Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

प.अभिषेक जोशी

“एक कहानी”
~~~~~~~~

” राम राम कैसी सडी गर्मी पड रही है? ”
स्टेशन पर खड़ी नवयौवना ने अपने पति से कहा था। पति ने उसकी ओर घूमकर देखा था, अब तक जो लंबा सा घूंघट उसने डाल रखा था ,
वह घूंघट उलट दिया था।
एक छोटे से रेल्वे स्टेशन पर बहुत कम गाडि़यां रुकती थीं। दिन की दोपहरी में अपने दूरस्थ बीहड़ गांव से निकलकर फिर सात कोस पैदल चलकर रेल पकडने आना असंभव नहीं तो कठिन अवश्य था।
इसीलिये रात वाली रेलगाड़ी का ही सहारा था। अपनी
बीमार मां को देखने ना जाना होता तो वह इतनी गर्मी में
अपने घर से ना निकलती। पति पास के कस्बे में सौदा सुलफ लाने गया था, वहाँ ही किसीने उसे पत्नी की माँ की बीमारी का
समाचार दिया था। उसके बाद तो उसने रट ही लगा दी कि मुझे
मेरी मां के पास जाना है।

सास ने कुछ कहना चाहा था लेकिन
उसके पहले ही वह सिंहनी सी गरज उठी थी,
“माँ को देखने वास्ते मुझे जाना है तो बस जाना है। मुझसे जितनी चाकरी करवानी हो बाद में करवा लीजियो, अभी तो मन्ने कोई ना रोके।”
आनन फानन में वह पति के साथ दिन ढलते ही निकल पड़ी थी। गांव से स्टेशन की दूरी ज्यादा नहीं थी लेकिन पदयात्री के
लिये कष्टकारी तो थी ही। वैसे गांव में रहने वालों के लिए यह
कोई नयी बात नहीं थी लेकिन उनके लिए आधी रात को स्टेशन पर जाकर रेल में बैठना किसी जोखिम से कम नहीं होता था।

रात घिरने के पहले ही दोनों स्टेशन पर पहुंच गए थे। स्टेशन भी एकदम बियावान था। वहां अंधेरे ने अपना साम्राज्य फैला रखा था।
सबसे पहले दोनों ने अपना पसीना सुखाया। हाथ का पंखा
हिलाया डुलाया, फिर साथ में लाया कलेवा निकाला लेकिन पानी? वह तो बीच डगर में ही खत्म हो चला था, बस दो घूंट पानी मुसीबत से बचने के लिए रखा था। दूर गुमटी में एक
चायवाले की दुकान दिख रही थी। वहां पानी की पूछताछ करी तो पता चला कि यहां से लगभग दो किलोमीटर की दूरी पर हैंडपंप है। सभी लोग वहीं से पानी लाते हैं। पति निरुपाय होकर लौट पडा़।

आकर पत्नी से कहा
” क्यों री, तू यहां पर अकेली बैठ सकेगी क्या? मै पीने का पानी लेकर आता हूँ। ”
“ना जी ना, इतनी अंधेरे में मैं ना बैठ रही अकेले। मुझे डर लगता है।
मुझे भी साथ ले चलो, फिर उधर ही रोटी पानी खा लेंगे। अभी
तो गाड़ी आने में देर है। ”
पत्नी का सुझाव पसंद आया लेकिन वह उस कोमलांगी को शायद कष्ट नहीं देना चाहता था, इसलिए अकेले ही जाना चाहता था। कुछ सोचा फिर दोनों ने अपना गट्ठर उठाया और थोड़ी देर बाद दोनों हैंडपंप के पास थे। वहां एक बड़ा सा कुंआ भी था और हैंडपंप तो था ही। साफ सुथरी जगह ढूंढकर खाना खाया। जी भरकर पानी पिया और साथ में लायी बोतल में पानी भरा और स्टेशन पर फिर आ पहुंचे।

धीरे धीरे रात बढती जा रही थी और खाना खाने के बाद आंखें
भी नींद से बोझिल होने लगी थीं लेकिन अभी तो रेलगाड़ी के आने तक जागना ही जागना था। गाड़ी रात में एक बजे तक
आयेगी , यह सूचना एक रेलवे बाबू ने पूछताछ के दौरान बता दी थी। इसी बीच कुछ और सवारियां भी आ गयीं थी, जिससे
थोड़ी सी रौनक भी बढ गयी थी।

अंत में वो घड़ी आयी और टिकट बाबू से पूछकर रेलगाड़ी में जाकर दोनों बैठे। टीटी ने हिदायत दी कि बस दो घंटे बाद तुम्हारा स्टेशन आयेगा, सोते मत रह जाना।
गाड़ी के अंदर सारे यात्री लगभग अर्ध निद्रा में लीन थे। एक जगह खाली पाकर दोनों सहमे सहमे से बैठ गये। पति को पत्नी पर तरस आ रहा था। वह चाहता था कि बैठे बैठे ही वह नींद पूरी कर ले लेकिन पत्नी भारतीय ग्रामीण परिवेश और परंपरा की मारी थी, इसलिये वह चाहती थी कि पति निश्चिंत होकर एक नींद ले ले। परिणाम यही निकला कि आंख मिचौली करते हुए दोनों सफर तय करने लगे। जैसे ही गाड़ी कहीं रुकती पति नीचे जाकर पता कर आता कि उसका गंतव्य कितनी देर बाद आयेगा।

अब अगला स्टेशन उनका ही था। गाड़ी धीरे धीरे चलती हुई स्टेशन पर आकर रुकी। पति ने साथ लाया गट्ठर उतारा फिर पत्नी ने भी उतरने के लिए छलांग सी मार दी। अरे अरे, ऐसे भला कोई उतरता है। बावली है क्या?

