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आखिर ऐसे कौन से अहसान इन कुछ दिनों में उत्तर प्रदेश सरकार ने आप पर कर दिए कुरैशी जी कि आप को सरकार के बचाव की जरूरत आ पड़ी.
संवैधानिक पद की मर्यादाओं की परवाह किये बगैर आपको अपराधियों के मनोबल को बढ़ाने वाला व देश की नारी शक्ति को हतोत्साहित करने वाला बयान देने की क्या जरूरत पड़ गयी थी…..
एक कार्यवाहक राज्यपाल के तौर पर उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी अजीज कुरैशी को सौंपी गयी थी.. 
पिछले 10 सालों में जिस अल्पसंख्यक जौहर विश्वविद्यालय के विधेयक को पूर्व राज्यपालों टी.वी राजेश्वर व बी एल जोशी ने कानूनी अड़चनों के चलते रोक रखा था उसे इन्होने तत्काल मान्यता प्रदान कर दी. पता नहीं उन्होंने इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई जबकि कार्यवाहक राज्यपाल होने के नाते उन्हें ऐसा फैसला लेने से बचना चाहिये था.
प्रधानमंत्री ने सदन में व्यथित होकर कहा था कि राजनेता रेप का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करने से बाज आयें, लेकिन उसके बावजूद भी सरकार का एक तरह से बचाव करने वाला बयान देने की राज्यपाल को जरूरत क्यों आ पड़ी ??
सवाल बड़ा है !

आखिर ऐसे कौन से अहसान इन कुछ दिनों में उत्तर प्रदेश सरकार ने आप पर कर दिए कुरैशी जी कि आप को सरकार के बचाव की जरूरत आ पड़ी.
संवैधानिक पद की मर्यादाओं की परवाह किये बगैर आपको  अपराधियों के मनोबल को बढ़ाने वाला व देश की नारी शक्ति को हतोत्साहित करने वाला बयान देने की क्या जरूरत पड़ गयी थी.....
एक कार्यवाहक राज्यपाल के तौर पर उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी अजीज कुरैशी को सौंपी गयी थी.. 
पिछले 10 सालों में जिस अल्पसंख्यक जौहर विश्वविद्यालय के विधेयक को पूर्व राज्यपालों टी.वी राजेश्वर व बी एल जोशी ने कानूनी अड़चनों के चलते रोक रखा था उसे इन्होने तत्काल मान्यता प्रदान कर दी. पता नहीं उन्होंने इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई जबकि कार्यवाहक राज्यपाल होने के नाते उन्हें ऐसा फैसला लेने से बचना चाहिये था.
प्रधानमंत्री ने सदन में व्यथित होकर कहा था कि राजनेता रेप का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करने से बाज आयें, लेकिन उसके बावजूद भी सरकार का एक तरह से बचाव करने वाला बयान देने की राज्यपाल को जरूरत क्यों आ पड़ी ??
सवाल बड़ा है !
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रामेश्वरम धाम को :


सावन के दूसरे सोमवार पर जानें विश्व प्रसिद्ध रामेश्वरम धाम को :
यही वह स्थान है जहाँ लंका जाते समय भगवान् श्री राम ने अपने साथियों व वानर सेना की उपस्थिति में समुद्र की रेत से अपने आराध्य भगवान् शिव के शिवलिंग को स्थापित कर उनकी पूजा अर्चना कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया था.
उसके उपरान्त उन्होंने लंका तक जाने के लिए श्रीरामसेतु का निर्माण भी किया था, जिस पर चलकर वानर सेना ने समुद्र को पार करते हुए लंका पर चढ़ाई की थी.
आज वही सेतु समुद्र के अन्दर है जिसे एडम्स ब्रिज के नाम से भी जाना जाता है…
भूवैज्ञानिक सबूत भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि श्री लंका जाने के लिए रामेश्वरम निकटतम बिंदु है और यह ब्रिज वहां जाने का भूमि मार्ग था.
जय श्री राम (हर हर महादेव)
एक भारत – श्रेष्ठ भारत – अतुल्य भारत 
https://www.facebook.com/ekbharatshreshthbharat

सावन के दूसरे सोमवार पर जानें विश्व प्रसिद्ध रामेश्वरम धाम को :
यही वह स्थान है जहाँ लंका जाते समय भगवान् श्री राम ने अपने साथियों व वानर सेना की उपस्थिति में समुद्र की रेत से अपने आराध्य भगवान् शिव के शिवलिंग को स्थापित कर उनकी पूजा अर्चना कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया था.
उसके उपरान्त उन्होंने लंका तक जाने के लिए श्रीरामसेतु का निर्माण भी किया था, जिस पर चलकर वानर सेना ने समुद्र को पार करते हुए लंका पर चढ़ाई की थी.
आज वही सेतु समुद्र के अन्दर है जिसे एडम्स ब्रिज के नाम से भी जाना जाता है...
भूवैज्ञानिक सबूत भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि श्री लंका जाने के लिए रामेश्वरम निकटतम बिंदु है और यह ब्रिज वहां जाने का भूमि मार्ग था.
जय श्री राम (हर हर महादेव)
एक भारत - श्रेष्ठ भारत - अतुल्य भारत 
https://www.facebook.com/ekbharatshreshthbharat
 
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”वामपंथियो” द्वारा तर्क दिया जाता है :


