Posted in हास्यमेव जयते

एक दिन एक बहुत बड़े कजूंस सेठ के घर में कोई मेहमान आया!

कजूंस ने अपने बेटे से कहा,

आधा किलो बेहतरीन मिठाई ले आओ।
बेटा बाहर गया और कई घंटों बाद वापस आया।

😊😊

कंजूस ने पूछा मिठाई कहाँ है।

बेटे ने कहना शुरू किया-” अरे पिताजी, मैं मिठाई की दुकान पर गया और हलवाई से बोला कि सबसे अच्छी मिठाई दे दो।

हलवाई ने कहा कि ऐसी मिठाई दूंगा बिल्कुल मक्खन जैसी।

फिर मैंने सोचा कि क्यों न मक्खन ही ले लूं।
मैं मक्खन लेने दुकान गया और बोला कि सबसे बढ़िया मक्खन दो।
दुकान वाला बोला कि ऐसा मक्खन दूंगा बिल्कुल शहद जैसा।

मैने सोचा क्यों न शहद ही ले लूं। मै फिर गया शहद वाले के पास और उससे कहा कि सबसे मस्त वाला शहद चाहिए।
वो बोला ऐसा शहद दूंगा बिल्कुल पानी जैसा साफ।

तो पिताजी फिर मैंने सोचा कि पानी तो अपने घर पर ही है और मैं चला आया खाली हाथ।

कंजूस बहुत खुश हुआ और अपने बेटे को शाबासी दी।
लेकिन तभी उसके मन में कुछ शंका उतपन्न हुई।

“लेकिन बेटे तू इतनी देर घूम कर आया।
चप्पल तो घिस गयी होंगी।”

“पिताजी ये तो उस मेहमान की चप्पल हैं जो घर पर आया है।”

बाप की आंखों मे खुशी के आंसू आ गए ।

😂😂😂😂😂

Posted in मातृदेवो भव:

सासरी न सांगता कण कण काम करणाऱ्या , आपण माहेरी असल्यावर प्रत्येक वेळी आईने सांगितलेलं काम कस झिडकारत होतो …हे मात्र लग्न झाल्यावर क्षणोक्षणी आठवत राहत. 😶

कस जगतो आपण… गुर्मीत😛चक्क.. “मी नाही करत.. ते काम मला कंटाळा आला बरं,” अस म्हणून सोडून पळून जातो मैत्रिणिकडे गप्पा ठोकायला… 😢

आई नी जर फक्त,” चहा टाक म्हटलं .. तर 100 कारण सांगून चहा न करणाऱ्या आपण सासरी 100 वेळी हसत मुखाने चहा करतो… 😃 ❤

जर कधी एखाद्या वेळी काम थोडं जास्त झालं आणि हात पाय दुखतात तेव्हा आईची सहजच आठवण येऊन जाते,कारण एखादेवेळी ती पण म्हणलेली आठवते ,”थोडे हात चेपून दे ग..! ” पण तेव्हा तितकं आपण मनावर घेत नाही आणि 1,2 मिनिटं चेपून बाजूला होतो… 😶

आज अस वाटतंय की माहेरी गेल्यावर पण आईने न सांगता तिला आपण 1 कप चहा करून द्यावा, तिला आयतं जेवायला द्यावं.. नसतील तिचे हात पाय दुखंत तरी चेपून द्यावे… 😔
पण शेवटी ती आईच ना,तिला वाटतं लेकरू 2 दिवस माहेरी आलंय आणि तिला काय काम करू द्यायचं नाही, ती नाहीच करू देत.. उलट आपण गेलं की नवं नवीन करून खायला घालेल मांडीवर घेऊन थोपटेल. 😇😇

सर्व आई खरच ग्रेटचं असतात.-😊😊😘😘😘
खूप काही असे अनुभव असतात आणि एखाद्या picture सारखे समोर येत राहतात. 😊

#लव युआई😘😘😘😘😘

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Posted in छोटी कहानिया - १००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

