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Let me clarify this happened


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12 hrs · Edited ·

Let me clarify this happened in 2011 and Hindus worst reaction was protesting and burning Aus flags. Hindus don’t do an Azad Maidan because they felt hurt and thankfully did not break public property. Now obviously such images from Australia where our Gods have again been splashed on swimwear and undergarments and footwear by design hurt Hindu sentiments and this happens daily when some bastard abuses our sacred Lords in US, Europe and what not. BUT DO YOU SEE HINDUS PROTESTING WITH RIOTS AND VIOLENCE IN INDIA BECAUSE SOMEONE ABUSED THEIR GOD OUTSIDE INDIA IN US OR AUS? So what excuse do the so called minorities have rioting and rampaging here under political patronage every time some dick outside makes a film, or cartoon or there is an attack somewhere in Palestine? If these idiots feel so strongly about it they should go the the nation where something takes place and riot and protest there! Minority community must live with peace and tolerance and cannot take their position for granted and hijack the nation over every petty grievance they imagine. If they rampage and destroy my property and I take steps to defend myself and my property the state cannot accuse me as a provoker and make communal bills that make me solely responsible for communal violence in such cases violence. The rotten Sickular politicians and their patronizing of radical elements for votebanks has caused this level of rising intolerance and communal disharmony in the nation.

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विवाह


विवाह

अ) विद्या, विनय, शील, रूप, आयु, बल, कुल, शरीरादि का परिमाण यथायोग्य हो जिन युवक युवति का उनका आपस में सम्भाषण कर माता-पिता अनुमति से गृहस्थ धर्म में प्रवेश विवाह है।

ब) पूर्ण ब्रह्मचर्यव्रत धारण करके विद्या-बल को प्राप्त करना तथा सब प्रकार के शुभ गुण-कर्म-स्वभावों में जो युवक-युवती तुल्य हों जब परस्पर प्रीतियुक्त होकर, विधि अनुसार सन्तान उत्पत्ति और अपने वर्णाश्रम अनुकूल उत्तम कर्म करने के लिए स्वचयन आधारित परिवार से जो सम्बन्ध होता है उसे विवाह कहते हैं।

दम्पती

दोनों युगल दम्पती भाव के निम्न लक्षण हैं-

1. एक मन यज्ञकर्ता दो।

2. स्वस्ति प्रार्थना उपासना द्वारा परमात्मा के निकट एक साथ दौड़ते।

3. ईश्वर आश्रय में ईश्वर के गुणों के अनुरूप सब कार्य करते।

4. विद्वानों के उपदेशों को विस्तार देते या बढ़ाते।

5. शोभन मति वितरित करते।

6. शुभ कर्मों का उपार्जन करते।

7. विविध प्रकार के भोग प्राप्त करते तथा बांटते।

8. विविध सुखों से परिपूर्ण होते।

9. इन सबका सार है कि दोनों अग्निहोत्र प्रिय, धर्म-रूप-समृद्धि सम्पन्न, उदार चित्त अर्थात् दानी, रोम-रोम ज्ञान से ऊर्ध्वगमन युक्त, अवियोगी, सच्चरित्र आभूषण से दैदीप्यमान सहपरिवार पूर्ण होते हैं दम्पती।

(साभार ~ वैदिक जीवन भारती) लेखक : स्व. डॉ.त्रिलोकीनाथ जी क्षत्रिय

विवाह

अ) विद्या, विनय, शील, रूप, आयु, बल, कुल, शरीरादि का परिमाण यथायोग्य हो जिन युवक युवति का उनका आपस में सम्भाषण कर माता-पिता अनुमति से गृहस्थ धर्म में प्रवेश विवाह है।

ब) पूर्ण ब्रह्मचर्यव्रत धारण करके विद्या-बल को प्राप्त करना तथा सब प्रकार के शुभ गुण-कर्म-स्वभावों में जो युवक-युवती तुल्य हों जब परस्पर प्रीतियुक्त होकर, विधि अनुसार सन्तान उत्पत्ति और अपने वर्णाश्रम अनुकूल उत्तम कर्म करने के लिए स्वचयन आधारित परिवार से जो सम्बन्ध होता है उसे विवाह कहते हैं।