”वामपंथियो” द्वारा तर्क दिया जाता है :
” कि ब्राहम्ण / क्षत्रिय / वेश्य समाज ने ”शूद्रो” पर बहुत अत्याचार किये ! शूद्र वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़ेपन के लिये भी ब्राहम्ण / क्षत्रिय / वेश्य ही जिम्मेदार हैं ! इस अत्याचार और सामाजिक उत्पीड़न के कारण शूद्र वर्ग को ”आरक्षण” दिया जाता है ! “
*************************
वामपंथी कभी आफ्रिका का इतिहास पढ़े ,
”शोषण” क्या होता है कभी आफ्रिका की तरफ भी देखे , सारा बकवास लिखना भूल जायेंगे !
इस देश की सामाजिक / आर्थिक व्यवस्था का नुकसान ”मुग़लो” और ”अंग्रेजो” की लूट से हुआ था ! आरक्षण का आधार केवेल नेहरू और गाँधी की मक्कारी है ! अम्बेडकर जी ने आरक्षण नही सामजिक बराबरी मांगी थी , माने आत्मसमान ! ”सावरकर जी” से प्रभावित होकर अम्बेडर जी ने ”बुद्ध धर्म” की तरफ ध्यान दिया था !
आरक्षण का आज आधार है ”जातिगत – भेदभाव” ( माने तू बड़ा में छोटा ) !बुद्ध धर्म अपनाने के कुछ दिन बाद ही अम्बेडकर जी की हत्या हो गयी थी ! घोर हिन्दू विरोधी 22 प्रतिज्ञा अम्बेडकर जी की हत्या के बाद कॉंग्रेस ने अपने राजनेटिक फायदे के लिये जोड़ी थी ! किसी ने कुछ नही कहा ! ”धर्म गुरु” तब भी थे आज भी है , हिन्दुओ के विभाजन का फर्क इन ”धर्म-गुरुओ” को नही पड़ेगा ! असल में यह सारे ”धर्म गुरु” कॉंग्रेस की मदद और हिन्दुओ के विभाजन के लिये ही बने हुए हैं !
इस फर्ज़ी कहानी को इतिहास मानकर अभी आगे कब तक इस देश में ”आरक्षण” और ”जातिवाद” रहेगा ,यह एक गम्बीर प्रशन है ?

''वामपंथियो'' द्वारा तर्क दिया जाता है :
" कि ब्राहम्ण / क्षत्रिय / वेश्य समाज ने ''शूद्रो'' पर बहुत अत्याचार किये ! शूद्र वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़ेपन के लिये भी ब्राहम्ण / क्षत्रिय / वेश्य ही जिम्मेदार हैं ! इस अत्याचार और सामाजिक उत्पीड़न के कारण शूद्र वर्ग को ''आरक्षण'' दिया जाता है ! "
*************************
वामपंथी कभी आफ्रिका का इतिहास पढ़े ,
''शोषण'' क्या होता है कभी आफ्रिका की तरफ भी देखे , सारा बकवास लिखना भूल जायेंगे !
इस देश की सामाजिक / आर्थिक व्यवस्था का नुकसान ''मुग़लो'' और ''अंग्रेजो'' की लूट से हुआ था ! आरक्षण का आधार केवेल नेहरू और गाँधी की मक्कारी है ! अम्बेडकर जी ने आरक्षण नही सामजिक बराबरी मांगी थी , माने आत्मसमान ! ''सावरकर जी'' से प्रभावित होकर अम्बेडर जी ने ''बुद्ध धर्म'' की तरफ ध्यान दिया था !
आरक्षण का आज आधार है ''जातिगत - भेदभाव'' ( माने तू बड़ा में छोटा ) !बुद्ध धर्म अपनाने के कुछ दिन बाद ही अम्बेडकर जी की हत्या हो गयी थी ! घोर हिन्दू विरोधी 22 प्रतिज्ञा अम्बेडकर जी की हत्या के बाद कॉंग्रेस ने अपने राजनेटिक फायदे के लिये जोड़ी थी ! किसी ने कुछ नही कहा ! ''धर्म गुरु'' तब भी थे आज भी है , हिन्दुओ के विभाजन का फर्क इन ''धर्म-गुरुओ'' को नही पड़ेगा ! असल में यह सारे ''धर्म गुरु'' कॉंग्रेस की मदद और हिन्दुओ के विभाजन के लिये ही बने हुए हैं !
इस फर्ज़ी कहानी को इतिहास मानकर अभी आगे कब तक इस देश में ''आरक्षण'' और ''जातिवाद'' रहेगा ,यह एक गम्बीर प्रशन है ?
 
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Sanatan Hinduism is a scientific religion.


13 hrs · Edited · 

The secret & importance of “108”.
————————————————-
Sanatan Hinduism is a scientific religion.

