Posted in छोटी कहानिया - १००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

अरुण पांडे

~ अभिमान और नम्रता ~
. 〰〰〰〰〰

एक बार नदी को अपने पानी के
प्रचंड प्रवाह पर घमंड हो गया.
नदी को लगा कि …
मुझमें इतनी ताकत है कि मैं
पहाड़, मकान, पेड़, पशु, मानव आदि
सभी को बहाकर ले जा सकती हूँ.

एक दिन नदी ने बड़े गर्वीले अंदाज में
समुद्र से कहा ~ बताओ !
मैं तुम्हारे लिए क्या-क्या लाऊँ ?
मकान, पशु, मानव, वृक्ष
जो तुम चाहो, उसे …
मैं जड़ से उखाड़कर ला सकती हूँ.

समुद्र समझ गया कि …
नदी को अहंकार हो गया है.
उसने नदी से कहा ~
यदि तुम मेरे लिए
कुछ लाना ही चाहती हो, तो …
थोड़ी सी घास 🌾 उखाड़कर ले आओ.

नदी ने कहा ~ बस … इतनी सी बात.
अभी लेकर आती हूँ.

नदी ने अपने जल का पूरा जोर लगाया
पर … 🌾घास नहीं उखड़ी.
नदी ने कई बार जोर लगाया, लेकिन …
असफलता ही हाथ लगी.

आखिर नदी हारकर …
समुद्र के पास पहुँची और बोली ~
मैं वृक्ष, मकान, पहाड़ आदि तो
उखाड़कर ला सकती हूँ. मगर
जब भी घास 🌾 को उखाड़ने के लिए
जोर लगाती हूँ, तो वह नीचे की ओर
झुक जाती है और मैं खाली हाथ
ऊपर से गुजर जाती हूँ.

समुद्र ने नदी की पूरी बात ध्यान से सुनी
और मुस्कुराते हुए बोला ~
जो पहाड़ और वृक्ष जैसे
कठोर होते हैं,
👉 वे आसानी से उखड़ जाते हैं.
किन्तु …
घास 🌾जैसी विनम्रता
जिसने सीख ली हो,
उसे प्रचंड आँधी-तूफान या
प्रचंड वेग भी नहीं उखाड़ सकता. 👈
🌷राधे राधे🌷
🌷जय माता की🌷

Posted in मंत्र और स्तोत्र

।।श्रीराम।।
अयोध्येमध्ये ज्यावेळी पुत्रकामेष्ठी यज्ञ करण्याचे दशरथ राजांनी ठरविले।तेव्हा विभांडक् ऋषिंचा मुलगा ऋष्यशृंग याला पाचारण केले।त्याने जेव्हा अयोध्या नगरीत प्रवेश केला तेव्हा खूप पर्जन्यवृष्टी झाली।त्यावेळी अयोध्येत सुद्धा पावसाचे दुर्भिक्ष्य होते।म्हणून तेव्हा पासून रूढी पडून गेली की पाऊस पडत नसेल तर त्याची स्तुती असलेला श्र्लोक सगळी जनता म्हणायला लागली।तेव्हा सगळयांना विनंती अशी की पुढे तो श्र्लोक देत आहे त्याचा आजपासून आपण सगळयांनी व आपल्या मित्र परिवाराला जप करण्याची विनंती करावी।आता परीस्थीती तशीच निर्माण झाली आहे की पाऊस पडणे खूप गरजेचे आहे म्हणून कृपया सहकार्य करावे ही विनंती।

ऋष्यशृंगाय मुनये विभांडक् सुतायच।
नमः शांताधिपतये सदयसद् वृष्टी हेतवे।।

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मानस अमृत

हनुमानजी का चित्र घर में कहाँ लगायें?

श्रीराम भक्त हनुमान साक्षात एवं जाग्रत देव हैं। हनुमानजी की भक्ति जितनी सरल है उतनी ही कठिन भी। कठिन इसलिए की इसमें व्यक्ति को उत्तम चरित्र और मंदिर में पवित्रता रखना जरूरी है अन्यथा इसके दुष्परिणाम भुगतने होते हैं |

हनुमानजी की भक्ति से चमत्कारिक रूप से संकट खत्म होकर भक्त को शांति और सुख प्राप्त होता है। विद्वान लोग कहते हैं कि जिसने एक बार हनुमानजी की भक्ति का रस चख लिया वह फिर जिंदगी में अपनी बाजी कभी हारता नहीं। जो उसे हार नजर आती है वह अंत में जीत में बदल जाती है। ऐसे भक्त का कोई शत्रु नहीं होता।