पत्नी खिलखिला कर हँस पड़ी। अचानक उसे कुछ याद हो आया और वह कुछ ही सेकंड में गाड़ी के अंदर थी। इधर गाड़ी ने सीटी मार दी। पति ने जब पीछे मुडकर देखा तो संगिनी नदारद। जब तक वह कुछ समझ पाये तब तक गाड़ी रेंगने लगी थी और दरवाजे पर पत्नी की लहराती चूनर दिख गयी।

सहसा उसने गाड़ी से उतरने के लिए फिर वही छलांग लगाई लेकिन इस बार गिरने से पहले ही पति की बलिष्ठ बाहों ने थाम लिया था, साथ ही वह डांटता भी जा रहा था,

तू पूरी बावली है, तू गाड़ी में फिर से क्यों चढी? तुझे कुछ हो
जाता तो?इससे ज्यादा कुछ और कहता कि पत्नी की आंखों से आंसू बह निकले और रुंधे गले से जो उत्तर दिया उसे सुनकर वह भी रो पड़ा

वह बोली रूमाल रह गया था और उसमे बँधी मतदान की पर्ची भी मेरा वोट अभी इसी गाँव के पोलिंग बूथ में हैअभी ट्रांसफर नही हुआ। अगर आज बहाने से यहाँ न आती तो मोदी जी का एक वोट कम हो जाता और इसी बहाने आपका कांग्रेस का एक वोट भी कम कराने मै सफल रही। अब आप उस मुए पप्पू को वोट नही डाल पाओगे ।⚽✍

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(

विनोद कुमार

((( कृष्ण का ऐश्वर्य ))))
.
एक बार भगवान् के मन में आया कि आज गोपियों को अपना ऐश्वर्य दिखाना चाहिये
.
ये सोचकर जब भगवान् निकुंज में बैठे थे. और गोपियाँ उनसे मिलने आ रही थी तब भगवान् कृष्ण विष्णु के रूप चार भुजाएँ प्रकट करके बैठ गए,
.
जिनके चारो हांथो में शंख, चक्र, गदा, पद्म, था.
.
गोपियाँ भगवान् को ढूँढती हुई एक निकुंज से दूसरे निकुंज में जा रही थी तभी उस निकुंज में आयी जहाँ भगवान् बैठे हुए थे,
.
दूर से गोपियों ने भगवान् को देखा और बोली हम कब से ढूँढ रही है और कृष्ण यहाँ बैठे हुए है,
.
जब धीरे धीरे पास आई तो और ध्यान से देखा तो कहने लगी अरे ! ये हमारे कृष्ण नहीं है
.
इनकी सूरत तो कृष्ण की ही तरह है परन्तु इनकी तो चार भुजाएँ है ये तो वैकुंठ वासी विष्णु है.
.
सभी गोपियों ने दूर से ही प्रणाम किया और आगे बढ़ गई, और बोली चलो सखियों कृष्ण तो इस कुंज में भी नहीं है कही दूसरी जगह देखते है .
.
ये प्रेम है जहाँ साक्षात् भगवान् विष्णु भी बैठे है तो ये जानकर के ये तो विष्णु है कृष्ण नहीं गोपियाँ पास भी नहीं गई,
.
भगवान् कृष्ण ने सोचा गोपियों ने तो कुछ कहा ही नहीं, अब राधा रानी जी के पास जाना चाहिये,
.
ये सोचकर भगवान् कृष्णा वैसे ही विष्णु के रूप में उस निकुंज में जाने लगे जहाँ राधा रानी बैठी हुई थी,
.
दूर से ही भगवान् ने देखा राधा रानी जी अकेले बैठी हुई है, तो सोचने लगे राधा को अपना ये ऐश्वर्य देखाता हूँ,
.
और धीरे धीरे उस ओर जाने लगे,
.