लड्डू गोपाल जी की लीला

एक बार की बात है कि यशोदा मैया प्रभु श्री कृष्ण के उलाहनों से तंग आ गयीं और छड़ी लेकर श्री कृष्ण की ओर दौड़ी । जब प्रभु ने अपनी मैया को क्रोध में देखा तो वह अपना बचाव करने के लिबए भागने लगे ।
भागते-भागते श्री कृष्ण एक कुम्हार के पास पहुँचे । कुम्हार तो अपने मिट्टी के घड़े बनाने में व्यस्त था । लेकिन जैसे ही कुम्हार ने श्री कृष्ण को देखा तो वह बहुत प्रसन्न हुआ । कुम्हार जानता था कि श्री कृष्ण साक्षात् परमेश्वर हैं । तब प्रभु ने कुम्हार से कहा कि ‘कुम्हार जी, आज मेरी मैया मुझ पर बहुत क्रोधित है । मैया छड़ी लेकर मेरे पीछे आ रही है । भैया, मुझे कहीं छुपा लो ।’
तब कुम्हार ने श्री कृष्ण को एक बडे से मटके के नीचे छिपा दिया । कुछ ही क्षणों में मैया यशोदा भी वहाँ आ गयीं और कुम्हार से पूछने लगी – ‘क्यूँ रे, कुम्हार ! तूने मेरे कन्हैया को कहीं देखा है, क्या ?’
कुम्हार ने कह दिया – ‘नहीं, मैया ! मैंने कन्हैया को नहीं देखा ।’ श्री कृष्ण ये सब बातें बडे से घड़े के नीचे छुपकर सुन रहे थे । मैया तो वहाँ से चली गयीं ।
अब प्रभु श्री कृष्ण कुम्हार से कहते हैं – ‘कुम्हार जी, यदि मैया चली गयी हो तो मुझे इस घड़े से बाहर निकालो ।’
कुम्हार बोला – ‘ऐसे नहीं, प्रभु जी ! पहले मुझे चौरासी लाख यानियों के बन्धन से मुक्त करने का वचन दो ।’
भगवान मुस्कुराये और कहा – ‘ठीक है, मैं तुम्हें चौरासी लाख योनियों से मुक्त करने का वचन देता हूँ । अब तो मुझे बाहर निकाल दो ।’
कुम्हार कहने लगा – ‘मुझे अकेले नहीं, प्रभु जी ! मेरे परिवार के सभी लोगों को भी चौरासी लाख योनियों के बन्धन से मुक्त करने का वचन दोगे तो मैं आपको इस घड़े से बाहर निकालूँगा ।’
प्रभु जी कहते हैं – ‘चलो ठीक है, उनको भी चौरासी लाख योनियों के बन्धन से मुक्त होने का मैं वचन देता हूँ । अब तो मुझे घड़े से बाहर निकाल दो ।’
अब कुम्हार कहता है – ‘बस, प्रभु जी ! एक विनती और है । उसे भी पूरा करने का वचन दे दो तो मैं आपको घड़े से बाहर निकाल दूँगा ।’
भगवान बोले – ‘वो भी बता दे, क्या कहना चाहते हो ?’
कुम्भार कहने लगा – ‘प्रभु जी ! जिस घड़े के नीचे आप छुपे हो, उसकी मिट्टी मेरे बैलों के ऊपर लाद के लायी गयी है । मेरे इन बैलों को भी चौरासी के बन्धन से मुक्त करने का वचन दो ।’
भगवान ने कुम्हार के प्रेम पर प्रसन्न होकर उन बैलों को भी चौरासी के बन्धन से मुक्त होने का वचन दिया ।’
प्रभु बोले – ‘अब तो तुम्हारी सब इच्छा पूरी हो गयी, अब तो मुझे घड़े से बाहर निकाल दो ।’
तब कुम्हार कहता है – ‘अभी नहीं, भगवन ! बस, एक अन्तिम इच्छा और है । उसे भी पूरा कर दीजिये और वो ये है – जो भी प्राणी हम दोनों के बीच के इस संवाद को सुनेगा, उसे भी आप चौरासी लाख योनियों के बन्धन से मुक्त करोगे । बस, यह वचन दे दो तो मैं आपको इस घड़े से बाहर निकाल दूँगा ।’
कुम्हार की प्रेम भरी बातों को सुन कर प्रभु श्री कृष्ण बहुत खुश हुए और कुम्हार की इस इच्छा को भी पूरा करने का वचन दिया ।
फिर कुम्हार ने बाल श्री कृष्ण को घड़े से बाहर निकाल दिया । उनके चरणों में साष्टांग प्रणाम किया । प्रभु जी के चरण धोये और चरणामृत पीया । अपनी पूरी झोंपड़ी में चरणामृत का छिड़काव किया और प्रभु जी के गले लगकर इतना रोये क़ि प्रभु में ही विलीन हो गये ।
जरा सोच करके देखिये, जो बाल श्री कृष्ण सात कोस लम्बे-चौड़े गोवर्धन पर्वत को अपनी इक्क्नी अंगुली पर उठा सकते हैं, तो क्या वो एक घड़ा नहीं उठा सकते थे ।
लेकिन बिना प्रेम रीझे नहीं नटवर नन्द किशोर । कोई कितने भी यज्ञ करे, अनुष्ठान करे, कितना भी दान करे, चाहे कितनी भी भक्ति करे, लेकिन जब तक आपके दिल मे प्राणी के लिए दुख दर्द नही है तो प्रभु श्री कन्हा जी की भक्ति व उनका दर्शन नही हो सकता । बोलो गोविन्द जय जय गोपाल जय जय
राधे राधे

