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हृदय में भगवान्


. “हृदय में भगवान्” यह घटना जयपुर के एक वरिष्ठ डॉक्टर की आपबीती है, जिसने उनका जीवन बदल दिया। वह हृदय रोग विशेषज्ञ हैं। उनके अनुसार:- एक दिन मेरे पास एक दंपत्ति अपनी छः साल की बच्ची को लेकर आए। निरीक्षण के बाद पता चला कि उसके हृदय में रक्त संचार बहुत कम हो चुका है। मैंने अपने साथी डाक्टर से विचार करने के बाद उस दंपत्ति से कहा - 30% संभावना है बचने की ! दिल को खोलकर ओपन हार्ट सर्जरी के बाद, नहीं तो बच्ची के पास सिर्फ तीन महीने का समय है ! माता पिता भावुक हो कर बोले, "डाक्टर साहब ! इकलौती बिटिया है। ऑपरेशन के अलावा और कोई चारा ही नहीं है, आप ऑपरेशन की तैयारी कीजिये।" सर्जरी के पांच दिन पहले बच्ची को भर्ती कर लिया गया। बच्ची मुझ से बहुत घुलमिल चुकी थी, बहुत प्यारी बातें करती थी। उसकी माँ को प्रार्थना में अटूट विश्वास था। वह सुबह शाम बच्ची को यही कहती, बेटी घबराना नहीं। भगवान बच्चों के हृदय में रहते हैं। वह तुम्हें कुछ नहीं होने देंगे। सर्जरी के दिन मैंने उस बच्ची से कहा, "बेटी ! चिन्ता न करना, ऑपरेशन के बाद आप बिल्कुल ठीक हो जाओगे।" बच्ची ने कहा, "डाक्टर अंकल मैं बिलकुल नहीं डर रही क्योंकि मेरे हृदय में भगवान रहते हैं, पर आप जब मेरा हार्ट ओपन करोगे तो देखकर बताना भगवान कैसे दिखते हैं ?" मै उसकी बात पर मुस्कुरा उठा। ऑपरेशन के दौरान पता चल गया कि कुछ नहीं हो सकता, बच्ची को बचाना असंभव है, दिल में खून का एक कतरा भी नहीं आ रहा था। निराश होकर मैंने अपनी साथी डाक्टर से वापिस दिल को स्टिच करने का आदेश दिया। तभी मुझे बच्ची की आखिरी बात याद आई और मैं अपने रक्त भरे हाथों को जोड़ कर प्रार्थना करने लगा, "हे ईश्वर ! मेरा सारा अनुभव तो इस बच्ची को बचाने में असमर्थ है, पर यदि आप इसके हृदय में विराजमान हो तो आप ही कुछ कीजिए।" मेरी आँखों से आँसू टपक पड़े। यह मेरी पहली अश्रु पूर्ण प्रार्थना थी। इसी बीच मेरे जूनियर डॉक्टर ने मुझे कोहनी मारी। मैं चमत्कार में विश्वास नहीं करता था पर मैं स्तब्ध हो गया यह देखकर कि दिल में रक्त संचार पुनः शुरू हो गया। मेरे 60 साल के जीवन काल में ऐसा पहली बार हुआ था। आपरेशन सफल तो हो गया पर मेरा जीवन बदल गया। होश में आने पर मैंने बच्ची से कहा, "बेटा ! हृदय में भगवान दिखे तो नहीं पर यह अनुभव हो गया कि वे हृदय में मौजूद हर पल रहते हैं। इस घटना के बाद मैंने अपने आपरेशन थियेटर में प्रार्थना का नियम निभाना शुरू किया। मैं यह अनुरोध करता हूँ कि सभी को अपने बच्चों में प्रार्थना का संस्कार डालना ही चाहिए। ----------:::×:::---------- "जय जय श्री राधे"


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जब रावण ने देखा कि हमारी पराजय निश्चित है तो उसने १००० अमर राक्षसों को बुलाकररणभूमि में भेजने का आदेश दिया


देवी सिंह तोमर

जब रावण ने देखा कि हमारी पराजय निश्चित है तो उसने १००० अमर राक्षसों को बुलाकर
रणभूमि में भेजने का आदेश दिया***

ये ऐसे थे जिनको काल भी नहीं खा सका था***

विभीषण के गुप्तचरों से समाचार मिलने पर श्रीराम को चिंता हुई कि हम लोग इनसे कब तक
लड़ेंगे ?***

सीता का उद्धार और विभीषण का राज तिलक कैसे होगा?क्योंकि युद्ध कि समाप्ति असंभव है***

श्रीराम कि इस स्थिति से वानरवाहिनी के साथ कपिराज सुग्रीव भी विचलित हो गए कि अब क्या होगा ?***

हम अनंत कल तक युद्ध तो कर सकते हैं पर विजयश्री का वरण नहीं !पूर्वोक्त दोनों कार्य असंभव हैं !***

अंजनानंदन हनुमान जी आकर वानर वाहिनी के साथ श्रीराम को चिंतित देखकर बोले –प्रभो !***

क्या बात है ? श्रीराम के संकेत से विभीषण जी ने सारी बात बतलाई !अब विजय असंभव है !***

