Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

🎋पक्के साधक कैसे बने? 🎋

एक बार एक गुरूजी अपने शिष्यों को भक्ति का उपदेश देते हुए समझा रहे थे कि बेटा पक्के साधक बनो, कच्चे साधक ना बने रहो । कच्चे पक्के साधक की बात सुनकर एक नये शिष्य के मन में सवाल पैदा हुआ !

उसने पूछ ही लिया “ गुरूजी ये पक्के साधक कैसे बनते हैं ?”

गुरूजी मुस्कुराये और बोले, बेटा एक गाँव में एक हलवाई रहता था । हलवाई हर रोज़ कई तरह की मिठाइयाँ बनाता था, जो एक से बढ़कर एक स्वादिष्ट होती थी ।
आस पास के गाँवो में भी हलवाई की बड़ी धाक जमी हुई थी , अक्सर लोग हलवाई की मिठाईयों और पकवानों का आनंद लेने आते थे !
एक दिन हलवाई की दुकान पर एक पति पत्नी आये
उनके साथ उनका छोटा सा बच्चा भी था, जो बहुत ही चंचल था
उसके पिता ने हलवाई को हलवा बनाने का आदेश दिया !
वह दोनों तो प्रतीक्षा करने लगे, लेकिन वह बच्चा बार – बार आकर हलवाई से पूछता* –
“ हलवा बन गया क्या ?” हलवाई कहता – “ अभी कच्चा है, थोड़ी देर और लगेगी ।” वह थोड़ी देर प्रतीक्षा करता और फिर आकर हलवाई को आकर पूछता – “खुशबू तो अच्छी आ रही है, हलवा बन गया क्या ?” हलवाई कहता – “ अभी कच्चा है, थोड़ी देर और लगेगी ।” एक बार, दो बार, तीन बार, बार – बार उसके ऐसा बार बार पूछने से हलवाई थोड़ा चिढ़ गया !
उसने एक प्लेट उठाई और उसमें कच्चा हलवा रखा और बोला – “ ले बच्चे खा ले”
बच्चे ने खाया तो बोला – “ ये हलवा तो अच्छा नहीं है”
हलवाई फौरन बोला “ अगर अच्छा हलवा खाना है तो चुपचाप जाकर वहाँ बैठ जाओ और प्रतीक्षा करो ।” इस बार बच्चा चुपचाप जाकर बैठ गया I

जब हलवा पककर तैयार हो गया तो हलवाई ने थाली में सजा दिया और उन की टेबल पर परोस दिया ।
इस बार जब उस बच्चे ने हलवा खाया तो उसे बहुत स्वादिष्ट लगा
उसने हलवाई से पूछा – “ हलवाई काका ! अभी थोड़ी देर पहले जब मैंने इसे खाया था, तब तो यह बहुत ख़राब लगा था. अब इतना स्वादिष्ट कैसे बन गया ?”

तब हलवाई ने उसे प्रेम से समझाते हुए कहा – “ बच्चे जब तू ज़िद कर रहा था, तब यह हलवा कच्चा था और अब यह पक गया है कच्चा हलवा खाने में अच्छा नहीं लगता यदि फिर भी उसे खाया जाये तो पेट ख़राब हो सकता है. लेकिन पकने के बाद वह स्वादिष्ट और पोष्टिक हो जाता है ।”
अब गुरूजी अपने शिष्य से बोले “ बेटा कच्चे और पक्के साधक का फर्क समझ में आया कि नहीं ?”
शिष्य हाथ जोड़ कर बोला गुरू जी “ हलवे के कच्चे और पक्के होने की बात तो समझ आ गई, लेकिन एक साधक के साथ यह कैसे होता है ?”

गुरूजी बोले – बेटा साधक भी हलवाई की तरह ही है । जिस तरह हलवाई हलवे को आग की तपिश से धीरे धीरे पकाता है उसी तरह साधक को भी स्वयं को निरन्तर साधना से पकाना पड़ता है । जिस तरह हलवे में सभी आवश्यक चीज़ें डालने के बाद भी जब तक हलवा कच्चा है, तो उसका स्वाद अच्छा नहीं लगता !

