितिक कसाइयो को लूट का अधिकार मिला. तो उन्होंने वोट बैक बनाकर सनातन धर्म को, पश्चिम सभ्यता की आड़ में बैन करने का खेल , खेला जा रहा है …
विदेशी लुटेरों ने हमारी शोध की पांडुलिपीया चुराकर, हमें जाती धर्म से बिखराकर , आज हमारी तकनीकी से हवाई जहाज तक बना लिए है…., जबकि हम उनके हवाई जहाज (तकनीकी) में आज तक पेट्रोल भर कर कर्ज में डूब रहें है…
याद रहें…, परमाणु बम के जनक अलबर्ट आइन्स्टीन ने कहा था, मेरे सफलता का श्रेय भारतीय ऋषी , मुनियों को जाता है…, जिनकी वजह से यह संभव हुआ

शिर्डी संस्थान को भंग करो. पुरानी खबर आज भी हैं असरदार..,
क्योंकि देश में हो रहा हैं धर्म का व्यापार.
देश में कमिटी (COME+EATY) शब्द घातक हैं. आओं खाओं व लूटो..., यह देश में कमिटी का हाल हैं. यदि इसमें राजनितिक तड़का लग जाये, यदि वह धर्म का व्यापार बन जाये तो जनता भी अंधविश्वास से पागल हो जाती है.
इस कमिटी (COME+EATY) ने देश के हिन्दू व मुस्लिम के वफ्फ़ बोर्ड, सिख व इसाई धर्मो की जमीन कब सरका दी. धर्म की आड़ से जनता को पता ही नहीं चलता हैं |
आस्था शब्द का मूल हैं ”आ और स्थापित हो जा”, यदि हमें उसे ग्रहण करने की धनात्मक शक्ति होगी तो पत्थर की आस्था भी हममे समाहित होगी.
शुरू में तो शिर्डी का मंदिर भी धुल फाक रहा था. शिर्डी के साईं बाबा की चमक १९७७ में मनोज कुमार द्वारा बने गई फिल्म शिर्डी के साईं बाबा से बनी. धर्म के नाम से व्यापार का हुजूम शुरू हुआ. १९७५ में जय संतोषी माता फिल्म जो १ लाख से भी कम में बनी थी...इस फिल्म ने आस्था से ७ करोड़ से ज्यादा कमाए, तथा खासकर देश के महिलाओं में यह आस्था धर कर , लोगों में गहरे प्रभाव से मन्नते पुरी हो रही थी ..., तथा मनोज कुमार के फिल्म की चमक ने धीरे –धीरे फीका कर संतोषी माता को पछाड़ दिया.
१९९० के दशक में मीडिया का दौर शुरू हो रहा था , इस प्रचार से, इसका राजनैतिक करण से मुम्बई के शिर्डी के मंदिर ने, आज सिद्धीविनायक मंदिर को भी पछाड़ दिया
आज भी देश में हजारो शिर्डी जैसे आस्थात्मक प्रतीक हैं. वे सुदूर व सड़क क्षेत्र से काफी बाहर हैं..., उनका व्यापारिक व्यवसाय में कठिनाई होने से.., आज भी जनता अनजान है. इसका एक कारण है कि, यदि यह हजारो आस्था के प्रतीक लोगों में श्रद्धा का सबक बने तो देश में तिरुपति, साई बाबा मंदिर व अन्य धनाड्य मंदिरों के दान खटाई में पढ़ जाएँगे. याद रहे आज पद्मानाभन मंदिर दुनिया के अमीर मंदिरों में हैं .., जिसकी संपत्ती का राज हाल में ही खुला है , कारण राजा द्वारा प्रजा की जमा पूंजी को अंग्रेजों के हाथ में न जाने देने व अपने स्वाभिमान से अंग्रेजो के पिछलग्गू नही बनें, नहीं तो आज की तरह देश की राजनीति में जो नरेशो के महल को लूट कर उन्हें अंग्रेज काल से आज तक देश के सत्ता की भागेदारी मिली हैं उसमे पद्मनाभम के राजा का भी नाम होता था .
जनता हैं..., भूख की लाचारी से, आस्था के नाम से अपने अगले जनम के कर्म उन्नत करने के लिए अन्धविश्वास में देश की कमिटी (COME+EATY) के हाथो अपने व देश को लूटवा रही है.
स्वामी दयानंद सरस्वती ने कहा था, गंगा निर्मल हैं पानी की गुणवत्ता का कोई सानी नहीं है. हिन्दुओ को आवाहन किया था इस माँ कि पवित्रता का सन्मान करो और दूषित करने से बचाओ. अन्धविश्वास पर कहा था यदि गंगा में राख व मुर्दे बहाने से व आत्महत्या करने से स्वर्ग मिलता हैं तो गंगा में पैदा होने वाली मछली को स्वर्ग प्राप्ति होती हैं?. धर्म को विज्ञान की दृष्टी का शोध ही सनातन धर्म है.
बड़े दुःख के साथ लिखना पढ़ रहा है, हम अपने अतीत पर गर्व करते रहे लेकिन शोध को आगे न बढाते हुए वर्त्तमान में अतीत के भ्रम से अपने अगले जन्मो की सीढ़ी बना कर ऊपर चढ़ने के चक्कर में, और उसके ऊपर से राजनितिक कसाइयो को लूट का अधिकार मिला. तो उन्होंने वोट बैक बनाकर सनातन धर्म को, पश्चिम सभ्यता की आड़ में बैन करने का खेल , खेला जा रहा है ...
विदेशी लुटेरों ने हमारी शोध की पांडुलिपीया चुराकर, हमें जाती धर्म से बिखराकर , आज हमारी तकनीकी से हवाई जहाज तक बना लिए है...., जबकि हम उनके हवाई जहाज (तकनीकी) में आज तक पेट्रोल भर कर कर्ज में डूब रहें है...
याद रहें..., परमाणु बम के जनक अलबर्ट आइन्स्टीन ने कहा था, मेरे सफलता का श्रेय भारतीय ऋषी , मुनियों को जाता है..., जिनकी वजह से यह संभव हुआ
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एक बन्दा चला बंगलोर से दिल्ली की यात्रा पर ।