पवन पुत्र ने कहा –असम्भव को संभव और संभव को असम्भव कर देने का नाम ही तो हनुमान है !प्रभो! आप केवल मुझे आज्ञा दीजिए मैं अकेले ही जाकर रावण की अमर सेना को नष्ट कर दूँगा !कैसे हनुमान ? वे तो अमर हैं !***

प्रभो ! इसकी चिंता आप न करें सेवक पर विश्वास करें !उधर रावण ने चलते समय राक्षसों से कहा था कि वहां हनुमान नाम का एक वानर है उससे जरा सावधान रहना***

एकाकी हनुमानजी को रणभूमि में देखकर राक्षसों ने पूछा तुम कौन हो क्या हम लोगों को देखकर भय नहीं लगता जो अकेले रणभूमि में चले आये !***

मारुति –क्यों आते समय राक्षस राज रावण ने तुम लोगों को कुछ संकेत नहीं किया था जो मेरे समक्ष निर्भय खड़े हो ***

निशाचरों को समझते देर न लगी कि ये महाबली हनुमान हैं ! तो भी क्या ? हम अमर हैं हमारा ये क्या बिगाड़ लेंगे !***

भयंकर युद्ध आरम्भ हुआ पवनपुत्र कि मार से राक्षस रणभूमि में ढेर होने लगे चौथाई सेना बची थी कि पीछे से आवाज आई हनुमान हम लोग अमर हैं हमें जीतना असंभव है***

अतः अपने स्वामी के साथ लंका से लौट जावो इसी में तुम सबका कल्याण है !***

आंजनेय ने कहा लौटूंगा अवश्य पर तुम्हारे कहने से नहीं !अपितु अपनी इच्छा से !हाँ तुम सब मिलकर आक्रमण करो फिर मेरा बल देखो और रावण को जाकर बताना***

राक्षसों ने जैसे ही एक साथ मिलकर हनुमानजी पर आक्रमण करना चाहां वैसे ही पवनपुत्र ने उन सबको अपनी पूंछ में लपेटकर ऊपर आकाश में फेंक दिया !***

वे सब पृथ्वी कि गुरुत्वाकर्षण शक्ति जहाँ तक है वहां से भी ऊपर चले गए ! चले ही जा रहे हैं
चले मग जात सूखि गए गात
गोस्वामी तुलसीदास !
उनका शरीर सूख गया अमर होने के कारण मर सकते नहीं !***

अतः रावण को गाली देते हुए और कष्ट के कारण अपनी अमरता को कोसते हुए अभी भी जा रहे हैं !***

इधर हनुमान जी ने आकर प्रभु के चरणों में शीश झुकाया !श्रीराम बोले –क्या हुआ हनुमान ! प्रभो ! उन्हें ऊपर भेजकर आ रहा हूँ***

राघव –पर वे अमर थे हनुमान!हाँ स्वामी इसलिए उन्हें जीवित ही ऊपर भेज आया हूँ अब वे कभी भी नीचे नहीं आ सकते ?***

रावण को अब आप शीघ्रातिशीघ्र ऊपर भेजने की कृपा करें जिससे माता जानकी का आपसे मिलन और महाराज विभीषण का राजसिंहासन हो सके !***

पवनपुत्र को प्रभु ने उठाकर गले लगा लिया ! वे धन्य हो गए अविरल भक्ति का वर पाकर ! श्रीराम उनके ऋणी बन गए !और बोले –
हनुमानजी—आपने जो उपकार किया है वह मेरे अंग अंग में ही जीर्ण शीर्ण हो जाय मैं उसका बदला न चुका सकूँ ,क्योकि उपकार का बदला विपत्तिकाल में ही चुकाया जाता है***

पुत्र ! तुम पर कभी कोई विपत्ति न आये !निहाल हो गए आंजनेय !
हनुमानजी की वीरता के समान साक्षात काल देवराज इन्द्र महाराज कुबेर तथा भगवान विष्णु की भी वीरता नहीं सुनी गयी –ऐसा कथन श्रीराम का है –
न कालस्य न शक्रस्य न विष्णर्वित्तपस्य च !
कर्माणि तानि श्रूयन्ते यानि युद्धे हनूमतः ***

🙏🙏जय श्री राम जी की 🙏🙏
🙏जय श्री वीर हनुमान जी की 🙏

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निराशा से आशा की और कदम


निराशा से आशा की और कदम
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जीवन की निराशा को आशा मै बदलता एक आशावादी ग्रुप
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खुशीयां ही नही कुछ तकलीफ
भी जरूरी हैं जीवन मै

हंस जैन। 98272 14427

दोस्तों,हर इंसान चाहता हैं की उसके जीवन मै सर्व सुख हो । हर समय उसके जीवन मै खुशिया आती रहे ।लेकिन प्रकृति ने उसको ख़ुशी के साथ थोड़े आंसू, थोड़े गम, थोड़ी परेशानी,आदि इसलिए दी हैं की वो जिंदगी मै अपने आप से लड़ना भी सीखे । जब आप जीवन भर खुश रहोगे तो आप एक दिन ख़ुशी की परिभाषा भी भूल जाओगे । जब किसी तकलीफ, गम,परेशानी के बाद अचानक ख़ुशी मिलती हैं तो उसका आनन्द अलग होता हैं । जैसे हम रोज