परन्तु ये क्या जैसे जैसे कृष्ण राधा रानी जी के पास जा रहे है वैसे वैसे उनकी एक के करके चारो भुजाये गायब होने लगी और विष्णु के स्वरुप से कृष्ण रूप में आ गए,
.
जबकी भगवान् ने ऐश्वर्य को जाने के लिए कहा ही नहीं वह तो स्वतः ही चला गया,
.
और जब राधा रानी जी के पास पहुँचे तो पूरी तरह कृष्ण रूप में आ गए.
.
अर्थात वृंदावन में यदि कृष्ण चाहे भी तो अपना ऐश्वर्य नहीं दिखा सकते, क्योकि उनके ऐश्वर्य रूप को वहाँ कोई नहीं पूँछता,
.
यहाँ तक की राधा रानी के सामने तो ठहरता ही नहीं,
.
राधा रानी जी के सामने तो ऐश्वर्य बिना कृष्ण की अनुमति के ही चला जाता है.
Bhakti Kathayen भक्ति कथायें..

((((((( जय जय श्री राधे )))))))
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हेमंत बंसल

😭😭😭😭—– पिता —–😭😭😭😭

पांच साल ससुराल रहने के बाद बेटी पीहर लौट आई थी ससुराल कभी वापस ना जाने के लिए।

पिता की आँखों में सवाल थे। माँ के पास तमाम सवालों के जवाब।पर पिता बेटी से ही सुनना चाहते थे।

बेटी ने पिता का पर्दा किया और तमाम सवालों के जवाब दिये। “किस तरह ससुराल में दूधमुहि बेटी को छोड़ खेतों में काम करने के बाद भी बेटी को गले नहीं लगा सकती।काम का बोझ, उस पर भी ढोर डंगर की जिम्मेदारी भी उसी की। उस पर भी सासू जी के ताने छलनी करते हैं।
उपेक्षा का दंश झेलने के बावजूद प्यार के दो बोल के लिए तरस जाती है वो।”

“इसमें नया क्या है बेटा, हमने भी यही सब किया है, हर औरत यही करती है। तुम कोई नवेली तो हो नही जो तुम्हारे साथ कुछ अलग होगा?” माँ ने घूँघट की ओट से कहा।

पिता कुछ पल सोचते रहे। फिर बेटी के ससुराल फ़ोन लगाया।

” आपसे बात करनी है, जितनी जल्दी आ सकें जवाई जी के साथ पधारिये।”
बेटी का पति, सास और ससुर हाजिर थे।

“बहू अगर घर का काम न करे, खेत पर न जाए, ढोर डंगर की देखभाल, दूध निकलना ना करे तो क्या उसे आलिये में बैठा के पूजा करें उसकी।” सास का सवाल था।

“ऐसा तो नहीं कहा उसने कि पूजा कीजिये उसकी। मगर कम से कम उसे इंसान तो समझिए। उसकी बच्ची से पूरा दिन उसे दूर रहना पड़ता है, आखिर दूध पीती बच्ची है अभी उसकी। पर आप लोग उसे बहू कम नौकरानी ज्यादा समझ रहे हैं।”
कमरे में क्षण भर चुप्पी छा गई।
“अब मेरी बेटी आपके साथ नहीं जाएगी। उसके नाम से जमीन का चौथा हिस्सा और मकान कीजिये। और आप चाहें तो दूसरी शादी करने को स्वतंत्र हैं।” पिता ने फैसला सुनाया।

“खाना खाकर पधारें आप…” पिता ने हाथ जोड़े और दरवाजे से निकल गए।

बेटी दरवाजे की ओट से सब सुन रही थी। पिता ने बेटी के सर पर हाथ रखा।

“शादी ही की है, इसका ये मतलब नहीं कि तुझे अकेला छोड़ दिया है। अब भी मेरा गुरुर है तू।” पिता ने बेटी के सर पर हाथ फेरा। आँखे दोनों की छलछला रहीं थी 😢😢😢 —-

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हेमंत बंसल

पोस्ट1————–शराबी बुजुर्ग————-

#कोई बाझ नी कहेगा

आधी रात का समय था रोज की तरह एक बुजुर्ग शराब के नशे में अपने घर की तरफ जाने वाली गली से झूमता हुआ जा रहा था, रास्ते में एक खंभे की लाइट जल रही थी, उस खंभे के ठीक नीचे एक 15 से 16 साल की लड़की पुराने फटे कपड़े में डरी सहमी सी अपने आँसू पोछते हुए खड़ी थी जैसे ही उस बुजुर्ग की नजर उस लड़की पर पड़ी वह रूक सा गया, लड़की शायद उजाले की चाह में लाइट के खंभे से लगभग चिपकी हुई सी थी, वह बुजुर्ग उसके करीब गया और उससे लड़खड़ाती जबान से पूछा तेरा नाम क्या है, तू कौन है और इतनी रात को यहाँ क्या कर रही है…?