आपने हनुमानजी के बहुत से चित्र देखे होंगे। जैसे- पहाड़ उठाए हनुमानजी, उड़ते हुए हनुमानजी, पंचमुखी हनुमानजी, रामभक्ति में रत हनुमानजी, छाती चीरते हुए, रावण की सभा में अपनी पूंछ के आसन पर बैठे हनुमानजी, लंका दहन करते हनुमान, सीता वाटिका में अंगुठी देते हनुमानजी, गदा से राक्षसों को मारते हनुमानजी, विशालरूप दिखाते हुए हनुमानजी, आशीर्वाद देते हनुमानजी।

राम और लक्षमण को कंधे पर उठाते हुए हनुमानजी, रामायण पढ़ते हनुमानजी, सूर्य को निगलते हुए हनुमानजी, बाल हनुमानजी, समुद्र लांगते हुए हनुमानजी, श्रीराम-हनुमानजी मिलन, सुरसा के मुंह से सूक्ष्म रूप में निकलते हुए हनुमानजी, पत्थर पर श्रीराम नाम लिखते हनुमानजी, लेटे हुए हनुमानजी, खड़े हनुमानजी, शिव पर जल अर्पित करते हनुमानजी, रामायण पढ़ते हुए हनुमानजी, अखाड़े में हनुमानजी शनि को पटकनी देते हुए, ध्यान करते हनुमानजी, श्रीकृष्ण रथ के उपर बैठे हनुमानजी, गदा को कंधे पर रख एक घुटने पर बैठे हनुमानजी, पाताल में मकरध्वज और अहिरावण से लड़ते हनुमानजी, हिमालय पर हनुमानजी, दुर्गा माता के आगे हनुमानजी, तुलसीदासजी को आशीर्वाद देते हनुमानजी, अशोक वाटिका उजाड़ते हुए हनुमानजी, श्रीराम दरबार में नमस्कार मुद्रा में बैठे हनुमानजी आदि।

जिस घर में हनुमानजी का चित्र होता है वहां मंगल, शनि, पितृ और भूतादि का दोष नहीं रहता।

हनुमानजी के भक्त हैं तो घर में हनुमानजी के चित्र कहां और किस प्रकार के लगाएं यह जानना जरूरी है। आओ आज हम आपको बताते हैं श्री हनुमानजी के चित्र लगाने के कुछ नियम।

किस दिशा में लगाएं हनुमानजी का चित्र : – वास्तु के अनुसार हनुमानजी का चित्र हमेशा दक्षिण दिशा की ओर देखते हुए लगाना चाहिए। यह चित्र बैठी मुद्रा में लाल रंग का होना चाहिए।

दक्षिण दिशा की ओर मुख करके हनुमानजी का चित्र इसलिए अधिक शुभ है क्योंकि हनुमानजी ने अपना प्रभाव सर्वाधिक इसी दिशा में दिखाया है। हनुमानजी का चित्र लगाने पर दक्षिण दिशा से आने वाली हर बुरी ताकत हनुमानजी का चित्र देखकर लौट जाती है। इससे घर में सुख और समृद्धि बढ़ती है।

शयनकक्ष में न लगाएं हनुमान चित्र : – शास्त्रों के अनुसार हनुमानजी बाल ब्रह्मचारी हैं और इसी वजह से उनका चित्र शयनकक्ष में न रखकर घर के मंदिर में या किसी अन्य पवित्र स्थान पर रखना शुभ रहता है। शयनकक्ष में रखना अशुभ है।

भूत, प्रेत आदि से बचने हेतु : – यदि आपको लगता है कि आपके घर पर नकारात्मक शक्तियों का असर है तो आप हनुमानजी का शक्ति प्रदर्शन की मुद्रा में चित्र लगाएं। आप चाहे तो पंचमुखी हनुमानजी का चित्र मुख्य द्वार के ऊपर लगा सकते हैं या ऐसी जगह लगाएं जहां से यह सभी को नजर आए। ऐसा करने से घर में किसी भी तरह की बुरी शक्ति प्रवेश नहीं करेगी।

पंचमुखी हनुमान:- वास्तुविज्ञान के अनुसार पंचमुखी हनुमानजी की मूर्ति जिस घर में होती है वहां उन्नति के मार्ग में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और धन संपत्ति में वृद्घि होती है।

जलस्रोत दोष : यदि भवन में गलत दिशा में कोई भी जल स्रोत हो तो इस वास्तु दोष के कारण परिवार में शत्रु बाधा, बीमारी व मन मुटाव देखने को मिलता है। इस दोष को दूर करने के लिए उस भवन में ऐसे पंचमुखी हनुमान का चित्र लगाना चाहिए। जिनका मुख उस जल स्रोत की ओर देखते हुए दक्षिण पाश्चिम दिशा की तरफ हो।

