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Krishnam Vande Jagadgurum – 1


Moral Stories

Shri Krishna paramaatma, who blessed Bhaarateeyas with Geeta-amrutam, is just learning to utter small words. The One who occupied Bhoomi-aakaashams with two feet, as Vaamana-murti, is just learning to walk. Day-by-day, to the aanandam of Nanda and Yashoda, Baala Krishna was growing-up.

While Shri Krishna was playing, the dust on His body used to resemble Vibhuuti on Paramashiva’s body. The mauktikamaala (pearl garland) with which Yashoda tied His curly hair resembled half-moon on Chandrashekhara’s head. Kastura tilakam of BaalaKrishna looked like the third eye of Kaamaari. The big Neelamani on the ratnahaaram of Shri Krishna looked like Haalaahalam’s black mark on Garalakantha’s throat. The mauktikamaalas around His neck resembled sarpa-haaras of Naagabhuushana.

Baala Krishna used to play many vichitra-kreedas with Gopabaalas. Gopikaas believed that the mischief of Krishna paramaatma was true! They did not realize that the mischievous deeds of Baala Krishna were nothing but great Mahopadeshams for them. Who…

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अपने भारत की संस्कृति को पहचाने. ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहुंचाये. यही है हमारी सांस्कृतिक पहचान.


अपने भारत की संस्कृति को पहचाने. ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहुंचाये. यही है हमारी सांस्कृतिक पहचान.

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( ०१ ) दो पक्ष-

कृष्ण पक्ष , शुक्ल पक्ष !

( ०२ ) तीन ऋण –

देव ऋण , पितृ ऋण , ऋषि ऋण !

( ०३ ) चार युग –

सतयुग , त्रेतायुग , द्वापरयुग , कलियुग !

( ०४ ) चार धाम –

द्वारिका , बद्रीनाथ , जगन्नाथ पुरी , रामेश्वरम धाम !

( ०५ ) चारपीठ –

शारदा पीठ ( द्वारिका ) ज्योतिष पीठ ( जोशीमठ बद्रिधाम ) गोवर्धन पीठ ( जगन्नाथपुरी ) , शृंगेरीपीठ !

( ०६ ) चार वेद-

ऋग्वेद , अथर्वेद , यजुर्वेद , सामवेद !

( ०७ ) चार आश्रम –

ब्रह्मचर्य , गृहस्थ , वानप्रस्थ , संन्यास !

( ०८ ) चार अंतःकरण –

मन , बुद्धि , चित्त , अहंकार !

( ०९ ) पञ्च गव्य –

गाय का घी , दूध , दही , गोमूत्र , गोबर !

( १० ) पञ्च देव –

गणेश , विष्णु , शिव , देवी , सूर्य !

( ११ ) पंच तत्त्व –

पृथ्वी , जल , अग्नि , वायु , आकाश !

( १२ ) छह दर्शन –

वैशेषिक , न्याय , सांख्य , योग , पूर्व मिसांसा , दक्षिण मिसांसा !

( १३ ) सप्त ऋषि –

विश्वामित्र , जमदाग्नि , भरद्वाज , गौतम , अत्री , वशिष्ठ, कश्यप!

( १४ ) सप्त पुरी –

अयोध्या पुरी , मथुरा पुरी , माया पुरी ( हरिद्वार ) , काशी , कांची ( शिन कांची – विष्णु कांची ) , अवंतिका और द्वारिका पुरी !

( १५ ) आठ योग –

यम , नियम , आसन , प्राणायाम , प्रत्याहार , धारणा , ध्यान एवं समाधि !

( १६ ) आठ लक्ष्मी –

आग्घ , विद्या , सौभाग्य , अमृत , काम , सत्य , भोग ,एवं योग लक्ष्मी !

( १७ ) नव दुर्गा —

शैल पुत्री , ब्रह्मचारिणी , चंद्रघंटा , कुष्मांडा , स्कंदमाता , कात्यायिनी , कालरात्रि , महागौरी एवं सिद्धिदात्री !

( १८ ) दस दिशाएं –

पूर्व , पश्चिम , उत्तर , दक्षिण , ईशान , नैऋत्य , वायव्य , अग्नि आकाश एवं पाताल !