दम्पती

दोनों युगल दम्पती भाव के निम्न लक्षण हैं- 

1. एक मन यज्ञकर्ता दो। 

2. स्वस्ति प्रार्थना उपासना द्वारा परमात्मा के निकट एक साथ दौड़ते। 

3. ईश्वर आश्रय में ईश्वर के गुणों के अनुरूप सब कार्य करते। 

4. विद्वानों के उपदेशों को विस्तार देते या बढ़ाते। 

5. शोभन मति वितरित करते। 

6. शुभ कर्मों का उपार्जन करते। 

7. विविध प्रकार के भोग प्राप्त करते तथा बांटते। 

8. विविध सुखों से परिपूर्ण होते। 

9. इन सबका सार है कि दोनों अग्निहोत्र प्रिय, धर्म-रूप-समृद्धि सम्पन्न, उदार चित्त अर्थात् दानी, रोम-रोम ज्ञान से ऊर्ध्वगमन युक्त, अवियोगी, सच्चरित्र आभूषण से दैदीप्यमान सहपरिवार पूर्ण होते हैं दम्पती।

(साभार ~ वैदिक जीवन भारती)  लेखक :  स्व. डॉ.त्रिलोकीनाथ जी क्षत्रिय
 
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भारतीय इतिहास और वामपंथी षड़यंत्र…


भारतीय इतिहास और वामपंथी षड़यंत्र…

भारतीय इतिहास के साथ इस खिलवाड़ के मुख्य दोषी वे ”वामपंथी इतिहासकार” हैं, जिन्होंने स्वतंत्रता के बाद नेहरू की सहमति से प्राचीन हिन्दू गौरव को उजागिर करने वाले इतिहास को या तो काला कर दिया या धुँधला कर दिया और इस गौरव को कम करने वाले इतिहास-खंडों को प्रमुखता से प्रचारित किया, जो उनकी तथाकथित धर्मनिरपेक्षता के खाँचे में फिट बैठते थे !

यहाँ वामपंथी इहिसकार केवल दलित पिछडे नही अपितु इसमें आचार्य, ”शंकराचार्य” , ”धर्म गुरु” तक शामिल थे ! नेहरू इनको बड़ा हिस्सा देता था |कुछ अन्य तथाकथित इतिहासकार अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की उपज थे, जिन्होंने नूरुल हसन और इरफान हबीब की अगुआई में इस प्रकार इतिहास को विकृत किया !

भारतीय इतिहास कांग्रेस पर लम्बे समय तक इनका कब्जा रहा, जिसके कारण इनके द्वारा लिखा या गढ़ा गया अधूरा और भ्रामक इतिहास ही आधिकारिक तौर पर भारत की नयी पीढ़ी को पढ़ाया जाता रहा, वे देश के नौनिहालों को यह झूठा ज्ञान दिलाने में सफल रहे कि भारत का सारा इतिहास केवल पराजयों और गुलामी का इतिहास है और यह कि भारत का सबसे अच्छा समय केवल तब था जब देश पर मुगल बादशाहों का शासन था !

तथ्यों को तोड़-मरोड़कर ही नहीं नये ‘तथ्यों’ को गढ़कर भी वे यह सिद्ध करना चाहते थे कि भारत में जो भी गौरवशाली है वह ”मुगल बादशाहों” द्वारा दिया गया है और उनके विरुद्ध संघर्ष करने वाले ”महाराणा प्रताप”, ”शिवाजी” आदि पथभ्रष्ट थे ! इनकी एकांगी इतिहास दृष्टि इतनी अधिक मूर्खतापूर्ण थी कि वे आज तक ”महावीर”, ”बुद्ध”, ”अशोक”, ”चन्द्रगुप्त”, आदि शंकराचार्य आदि के काल का सही-सही निर्धारण नहीं कर सके हैं।

