Posted in प्रेरणात्मक - Inspiration

तू अपनी खूबियां ढूंढ,
कमियां निकालने के लिए
लोग हैं|

अगर रखना ही है कदम तो आगे रख,
पीछे खींचने के लिए
लोग हैं|

सपने देखने ही है तो ऊंचे देख,
निचा दिखाने के लिए
लोग हैं|

अपने अंदर जुनून की चिंगारी भड़का,
जलने के लिए
लोग हैं|

अगर बनानी है तो यादें बना,
बातें बनाने के लिए
लोग हैं|

प्यार करना है तो खुद से कर,
दुश्मनी करने के लिए
लोग है|

रहना है तो बच्चा बनकर रह,
समझदार बनाने के लिए
लोग है|

भरोसा रखना है तो खुद पर रख,
शक करने के लिए
लोग हैं|

तू बस सवार ले खुद को,
आईना दिखाने के लिए
लोग हैं|

खुद की अलग पहचान बना,
भीड़ में चलने के लिए
लोग है|

तू कुछ करके दिखा दुनिया को,
तालियां बजाने के लिए
लोग हैं|..
💐💐 Good Night 💐💐

मोहनलाल जैन

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

ऑनलाइन/ऑफलाइन हिन्‍दी बाल पत्रिकाएं (Online/Ofline Hindi Kids Magazines)


ऑनलाइन/ऑफलाइन हिन्‍दी बाल पत्रिकाएं (Online/Ofline Hindi Kids Magazines)
अनुराग त्रैमासिक बाल पत्रिका (Anurag Magazine)
डी-68, निराला नगर, लखनऊ-226020, उ.प्र., ईमेल- editor.kompal@gmail.com

अपूर्व उड़ान मासिक बाल पत्रिका (Apoorv Udaan Magazine)
डी-68, निराला नगर, लखनऊ-226020, उ.प्र., ईमेल- editor.kompal@gmail.com

अभिनव बालमन मासिक बाल पत्रिका (Chakmak Magazine)
43, विष्णुपुरी कालोनी, आंश‍िक अलीगंज, लखनऊ, उ.प्र., ईमेल- apoorvudaan@gmail.com

कोंपल त्रैमासिक बाल पत्रिका (Kompal Magazine)
डी-68, निराला नगर, लखनऊ-226020, उ.प्र., ईमेल- editor.kompal@gmail.com

गुल्‍लक त्रैमासिक बाल पत्रिका (Gullak Magazine) 
सं.-गुरबचन सिंह, पुस्‍तकालय कक्ष, राज्‍य शिक्षा केन्‍द्र, बी-विंग, पुस्‍तक भवन, अरेरा हिल्‍स, भोपाल-462011, ईमेल-gurbachan_55@yahoo.co.in

चकमक मासिक बाल पत्रिका (Chakmak Magazine) 
ई-10, शंकर नगर, बीडीए कॉलोनी, शिवाजी नगर, भोपाल-462016, ईमेल- chakmak@eklavya.in 


चंदामामा मासिक बाल पत्रिका (Chandamama Magazine) 
ऑफिस बी-3, लुनिक  इंडस्‍ट्रीज, क्रास रोड ‘बी’, एम.आई.दी.सी., अँधेरी (ईस्ट), मुंबई-400093, ईमेल- chandamama@chandamama.com

चंपक मासिक बाल पत्रिका (Champak Magazine)  
दिल्‍ली प्रेस भवन, ई-3, झंडेवाला एस्‍टेट, रानी झॉंसी मार्ग, नई दिल्‍ली-110055, ई-मेल- article.hindi@delhipress.in

टिंकल मासिक बाल पत्रिका (Tinkle Magazine) 
14, मरथानडा, 84, एनी बेसेंट रोड, वर्ली, मुम्‍बई-400018, ईमेल- tinklesubscription@ack-media.com

पाठक मंच बुलेटिन मासिक बाल पत्रिका (Readers’ Club Bulletin Magazine) 
राष्‍ट्रीय बाल साहित्‍य केन्‍द्र, नेशनल बुक ट्रस्‍ट, नेहरू भवन, 5, इंस्‍टीट्यूशनल एरिया, फेस-2, वसंत कुंज, नई दिल्‍ली-110070 