पानी को बहाते हैं, लेकिन यदि हम मरुस्थल मै भटक जाए , पानी खत्म हो जाए , तलाश पर भी पानी नही मिले, अचानक एक गड्ढे मै थोड़ा सा भी पानी मिल जाए जो ख़ुशी मिलेगी वही सत्य होगी ।हम जब भगवान को दोष देते हैं की हे भगवान आपने सबको सब दिया बस मुझे ही वंचित किया, ये गलत हैं।

आपको भगवान सबसे कठिन परीक्षा का एक हिस्सा बना रहा हैं। आपको
मजबूत कर रहा हैं । वो आपको सबसे
ज्यादा प्यार करता हैं, इसलिए ठोस बना रहा हैं । कंही सफलता आपके मस्तिष्क को अंहकार मै ना बदल दे इसलिए वो आपको हर कार्य मै पहले असफल कर देता हैं, उलझन पैदा करता हैं, कठिनाई देता हैं ।उसके बाद वो सब देता हैं जो आपकी चाह थी ।

एक छोटी सी कहानी सी प्रकृति की इस लीला को समझते हैं ।

मैंने एक बहुत पुरानी कहानी सुनी है… यह यकीनन बहुत पुरानी होगी क्योंकि उन दिनों ईश्वर पृथ्वी पर रहता था. धीरे-धीरे वह मनुष्यों से उकता गया क्योंकि वे उसे बहुत सताते थे. कोई आधी रात को द्वार खटखटाता और कहता, “तुमने मेरे साथ ऐसा क्यों किया? मैंने जो चाहा था वह पूरा क्यों नहीं हुआ?” सभी ईश्वर को बताते थे कि उसे क्या करना चाहिए… हर व्यक्ति प्रार्थना कर रहा था और उनकी प्रार्थनाएं विरोधाभासी थीं. कोई आकर कहता, “आज धूप निकलनी चाहिए क्योंकि मुझे कपड़े धोने हैं.” कोई और कहता, “आज बारिश होनी चाहिए क्योंकि मुझे पौधे रोपने हैं”. अब ईश्वर क्या करे? यह सब उसे बहुत उलझा रहा था. वह पृथ्वी से चला जाना चाहता था. उसके अपने अस्तित्व के लिए यह ज़रूरी हो गया था. वह अदृश्य हो जाना चाहता था.

एक दिन एक बूढ़ा किसान ईश्वर के पास आया और बोला, “देखिए, आप भगवान होंगे और आपने ही यह दुनिया भी बनाई होगी लेकिन मैं आपको यह बताना चाहता हूं कि आप सब कुछ नहीं जानते: आप किसान नहीं हो और आपको खेतीबाड़ी का क-ख-ग भी नहीं पता. और मेरे पूरे जीवन के अनुभव का निचोड़ यह कहता है कि आपकी रची प्रकृति और इसके काम करने का तरीका बहुत खराब है. आपको अभी सीखने की ज़रूरत है.”

ईश्वर ने कहा, “मुझे क्या करना चाहिए?”

किसान ने कहा, “आप मुझे एक साल का समय दो और सब चीजें मेरे मुताबिक होने दो, और देखो कि मैं क्या करता हूं. मैं दुनिया से गरीबी का नामोनिशान मिटा दूंगा!”

ईश्वर ने किसान को एक साल की अवधि दे दी. अब सब कुछ किसान की इच्छा के अनुसार हो रहा था. यह स्वाभाविक है कि किसान ने उन्हीं चीजों की कामना की जो उसके लिए ही उपयुक्त होतीं. उसने तूफान, तेज हवाओं और फसल को नुकसान पहुंचानेवाले हर खतरे को रोक दिया. सब उसकी इच्छा के अनुसार बहुत आरामदायक और शांत वातावरण में घटित हो रहा था और किसान बहुत खुश था. गेहूं की बालियां पहले कभी इतनी ऊंची नहीं हुईं! कहीं किसी अप्रिय के होने का खटका नहीं था. उसने जैसा चाहा, वैसा ही हुआ. उसे जब धूप की ज़रूरत हुई तो सूरज चमका दिया; तब बारिश की ज़रूरत हुई तो बादल उतने ही बरसाए जितने फसल को भाए. पुराने जमाने में तो बारिश कभी-कभी हद से ज्यादा हो जाती थी और नदियां उफनने लगतीं थीं, फसलें बरबाद हो जातीं थीं. कभी पर्याप्त बारिश नहीं होती तो धरती सूखी रह जाती और फसल झुलस जाती… इसी तरह कभी कुछ कभी कुछ लगा रहता. ऐसा बहुत कम ही होता जब सब कुछ ठीक-ठाक बीतता. इस साल सब कुछ सौ-फीसदी सही रहा.

गेहूं की ऊंची बालियां देखकर किसान का मन हिलोरें ले रहा था. वह ईश्वर से जब कभी मिलता तो यही कहता, “आप देखना, इस साल इतनी पैदावार होगी कि लोग दस साल तक आराम से बैठकर खाएंगे.”