( १९ ) मुख्य ११ अवतार –

मत्स्य , कच्छप , वराह , नरसिंह , वामन , परशुराम , श्री राम , कृष्ण , बलराम , बुद्ध , एवं कल्कि !

( २० ) बारह मास –

चैत्र , वैशाख , ज्येष्ठ , अषाढ , श्रावण , भाद्रपद , अश्विन , कार्तिक , मार्गशीर्ष , पौष , माघ , फागुन !

( २१ ) बारह राशि –

मेष , वृषभ , मिथुन , कर्क , सिंह , कन्या , तुला , वृश्चिक , धनु , मकर , कुंभ , कन्या !

( २२ ) बारह ज्योतिर्लिंग –

सोमनाथ , मल्लिकार्जुन , महाकाल , ओमकारेश्वर , बैजनाथ , रामेश्वरम , विश्वनाथ , त्र्यंबकेश्वर , केदारनाथ , घुष्नेश्वर , भीमाशंकर , नागेश्वर !

( २३ ) पंद्रह तिथियाँ –

प्रतिपदा , द्वितीय , तृतीय , चतुर्थी , पंचमी , षष्ठी , सप्तमी , अष्टमी , नवमी , दशमी , एकादशी , द्वादशी , त्रयोदशी , चतुर्दशी , पूर्णिमा , अमावास्या !

( २४ ) स्मृतियां –

मनु , विष्णु , अत्री , हारीत , याज्ञवल्क्य , उशना , अंगीरा , यम , आपस्तम्ब , सर्वत , कात्यायन , ब्रहस्पति , पराशर , व्यास , शांख्य , लिखित , दक्ष , शातातप , वशिष्ठ !

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Posted in भारतीय मंदिर - Bharatiya Mandir

मां के इस मंदिर में होते हैं रोग-विकार दूर


फेसबुक पर guru ke sad vichar की दिलचस्प खबरों के लिए इस पेज को लाइक करें –www.facebook.com/guruksvichar

मां के इस मंदिर में होते हैं रोग-विकार दूर

मां का दुलार भक्तों को सात समुद्र पार से भी खींच लाता है। मां त्रिपुर सुंदरी अपने भक्तों की हर विपदा में सहायता करती हैं। मध्यप्रदेश के रतलाम जिले से 65 किलोमीटर दूर राजस्थान के बांसवाड़ा में स्थित है मां का दिव्य मंदिर, जहां 18 भुजाओं वाली देवी की प्रतिमा के दर्शन मात्र से भक्त निहाल हो जाते हैं।
मां लक्ष्मी के रूप में मां त्रिपुर सुंदरी यहां विराजती हैं, जिनमें त्रिदेव की शक्तियां समाई हुईं हैं। राजस्थान के दक्षिण में अरावली पर्वत श्रंखला में मां त्रिपुर सुंदरी मंदिर स्थापित है। कहते हैं कि ‘त्रिपुरा सुंदरी का यह इकलौता शक्ति पीठ है जहां गुप्त साधना की जाती है। और यहां श्री यंत्र की सहायता से सिद्धी साधना रोज की जाती है।
विक्रम संवत 1540 के आसपास के आलेख में बताया गया है कि सम्राट कनिष्क के काल के पूर्व से ही यह मंदिर स्थापित है। उस दौर में यहां आस पास गढ़पौली नाम का नगर था जिसके तीनों तरफ शिवपुरी, सीतापुरी और विष्णुपुरी नाम के दुर्ग थे। इन तीनों दुर्गों के मध्य यह मंदिर स्थित था जिसे त्रिपुर सुंदरी मंदिर कहा गया।
त्रिपुर सुंदर के मंदिर का जीर्णोदद्धार पांचाल समाज के 14 चौखरों ने करवाया था। मां त्रिपुर सुंदरी को मां त्रिपुरा सुंदरी के साथ ही महाकाली, महादुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती का रूप भी माना गया है। मां का वाहन सिंह है और उनकी 18 भुजाएं हैं। उनकी हर भुजा में अस्त्र शस्त्र और मूर्ति के चारों तरफ नवग्रह, नवदुर्गा के रूप में विद्यमान हैं।
मां के चरणों में सिद्ध युक्त श्रीयंत्र स्थापित है। शक्ति पीठ होने के कारण मां त्रिपुरा सुंदरी को मां सती का रूप भी माना जाता है। जो भक्त मां के दर पर आते हैं उनकी झोली मां खुशियों से भर देती हैं। मां के इस रहस्य के बारे में उपनिषदों और पुराणों में विशेष उल्लेख मिलता है।
कहा जाता है कि रियासतों के समय मां की महिमा इतनी ज्यादा थी कि गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्यप्रदेश के राजा मां त्रिपुरा की पूजा किए बिना किसी भी शुभ कार्य को प्रारंभ नहीं करते थे।
मां त्रिपुरा सुंदरी के इस शक्ति पीठ में तीन प्रहर मां के तीनों रूपों की आराधना होती है। प्रातः काल में कुमारिका दोपहर में यौवन रूप सुंदरी और सायंकाल में काल में प्रौढ़ रूप की पूजा की जाती है। मां को राजसत्ता की देवी भी कहा जाता है। मां त्रिपुर सुंदरी की आराधना यहां शंकराचार्य पद्धति के अनुसार होती है यहां श्रीयंत्र की पूर्ण साधना भी की जाती है।
गृहस्थ मां त्रिपुरा सुंदरी के सगुण रूप और साधु सन्यासी निर्गुण रूप को पूजते हैं। कहते हैं यहां से सिद्धी प्राप्त करने के पश्चात शत्रु हो या मित्र सभी को वश में किया जा सकता है। मां की पूजा से रोग-विकार दूर हो जाते हैं इसलिए यहां दूर-दूर से लोग दर्शन लाभ लेने आते हैं और मां त्रिपुरा सुंदरी भक्तों की प्रार्थना को पूरा करती हैं।

