Posted in हिन्दू पतन

पढो और शांति से विचार करो ।


 
पढो और शांति से विचार करो ।

1. विश्व में लगभग 56 मुस्लिम देश हैं, एक मुस्लिम देश का नाम बताईये जो हज के लिये "सब्सिडी" देता हो?

2. एक मुस्लिम देश बताईये जहाँ हिन्दुओं के लिये विशेष कानून हैं, जैसे कि भारत में मुसलमानों के लिये हैं ?

3. किसी एक देश का नाम बताईये, जहाँ 85% बहुसंख्यकों को "याचना" करनी पडती है, 15% अल्पसंख्यकों को संतुष्ट करने के लिये ?

4. एक मुस्लिम देश का नाम बताईये, जहाँ का राष्ट्रपति या प्रधानमन्त्री गैर- मुस्लिम हो ?

5. किसी "मुल्ला" या "मौलवी" का नाम बताईये, जिसने आतंकवादियों के खिलाफ़ फ़तवा जारी किया हो ?

6. महाराष्ट्र, बिहार, केरल जैसे हिन्दू बहुल राज्यों में मुस्लिम मुख्यमन्त्री हो चुके हैं, क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि मुस्लिम बहुल राज्य "कश्मीर" में कोई हिन्दू मुख्यमन्त्री हो सकता है ?

7. 1947 में आजादी के दौरान पाकिस्तान में हिन्दू जनसंख्या 24% थी, अब वह घटकर 1% रह गई है, उसी समय तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब आज का अहसान फ़रामोश बांग्लादेश) में हिन्दू जनसंख्या 30% थी जो अब 7% से भी कम हो गई है । क्या हुआ गुमशुदा हिन्दुओं का ? क्या वहाँ (और यहाँ भी) हिन्दुओं के कोई मानवाधिकार हैं ?

8. जबकि इस दौरान भारत में मुस्लिम जनसंख्या 10.4% से बढकर 14.2% हो गई है, क्या वाकई हिन्दू कट्टरवादी हैं?

9. यदि हिन्दू असहिष्णु हैं तो कैसे हमारे यहाँ मुस्लिम सडकों पर नमाज पढते रहते हैं, लाऊडस्पीकर पर दिन भर चिल्लाते रहते हैं कि "अल्लाह के सिवाय और कोई शक्ति नहीं है" ?

10. सोमनाथ मन्दिर के जीर्णोद्धार के लिये देश के पैसे का दुरुपयोग नहीं होना चाहिये ऐसा गाँधी ने कहा था, लेकिन 1948 में ही दिल्ली की मस्जिदों को सरकारी मदद से बनवाने के लिये उन्होंने नेहरू और पटेल पर दबाव बनाया, क्यों?

11. कश्मीर, नागालैण्ड, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय आदिमें हिन्दू अल्पसंख्यक हैं, क्या उन्हें कोई विशेष सुविधा मिलती है ?

12. हज करने के लिये सबसिडी मिलती है, जब कि मानसरोवर और अमरनाथ जाने पर टैक्स देना पड़ता है, क्यों ?

13. मदरसे और क्रिश्चियन स्कूल अपने-अपने स्कूलों में बाईबल और कुरान पढा सकते हैं, तो फ़िर सरस्वती शिशु मन्दिरों में और बाकी स्कूलों में गीता और रामायण क्यों नहीं पढाई जा सकती?

14. गोधरा के बाद मीडिया मेंजो हंगामा बरपा, वैसा हंगामा कश्मीर के चार लाख हिन्दुओं की मौत पर क्यों नही हुआ ?

अब भी नही जागे तो डूब मरो...
Forward to all Hindus.

Uttar Pardesh me muslims ki manmaani kyo chal rahi hai ??

क्योकि UP में  m.L.A.
1993 me 27
1996 me 38
2002 me 45
2007 me 55
Aur ab
2012 me 68 Muslim M.L.A. Chune gaye.

Kya hoga U.P ka 2050 me dusra Pakistan ?

Jago HINDU jago..
Abhi nahi to kabhi Nahi.
We  are not against muslims neither a supporter of bjp. But it's a matter of our existance in India in coming days.

Agar sachhe Hindustani ho to SHARE KARO
"Vande Matram"...
#JaiShriRam
Amit Chandan ki Post Se..

पढो और शांति से विचार करो ।

1. विश्व में लगभग 56 मुस्लिम देश हैं, एक मुस्लिम देश का नाम बताईये जो हज के लिये “सब्सिडी” देता हो?

2. एक मुस्लिम देश बताईये जहाँ हिन्दुओं के लिये विशेष कानून हैं, जैसे कि भारत में मुसलमानों के लिये हैं ?

3. किसी एक देश का नाम बताईये, जहाँ 85% बहुसंख्यकों को “याचना” करनी पडती है, 15% अल्पसंख्यकों को संतुष्ट करने के लिये ?

4. एक मुस्लिम देश का नाम बताईये, जहाँ का राष्ट्रपति या प्रधानमन्त्री गैर- मुस्लिम हो ?

5. किसी “मुल्ला” या “मौलवी” का नाम बताईये, जिसने आतंकवादियों के खिलाफ़ फ़तवा जारी किया हो ?

6. महाराष्ट्र, बिहार, केरल जैसे हिन्दू बहुल राज्यों में मुस्लिम मुख्यमन्त्री हो चुके हैं, क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि मुस्लिम बहुल राज्य “कश्मीर” में कोई हिन्दू मुख्यमन्त्री हो सकता है ?

