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काशी (वाराणसी) के एकमात्र कल्पवृक्ष को संरक्षण की जरूरत


काशी (वाराणसी) के एकमात्र कल्पवृक्ष को संरक्षण की जरूरत

आषाढ शुक्ल पक्ष नवमी, कलियुग वर्ष ५११६

 

वाराणसी के छावनी क्षेत्र में एक ऐसा भी वृक्ष है जिसके साथ लोगों की आस्था और विश्वास जुड़ा है। अनंत फलदायी कल्पवृक्ष के रूप में पूजित वृक्ष कल्पतरु की शाखा है।

सवाल श्रद्धालुओं की भावनाओं पर ही छोड़ दें तो भी लगभग ३४ फीट की विशाल परिधि वाला यह वृक्ष पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी संरक्षण और संवर्धन के प्रयास मांगता है।

चिंता की बात यह है कि समय के थपेड़े झेलते-झेलते जर्जर हो चला पूर्वाचल में अपने वंश का यह बिरला पेड़ वजूद के संकट के दौर से गुजर रहा है। उसकी छाल ढीली पड़ चुकी है और स्थूल तनों तथा सुपुष्ट शाखाओं में कीड़े लग जाने से छिद्र भी दीखने लगे हैं।

 

बंगला नंबर २९

हरियाले छावनी क्षेत्र में वृक्ष का पता बंगला नंबर २९ है जो स्व. प्रो. बीबी सिंह बिसेन के नाम है। बताते हैं कि करीब पांच वर्ष पूर्व स्व. श्री विसेन के बंगले पर मांगलिक समारोह था जिसमें शामिल होने के लिए तत्कालीन वन संरक्षक (वाराणसी मंडल) आर हेमंत कुमार भी पहुंचे थे। उनकी नजर वृक्ष पर पड़ी तो वे ठिठक गए। सुबह फिर बंगले पर पहुंचे तो जांच में वृक्ष कल्पतरु निकला।

 

१३४ फीट वृक्ष का तना

बताते हैं कि जब आर हेमंत कुमार ने जांच की थी तो उस वक्त पेड़ के तने की मोटाई करीब ३० फीट थी लेकिन वर्तमान में उसके तने की मोटाई करीब ३४ फीट हो गई है। पेड़ की दो शाखाओं की मोटाई भी काफी अधिक है।

 

जरूरी जानकारियां

फ्रांसीसी वैज्ञानिक माइकल अडनसन ने वर्ष १७७५ में अफ्रीका में सेनेगल में सर्वप्रथम देखा था। पाया जाता है फ्रांस, इटली, दक्षिण अफ्रीका, आस्ट्रेलिया।

भारत में रांची, अल्मोड़ा, नर्मदा के तटीय क्षेत्रों और कर्नाटक आदि में। औसत आयु २५००-३००० साल। मोटा तना, टहनी लंबी, कमल के फूल में रखी किसी छोटी गेंद में निकले मरमरी रेशे वाले फूल, नारियल की तरह फल।

वृक्ष से स्वास्थ्य लाभ

आयुर्विज्ञानियों के अनुसार वृक्ष की ३ से ५ पत्तियों का सेवन करने से दैनिक पोषण की जरूरत पूरी, उम्र बढ़ाने में सहायक हैं।

स्त्रोत : नई दुनिया

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स्वामी विवेकानंद


स्वामी विवेकानंद को एक राजा ने अपने भवन में बुलाया और बोला, “तुम हिन्दू लोग मूर्ती की पूजा करते हो! मिट्टी, पीतल, पत्थर की मूर्ती का! पर मैं ये सब नही मानता। ये तो केवल एक पदार्थ है।”

उस राजा के सिंहासन के पीछे किसी आदमी की तस्वीर लगी थी। विवेकानंद जी कि नजर उस तस्वीर पर पड़ी। विवेकानंद जी ने राजा से पूछा, “राजा जी, ये तस्वीर किसकी है?”

राजा बोला, “मेरे पिताजी की।”

स्वामी जी बोले, “उस तस्वीर को अपने हाथ में लीजिये।”

राजा तस्वीर को हाथ मे ले लेता है।

स्वामी जी राजा से : “अब आप उस तस्वीर पर थूकिए!”

राजा : “ये आप क्या बोल रहे हैं स्वामी जी?”

स्वामी जी : “मैंने कहा उस तस्वीर पर थूकिए!”

राजा (क्रोध से) : “स्वामी जी, आप होश मे तो हैं ना? मैं ये काम नही कर सकता।”

स्वामी जी बोले, “क्यों? ये तस्वीर तो केवल एक कागज का टुकड़ा है, और जिस पर कूछ रंग लगा है। इसमे ना तो जान है, ना आवाज, ना तो ये सुन सकता है, और ना ही कूछ बोल सकता है। इसमें ना ही हड्डी है और ना प्राण। फिर भी आप इस पर कभी थूक नही सकते। क्योंकि आप इसमे अपने पिता का स्वरूप देखते हो। और आप इस तस्वीर का अनादर करना अपने पिता का अनादर करना ही समझते हो। वैसे ही, हम हिंदू भी उन पत्थर, मिट्टी, या धातु की पूजा भगवान का स्वरूप मान कर करते हैं। भगवान तो कण-कण मे है, पर एकआधार मानने के लिए और मन को एकाग्र करने के लिए हम मूर्ती पूजा करते हैं।”

तब राजा ने स्वामी जी के चरणों में गिर कर क्षमा माँगी।

 
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राहुल गांधी


एक बार नरेन्द्र मोदी और राहुल गांधी रेगिस्तान में रास्ता भटक गए, दोनों भूखे प्यासे थे तभी सामने एक मस्जिद दिखाई
दी।

राहुल गांधी ने मोदी जी को कहा चलो मस्जिद में चलते हैं।

मै अपना नाम अहमद बोलूँगा और तुम रहमान बोलना तो वहाँ खाना पीना मिल जायेगा !