देवपुत्र मासिक बाल पत्रिका (Devputra Magazine)
40, संवाद नगर, इंदौर-452001 (मध्‍य प्रदेश), ईमेल- devputraindore@gmail.com

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

आज सुबह जब पहली चाय पी रहा था तो घर वाली


आज सुबह जब पहली चाय पी रहा था तो घर वाली ने मेन गेट से आवाज़ लगाई बोले- बाहर आओ..आपके देखने लायक सीन है…मैंने कहा क्या हुआ..?? बोले आओ तो सही देखो वेगन आर में आम बिक रहे हैं…

मैं उठ कर गया तो देखा एक वेगनआर में एक बंदा पीछे की सीट और डिक्की में लगभग 10-15 कैरेट आम के रखकर लाया था..एक तराजू गाड़ी में ..उसके साथ उसका एक साथी था जो आवाज़ लगा रहा था…आम ले लो आम 100 के 2 किलो….अभी सबके चेहरे पर मास्क है तो अचानक कोई पहचान में नही आता…लेकिन उस आम विक्रेता ने मुझे पहचान लिया…

अरे कमल भैया आप यहां रहते है क्या..?? मैंने कहा हाँ… उसने थोड़ा मास्क नीचे किया तो तो मैं भी उसे पहचान गया…वो राजीव था…मैंने कहा अरे तू कबसे आम बेचने लगा…तेरा तो चश्मे का होलसेल का काम है…

बोला भैया इसी गाड़ी में चश्मे भरकर आस पास के गांवो में सप्लाई करने जाता था लेकिन लॉकडाउन की वजह से सारे गांव सील, शहर सील… अचानक हुए इस घटनाक्रम और लोकडाउन के बाद टेंशन सताने लगी कि कार की किश्त कैसे जाएगी, मकान भाड़ा कैसे दूंगा, घर का रोज़ मर्रा का खर्च कैसे चलेगा…हम तो रोज़ कमा कर रोज़ खाने वाले आदमी है…कोई बचत- सेविंग भी नही कैसे चलेगा..मैन कहा फिर..??

बोले कमल भैया सिर्फ 3 दिन घर खाली बैठा.और उसके बाद सोच लिया कि ऐसे नही चल पाएंगे…उसके बाद कृषि मंडी जाकर आम के 5 कैरेट लाया और पहले दिन 50 किलो आम बेच दिए…600/- मुनाफा हुआ…100-150 की गैस जल गई गाड़ी में…फिर भी 400-450 बच गए…फिर धीरे धीरे क्वांटिटी बढ़ाता गया…अब लगभग 10 कैरेट मतलब 100 किलो आम रोज़ बेच लेता हूँ…आम 36-37 रु किलो मंडी से मिल जाता है..50/- किलो बेचता हूँ…1200-1300 मुनाफा हो जाता है रोज़ का…

अकेला गाड़ी चलाना , फिर उतारना फिर तोल के देना , आवाज़ लगाना , दिक्कत हो रही थी तो मासी के लड़के प्रकाश को साथ ले लिया 200/- रोज़ उसको देता हूँ और लगभग 200 की गैस जल जाती है…800/- नेट बच जाते है रोज़ भैया…

वो बोलता जा रहा था मेरी आँखें फटी की फटी. इस लड़के ने मात्र 3 दिन में खुद को मानसिक रुप से मजबूत करके बिज़नेस कन्वर्शन कर लिया और 50 दिन में 40 हज़ार कमा चुका..और खुद के साथ एक बंदे को रोजगार दे दिया…और इधर मैं और मेरे जैसे देश के असंख्य मिडिल क्लास लोग बस अपने भविष्य की चिंता में घुले जा रहे है, आगे क्या होगा..लेकिन हम सिर्फ चिंता कर रहे है एक्शन नही..