Posted in कविता - Kavita - કવિતા

शाळेत बाई म्हणाल्या : आपल्या
आवडत्या विषयावर निबंध लिहा..
एका मुलाने बघा किती सुंदर निबंध लिहिला…
विषय –
दगड

‘दगड’ म्हणजे ‘देव’ असतो..
कारण तो आपल्या आजूबाजूला
सगळीकडे असतो.. पाहीलं तर दिसतो..

अनोळख्या गल्लीत तो
कुत्र्यापासून आपल्याला वाचवतो..

हायवे वर गाव
केव्हा लागणार आहे ते दाखवतो..

घराभोवती कुंपण बनून रक्षण करतो..

स्वैयंपाक घरात
आईला वाटण करून देतो..

मुलांना झाडावरच्या
कैऱ्या, चिंचा पाडून देतो..

कधीतरी आपल्याच डोक्यावर बसून
भळाभळा रक्त काढतो आणि
आपल्या शत्रूची जाणीव करून देतो..

माथेफिरू तरुणांच्या हाती लागला तर,,
काचा फोडून त्याचा राग शांत करतो..

रस्त्यावरच्या मजुराचं
पोट सांभाळण्यासाठी
स्वत:ला फोडुन घेतो..

शिल्पकाराच्या मनातलं
सौंदर्य साकार करण्यासाठी
छिन्निचे घाव सहन करतो..

शेतकऱ्याला
झाडाखाली क्षणभर विसावा देतो..

बालपणी तर स्टंप, ठिकऱ्या, लगोरी अशी
अनेक रूपं घेऊन आपल्याशी खेळतो..

सतत आपल्या मदतीला
धावून येतो, ‘देवा’सारखा..

मला सांगा,,
‘देव’ सोडून कोणी करेल का
आपल्यासाठी एवढं ??

बाई म्हणतात –
तू ‘दगड’ आहेस,, तुला गणित येत नाही..
आई म्हणते –
काही हरकत नाही,,
तू माझा लाडका ‘दगड’ आहेस..
देवाला तरी कुठे गणित येतं ! नाहीतर
त्याने फायदा-तोटा बघितला असता..
तो व्यापारी झाला असता.”

आई म्हणते –
दगडाला शेंदुर फासून
त्यात भाव ठेवला की,
त्याचा ‘देव’ होतो ~

म्हणजे, ‘दगड’ च ‘देव’ असतो ~

Posted in હાસ્ય કવિતા

॥पत्नी पचासा॥मेरी पुस्तक “दहेज मे साली”से

जैसे हनुमान चालीसा है, वैराग्य शतक है वैसे ही यह पत्नी पचासा है।इसका नित्य पाठ करने से अलौकिक सुख की प्राप्ति होती है और दाम्पत्य जीवन सुखी होता है।