7. 1947 में आजादी के दौरान पाकिस्तान में हिन्दू जनसंख्या 24% थी, अब वह घटकर 1% रह गई है, उसी समय तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब आज का अहसान फ़रामोश बांग्लादेश) में हिन्दू जनसंख्या 30% थी जो अब 7% से भी कम हो गई है । क्या हुआ गुमशुदा हिन्दुओं का ? क्या वहाँ (और यहाँ भी) हिन्दुओं के कोई मानवाधिकार हैं ?

8. जबकि इस दौरान भारत में मुस्लिम जनसंख्या 10.4% से बढकर 14.2% हो गई है, क्या वाकई हिन्दू कट्टरवादी हैं?

9. यदि हिन्दू असहिष्णु हैं तो कैसे हमारे यहाँ मुस्लिम सडकों पर नमाज पढते रहते हैं, लाऊडस्पीकर पर दिन भर चिल्लाते रहते हैं कि “अल्लाह के सिवाय और कोई शक्ति नहीं है” ?

10. सोमनाथ मन्दिर के जीर्णोद्धार के लिये देश के पैसे का दुरुपयोग नहीं होना चाहिये ऐसा गाँधी ने कहा था, लेकिन 1948 में ही दिल्ली की मस्जिदों को सरकारी मदद से बनवाने के लिये उन्होंने नेहरू और पटेल पर दबाव बनाया, क्यों?

11. कश्मीर, नागालैण्ड, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय आदिमें हिन्दू अल्पसंख्यक हैं, क्या उन्हें कोई विशेष सुविधा मिलती है ?

12. हज करने के लिये सबसिडी मिलती है, जब कि मानसरोवर और अमरनाथ जाने पर टैक्स देना पड़ता है, क्यों ?

13. मदरसे और क्रिश्चियन स्कूल अपने-अपने स्कूलों में बाईबल और कुरान पढा सकते हैं, तो फ़िर सरस्वती शिशु मन्दिरों में और बाकी स्कूलों में गीता और रामायण क्यों नहीं पढाई जा सकती?

14. गोधरा के बाद मीडिया मेंजो हंगामा बरपा, वैसा हंगामा कश्मीर के चार लाख हिन्दुओं की मौत पर क्यों नही हुआ ?

अब भी नही जागे तो डूब मरो…
Forward to all Hindus.

Uttar Pardesh me muslims ki manmaani kyo chal rahi hai ??

क्योकि UP में m.L.A.
1993 me 27
1996 me 38
2002 me 45
2007 me 55
Aur ab
2012 me 68 Muslim M.L.A. Chune gaye.

Kya hoga U.P ka 2050 me dusra Pakistan ?

Jago HINDU jago..
Abhi nahi to kabhi Nahi.
We are not against muslims neither a supporter of bjp. But it’s a matter of our existance in India in coming days.

Agar sachhe Hindustani ho to SHARE KARO
“Vande Matram”…
‪#‎JaiShriRam‬
Amit Chandan ki Post Se..

Posted in Sai conspiracy

चांद मियां


चांद मियां उर्फ़ साईं के खिलाफ बयानबाजी करने वाले शंकराचार्य स्वरूपानंद जी सरस्वती ने एक बार फिर बयान दिया हैं। अपने गृहनगर सिवनी में शंकराचार्य ने साईं को ‘वैश्या पुत्र’ बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने पिता और वैश्या की संतान के रूप में जन्म लिया।

शंकराचार्य ने कहा, ‘इंटरनेट में यह बताया गया है कि पिंडारी बहरुद्दीन, जो अफगानिस्तान का रहने वाला था, वह अहमदनगर आया और एक वेश्या के यहां रहा। वहीं ये पैदा हुए, जो शिरडी का साईं बाबा है। इंटरनेट में तो यह दिख रहा है, आप खुद देख लीजिए।।।’

शंकराचार्य ने तो साईं बाबा के बढ़ते भक्तों को संक्रामक बीमारी की तरह बताया, ‘हिंदू तो हिंदू रहेगा, चाहे वो किसी का भी भक्त हो, आखिर वो दिखाएगा कि वो हिंदू है। हम लोग जो बात कह रहे हैं, वो दूसरी दृष्टि से कह रहे हैं। उदाहरण के लिए समझिए, जैसे बंगला रोग होता है, आंख लाल हो जाती है, लोग कहते हैं ना कि ये संक्रामक रोग है, दूर रहो। वैसे ही ये संक्रामक रोग जैसा फैल रहा है।

किसी भी व्यक्ति को जरा-सी भी तकलीफ हो, तो वो चला जाता है साईं बाबा के यहां।’ जब शंकराचार्य से पूछा गया कि कहीं उन्हें ईष्र्या तो नहीं हो रही है, जो वो अचानक साईं बाबा के खि‍लाफ लगातार बोल रहे हैं, तो शंकराचार्य ने कहा कि साईं के भक्त हिंदू धर्म के अनुयायियों को ठग रहे हैं, जो आपत्तिजनक है।

http://www.punjabkesari.in/news/article-262540

‪#‎exposesai‬ ‪#‎BhaktiJihad‬

चांद मियां उर्फ़ साईं  के खिलाफ बयानबाजी करने वाले शंकराचार्य स्वरूपानंद जी सरस्वती ने एक बार फिर बयान दिया हैं। अपने गृहनगर सिवनी में शंकराचार्य ने साईं  को 'वैश्या पुत्र' बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने पिता और वैश्या की संतान के रूप में जन्म लिया।