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मां के इस मंदिर में होते हैं रोग-विकार दूर

मां का दुलार भक्तों को सात समुद्र पार से भी खींच लाता है। मां त्रिपुर सुंदरी अपने भक्तों की हर विपदा में सहायता करती हैं। मध्यप्रदेश के रतलाम जिले से 65 किलोमीटर दूर राजस्थान के बांसवाड़ा में स्थित है मां का दिव्य मंदिर, जहां 18 भुजाओं वाली देवी की प्रतिमा के दर्शन मात्र से भक्त निहाल हो जाते हैं।
मां लक्ष्मी के रूप में मां त्रिपुर सुंदरी यहां विराजती हैं, जिनमें त्रिदेव की शक्तियां समाई हुईं हैं। राजस्थान के दक्षिण में अरावली पर्वत श्रंखला में मां त्रिपुर सुंदरी मंदिर स्थापित है। कहते हैं कि 'त्रिपुरा सुंदरी का यह इकलौता शक्ति पीठ है जहां गुप्त साधना की जाती है। और यहां श्री यंत्र की सहायता से सिद्धी साधना रोज की जाती है।
विक्रम संवत 1540 के आसपास के आलेख में बताया गया है कि सम्राट कनिष्क के काल के पूर्व से ही यह मंदिर स्थापित है। उस दौर में यहां आस पास गढ़पौली नाम का नगर था जिसके तीनों तरफ शिवपुरी, सीतापुरी और विष्णुपुरी नाम के दुर्ग थे। इन तीनों दुर्गों के मध्य यह मंदिर स्थित था जिसे त्रिपुर सुंदरी मंदिर कहा गया।
त्रिपुर सुंदर के मंदिर का जीर्णोदद्धार पांचाल समाज के 14 चौखरों ने करवाया था। मां त्रिपुर सुंदरी को मां त्रिपुरा सुंदरी के साथ ही महाकाली, महादुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती का रूप भी माना गया है। मां का वाहन सिंह है और उनकी 18 भुजाएं हैं। उनकी हर भुजा में अस्त्र शस्त्र और मूर्ति के चारों तरफ नवग्रह, नवदुर्गा के रूप में विद्यमान हैं।
मां के चरणों में सिद्ध युक्त श्रीयंत्र स्थापित है। शक्ति पीठ होने के कारण मां त्रिपुरा सुंदरी को मां सती का रूप भी माना जाता है। जो भक्त मां के दर पर आते हैं उनकी झोली मां खुशियों से भर देती हैं। मां के इस रहस्य के बारे में उपनिषदों और पुराणों में विशेष उल्लेख मिलता है।
कहा जाता है कि रियासतों के समय मां की महिमा इतनी ज्यादा थी कि गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्यप्रदेश के राजा मां त्रिपुरा की पूजा किए बिना किसी भी शुभ कार्य को प्रारंभ नहीं करते थे।
मां त्रिपुरा सुंदरी के इस शक्ति पीठ में तीन प्रहर मां के तीनों रूपों की आराधना होती है। प्रातः काल में कुमारिका दोपहर में यौवन रूप सुंदरी और सायंकाल में काल में प्रौढ़ रूप की पूजा की जाती है। मां को राजसत्ता की देवी भी कहा जाता है। मां त्रिपुर सुंदरी की आराधना यहां शंकराचार्य पद्धति के अनुसार होती है यहां श्रीयंत्र की पूर्ण साधना भी की जाती है।
गृहस्थ मां त्रिपुरा सुंदरी के सगुण रूप और साधु सन्यासी निर्गुण रूप को पूजते हैं। कहते हैं यहां से सिद्धी प्राप्त करने के पश्चात शत्रु हो या मित्र सभी को वश में किया जा सकता है। मां की पूजा से रोग-विकार दूर हो जाते हैं इसलिए यहां दूर-दूर से लोग दर्शन लाभ लेने आते हैं और मां त्रिपुरा सुंदरी भक्तों की प्रार्थना को पूरा करती हैं।
 