     जय जय हे पति कल्यानी
     तेरी इस जग मे ना सानी।

     पति के लिये तो तू है कामिनी
     पति पर चमके जैसे दामिनी।

     एक हाथ में बेलन साजे
     एक हाथ से चिमटा भांजे।

     बड़े बड़े नाखून तुम्हारे
     दंत नुकीले नयन करारे।

     रौद्र रूप जब तू दिखलावे
     पति को छठी का दूध याद आवे।

     दोनो प्रहर जब करो श्रीन्गार 
     पड़ोसियों को होय बुखार।

     गले मे स्वर्ण सुशोभित माला
     मोटे होठ लिपस्टिक काला।

     नये नये नित फैसन करती
     सास ससुर से कभी न डरती।।

     पति का भाई साग बराबर।
     अपना भाई हो सर्वोपरि॥

     पति की सतत करे निगरानी ।
     पति को समझे वह अज्ञानी॥

     खुद को समझे पति से स्यानी
     करती वही जो मन मे ठानी।।

     पति ने गर कर दी नादानी
     समझो उसकी शामत आनी।।

     पति को पतला दाल खिलाती
     खुद खा जाती दाल मखानी।।

     अपना सिर ऊँचा करने को
      पति का धन दे बनती दानी।।    

     पति को दूध दही गर देवे
     उसके बदले सब कुछ लेवे।।

     पति से खाना भी बनवाना
     अच्छा खाना खुद खा जाना।।

     पति को बहुविधी कष्ट वो देवे
     खुद खा जाये मिठाई मेवे।।

     पति को पाकेट नित्य टटोले
     पति की क्या हिम्मत जो बोले ॥

     उसका रहता ऐसा जज्बा।
     तनखा पर झट कर ले कब्जा॥

     पति जो मागें पचास रुपैया।
     कहती हंस क्या करोगे भैया॥

     खाली हाथ मैके से आवे।
     पति का धन मैके पहुंचावे॥

     तलाक की दे हरदम धमकी।
     पति को करार करा दे सनकी॥

     पति को कहती दुष्ट निशाचर।
     पति कहता हे देवी दया कर॥

     पति रात को देर से आवे।
     तो उसकी शामत आ जावे॥

     रोष से तब छुटकारा पावे
     जब पत्नी का पैर दबावे॥

     पति की करती हुक्म उदूली
      गाजर मांगे तो देती मूली॥

     पत्नी से है को सुख पावा
     पत्नी है बस एक छलावा॥

     पत्नी यदि पहले मर जावे
     पति को स्वर्ग में जल्द बुलावे॥

     भुत पिशाच निकट नही आवे
     पत्नी को गर साथ सुलावे॥

      पति का राज उगलवा लेती
     अपना राज न हरगिज देती॥

     मैके की नित करे बड़ाई
     कहती ऊंचे कुल से आई॥

     बडी मान मर्यादा वाले
     उसके पापा उसके भाई॥

     जब वह अपने मैके जाती
     सहेलियों पर रोब जमाती॥

     कहती उसका पति धनवान
     उसकी है समाज में मान॥
     इतना दरिया दिल उसका पति
     साल में लाखो देता दान॥

     सिगरेट को ना हाथ लगाता
     ना खाता वो खैनी पान॥
     लाखों मे वह रोज खेलता
    फिर भी उसे नही अभिमान॥

     पति का करना हो जब दोहन
     उसे खिलाती हलवा सोहन॥

     पत्नी लडे गर कोई चुनाव
     उसका बढ जाता है भाव॥

     पत्नी गर चुनाव जीत ले
     करती रहती वो देशाटन॥
     कभी घुमती झुमरीतलैया
     कभी घुमती देवीपाटन॥

     करे फोन से वार्ता लम्बी
     अन्जाना हो या संबंधी॥

     वाकयुद्ध मे तुम अति माहिर
     कटु सत्य करता जगजाहिर॥

     अगर गलत नम्बर मिल जावे
     तो भी वो घंटों बतियावे ॥
     टेलीफोन का बिल जब आवे
     पति की आंखें चुधिंया जावे॥

     राज की बात करे जगजाहिर
     चुगली करने मे अति माहिर॥

     सास ससुर या ननद भौजाई
     भूले से गर उसे सताये॥
     तो दहेज की नालीश करके
     अपनी उन्हें औकात बतावे॥

     इसीलिए तुम इस कलियुग मे
     पत्नी से तकरार न करना।
     पत्नी भले यार भी कर ले
     तुम न किसी चक्कर मे पड़ना।
     दूजी पत्नी मिलनी मुश्किल
     सो पत्नी से रार न करना॥

     लक्ष्मी दुर्गा और सरस्वती जी
     देवी तो हैं बस मंदिर की
     लेकिन पत्नी होती है देवी
     केवल घर के अन्दर की॥

युग बदला अब पत्नी चलती आगे आगे
पति देव चले पत्नी के पीछे भागे भागे॥

     पत्नी आफिस से डयूटी करके
     देर रात घर आती है
     पति थके हुए सोये रहते
     सोये से उन्हें जगाती है॥

     खाना गरमा वे लाते हैं
     व दस्तरखान बिछाते हैं।
     पानी लाते पंखा झलते
     और फिल्मी गाना गाते हैं॥

     तू ही दुर्गा तू ही काली।
     तू ही माया तू ही भवानी।
     करती हो तुम वही सदा
     जो अपने मन मे तुमने ठानी॥

     पति ने गर कर दी नादानी।
     याद करा दे उसकी नानी।
     रिस्ते बहुत बनाये प्रभु ने
     पर ना इस रिश्ते की सानी॥

     त्रिया चरित्र समग्र रुप से
     पत्नी उपर ही है फबता।
     भाग्य पुरुष का सब जाने है
     पत्नी के बल से है चलता॥