लड़की चुपचाप डरी सहमी नजरों से दूर किसी को देखे जा रही थी उस बुजुर्ग ने जब उस तरफ देखा जहाँ लड़की देख रही थी तो वहाँ चार लड़के उस लड़की को घूर रहे थे, उनमें से एक को वो बुजुर्ग जानता था, लड़का उस बुजुर्ग को देखकर झेप गया और अपने साथियों के साथ वहाँ से चला गया लड़की उस शराब के नशे में बुजुर्ग से भी सशंकित थी फिर भी उसने हिम्मत करके बताया मेरा नाम रूपा है मैं अनाथाश्रम से भाग आई हूँ, वो लोग मुझे आज रात के लिए कहीं भेजने वाले थे, दबी जुबान से बड़ी मुश्किल से वो कह पाई…!

बुजुर्ग:- क्या बात करती है…….तू अब कहाँ जाएगी…!
लड़की:- नहीं मालूम…..!
बुजुर्ग:- मेरे घर चलेगी…..?
लड़की मन ही मन सोच रही थी कि ये शराब के नशे में है और आधी रात का समय है ऊपर से ये शरीफ भी नहीं लगता है, और भी कई सवाल उसके मन में धमाचौकड़ी मचाए हुए थे!
बुजुर्ग:- अब आखिरी बार पूछता हूँ मेरे घर चलोगी हमेशा के लिए…?

बदनसीबी को अपना मुकद्दर मान बैठी गहरे घुप्प अँधेरे से घबराई हुई सबकुछ भगवान के भरोसे छोड़कर लड़की ने दबी कुचली जुबान से कहा जी हाँ

उस बुजुर्ग ने झट से लड़की का हाथ कसकर पकड़ा और तेज कदमों से लगभग उसे घसीटते हुए अपने घर की तरफ बढ़ चला वो नशे में इतना धुत था कि अच्छे से चल भी नहीं पा रहा था किसी तरह लड़खड़ाता हुआ अपने मिट्टी से बने कच्चे घर तक पहुँचा और कुंडी खटखटाई थोड़ी ही देर में उसकी पत्नी ने दरवाजा खोला और पत्नी कुछ बोल पाती कि उससे पहले ही उस बुजुर्ग ने कहा ये लो सम्भालो इसको “बेटी लेकर आया हूँ हमारे लिए” अब हम बाँझ नहीं कहलाएंगे आज से हम भी औलाद वाले हो गए, पत्नी की आँखों से खुशी के आँसू बहने लगे और उसने उस लड़की को अपने सीने से लगा लिया।।

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हेमंत बंसल

पोस्ट1————–शराबी बुजुर्ग————-

#कोई बाझ नी कहेगा

आधी रात का समय था रोज की तरह एक बुजुर्ग शराब के नशे में अपने घर की तरफ जाने वाली गली से झूमता हुआ जा रहा था, रास्ते में एक खंभे की लाइट जल रही थी, उस खंभे के ठीक नीचे एक 15 से 16 साल की लड़की पुराने फटे कपड़े में डरी सहमी सी अपने आँसू पोछते हुए खड़ी थी जैसे ही उस बुजुर्ग की नजर उस लड़की पर पड़ी वह रूक सा गया, लड़की शायद उजाले की चाह में लाइट के खंभे से लगभग चिपकी हुई सी थी, वह बुजुर्ग उसके करीब गया और उससे लड़खड़ाती जबान से पूछा तेरा नाम क्या है, तू कौन है और इतनी रात को यहाँ क्या कर रही है…?

लड़की चुपचाप डरी सहमी नजरों से दूर किसी को देखे जा रही थी उस बुजुर्ग ने जब उस तरफ देखा जहाँ लड़की देख रही थी तो वहाँ चार लड़के उस लड़की को घूर रहे थे, उनमें से एक को वो बुजुर्ग जानता था, लड़का उस बुजुर्ग को देखकर झेप गया और अपने साथियों के साथ वहाँ से चला गया लड़की उस शराब के नशे में बुजुर्ग से भी सशंकित थी फिर भी उसने हिम्मत करके बताया मेरा नाम रूपा है मैं अनाथाश्रम से भाग आई हूँ, वो लोग मुझे आज रात के लिए कहीं भेजने वाले थे, दबी जुबान से बड़ी मुश्किल से वो कह पाई…!

बुजुर्ग:- क्या बात करती है…….तू अब कहाँ जाएगी…!
लड़की:- नहीं मालूम…..!
बुजुर्ग:- मेरे घर चलेगी…..?
लड़की मन ही मन सोच रही थी कि ये शराब के नशे में है और आधी रात का समय है ऊपर से ये शरीफ भी नहीं लगता है, और भी कई सवाल उसके मन में धमाचौकड़ी मचाए हुए थे!