शंकराचार्य ने कहा, 'इंटरनेट में यह बताया गया है कि पिंडारी बहरुद्दीन, जो अफगानिस्तान का रहने वाला था, वह अहमदनगर आया और एक वेश्या के यहां रहा। वहीं ये  पैदा हुए, जो शिरडी का साईं बाबा है। इंटरनेट में तो यह दिख रहा है, आप खुद देख लीजिए।।।'

शंकराचार्य ने तो साईं बाबा के बढ़ते भक्तों को संक्रामक बीमारी की तरह बताया, 'हिंदू तो हिंदू रहेगा, चाहे वो किसी का भी भक्त हो, आखिर वो दिखाएगा कि वो हिंदू है। हम लोग जो बात कह रहे हैं, वो दूसरी दृष्टि से कह रहे हैं। उदाहरण के लिए समझिए, जैसे बंगला रोग होता है, आंख लाल हो जाती है, लोग कहते हैं ना कि ये संक्रामक रोग है, दूर रहो। वैसे ही ये संक्रामक रोग जैसा फैल रहा है। 

किसी भी व्यक्ति को जरा-सी भी तकलीफ हो, तो वो चला जाता है साईं बाबा के यहां।' जब शंकराचार्य से पूछा गया कि कहीं उन्हें ईष्र्या तो नहीं हो रही है, जो वो अचानक साईं बाबा के खि‍लाफ लगातार बोल रहे हैं, तो शंकराचार्य ने कहा कि साईं के भक्त हिंदू धर्म के अनुयायियों को ठग रहे हैं, जो आपत्तिजनक है।

http://www.punjabkesari.in/news/article-262540

#exposesai #BhaktiJihad
 
LikeLike · 
Posted in हिन्दू पतन

Remove Maa Saraswathi from the original pic and Put Jesus Christ


These Christian Missionaries [ Father of Chruch ] .. 
Remove Maa Saraswathi from the original pic and Put Jesus Christ

How to Stop them .. Any suggestions ..

See More

These Christian Missionaries [ Father of Chruch ] .. 
Remove Maa Saraswathi from the original pic and Put Jesus Christ 

How to Stop them .. Any suggestions ..

.
Tag Your Best friend ...
#SpreadHinduism #| Save Hinduism in Kashmir |.. Share please 
 Boycott Sai Baba - He was Muslim
 Like ►►► # [ World Hindus Updates ] Page ►►►
 
UnlikeUnlike ·  ·  · 391811
Posted in हिन्दू पतन

ओशो का वह प्रवचन


 

ओशो का वह प्रवचन, जिससे ईसायत तिलमिला उठी थी और अमेरिका की रोनाल्‍ड रीगन सरकार ने उन्‍हें हाथ-पैर में बेडि़यां डालकर गिरफ्तार किया और फिर मरने के लिए थेलियम नामक धीमा जहर दे दिया था। इतना ही नहीं, वहां बसे रजनीशपुरम को तबाह कर दिया गया था और पूरी दुनिया को यह निर्देश भी दे दिया था कि न तो ओशो को कोई देश आश्रय देगा और न ही उनके विमान को ही लैंडिंग की इजाजत दी जाएगी। ओशो से प्रवचनों की वह श्रृंखला आज भी मार्केट से गायब हैं।
पढिए वह चौंकाने वाला सच मित्रगण ॰हरिः ॐ॰
जय महाकाल…!!!

ओशो:

जब भी कोई सत्‍य के लिए प्‍यासा होता है, अनायास ही वह भारत में उत्‍सुक हो उठता है। अचानक पूरब की यात्रा पर निकल पड़ता है। और यह केवल आज की ही बात नहीं है। यह उतनी ही प्राचीन बात है, जितने पुराने प्रमाण और उल्‍लेख मौजूद हैं। आज से 2500 वर्ष पूर्व, सत्‍य की खोज में पाइथागोरस भारत आया था। ईसा मसीह भी भारत आए थे।
ईसामसीह के 13 से 30 वर्ष की उम्र के बीच का बाइबिल में कोई उल्‍लेख नहीं है। और यही उनकी लगभग पूरी जिंदगी थी, क्‍योंकि 33 वर्ष की उम्र में तो उन्‍हें सूली ही चढ़ा दिया गया था। तेरह से 30 तक 17 सालों का हिसाब बाइबिल से गायब है! इतने समय वे कहां रहे? आखिर बाइाबिल में उन सालों को क्‍यों नहीं रिकार्ड किया गया? उन्‍हें जानबूझ कर छोड़ा गया है, कि ईसायत मौलिक धर्म नहीं है, कि ईसा मसीह जो भी कह रहे हैं वे उसे भारत से लाए हैं।
यह बहुत ही विचारणीय बात है। वे एक यहूदी की तरह जन्‍मे, यहूदी की ही तरह जिए और यहूदी की ही तरह मरे। स्‍मरण रहे कि वे ईसाई नहीं थे, उन्‍होंने तो-ईसा और ईसाई, ये शब्‍द भी नहीं सुने थे। फिर क्‍यों यहूदी उनके इतने खिलाफ थे? यह सोचने जैसी बात है, आखिर क्‍यों ? न तो ईसाईयों के पास इस सवाल का ठीक-ठाक जवाबा है और न ही यहूदियों के पास। क्‍योंकि इस व्‍यक्ति ने किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया। ईसा उतने ही निर्दोष थे जितनी कि कल्‍पना की जा सकती है।
पर उनका अपराध बहुत सूक्ष्‍म था। पढ़े-लिखे यहूदियों और चतुर रबाईयों ने स्‍पष्‍ट देख लिया था कि वे पूरब से विचार ले रहे हैं, जो कि गैर यहूदी हैं। वे कुछ अजीबोगरीब और विजातीय बातें ले रहे हैं। और यदि इस दृष्टिकोण से देखो तो तुम्‍हें समझ आएगा कि क्‍यों वे बारा-बार कहते हैं- ” अतीत के पैगंबरों ने तुमसे कहा था कि यदि कोई तुम पर क्रोध करे, हिंसा करे तो आंख के बदले में आंख लेने और ईंट का जवाब पत्‍थर से देने को तैयार रहना। लेकिन मैं तुमसे कहता हूं कि अगर कोई तुम्‍हें चोट पहुंचाता है, एक गाल पर चांटा मारता है तो उसे अपना दूसरा गाल भी दिखा देना।” यह पूर्णत: गैर यहूदी बात है। उन्‍होंने ये बातें गौतम बुद्ध और महावीर की देशनाओं से सीखी थीं।
ईसा जब भारत आए थे-तब बौद्ध धर्म बहुत जीवंत था, यद्यपि बुद्ध की मृत्‍यु हो चुकी थी। गौतम बुद्ध के पांच सौ साल बाद जीसस यहां आए थे। पर बुद्ध ने इतना विराट आंदोलन, इतना बड़ा तूफान खड़ा किया था कि तब तक भी पूरा मुल्‍क उसमें डूबा हुआ था। बुद्ध की करुणा, क्षमा और प्रेम के उपदेशों को भारत पिए हुआ था।
जीसस कहते हैं कि ” अतीत के पैगंबरों द्वारा यह कहा गया था।” कौन हैं ये पुराने पैगंबर?” वे सभी प्राचीन यहूदी पैगंबर हैं: इजेकिएल, इलिजाह, मोसेस,- ” कि ईश्‍वर बहुत ही हिंसक है और वह कभी क्षमा नहीं करता है!? ” यहां तक कि प्राचीन यहूदी पैगंबरों ने ईश्‍वर के मुंह से ये शब्‍द भी कहलवा दिए हैं कि ” मैं कोई सज्‍जन पुरुष नहीं हूं, तुम्‍हारा चाचा नहीं हूं। मैं बहुत क्रोधी और ईर्ष्‍यालु हूं, और याद रहे जो भी मेरे साथ नहीं है, वे सब मेरे शत्रु हैं।” पुराने टेस्‍टामेंट में ईश्‍वर के ये वचन हैं।
और ईसा मसीह कहते हैं, ” मैं तुमसे कहता हूं कि परमात्‍मा प्रेम है।” यह ख्‍याल उन्‍हें कहां से आया कि परमात्‍मा प्रेम है? गौतम बुद्ध की शिक्षाओं के सिवाए दुनिया में कहीं भी परमात्‍मा को प्रेम कहने का कोई और उल्‍लेख नहीं है।
उन 17 वर्षों में जीसस इजिप्‍त, भारत, लद्दाख और तिब्‍बत की यात्रा करते रहे। यही उनका अपराध था कि वे यहूदी परंपरा में बिल्‍कुल अपरिचित और अजनबी विचारधाराएं ला रहे थे। न केवल अपरिचित बल्कि वे बातें यहूदी धारणाओं के एकदम से विपरीत थीं।
तुम्‍हें जानकर आश्‍चर्य होगा कि अंतत: उनकी मृत्‍यु भी भारत में हुई! और ईसाई रिकार्ड्स इस तथ्‍य को नजरअंदाज करते रहे हैं। यदि उनकी बात सच है कि जीसस पुनर्जीवित हुए थे तो फिर पुनर्जीवित होने के बाद उनका क्‍या हुआ? आजकल वे कहां हैं ? क्‍योंकि उनकी मृत्‍यु का तो कोई उल्‍लेख है ही नहीं !
सच्‍चाई यह है कि वे कभी पुनर्जीवित नहीं हुए। वास्‍तव में वे सूली पर कभी मरे ही नहीं थे। क्‍योंकि यहूदियों की सूली आदमी को मारने की सर्वाधिक बेहूदी तरकीब है। उसमें आदमी को मरने में करीब-करीब 48 घंटे लग जाते हैं। चूंकि हाथों में और पैरों में कीलें ठोंक दी जाती हैं तो बूंद-बूंद करके उनसे खून टपकता रहता है। यदि आदमी स्‍वस्‍थ है तो 60 घंटे से भी ज्‍यादा लोग जीवित रहे, ऐसे उल्‍लेख हैं। औसत 48 घंटे तो लग ही जाते हैं। और जीसस को तो सिर्फ छह घंटे बाद ही सूली से उतार दिया गया था। यहूदी सूली पर कोई भी छह घंटे में कभी नहीं मरा है, कोई मर ही नहीं सकता है।
यह एक मिलीभगत थी, जीसस के शिष्‍यों की पोंटियस पॉयलट के साथ। पोंटियस यहूदी नहीं था, वो रोमन वायसराय था। जूडिया उन दिनों रोमन साम्राज्‍य के अधीन था। निर्दोष जीसस की हत्‍या में रोमन वायसराय पोंटियस को कोई रुचि नहीं थी। पोंटियस के दस्‍तखत के बगैर यह हत्‍या नहीं हो सकती थी।पोंटियस को अपराध भाव अनुभव हो रहा था कि वह इस भद्दे और क्रूर नाटक में भाग ले रहा है। चूंकि पूरी यहूदी भीड़ पीछे पड़ी थी कि जीसस को सूली लगनी चाहिए। जीसस वहां एक मुद्दा बन चुका था। पोंटियस पॉयलट दुविधा में था। यदि वह जीसस को छोड़ देता है तो वह पूरी जूडिया को, जो कि यहूदी है, अपना दुश्‍मन बना लेता है। यह कूटनीतिक नहीं होगा। और यदि वह जीसस को सूली दे देता है तो उसे सारे देश का समर्थन तो मिल जाएगा, मगर उसके स्‍वयं के अंत:करण में एक घाव छूट जाएगा कि राजनैतिक परिस्थिति के कारण एक निरपराध व्‍यक्ति की हत्‍या की गई, जिसने कुछ भी गलत नहीं किया था।
