Posted in Sai conspiracy

sai


कौन है वो मुर्ख जीसने पूरे सोसियल मिडिया में ऐसे समाचार फैलाए हैं ?
क्या हिन्दुओं ने भाजप का ठेका लिया है ? मोदी को जीतने में मदद की, अब तो पिछा छोडो । अब आगे परफोर्मन्स से जीतो । भाजप ने हिन्दु के लिए क्या किया है? भाजप में ही कुछ साई के कुत्ते देखे गये हैं । ये लिखनेवाला भी भाजप का साईकुत्ता ही है । 
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साईं बाबा का विवाद जो शंकराचार्य ने खड़ा किया है वो सिर्फ और सिर्फ हिन्दुओ को तोड़ने और आपस में लड़ाने की साजिश है।
क्यों की यह शंकराचार्य सोनिया गाँधी का दलाल और दिग्विजय का गुरु है।।
साईं बाबा के सबसे ज्यादा भक्त महाराष्ट्र में है और 3 महीने बाद महाराष्ट्र में चुनाव है।

केंद्र में सरकार बनाने के समय हिन्दुओ के वोट एकतरफा पड़े तो आज केंद्र में मोदीजी की सरकार बनी।

अब सोनिया गाँधी के दलालों को चिंता यह है की कहीं महाराष्ट्र में भी एकतरफा वोटिंग ना हो जाये और यहाँ भी कांग्रेस का सूपड़ा साफ ना हो जाये इसलिए सोनिया गाँधी और उसके पालतू कुत्तो ने शंकराचार्य को आगे कर के उलटे सीधे बयान दिलवाए है।
इसी शंकराचार्य ने बाबा रामदेवजी और मोदीजी के खिलाफ बयान दिए थे चुनावो से पहले।
तो हिन्दू मित्रो इस सोनिया गाँधी और उसके दलाल शंकराचार्य के चक्कर में आ के आपस में मत लड़िये और देश के विकाश के लिए मोदीजी के साथ चलिए।।

दोस्तों याद रहे ये सब पूरी कांग्रेस की चाल है हिन्दुओ को आपस में लड़ाने की और हमे इस षड्यंत्र का नाश करना है हिन्दुओ को जागरूक करना है।

Posted in Rajiv Dixit

शिवाजी


नाम-शिवाजी 
उम्र-7 साल 
. 
हुआ ये की एक दिन छोटा शिवाजी पुणे में अपने लाल महल के सामने खेल रहे थे 
तभी किसी ने बताया की एक मुल्ला कसाई एक गौ को काटने के लिए ले जा रहा है 
एक हिन्दू किसान से छीन के,मदद कोई नहीं कर रहा है.
जैसे ही 7 साल के शिवाजी को ये बात पता चली 
वो दौड़ के अकेले ही पहुंच गए और उस कसाई का हाथ अपने छोटे से तलवार से काट डाली 
ऐसे थे महान शिवाजी महाराज 
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नाम-शिवाजी 
उम्र-7 साल 

हुआ ये की एक दिन छोटा शिवाजी पुणे में अपने लाल महल के सामने खेल रहे थे 
तभी किसी ने बताया की एक मुल्ला कसाई एक गौ को काटने के लिए ले जा रहा है 
एक हिन्दू किसान से छीन के,मदद कोई नहीं कर रहा है.
जैसे ही 7 साल के शिवाजी को ये बात पता चली 
वो दौड़ के अकेले ही पहुंच गए और उस कसाई का हाथ अपने छोटे से तलवार से काट डाली 
ऐसे थे महान शिवाजी महाराज 
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मारिया शारापोव


मारिया शारापोव ने क्या कह दिया की कौन है सचिन तेंदुलकर ? तो सारा देश गुस्सा गया…
पर ये गुस्सा करनेवालों को ये पता है की ये लड़की सीता साहू..आज अपने घर के सामने गोल गप्पे बेचती है…
इस सीता साहू ने सन २००५ के ओलंपिक मे दो ब्रोन्झ मेडल जीते थे..???
अब तक हार कर ये आरएसएस की सदस्य बन गयी है…
क्या ग़लत कहा मारिया शारापोव ने?? 
असल मे भारतीय मूर्ख और स्वार्थी हैं…बला के …

मारिया शारापोव ने क्या कह दिया की कौन है सचिन तेंदुलकर ? तो सारा देश गुस्सा गया...
पर ये गुस्सा करनेवालों को ये पता है की ये लड़की सीता साहू..आज अपने घर के सामने गोल गप्पे बेचती है...
इस सीता साहू ने सन २००५ के ओलंपिक मे दो ब्रोन्झ मेडल जीते थे..???
अब तक हार कर ये आरएसएस की सदस्य बन गयी है...
क्या ग़लत कहा मारिया शारापोव ने?? 
असल मे भारतीय मूर्ख और स्वार्थी हैं...बला के ...
Posted in Rajiv Dixit

Bollywood


FDI in Bollywood already ??
————————–
Most of us are blissfully ignorant to the fact that we’re being force fed everyday on high doses of “Sexual Objectification of Women”. Sexual objectification is the concept of treating a person merely as an object or instrument of sexual pleasure, tagging them as ‘sex objects’.