मोदी जी ने कहा :- नहीं, मैं अपना नाम नहीं बदलूँगा।मै एक हिन्दु हुँ और सदा हिन्दु ही रहुँगा।

दोनो मस्जिद में गए, मौलवी जी ने पूछा आप लोग कौन हैं .??

मोदी :- मै नरेन्द्र भाई मोदी हूँ।

राहुल गांधी :- मैं अहमद हूँ।

मौलवी जी ने कहा:-
नरेन्द्र भाई मोदी जी को पानी दिजिए और कुछ खाने को दीजिए

और

अहमद मियाँ रमजान मुबारक हो।

(पप्पु तो हमेशा, पप्पु ही रहेगा।)

 
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kasmir


Remembering the great Syama Prasad Mookerjee, a statesman, thinker and a patriot who devoted his life towards strengthening national integration. The founder of the Bharatiya Jana Sangh, He gave a call to the country for complete integration of Jammu and Kashmir into the Indian Union, he said “Ek desh me Do Vidhan, Do Pradhan aur Do Nishan nahi chalenge” which means “Ours is one country; we cannot have Two Constitutions, Two Presidents and Two Flags!”. 
A day after birth anniversary of Dr. Syama Prasad Mookerjee , a demand to abolish the two-flag system in Jammu and Kashmir was raised in Rajya Sabha by a BJP member Tarun Vijay.
The demand came through a Special Mention from Tarun Vijay who also insisted that the one-flag system was needed to maintain the unity and integrity of the country. “I demand that the government should abolish the two-flag system in Jammu and Kashmir and there should be only one-flag system,”
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http://www.dnaindia.com/india/report-abolish-the-two-flag-system-in-jk-bjp-mp-2000291
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Remembering the great Syama Prasad Mookerjee, a statesman, thinker and a patriot who devoted his life towards strengthening national integration. The founder of the Bharatiya Jana Sangh, He gave a call to the country for complete integration of Jammu and Kashmir into the Indian Union, he said “Ek desh me Do Vidhan, Do Pradhan aur Do Nishan nahi chalenge” which means “Ours is one country; we cannot have Two Constitutions, Two Presidents and Two Flags!”. 
A day after birth anniversary of Dr. Syama Prasad Mookerjee , a demand to abolish the two-flag system in Jammu and Kashmir was raised in Rajya Sabha by a BJP member Tarun Vijay.
The demand came through a Special Mention from Tarun Vijay who also insisted that the one-flag system was needed to maintain the unity and integrity of the country. "I demand that the government should abolish the two-flag system in Jammu and Kashmir and there should be only one-flag system,"
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http://www.dnaindia.com/india/report-abolish-the-two-flag-system-in-jk-bjp-mp-2000291
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Rajiv Malhotra: The interview The Christian Post didn’t publish – The Chakra


BHARATA BHARATI

Being Different

Rajiv MalhotraRajiv Malhotra informed The Chakra that many months ago he was approached by a journalist named Myles Collier from The Christian Post, who told him that their media wanted to interview him on his book Being Different. He asked that it be done by email, so that there was an accurate record and no misunderstanding later. This was accepted by his editors, and what followed was an email exchange in which Rajiv answered every question asked via email. Below is a complete list of all the questions and his answers. Rajiv was told that the interview would appear very soon and that he would receive the url, but never heard back after the interview. His prediction at the time was that once the senior editors saw his responses, they would not want to publish it, because one of his conditions was that any alterations in what he said required…

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Mecca Is Makteshwar Brahma Abraham


Ramani's blog

I read an interesting book  Holy Vedas and Islam by  Q.S.Khan.

It states that Mecca, Makkah is Makteshwar and Abraham is Brahma.

Makkah Is Makteshwar.jpg Makkah Is Makteshwar.

To me the whole thing seems to be labored and possibly an attempt at subtle conversion attempt to woo Hindus.

Blackstone in Kaaba.

In the 10th century, an observer described it as being one cubit (slightly over 1.5 feet (0.46 m)) long. By the early 17th century, it was recorded as measuring 1.5 yards (1.4 m) by 1.33 yards (1.22 m). According to Ali Bey in the 18th century, it was 42 inches (110 cm) high, and Muhammad Ali Pasha reported it as being 2.5 feet (0.76 m) long by 1.5 feet (0.46 m) wide.[2]

The Black Stone was first described in Western literature in the 19th and early 20th centuries by European travellers in Arabia, who visitedthe Kaaba in the guise of pilgrims. Swiss traveler 

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