Posted in गौ माता - Gau maata

मप्र विधानसभा में पास नहीं हुआ गौमाता के अंतिम संस्कार का संकल्प


मप्र विधानसभा में पास नहीं हुआ गौमाता के अंतिम संस्कार का संकल्प

भोपाल। संघ और भाजपा की विचारधारा से जुड़े लोगों के लिए यह बड़ी खबर है कि मध्यप्रदेश की विधानसभा जिसमें भाजपा विधायकों की संख्या सबसे ज्यादा है, मैं गौमाता के अंतिम संस्कार की विधि को लेकर प्रस्तुत किया गया अशासकीय संकल्प पास नहीं हुआ, बल्कि खारिज कर दिया गया।

दूसरा आश्चर्यजनक पहलू यह कि इस अशासकीय संकल्प को कांग्रेस के एक मुसलमान विधायक आरिफ अकील ने पेश किया था। विधायक आरिफ अकील ने गाय के मरने के बाद उसे जलाने या दफनाए जाने, मृत शरीर की हड्डियों, चर्बी व चमड़ी की बिक्री पर रोक लगाने के लिए एक अशासकीय संकल्प पेश किया था। इस संकल्प को लेकर सदन में बीजेपी के विभागीय मंत्री कुसुम मेहदेले सहित करीब आधा दर्जन मंत्रियों वन मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार, संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा, उच्च शिक्षा मंत्री उमाशंकर गुप्ता, रामपाल सिंह ने बचाव किया। इन लोगों ने तर्क दिया कि सरकार गऊमाता को लेकर लापरवाह नहीं है। गऊमाता की उपेक्षा नहीं कर सकती।

पशुपालन मंत्री कुसुम मेहदेले ने तर्कों के बीच यह तक कह दिया कि पारसी समुदाय के लोगों में यह परंपरा है कि मृत शरीर को कुएं की मुंडेर पर रख दिया जाता है और चील-कौए खा जाते हैं। उनकी बात पूरी होती इसके पहले कांग्रेस विधायक मुकेश नायक ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि यह बातें आध्यत्म और लोक मान्यताओं के विपरीत है। ऐसे कुतर्क गऊमाता को लेकर नहीं दिए जाने चाहिए।

अशासकीय संकल्प पर सदन में पहले ध्वनि मत का सहारा लिया गया लेकिन आसंदी को इससे बहुमत का अंदाज नहीं हुआ। तब मत विभाजन की स्थिति बनी और इसके समर्थन में 30 व विरोध में 55 मत डाले गए जिससे संकल्प गिर गया।