While men’s sexuality is always showcased as ‘subjective’ (or as a whole package viz. intelligence, smartness, attitude and looks), women’s sexuality is portrayed objectively. And nothing defines this better than the video below
“No Country For Women”
http://www.youtube.com/watch?v=Rt1Rhd_sRhg
—————————————
And that’s why, the question arises,
“Who is running the Bollywood ?”
And tell us one thing, 
if the mafias are putting money in bollywood, 
will it be for Making India or Breaking India ?
—————-
Famous writer Francois Gautier has explained a bit about it.

FDI in Bollywood already ??
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Most of us are blissfully ignorant to the fact that we’re being force fed everyday on high doses of “Sexual Objectification of Women”. Sexual objectification is the concept of treating a person merely as an object or instrument of sexual pleasure, tagging them as ‘sex objects’.

While men’s sexuality is always showcased as ‘subjective’ (or as a whole package viz. intelligence, smartness, attitude and looks), women’s sexuality is portrayed objectively. And nothing defines this better than the video below
“No Country For Women”
http://www.youtube.com/watch?v=Rt1Rhd_sRhg
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And that's why, the question arises,
"Who is running the Bollywood ?"
And tell us one thing, 
if the mafias are putting money in bollywood, 
will it be for Making India or Breaking India ?
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Famous writer Francois Gautier has explained a bit about it.
 
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You expect from a Russian to know & remember Indian cricket player’s name.


 
You expect from a Russian to know & remember Indian cricket player's name.
But you yourself dont know the names of our Hockey team players or the olympic medalists like this girl.

Sita Sahu (16) won 2 Bronze medals in  the 200 and 1600 meter race at 2011 Athens Special Olympic.
After her father fell ill, Seeta stopped going to school and started working full time to sustain her family.

Why in our nation, only cricketers get recognization and money ?
Why other sportsperson get ignored by their own country ?

Today, the situation is such that the cricket players get more prize money than the jawaan who sacrifices his life for nation.

Don't you think something is going wrong?
Time to Introspect.

You expect from a Russian to know & remember Indian cricket player’s name.
But you yourself dont know the names of our Hockey team players or the olympic medalists like this girl.

Sita Sahu (16) won 2 Bronze medals in the 200 and 1600 meter race at 2011 Athens Special Olympic.
After her father fell ill, Seeta stopped going to school and started working full time to sustain her family.

Why in our nation, only cricketers get recognization and money ?
Why other sportsperson get ignored by their own country ?

Today, the situation is such that the cricket players get more prize money than the jawaan who sacrifices his life for nation.

Don’t you think something is going wrong?
Time to Introspect.

Posted in हिन्दू पतन

वो तो अच्छा हुआ अमेरिका ने लादेन को मारकर


“वो तो अच्छा हुआ अमेरिका ने लादेन को मारकर
उसकी लाश को समुद्र में फेंका। अगर
गलती से भी हिन्दुस्थान में फेंक
देता तो हमारे यहाँ के सेक्युलर नेता मुस्लिम वोट-बैंक के चक्कर
में उसकी मजार बनवा देते और सेक्युलर हिन्दू रोज
उस पर अगरबत्ती जलाने और चादर चढाने जाता..!”
.
( “जागो हिन्दुओँ जागो..!” )

"वो तो अच्छा हुआ अमेरिका ने लादेन को मारकर
उसकी लाश को समुद्र में फेंका। अगर
गलती से भी हिन्दुस्थान में फेंक
देता तो हमारे यहाँ के सेक्युलर नेता मुस्लिम वोट-बैंक के चक्कर
में उसकी मजार बनवा देते और सेक्युलर हिन्दू रोज
उस पर अगरबत्ती जलाने और चादर चढाने जाता..!"
.
( "जागो हिन्दुओँ जागो..!" )
 
Posted in भारतीय मंदिर - Bharatiya Mandir

Remains of a fort at Krimchi in Udhampur District of Jammu & Kashmir.


Remains of a fort at Krimchi in Udhampur District of Jammu & Kashmir. 
Krimchi is the site of one of the oldest temple complexes of Jammu, believed to have been constructed in the 11th – 12th century AD. The architecture on these ruins suggests a very strong Greek influence.