ऐसे विकट काल मे भी राजीव अपनी ज़िम्मेदारियाँ अपनी कमाई से पूरी कर रहा है , कर्ज़े से नही…कोई शर्म नही की इसने की मैं चश्मे का होलसेलर हूँ मैं , गली गली आम कैसे बेचूंगा…

ये एक छोटा सा उदाहरण था..अब आप और हम भी समझ लें पक्के से..हमे तैयार रहना ही होगा एक बड़े बदलाव के लिए…

इस लॉकडाउन के बाद कई बिज़नेस बिल्कुल खतम हो जाएंगे तो कई नए जन्म लेंगे..लक्ज़री से जुड़े सारे बिज़नेस ठप्प होंगे या धीमे हो जाएंगे..रूटीन खर्च निकालना मुश्किल होगा…लेकिन बेसिक्स नीड्स और हाइजीन से जुड़े कई नए बिज़नेस डेवेलप होंगे…

मैंने कुछ दिन पहले एक आर्टिकल लिखा भी था कि ‘व्यापार मरता नही बस रूप बदलता है’…हमको भी राजीव की तरह निर्णय लेंगे और त्वरित लेने होंगे क्यों कि खर्चा कोई भी नही रुका है..लेकिन कमाई का चक्का जाम है..

जरूरी नही की सब कार लेकर आम बेचने निकल पड़े…लेकिन अब आप अपने बिजनेस को कैसे कन्वर्ट करेंगे ये आपको सोचना है..या हो सकता है जहां आप नौकरी करते थे वहां आपकी जरूरत ही नही रहे… वो संस्थान ही अपना व्यापार बदल लें तो फिर आपकी स्किल कहाँ काम आएगी..?? आप पर नौकरी जाने का खतरा आ जायेगा

आप खुद को नई परिस्थितयो के मानसिक रूप से तैयार अभी से तैयार कर लें..क्यों कि लॉकडाउन खतम होगा और परेशानियां शुरू होंगी…अभी तक सब इसलिए आराम से है क्यों कि सब रुका हुआ है….

बहुत बदलाव आएंगे जैसा पहले था वैसा अब कुछ नही रहने वाला…

जुड़े रहिये, पढ़ते रहिये..पोस्ट अच्छी लगे तो मित्रो के साथ फेसबुक व्हाट्स एप्प पर शेयर भी कीजिये. शायद किसी की ज़िंदगी मे बदलाव आ जाये…

कमल रामवानी सारांश की पोस्ट

Posted in भारतीय उत्सव - Bhartiya Utsav

शरद पूर्णिमा विशेष


शरद पूर्णिमा विशेष → ( 15th Oct, 2016 )

शरद पूर्णिमा की रात्रि का सेहत के लिए विशेष महत्त्व है। इस रात को चंद्रमा की किरणों से अमृत बरसता है। चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ पृथ्वी पर शीतलता, पोषकशक्ति एवं शांतिरूपी अमृत की वर्षा करता है। आज की रात्रि चंद्रमा पृथ्वी के बहुत नजदीक होता है और उसकी उज्जवल किरणें पेय एवं खाद्य पदार्थों में पड़ती हैं अत: उसे खाने वाला व्यक्ति वर्ष भर निरोग रहता है। उसका शरीर पुष्ट होता है। भगवान ने भी कहा है –

पुष्णमि चौषधीः सर्वाः सोमो भूत्वा रसात्मकः।।

‘रसस्वरूप अर्थात् अमृतमय चन्द्रमा होकर सम्पूर्ण औषधियों को अर्थात् वनस्पतियों को पुष्ट करता हूं।’ (गीताः15.13)

चन्द्रमा की किरणों से पुष्ट खीर पित्तशामक, शीतल, सात्त्विक होने के साथ वर्ष भर प्रसन्नता और आरोग्यता में सहायक सिद्ध होती है। इससे चित्त को शांति मिलती है और साथ ही पित्तजनित समस्त रोगों का प्रकोप भी शांत होता है ।

आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाये तो चन्द्र का मतलब है, शीतलता। बाहर कितने भी परेशान करने वाले प्रसंग आए लेकिन आपके दिल में कोई फरियाद न उठे। आप भीतर से ऐसे पुष्ट हों कि बाहर की छोटी-मोटी मुसीबतें आपको परेशान न कर सकें ।