उसी तरह एक सेवक भी चाहे कितना ही ज्ञान जुटा ले, कर्मकाण्ड कर ले जब तक सिमरन और भजन की अग्नि में नहीं तपता, तब तक वह कच्चा ही रहता है जिस तरह हलवे को अच्छे से पकाने के लिए लगातार उसका ध्यान रखना पड़ता है, उसी तरह साधक को भी अपने मन की चौकीदारी करते रहना चाहिए। जब पकते – पकते हलवा का रँग बदल जाये उसमें से खुशबु आने लगे और उसे खाने में आनन्द का अनुभव हो, तब उसे पका हुआ कहते है । उसी तरह जब साधना, साधक और साध्य तीनों एक हो जाये, साधक के शरीर से प्रेम की खुशबू आने लगे तब समझना चाहिए कि साधक पक्का हो चुका है ।”

जब तक सेवक का सिमरन पक्का न हो जाये, उसे सावधान और सतर्क रहना चाहिए !
क्योंकि माया बड़ी ठगनी है । कभी भी साधक को अपने रास्ते से गिरा सकती है ।
अतः साधक को निरंतर सिमरन और भजन से खुद को मजबूत बनाना चाहिए जी. !!

स्वामी जयदेवांग महाराज,हिमाचल प्रदेश।

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!! अच्छे इंसान का निर्माता !!

एक 6 वर्षीय लड़का अपनी 4 वर्षीय छोटी बहन के साथ बाजार से जा रहा था। अचानक उसे लगा कि उसकी छोटी बहन पीछे रह गई है। वह रुका, पीछे मुड़कर देखा तो जाना, कि उसकी बहन एक खिलौने की दुकान के सामने खड़ी कोई चीज निहार रही है। लड़का पीछे से आता है और बहन से पूछता है -‘कुछ चाहिए तुम्हें?’ लड़की एक गुड़िया की तरफ उंगली उठाकर दिखाती है। बच्चा उसका हाथ पकड़ता है, एक जिम्मेवार बड़े भाई की तरह अपनी बहन को वह गुड़िया उठा कर दे देता है। बहन बहुत खुश हो गई।
दुकानदार यह सब देख रहा था। बच्चे का प्रगल्भ व्यवहार देखकर आश्चर्यचकित भी हुआ।
अब वह बच्चा बहन के साथ काउंटर पर आया और दुकानदार से पूछा- ‘सर कितनी कीमत है इस गुड़िया की?’
दुकानदार एक शांत और गंभीर व्यक्ति था। उसने जीवन के कई उतार-चढ़ाव देखे थे। उसने बड़े प्यार और अपनत्व से बच्चे से पूछा -‘बताओ बेटे आप क्या दे सकते हो?’ बच्चा अपनी जेब से वह सारी सीपें बाहर निकाल कर दुकानदार को देता है, जो उसने थोड़ी देर पहले, बड़ी मेहनत से,अपनी बहन के साथ, समंदर के किनारे से चुन-चुन कर बीनी थी ।
दुकानदार वह सब लेकर यों गिनता है,जैसे कोई पैसे गिन रहा हो। सीपें गिनकर वह बच्चे की तरफ देखने लगा, तो बच्चा बोला- ‘सर कुछ कम है क्या?’
दुकानदार- ‘नहीं- नहीं यह तो इस गुड़िया की कीमत से भी ज्यादा है, मैं वापस देता हूं’, यह कहकर -उसने चार सीपें रख ली और बाकी की बच्चे को वापस दे दी ।बच्चा बड़ी खुशी से, सीपें अपनी जेब में रखकर, बहन को साथ लेकर चला गया।

यह सब उस दुकानदार का कर्मचारी देख रहा था। उसने आश्चर्य से मालिक से पूछा- ‘मालिक इतनी महंगी गुड़िया, आपने केवल 4 सीपों के बदले में दे दी।’
दुकानदार एक स्मित संतुष्टि वाला हास्य करते हुए बोला-‘ हमारे लिए यह केवल सीप है, पर उस 6 साल के बच्चे के लिए अति मूल्यवान हैं,और अब इस उम्र में वह नहीं जानता कि पैसे क्या होते हैं। पर जब वह बड़ा होगा ना… और जब उसे याद आएगा कि उसने सीपों के बदले बहन को गुड़िया खरीद कर दी थी, तब उसे मेरी याद जरूर आएगी। और फिर वह सोचेगा कि…’ यह विश्व अच्छे मनुष्यों से भी भरा हुआ है।’ यह बात उसके अंदर सकारात्मक दृष्टिकोण बढ़ाने में मदद करेगी, और वह भी एक अच्छा इंसान बनने के लिए प्रेरित होगा।

