Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

कुछ साल पहले जब मैं एक टूर से आ रहा था और कोटा रेलवे स्टेशन पर उतर कर ऑटो रिक्शा का इंतजार कर रहा था। अचानक एक व्यक्ति ने मेरी ओर हाथ हिलाया। वह मेरे पास आया और बोला, “नीलेश सर, मैं आपको घर छोड़ दूंगा।” चूंकि उन्होंने मुझे मेरे नाम से संबोधित किया, इसलिए मैंने आगे नहीं पूछा, यह जानकर मुझे आश्चर्य हुआ कि वह मेरा नाम जानते हैं।
उन्होंने बताया की उनका बेटा मेरी कोचिंग में क्लास 9 में पढ़ रहा है और वो अपने बेटे की पढ़ाई के लिए कोटा शिफ्ट हो गए है, बच्चे की पढ़ाई के लिए अपनी कृषि भूमि का एक हिस्सा भी बेच दिया । उनके बड़े बेटे का नाम आकाश था और वह हमारी प्रवेश परीक्षा को मुश्किल से पास कर सका था. वह कोटा में ऑटो चला रहे हैं क्योंकि वह शिक्षित नहीं थे और उनका सपना था कि उनके दोनों बेटे जेईई में शामिल हों। उनका बड़ा बेटा नौवीं और छोटा सातवीं कक्षा में था। उन्होंने बड़े बेटे को हमारी कोचिंग में डाल दिया लेकिन अपने छोटे बेटे के लिए फंड नहीं जुटा पा रहे थे इसलिए उसे गांव से नहीं बुलाया। उनके बड़े बेटे को अपने गांव में टॉपर होने के बावजूद भाषा और कोटा कोचिंग की कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण कठिनाई का सामना करना पड़ रहा था. ये कहते कहते उनका गाला भर आया.
मैंने उन्हें अगले दिन ऑफिस में मुझसे मिलने के लिए कहा। व्यक्तिगत बुलावा पाकर कर वे बहुत प्रसन्न हुए। वह अपने बेटे के साथ मेरे कार्यालय में मिलने आये। मैंने अपने कर्मचारियों से कहा कि वे मुझे उसके सभी शैक्षणिक रिकार्ड दें। मैंने आकाश की ओर देखा, वह सफेद शर्ट और ग्रे ट्राउजर में था, उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं था। उलझन में लग रहा था, मैंने उससे बात करने की कोशिश की लेकिन उसकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। उनके पिता ने उसकी ओर से बात की। उनके पिता को उसकी शैक्षणिक स्थिति के बारे में बहुत जानकारी थी। उन्होंने साझा किया कि आकाश को कुछ शिक्षकों के साथ समस्या है जो अंग्रेजी में बहुत तेज बोलते हैं ओर आकाश हिंदी माध्यम से होने के कारण समझ नहीं पा रहे थे।
मैंने उसके पिता को आश्वासन दिया कि जब तक वह कक्षा में स्वयं को एडजस्ट नही कर पायेगा तब तक मैं उसके लिए अलग से शिक्षक उपलब्ध कराऊंगा। जिससे वह ठीक से समझ पाए। इसके बाद वे मेरे कार्यालय में नियमित रूप से आए; हालाँकि वह मेरे कार्यालय में प्रवेश करने में बहुत झिझकते थे और घंटों-घंटों बाहर प्रतीक्षा करते थे। मैं संयोग से सड़क पर भी अगर मिल जाता था, तो हम आकाश की पढ़ाई के बारे में चर्चा करते थे।
उनके पास अक्सर उन अध्यायों की सूची होती थी जहां आकाश को कठिनाई हो रही थी और इसका एक संभावित समाधान भी था। वह जो भी मांगते थे, मैं उन्हें अतिरिक्त किताबें, अतिरिक्त नोट्स उपलब्ध करवा देता था। मैंने आकाश के प्रदर्शन की शायद ही कभी जाँच की हो मेरी प्रारंभिक धारणा के कारण – क्योंकि वह मुश्किल से ही हमारी चयन परीक्षा को पास कर पाया था।
लगभग छह महीने बाद, वह अपने बेटे के साथ मेरे कार्यालय में आए। मैंने आकाश को बेहतर स्थिति में पाया। उन्होंने मुझे अपने बेटे की प्रदर्शन रिपोर्ट दिखाई। मुझे यह देखकर आश्चर्य हुआ कि उनका बेटा टॉप बैच में आ गया है और कक्षा 9वीं के टॉप 10 पर्सेंटाइल में से एक था और बहुत अच्छा कर रहा था। यह हमारे लिए चमत्कार के करीब था कि एक छात्र जो हमारी प्रवेश परीक्षा को मुश्किल से पास कर सका, वह शीर्ष 10 पर्सेंटाइल में से एक था।