इस रात हजार काम छोड़कर 15 मिनट चन्द्रमा को एकटक निहारना सेहत की दृष्टि से अति उत्तम है।

एक आध मिनट आंखें पटपटाना यानी झपकाना चाहिए।

कम से कम 15 मिनट चन्द्रमा की किरणों का फायदा लेना चाहिए, ज्यादा भी करें तो कोई नुकसान नहीं। इससे 32 प्रकार की पित्त संबंधी बीमारियों में लाभ होगा।

चांद के सामने छत पर या मैदान में ऐसा आसन बिछाना चाहिए जो विद्युत का कुचालक हो।

चन्द्रमा की तरफ देखते-देखते अगर मन हो तो आप लेट भी सकते हैं।

श्वासोच्छवास के साथ भगवान का नाम और शांति को भीतर भरते जाएं।

ऐसा करते-करते आप विश्रान्ति योग में चले जाए तो सबसे अच्छा होगा।

जिन्हें नेत्रज्योति बढ़ानी हो, वे शरद पूनम की रात को सुई में धागा पिरोने की कोशिश करें।

इस रात्रि को चंद्रमा अपनी समस्त 64 कलाओं के साथ होता है और धरती पर अमृत वर्षा करता है।

चंद्रोदय के वक्त गगन तले खीर या दूध रखा जाता है, जिसका सेवन रात्रि 12 बजे बाद किया जाता है। मान्यता है कि इस खीर के सेवन से अस्थमा रोगी रोगमुक्त होता है। इसके अलावा खीर देवताओं का प्रिय भोजन भी है।

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जिन्नाह महान सावरकर गद्दार: भ्रम का निवारण


देवी सिंह तोमर

जिन्नाह महान सावरकर गद्दार: भ्रम का निवारण

हमारे देश में एक विशेष जमात यह राग अलाप रही है कि जिन्नाह अंग्रेजों से लड़े थे इसलिए महान थे। जबकि वीर सावरकर गद्दार थे क्यूंकि उन्होंने अंग्रेजों से माफ़ी मांगी थी। वैसे इन लोगों को यह नहीं मालूम कि जिन्नाह इस्लाम की मान्यताओं के विरुद्ध सारे कर्म करते थे। जैसे सूअर का मांस खाना, शराब पीना, सिगार पीना आदि। वो न तो पांच वक्त के नमाजी थे। न ही हाजी थे। न ही दाढ़ी और टोपी में यकीन रखते थे। जबकि वीर सावरकर। उनका तो सारा जीवन ही राष्ट्र को समर्पित था। पहले सावरकर को जान तो लीजिये।

1. वीर सावरकर पहले क्रांतिकारी देशभक्त थे जिन्होंने 1901 में ब्रिटेन की रानी विक्टोरिया की मृत्यु पर नासिक में शोक सभा का विरोध किया और कहा कि वो हमारे शत्रु देश की रानी थी, हम शोक क्यूँ करें? क्या किसी भारतीय महापुरुष के निधन पर ब्रिटेन में शोक सभा हुई है.?

2. वीर सावरकर पहले देशभक्त थे जिन्होंने एडवर्ड सप्तम के राज्याभिषेक समारोह का उत्सव मनाने वालों को त्र्यम्बकेश्वर में बड़े बड़े पोस्टर लगाकर कहा था कि गुलामी का उत्सव मत मनाओ…

3. विदेशी वस्त्रों की पहली होली पूना में 7 अक्तूबर 1905 को वीर सावरकर ने जलाई थी…

4. वीर सावरकर पहले ऐसे क्रांतिकारी थे जिन्होंने विदेशी वस्त्रों का दहन किया, तब बाल गंगाधर तिलक ने अपने पत्र केसरी में उनको शिवाजी के समान बताकर उनकी प्रशंसा की थी जबकि इस घटना की दक्षिण अफ्रीका के अपने पत्र ‘इन्डियन ओपीनियन’ में गाँधी ने निंदा की थी…

5. सावरकर द्वारा विदेशी वस्त्र दहन की इस प्रथम घटना के 16 वर्ष बाद गाँधी उनके मार्ग पर चले और 11 जुलाई 1921 को मुंबई के परेल में विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार किया…