एक बन्दा चला बंगलोर से दिल्ली की यात्रा पर ।
जयपुर पहुंचा तो दिल्ली का रास्ता पहुंचा उसे कुछ लोगों ने कहा … “दिल्ली कौन सी दिल्ली ”
हमने तो कोई दिल्ली नही सुनी, यही दिल्ली है ।

वो बन्दा वहीं से वापिस बंगलोर चला गया ।
पूरे रस्ते वो यही गाता रहा दिल्ली है ही नही… भारत तो बस जयपुर तक ही है ।

अब रस्ते में जो दिल्ली के रहने वाले या दिल्ली घूम चुके लोग थे वो कहने लगे भाई ये अजीब बन्दा है ।

यही हाल बुद्ध का था…
शून्य पर पहुँच कर वापिस आ गये …
आत्मा से साक्षात्कार नही और न ही जाना आत्मा को प्रचारित करते रहे कि आत्मा है ही नही ।

शून्यवादी बोद्धों ने बाद में पंचतन्त्र की कहानियों और पुराणों से चुरा चुरा कर जातक कथाएँ और त्रिपिटक लिख डाले ।

बुद्ध सत्संग करते करते शून्य पर आकर चुप हो जाता था ।

शून्य यानी निर्वाण … निर्वाण को पाली भाषा में निब्बन कहते हैं ।

आदि शन्कराचार्य जी और कुमारिल भट्ट जी ने इसी का खंडन किया कि “शून्य से आगे कुछ भी नही… कैसे ?”