इसी कारण लगभग 1500 वर्षों का लम्बा कालखंड ”अंधकारपूर्ण काल” कहा जाता है, क्योंकि इस अवधि में वास्तव में क्या हुआ और देश का इतिहास क्या था, उसका कोई पुष्ट प्रमाण कम से कम सरकारी इतिहासकारों के पास उपलब्ध नहीं है !
इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि ”अलाउद्दीन खिलजी” और ”बख्तियार खिलजी” ने अपनी धर्मांधता के कारण दोनों प्रमुख पुस्तकालय जला डाले थे !

लेकिन बिडम्बना तो यह है कि भारत के इतिहास के बारे में जो अन्य देशीय संदर्भ एकत्र हो सकते थे, उनको भी एकत्र करने का ईमानदार प्रयास नहीं किया गया ! इस कारण मध्यकालीन भारत का पूरा इतिहास अभी भी उपलब्ध नहीं है !

नेहरू की ”भारत एक खोज” को देश आज भी सरकारी रूप से अपना इतिहास मानता है ! देश के बुढ़िजीवी वर्ग ने कभी इस तरफ सज्ञान नही लिया ! लगभग हर जाति का इतिहास उल्टा लिखा गया है,इस तरफ भारी मेहनत की जरूरत है |

भारतीय इतिहास और वामपंथी षड़यंत्र...

भारतीय इतिहास के साथ इस खिलवाड़ के मुख्य दोषी वे ''वामपंथी इतिहासकार'' हैं, जिन्होंने स्वतंत्रता के बाद नेहरू की सहमति से प्राचीन हिन्दू गौरव को उजागिर करने वाले इतिहास को या तो काला कर दिया या धुँधला कर दिया और इस गौरव को कम करने वाले इतिहास-खंडों को प्रमुखता से प्रचारित किया, जो उनकी तथाकथित धर्मनिरपेक्षता के खाँचे में फिट बैठते थे !

यहाँ वामपंथी इहिसकार केवल दलित पिछडे नही अपितु इसमें आचार्य, ''शंकराचार्य'' , ''धर्म गुरु'' तक शामिल थे ! नेहरू इनको बड़ा हिस्सा देता था |कुछ अन्य तथाकथित इतिहासकार अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की उपज थे, जिन्होंने नूरुल हसन और इरफान हबीब की अगुआई में इस प्रकार इतिहास को विकृत किया ! 

भारतीय इतिहास कांग्रेस पर लम्बे समय तक इनका कब्जा रहा, जिसके कारण इनके द्वारा लिखा या गढ़ा गया अधूरा और भ्रामक इतिहास ही आधिकारिक तौर पर भारत की नयी पीढ़ी को पढ़ाया जाता रहा, वे देश के नौनिहालों को यह झूठा ज्ञान दिलाने में सफल रहे कि भारत का सारा इतिहास केवल पराजयों और गुलामी का इतिहास है और यह कि भारत का सबसे अच्छा समय केवल तब था जब देश पर मुगल बादशाहों का शासन था !

तथ्यों को तोड़-मरोड़कर ही नहीं नये ‘तथ्यों’ को गढ़कर भी वे यह सिद्ध करना चाहते थे कि भारत में जो भी गौरवशाली है वह ''मुगल बादशाहों'' द्वारा दिया गया है और उनके विरुद्ध संघर्ष करने वाले ''महाराणा प्रताप'', ''शिवाजी'' आदि पथभ्रष्ट थे ! इनकी एकांगी इतिहास दृष्टि इतनी अधिक मूर्खतापूर्ण थी कि वे आज तक ''महावीर'', ''बुद्ध'', ''अशोक'', ''चन्द्रगुप्त'', आदि शंकराचार्य आदि के काल का सही-सही निर्धारण नहीं कर सके हैं।

इसी कारण लगभग 1500 वर्षों का लम्बा कालखंड ''अंधकारपूर्ण काल'' कहा जाता है, क्योंकि इस अवधि में वास्तव में क्या हुआ और देश का इतिहास क्या था, उसका कोई पुष्ट प्रमाण कम से कम सरकारी इतिहासकारों के पास उपलब्ध नहीं है !
इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि ''अलाउद्दीन खिलजी'' और ''बख्तियार खिलजी'' ने अपनी धर्मांधता के कारण दोनों प्रमुख पुस्तकालय जला डाले थे !