108 अंक का रहस्य
----
वेदान्त में एक मात्रकविहीन सार्वभौमिक ध्रुवांक 108 का उल्लेख
मिलता है जिसका हजारों वर्षों पूर्व हमारे ऋषियों (वैज्ञानिकों)
ने अविष्कार किया था l
मेरी सुविधा के लिए मैं मान लेता हूँ कि, 108 = ॐ (जो पूर्णता का द्योतक है)
प्रकृति में 108 की विविध अभिव्यंजना :
1. सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी/सूर्य का व्यास = 108 = 1 ॐ
150,000,000 km/1,391,000 km = 108 (पृथ्वी और सूर्य के बीच 108 सूर्य सजाये जा सकते हैं)
2. सूर्य का व्यास/ पृथ्वी का व्यास = 108 = 1 ॐ
1,391,000 km/12,742 km = 108 = 1 ॐ
सूर्य के व्यास पर 108 पृथ्वियां सजाई सा सकती हैं .
3. पृथ्वी और चन्द्र के बीच की दूरी/चन्द्र का व्यास = 108 = 1 ॐ
384403 km/3474.20 km = 108 = 1 ॐ
पृथ्वी और चन्द्र के बीच १०८ चन्द्रमा आ सकते हैं .
4. मनुष्य की उम्र 108 वर्षों (1ॐ वर्ष) में पूर्णता प्राप्त करती है .
वैदिक ज्योतिष के अनुसार मनुष्य को अपने जीवन काल में विभिन्न
ग्रहों की 108 वर्षों की अष्टोत्तरी महादशा से गुजरना पड़ता है .
5. एक शांत, स्वस्थ और प्रसन्न वयस्क व्यक्ति 200 ॐ श्वास लेकर एक दिन पूरा करता है .
1 मिनट में 15 श्वास >> 12 घंटों में 10800 श्वास >> दिनभर में 100 ॐ श्वास, वैसे ही रातभर में 100 ॐ श्वास
6. एक शांत, स्वस्थ और प्रसन्न वयस्क व्यक्ति एक मुहुर्त में 4 ॐ ह्रदय की धड़कन पूरी करता है .
1 मिनट में 72 धड़कन >> 6 मिनट में 432 धडकनें >> 1 मुहूर्त में 4 ॐ धडकनें ( 6 मिनट = 1 मुहूर्त)
7. सभी 9 ग्रह (वैदिक ज्योतिष में परिभाषित) भचक्र एक चक्र पूरा करते समय 12 राशियों से होकर गुजरते हैं और 12 x 9 = 108 = 1 ॐ
8. सभी 9 ग्रह भचक्र का एक चक्कर पूरा करते समय 27 नक्षत्रों को पार करते हैं और प्रत्येक नक्षत्र के चार चरण होते हैं और 27 x 4 = 108 = 1 ॐ
9. एक सौर दिन 200 ॐ विपल समय में पूरा होता है. (1 विपल = 2.5 सेकेण्ड)
1 सौर दिन (24 घंटे) = 1 अहोरात्र = 60 घटी = 3600 पल = 21600
विपल = 200 x 108 = 200 ॐ विपल
*** 108 का आध्यात्मिक अर्थ ***
1 सूचित करता है ब्रह्म की अद्वितीयता/एकत्व/पूर्णता को
0 सूचित करता है वह शून्य की अवस्था को जो विश्व की अनुपस्थिति में
उत्पन्न हुई होती
8 सूचित करता है उस विश्व की अनंतता को जिसका अविर्भाव उस शून्य में
ब्रह्म की अनंत अभिव्यक्तियों से हुआ है .
अतः ब्रह्म, शून्यता और अनंत विश्व के संयोग को ही 108 द्वारा सूचित
किया गया है .
जिस प्रकार ब्रह्म की शाब्दिक अभिव्यंजना प्रणव ( अ + उ + म् ) है और
नादीय अभिव्यंजना ॐ की ध्वनि है उसी प्रकार ब्रह्म की गाणितिक
अभिव्यंजना 108 है !!

108 अंक का रहस्य
—-
वेदान्त में एक मात्रकविहीन सार्वभौमिक ध्रुवांक 108 का उल्लेख
मिलता है जिसका हजारों वर्षों पूर्व हमारे ऋषियों (वैज्ञानिकों)
ने अविष्कार किया था l
मेरी सुविधा के लिए मैं मान लेता हूँ कि, 108 = ॐ (जो पूर्णता का द्योतक है)
प्रकृति में 108 की विविध अभिव्यंजना :
1. सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी/सूर्य का व्यास = 108 = 1 ॐ
150,000,000 km/1,391,000 km = 108 (पृथ्वी और सूर्य के बीच 108 सूर्य सजाये जा सकते हैं)
2. सूर्य का व्यास/ पृथ्वी का व्यास = 108 = 1 ॐ
1,391,000 km/12,742 km = 108 = 1 ॐ
सूर्य के व्यास पर 108 पृथ्वियां सजाई सा सकती हैं .
3. पृथ्वी और चन्द्र के बीच की दूरी/चन्द्र का व्यास = 108 = 1 ॐ
384403 km/3474.20 km = 108 = 1 ॐ
पृथ्वी और चन्द्र के बीच १०८ चन्द्रमा आ सकते हैं .
4. मनुष्य की उम्र 108 वर्षों (1ॐ वर्ष) में पूर्णता प्राप्त करती है .
वैदिक ज्योतिष के अनुसार मनुष्य को अपने जीवन काल में विभिन्न
ग्रहों की 108 वर्षों की अष्टोत्तरी महादशा से गुजरना पड़ता है .
5. एक शांत, स्वस्थ और प्रसन्न वयस्क व्यक्ति 200 ॐ श्वास लेकर एक दिन पूरा करता है .
1 मिनट में 15 श्वास >> 12 घंटों में 10800 श्वास >> दिनभर में 100 ॐ श्वास, वैसे ही रातभर में 100 ॐ श्वास
6. एक शांत, स्वस्थ और प्रसन्न वयस्क व्यक्ति एक मुहुर्त में 4 ॐ ह्रदय की धड़कन पूरी करता है .
1 मिनट में 72 धड़कन >> 6 मिनट में 432 धडकनें >> 1 मुहूर्त में 4 ॐ धडकनें ( 6 मिनट = 1 मुहूर्त)
7. सभी 9 ग्रह (वैदिक ज्योतिष में परिभाषित) भचक्र एक चक्र पूरा करते समय 12 राशियों से होकर गुजरते हैं और 12 x 9 = 108 = 1 ॐ
8. सभी 9 ग्रह भचक्र का एक चक्कर पूरा करते समय 27 नक्षत्रों को पार करते हैं और प्रत्येक नक्षत्र के चार चरण होते हैं और 27 x 4 = 108 = 1 ॐ
9. एक सौर दिन 200 ॐ विपल समय में पूरा होता है. (1 विपल = 2.5 सेकेण्ड)
1 सौर दिन (24 घंटे) = 1 अहोरात्र = 60 घटी = 3600 पल = 21600
विपल = 200 x 108 = 200 ॐ विपल
*** 108 का आध्यात्मिक अर्थ ***
1 सूचित करता है ब्रह्म की अद्वितीयता/एकत्व/पूर्णता को
0 सूचित करता है वह शून्य की अवस्था को जो विश्व की अनुपस्थिति में
उत्पन्न हुई होती
8 सूचित करता है उस विश्व की अनंतता को जिसका अविर्भाव उस शून्य में
ब्रह्म की अनंत अभिव्यक्तियों से हुआ है .
अतः ब्रह्म, शून्यता और अनंत विश्व के संयोग को ही 108 द्वारा सूचित
किया गया है .
जिस प्रकार ब्रह्म की शाब्दिक अभिव्यंजना प्रणव ( अ + उ + म् ) है और
नादीय अभिव्यंजना ॐ की ध्वनि है उसी प्रकार ब्रह्म की गाणितिक
अभिव्यंजना 108 है !!