तो पोंटियस ने जीसस के शिष्‍यों के साथ मिलकर यह व्‍यवस्‍था की कि शुक्रवार को जितनी संभव हो सके उतनी देर से सूली दी जाए। चूंकि सूर्यास्‍त होते ही शुक्रवार की शाम को यहूदी सब प्रकार का कामधाम बंद कर देते हैं, फिर शनिवार को कुछ भी काम नहीं होता, वह उनका पवित्र दिन है। यद्यपि सूली दी जानी थी शुक्रवार की सुबह, पर उसे स्‍थगित किया जाता रहा। ब्‍यूरोक्रेसी तो किसी भी कार्य में देर लगा सकती है। अत: जीसस को दोपहर के बाद सूली पर चढ़ाया गया और सूर्यास्‍त के पहले ही उन्‍हें जीवित उतार लिया गया। यद्यपि वे बेहोश थे, क्‍योंकि शरीर से रक्‍तस्राव हुआ था और कमजोरी आ गई थी। पवित्र दिन यानि शनिवार के बाद रविवार को यहूदी उन्‍हें पुन: सूली पर चढ़ाने वाले थे। जीसस के देह को जिस गुफा में रखा गया था, वहां का चौकीदार रोमन था न कि यहूदी। इसलिए यह संभव हो सका कि जीसस के शिष्‍यगण उन्‍हें बाहर आसानी से निकाल लाए और फिर जूडिया से बाहर ले गए।
जीसस ने भारत में आना क्‍यों पसंद किया? क्‍योंकि युवावास्‍था में भी वे वर्षों तक भारत में रह चुके थे। उन्‍होंने अध्‍यात्‍म और ब्रह्म का परम स्‍वाद इतनी निकटता से चखा था कि वहीं दोबारा लौटना चाहा। तो जैसे ही वह स्‍वस्‍थ हुए, भारत आए और फिर 112 साल की उम्र तक जिए।
कश्‍मीर में अभी भी उनकी कब्र है। उस पर जो लिखा है, वह हिब्रू भाषा में है। स्‍मरण रहे, भारत में कोई यहूदी नहीं रहते हैं। उस शिलालेख पर खुदा है, ” जोशुआ”- यह हिब्रू भाषा में ईसामसीह का नाम है। ‘जीसस’ ‘जोशुआ’ का ग्रीक रुपांतरण है। ‘जोशुआ’ यहां आए’- समय, तारीख वगैरह सब दी है। ‘ एक महान सदगुरू, जो स्‍वयं को भेड़ों का गड़रिया पुकारते थे, अपने शिष्‍यों के साथ शांतिपूर्वक 112 साल की दीर्घायु तक यहांरहे।’ इसी वजह से वह स्‍थान ‘भेड़ों के चरवाहे का गांव’ कहलाने लगा। तुम वहां जा सकते हो, वह शहर अभी भी है-‘पहलगाम’, उसका काश्‍मीरी में वही अर्थ है-‘ गड़रिए का गांवा’
जीसस यहां रहना चाहते थे ताकि और अधिक आत्मिक विकास कर सकें। एक छोटे से शिष्‍य समूह के साथ वे रहना चाहते थे ताकि वे सभी शांति में, मौन में डूबकर आध्‍यात्मिक प्रगति कर सकें। और उन्‍होंने मरना भी यहीं चाहा, क्‍योंकि यदि तुम जीने की कला जानते हो तो यहां (भारत में)जीवन एक सौंदर्य है और यदि तुम मरने की कला जानते हो तो यहां (भारत में)मरना भी अत्‍यंत अर्थपूर्ण है। केवल भारत में ही मृत्‍यु की कला खोजी गई है, ठीक वैसे ही जैसे जीने की कला खोजी गई है। वस्‍तुत: तो वे एक ही प्रक्रिया के दो अंग हैं।
यहूदियों के पैगंबर मूसा ने भी भारत में ही देह त्‍यागी थी!
इससे भी अधिक आश्‍चर्यजनक तथ्‍य यह है कि मूसा (मोजिज) ने भी भारत में ही आकर देह त्‍यागी थी! उनकी और जीसस की समाधियां एक ही स्‍थान में बनी हैं। शायद जीसस ने ही महान सदगुरू मूसा के बगल वाला स्‍थान स्‍वयं के लिए चुना होगा। पर मूसा ने क्‍यों कश्‍मीर में आकर मृत्‍यु में प्रवेश किया?
मूसा ईश्‍वर के देश ‘इजराइल’ की खोज में यहूदियों को इजिप्‍त के बाहर ले गए थे। उन्‍हें 40 वर्ष लगे, जब इजराइल पहुंचकर उन्‍होंने घोषणा की कि, ” यही वह जमीन है, परमात्‍मा की जमीन, जिसका वादा किया गया था। और मैं अब वृद्ध हो गया हूं और अवकाश लेना चाहता हूं। हे नई पीढ़ी वालों, अब तुम सम्‍हालो!”
मूसा ने जब इजिप्‍त से यात्रा प्रारंभ की थी तब की पीढ़ी लगभग समाप्‍त हो चुकी थी। बूढ़े मरते गए, जवान बूढ़े हो गए और नए बच्‍चे पैदा होते रहे। जिस मूल समूह ने मूसा के साथ यात्रा की शुरुआत की थी, वह बचा ही नहीं था। मूसा करीब-करीब एक अजनबी की भांति अनुभव कर रहे थेा उन्‍होंने युवा लोगों शासन और व्‍यवस्‍था का कार्यभारा सौंपा और इजराइल से विदा हो लिए।
यह अजीब बात है कि यहूदी धर्मशास्‍त्रों में भी, उनकी मृत्‍यु के संबंध में , उनका क्‍या हुआ इस बारे में कोई उल्‍लेख नहीं है। हमारे यहां (कश्‍मीर में ) उनकी कब्र है। उस समाधि पर भी जो शिलालेख है, वह हिब्रू भाषा में ही है। और पिछले चार हजार सालों से एक यहूदी परिवार पीढ़ी-दर-पीढ़ी उन दोनों समाधियों की देखभाल कर रहा है।
मूसा भारत क्‍यों आना चाहते थे ? केवल मृत्‍यु के लिए ? हां, कई रहस्‍यों में से एक रहस्‍य यह भी है कि यदि तुम्‍हारी मृत्‍यु एक बुद्धक्षेत्र में हो सके, जहां केवल मानवीय ही नहीं, वरन भगवत्‍ता की ऊर्जा तरंगें हों, तो तुम्‍हारी मृत्‍यु भी एक उत्‍सव और निर्वाण बन जाती है।
सदियों से सारी दुनिया के साधक इस धरती पर आते रहे हैं। यह देश दरिद्र है, उसके पास भेंट देने को कुछ भी नहीं, पर जो संवेदनशील हैं, उनके लिए इससे अधिक समृद्ध कौम इस पृथ्‍वी पर कहीं नहीं हैं। लेकिन वह समृद्धि आंतरिक है।
~ओशो (पुस्‍तक: मेरा स्‍वर्णिम भारत)