कुल मिलाकर गौमाता के मुद्दे पर जहां कांग्रेस भी भाजपा के साथ थी, भाजपाईयों ने ही गौमाता के अंतिम संस्कार के विधान को मंजूरी नहीं दी और संकल्प को गिरा दिया। 
———————–
इस समाचार पर बीजेपी के एक अंधभक्त ने लिखा है की ये कोंग्रेस की चाल है..कोंग्रेस अब हिन्दु को अपने पाले में लेना चाहती है…..जरूर ये कोंग्रेस की चाल है, चाल चलने के लिए तो विपक्ष होता है और बीजेपी उस चाल में फंस गयी है, बिलकुल नंगी हो गयी है । हिन्दु हितैषी होने का सारा भांडा फुट गया है ।

कोंग्रेस हो या बीजेपी, दोनो में से कोइ भी सच में हिन्दुओं का हित नही कर सकते । बातों से बहलाने की जरूर छुट है पर रियल में नही । हिन्दुत्व को खतम करने की चाह रखनेवाले उन के आका, युनो के यहुदी बेंकर माफिया नाराज हो जाते हैं । उन की नाराजगी याने राजकिय सन्यास !

मप्र विधानसभा में पास नहीं हुआ गौमाता के अंतिम संस्कार का संकल्प

भोपाल। संघ और भाजपा की विचारधारा से जुड़े लोगों के लिए यह बड़ी खबर है कि मध्यप्रदेश की विधानसभा जिसमें भाजपा विधायकों की संख्या सबसे ज्यादा है, मैं गौमाता के अंतिम संस्कार की विधि को लेकर प्रस्तुत किया गया अशासकीय संकल्प पास नहीं हुआ, बल्कि खारिज कर दिया गया।

दूसरा आश्चर्यजनक पहलू यह कि इस अशासकीय संकल्प को कांग्रेस के एक मुसलमान विधायक आरिफ अकील ने पेश किया था। विधायक आरिफ अकील ने गाय के मरने के बाद उसे जलाने या दफनाए जाने, मृत शरीर की हड्डियों, चर्बी व चमड़ी की बिक्री पर रोक लगाने के लिए एक अशासकीय संकल्प पेश किया था। इस संकल्प को लेकर सदन में बीजेपी के विभागीय मंत्री कुसुम मेहदेले सहित करीब आधा दर्जन मंत्रियों वन मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार, संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा, उच्च शिक्षा मंत्री उमाशंकर गुप्ता, रामपाल सिंह ने बचाव किया। इन लोगों ने तर्क दिया कि सरकार गऊमाता को लेकर लापरवाह नहीं है। गऊमाता की उपेक्षा नहीं कर सकती।

पशुपालन मंत्री कुसुम मेहदेले ने तर्कों के बीच यह तक कह दिया कि पारसी समुदाय के लोगों में यह परंपरा है कि मृत शरीर को कुएं की मुंडेर पर रख दिया जाता है और चील-कौए खा जाते हैं। उनकी बात पूरी होती इसके पहले कांग्रेस विधायक मुकेश नायक ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि यह बातें आध्यत्म और लोक मान्यताओं के विपरीत है। ऐसे कुतर्क गऊमाता को लेकर नहीं दिए जाने चाहिए।

अशासकीय संकल्प पर सदन में पहले ध्वनि मत का सहारा लिया गया लेकिन आसंदी को इससे बहुमत का अंदाज नहीं हुआ। तब मत विभाजन की स्थिति बनी और इसके समर्थन में 30 व विरोध में 55 मत डाले गए जिससे संकल्प गिर गया।

कुल मिलाकर गौमाता के मुद्दे पर जहां कांग्रेस भी भाजपा के साथ थी, भाजपाईयों ने ही गौमाता के अंतिम संस्कार के विधान को मंजूरी नहीं दी और संकल्प को गिरा दिया। 
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इस समाचार पर बीजेपी के एक अंधभक्त ने लिखा है की ये कोंग्रेस की चाल है..कोंग्रेस अब हिन्दु को अपने पाले में लेना चाहती है.....जरूर ये कोंग्रेस की चाल है, चाल चलने के लिए तो विपक्ष होता है और बीजेपी उस चाल में फंस गयी है, बिलकुल नंगी हो गयी है । हिन्दु हितैषी होने का सारा भांडा फुट गया है ।

कोंग्रेस हो या बीजेपी, दोनो में से कोइ भी सच में हिन्दुओं का हित नही कर सकते । बातों से बहलाने की जरूर छुट है पर रियल में नही । हिन्दुत्व को खतम करने की चाह रखनेवाले उन के आका, युनो के यहुदी बेंकर माफिया नाराज हो जाते हैं । उन की नाराजगी याने राजकिय सन्यास !
 