Remains of a fort at Krimchi in Udhampur District of Jammu & Kashmir. 
Krimchi is the site of one of the oldest temple complexes of Jammu, believed to have been constructed in the 11th - 12th century AD. The architecture on these ruins suggests a very strong Greek influence.
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ईसामसी की नई फो


लो भैया आप के सामने प्रस्तुत है ईसामसी की नई फोटो ..सेक्युलर हिन्दुओ द्वारा मौलाना साईं को पूजने के साइड इफेक्ट …कठमुल्लों के बाद अब क्रिश्चिन समाज भी ईशु को राम से बड़ा बता रहा है और ईशु की भेष भूसा भी राम जी के जैसे ही बनाकर ईशु को प्रस्तुत कर रहा है 2 शाल बाद मौलाना साईं मंदिर की तरह ईशु मंदिर बनेगा और राम जी ईशु के पैरो के निचे होगे जैसा की आजकल मौलाना साईं के मंदिर में होता है …इस से शायद सेकुलरो को कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्योकी वो तो दोगला बीज की पैदाइस है ना …
लेकिन कान खोल के सुन लो सूअर के बच्चो क्रिस्चनो तुम्हारे ईशु में इतना दम नहीं है की राम के चरणों की धूल के बराबर भी हो …..ईशु के सम्मान में ईशु के ऊपर थूकता हु में अक थू

लो भैया आप के सामने प्रस्तुत है ईसामसी की नई फोटो ..सेक्युलर हिन्दुओ द्वारा मौलाना साईं को पूजने के साइड इफेक्ट ...कठमुल्लों के बाद अब क्रिश्चिन समाज भी ईशु को राम से बड़ा बता रहा है और ईशु की भेष भूसा भी राम जी के जैसे ही बनाकर ईशु को प्रस्तुत कर रहा है 2 शाल बाद मौलाना साईं मंदिर की तरह ईशु मंदिर बनेगा और राम जी ईशु के पैरो के निचे होगे जैसा की आजकल मौलाना साईं के मंदिर में होता है ...इस से शायद सेकुलरो को कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्योकी वो तो दोगला बीज की पैदाइस है ना ...
लेकिन कान खोल के सुन लो सूअर के बच्चो क्रिस्चनो तुम्हारे ईशु में इतना दम नहीं है की राम के चरणों की धूल के बराबर भी हो .....ईशु के सम्मान में ईशु के ऊपर थूकता हु में अक थू
 
Posted in राजनीति भारत की - Rajniti Bharat ki

Dr Ambedkar’s



I Support Subramanian Swamy
 with Vivek Mani Tripathi Keertivardhan and Rajat Mahajan

1 hr · 

Today is Dr Ambedkar’s jayanti. Lets see how Dr Ambedkar fought ferociously for the renesance of Sanskrit as an Official Language of India, but Nehru-Gandhi Family destroyed this pilot project of great Ambedkar’s. Only an enemy of India and Hindus would have thought of neglecting Sanskrit from Indian official language.
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Indian History books are written by the Colonial Socialists and Marxists (Communists), who propagated the Missionaries work on Indian historyand philosophy.

Bishop Robert Caldwell (1814–1891) was an Evangelist missionary and linguist, whose works are taken as holy grail by the Indian Leftists for their academic base.

Macaulayism is the conscious policy of liquidating indigenous culture through the planned substitution of the alien culture of a colonizing power(esp the Western Christian) via the education system. The term is derived from the name of British politician and Missionary Thomas Babington Macaulay (1800-1859), an individual who was instrumental in the introduction of English as the medium of instruction in the higher education of India.

Macaulay held the western culture in high esteem and saw his mission as a civilizing mission: “We must at present do our best to form a class who may be interpreters between us and the millions whom we govern; a class of persons, Indian in blood and colour, but English in taste, in opinions, in morals, and in intellect. To that class we may leave it to refine the vernacular dialects of the country, to enrich those dialects with terms of science borrowed from the Western nomenclature, and to render them by degrees fit vehicles for conveying knowledge to the great mass of the population,” Macaulay declared.

In the independent nation of India which emerged in the second half of the 20th century, Macaulay’s name has become emblematic for the ills of colonialism. Macaulay and the British education system have been blamed for producing a generation of Indians not proud of their distinct heritage.

Speaking at a national seminar on “Decolonizing English Education” in 2001, professor Kapil Kapoor, declared that one of the byproducts of mainstream English language education in India today has been its tendency to “marginalize inherited learning” and to have uprooted academics from traditional Indian modes of thought, inducing in them “a spirit of self-denigration (heenabhavna).”