Posted in Secular

SECULARISM


 
SECULARISM OR HYPOCRISY ?
Babri Mosque was constructed by Babar by breaking a three layered temple structure(Yes it's confirmed by carbon dating and archaeological research). Building of mosques over stuctures of non-believers is an old practice . In this case it was adviced to him by some sufi saint Fazle Abbas alias Musa Ashikhanand what followed was demolition of Ram Mandir by his commander Mir Baqi.
(Please search on wiki and google)

Babri Mosque is a symbol of subjugation of people's faith, massacre of thousands and thousands of innocents and a murder of their way of life.
When this structure was demolished, some pseudo seculars of India made a huge hue and cry. For decades to come, every crime by any muslim in this country was justified as "anger of Babri Masjid".

However when not one but many mosques were demolished in Iraq, no one raised as much as a whimper in protest. No concern for faith here ?
rather we must ask these pseudo seculars and so called intellectuals: How can you protest the demolition of Babri Mosque when it was a symbol of subjugation ?

SECULARISM OR HYPOCRISY ?
Babri Mosque was constructed by Babar by breaking a three layered temple structure(Yes it’s confirmed by carbon dating and archaeological research). Building of mosques over stuctures of non-believers is an old practice . In this case it was adviced to him by some sufi saint Fazle Abbas alias Musa Ashikhanand what followed was demolition of Ram Mandir by his commander Mir Baqi.
(Please search on wiki and google)

Babri Mosque is a symbol of subjugation of people’s faith, massacre of thousands and thousands of innocents and a murder of their way of life.
When this structure was demolished, some pseudo seculars of India made a huge hue and cry. For decades to come, every crime by any muslim in this country was justified as “anger of Babri Masjid”.

However when not one but many mosques were demolished in Iraq, no one raised as much as a whimper in protest. No concern for faith here ?
rather we must ask these pseudo seculars and so called intellectuals: How can you protest the demolition of Babri Mosque when it was a symbol of subjugation ?

Posted in राजनीति भारत की - Rajniti Bharat ki

देश की सबसे खतरनाक सरहद ‘हरामी नाला’ पर है पाक आतंकियों की नजर !


देश की सबसे खतरनाक सरहद ‘हरामी नाला’ पर है पाक आतंकियों की नजर !

भुज (गुजरात) – मुंबई आतंकी हमले के मास्टर माइंड कुख्यात आतंकवादी हाफिज सईद की गुजरात के कच्छ प्रांत से सटे पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में सक्रियता से भारतीय एजेंसियां चौकन्नी हो गई हैं। सीमा पर एहतियात और चौकसी भी बढ़ा दी गई है। इस बार हिन्दुस्तान पाकिस्तान के सीमा के करीब हाफिद सईद की तस्वीरें भी आ गई हैं। ये तस्वीरें गुजरात के कच्छ सरहद से लगे पाकिस्तान के मीठी गांव की हैं।

यह गांव गुजरात की बॉर्डर से मात्र ४० किलोमीटर ही दूर है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार हाफिज सईद मीठी गांव मे २१ अप्रैल को आया था। बताया जाता है कि सईद यहां आतंकियों की भर्ती व उनकी ट्रेनिंग के लिए कैंप लगाने की कोशिश कर रहा है। इससे भारतीय सुरक्षा एजेंसी सतर्क हो गई हैं।