दुबेजी

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एक्सपायरी डेट

एक बार अमेरिका में कैलीफोर्निया की सड़कों के किनारे पेशाब करते हुए देख एक बुजुर्ग आदमी को पुलिसवाले पकड़ कर उनके घर लाए और उन्हें उनकी पत्नी के हवाले करते हुए निर्देश दिया कि वो उस शक़्स का बेहतरीन ढंग से ख़याल रखें औऱ उन्हें घर से बाहर न निकलने दें ।

दरअसल वो बुजुर्ग बिना बताए कहीं भी औऱ किसी भी वक़्त घर से बाहर निकल जाते थे और ख़ुद को भी नहीं पहचान पाते थे ।

बुजुर्ग की पत्नी ने पुलिस वालों को शुक्रिया कहा और अपने पति को प्यार से संभालते हुए कमरे के भीतर ले गईं।

पत्नी उन्हें बार बार समझाती रहीं कि तुम्हें अपना ख्याल रखना चाहिए। ऐसे बिना बताए बाहर नहीं निकल जाना चाहिए। तुम अब बुजुर्ग हो गए हो, साथ ही तुम्हें अपने गौरवशाली इतिहास को याद करने की भी कोशिश करनी चाहिए। तुम्हें ऐसी हरकत नहीं करनी चाहिए जिससे शर्मिंदगी महसूस हो ।

जिस बुजुर्ग को पुलिस बीच सड़क से पकड़ कर उन्हें उनके घर ले गई थी, वो किसी ज़माने में अमेरिका के जाने-माने फिल्मी हस्ती थे। लोग उनकी एक झलक पाने के लिए तरसते थे। उनकी लोकप्रियता का आलम ये था कि उसी के दम पर वो राजनीति में पहुंचे और दुनिया के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति बनकर उभरे तथा एकदिन वो अमेरिका के राष्ट्रपति बने। नाम था रोनाल्ड रीगन।

1980 में रीगन अमेरिका के राष्ट्रपति बने और पूरे आठ साल दुनिया के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति रहे। राष्ट्रपति रहते हुए उन पर गोली भी चली। कई दिनों तक अस्पताल में रहने के बाद जब वो दोबारा व्हाइट हाऊस पहुंचे तो उनकी लोकप्रियता दुगुनी हो चुकी थी। रीगन अपने समय में अमेरिका के सबसे लोकप्रिय नामों में से एक थे।

राष्ट्रपति पद से हटने के बाद जब वो अपनी निज़ी नागरिकता में लौटे तो कुछ दिनों तक सब ठीक रहा। पर कुछ दिनों बाद उन्हें अल्जाइमर की शिकायत हुई और धीरे-धीरे वो अपनी याददाश्त खो बैठे।

शरीर था। यादें नहीं थीं। वो भूल गए कि एक समय था जब लोग उनकी एक झलक को तरसते थे। वो भूल गए कि उनकी सुरक्षा दुनिया की सबसे बड़ी चिंता थी। रिटायरमेंट के बाद वो सब भूल गए। पर अमेरिका की घटना थी तो बात सबके सामने आ गई कि कभी दुनिया पर राज करने वाला ये शख्स जब यादों से निकल गया तो वो नहीं रहा, जो था। मतलब उसका जीवन होते हुए भी खत्म हो गया था।

ताकतवर से ताकतवर चीज़ की भी एक एक्सपायरी डेट होती है ।
अहंकार व्यर्थ है चाहे वो सत्ता का हो,धन का हो , ज्ञान का हो या फ़िर अपने बाहुबल का !