लेकिन बिडम्बना तो यह है कि भारत के इतिहास के बारे में जो अन्य देशीय संदर्भ एकत्र हो सकते थे, उनको भी एकत्र करने का ईमानदार प्रयास नहीं किया गया ! इस कारण मध्यकालीन भारत का पूरा इतिहास अभी भी उपलब्ध नहीं है !

नेहरू की ''भारत एक खोज'' को देश आज भी सरकारी रूप से अपना इतिहास मानता है ! देश के बुढ़िजीवी वर्ग ने कभी इस तरफ सज्ञान नही लिया ! लगभग हर जाति का इतिहास उल्टा लिखा गया है,इस तरफ भारी मेहनत की जरूरत है |
 
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झारखंड के रामगढ़ जिला में स्थित भगवान शिव


झारखंड के रामगढ़ जिला में स्थित भगवान शिव का एक ऐसा रहस्मयी शिवमंदिर है, जहा पर 24 घंटे अनवरत जलाभिषेक होता रहता है.
जब इस मंदिर की जानकारी अग्रेजों को हुई और उन्होंने यहां होने वाले चमत्कार को अपनी आंखों से देखा तो वह देखकर हैरान हो गए थे।

इस तरह घटनाक्रम अकसर होने पर लोगों में भगवान के प्रति आस्था और विश्वास स्वतः बढ़ जाता है.

मंदिर में मौजूद शिवलिंग पर स्वतः 24 घंटे जलाभिषेक होता रहता है। दिलचस्प है कि यह जलाभिषेक कोई और नहीं बल्कि खुद मां गंगा निर्मल जल से करती हैं।http://naidunia.jagran.com/spiritual/kehte-hain-mysterious-shiva-temple-in-ramgarh-62714

दरअसल शिवलिंग के ऊपर मां गंगा की एक प्रतिमा स्थापित है जहां से जल की धारा उनकी हथेलियों से होता हुआ शिवलिंग पर गिरता है। यह आज भी रहस्य बना हुआ है कि आखिर इस पानी का स्त्रोत कहां है?
TP Shukla

झारखंड के रामगढ़ जिला में स्थित भगवान शिव का एक ऐसा रहस्मयी शिवमंदिर है, जहा पर 24 घंटे अनवरत जलाभिषेक होता रहता है.
जब इस मंदिर की जानकारी अग्रेजों को हुई और उन्होंने यहां होने वाले चमत्कार को अपनी आंखों से देखा तो वह देखकर हैरान हो गए थे।

इस तरह घटनाक्रम अकसर होने पर लोगों में भगवान के प्रति आस्था और विश्वास स्वतः बढ़ जाता है.

मंदिर में मौजूद शिवलिंग पर स्वतः 24 घंटे जलाभिषेक होता रहता है। दिलचस्प है कि यह जलाभिषेक कोई और नहीं बल्कि खुद मां गंगा निर्मल जल से करती हैं।http://naidunia.jagran.com/spiritual/kehte-hain-mysterious-shiva-temple-in-ramgarh-62714

दरअसल शिवलिंग के ऊपर मां गंगा की एक प्रतिमा स्थापित है जहां से जल की धारा उनकी हथेलियों से होता हुआ शिवलिंग पर गिरता है। यह आज भी रहस्य बना हुआ है कि आखिर इस पानी का स्त्रोत कहां है?
TP Shukla