लेकिन जब फसल काटी गई तो पता चला कि बालियों के अंदर गेहूं के दाने तो थे ही नहीं! किसान हैरान-परेशान था… उसे समझ नहीं आ रहा था कि ऐसा क्यों हुआ. उसने ईश्वर से पूछा, “ऐसा क्यों हुआ? क्या गलत हो गया?”

ईश्वर ने कहा, “ऐसा इसलिए हुआ कि कहीं भी कोई चुनौती नहीं थी, कोई कठिनाई नहीं थी, कहीं भी कोई उलझन, दुविधा, संकट नहीं था और सब कुछ आदर्श था. तुमने हर अवांछित तत्व को हटा दिया और गेंहू के पौधे नपुंसक हो गए. कहीं कोई संघर्ष का होना ज़रूरी था. कुछ झंझावात की ज़रूरत थी, कुछ बिजलियां का गरजना ज़रूरी था. ये चीजें गेंहू की आत्मा को हिलोर देती हैं.”

यह बहुत गहरी और अनूठी कथा है. यदि तुम हमेशा खुश और अधिक खुश बने रहोगे तो खुशी अपना अर्थ धीरे-धीरे खो देगी. तुम इसकी अधिकता से ऊब जाओगे. तुम्हें खुशी इसलिए अधिक रास आती है क्योंकि जीवन में दुःख और कड़वाहट भी आती-जाती रहती है. तुम हमेशा ही मीठा-मीठा नहीं खाते रह सकते – कभी-कभी जीवन में नमकीन को भी चखना पड़ता है. यह बहुत ज़रूरी है. इसके न होने पर जीवन का पूरा स्वाद खो जाता है.

दोस्तों, कोशिश करो की असफलता हेतु हम किसी और को, भगवान को दोष नही दे , वरना कोशिश करे की ये सोचे की अभी हम कच्चे घड़े हैं । ईश्वर चाहता हैं की अभी हम और मजबूत बने । अभी हमारे प्रयासों मे कुछ कमी हैं । फिर जब सफलता मिलेगी आपको उस ख़ुशी से आपका जीवन प्रसन्न हो जायगा, क्योकि उसमे आपकी मेहनत के साथ ईश्वर का साथ और आशीर्वाद दोनों ही रहेगा।

आपके सुझाव, सलाह और विचारो का स्वागत हैं । अच्छा लगता हैं जब आप मुझे पर्सनल नम्बर पर लेख हेतु appreciate करते हो ।कल किसी और विषय पर चर्चा होगी । आपका दिन शुभ और मंगलमय हो ।

हंस जैन। 98272 14427

निराशा से आशा की और एक कदम
ग्रुप की सादर प्रस्तुति

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एक लाख पुस्तको की लाइब्रेरी


એક ગરીબ પૂજારીએ એક લાખ પુસ્તકોની લાઈબ્રેરી બનાવી!

માણસ ધારે તો ઘણું કરી શકે એનો પુરાવો કર્ણાટકના ગોકર્ણા ગામના ગણપતિ દેવેશ્વરે આપ્યો છે

સુખનો પાસવર્ડ

આશુ પટેલ

કર્ણાટકના નાનકડા ગોકર્ણા ગામના એક પૂજારીના અનોખા જીવન વિશે જાણવા જેવું છે. એ કોઈ સામાન્ય પૂજારી નથી. તેઓ ઈશ્વરની આરાધના તો કરે જ છે, પણ સાથે સાહિત્યના પણ ઉપાસક છે. તેમનું નામ છે ગણપતિ વેદેશ્વર. તેમણે 9 વર્ષની ઉંમરે સરસ્વતીની સાધના શરૂ કરી હતી એ પછી 85 વર્ષમાં તેમણે એક લાખથી વધુ પુસ્તકોનો ખજાનો એકઠો કર્યો.

આ અનોખા માનવી ગણપતિ વેદેશ્વરને પુસ્તકો પ્રત્યે બાળપણથી જ લગાવ થઈ ગયો હતો. એને કારણે તેમણે નવ વર્ષની ઉંમરે જ તેમના ગામમાં બાળસંઘ નામથી લાઈબ્રેરી શરૂ કરી હતી. તેમને વાપરવા માટે વડીલો તરફથી જે પૈસા મળતા એ તેઓ એ પુસ્તકાલય માટે બચાવતા. તેઓ આખું વર્ષ પૈસા બચાવીને પુસ્તકમેળાઓમાંથી પુસ્તકો ખરીદતા. પછી તેમણે તેમના પુસ્તકાલયનો વ્યાપ વધાર્યો. તેઓ તેમના નાનકડા પુસ્તકાલયમાં પુસ્તકોનો વધારો કરતા ગયા. તેઓ તેમના મિત્રોને પુસ્તકો ફેંકી દેવાને બદલે પોતાને આપવા કહેતા જેથી બીજા લોકો તે વાંચી શકે.