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A rare architectural masterpiece!


A rare architectural masterpiece!

JEWELS OF BHARATAM ....SERIES [TM]

1200+ YEAR OLD Kopeshwar Temple is at Khidrapur, Kolhapur district, Maharashtra. It is also accessible from Sangli. It was built by Silhara King Gandaraditya in the 12th century and then by Seuna Yadavas. It is dedicated to Lord Shiva.

JEWELS OF BHARATAM ….SERIES [TM]

1200+ YEAR OLD Kopeshwar Temple is at Khidrapur, Kolhapur district, Maharashtra. It is also accessible from Sangli. It was built by Silhara King Gandaraditya in the 12th century and then by Seuna Yadavas. It is dedicated to Lord Shiva.

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हान यहूदी


हान यहूदी : ईसा मसीह के बाद कलाकार एंजेलो, चित्रकार पाब्लो पिकासो, कार्ल मार्क्स और अल्बर्ट आइंसटीन के अलावा ऐसे सैकड़ों प्रसिद्ध यहूदी हुए हैं जिनका विज्ञान और व्यापार में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यहूदियों द्वारा मानव समाज के विकास में जो योगदान किया गया है उसे भूला नहीं जा सकता।
यहूदी इतिहास : यहूदी धर्म का इतिहास करीब 4000 साल पुराना माना जाता है। कहते हैं कि मिस्र के नील नदी से लेकर इराक के दजला-फरात नदी के बीच आरंभ हुआ यहूदी धर्म का इजराइल सहित अरब के अधिकांश हिस्सों पर राज था। मूसा से लेकर सुलेमान तक प्राचीन समय में ही यहूदियों का ‘भारत’ से गहरा संबंध रहा है इस बात के कई प्रमाण है।
मिस्र पर कुछ समय तक यदुवंशियों का भी राज रहा था। वैसे इसका प्रचीन धर्म इजिप्ट था। ऐसा माना जाता है कि पहले यहूदी मिस्र के बहुदेववादी इजिप्ट धर्म के राजा फराओ के शासन के अधिन रहते थे। बाद में मूसा के नेतृत्व में वे इजरायल आ गए। ईसा के 1100 साल पहले जैकब की 12 संतानों के आधार पर अलग-अलग यहूदी कबीले बने थे, जो दो गुटों में बँट गए। पहला 10 कबीलों का बना था वह इजरायल कहलाया और दूसरा जो बाकी के दो कबीलों से बना था वह जुडाया कहलाया। जुडाया पर बेबीलन का अधिकार हो गया। बाद में ई.पू. सन् 800 के आसपास यह असीरिया के अधीन चला गया। असीरिया प्राचीन मेसोपोटामिया का एक साम्राज्य था, जो यह दजला नदी के उपरी हिस्से में बसा था। 10 कबीलों का क्या हुआ पता नहीं चला।
फारस के हखामनी शासकों ने असीरियाइयों को ई.पू. 530 तक हरा दिया तो यह क्षेत्र फारसी शासन में आ गया। यूनानी विजेता सिकन्दर ने जब दारा तृतीय को ई.पू. 330 में हराया तो यहूदी लोग ग्रीक शासन में आ गए। सिकन्दर की मृत्यु के बाद सेल्यूकस के साम्राज्य और उसके बाद रोमन साम्राज्य के अधीन रहने के बाद ईसाईयत का उदय हुआ। इसके बाद यहूदियों को यातनाएँ दी जान लगी।
7वीं सदी में इस्लाम के आगाज के बाद यहूदियों की मुश्किलें और बड़ गई। तुर्क और मामलुक शासन के समय यहूदियों को इजराइल से पलायन करना पड़ा। अंतत: यहूदियों के हाथ से अपना राष्ट्र जाता रहा। मई 1948 में इजराइल को फिर से यहूदियों का स्वतंत्र राष्ट्र बनाया गया। दुनिया भर में इधर-उधर बिखरे यहूदी आकर इजरायली क्षेत्रों में बसने लगे। वर्तमान में अरबों और फिलिस्तिनियों के साथ कई युद्धों में उलझा हुआ है एकमात्र यहूदी राष्ट्र इजरायल।।