हालांकि गुजरात की कच्छ सरहद बीएसएफ के नियंत्रण में हैं और इस समुद्री सीमा से घुसपैठ न के बराबर है। फिर भी कच्छ की भौगोलिक स्थिति ही कुछ ऐसी है कि इसे पूरी तरह से कंट्रोल में लेना टेढ़ी खीर है। वहीं, अगर हम पाकिस्तान-भारत सीमा से लगे कच्छ के सरक्रीक में ‘हरामी नाला’ पोस्ट की बात करें तो यह देश की सबसे खतरनाक सरहदों में से एक है। आम लोगों के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबंधित इस क्षेत्र में ८ किमी लंबी खतरनाक दलदल, जिस पर दो कदम चलना भी आम आदमी के लिए आसान नहीं। उसी पर हमारे जवान चौबीसों घंटों की गश्त लगाते हैं।

क्रीक इलाके में सीमा को लेकर भारत का पाकिस्तान के साथ लंबे समय से विवाद रहा है और दोनों देशों की बातचीत के एजेंडे में यह मुद्दा है। क्षेत्र में सरक्रीक, पीर सनाई क्रीक, पाबेवरी क्रीक, वियांबारी क्रीक, कूरी क्रीक और देवेरी क्रीक जैसी संकरी खाड़ियों के साथ-साथ कई नाले हैं, जिनमें हरामी नाला घुसपैठ के लिहाज से काफी संवेदनशील है।

पाकिस्तान-भारत सीमा से लगे कच्छ के सरक्रीक में हरामी नाला दलदली, उथला वाटर चैनल करीब ५०० वर्ग किमी में फैला हुआ है और यह वर्टिगल लाईन से पाकिस्तान की तरफ से निकलता है। पिछले कुछ वषों में यह इलाका पाकिस्तानी मछुआरों द्वारा जल सीमा के उल्लंघन का गवाह रहा है।

दलदली भूमि होने की वजह से सैनिकों को इस इलाके से होने वाली तस्करी और घुसपैठ के खिलाफ कार्रवाई करने में कठिनाई आती है। क्रीक में घुसना बीएसएफ के लिये बहुत ही मुश्किल है, कारण कि हरामी नाले का पानी भारत की तरफ सीमा में फैला हुआ है जो कीचड़ से भरा रहता है और तकरीबन ५०० वर्ग किलो मीटर क्षेत्र को घेरता है। साथ ही इस क्षेत्र में पैदल तो क्या गाड़ी या पेट्रोल बोट से भी जाना नामुमकिन है। वहीं, ऐसे भौगोलिक हालात सीमा की दूसरी तरफ यानी की पाकिस्तान में नहीं हैं। पाक में दलदली जमीन की वह समस्या भी नहीं है, जो भारत में हैं। सीमा के उस पार करीब दस किमी पर ही पाकिस्तान के गांवों की घनी आबादी है, जहां से घुसपैठ का खतरा हमेशा बना रहता है।

हरामी नाला भारत के क्षेत्र वियानवरी क्रीक की तरफ से पाकिस्तान के जी-पिलर २९ की तरफ जाता है उसके पश्चात् यह बॉर्डर पिलर न.११७१ के पास वापस भारत की सीमा की ओर बढ़ता है। पाकिस्तान सरकार ने इस विवादित क्रीक क्षेत्र को अपने इलाके में तकरीबन २ किलोमीटर लम्बी और ५० मीटर चौड़ी एक कृत्रिम चैनल खोद कर मिला लिया है।

हरामीनाला के भौगोलिक हालात ऐसे हैं कि जवानों की एक टुकड़ी को चौबीस घंटे से ज्यादा नहीं रखा जा सकता। इसलिए हर दिन २० से ४० जवानों की टुकड़ियां बदलती रहती हैं। पाकिस्तानी हरकतों के मद्देनजर बीएसएफ ने हरामी नाले पर २००९ से कब्जा कायम रखा है। हमारे सैनिक रोजाना यहां की विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए देश की सुरक्षा करते हैं। इतना ही नहीं, इसके लिए जवान रोजाना दलदली जमीन में ८ किमी का सफर पैदल ही तय करते हैं। यहां आए बिना आप अंदाजा ही नहीं लगा सकते कि बीएसएफ किन विकट हालात में इस छोटे से नाले की सुरक्षा करती है।

देश की सबसे खतरनाक सरहद ‘हरामी नाला’ पर है पाक आतंकियों की नजर !

भुज (गुजरात) -  मुंबई आतंकी हमले के मास्टर माइंड कुख्यात आतंकवादी हाफिज सईद की गुजरात के कच्छ प्रांत से सटे पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में सक्रियता से भारतीय एजेंसियां चौकन्नी हो गई हैं। सीमा पर एहतियात और चौकसी भी बढ़ा दी गई है। इस बार हिन्दुस्तान पाकिस्तान के सीमा के करीब हाफिद सईद की तस्वीरें भी आ गई हैं। ये तस्वीरें गुजरात के कच्छ सरहद से लगे पाकिस्तान के मीठी गांव की हैं।

यह गांव गुजरात की बॉर्डर से मात्र ४० किलोमीटर ही दूर है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार हाफिज सईद मीठी गांव मे २१ अप्रैल को आया था। बताया जाता है कि सईद यहां आतंकियों की भर्ती व उनकी ट्रेनिंग के लिए कैंप लगाने की कोशिश कर रहा है। इससे भारतीय सुरक्षा एजेंसी सतर्क हो गई हैं।