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पृथ्वी का भोगोलिक मानचित्र: वेद व्यास द्वारा


पृथ्वी का भोगोलिक मानचित्र: वेद व्यास द्वारा

महाभारत में पृथ्वी का पूरा मानचित्र हजारों वर्ष पूर्व ही दे दिया गया था। महाभारत में कहा गया है कि यह पृथ्वी चन्द्रमंडल में देखने पर दो अंशों मे खरगोश तथा अन्य दो अंशों में पिप्पल (पत्तों) के रुप में दिखायी देती है-

उपरोक्त मानचित्र ११वीं शताब्दी में रामानुजचार्य द्वारा महाभारत के निम्नलिखित श्लोक को पढ्ने के बाद बनाया गया था-

“ सुदर्शनं प्रवक्ष्यामि द्वीपं तु कुरुनन्दन। परिमण्डलो महाराज द्वीपोऽसौ चक्रसंस्थितः॥
यथा हि पुरुषः पश्येदादर्शे मुखमात्मनः। एवं सुदर्शनद्वीपो दृश्यते चन्द्रमण्डले॥ द्विरंशे पिप्पलस्तत्र द्विरंशे च शशो महान्।
”
—वेद व्यास, भीष्म पर्व, महाभारत

अर्थात

हे कुरुनन्दन ! सुदर्शन नामक यह द्वीप चक्र की भाँति गोलाकार स्थित है, जैसे पुरुष दर्पण में अपना मुख देखता है, उसी प्रकार यह द्वीप चन्द्रमण्डल में दिखायी देता है। इसके दो अंशो मे पिप्पल और दो अंशो मे महान शश(खरगोश) दिखायी देता है। अब यदि उपरोक्त संरचना को कागज पर बनाकर व्यवस्थित करे तो हमारी पृथ्वी का मानचित्र बन जाता है, जो हमारी पृथ्वी के वास्तविक मानचित्र से बहुत समानता दिखाता है।

पृथ्वी का भोगोलिक मानचित्र: वेद व्यास द्वारा

महाभारत में पृथ्वी का पूरा मानचित्र हजारों वर्ष पूर्व ही दे दिया गया था। महाभारत में कहा गया है कि यह पृथ्वी चन्द्रमंडल में देखने पर दो अंशों मे खरगोश तथा अन्य दो अंशों में पिप्पल (पत्तों) के रुप में दिखायी देती है-

उपरोक्त मानचित्र ११वीं शताब्दी में रामानुजचार्य द्वारा महाभारत के निम्नलिखित श्लोक को पढ्ने के बाद बनाया गया था-

“ सुदर्शनं प्रवक्ष्यामि द्वीपं तु कुरुनन्दन। परिमण्डलो महाराज द्वीपोऽसौ चक्रसंस्थितः॥
यथा हि पुरुषः पश्येदादर्शे मुखमात्मनः। एवं सुदर्शनद्वीपो दृश्यते चन्द्रमण्डले॥ द्विरंशे पिप्पलस्तत्र द्विरंशे च शशो महान्।

—वेद व्यास, भीष्म पर्व, महाभारत

अर्थात

हे कुरुनन्दन ! सुदर्शन नामक यह द्वीप चक्र की भाँति गोलाकार स्थित है, जैसे पुरुष दर्पण में अपना मुख देखता है, उसी प्रकार यह द्वीप चन्द्रमण्डल में दिखायी देता है। इसके दो अंशो मे पिप्पल और दो अंशो मे महान शश(खरगोश) दिखायी देता है। अब यदि उपरोक्त संरचना को कागज पर बनाकर व्यवस्थित करे तो हमारी पृथ्वी का मानचित्र बन जाता है, जो हमारी पृथ्वी के वास्तविक मानचित्र से बहुत समानता दिखाता है।

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We maintain and insist that a rapist


We maintain and insist that a rapist should have no ‘religion’ associated with them. Yes one is free to draw a general conclusion that a certain community is found to be involved more than any other but in general we refrain from doing any religious classifications.
However, it becomes shamemful and shocking when minorities demand exemption from their crimes by playing victims. 
For example, In Bangalore, a recent incident which has similarities to the gang-rape of Nirbhaya a

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We maintain and insist that a rapist should have no 'religion' associated with them. Yes one is free to draw a general conclusion that a certain community is found to be involved more than any other but in general we refrain from doing any religious classifications.
However, it becomes shamemful and shocking when minorities demand exemption from their crimes by playing victims. 
For example, In Bangalore, a recent incident which has similarities to the gang-rape of Nirbhaya at Delhi and Shakti Mills gang-rape at Mumbai - a gang of hoodlums reportedly kidnapped a girl student at knife point  during her visit to her parents in Fraser Town, Bangalore. Subsequently they gang-raped her in the presence of her friend.
Haider from Fraser Town was arrested after the girl and her friend complained to the police. His five friends have gone 'missing'.