बुजुर्ग:- अब आखिरी बार पूछता हूँ मेरे घर चलोगी हमेशा के लिए…?

बदनसीबी को अपना मुकद्दर मान बैठी गहरे घुप्प अँधेरे से घबराई हुई सबकुछ भगवान के भरोसे छोड़कर लड़की ने दबी कुचली जुबान से कहा जी हाँ

उस बुजुर्ग ने झट से लड़की का हाथ कसकर पकड़ा और तेज कदमों से लगभग उसे घसीटते हुए अपने घर की तरफ बढ़ चला वो नशे में इतना धुत था कि अच्छे से चल भी नहीं पा रहा था किसी तरह लड़खड़ाता हुआ अपने मिट्टी से बने कच्चे घर तक पहुँचा और कुंडी खटखटाई थोड़ी ही देर में उसकी पत्नी ने दरवाजा खोला और पत्नी कुछ बोल पाती कि उससे पहले ही उस बुजुर्ग ने कहा ये लो सम्भालो इसको “बेटी लेकर आया हूँ हमारे लिए” अब हम बाँझ नहीं कहलाएंगे आज से हम भी औलाद वाले हो गए, पत्नी की आँखों से खुशी के आँसू बहने लगे और उसने उस लड़की को अपने सीने से लगा लिया।।

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कल मैं रिक्शे से घर आया .

मैंने रिक्शे वाले से पूछा- भैय्या आपके बच्चे हैं
अगर बुरा न मानें तो, कुछ छोटे कपड़े मैं उनके लिए
दे दूँ.. आप पहनाओगे क्या⁉️

उसने कहा – जी साहब

मैंने कहा – आप घर के अंदर आ जाओ
सोफे पर बैठो
मैं कपड़े लाता हूँ ।

जब तक मैं कपड़े लाया वो बाहर ही खड़ा रहा !
ये देख मैंने कहा -भैय्या बैठ जाओ और
देख लो
जो कपड़े आपके काम आ जायें ..

कांपते हुए वो सोफे पर बैठ गया ..शायद उसे बुखार भी था

मैंने कहा -ठण्ड लग रही है तो चाय बना दूँ ..
आप पी लो ..

ये सुनते ही उसकी आँखो से आंसू बहने लगे

बोला नहीं साहब बहुत छोटेपन से रिक्शा चला रहा हूँ..
आजतक ऐसा कोई नहीं मिला जो,इतनी इज़्ज़त दे
हम जैसे लोगो को!
और ये जो कपड़े हैं जो आप लोग हम जैसों को देते हैं हम लोग इसको रोज़ न पहन कर रिश्तेदारी या शादी- पार्टी में पहन कर जाते हैं । बहुत ग़रीबी है साहब ।

दो हफ़्ते बाद घर जाऊंगा तब बच्चे ये कपड़े पहनेंगे बहुत दुआ देंगे साहब ये बात सुनते ही मन बोझिल सा हो गया..
फ़िर मन में यही आया ❗
धार्मिक स्थानों में दान करने से भला तो किसी की आवश्यक्तायें पूरी की जाएँ…….

आपका क्या विचार है?? ?
Make everyone #happy god will make us happy too,, #khusiya_aur_PyAar baatne se bdhte h yaad rkhna sbhe 😊

Posted in हास्यमेव जयते

😂😂😂
हँसते हुए पेट दुखे तो मेरी कोई जिम्मेदारी नहीं
😘😘😘😘😘😘😘😘😘😘😘😘😘

एक बार कक्षा छठवीं में चार बालकों को परीक्षा मे समान अंक मिले

अब प्रश्न खडा हुआ कि किसे प्रथम रैंक दिया जाये ।

स्कूल प्रबन्धन ने तय किया कि प्राचार्य चारों से एक सवाल पूछेंगे

जो बच्चा उसका सबसे सटीक जवाब देगा उसे प्रथम घोषित किया जायेगा ।

चारों बच्चे हाजिर हुए प्राचार्य ने सवाल पूछा –

दुनिया में सबसे तेज क्या होता है

पहले बच्चे ने कहा

मुझे लगता है “विचार”सबसे तेज होता है

क्योंकि दिमाग में कोई भी विचार तेजी से आता है इससे तेज कोई नहीं ।

प्राचार्य ने कहा – ठीक है बिलकुल सही जवाब है ।

दूसरे बच्चे ने कहा मुझे लगता है –

“पलक झपकना” सबसे तेज होता है हमें पता भी नहीं चलता और पलकें झपक जाती हैं और अक्सर कहा जाता है”पलक झपकते”कार्य हो गया ।

प्राचार्य बोले – बहुत खूब बच्चे दिमाग लगा रहे हैं ।

तीसरे बच्चे ने कहा –