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*વૈદિક ઘડિયાળ**નામના અર્થ સાથે*🕉️1:00 વાગ્યાના સ્થાન પર *ब्रह्म* લખેલું છે જેનો અર્થ થાય છે;બ્રહ્મ એક જ છે બે નથી🕉️2:00 વાગ્યાના સ્થાને *अश्विनौ* લખેલું છે તેનો અર્થ થાય કે;અશ્વિની કુમારો બે છે🕉️3:00 વાગ્યાના સ્થાને *त्रिगुणाः* લખેલું છે તેનો અર્થ થાય ત્રણ પ્રકારના ગુણો*સત્વ રજસ્ અને તમસ્*🕉️4:00 વાગ્યાના સ્થાને *चतुर्वेदाः* લખેલું છે તેનો અર્થ થાય વેદો ચાર છે*ઋગ્વેદ યજુર્વેદ સામવેદ અને અથર્વવેદ*🕉️5:00 વાગ્યાના સ્થાને *पंचप्राणा* લખેલું છે જેનો અર્થ થાય પાંચ પ્રકારના પ્રાણ છે*પ્રાણ, અપાન, સમાન, વ્યાન અને ઉદાન*🕉️6:00 વાગ્યાના સ્થાને લખેલું છે *षड्रसाः* એનો અર્થ થાય કે રસ છ પ્રકારના છે*મધુર, ખાટો, ખારો, કડવો, તીખો, તૂરો*🕉️7:00 વાગ્યાના સ્થાને લખેલું છે *सप्तर्षियः* તેનો અર્થ થાય સાત ઋષિ છે*કશ્યપ, અત્રી, ભારદ્વાજ,વિશ્વામિત્ર, ગૌતમ, જમદગ્નિ અને વસિષ્ઠ*🕉️8:00 વાગ્યાના સ્થાને લખેલું છે *अष्टसिद्धि* જેનો અર્થ થાય આઠ પ્રકારની સિદ્ધિ છે*અણીમા, મહિમા, દધીમા, ગરીમા, પ્રાપ્તિ, પ્રાકામ્ય, ઈશિત્વ અને વશિત્વ*🕉️9:00 વાગ્યાના સ્થાને લખેલું છે *नव द्रव्याणी* જેનો અર્થ થાય નવ પ્રકારની નિધિઓ હોય છે*પદ્મા, મહાપદ્મ, નીલ, શંખ, મુકુંદ, નંદ, મકર, કશ્યપ અને ખર્વ*🕉️10:00 વાગ્યના સ્થાને લખેલું છે *दशदिशः*, જેનો અર્થ થાય દશ દિશાઓ*પૂર્વ, પશ્ચિમ, ઉત્તર, દક્ષિણ, ઈશાન, અગ્નિ, નૈઋત્ય, વાયવ્ય, આકાશ અને પાતાળ*🕉️11:00 ના સ્થાને લખેલું છે *रुद्राः* જેનો અર્થ થાય રુદ્રા અગિયાર છે*કપાલી, પિંગલ, ભીમ, વિરુપાક્ષ, વલોહિત, શાસ્તા, અજપાદ, અહિર્બુધ્ન્ય, ચંડ, ભવ*🕉️12:00 વાગ્યાના સ્થાને લખેલું છે *आदित्याः* જેનો અર્થ થાય છે આદિત્યો બાર છે*અંસુમાન, અર્યમાન, ઈંદ્ર, ત્વષ્ટા, ધાતુ, પર્જન્ય, પૂષા, ભગ્,મિત્ર, વરુણ, વિવસ્વાન, વિષ્ણુ*


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*एक्सपायरी डेट*

एक बार अमेरिका में कैलीफोर्निया की सड़कों के किनारे पेशाब करते हुए देख एक बुजुर्ग आदमी को पुलिसवाले पकड़ कर उनके घर लाए और उन्हें उनकी पत्नी के हवाले करते हुए निर्देश दिया कि वो उस शक़्स का बेहतरीन ढंग से ख़याल रखें औऱ उन्हें घर से बाहर न निकलने दें ।

दरअसल वो बुजुर्ग बिना बताए कहीं भी औऱ किसी भी वक़्त घर से बाहर निकल जाते थे और ख़ुद को भी नहीं पहचान पाते थे ।

बुजुर्ग की पत्नी ने पुलिस वालों को शुक्रिया कहा और अपने पति को प्यार से संभालते हुए कमरे के भीतर ले गईं।

पत्नी उन्हें बार बार समझाती रहीं कि तुम्हें अपना ख्याल रखना चाहिए। ऐसे बिना बताए बाहर नहीं निकल जाना चाहिए। तुम अब बुजुर्ग हो गए हो, साथ ही तुम्हें अपने गौरवशाली इतिहास को याद करने की भी कोशिश करनी चाहिए। तुम्हें ऐसी हरकत नहीं करनी चाहिए जिससे शर्मिंदगी महसूस हो ।

जिस बुजुर्ग को पुलिस बीच सड़क से पकड़ कर उन्हें उनके घर ले गई थी, वो किसी ज़माने में अमेरिका के जाने-माने फिल्मी हस्ती थे। लोग उनकी एक झलक पाने के लिए तरसते थे। उनकी लोकप्रियता का आलम ये था कि उसी के दम पर वो राजनीति में पहुंचे और दुनिया के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति बनकर उभरे तथा एकदिन वो अमेरिका के राष्ट्रपति बने। नाम था रोनाल्ड रीगन।