     जो नित पढे यह पत्नी पचासा।
     होय न फिर पत्नी का दासा॥

लड़कों के बारें में दुनिया की सबसे बड़ी गलतफहमी
“शादी कर दो सुधर जाएगा”
😂😂😂😂😂

     जो शत बार पाठ करे सोई।
     अगले जन्म पतिदेव न होई॥
             ॥समाप्त॥-
         जगदीश खेतान
               मौलिक
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एक बार एक लडके को अपनी ही‬‬‬‬‬ कॉलेज कि एक


एक बार एक लडके को अपनी ही‬‬‬‬‬
कॉलेज कि
एक
लडकी से प्यार हो गया था लडके ने
लडकी
को
को दोस्त बनाया पर अपने प्यार का
इजहार
ना कर सका क्योँकी वो डरता था कि
कहीँ
लडकी ने मना कर दिया तो दोस्ती
भी टुट
जाऐगी और वो ऊससे कभी बात तक
नही
करेगी
ईसी वजह से वो लडका परपोज करनै से डरता
था उनकी दोस्ती जितनी
गहरी हो रही
थी
लडके का प्यार भी उतना ही गहरा
होता
गया
धीरे धीरे कॉलेज भी खतम
हौ गया पर लडके
ने
अपने प्यार का इजहार नही किया वो डर
उसे
प्यार का इजहार करने से रोक लेता था
कॉलेज
पुरा हो गया था इसलिए वो बाहर ही
मिलते
थे एक दिन लडके ने हिम्मत करके लडकी को
कॉल किया और कहॉ कि मुझे तुमसे कुछ
जरुरी
बात करनी है लडकी ने कहॉ कि मुझे
भी
तुमसे
कुछजरुरी बात करनी है होटल मै
मिलते है
लडका शाम को ये ठान कर गया कि आज मै
अपने
प्यार का इजहार करकै हि रहुँगा चाहै कुछ
भी
हो लडकी कहती है कि पहले तुम
अपनी बात
कहोगे या मै अपनी बात कहुँ लडका कहता है
कि पहले तुम ही कहो लडकी
कहती है कि
अगले
हप्ते मैरी शादी हौ रही
है और खासकर तुमे
जरुर आना है लडका ने ये शुनते ही जैसै दिल कै
अन्दर से आशमान कि टुटने कि आवाज आई
फिर
लडकी बोली कि अब तुम कहो लडके ने
कहाँ
कि
मैनै देर करदी शायद पहलै मै अपनी
बात करता
इतना कह कर लडका चला जाता है और
लडकी
अपनै घर चली जाती है दुसरै दिन
लडका
लडकी
को कॉल करके एक पार्क मै बुलाता है और
कहता है कि मै पढाई कै लिए अमेरीका जा
रहा हूँ मै तुम्हारी शादी मै
नही आ पाऊगाँ
इतना कह कर लडका रोते हुऐ जाता है तो
लडकी बस इतना कहती है कि जिससे
मै
शादी
करने जा रहुँ उसका यहाँ होना भी तो
जरुरी
है लडका कहता कि पर वो तो यहॉ है ना
लडकी कहती कि पागल मै तुमसे
शादी कर
रही
हूँ तेरे दौस्त ने मुझे 1 महिने पहले सब कुछ बता
दिया
Morl दोस्त होतो ऐसा

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एक दिन चिड़िया बोली – मुझे छोड़ कर कभी उड़ तो नहीं जाओगे


🌹एक दिन चिड़िया बोली – मुझे छोड़ कर कभी उड़ तो नहीं जाओगे❣

🌹चिड़ा ने कहा – उड़
जाऊं तो तुम पकड़ लेना.❣

🌹चिड़िया-मैं तुम्हें पकड़
तो सकती हूँ,
पर फिर पा तो नहीं सकती…❣

🌹यह सुन चिड़े की आँखों में आंसू आ गए और उसने अपने पंख तोड़ दिए और बोला अब हम
हमेशा साथ रहेंगे,❣

🌹लेकिन एक दिन जोर से तूफान आया,
चिड़िया उड़ने लगी तभी चिड़ा बोला तुम उड़
जाओ मैं नहीं उड़ सकता..❣

🌹चिड़िया- अच्छा अपना ख्याल रखना, कहकर
उड़ गई !❣

🌹जब तूफान थमा और चिड़िया वापस
आई तो उसने देखा की चिड़ा मर चुका था❣
❣और एक डाली पर लिखा था…❣

✍काश तुम एक बार तो कहती कि मैं तुम्हें नहीं छोड़ सकती””❣
🌹तो शायद मैं तूफ़ान आने से
पहले नहीं मरता❣