“बिजली” क्योंकि मेरे यहाँ गैरेज जो कि सौ फ़ुट दूर है में जब बत्ती जलानी होती है हम घर में एक बटन दबाते हैं और तत्काल वहाँ रोशनी हो जाती हैतो मुझे लगता है बिजली सबसे तेज होती है

अब बारी आई चौथे बच्चे की ।

सभी लोग ध्यान से सुन रहे थे

क्योंकि लगभग सभी तेज बातों का उल्लेख तीनो बच्चे पहले ही कर चुके थे ।

चौथे बच्चे ने कहा –

सबसे तेज होते हैं “दस्त”…

सभी चौंके

प्राचार्य ने कहा – साबित करो कैसे

बच्चा बोला

कल मुझे दस्त हो गए थे रात के दो बजे की बात है

जब तक कि मैं कुछ ” विचार ” कर पाता

या “पलक झपकाता”

या कि “बिजली” का स्विच दबाता

दस्त अपना “काम” कर चुका था ।😂

टीचर ने अपनी पीएचडी की डिग्री फाड़ दी है ।

इस असाधारण सोच वाले बालक को ही प्रथम घोषित किया गया।
😂😂😂

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

रोहित दीक्षित

एक जंगल में एक संत अपनी कुटिया में रहते थे।
एक किरात (शिकारी), जब भी वहाँ से निकलता संत को प्रणाम ज़रूर करता था।एक दिन किरात संत से बोला की बाबा मैं तो मृग का शिकार करता हूँ,आप किसका शिकार करने जंगल में बैठे हैं.?संत बोले – श्री कृष्ण का, और फूट फूट कर रोने लगे।

किरात बोला अरे, बाबा रोते क्यों हो ?
मुझे बताओ वो दिखता कैसा है ? मैं पकड़ के लाऊंगा उसको।

संत ने भगवान का वह मनोहारी स्वरुप वर्णन कर दिया….
कि वो सांवला सलोना है, मोर पंख लगाता है, बांसुरी बजाता है।

किरात बोला: बाबा जब तक आपका शिकार पकड़ नहीं लाता, पानी भी नही पियूँगा।

फिर वो एक जगह जाल बिछा कर बैठ गया…
3 दिन बीत गए प्रतीक्षा करते करते, दयालू ठाकुर को दया आ गयी, वो भला दूर कहाँ है,

बांसुरी बजाते आ गए और खुद ही जाल में फंस गए।

किरात तो उनकी भुवन मोहिनी छवि के जाल में खुद फंस गया और एक टक शयाम सुंदर को निहारते हुए अश्रु बहाने लगा,
जब कुछ चेतना हुयी तो बाबा का स्मरण आया और जोर जोर से चिल्लाने लगा शिकार मिल गया, शिकार मिल गया, शिकार मिल गया,

और ठाकुरजी की ओर देख कर बोला,

अच्छा बच्चु .. 3 दिन भूखा प्यासा रखा, अब मिले हो,
और मुझ पर जादू कर रहे हो।

शयाम सुंदर उसके भोले पन पर रीझे जा रहे थे एवं मंद मंद मुस्कान लिए उसे देखे जा रहे थे।

किरात, कृष्ण को शिकार की भांति अपने कंधे पे डाल कर और संत के पास ले आया।

बाबा,
आपका शिकार लाया हुँ… बाबा ने जब ये दृश्य देखा तो क्या देखते हैं किरात के कंधे पे श्री कृष्ण हैं और जाल में से मुस्कुरा रहे हैं।

संत के तो होश उड़ गए, किरात के चरणों में गिर पड़े, फिर ठाकुर जी से कातर वाणी में बोले –

हे नाथ मैंने बचपन से अब तक इतने प्रयत्न किये, आप को अपना बनाने के लिए घर बार छोडा, इतना भजन किया आप नही मिले और इसे 3 दिन में ही मिल गए…!!

भगवान बोले – इसका तुम्हारे प्रति निश्छल प्रेम व कहे हुए वचनों पर दृढ़ विश्वास से मैं रीझ गया और मुझ से इसके समीप आये बिना रहा नहीं गया।

भगवान तो भक्तों के संतों के आधीन ही होतें हैं।

जिस पर संतों की कृपा दृष्टि हो जाय उसे तत्काल अपनी सुखद शरण प्रदान करतें हैं। किरात तो जानता भी नहीं था की भगवान कौन हैं,
पर संत को रोज़ प्रणाम करता था। संत प्रणाम और दर्शन का फल ये है कि 3 दिन में ही ठाकुर मिल गए ।
यह होता है संत की संगति का परिणाम!!

