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रामगढ़ शेखावाटी को बसाने वाले सेठ


श्री चतुर्भुज पोद्दार – रामगढ़ शेखावाटी को बसाने वाले सेठ
रामगढ़ सेठान को सन् 1791 में सेठ चतुर्भुज पोद्दार ने बसाया था। सेठ जी बंसल गोत्र के अग्रवाल महाजन थे। ये राजस्थान के सीकर जिले में पड़ता है । वैसे तो शहर अपने राजा के नाम से जाने जाते हैं लेकिन राजस्थान का रामगढ़ सेठान या रामगढ़ सेठोका जाना जाता है अपने सेठों की वजह है । इसके इतिहास से एक बहुत ही दिलचस्प कहानी जुड़ी हुई है । पोद्दारों के 21 परिवार राजस्थान में व्यापार करते थे । वो बहुत ही सम्पन्न व्यापारी थे । उनके आलीशान हवेलियां उसमे की गई नक्काशी उनके रुतबे को दर्शाती थीं । अब वहाँ के जागीरदारों को इनकी अमीरी देख के जलन हुई उन्होंने इनपे टैक्स बड़ा दिए और वो टैक्स इतने ज्यादा थे कि पोद्दारों ने कहा ये गलत है और इसका विरोध किया । और विरोध इतना ज्यादा बढ़ गया कि पोद्दारों ने कहा “हम चुरू छोड़ के जा रहे हैं और जहाँ भी जाएंगे वहाँ इससे भव्य और आलीशान नगर बसायेंगे ।” उसके बाद पोद्दारों ने सीकर में रामगढ़ शेखावाटी या रामगढ़ सेठान बसाया । बाद में फतेहगढ़ के अग्रवाल कुल के रुइया महाजन भी यहाँ आकर बस गए।
सीकर ठिकाने के सीनियर अफसर कैप्टन वेब जो 1934 से 38 तक सीकर ठिकाने का सीनियर अफसर रहा ,ने ‘सीकर की कहानी ‘नामक अंग्रेजी में पुस्तक में अपने प्रवास के दौरान सीकर ठिकाने के संस्मरण लिखें हैं ।उसमें कैप्टन वेब ने रामगढ़ के सेठों को सोने का अंडा देने वाली मुर्गी बताया है है ।इसी कारण राज दरबार में भी उन्हें पूरा सम्मान मिलता था तथा विशेष कुर्सी रामगढ़ के क्षेत्रों को उपलब्ध करवाई जाती थी ।
रामगढ़ सेठान उन्नीसवीं शताब्दी का भारत के सबसे अमीर नगरों था। इसकी भव्य हवेलियां , छतरियां और मंदिर भारत की प्राचीन कला और वास्तुशास्त्र का अद्भुत उदाहरण हैं । रामगढ़ सेठान की छतरियाँ भारत की सबसे बड़ी Open Air Art Gallery है । उसमें रामायण और राधा कृष्ण की कला कृतियाँ बनी हैं
रामगढ़ सेठान के बारे में कुछ दिलचस्प चीजें –
रामगढ़ सेठान भारत के सबसे अमीर नगरों में था । इसके सेठ पोद्दार और रुइया बहुत ही उदार और दयालु थे और उन्होंने बहुत सी दिलचस्प चीजें की थी .
रामगढ़ सेठान का सारा टैक्स केवल सेठ भरते थे ।
इन्होंने काफी स्कूल , कॉलेज , हॉस्पिटल और धर्मशालाएं खोली थीं ।
रामगढ़ सेठान को उस समय #छोटा_काशी कहा जाता था क्योंकि उसमें 25 संस्कृत के विद्यालय थे , उसमे आयुर्वेद और ज्योतिष के लिए विद्यालय थे और उस समय जयपुर के अलावा केवल रामगढ़ में कॉलेज था ।
सभी विद्यार्थियों को मुफ्त शिक्षा , मुफ्त खाना और सभी चीजें मिलती थीं ।
सेठों के लड़कों के विवाह में नगर के सभी लोग आमंत्रित होते थे और जो भी आता था उसे हेड़ा दिया जाता था जो कि बहुत प्रसिद्ध था । जो भी आता था उसे एक रुपये दिए जाते थे जाते समय कुछ लोग तो तो अपने साथ अपने मवेशी लाते थे उनके लिए भी ले जाते थे । एकबार एक आदमी लोटा भर के चीटे लाया और हर चीटे के लिए हेड़ा मांगा और उसे दिया भी गया ।
गौशाला में गायों के लिए 60-70 मन (2400 किलो)ग्वार रहता था जो कि जिसका प्रबन्द सेठों द्वारा किया जाता था ।
उनके लड़के की शादी के वक़्त खुली लूट रहती थी पूरे नगर में कोई भी जिसके घर मे शादी है उसकी दुकान से कुछ भी ले सकता था जिसका नुकसान जिस सेठ के लड़के की शादी है वो ही उठाता था ।
एकबार किसी गांव के एक गांववाले ने सीकर के महाराज से शिकायत की आप रामगढ़ वालों पे इतना ज्यादा ध्यान क्यों देते हैं । राजा ने उनकी परीक्षा ली कहा कि तुमलोग 1 करोड़ रुपये का प्रबन्द करो अभी । और पूरे सीकर में । लोगों ने मना कर दिया कहा ऐसा नहीं हो सकता है । फिर राजा ने अपने मंत्रियों से कहा कि रामगढ़ जाओ और सेठों को बोलो की महाराज को इस समय एक करोड़ रुपये चाहियें (इस समय के करीब अरबों में ) । मंत्री गए और सेठों को बताया । सेठों ने कहा कि राजा से पूछो की रुपये ,अन्ना ,पैसे किसमे चाहिए ? मंत्री आये और राजा को बताया । राजा ने कहा अब समझे मैं रामगढ़ सेठान का इतना ध्यान क्यों रखता हूँ ।
पोद्दारों ने वहाँ कुएं , तालाब , बावड़ी , मंदिर , छतरियाँ और आलीशान हवेलियां बनवाईं थीं वहीं रुइया ने कॉलेज , स्कूल और हॉस्पिटल इत्यादि ।
सेठ श्री अनंत राम पोद्दार जी जाड़ों में सियारों को लाडू और कंबल देते थे ताकि वो मर न जाएं ।
भक्तवारी देवी , सेठ श्री लक्ष्मी चंद पोद्दार जी की धर्म पत्नी गुप्त दान करतीं थीं । उन्होंने अपने मुनीम को बोल दिया था कि नगर में कोई भूखा नहीं रहना चाहिए न ही किसी को किसी बात की चिंता हो ।
बहुत से भारत के अमीर कॉरपोरेट्स यहीं से निकले हैं जैसे एस्सार ग्रुप के शशि रुइया और रवि रुइया .
भारत की पहली रजिस्टर्ड कंपनी सेठ श्री ताराचंद घनश्याम दस पोद्दार की थी जिसमे मशहूर उद्योगपति घनश्याम दास बिड़ला जी और स्टील किंग लक्ष्मी निवास मित्तल के पितामाह ने काम किया था ।मोहनलाल जैन

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