6. सावरकर पहले भारतीय थे जिनको 1905 में विदेशी वस्त्र दहन के कारण पुणे के फर्म्युसन कॉलेज से निकाल दिया गया और दस रूपये जुर्माना लगाया … इसके विरोध में हड़ताल हुई… स्वयं तिलक जी ने ‘केसरी’ पत्र में सावरकर के पक्ष में सम्पादकीय लिखा…

7. वीर सावरकर ऐसे पहले बैरिस्टर थे जिन्होंने 1909 में ब्रिटेन में ग्रेज-इन परीक्षा पास करने के बाद ब्रिटेन के राजा के प्रति वफादार होने की शपथ नही ली… इस कारण उन्हें बैरिस्टर होने की उपाधि का पत्र कभी नही दिया गया…

8. वीर सावरकर पहले ऐसे लेखक थे जिन्होंने अंग्रेजों द्वारा ग़दर कहे जाने वाले संघर्ष को ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ नामक ग्रन्थ लिखकर सिद्ध कर दिया…

9. सावरकर पहले ऐसे क्रांतिकारी लेखक थे जिनके लिखे ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ पुस्तक पर ब्रिटिश संसद ने प्रकाशित होने से पहले प्रतिबन्ध लगाया था…

10. ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ विदेशों में छापा गया और भारत में भगत सिंहने इसे छपवाया था जिसकी एक एक प्रति तीन-तीन सौ रूपये में बिकी थी… भारतीय क्रांतिकारियों के लिए यह पवित्र गीता थी… पुलिस छापों में देशभक्तों के घरों में यही पुस्तक मिलती थी…

11. वीर सावरकर पहले क्रान्तिकारी थे जो समुद्री जहाज में बंदी बनाकर ब्रिटेन से भारत लाते समय आठ जुलाई 1910 को समुद्र में कूद पड़े थे और तैरकर फ्रांस पहुँच गए थे…

12. सावरकर पहले क्रान्तिकारी थे जिनका मुकद्दमा अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय हेग में चला, मगर ब्रिटेन और फ्रांस की मिलीभगत के कारण उनको न्याय नही मिला और बंदीबनाकर भारत लाया गया…

13. वीर सावरकर विश्व के पहले क्रांतिकारी और भारत के पहले राष्ट्रभक्त थे जिन्हें अंग्रेजी सरकार ने दो आजन्म कारावास की सजा सुनाई थी…

14. सावरकर पहले ऐसे देशभक्त थे जो दो जन्म कारावास की सजा सुनते ही हंसकर बोले- “चलो, ईसाई सत्ता ने हिन्दू धर्म के पुनर्जन्म सिद्धांत को मान लिया.”

15. वीर सावरकर पहले राजनैतिक बंदी थे जिन्होंने काला पानी की सजा के समय 10 साल से भी अधिक समय तक आजादी के लिए कोल्हू चलाकर 30 पौंड तेल प्रतिदिन निकाला…

16. वीर सावरकर काला पानी में पहले ऐसे कैदी थे जिन्होंने काल कोठरी की दीवारों पर कंकड़ और कोयले से कवितायें लिखी और 6000 पंक्तियाँ याद रखी…

17. वीर सावरकर पहले देशभक्त लेखक थे, जिनकी लिखी हुई पुस्तकों पर आजादी के बाद कई वर्षों तक प्रतिबन्ध लगा रहा…

18. आधुनिक इतिहास के वीर सावरकर पहले विद्वान लेखक थे जिन्होंने हिन्दू को परिभाषित करते हुए लिखा कि-‘आसिन्धु सिन्धुपर्यन्ता यस्य भारत भूमिका.पितृभू: पुण्यभूश्चैव स वै हिन्दुरितीस्मृतः.’अर्थात समुद्र से हिमालय तक भारत भूमि जिसकी पितृभू है जिसके पूर्वज यहीं पैदा हुए हैं व यही पुण्य भू है, जिसके तीर्थ भारत भूमि में ही हैं, वही हिन्दू है…