शून्य से आगे आत्मा है ।

कल Sidhguru Baba Natrajnath जी की यह पोस्ट पढ़ी तो सोचा इस भी प्रकाश डाला जाये ।

एक समय मलयूक्ष्य पुत्त नामक किसी व्यक्ति ने महात्मा गौत्तम बुध्द से प्रश्न किया- भगवन क्या यह संसार अनादी व अन्नत है? यदि नही तो इसकी उत्पत्ति किस प्रकार हुई?
लेकिन बुध्द ने उत्तर दिया – है मलयूक्ष्य पुत्त तुम आओ ओर मेरे शिष्य बन जाऔ,मै तुमको इस बात की शिक्षा दुंगा कि संसार नित्य है या नही|”
मलयूक्ष्य पुत्त ने कहा ” महाराज आपने ऐसा नही कहा|”(कि शिष्य बनने पर ही शंका दूर करोगे)
तो बुध्द बोले- तो फिर इस प्रश्न को पूछने का मुझसे साहस न करे| -(मझिम्म निकाय कुल मलूक्य वाद)
इससे निम्न बात स्पष्ट है कि बुध्द का सृष्टि ज्ञान शुन्य था …उनका मकसद केवल अपने अनुयायी बनाना था ..इसके अलावा पशु सुत्त ओर महा सोह सुत्त से पता चलता है कि वे अपने शिष्यो को भी जिज्ञासा प्रकट करने का उत्साह नही देते थे..
एक ओर बुध्दवादी कहते है कि बौध्द मत तर्को को प्राथमिकता देता है लेकिन यहा मलुक्य को बुध्द खुद चुप कर रहे है|

पर… चमत्कार को नमस्कार है

परन्तु मिथ्या और अनर्गल प्रचारों तथा पाखंड का खंडन होना चाहिए जैसे कि पहले भी होता आया है ।

अब साईं बाबा उर्फ़ चाँद मियां के पाखंड को मिटटी में मिलाने का समय है ।

एक बन्दा चला बंगलोर से दिल्ली की यात्रा पर ।
जयपुर पहुंचा तो दिल्ली का रास्ता पहुंचा उसे कुछ लोगों ने कहा ... "दिल्ली कौन सी दिल्ली " 
हमने तो कोई दिल्ली नही सुनी, यही दिल्ली है ।

वो बन्दा वहीं से वापिस बंगलोर चला गया ।
पूरे रस्ते वो यही गाता रहा दिल्ली है ही नही... भारत तो बस जयपुर तक ही है ।

अब रस्ते में जो दिल्ली के रहने वाले या दिल्ली घूम चुके लोग थे वो कहने लगे भाई ये अजीब बन्दा है ।

यही हाल बुद्ध का था...
शून्य पर पहुँच कर वापिस आ गये ...
आत्मा से साक्षात्कार नही और न ही जाना आत्मा को प्रचारित करते रहे कि आत्मा है ही नही ।

शून्यवादी बोद्धों ने बाद में पंचतन्त्र की कहानियों और पुराणों से चुरा चुरा कर जातक कथाएँ और त्रिपिटक लिख डाले ।

बुद्ध सत्संग करते करते शून्य  पर आकर चुप हो जाता था ।

शून्य यानी निर्वाण ... निर्वाण को पाली भाषा में निब्बन कहते हैं ।

आदि शन्कराचार्य  जी और कुमारिल भट्ट जी ने इसी का खंडन किया कि "शून्य से आगे कुछ भी नही... कैसे ?"

शून्य से आगे आत्मा है ।

कल Sidhguru Baba Natrajnath जी की यह पोस्ट पढ़ी तो सोचा इस भी प्रकाश डाला जाये ।

एक समय मलयूक्ष्य पुत्त नामक किसी व्यक्ति ने महात्मा गौत्तम बुध्द से प्रश्न किया- भगवन क्या यह संसार अनादी व अन्नत है? यदि नही तो इसकी उत्पत्ति किस प्रकार हुई?
लेकिन बुध्द ने उत्तर दिया - है मलयूक्ष्य पुत्त तुम आओ ओर मेरे शिष्य बन जाऔ,मै तुमको इस बात की शिक्षा दुंगा कि संसार नित्य है या नही|"
मलयूक्ष्य पुत्त ने कहा " महाराज आपने ऐसा नही कहा|"(कि शिष्य बनने पर ही शंका दूर करोगे)
तो बुध्द बोले- तो फिर इस प्रश्न को पूछने का मुझसे साहस न करे| -(मझिम्म निकाय कुल मलूक्य वाद)
इससे निम्न बात स्पष्ट है कि बुध्द का सृष्टि ज्ञान शुन्य था ...उनका मकसद केवल अपने अनुयायी बनाना था ..इसके अलावा पशु सुत्त ओर महा सोह सुत्त से पता चलता है कि वे अपने शिष्यो को भी जिज्ञासा प्रकट करने का उत्साह नही देते थे..
एक ओर बुध्दवादी कहते है कि बौध्द मत तर्को को प्राथमिकता देता है लेकिन यहा मलुक्य को बुध्द खुद चुप कर रहे है|

