Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

महाकाल

लंका विजय के समय । समुद्र समुद्र पर पत्थरों का पुल बनाना शुरू हुआ । तभी श्री राम ने देखा एक गिलहरी पानी मे जाती है , फिर मिट्टी पर आती है और फिर पत्थरों के बीच जाती है। वापस आती है फिर पानी मे जाती है , मिट्टी पर आती है और फिर पत्थरों के बीच चली जाती है । वह बार बार लगातार यही किए जा रही थी ।श्री राम ने सोचा, आखिर यह गिलहरी कर क्या रही है । उन्होंने हनुमानजी से कहा , इस गिलहरी को पकडकर लाओ तो । हनुमानजी गिलहरी को पकड कर लाये और रामजी के हाथ मे दे दी । रामजी ने गिलहरी से पूछा ,- तुम यह बार बार क्या कर रही हो ? । तुम पानी मे जाती हो , फिर आकर मिट्टी मे लोटपोट होती हो , फिर पत्थरों के बीच जाती हो और कुछ करके वापिस आ जाती हो । इस पर उसने कहा ,’ भगवान! मैने सोचा , पतिव्रता सीता माता की रक्षा के लिए , उसकी आन – बान और शान रखने के लिए आप लंका पर चढाई करने जा रहे है , वानरों की सेना आपके साथ, युद्ध मे सहयोगी बन रही है तो मैने सोचा मै भी सहयोगी बनू । मेरे पास और तो कुछ मदद करने के लिए नहीं था क्योंकि इन पत्थरों को उठाने की क्षमता तो मुझमे नही है तो मैने सोचा इन पत्थरों के बीच मे जो खाली जगह है उसे मिट्टी डाल डालकर बर दूं , ताकि जब आप सेना सहित इस पर से गुजरें तो ये पत्थर आपको न चुभे ।
भगवान श्रीराम ने कहा, गिलहरी, तू महान है, पर एक बात तो बता । यहाँ तो इतनी बडी सेना है और तू छोटी सी बार बार आ जा रही है, अगर किसी के पाँव के नीचे आकर मर गई तो ?’गिलहरी ने कहा , ‘ प्रभु! तब मै यह सोचूंगी कि नारी जाति के शील और धर्म को बचाने के लिए जो युद्ध लडा गया उसमे सबसे पहले मै काम आई ।’तब श्रीराम ने गिलहरी की पीठ पर स्नेह प्रेम और वात्सल्य से भरकर अगुलियाँ चलाई और कहते है कि गिलहरी की पीठ पर फेरी भगवान की अगुलियाँ के निशान आज भी दिखाई देती है और श्रीराम ने कहा ‘ लंका विजय अभियान मे सबसे बडा सहयोग तुम्हारा है ।
तुम छोटे हो तो यह मत सोचो कि तुम कुछ नही कर सकते । जो तुम्हारी हैसियत है तुम उतना तो करो । जो औरो के वक्त – बेवक्त मे काम आता है । उनका वक्त बेवक्त नही आता है , जो दूसरो के लिए आहूति देता है। ईश्वर के घर से उसके लिए आहुतियाँ समर्पित होती है ।
किसी भी काम को करने के लिए कोई भी वक्त सही होता है और आप यदि समाज के लिए कुछ करना चाहते है तो आप किसी भी तरह से कर सकते है. जरुरी नहीं की धन या ताकत से समाज सेवा करे आप अपनी छमता के अनुसार काम करके भी सेवा कर सकते है.🚩🚩🚩🚩जय सीताराम

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