But as if the rape and assault itself are not shameful enough, here are two shocking facts related to this case:
1)  Muhammed Rafiq Ahmed, and four other policemen of Pulikeshi Nagara station filed the case as 'abduction and assault' instead of sexual harassment and rape - even after a clear complaint by the girl. 

2) The relatives of the accused - Atiq, Imtiaz and others, are protesting their arrest and are claiming that this is a false case against their innocent children. They think they've been accused simply because of their religion. 

A departmental inquiry has been ordered against inspector and others , for dereliction of duty but what can one do about their community who are playing victims ?
 
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वोट लेंगे हिन्दुओ से


वोट लेंगे हिन्दुओ से ,,संसद में पैसा खर्च होगा भारतीयों का ,किन्तु ये चर्चा करेगे गाजा के विदेशी मुस्लिम आतंकियों का…जिनको इजराईल अपने देश की रक्षा के लिए ख़त्म कर रहा है..
-आज हमारे कुछ हिन्दू गाज़ा के लिये शोक कर रहे हैं और मुसलमान मातम माना रहे हैं
भारत मे सॅन 711 से भारत के लाखो धर्म स्थल तोडे गये करोडो माता बहन की आवरू लूटी गयी, 1000 सालो तक हिन्दुओं का कत्लेआम हुआ उनकी जमीन पर, आज तक एक भी मुसलमान से नहीं मिला जो इसके लिये शर्मिंदा महसूस करे। ऊपर से उन्होने बेशर्मी सेपाकिस्तान बनाया फिर कत्ल किया, पर अब भी शर्मिंदा नहीं, उनके लिये हर बलात्कार हर कत्ल एक नयी जीत है,एक भी मुसलमान नहीं जिसने देश तोड़ने के और 1947 मे 20 लाख हिन्दुओं के कत्ल पर शर्मिंदगी जताई हो। कश्मीर मे हजारो हिंदुओ का कत्ल हुआ, मुस्लिम आतंकवादियों के हमले मे हर दिन आतंकी हमलो मे गैर मुसलमान बच्चे औरत और गरीब मरते हैं। हर दिन सेना के जवान शाहीद होते हैं। किसी भारतीय मुसलमान को कभी शर्मिंदा होते हुए देखा?
जब भारत मे हिन्दू मरते हैं तो किसी हिन्दू की हिम्मत नहीं होती की निंदा करे, अभी सब मातम कर रहे हैं गाज़ा के लिये
ये नेता हिन्दुओ का कैसे भला करेगे ?
TP Shukla

वोट लेंगे हिन्दुओ से ,,संसद में पैसा खर्च होगा भारतीयों का ,किन्तु ये चर्चा करेगे गाजा के विदेशी मुस्लिम आतंकियों का...जिनको इजराईल अपने देश की रक्षा के लिए ख़त्म कर रहा है..
-आज हमारे कुछ हिन्दू गाज़ा के लिये शोक कर रहे हैं और मुसलमान मातम माना रहे हैं
भारत मे सॅन 711 से भारत के लाखो धर्म स्थल तोडे गये करोडो माता बहन की आवरू लूटी गयी, 1000 सालो तक हिन्दुओं का कत्लेआम हुआ उनकी जमीन पर, आज तक एक भी मुसलमान से नहीं मिला जो इसके लिये शर्मिंदा महसूस करे। ऊपर से उन्होने बेशर्मी से पाकिस्तान बनाया फिर कत्ल किया, पर अब भी शर्मिंदा नहीं, उनके लिये हर बलात्कार हर कत्ल एक नयी जीत है,एक भी मुसलमान नहीं जिसने देश तोड़ने के और 1947 मे 20 लाख हिन्दुओं के कत्ल पर शर्मिंदगी जताई हो। कश्मीर मे हजारो हिंदुओ का कत्ल हुआ, मुस्लिम आतंकवादियों के हमले मे हर दिन आतंकी हमलो मे गैर मुसलमान बच्चे औरत और गरीब मरते हैं। हर दिन सेना के जवान शाहीद होते हैं। किसी भारतीय मुसलमान को कभी शर्मिंदा होते हुए देखा?
जब भारत मे हिन्दू मरते हैं तो किसी हिन्दू की हिम्मत नहीं होती की निंदा करे, अभी सब मातम कर रहे हैं गाज़ा के लिये
ये नेता हिन्दुओ का कैसे भला करेगे ?
TP Shukla
 