ગણપતિ વેદેશ્વરને પુસ્તકાલય સમૃદ્ધ બનાવવાની એવી લગની લાગી હતી કે તેઓ તેમના ગામના શિક્ષકોની મદદ માગવા માંડ્યા. એટલેથી જ તેઓ અટકી ન ગયા. તેમના પુસ્તકાલયમાં પુસ્તકોની સંખ્યા વધારવા માટે તેઓ નામાંકિત બૌદ્ધિકોને, જુદાં જુદાં ક્ષેત્રોની જાણીતી વ્યક્તિઓને તેમ જ દેશવિદેશના પુસ્તક પ્રકાશકોને પત્રો લખીને પુસ્તકો મોકલવા માટે વિનંતી કરતા. તેમણે બ્રિટનનાં વડાં પ્રધાન માર્ગારેટ થેચર અને આપણા રાષ્ટ્રપતિ રાજેન્દ્ર પ્રસાદ સહિત ઘણા દેશોના વડાઓને પણ પુસ્તકોની મદદ માગતા પત્રો લખવા માંડ્યા.

સ્વાભાવિક રીતે બધા લોકો તરફથી તેમને સાનુકૂળ પ્રતિભાવ ન મળતો, પણ ઘણા નામાંકિત માણસો તરફથી તેમને પુસ્તકો મળવા લાગ્યાં. કેટલાક જાણીતા માણસો પુસ્તકો તો મોકલતા, પણ સાથે તેમની પ્રવૃત્તિને પ્રોત્સાહન આપતા પત્રો પણ મોકલતા. એવો જ એક પત્ર તેમને લંડનની રોયલ એકડમી ઓફ આર્ટસના સભ્ય અને જાણીતા કલા વિવેચક હાર્બટ હીડ તરફથી મળ્યો હતો. તેમણે વેદેશ્વરની પ્રવૃત્તિની સરાહના કરતા પત્રની સાથે તેમને લંડનનાં વિવિધ કલા કેન્દ્રોનાં પુસ્તકો પણ મોકલ્યાં હતાં.

2016માં ફ્રેંચ આર્કિટેક્ટ ફ્રૅન્કોઇસ રોશેને ગણપતિ વેદેશ્વરનાં પુસ્તકાલય વિશે જાણીને બહુ રસ પડ્યો અને તેમણે વેદેશ્વરનાં ગામમાં જઈને તેમના પુસ્તકાલયમાં પ્રદાન કર્યું. તેમણે તેમની સહાયક સાથે મળીને પુસ્તકાલય ઉપર એક ડોક્યુમેન્ટરી ફિલ્મ પણ બનાવી.

ગોકર્ણા ગામનું આ પુસ્તકાલય દેશ-વિદેશમાં ખ્યાતિ પામ્યું છે, પણ ગોકર્ણા ગામના રહેવાસીઓને વેદેશ્વરના પુસ્તકાલયની કદર નથી. વેદેશ્વરના પુસ્તકાલયને મદદ કરવામાં કોઈ ગામવાસીને રસ પડતો નથી. ગણપતિ વેદેશ્વર ગોકર્ણા ગામમાં પાંચ હજાર ફૂટનાં મકાનમાં તેમનું પુસ્તકાલય ચલાવે છે. તેમણે એનું નામ સ્ટડી સર્કલ લાઇબ્રેરી’ રાખ્યું છે. સાડા આઠ દાયકાથી ચાલતા તેમના આ પુસ્તકાલયમાં અંગ્રેજી, ફ્રેન્ચ, જર્મન, ઉર્દૂ તેમ જ કન્નડ સહિતની ૪૦ ભાષાના વિવિધ વિષયોનાં પુસ્તકો છે. તેમના પુસ્તકાલયમાં ગુજરાતી પુસ્તકો પણ છે. એક લાખથી વધુ પુસ્તકો ધરાવતા પુસ્તકાલયમાં વેદ, ઉપનિષદ, સમાજવિદ્યા અને કવિતા સહિત અનેક વિષયોનાં પુસ્તકોનો સમાવેશ થાય છે. તેમના પુસ્તકાલયમાં ૨૦૦થી ૬૦૦ વર્ષ જૂની ઘણી દુર્લભ હસ્તપ્રતો પણ છે.

વેદેશ્વર તેમના પુત્ર, પુત્રવધૂ અને ચાર વર્ષની પૌત્રી સાથે ખૂબ સાદગીભર્યુ જીવન જીવે છે. તેમનો પુત્ર આર્યમ પિતાનો વારસો સંભાળવા માટે તૈયાર થઈ ગયો છે. તે કહે છે કે અમારા વિસ્તારના ઘણા લોકો અમને ગાંડા ગણે છે, પણ મારા પિતા પાસેથી હું એટલું શીખ્યો છું કે લોકોની ટીકાટિપ્પણીઓની પરવા કર્યા વિના આપણે આપણું કામ કરતા રહેવું જોઈએ.

ગણપતિ વેદેશ્વરના પુસ્તકાલયમાં કોઈ પણ વ્યક્તિ જઈ શકે છે. જો કે તેમના પુસ્તકાલયનો ઉપયોગ તેમના ગામના લોકોને બદલે દેશના વિવિધ વિસ્તારોના લોકો કરે છે. વિદ્યાર્થીઓથી માંડીને સંશોધકો અને ઈતિહાસકારો દેશના દૂરદૂરના વિસ્તારોમાંથી ગોકર્ણા ગામમાં ગણપતિ વેદેશ્વરના પુસ્તકાલયની મુલાકાત લે છે. તેમની આંખોમાં અનોખા આદમી માટે અહોભાવ અને આદરની લાગણી છલકતી હોય છે.