Author Rajiv Malhotra has bemoaned the “continuation of the policy on Indian education started by the famous Lord Macaulay over 150 years ago” for the virtual banishment of classic Indian literature from the country’s higher academic institutions and the emergence of a “new breed” of writers professing a “uniquely Indian Eurocentrism.”
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Watch this short video : https://www.youtube.com/watch?v=lP25exSwVUQ
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sai


Hindu Parisad ッ

जानए साई को साई सचित्र से मुस्लिम होने के प्रमाण :-
ch-1 पहली लाइन, मैं बाबा के दर्शन करने मस्जिद गया,
ch-2 2nd… लास्ट पेज, बाबा हमेशा मस्जिद में रहते थे ,
Ch-23, बाबा के मुह पर सदैव अल्लाह मालिक रहता था ,
ch-22 बाबा खाने से पहले अल फातिहा जरुर पढ़ते थे ,
ch-22, बाबा रोज कुरान पढ़ते थे ,
ch-23 बाबा ने न खुद कभी उपवास किया न किसी को करने दिया ,
Ch-38 बाबा प्रसाद में मीठ मिला कर देते थे ,
ch-38, मीठ राइस उनका सबसे प्रिय भोजन था
Ch-23, बाबा ने कहा मैं तो यावनी (मुसलमान) हूँ
Ch- 28,शिरडी पहुँचने पर जब वह मस्जिद मेँ घुसा तो बाबा अत्यन्त क्रोधित हो गये और उसे उन्होने मस्जिद मेँ आने की मनाही कर दी। वे गर्जन कर कहने लगे कि इसे बाहर निकाल दो। फिर मेधा की ओर देखकर कहने लगे कि तुम तो एक उच्च कुलीन ब्राह्मण हो और मैँ निम्न जाति का यवन (मुसलमान)। तुम्हारी जाति भ्रष्ट हो जायेगी। गंगाजल का अपमान :-
Ch-32 मुझे इस झंझट से दूर ही रहने दो। मैँ तो एक फकीर(मुस्लिम, हिन्दू साधू कहे जाते हैँ फकीर नहीँ) हूँ।मुझे गंगाजल से क्या प्रायोजन? मांसाहारी साँई बाबा :-
CH- 23 मस्जिद मेँ एक बकरा बलि देने के लिए लाया गया। वह अत्यन्त दुर्बल और मरने वाला था। बाबा ने उनसे चाकू लाकर बकरा काटने को कहा।
CH- 23तब बाबा ने काकासाहेब से कहा कि मैँ स्वयं ही बलि चढ़ाने का कार्य करूँगा। CH-5 & 7 फकीरोँ के साथ वो आमिष(मांस) और मछली का सेवन करते थे।
CH-38 कभी वे मीठे चावल बनाते और कभी मांसमिश्रित चावल अर्थात् नमकीन पुलाव। CH32 एक एकादशी के दिन उन्होँने दादा कलेकर को कुछ रूपये माँस खरीद लाने को दिये। दादा पूरे कर्मकाण्डी थे और प्रायः सभी नियमोँ का जीवन मेँ पालन किया करते थे। CH-38 ऐसे ही एक अवसर पर उन्होने दादा से कहा कि देखो तो नमकीन पुलाव कैसा पका है? दादा ने योँ ही मुँहदेखी कह दिया किअच्छा है। तब बाबा कहने लगे कि तुमने न अपनी आँखोँ से ही देखा है और न ही जिह्वा से स्वाद लिया, फिर तुमने यह कैसे कह दिया कि उत्तम बना है? थोड़ा ढक्कन हटाकर तो देखो। बाबा ने दादा की बाँह पकड़ी और बलपूर्वक बर्तन मेँ डालकर बोले -”अपना कट्टरपन छोड़ो और थोड़ा चखकर देखो”।
जिन भाइयो को भरोषा नही है साई सचरित के इस लिंक पर जा कर सत्यापन करेhttp://www.shrisaibabasansthan.org/shri%20saisatcharitra/Hindi%20SaiSatcharit%20PDF/hindi.html
साईं सचित्र से सिद्ध होता है की साईं बाबा एक मुसिलम थे और मांसहारी भी थे फिर साई कि पूजा क्यों अगर पूजा ही करनी है तो सनातन देवी देवताओ कि करो जब भगवान कृष्ण ने गीता में खुद कहा है
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥२- ४७॥
तेरा कर्म करने में ही अधिकार है, उसके फलों में कभी नहीं। इसलिए तू कर्मों के फल हेतु मत हो तथा तेरी कर्म न करने में भी आसक्ति न हो
और गौस्वामी तुलसी दास जी भी लिखते है कर्म प्रधान विस्व करी रखा जो जस करई सो तस फल चाखा जब कर्म ही प्रधान है तो फिर सांसारिक वासनाओ के लिए साई कि पूजा क्यों क्या कोई बुध्धिजीवी मुझे जबाब दे सकता है …..?
‪#‎ॐशिवभक्त

 

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