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जानिए इजराइल


16 hrs · 
 

जानिए इजराइल में हो रहे संग्राम का सच ! ज्यादा से ज्यादा शेयर करें !
“यहूदी लोगों का इतिहास 5700 वर्ष पुराना है. (वर्तमान हिब्रू कैलेंडर वर्ष 5774 है). अब्राहम इसहाक और याकूब के पिता थेए और याकूब पहले यहूदी थे. याकूब से ही B’nei Yisrael कहे जाने वाले इस्राएल के लोगों या इज़रायल के बच्चों का उदय हुआ. वास्तव में यहूदी धर्म को ठीक उसी तरह अरब का बुनियादी मूल धर्म/सभ्यता माना जा सकता है जैसे सनातन धर्म (या हिन्दुओं) भारत का मूल धर्म/सभ्यता है. इसके अलावा, हिंदुओं की एकमात्र मातृभूमि भारतवर्ष की ही तरह, यहूदियों की भी इज़रायल के अतिरिक्‍त कोई अन्य मातृभूमि नहीं है. सदियों तक यहूदी कसदियों, यूनानी रोमनों आदि जैसे विभिन्न समूहों/देशों द्वारा अनवरत् किए गए उत्पीड़न और कठिनाइयों का सामना करते हुए इज़रायल का एक राष्ट्र के रूप में अस्तित्व बचाने के लिए लगातार संघर्ष करते रहे और 3000 से भी अधिक वर्षों तक इस देश ने एक राष्ट्र के रूप में अपनी उपस्थिति बनाए रखी, हालांकि इस पूरे काल में अरब देशों और यूरोप में यहूदियों की विभिन्न जनजातियां यहां-वहां भटकती हुई किसी तरह बची रहीं. द्वितीय विश्च युद्ध के दौरान हिटलर द्वारा 6 लाख यहूदियों के अमानवीय क़त्ले-आम और लगभग उसी समय ब्रिटेन से इज़रायल को स्वतंत्रता मिलने के बाद – दुनिया भर से यहूदियों के जत्थों ने इज़रायल में पहुंचना शुरू कर दिया. वहां से बाहर निकलते समय ब्रिटिश शासकों ने इस्राएल के देश को विभाजित कर दिया. यह अन्यायपूर्ण विभाजन इज़रायल को स्वीकार्य नहीं था और इसने उन्हें अस्थिर सीमाओं के साथ छोड़ दिया. (जैसा कि हमें भारत में भी देखने को मिलता है.) इज़रायल के उत्तरी हिस्से यहूदिया पर 117 = 138 ईस्वी के मध्य रोम के लोगों द्वारा कब्ज़ा कर लिया गया था. इज़रायल रोमन साम्राज्य का विस्तार करने के लिए एक संरक्षित राज्य के रूप में काम करने के लिए स्थापित किया गया था. वे इस क्षेत्र को फिलिस्तिया कहा करते थे. जब ब्रिटेन और जार्डन ने इज़रायल पर कब्ज़ा कर लिया तब वे रोमन नाम फिलिस्तिया से मिलते जुलते नाम फिलिस्तीन से इस भूमि को पुकारने लगे. लंबे समय के बाद से वहाँ रह रहे विभिन्न नस्लों के अरब मुसलमानों ने फिलिस्तीन नाम से अपने लिए एक नए देश की मांग करनी प्रारंभ कर दी (ठीक भारतीय मुसलमानों की ही तरह जिन्होंने पूर्व और पश्चिम पाकिस्तान नाम से एक नई जमीन की मांग प्रारंभ कर दी थी, हालांकि दोनों में फर्क सिर्फ इतना है कि इज़रायल के मामले में मुसलमानों अलग-अलग जातियों व नस्लों के अरबी मुस्लिम थे जबकि पाकिस्तानी मुस्लिमों के पूर्वज भारत के सनातन धर्म के अनुयायी थे जिन्हें बलपूर्वक तलवार से मुसलमान बना दिया गया था.) इज़रायल ने 1948 में स्वतंत्रता प्राप्त की. इज़रायल के मुस्लिम जातीय समूहों के नेताओं ने उन मुस्लिमों से कहा कि नाजी संहार से पीड़ि‍त यहूदियों के बड़ी संख्या में इज़रायल वापसी के कारण उन्हें यह देश छोड़ देना चाहिए. जहां एक ओर इज़रायल ने देश में आने वाले सभी यहूदी शरणार्थियों को अपने में समाहित कर लिया, वहीं दूसरी ओर वहां रह रहे अरब मुस्लिमों को किसी भी उनके किसी भी सहोदर अरब मुस्लिम देश द्वारा समाहित नहीं किया गया जिनके पास छोटे से राज्य इज़रायल के मुकाबले कहीं अधिक विशाल प्रदेश थे. अंतत: यह मुस्लिम सभी अरब देशों द्वारा लौटाए जाने के बाद वापस इज़रायल लौटे इज़रायल देश ने उन्हें काम करने के लिए वीज़ा दे दिया. उन्होंने पश्चिमी तट और गाजा पट्टी क्षेत्र में रहने के लिए खुद को स्थापित कर लिया, लेकिन अंतत: ख़ुद को ‘फिलिस्तीनी’ कहना शुरू कर दिया और अपनी इन नई पहचान का आग्रह रखते हुए अपने लिए एक नए गृहक्षेत्र की मांग शुरू कर दी (जोकि भारत, साइप्रस, बांग्लादेश आदि के मुसलमानों जैसे विभाजन में पाया जाने वाला एक आम लक्षण है). इस बीच जिन मुस्लिमों ने इज़रायल से पलायन नहीं किया था, वे इज़रायल में लगातार रहते रहे. अपनी पुस्तक “हमास का बेटा” में एक मोसाब हसन यूसुफ़ नाम के एक पूर्व मुस्लिम, जो एक प्रभावशाली हमास नेता के पुत्र हैं, कहते हैं कि फिलीस्तीनी औसतन चार बच्चों को जन्म दे रहे हैं. इनमें से तीन को डॉक्टर, वकील और व्यापारी बनाया जा रहा है और चौथे को जिहाद के लिए दिया जा रहा है. फिलीस्तीनी इस उम्मीद में जनसंख्या जिहाद कर रहे हैं कि जिस दिन उन्हें इज़रायल में प्रवेश करने की अनुमति दी जाती है, उस दिन वे भीतर से इज़रायल को फटने पर मजबूर कर देंगे. ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ के साथ मिलीभगत में पूरी मुस्लिम दुनिया फिलीस्तीनियों में घृणा भर रही है. इस घृणा के कारण ही तथाकथित फिलीस्तीनी कभी भी इज़रायल के साथ आत्मसात नहीं हो सकते हैं. यह घृणा का भाईचारा उन्‍हें इस छद्म युद्ध (जैसा कि वे कश्मीर में भी कर रहे हैं) को जारी रखने के लिए उन रॉकेट और अन्य गोला बारूद की आपूर्ति करता है. इसके अलावा सारी दुनिया पर मुसलमानों द्वारा वर्चस्व स्थापित करवाए जाने के लिए दुनिया का एक मुस्लिम खलीफा के अपने परम उद्देश्य की पूर्ति के लिए पूरी दुनिया में मुस्लिम आक्रामकता को मुस्लिम ब्रदरहुड द्वारा कुछ मानक प्रक्रियाओं के ज़रिए बढ़ावा दिया जा रहा है. इसे इज़रायल में अच्छी तरह से देखा जा सकता है. जनसंख्या जिहाद: : प्रत्येक फिलीस्तीनी ढाल के रूप में महिलाओं और बच्चों का उपयोग मात्र अपनी संख्या के बल पर इज़रायल को समाप्त कर देने के लिए प्रत्येक फिलीस्तीनी कम से कम 4 बच्चों को जन्म देता है. फिलीस्तीनी आतंकवादी बच्चों और महिलाओं को ढाल के रूप में इस्तेमाल करते हुए उनके पीछे छिपते हैं और इज़रायल पर भारी बमबारी करते हैं. हालांकि इज़रायल द्वारा प्रतिहिंसक रुख़ अख्तियार करने पर वे पीड़ित होने का पाखंड रचते हैं और मीडिया दुष्प्रचार का जम कर इस्तेमाल करते हैं. झूठा दुष्‍प्रचार: कट्टरपंथी मुसलमानों का यह सबसे बड़ा और सबसे पुराना हथियार है; वे स्वयं को हमेशा पीड़ितों या शहीदों के रूप में प्रस्तुत करते हैं और सफलतापूर्वक अपनी स्थिति को आम जनता की सहानुभूति अर्जित करने के लिए इस्तेमाल करते हैं. यहां तक कि आम तौर पर हॉलीवुड की विभिन्न फिल्मों में भी उन्हें नायक के रूप में दर्शाया जाता है. वास्तव में, उनका दुष्‍प्रचार तंत्र इतना ताक़तवर और सफल है कि पूरा संसार यही मान चुका है कि इज़रायल, जिसके पास वास्तव में प्राकृतिक संसाधनों के नाम पर कुछ नहीं है और जो मात्र अपनी योग्यता के आधार पर ही सफल है, के पास इतना अधिक पैसा है कि वह पूरे मीडिया को ख़रीद चुका है. जबकि इसके ठीक उलट वास्तविकता यह है कि तेल के पैसे से बेहद समृद्ध अरब देश न केवल अपने पैसे की ताक़त के बल पर दुनिया भर के मीडिया को प्रभावित कर रहे हैं बल्कि सारे संसार में जिहाद का वित्त पोषण भी कर रहे हैं, जिसका असर मीडिया में अक्‍़सर इज़रायल को ‘बुरे Zionists’ के रूप में चित्रित किए जाने में परि‍लक्षित होता है. बाल जिहादी: फिलीस्तीनी कार्टून फिल्में जिहाद की राह में खुद को बम से उड़ा लेने को उचित और पवित्र शहादत के रूप में चित्रित करती हैं. बच्चों को चट्टानों और पत्थरों से लैस कर के इज़रायली सैनिकों पर आक्रमण करने के लिए भेजा जाता है, क्यों कि फिलि‍स्तीनी यह अच्छी तरह जानते हैं कि इज़रायली उन पर जवाबी हमला नहीं कर सकते. (ठीक यही कश्मीर में होता है) यहूदियों का किसी के भी प्रति प्रतिशोध, आक्रामकता या किसी भी देश पर आक्रमण करने या कब्ज़ा कर लेने, या किसी जातीय या धार्मिक समूह को सताने का शायद ही कोई इतिहास रहा हो. लेकिन नाजी महासंहार ने यहूदियों को एक सबक बहुत अच्छे से सिखाया है जो हमें उनसे सीखने की ज़रूरत है – ‘न क्षमा करो, न भूलो’. इसे आक्रामकता के रूप में पढ़ने की भूल नहीं करनी चाहिए, बल्कि इसे उसी रूप में लिया जाना चाहिए जो यह है – दुनिया में सबसे लाजवाब आत्म रक्षात्मक उपायों से लैस एक देश का क़ीमती सबक़. इसलिए हमें अपनी आंखों से झूठ और मिथ्या भ्रम के पर्दे उठाते हुए यहूदियों का आंकलन मात्र उसके आधार पर ही करना चाहिए जो उन्होंने किया है, न कि उस शातिर और फ़र्जी़ दुष्प्रचार के आधार पर जो हमें उनके खिलाफ एक योजना के तहत घुट्टी में पिलाया गया है. “