हालांकि गुजरात की कच्छ सरहद बीएसएफ के नियंत्रण में हैं और इस समुद्री सीमा से घुसपैठ न के बराबर है। फिर भी कच्छ की भौगोलिक स्थिति ही कुछ ऐसी है कि इसे पूरी तरह से कंट्रोल में लेना टेढ़ी खीर है। वहीं, अगर हम पाकिस्तान-भारत सीमा से लगे कच्छ के सरक्रीक में ‘हरामी नाला’ पोस्ट की बात करें तो यह देश की सबसे खतरनाक सरहदों में से एक है। आम लोगों के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबंधित इस क्षेत्र में ८  किमी लंबी खतरनाक दलदल, जिस पर दो कदम चलना भी आम आदमी के लिए आसान नहीं। उसी पर हमारे जवान चौबीसों घंटों की गश्त लगाते हैं।

क्रीक इलाके में सीमा को लेकर भारत का पाकिस्तान के साथ लंबे समय से विवाद रहा है और दोनों देशों की बातचीत के एजेंडे में यह मुद्दा है। क्षेत्र में सरक्रीक, पीर सनाई क्रीक, पाबेवरी क्रीक, वियांबारी क्रीक, कूरी क्रीक और देवेरी क्रीक जैसी संकरी खाड़ियों के साथ-साथ कई नाले हैं, जिनमें हरामी नाला घुसपैठ के लिहाज से काफी संवेदनशील है।

पाकिस्तान-भारत सीमा से लगे कच्छ के सरक्रीक में हरामी नाला दलदली, उथला वाटर चैनल करीब ५००  वर्ग किमी में फैला हुआ है और  यह वर्टिगल लाईन से पाकिस्तान की तरफ से निकलता है। पिछले कुछ वषों में यह इलाका पाकिस्तानी मछुआरों द्वारा जल सीमा के उल्लंघन का गवाह रहा है।

दलदली भूमि होने की वजह से सैनिकों को इस इलाके से होने वाली तस्करी और घुसपैठ के खिलाफ कार्रवाई करने में कठिनाई आती है। क्रीक में घुसना बीएसएफ के लिये बहुत ही मुश्किल है, कारण कि हरामी नाले का पानी भारत की तरफ सीमा में फैला हुआ है जो कीचड़ से भरा रहता है और तकरीबन ५००  वर्ग किलो मीटर क्षेत्र को घेरता है। साथ ही इस क्षेत्र में पैदल तो क्या गाड़ी या पेट्रोल बोट से भी जाना नामुमकिन है। वहीं,  ऐसे भौगोलिक हालात सीमा की दूसरी तरफ यानी की पाकिस्तान में नहीं हैं। पाक में दलदली जमीन की वह समस्या भी नहीं है, जो भारत में हैं। सीमा के उस पार करीब दस किमी पर ही पाकिस्तान के गांवों की घनी आबादी है, जहां से घुसपैठ का खतरा हमेशा बना रहता है।

हरामी नाला भारत के क्षेत्र वियानवरी क्रीक की तरफ से पाकिस्तान के जी-पिलर २९  की तरफ जाता है उसके पश्चात् यह बॉर्डर पिलर न.११७१  के पास वापस भारत की सीमा की ओर बढ़ता है। पाकिस्तान सरकार ने इस विवादित क्रीक क्षेत्र को अपने इलाके में तकरीबन २  किलोमीटर लम्बी और ५०  मीटर चौड़ी एक कृत्रिम चैनल खोद कर मिला लिया है।

हरामीनाला के भौगोलिक हालात ऐसे हैं कि जवानों की एक टुकड़ी को चौबीस घंटे से ज्यादा नहीं रखा जा सकता। इसलिए हर दिन २०  से ४०  जवानों की टुकड़ियां बदलती रहती हैं। पाकिस्तानी हरकतों के मद्देनजर बीएसएफ ने हरामी नाले पर २००९  से कब्जा कायम रखा है। हमारे सैनिक रोजाना यहां की विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए देश की सुरक्षा करते हैं। इतना ही नहीं, इसके लिए जवान रोजाना दलदली जमीन में ८  किमी का सफर पैदल ही तय करते हैं। यहां आए बिना आप अंदाजा ही नहीं लगा सकते कि बीएसएफ किन विकट हालात में इस छोटे से नाले की सुरक्षा करती है।
 
Posted in Uncategorized

St. Peter’s Square Vatican Aerial View, Shiva Linga


Ramani's blog

I posted an article on ‘Vatican Shiva temple?, where I had provided information on the possibly of Vatican being a Shiva temple.

Here is some more interesting information on Saint Peter‘s Courtyard in Vatican city’s aerial view, It is that of Shiva Linga!

Vatican City resembles Shiva Lingam, aerial view.jpgVatican City resembles Shiva Lingam, aerial view.

Vatican City Map.png Vatican City Map.

“Vatican- What’s In A Name The word Vatican has been derived from the Sanskrit word ‘Vatika‘ which means Vedic cultural centres. Such words and a few excavations prove that Vatican was actually a Hindu (Vedic) religious centre before Christianity took roots. A Shiva Linga In Vatican! A Shiva linga was discovered inside the Vatican city during the archaeological excavations. This Shiva linga is exhibited in the Gregorian Etruscan museum of the Vatican city. P.N. Oak‘s Theories Famous historian P.N. Oak has claimed that Christianity and Islam are both derivatives of Hinduism. He…

View original post 87 more words