ગણપતિ વેદેશ્વર તેમના પુસ્તકાલયના ઘણાં દુર્લભ પુસ્તકો અને હસ્તપ્રતો વેચી નાખે તો કરોડપતિ થઈ શકે, પણ સરસ્વતીના આ સાધકને લક્ષ્મીમાં રસ નથી. કેટલાક લોકો તેમને કહે છે કે તેમની પાસે કરોડો રૂપિયાનો ખજાનો છે, પરંતુ વેદેશ્વર કહે છે: મેં ક્યારેય એવી ગણતરી કરી નથી કે મારા પુસ્તકાલયના પુસ્તકોનું મૂલ્ય કેટલું છે. હું મારા આ સંગ્રહમાંથી કશું પણ ક્યારેય નહીં વેચું. આ પુસ્તકો મારા નથી, પરંતુ લોકોના છે.’

Image courtesy: Francois Roche.

Aashu Patell Aashu Patel’s Friends Group

Posted in काश्मीर - Kashmir

POK


POK गिलगित बल्तिस्तान के भारतीय क्षेत्र को खाली करने की सूचना…..

भारत सरकार ने आधिकारिक रुप से POK गिलगित बल्तिस्तान के भारतीय क्षेत्र को खाली करने की सूचना पाकिस्तान सरकार को दे दी है ।

तो आइए POK क्षेत्र के विषय में अपनी जानकारी बढ़ाएं,
क्योंकि अब हम सभी देशवासियों को संपूर्ण जम्मू कश्मीर के इतिहास और भूगोल की सत्यता के बारे में बातचीत करने की जरूरत है विशेषकर POK और अक्साई चीन (COK) के बारे में । गिलगित जो अभी POK के रुप में है वह विश्व में एकमात्र ऐसा स्थान है जो कि 5 देशों की सीमा से जुड़ा हुआ है , अफगानिस्तान, तजाकिस्तान (जो कभी Russia का हिस्सा था), पाकिस्तान, भारत और तिब्बत-चाइना ।

“वास्तव में जम्मू कश्मीर का महत्व जम्मू के कारण नहीं, कश्मीर के कारण नहीं, लद्दाख के कारण नहीं वास्तव में अगर इसका महत्व है तो वह है गिलगित-बल्तिस्तान के कारण (POK)

अब तक ज्ञात इतिहास में भारत पर जितने भी आक्रमण हुए यूनानियों से लेकर आज तक (शक , हूण, कुषाण , मुग़ल ) वह सारे गिलगित मार्ग से ही हुए । हमारे पूर्वज जम्मू-कश्मीर के महत्व को समझते थे उनको पता था कि अगर भारत को सुरक्षित रखना है तो दुश्मन को हिंदूकुश अर्थात गिलगित-बल्तिस्तान उस पार ही रखना होगा । किसी समय इस गिलगित में अमेरिका बैठना चाहता था, ब्रिटेन अपना base गिलगित में बनाना चाहता था, रूस भी गिलगित में बैठना चाहता, यहां तक कि पाकिस्तान ने सन 1965 में गिलगित क्षेत्र को रूस को देने का वादा तक कर लिया था आज चाइना भी इसी गिलगित में बैठना चाहता है और वह अपने पैर पसार भी चुका है और पाकिस्तान तो बैठना चाहता ही था ।

“दुर्भाग्य से जिस गिलगित के महत्व को सारी दुनिया जानती समझती है, जबकि एक ही देश के नेता उसको अपना नहीं मानते थे , जिसका वास्तव में गिलगित-बल्तिस्तान है और वह है भारत देश । क्योंकि हमको इस बात की कल्पना तक नहीं है भारत को अगर सुरक्षित रहना है तो हमें गिलगित-बल्तिस्तान किसी भी हालत में चाहिए ।

आज जब हम आर्थिक शक्ति बनने की सोच रहे हैं क्या आपको पता है गिलगित से रोड मार्ग द्वारा आप विश्व के अधिकांश कोनों में जा सकते हैं गिलगित से रोड मार्ग 5000 Km दुबई है, 1400 Km दिल्ली है, 2800 Km मुंबई है, 3500 Km रूस है, चेन्नई 3800 Km है लंदन 8000 Km है , जब हम सोने की चिड़िया थे तब हमारा सारे देशों से व्यापार इसी सिल्क मार्ग से चलता था 85 % जनसंख्या इन मार्गों से जुड़ी हुई थी मध्य एशिया, यूरेशिया, यूरोप, अफ्रीका सब जगह हम रोड मार्ग जा सकते है अगर गिलगित-बल्तिस्तान हमारे पास हो ।

आज हम पाकिस्तान के सामने IPI (Iran-Pakistan-India) गैस लाइन बिछाने के लिए गिड़गिड़ाते हैं ये तापी की परियोजना है जो कभी पूरी नहीं होगी अगर हमारे पास गिलगित होता तो गिलगित के आगे तज़ाकिस्तान था हमें किसी के सामने हाथ नहीं फ़ैलाने पड़ते ।