पर... चमत्कार को नमस्कार है 

परन्तु मिथ्या और अनर्गल प्रचारों तथा पाखंड का खंडन होना चाहिए जैसे कि पहले भी होता आया है ।

अब साईं बाबा उर्फ़ चाँद मियां के पाखंड को मिटटी में मिलाने का समय है ।
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sai


भाइयों आज कल हर ओर साईं बाबा का विरोधजोर शोर से हो रहा है | कुछ हिन्दू संगठनभी विरोध में उतर आये है, पर साईंभक्तो को अभी भी अपनी साईं भक्ति परपूरा भरोसा है |आप लोग वक्फ बोर्ड के बारे में जानते ही होंगे,अगर नहीं तो सुनिए ये एक ऐसा बोर्ड हैजो इस्लामी संस्कृति के सरक्षण का कामकरता है | देश में जितनी भी इस्लामी इमारते हैंउनका देखरेख यही करता है और उन से होनेवाली आमदनी इस्लाम के धार्मिक कार्यो परखर्च करता है | पीरो की मजार हो या अजमेरशरीफ, सब वक्फ बोर्ड के अधीन है |भाइयों अगर ये सिद्ध हो जाता है की साईंबाबा मुसलमान है, तो ये वक्फ बोर्ड,शिरडी साईं ट्रस्ट को अपने अधीन ले लेगा औरइसमें हमारे देश का कोई कानून इसे नहीं रोकसकता |अब जरा सोचिये अगर साईं ट्रस्टकी प्रॉपर्टी वक्फ बोर्ड के पास चली गईतो परिणाम आप सोच सकते है |वक्फ बोर्ड पहले भी साईं ट्रस्ट को अपने कब्जेमें लेने की कोशिश कर चूका है पर वो आज तकये सिद्ध नहीं कर सका कि साईं मुस्लिम थे |अब उसने दूसरी चाल चली है और उसकी चालका परिणाम ये है कि आज खुद हिन्दू साईंको मुस्लिम बना कर वक्फ बोर्ड का काम आसानकर रहा है |ये सच है आप साईं को नहीं मानते मत मानिये परवक्फ बोर्ड को कोई मौका न दो | क्योंकि अगरएक बार साईं ट्रस्ट इनके हाथ आगया तो समझ लेना भारत में isis सेभी बड़ा आतंकवादी संगठन बन जायेगा |जरा सोचिये, समझिये, कोई हमें बेवकूफ नबना जाए।
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यह बात १८८० के पहले की है जब गांववालों के लिए साईं एक साधारण पागल फ़क़ीर थे,रोज गांववालों से भीख मांगता और मस्जिद में एक दिया और ठण्ड से बचने के लिए लकड़ी जलाने के लिए दुकानदारों से तेल मंगाते थे. यह तेल शहर से बैलगाड़ी में लाके गाँव में बेचा जाता था(पेज न १२२,श्री साईं सत्चरित) लेकिन उस दिन गाँव में तेल नहीं आया तो दुकानदारों ने बाबा को तेल नहीं दिया(पेज न ४२,श्री साईं सत्चरित) बाबा खाली हाथ वापस आ गए.शाम के बाद जब अँधेरा बढ़ने लगा तो बाबा जो बेहतरीन एक बावर्ची भी थे, ने अपने अनुभव का उपयोग करते हुए तेल रखने वाले बर्तन में थोडा सा पानी डालकर बर्तन को जोर से हिलाया और थोड़ी देर बर्तन को रख दिया.जैसा की सबको मालूम है तेल का घनत्व(density) ज्यादा होने से वह पानी के साथ मिलता(mix) नहीं,वह पानी की सतह पर तैरने लगता है.बाबा ने उपरी सतह पर जो तेल जमा हुआ था उसे चिराग(दिया) में उड़ेल लिया ऊपर जमा हुआ तेल चिराग में आ गया, जिससे चिराग जलने लगा.
यह घटना १८८० से पहले की इसलिए है क्यूंकि इसके बाद गांववाले साईं के प्रचार प्रसार में जुट गए थे,और कोई भी किसी चीज के लिए साईं को मन नहीं कर सकता था.सन १८९० से मस्जिद में चिराग जलाने का काम अब्दुल बाबा करते थे, अपने जीवन पर्यन्त वे मस्जिद में और बाद में बाबा की कब्र पर चिराग जलाते रहे. इस घटना में सिर्फ एक ही चिराग जलाया गया था क्यूंकि जैसा आपलोग जानते हैं बाबा १९१० के पहले मस्जिद में किसी भी तरह की हिन्दू गतिविधि का विरोध करते थे यह बात बाबा के प्रसिद्ध भक्त श्री हरी विनायक साठे ने अपने एक inerview में साईं प्रचारक बी.वि.नार्सिम्हास्वमी को बताई थी (पेज न १२२, Devotee’s Experience) ,इसलिए यह अतिश्योक्ति(exaggretion ) हे की बहुत से दिए जलाये.