हान यहूदी : ईसा मसीह के बाद कलाकार एंजेलो, चित्रकार पाब्लो पिकासो, कार्ल मार्क्स और अल्बर्ट आइंसटीन के अलावा ऐसे सैकड़ों प्रसिद्ध यहूदी हुए हैं जिनका विज्ञान और व्यापार में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यहूदियों द्वारा मानव समाज के विकास में जो योगदान किया गया है उसे भूला नहीं जा सकता।
यहूदी इतिहास : यहूदी धर्म का इतिहास करीब 4000 साल पुराना माना जाता है। कहते हैं कि मिस्र के नील नदी से लेकर इराक के दजला-फरात नदी के बीच आरंभ हुआ यहूदी धर्म का इजराइल सहित अरब के अधिकांश हिस्सों पर राज था। मूसा से लेकर सुलेमान तक प्राचीन समय में ही यहूदियों का 'भारत' से गहरा संबंध रहा है इस बात के कई प्रमाण है।
मिस्र पर कुछ समय तक यदुवंशियों का भी राज रहा था। वैसे इसका प्रचीन धर्म इजिप्ट था। ऐसा माना जाता है कि पहले यहूदी मिस्र के बहुदेववादी इजिप्ट धर्म के राजा फराओ के शासन के अधिन रहते थे। बाद में मूसा के नेतृत्व में वे इजरायल आ गए। ईसा के 1100 साल पहले जैकब की 12 संतानों के आधार पर अलग-अलग यहूदी कबीले बने थे, जो दो गुटों में बँट गए। पहला 10 कबीलों का बना था वह इजरायल कहलाया और दूसरा जो बाकी के दो कबीलों से बना था वह जुडाया कहलाया। जुडाया पर बेबीलन का अधिकार हो गया। बाद में ई.पू. सन् 800 के आसपास यह असीरिया के अधीन चला गया। असीरिया प्राचीन मेसोपोटामिया का एक साम्राज्य था, जो यह दजला नदी के उपरी हिस्से में बसा था। 10 कबीलों का क्या हुआ पता नहीं चला।
फारस के हखामनी शासकों ने असीरियाइयों को ई.पू. 530 तक हरा दिया तो यह क्षेत्र फारसी शासन में आ गया। यूनानी विजेता सिकन्दर ने जब दारा तृतीय को ई.पू. 330 में हराया तो यहूदी लोग ग्रीक शासन में आ गए। सिकन्दर की मृत्यु के बाद सेल्यूकस के साम्राज्य और उसके बाद रोमन साम्राज्य के अधीन रहने के बाद ईसाईयत का उदय हुआ। इसके बाद यहूदियों को यातनाएँ दी जान लगी।
7वीं सदी में इस्लाम के आगाज के बाद यहूदियों की मुश्किलें और बड़ गई। तुर्क और मामलुक शासन के समय यहूदियों को इजराइल से पलायन करना पड़ा। अंतत: यहूदियों के हाथ से अपना राष्ट्र जाता रहा। मई 1948 में इजराइल को फिर से यहूदियों का स्वतंत्र राष्ट्र बनाया गया। दुनिया भर में इधर-उधर बिखरे यहूदी आकर इजरायली क्षेत्रों में बसने लगे। वर्तमान में अरबों और फिलिस्तिनियों के साथ कई युद्धों में उलझा हुआ है एकमात्र यहूदी राष्ट्र इजरायल।।
Posted in Sai conspiracy

baba


ये पढ़ कर भी कोई कैसे इन्हें अपना आदर्श मान सकता | और अगर फिर भी वह मानता है तो वह “अन्धो मे कान्हा राजा ” इस पद से विभूषित होंगा | बुद्धि से काम ले ……..|

ये पढ़ कर भी कोई कैसे इन्हें अपना आदर्श मान सकता | और अगर फिर भी वह मानता है तो वह "अन्धो मे कान्हा राजा " इस पद से विभूषित होंगा | बुद्धि से काम ले ........|
Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

कभी किसी अंधे इंसान का मजाक ना उड़ाया करें ।।


कभी किसी अंधे इंसान का मजाक ना उड़ाया करें ।।

एक अँधा आदमी एक फाइव स्टार होटल में गया

होटल मैनेजर ने उससे पूछा :-
ये हमारा मीनू है, आप क्या लेंगे सर?