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फिलिस्तीन ने हमेँशा आंतरराष्ट्रिय स्तर


फिलिस्तीन ने हमेँशा आंतरराष्ट्रिय स्तर
पर पाकिस्तान का साथ दिया हैँ और
हमास ने ही कंधार अपहरण करने वाले
आतंकवादियोँ को ट्रेनिँग दी थी..
जबकि इजरायल ने भारत को चीन युद्ध
हो या पाकिस्तान के साथ लड़ाई या फिर
भारत मेँ किसी प्रकार का आतंकवाद
हो हमेँशा हमारे देश का सपोर्ट किया।
कारगील के युद्ध मेँ दुश्मन कंदरा मेँ छिपे थे
उनको ढ़ुंढ़कर मारना मुश्किल था, फिर
हमारी सरकार ने हवाई जहाज से
हमला करने का विचार आया लेकिन दुश्मन
कहा छिपे है इसकी हमे कोई
जानकारी नही थी, इसके लिए
अच्छी तकनिक कि जरुरत थी और इजरायल
को इस बात कि भनक लगी तो बिना मांगे
बिना शर्त भारत को कुछ हीँ घंटो मेँ लेजर
गाइड़ मिसाइल दी। यहीँ नहीँ रिसेट जैसे
जासूसी उपग्रह बनाने मेँ इजरायल ने भारत
कि मदद की, गंगा सफाई मेँ इजरायेल
द्वारा सहायता का वचन, बिहार,
गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र,
हरियाणा जैसे राज्योँ मेँ कृषी क्षेत्र मेँ
तकनिकी और प्रशिक्षण से मदद . बराक-1,
हारपुन जैसे मिसाइल भारत को दिये,
हिन्दू-यहुदी का सदियोँ पुराना संबंध हैँ,
विज्ञान के क्षेत्र मेँ 22 ऐसे उपक्रम मेँ
भारत और इजरायेल संयुक्त रुप से रिसर्च
कर रहे हैँ। ‪#‎SupportIsrael‬
गाजा के मुसलमानोँ के लिये अगर हिन्दू
बहुल देश की संसद मेँ चर्चा हो सकती है
तो काश्मीर मेँ
लाखो पंड़ितोँ को भगाया गया,
औरतोँ का बलात्कार किया गया और मंदिर
तोड़े गए आज भी काश्मीरी पंड़ित दरदर
भटकने को मज़बूर है उसपर भारत के सांसद
चूप क्योँ? पाकिस्तान और अन्य कट्टर
इस्लामिक देशोँ मेँ हिँदुओँ पर हो रहे
अत्याचारोँ पर हिन्दू बहुल देश की संसद
चूप क्योँ? पाकिस्तान और अन्य देशोँ मेँ
हिँदुओँ के साथ अत्याचार हो रहे है लेकिन
आजतक एक बार भी किसी ने भी ये बात
संसद मेँ नहीँ उठाई क्योँ?

फिलिस्तीन ने हमेँशा आंतरराष्ट्रिय स्तर
पर पाकिस्तान का साथ दिया हैँ और
हमास ने ही कंधार अपहरण करने वाले
आतंकवादियोँ को ट्रेनिँग दी थी..
जबकि इजरायल ने भारत को चीन युद्ध
हो या पाकिस्तान के साथ लड़ाई या फिर
भारत मेँ किसी प्रकार का आतंकवाद
हो हमेँशा हमारे देश का सपोर्ट किया।
कारगील के युद्ध मेँ दुश्मन कंदरा मेँ छिपे थे
उनको ढ़ुंढ़कर मारना मुश्किल था, फिर
हमारी सरकार ने हवाई जहाज से
हमला करने का विचार आया लेकिन दुश्मन
कहा छिपे है इसकी हमे कोई
जानकारी नही थी, इसके लिए
अच्छी तकनिक कि जरुरत थी और इजरायल
को इस बात कि भनक लगी तो बिना मांगे
बिना शर्त भारत को कुछ हीँ घंटो मेँ लेजर
गाइड़ मिसाइल दी। यहीँ नहीँ रिसेट जैसे
जासूसी उपग्रह बनाने मेँ इजरायल ने भारत
कि मदद की, गंगा सफाई मेँ इजरायेल
द्वारा सहायता का वचन, बिहार,
गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र,
हरियाणा जैसे राज्योँ मेँ कृषी क्षेत्र मेँ
तकनिकी और प्रशिक्षण से मदद . बराक-1,
हारपुन जैसे मिसाइल भारत को दिये,
हिन्दू-यहुदी का सदियोँ पुराना संबंध हैँ,
विज्ञान के क्षेत्र मेँ 22 ऐसे उपक्रम मेँ
भारत और इजरायेल संयुक्त रुप से रिसर्च
कर रहे हैँ। #SupportIsrael
गाजा के मुसलमानोँ के लिये अगर हिन्दू
बहुल देश की संसद मेँ चर्चा हो सकती है
तो काश्मीर मेँ
लाखो पंड़ितोँ को भगाया गया,
औरतोँ का बलात्कार किया गया और मंदिर
तोड़े गए आज भी काश्मीरी पंड़ित दरदर
भटकने को मज़बूर है उसपर भारत के सांसद
चूप क्योँ? पाकिस्तान और अन्य कट्टर
इस्लामिक देशोँ मेँ हिँदुओँ पर हो रहे
अत्याचारोँ पर हिन्दू बहुल देश की संसद
चूप क्योँ? पाकिस्तान और अन्य देशोँ मेँ
हिँदुओँ के साथ अत्याचार हो रहे है लेकिन
आजतक एक बार भी किसी ने भी ये बात
संसद मेँ नहीँ उठाई क्योँ?