19. वीर सावरकर प्रथम राष्ट्रभक्त थे जिन्हें अंग्रेजी सत्ता ने 30 वर्षों तक जेलों में रखा तथा आजादी के बाद 1948 में नेहरु सरकार ने गाँधी हत्या की आड़ में लाल किले में बंद रखा पर न्यायालय द्वारा आरोप झूठे पाए जाने के बाद ससम्मान रिहा कर दिया… देशी-विदेशी दोनों सरकारों को उनके राष्ट्रवादी विचारोंसे डर लगता था…

20. वीर सावरकर पहले क्रांतिकारी थे जब उनका 26 फरवरी 1966 को उनका स्वर्गारोहण हुआ तब भारतीय संसद में कुछ सांसदों ने शोक प्रस्ताव रखा तो यह कहकर रोक दिया गया कि वे संसद सदस्य नही थे जबकि चर्चिल की मौत पर शोक मनाया गया था…

21.वीर सावरकर पहले क्रांतिकारी राष्ट्रभक्त स्वातंत्र्य वीर थे जिनके मरणोपरांत 26 फरवरी 2003 को उसी संसद में मूर्ति लगी जिसमे कभी उनके निधनपर शोक प्रस्ताव भी रोका गया था….

22. वीर सावरकर ऐसे पहले राष्ट्रवादी विचारक थे जिनके चित्र को संसद भवन में लगाने से रोकने के लिए कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गाँधी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखा लेकिन राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम ने सुझाव पत्र नकार दिया और वीर सावरकर के चित्र अनावरण राष्ट्रपति ने अपने कर-कमलों से किया…

23. वीर सावरकर पहले ऐसे राष्ट्रभक्त हुए जिनके शिलालेख को अंडमान द्वीप की सेल्युलर जेल के कीर्ति स्तम्भ से UPA सरकार के मंत्री मणिशंकर अय्यर ने हटवा दिया था और उसकी जगह गांधी का शिलालेख लगवा दिया…वीर सावरकर ने दस साल आजादी के लिए काला पानी में कोल्हू चलाया था जबकि गाँधी ने कालापानी की उस जेल में कभी दस मिनट चरखा नही चलाया….

24. महान स्वतंत्रता सेनानी, क्रांतिकारी-देशभक्त, उच्च कोटि के साहित्य के रचनाकार, हिंदी-हिन्दू-हिन्दुस्थान के मंत्रदाता, हिंदुत्व के सूत्रधार वीर विनायक दामोदर सावरकर पहले ऐसे भव्य-दिव्य पुरुष, भारत माता के सच्चे सपूत थे, जिनसे अन्ग्रेजी सत्ता भयभीत थी, आजादी के बाद नेहरु की कांग्रेस सरकार भयभीत थी…

25. वीर सावरकर माँ भारती के पहले सपूत थे जिन्हें जीते जी और मरने के बाद भी आगे बढ़ने से रोका गया… पर आश्चर्य की बात यह है कि इन सभी विरोधियों के घोर अँधेरे को चीरकर आज वीर सावरकर के राष्ट्रवादी विचारों का सूर्य उदय हो रहा है..

।।वन्देमातरम।।

!! जय हिन्दू राष्ट्र !!

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રાષ્ટ્રીય સ્વયંસેવક સંઘ ની પ્રાર્થના


મીત્રો આજે તારીખ ૧૮-૦૫-૨૦૨૦ છે આજથી ૮૦ વર્ષ પહેલા ૧૮-૦૫-૧૯૪૦ ના દીવસે પ્રથમવાર જાહેરમાં આર એસ એસ ની આ પ્રાર્થના ગાવામા આવી હતી. આજ RSS ને કોંગ્રેસ અને રાહુલ ગાંધી ભારત વિરોધી કહે છે નીચે આપેલી પ્રાર્થના વાચી તથા ઓડીયો પણ સાંભળી તમને ખરેખર લાગે છે RSS ભારત વિરોધી છે?? કે પછી આ પ્રાર્થના ને ભારતના દરેક નાગરીક સુધી પહોચાડી RSS નુ સન્માન કરીએ નિર્ણય તમારે કરવાનો છે.