बैठक रूप में : – बैठक रूम में आप श्रीराम दरबार का फोटो लगाएं, जहां हनुमानजी प्रभु श्रीरामजी के चरणों में बैठे हुए हैं। इसके अलावा बैठक रूम में पंचमुखी हनुमानजी का चित्र, पर्वत उठाते हुए हनुमानजी का चित्र या श्रीराम भजन करते हुए हनुमानजी का चित्र लगा सकते हैं। ध्यान रखें कि उपरोक्त में से कोई एक चित्र लगा सकते हैं।

पर्वत उठाते हुए हनुमान का चित्र : – यदि यह चित्र आपके घर में है तो आपमें साहस, बल, विश्‍वास और जिम्मेदारी का विकास होगा। आप किसी भी परिस्‍थिति से घबराएंगे नहीं। हर परिस्थिति आपके समक्ष आपको छोटी नजर आएगी और तुरंत ही उसका समाधान हो जाएगा।

उड़ते हुए हनुमान: – यदि यह चित्र आपके घर में है तो आपकी उन्नती, तरक्की और सफलता को कोई रोक नहीं सकता। आपमें आगे बढ़ने के प्रति उत्साह और साहस का संचार होगा। निरंतर आप सफलता के मार्ग पर बढ़ते जाएंगे |

श्रीराम भजन करते हुए हनुमान : – यदि यह चित्र आपके घर में है तो आपमें भक्ति और विश्‍वास का संचार होगा। यह भक्ति और विश्‍वास ही आपके जीवन की सफलता का आधार है।

!!”जय सियाराम जी”!!
!!”जय हनुमान जी”!!
!!”जय श्री राम”!!

Posted in छोटी कहानिया - १००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

एक वृद्ध माँ रात को 11:30 बजे रसोई में बर्तन साफ कर रही है, घर में दो बहुएँ हैं, जो बर्तनों की आवाज से परेशान होकर अपने पतियों को सास को उल्हाना देने को कहती हैं

वो कहती है आपकी माँ को मना करो इतनी रात को बर्तन धोने के लिये हमारी नींद खराब होती है साथ ही सुबह 4 बजे उठकर फिर खट्टर पट्टर शुरू कर देती है सुबह 5 बजे पूजा

आरती करके हमे सोने नही देती ना रात को ना ही सुबह जाओ सोच क्या रहे हो जाकर माँ को मना करो

बड़ा बेटा खड़ा होता है और रसोई की तरफ जाता है रास्ते मे छोटे भाई के कमरे में से भी वो ही बाते सुनाई पड़ती जो उसके कमरे हो रही थी वो छोटे भाई के कमरे को खटखटा देता है छोटा भाई बाहर आता है

दोनो भाई रसोई में जाते हैं, और माँ को बर्तन साफ करने में मदद करने लगते है , माँ मना करती पर वो नही मानते, बर्तन साफ हो जाने के बाद दोनों भाई माँ को बड़े प्यार से उसके कमरे में ले जाते है , तो देखते हैं पिताजी भी जागे हुए हैं

दोनो भाई माँ को बिस्तर पर बैठा कर कहते हैं, माँ सुबह जल्दी उठा देना, हमें भी पूजा करनी है, और सुबह पिताजी के साथ योगा भी करेंगे

माँ बोली ठीक है बच्चों, दोनो बेटे सुबह जल्दी उठने लगे, रात को 9:30 पर ही बर्तन मांजने लगे, तो पत्नियां बोलीं माता जी करती तो हैं आप क्यों कर रहे हो बर्तन साफ, तो बेटे बोले हम लोगो की शादी करने के पीछे एक कारण यह भी था कि माँ की सहायता हो जायेगी पर तुम लोग ये कार्य नही कर रही हो कोई बात नही हम अपनी माँ की सहायता कर देते है

हमारी तो माँ है इसमें क्या बुराई है , अगले तीन दिनों में घर मे पूरा बदलाव आ गया बहुएँ जल्दी बर्तन इसलिये साफ करने लगी की नही तो उनके पति बर्तन साफ करने लगेंगे साथ ही सुबह भी वो भी पतियों के साथ ही उठने लगी और पूजा आरती में शामिल होने लगी

कुछ दिनों में पूरे घर के वातावरण में पूरा बदलाव आ गया बहुएँ सास ससुर को पूरा सम्मान देने लगी ।
🙏🏽🌹🙏🏽🌹🙏🏽 कहानीका सार।
माँ का सम्मान तब कम नही होता जब बहुवे उनका सम्मान नही करती , माँ का सम्मान तब कम होता है जब बेटे माँ का सम्मान नही करे या माँ के कार्य मे सहयोग ना करे ।
🙏🏽🙏🏽🙏🏽
जन्म का रिश्ता हैं
माता पिता पहले आपके हैं
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