लेकिन आकाश के पिता के मन में कुछ खास था। उन्होंने मुझसे अपने बेटे आकाश के लिए आईआईटी जेईई की पुस्तकों का एक सेट मांगा। 9वीं कक्षा के छात्र के लिए यह एक बहुत ही असामान्य अनुरोध था। वह चाहते थे कि उनका बेटा IIT JEE की शीट हल करना शुरू करे। वह उन अध्यायों की एक सूची लेकर आए थे, जिनकी उन्हें भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित में आवश्यकता थी। मैं अनिच्छा से इसके लिए सहमत हो गया। मैंने उन्हें अपने छोटे बेटे को कोटा बुलाने के लिए भी कहा और यह आश्वासन दिया कि उन्हें अपने बेटे के लिए कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है।
हम मिलते रहे, लेकिन समय का फासला बढ़ गया जब आकाश 11वीं कक्षा में आया, मुझे पता चला कि वह बंसल कोचिंग को ज्वाइन कर लिया है , मैं यह जानकर थोड़ा परेशान हुआ कि उन्होंने आकाश को हमारी कोचिंग ज्वाइन नहीं करवा कर बंसल क्लासेज ज्वाइन करवा दी.
सत्र के बीच में वह फिर से रेलवे स्टेशन पर मुझसे मिले, मेरा सूटकेस लिया और ऑटो में डाल दिया। चूँकि मैं थोड़ा दुखी था क्योंकि उनका बेटा अब किसी और कोचिंग में पढ़ रहा था। हमने काफी देर तक बात नहीं करी पर उन्होंने यह कहकर चुप्पी तोड़ी कि उनके बेटे को दो साल के लिए 100% छात्रवृत्ति मिली है , इसलिए उनके पास बंसल कोचिंग मैं रखने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था। मैंने उससे पूछा कि अगर कोई समस्या थी तो वह मेरे पास क्यों नहीं आये । उसने हाथ जोड़कर कहा, “नीलेश सर हम तो पहले से ही आपके बहुत आभारी हैं। आपने पहले ही छोटे बेटे की फीस माफ कर दी है। आपने किताबें, शिक्षक उपलब्ध कराकर भी आकाश की कितनी बार मदद की है। मुझे और एहसान माँगने में झिझक महसूस हुई। मुझे आपके जैसा एक और फरिश्ता मिला जिसका बेटा बंसल क्लासेज में टॉपर है। जब मैंने उन्हें आकाश के बारे में बताया तो उन्होंने बंसल सर से बात की और मुझे फीस में शत-प्रतिशत छूट दिलवाई। बंसल सर ने भी व्यक्तिगत रूप से उनकी देखरेख की। वे किताबों और नोट्स के रूप में अतिरिक्त सामग्री उपलब्ध करा रहे है।“ उन्होंने अपनी आँखों में आँसू के साथ सारांशित किया। उनकी कहानी सुनकर मेरी सारी नकारात्मकता दूर हो गई।
हमने बाकी रास्ते में बात नहीं की। उन्होंने मुझे घर छोड़ दिया और मेरा सामान गेट के सामने रख दिया। मैंने अपना बटुआ में से 100 रुपये का नोट निकाला । लेकिन उन्होंने मेरे हाथ को रोककर दोनों हाथो से भर लिया, जैसे की वो किसी बात से शर्मिंदा थे , मैं उनकी मजबूरी समझ सकता था, और वो बिना कुछ कहे निकल गए। मैं 2 मिनट तक वहीं खड़ा रहा, समझ नहीं आ रहा था कि क्या कहूं।
दो साल बाद, मैं इस घटना को लगभग भूल गया। उन 2 सालों में उनसे कभी नहीं मिला। शाम को मैं अपने घर के बाहर टहल रहा था। मेरे घर के सामने एक ऑटो रुका, ऑटो वाला और आकाश को पहचान लिया, दोनों खुश दिख रहे थे। आकाश ने मेरे पैर छुए और उनके पिता ने हाथ जोड़कर मुझे बधाई दी। मिठाई का पैकेट ले कर आये थे।
आकाश को जेईई 2010 में लगभग 6000 रैंक के साथ चुना गया था और यह उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण क्षण था। उसके पिता ने एक ही सांस में सब कुछ कह दिया।
उस दिन उनका चेहरा बहुत शांत था और उन्होंने अपने ऑटो की ओर इशारा किया और कहा “ कि जब तक मेरा छोटा बेटा जेईई में नहीं आ जाता, तब तक मैं इस ऑटो को लगभग 2 साल और चलाऊंगा। “ चूंकि मैंने कोटा में उनके संघर्ष को लगभग 4 वर्षों तक देखा था, इसलिए मेरे लिए उस संतुष्टि और उपलब्धि को समझना आसान था जो वह अंदर महसूस कर रहे होंगे।
यह माता-पिता द्वारा अपने बच्चों के लिए किए गए असाधारण पालन-पोषण और बलिदान की एक और कहानी थी।
मैंने अपने दोनों बच्चों से उनके पैर छूने और उनका आशीर्वाद लेने को कहा। मैं यह सोच रहा था कि आकाश अपने जीवन में आगे जाकर क्या करेगा किसी को पता नहीं, पर उसके आसपास के लोग उसके पिता के संघर्ष और बलिदान को कभी समझ पाएंगे कि नही।

Author:

Buy, sell, exchange old books

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s