1980 में रीगन अमेरिका के राष्ट्रपति बने और पूरे आठ साल दुनिया के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति रहे। राष्ट्रपति रहते हुए उन पर गोली भी चली। कई दिनों तक अस्पताल में रहने के बाद जब वो दोबारा व्हाइट हाऊस पहुंचे तो उनकी लोकप्रियता दुगुनी हो चुकी थी। रीगन अपने समय में अमेरिका के सबसे लोकप्रिय नामों में से एक थे।

राष्ट्रपति पद से हटने के बाद जब वो अपनी निज़ी नागरिकता में लौटे तो कुछ दिनों तक सब ठीक रहा। पर कुछ दिनों बाद उन्हें अल्जाइमर की शिकायत हुई और धीरे-धीरे वो अपनी याददाश्त खो बैठे।

शरीर था। यादें नहीं थीं। वो भूल गए कि एक समय था जब लोग उनकी एक झलक को तरसते थे। वो भूल गए कि उनकी सुरक्षा दुनिया की सबसे बड़ी चिंता थी। रिटायरमेंट के बाद वो सब भूल गए। पर अमेरिका की घटना थी तो बात सबके सामने आ गई कि कभी दुनिया पर राज करने वाला ये शख्स जब यादों से निकल गया तो वो नहीं रहा, जो था। मतलब उसका जीवन होते हुए भी खत्म हो गया था।

ताकतवर से ताकतवर चीज़ की भी एक एक्सपायरी डेट होती है ।
अहंकार व्यर्थ है चाहे वो सत्ता का हो,धन का हो , ज्ञान का हो या फ़िर अपने बाहुबल का !

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ज्ञानवापि


ज्ञानवापी

लखनऊ का प्रो रविकान्त गिरफ़्तार कर लिया गया है। काशी विश्वनाथ के बारे में उसने जो फर्जी कहानी सुनाई है वो मनगढ़ंत कहानी मुस्लिम हमेशा सुनाते हैं। संक्षेप में वह कहानी यूँ है कि औरंगजेब के बंगाल जाते समय लश्कर में साथ चल रहे हिन्दू राजाओं के अनुरोध पर बनारस के निकट पड़ाव डाला गया ताकि हिन्दू रानियाँ गंगा स्नान कर काशी विश्वनाथ के दर्शन कर सकें। दर्शन के दौरान एक रानी गायब हो गयी। खोजबीन करने पर वो रानी काशी विश्वनाथ मन्दिर के तहख़ाने में मिली। उसके साथ बलात्कार किया गया था। जिस से मंदिर अपवित्र हो गया था। इसीलिए औरंगजेब ने अपवित्र काशी विश्वनाथ मंदिर को तुड़वा कर कहीं और बनाने का आदेश दिया लेकिन बलात्कार की शिकार हिन्दू रानी अड़ गई कि इस जगह पर तो मस्जिद ही बननी चाहिए। इस तरह से रानी की जिद पर काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर मस्जिद बना दी गयी।

अपनी इस कहानी के समर्थन में मुस्लिम कहते हैं कि इस ऐतिहासिक सच को पट्टाभि सीतारमैय्या ने अपनी पुस्तक में दस्तावेजों के आधार पर प्रमाणित किया है।

मैंने इतिहास की पड़ताल की और पाया कि…….

पट्टाभि सीतारमैय्या कोई साधारण शख्सियत नहीं थे। वो इतने महान थे कि 1939 में जब वो कांग्रेस के अध्यक्ष पद के चुनाव में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस से हार गए तो महात्मा गाँधी ने सार्वजनिक कहा कि पट्टाभि सीतारमैय्या की हार मेरी हार है। इस हार को जवाहरलाल नेहरु ने प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया और नेहरु ने 1948 में जिस साल गाँधी जी की हत्या हुई पट्टाभि सीतारमैया को जयपुर अधिवेशन में कांग्रेस का अध्यक्ष बनवा कर के ही दम लिया और गाँधी जी की आत्मा को शांति पहुँचाई। पट्टाभि कांग्रेस के नेता होने के साथ-साथ इतिहासकार भी थे। कई पुस्तकों के साथ-साथ 1935 में इन्होंने The History of the Congress नाम से कांग्रेस का इतिहास भी लिखा है। अब काँग्रेस के नेता सह इतिहासकार पर तो कोई ऊँगली उठा ही नहीं सकता।