हिमालय की 10 बड़ी चोटियों है जो कि विश्व की 10 बड़ी चोटियों में से है और ये सारी हमारी सम्पदा है और इन 10 में से 8 गिलगित-बल्तिस्तान में है l तिब्बत पर चीन का कब्जा होने के बाद जितने भी पानी के वैकल्पिक स्त्रोत (Alternate Water Resources) हैं वह सारे गिलगित-बल्तिस्तान में है ।

आप हैरान हो जाएंगे वहां बड़ी -बड़ी 50-100 यूरेनियम और सोने की खदाने हैं आप POK के मिनरल डिपार्टमेंट की रिपोर्ट को पढ़िए आप आश्चर्यचकित रह जाएंगे । वास्तव में गिलगित-बल्तिस्तान का महत्व हमको मालूम नहीं है और सबसे बड़ी बात गिलगित-बल्तिस्तान के लोग Strong Anti PAK है ।

दुर्भाग्य क्या है हम हमेशा कश्मीर ही बोलते हैं, जम्मू- कश्मीर नहीं बोलते हैं , कश्मीर कहते ही जम्मू, लद्दाख, गिलगित-बल्तिस्तान हमारे मस्तिष्क से निकल जाता है । ये पाकिस्तान के कब्जे में जो POK है उसका क्षेत्रफल 79000 वर्ग किलोमीटर है उसमें कश्मीर का हिस्सा तो सिर्फ 6000 वर्ग किलोमीटर है और 9000 वर्ग किलोमीटर का हिस्सा जम्मू का है और 64000 वर्ग किलोमीटर हिस्सा लद्दाख का है जो कि गिलगित-बल्तिस्तान है । यह कभी कश्मीर का हिस्सा नहीं था यह लद्दाख का हिस्सा था वास्तव में सच्चाई यही है । तभी भारत सरकार दो संघशासित राज्य जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का उचित निर्माण किया इसलिए पाकिस्तान जो बार-बार कश्मीर का राग अलापता रहता है तो उससे कोई यह पूछे तो सही क्या गिलगित-बल्तिस्तान और जम्मू का हिस्सा जिस पर तुमने कब्ज़ा कर रखा है क्या ये भी कश्मीर का ही भाग है ?? कोई उत्तर नहीं मिलेगा ।

क्या आपको पता है कि गिलगित -बल्तिस्तान , लद्दाख के रहने वाले लोगो की औसत आयु विश्व में सर्वाधिक है यहाँ के लोग विश्व अन्य लोगो की तुलना में ज्यादा जीते है ।

भारत में आयोजित एक सेमिनार में गिलगित-बल्तिस्तान के एक बड़े नेता को बुलाया गया था उसने कहा कि “we are the forgotten people of forgotten lands of BHARAT” उसने कहा कि देश हमारी बात ही नहीं जानता । जब किसी ने उससे सवाल किया कि क्या आप भारत में रहना चाहते हैं ?? तो उसने कहा कि 60 साल बाद तो आपने मुझे भारत बुलाया और वह भी अमेरिकन टूरिस्ट वीजा पर और आप मुझसे सवाल पूछते हैं कि क्या आप भारत में रहना चाहते हैं !! उसने कहा कि आप गिलगित-बल्तिस्तान के बच्चों को IIT , IIM में दाखिला दीजिए AIIMS में हमारे लोगों का इलाज कीजिए हमें यह लगे तो सही कि भारत हमारी चिंता करता है हमारी बात करता है । गिलगित-बल्तिस्तान में पाकिस्तान की सेना कितने अत्याचार करती है लेकिन आपके किसी भी राष्ट्रीय अखबार में उसका जिक्र तक नहीं आता है । आप हमें ये अहसास तो दिलाइये की आप हमारे साथ है ।

और मैं खुद आपसे यह पूछता हूं कि आप सभी ने पाकिस्तान को हमारे कश्मीर में हर सहायता उपलब्ध कराते हुए देखा होगा । वह बार बार कहता है कि हम कश्मीर की जनता के साथ हैं, कश्मीर की आवाम हमारी है । लेकिन क्या आपने कभी यह सुना है कि किसी भी भारत के नेता, मंत्री या सरकार ने यह कहा हो कि हम POK – गिलगित-बल्तिस्तान की जनता के साथ हैं, वह हमारी आवाम है, उनको जो भी सहायता उपलब्ध होगी हम उपलब्ध करवाएंगे ,आपने यह कभी नहीं सुना होगा ।

कांग्रेस सरकार ने कभी POK गिलगित-बल्तिस्तान को पुनः भारत में लाने के लिए कोई बयान तक नहीं दिया प्रयास करनि तो बहुत दूर की बात है । हालाँकि पहली बार अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार के समय POK का मुद्दा उठाया गया फिर 10 साल पुनः मौन धारण हो गया और अब फिर से नरेंद्र मोदी जी की सरकार आने पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संसद में ये मुद्दा उठाया ।

आज अगर आप किसी को गिलगित के बारे में पूछ भी लोगे तो उसे यह पता नहीं है कि यह जम्मू कश्मीर का ही भाग है !वह सीधे ही यह पूछेगा क्या यह कोई चिड़िया का नाम है ?? वास्तव में हमारा जम्मू कश्मीर के बारे में जो गलत दृष्टिकोण है उसको बदलने की जरूरत है ।

अब करना क्या चाहिए ??