अंधा आदमी :-
मैं अँधा हूँ, आप अपनी किचन से चम्मच को आपके खाने के आइटम में डुबोकर ला दें, मैं उसे सूंघ कर आर्डर कर दूँगा

मैनेजर को यह सुनकर बड़ा ही आश्चर्य हुआ,
उसने मन ही मन में सोचा कि, कोई आदमी सूंघ कर कैसे बता सकता है कि हमने
आज क्या बनाया है, पकाया है !
मैनेजर ने जितनी बार भी, अपने अलग-अलग खाने के आइटम में, चम्मच डुबाकर, अँधे आदमी को सुंघाई, अंधे भाई ने सही बताया कि वो क्या है, और अँधे ने सूंघ कर ही खाने का आर्डर किया
हफ्ते-भर यही चलता रहा…….
वो अँधा आदमी सूंघकर, आर्डर देता और खाना खा कर चला जाता !

एक दिन मैनेजर ने, अँधे आदमी की परीक्षा लेने की सोची कि यह सब एक अँधा आदमी सूंघकर कैसे बता सकता है ?

मैनेजर किचन में गया और अपनी पत्नी मीना से बोला कि तुम चम्मच को अपने होठो से गीला कर दो !
मीना ने चम्मच को अपने होठों पर रगड़ कर चम्मच मैनेजर को दे दी!
मैनेजर ने वो चम्मच अँधे आदमी को ले जा कर दी और बोला, बताओ आज हमने
क्या बनाया है ?

अँधे आदमी ने चम्मच को सूंघा और बोला :-
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ओह माय गॉड !!! मेरी क्लासमेट मीना यहाँ काम करती है ?????
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मैनेजर बेहोश ।।।।।।

Posted in हिन्दू पतन

Jago Hindu Jago


 
SRI RAM Channel's photo.
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SRI RAM Channel added 5 new photos.

Jago Hindu Jago

Now in Bangalore, The BASTARD has gone uncontrollable.

Mohd Ishaq neat Girish ( https://www.facebook.com/neatgirish?fref=ts) , A recent convert to Islam is visiting Hindu temples as part of his Taqiya project called “Street Dawah” and distributing FREE QURAN to temple priests and brainwashing them,with usual taqiyas like “islam is a peaceful religion” blah blah… … thereby spoiling the sanctity of temples..

Below are the snaps posted on his wall

Hindus decide yourself.. where we are Going??

Does any Hindu here has the guts to go inside Mosques and distribute Hindu sacred books ???

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Posted in राजनीति भारत की - Rajniti Bharat ki

“अगर” मोदी प्रधानमंत्री न होते


“अगर” मोदी प्रधानमंत्री न होते तो अमेरिका उन्हें कभी नहीं बुलाता – राजीव शुक्ला (कांग्रेसी)
कांग्रेसी कौंवों “अगर” की कहानी सुनो –
# “अगर” राहुल गांधी, सोनिया गांधी का बेटा नहीं होता तो आज दिल्ली स्टेशन पर कुली होता।
# “अगर” सोनिया, राजीव गांधी की पत्नी ना होती तो इटली के किसी बार में ग्राहकों को खुश कर रही होती।
# “अगर” राजीव गांधी, इंदिरा गांधी का बेटा नहीं होता तो एक मामूली सा पायलट होकर दिन गुजारता।
# “अगर” इंदिरा गांधी, नेहरू की बेटी नहीं होती, तो किसी की रखैल होती (स्मरण रहे १८ साल की उम्र से मर्दों के साथ शारीरिक सम्बन्ध रहे हैं)।
# “अगर” कांग्रेस को आज़ादी के बाद खत्म कर दिया गया होता तो नेहरू जैसा निकम्मा, गद्दार, ठरकी, नकारा, औरतबाज़, अय्याश कभी प्रधानमंत्री नहीं होता।
# “अगर” कांग्रेस नहीं होती तो फिर ये नकली गांधी परिवार नहीं होता, तो शुक्ला, तू
भी नहीं होता।
‪#‎Congress‬ ‪#‎RahulGandhi‬ ‪#‎BJP‬ Bharatiya Janata Party (BJP) Narendra Modi