“संत मिलन को जाईये तजि ममता अभिमान,
ज्यो ज्यो पग आगे बढे कोटिन्ह यज्ञ समान”

Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

*

ભાવેસિંહ મકવાણા બોરસર

પાળિયા ના પ્રકાર :*

ખાંભી: કોતરકામ વગર બાંધવામાં આવેલ મૃત વ્યક્તિનું સ્મારક,

થેસા: પાળિયા નજીકના નાનાં પથ્થરો,

ચાગીયો: પત્થરોના ઢગલા,

સુરાપુરા: અન્યના જીવન માટે યુદ્ધમાં ખપી જનાર યોદ્ધાઓ.

સુરધન : આકસ્મિક મૃત્યુ, જેમ કે હત્યા, આત્મહત્યા, અકસ્માતની યાદમાં બાંધવામાં આવેલા તરીકે વર્ગીકૃત કરવામાં આવે છે તેમાંના કેટલાકને સતીમાતા અથવા ઝુઝાર મસ્તિષ્ક વગરનાં યોદ્ધાઓ કહે છે.

યોદ્ધાઓના પાળિયા:
આ પ્રકારના સ્મારકો સૌથી સામાન્ય હોય છે જે મોટે ભાગે લડાઈના નાયકોની પૂજા કરતા સમુદાય અને લોકજાતિઓ સાથે સંકળાયેલ હોય છે.

તેઓ મર્યાદિત વિસ્તારમાં મોટી સંખ્યામાં મળી આવે છે અને રણ ખાંભી તરીકે ઓળખાય છે. તે યુદ્ધસ્થળ અથવા જ્યાં યોદ્ધા મૃત્યુ પામ્યો હોય ત્યાં બાંધવામાં આવે છે. શરૂઆતમાં આ પાળિયા, સમુદાય, સ્ત્રી અથવા પશુધનને બચાવવાના સત્કાર્યોને સન્માનવા બાંધવામાં આવતા હતા અને પછીથી તે યુદ્ધ સંબંધિત પરંપરા બની ગઈ.

આ સ્મારકો મોટે ભાગે યોદ્ધાને હથિયારો જેવા કે તલવાર, ગદા, ધનુષ્ય અને તીર અને પછીના પાળિયાઓમાં બંદૂકો સાથે પણ દર્શાવે છે. આ યોદ્ધાઓ વિવિધ પરિવહનો જેમ કે ઘોડા, ઊંટ, હાથી અને રથ પર હોય છે. ક્યારેક તે પાયદળ સાથે હોય છે. કેટલીક વખત રાજકિય ચિહ્નો લઈ જતા અથવા યુદ્ધમાં નગારા વગાડતા લોકોના પાળિયા પણ દર્શાવવામાં આવે છે.

આ સ્મારકોનાં ઉદાહરણો ભુચર મોરીના પાળિયા અને સોમનાથ મંદિર નજીકના હમીરજી ગોહિલ અને અન્યોના પાળિયાઓ છે.

સતીના પાળિયા:
આ સ્મારકો મોટે ભાગે રાજવી પરિવારો સાથે સંકળાયેલા હોય છે જે સતી થઈ હોય અથવા જૌહર કરીને મૃત્યુ પામી હોય તેવી સ્ત્રીઓને સમર્પિત હોય છે. તે લોકસાહિત્ય સાથે પણ સંબંધિત હોઈ શકે છે અને તેમની દેવી તરીકે પૂજા થાય છે.

આ સ્મારકો મોટે ભાગે જમણી બાજુ ૪૫ કે ૯૦ અંશના ખૂણે વળેલો આશીર્વાદ આપતો જમણો હાથ દર્શાવે છે. ક્યારેક આ પાળિયા પર હાથ અને અન્ય પ્રતીકો જેમ કે મોર અને કમળ હોય છે. કેટલાક પાળિયામાં આશીર્વાદ આપતી અથવા નમસ્કાર મુદ્રામાં ઊભેલી સંપૂર્ણ સ્ત્રીની આકૃતિ હોય છે. કેટલાક સ્મારકોમાં એક હાથમાં કમંડળ અને બીજામાં જાપમાળા હોય એવા સ્ત્રીના આકારો હોય છે. કેટલાક સ્મારકોમાં જ્વાળાઓમાં દાખલ થતી સ્ત્રી અને પોતાના પતિના શરીરને ખોળામાં લઈ બેઠેલી હોય તેવી સતી પ્રથા દર્શાવતી આકૃતિઓ પણ દર્શાવવામાં આવે છે.

આ સ્મારકોનાં ઉદાહરણમાં ભુચર મોરીના સુરજકુંવરબાના પાળિયાનો સમાવેશ થાય છે.આ પ્રકારના પાળિયા પાકિસ્તાનના સિંધ પ્રદેશ અને ભારતના રાજસ્થાન રાજ્યમાં પણ જોવા મળે છે.