तो पहली बात है सुरक्षा में किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा का मुद्दा बहुत संवेदनशील है इस पर अनावश्यक वाद-विवाद नहीं होना चाहिए , वहीं एक अनावश्यक वाद विवाद चलता है कि जम्मू कश्मीर में इतनी सेना क्यों है ??

तो उन तथाकथित बुद्धिजीवियों को बता दिया जाए कि जम्मू-कश्मीर का 2800 किलोमीटर का बॉर्डर है जिसमें 2400 किलोमीटर पर LOC है, आजादी के बाद भारत ने पांच युद्ध लड़े वह सभी जम्मू-कश्मीर से लड़े भारतीय सेना के 18 लोगों को परमवीर चक्र मिला और वह सभी 18 के 18 जम्मू कश्मीर में शहीद हुए हैं ।

इनमें 14000 भारतीय सैनिक शहीद हुए हैं जिनमें से 12000 जम्मू कश्मीर में शहीद हुए हैं, अब सेना बॉर्डर पर नहीं तो क्या मध्यप्रदेश में रहेगी क्या यह सब जो सेना की इन बातों को नहीं समझते वही यह सब अनर्गल चर्चा करते हैं ।

वास्तव में जम्मू कश्मीर पर बातचीत करने के बिंदु होने चाहिए- POK, वेस्ट पाकिस्तान से आए रिफ्यूजी, कश्मीरी हिंदू समाज, आतंक से पीड़ित लोग , धारा 370 और 35A का हुआ दुरूपयोग, गिलगित-बल्तिस्तान का वह क्षेत्र जो आज पाकिस्तान व चाइना के कब्जे में है । जम्मू- कश्मीर के गिलगित- बल्तिस्तान में अधिकांश जनसंख्या शिया मुसलमानों की है और वह सभी पाकिस्तान विरोधी है वह आज भी अपनी लड़ाई खुद लड़ रहे हैं, पर भारत उनके साथ है ऐसा हमें उनको महसूस कराना चाहिए, देश कभी उनके साथ खड़ा नहीं हुआ वास्तव में पूरे देश में इसकी चर्चा खुलकर होनी चाहिए ।

वास्तव में जम्मू-कश्मीर के विमर्श का मुद्दा बदलना चाहिए, जम्मू कश्मीर को लेकर सारे देश में सही जानकारी देने की जरूरत है l इसके लिए एक इंफॉर्मेशन कैंपेन चलना चाहिए , पूरे देश में वर्ष में एक बार 26 अक्टूबर को जम्मू कश्मीर का विलय-दिवस के रुप में मनाना चाहिए, और सबसे बड़ी बात है जम्मू कश्मीर को हमें राष्ट्रवादियों की नजर से देखना होगा जम्मू कश्मीर की चर्चा हो तो वहां के राष्ट्रभक्तों की चर्चा होनी चाहिए तो उन 5 जिलों के कठमुल्ले तो फिर वैसे ही अपंग हो जाएंगे ।

इस जम्मू कश्मीर लेख श्रृंखला के माध्यम से मैंने आपको पूरे जम्मू कश्मीर की पृष्ठभूमि और परिस्थितियों से अवगत करवाया और मेरा मुख्य उद्देश्य सिर्फ यही है जम्मू कश्मीर के बारे में देश के प्रत्येक नागरिक को यह सब जानकारियां होनी चाहिए ।

तो अब आप इतने समर्थ हैं कि जम्मू कश्मीर को लेकर आप किसी से भी वाद-विवाद या तर्क-वितर्क कर सकते हैं, किसी को आप समझा सकते हैं कि वास्तव में जम्मू-कश्मीर की परिस्थितियां क्या है, वैसे तो जम्मू कश्मीर पर एक ग्रन्थ लिखा जा सकता है लेकिन मैंने जितना हो सका उतने संक्षिप्त रूप में इसे आपके सामने रखा है ।

इस श्रृंखला को केवल जोड़ने करने से कुछ भी नहीं होगा चाहे आप पढ़कर लाइक कर रहे हो या बिना पढ़े लाइक कर रहे हो उसका कोई भी मतलब नहीं है । अगर आप इस श्रृंखला को अधिक से अधिक जनता के अंदर प्रसारित करेंगे तभी हम जम्मू कश्मीर के विमर्श का यह मुद्दा बदल सकते हैं अन्यथा नहीं , इसलिए मेरा आप सभी से यही अनुरोध है श्रृंखला को अधिक से अधिक लोगों की जानकारी में लाया जाए ताकि देश की जनता को जम्मू कश्मीर के संदर्भ में सही तथ्यों का पता लग सके।

Dr.(Capt) Sikander Rizvi
Nationalist Speaker expert on Gilgit Baltistan.Capt Rizvis family roots in Gilgit – Baltistan.