चमत्कार तो भगवान स्वयं भी नहीं करते क्यूंकि हर घटना प्रकृति के नियमो के अनुसार होती है और यह नियम भगवान के ही बनाये हुए हैं और भगवान अपने बनाये हुए नियमो को स्वयं कैसे तोड़ सकते हैं.जब भगवान प्रकृति नियमों के विरुद्ध नहीं जाते तो साईं जैसों की औकात ही क्या है चमत्कार करने की.
आँखे खोलो साईं भक्तों यह एक बहुत बड़ा षड़यंत्र है पैसे कमाने के लिए.
मित्रों ऐसी जानकारी ज्यादा से ज्यादा शेयर करें,ताकि लोग इस सुचना का लाभ उठा सकें.
यह बात १८८० के पहले की है जब गांववालों के लिए साईं एक साधारण पागल फ़क़ीर थे,रोज गांववालों से भीख मांगता और मस्जिद में एक दिया और ठण्ड से बचने के लिए लकड़ी जलाने के लिए दुकानदारों से तेल मंगाते थे. यह तेल शहर से बैलगाड़ी में लाके गाँव में बेचा जाता था(पेज न १२२,श्री साईं सत्चरित) लेकिन उस दिन गाँव में तेल नहीं आया तो दुकानदारों ने बाबा को तेल नहीं दिया(पेज न ४२,श्री साईं सत्चरित) बाबा खाली हाथ वापस आ गए.शाम के बाद जब अँधेरा बढ़ने लगा तो बाबा जो बेहतरीन एक बावर्ची भी थे, ने अपने अनुभव का उपयोग करते हुए तेल रखने वाले बर्तन में थोडा सा पानी डालकर बर्तन को जोर से हिलाया और थोड़ी देर बर्तन को रख दिया.जैसा की सबको मालूम है तेल का घनत्व(density) ज्यादा होने से वह पानी के साथ मिलता(mix) नहीं,वह पानी की सतह पर तैरने लगता है.बाबा ने उपरी सतह पर जो तेल जमा हुआ था उसे चिराग(दिया) में उड़ेल लिया ऊपर जमा हुआ तेल चिराग में आ गया, जिससे चिराग जलने लगा.
यह घटना १८८० से पहले की इसलिए है क्यूंकि इसके बाद गांववाले साईं के प्रचार प्रसार में जुट गए थे,और कोई भी किसी चीज के लिए साईं को मन नहीं कर सकता था.सन १८९० से मस्जिद में चिराग जलाने का काम अब्दुल बाबा करते थे, अपने जीवन पर्यन्त वे मस्जिद में और बाद में बाबा की कब्र पर चिराग जलाते रहे. इस घटना में सिर्फ एक ही चिराग जलाया गया था क्यूंकि जैसा आपलोग जानते हैं बाबा १९१० के पहले मस्जिद में किसी भी तरह की हिन्दू गतिविधि का विरोध करते थे यह बात बाबा के प्रसिद्ध भक्त श्री हरी विनायक साठे ने अपने एक inerview में साईं प्रचारक बी.वि.नार्सिम्हास्वमी को बताई थी (पेज न १२२, Devotee’s Experience) ,इसलिए यह अतिश्योक्ति(exaggretion ) हे की बहुत से दिए जलाये.
चमत्कार तो भगवान स्वयं भी नहीं करते क्यूंकि हर घटना प्रकृति के नियमो के अनुसार होती है और यह नियम भगवान के ही बनाये हुए हैं और भगवान अपने बनाये हुए नियमो को स्वयं कैसे तोड़ सकते हैं.जब भगवान प्रकृति नियमों के विरुद्ध नहीं जाते तो साईं जैसों की औकात ही क्या है चमत्कार करने की.
आँखे खोलो साईं भक्तों यह एक बहुत बड़ा षड़यंत्र है पैसे कमाने के लिए.
मित्रों ऐसी जानकारी ज्यादा से ज्यादा शेयर करें,ताकि लोग इस सुचना का लाभ उठा सकें.
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Cultural Invasion