રાષ્ટ્રીય સ્વયંસેવક સંઘ ની પ્રાર્થના

લેખક : શ્રી નરહર નારાયણ ભીડે
પ્રથમવાર જાહેરમાં ગાનાર વ્યકિત
શ્રી યાદવ રાવ જોષી

વર્ષ ૧૮-૦૫-૧૯૪૦

૧) નમસ્તે સદા વત્સલે માતૃભૂમે,
ત્વયા હિન્દભૂમે સુખં વર્ધિતોઽહમ્!
મહામંગલે પુણ્યભૂમે ત્વદર્થે,
પતત્વેષ કાયો નમસ્તે નમસ્તે!

અર્થ: હે પ્રેમ કરવાવાળી માતૃભૂમિ! હુ તને સદાય નમસ્કાર કરુ છુ તે મારુ સુખથી પાલન પોષણ કર્યુ છે.
હે મહામંગળમયી પુણ્યભૂમિ! તારા જ કાર્યમા મારુ આ શરીર અર્પણ થાય. હુ તને વારંવાર નમસ્કાર કરુ છુ.

૨)પ્રભો શકિતમન્ હિન્દુરાષ્ટ્રાંગભૂતા,
ઇમે સાદરં ત્વાં નમામો વયમ્!
ત્વદીયાય કાર્યાય બધ્ધા કટીયમ્,
શુભામાશિષં દેહિ તત્પૂર્તયે!

અર્થ: હે સર્વશકિતશાળી પરમેશ્વર! અમે હિન્દુરાષ્ટ્ર ના અંગભુત તમને આદરસહિત પ્રણામ કરીએ છીએ. તમારા જ કાર્ય માટે અમે અમારી કમર કસી છે. તેને પુર્ણ કરવા માટે અમને તમારા શુભ આશિર્વાદ આપો.

૩)અજય્યાં ચ વિશ્વસ્ય દેહીશ શકિતમ્
સુશીલં જગદ્ યેન નમ્રં ભવેત્!!
શ્રુતં ચૈવ યત્ કંટકાકીર્ણમાર્ગમ્
સ્વયં સ્વીકૃતં નઃ સુગંકાર્યેત્!!

અર્થ: હે પ્રભુ! અમને એવી શકિત આપો, જેનાથી વિશ્વમાં ક્યારેય કોઇ ચુનોતી ન આપી શકે, એવુ શુધ્ધ ચારીત્ર્ય આપો જેની સમક્ષ સંપુર્ણ વિશ્વ નતમસ્તક થઈ જાય,એવુ જ્ઞાન આપો કે પોતાના દ્વારા સ્વીકારેલ આ કાંટાળો માર્ગ સરળ થઈ જાય.

૪)સમુત્કર્ષ નિઃશ્રેયસસ્યૈકમુગ્રમ્
પરં સાધનં નામ વીરવ્રતમ્!!
તદન્તઃ સ્ફુરત્વક્ષયા ધ્યેયનિષ્ઠા
હૃદન્તઃ પ્રજાગર્તુ તીવ્રાઽનિશમ્!!

અર્થ: તીવ્ર વીરવ્રતી ની ભાવના અમારામાં ઉત્પન્ન થતી રહે જે ઉચ્ચતમ આધ્યાત્મિક સુખ તથા મહાનતમ સમૃધ્ધી પ્રાપ્ત કરવાનુ એકમાત્ર શ્રેષ્ઠતમ સાધન છે. તીવ્ર તથા અખંડ ધ્યેયનિષ્ઠા અમારા અંતઃકરણ મા સદાય જાગતી રહે.

૫)વિજેત્રી ચ નઃ સંહતા કાર્યશકિતર્
વિધાયાસ્ય ધર્મસ્ય સંરક્ષણમ્!!
પરં વૈભવં નેતુમેતત્ સ્વરાષ્ટ્રમ્
સમર્થા ભવત્વાશિષા તે ભૃશમ્!!

તમારી કૃપાથી અમારી આ વિજયશાલીની સંગઠીત કાર્યશકિત અમારા ધર્મનુ સંરક્ષણ કરી આ રાષ્ટ્ર ને વૈભવના ઉચ્ચતમ શિખર પર પહોચાડવામા સમર્થ થાય.

!! ભારત માતા કી જય !!