1942 से 1945 तक तीन साल जेल में रहने के दौरान सीतारमैया रोज डायरी लिखा करते थे। यही डायरी 1946 में उन्होंने ‘Feathers and Stones: My Study Windows’ नाम से पुस्तक के रूप में प्रकाशित करवाई। इसी पुस्तक के पृष्ठ संख्या 177 और 178 पर मंदिर के तहखाने में पुजारी द्वारा रानी के बलात्कार पर मंदिर तोड़े जाने के बारे में का जिक्र है।

इस दस्तावेजी सबूत पर लेख के अंत में खुलासा होगा। उस से पहले इतिहास की पड़ताल……

औरंगजेब के कालखंड की खास बात ये थी कि लगभग प्रतिदिन की उल्लेखनीय घटनाओं का दस्तावेजीकरण किया गया था।

– औरंगजेब के समकालीन सकी मुस्तईद खान की लिखी मासिर ए आलमगीरी में हज़ारों मंदिरों को तोड़े जाने के बारे में गर्व से लिखा गया है। विश्वनाथ मंदिर को भी तोड़े जाने वाले फ़रमान का जिक्र है लेकिन हिन्दू रानी से बलात्कार वाली घटना का कोई जिक्र नहीं है।

– औरंगजेब के ही समकालीन हमीद्दुदीन खान बहादुर की लिखी अहकाम-ए-आलमगीरी में इस घटना को कोई जिक्र नहीं है।

-इतिहासकार जमशेद एच बिलिमोरिया के अनुसार औरंगजेब के लिखे अहदनामों, फरमानों और निशानों के चार संकलन हैं जो औरंगजेब के दरबार से जुड़े चार अलग अलग लोगों ने किए थे।

1. रुकात ए आलमगीरी जिसका संकलन और प्रकाशन औरंगजेब के वजीर इनायतुल्लाह खान कश्मीरी ने किया।

2. रकैम ए करीम जिसका संकलन दूसरे वजीर अब्दुल करीम अमीर खान के बेटे ने किया।

3. दस्तूर उल अमल आगाही जिसका संकलन अयामल जयपुरी ने किया।

4. अदब ए आलमगीरी जिसके पत्रों का अंग्रेजी अनुवाद ऑस्ट्रेलिया के विंसेंट जॉन एडम फ्लिन ने किया है। इन चारों में भी इस घटना का जिक्र नहीं है।

औरंगजेब से जुड़ी अन्य किसी भी पुस्तक में भी इस इस घटना का जिक्र नहीं है। इतना ही नहीं औरंगजेब द्वारा की गयी बंगाल और बनारस की किसी यात्रा का कोई भी जिक्र इतिहास में नहीं है, तो सवाल ये है कि पट्टाभि सीतारमैया को ये सब किसने बताया।

सीतारमैय्या ने इसी किताब में लिखा है कि लखनऊ के किसी नामचीन मौलाना के पास एक हस्तलिखित पाण्डुलिपि थी जिसमें से पढ़ कर ये घटना मौलाना ने सीतारमैया के किसी दोस्त को बतायी और वादा किया कि जरुरत पड़ने पर पाण्डुलिपि दिखा भी देंगे। बाद में मौलाना मर गए। साथ में पाण्डुलिपि भी मर गयी😉। दस्तावेज मर गया, पट्टाभि भी मर गए लेकिन अपने फ़र्जीवाड़े का सबूत पेश नहीं कर पाए। मरते दम तक अपने उस दोस्त और लखनऊ के नामचीन मौलाना का नाम नहीं बता पाए।

ऐसे ही फर्जीवाड़ों के आधार पर रोमिला थापर, के एम पणिक्कर और बी एन पाण्डे जैसे इतिहासकारों ने औरंगजेब को महान बताया है और हिन्दुओं के आस्था केंद्र काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़े जाने को सही ठहराया है। आज भी हिंदुओं को बलात्कारी और मंदिरों को बलात्कार का अड्डा बताया जा रहा है। कठुआ काण्ड में भी यही दुष्प्रचार किया गया था। जो बाद में झूठ साबित हुआ।

अब पट्टाभि को तो कोई गलत कह ही नहीं सकता क्योंकि वो ठहरे कांग्रेस के अध्यक्ष। साथ साथ कांग्रेस के इतिहासकार। हमें लगता है कि पट्टाभि से ये बात खुद औरंगजेब के भूत ने बताई थी क्योंकि अहमदनगर किले की जिस जेल में तीन साल रह कर पट्टाभि ने ये किताब लिखी थी, उसी किले में 1707 में औरंगजेब की मौत हुई थी।

Govind Sharma भैया

गोविन्द शर्मा
संगठन मन्त्री, श्रीकाशी विद्वत्परिषद