Cultural Invasion

Christa Ratha Yathra.

We already have Christian Yoga, Christian Puraan, Soon we will have Christa Bhagawat Geeta, Christa Kalash Yatra, Christa Hawan, Christa

Later Hindus will be taught that Hinduism was born from Christianity, and obviously whoever oppose it, are fascist ‪#‎RSS‬ agents.

Cultural Invasion 

Christa Ratha Yathra.

We already have Christian Yoga, Christian Puraan, Soon we will have Christa Bhagawat Geeta, Christa Kalash Yatra, Christa Hawan, Christa

Later Hindus will be taught that Hinduism was born from Christianity, and obviously whoever oppose it, are fascist #RSS agents.
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NASA को मालूम था, नहीं बचेगी कल्पना चावला की टीम!


NASA को मालूम था, नहीं बचेगी कल्पना चावला की टीम!
(फाइल फोटो: कल्पना चावला)
इंटरनेशनल डेस्क। एक फरवरी 2003 की सुबह ऐसी खबर लेकर आई, जिसने पूरी दुनिया को दुखी और स्तब्ध कर दिया। ये वो दिन है, जब नासा की महत्वकांक्षी स्पेस शटल कोलंबिया पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश करते ही ब्लास्ट कर टुकड़े-टुकड़े हो गया था। हादसे में इसमें भारतीय मूल की अंतरिक्ष वैज्ञानिक कल्पना चावला समेत सभी छह अंतरिक्ष यात्रियों की मौत हो गई थी।
हादसे में मारी जाने वाली कल्पना चावला इस मिशन की अहम सदस्य थी। एक जुलाई 1961 में हरियाणा के करनाल कस्बे में उनका जन्म हुआ। कल्पना अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय मूल की महिला थीं।
हादसे के 10 साल बाद हुआ अहम खुलासा
नासा के मिशन कंट्रोल रूम को मालूम था कि कल्पना चावला और उनकी टीम पृथ्वी पर सुरक्षित नहीं आ पाएगी। और तो और अंतरिक्ष यात्रियों को इस बात की जानकारी तक नहीं दी गई। हादसे के करीबन 10 साल बाद अंतरिक्ष शटल कोलंबिया के प्रोग्राम मैनेजर रहे वेन हेल ने इस बात का खुलासा किया।
हेल ने अपने ब्लॉग में लिखा, “शटल कोलंबिया में ऐसी खराबी आ गई थी, जिसकी मरम्मत नहीं हो सकती थी। शटल इंटरनेशनल स्पेस सेंटर से भी बहुत दूर था, इसलिए रोबोटिक आर्म से भी खराबी दूर नहीं करवा सकते थे।” अमेरिकी न्यूज चैनल एबीसी के मुताबिक, हेल एकमात्र व्यक्ति हैं, जिन्होंने सार्वजनिक तौर पर गलती मानी।
हेल के खुलासे ने नासा पर कई सवाल खड़े कर दिए। दरअसल, इस सनसनीखेज खुलासे के बाद नासा ने न तो इसका खंडन किया और न ही इसके प्रोग्राम मैनेजर हेल की बात को सही करार दिया।