ખલાસીઓના પાળિયા:
ગુજરાત લાંબો દરિયાઈ ઇતિહાસ ધરાવે છે. આ સ્મારકો તેમની સમુદ્ર સફર દરમિયાન મૃત્યુ પામેલા ખલાસીઓની યાદ અપાવે છે. તેમના સ્મારકો પર ક્યારેક જહાજ દર્શાવવામાં આવે છે.

લોકસાહિત્યના પાળિયા:
અનેક સ્મારકો લોકસાહિત્ય સાથે સંકળાયેલ ધાર્મિક સંતો-ભક્તો, પ્રેમ કથાઓ, બલિદાન, મિત્રતા, વિરોધ, વગેરે માટે કરેલો દેહત્યાગ દર્શાવે છે.આ સ્મારકનું ઉદાહરણ ભાણવડ નજીક ભુતવડ પર આવેલો વીર માંગડા વાળાનો પાળિયો છે.

પ્રાણીઓના પાળિયા:
પ્રાણીઓ જેવા કે ઘોડા, કૂતરાં અને ઊંટ દર્શાવતા પાળિયાઓ પણ બાંધવામાં આવ્યા હતા.

ક્ષેત્રપાળના પાળિયા:
આ પાળિયા ક્ષેત્રપાળ (ક્ષેત્રનું રક્ષણ કરતાં)ને સમર્પિત હોય છે, જે જમીનના દેવ છે. તે સ્મારક નથી પરંતુ લગભગ સરખો અહોભાવ ધરાવે છે. તેમને સામાન્ય રીતે ખેતરની નજીક અથવા ગામની બહાર મૂકવામાં આવે છે. કેટલીક કોમમાં પૂર્વજોની પૂજા ક્ષેત્રપાળ તરીકે થાય છે. તે જમીન અને પાકનું રક્ષણ કરે છે તેમ માનવામાં આવે છે. આ પાળિયા પર સાપ અથવા કેટલીક વખત માત્ર આંખો રક્ષણના પ્રતીક તરીકે દર્શાવવામાં આવે છે..

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રંજાડેલા નો હુ રખેવાળ હતો, રખેવાળો એ રંજાડ્યો છે મને..
‘નામચીન’ એક સમયે હતો, હવે નામષેશ કર્યો છે મને..

“બિસ્માર છુ બળવાન માંથી”

એક સમયે પોતાના જીવની ચિંતા કર્યા વગર જે વ્યક્તિ એ રંજાડેલી ગાયો, અબડા ની આબરૂ તથા ધરતી ની રક્ષા કરવા ખાતર નિષ્ઠા પૂર્વક પોતાના પ્રાણ ની આહુતિ આપેલી હતી એવા મહાન રખેવાળ યોદ્ધા ની ખાંભીઓ ની કેવી દશા છે એ ઉપરોક્ત ચિત્ર મા જોઇ શકાય છે..
એ રખેવાળો નુ ઇતિહાસ મા અમર નામ છે એક સમયે તેમની પૂજા કરવામા આવતી આજુબાજુ ના વિસ્તાર મા તેમના તથા તેમના પૂર્વજ નુ માન હતુ.. આજે ઘણી જગ્યાએ તેમની ખાંભીઓ ઉખેડી ફગાવી દેવામા આવી છે ચપટી સિંદુર પણ એમને નસીબ નથી. આવા મહાન પ્રતાપી પૂર્વજો ના પાળીયા ને આપણે પાષાણ સમજી બેઠા છીએ. એમના ઇતિહાસ ની આપણે ખબર નથી..
અરે જેમને પોતાના વંશ વારસ ની જમીન ઝાયદાદ ની પરવા કર્યા વગર નિષ્ઠુર ભાવે આપણી સંસ્કૃતિ ની રક્ષા કરીછે એવા પાળીયા ની આવી હાલત એ આપણી નબળાઇ છે..

તમારા ગામ અથવા આજુબાજુ વિસ્તાર મા આવા બિસ્માર પાળીયા હોય તો તેના સાચા ઇતિહાસ ને જાણી ઇતિહાસ ની જાળવણી કરજો તેને ઉભા કરી સિંદુર જરૂર ચળાવજો બની શકે તો વરસાદ ને તાપથી રક્ષણાત્મક થોડો છાંયડો કરજો બનતા પ્રયાસો કરજો..

  • સંસ્કૃતિ સાચવજો…
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जिंदगी

कभी तानों में कटेगी,
कभी तारीफों में;
ये जिंदगी है यारों,
पल पल घटेगी !!

पाने को कुछ नहीं,
ले जाने को कुछ नहीं;
फिर भी क्यों चिंता करते हो,
इससे सिर्फ खूबसूरती घटेगी,
ये जिंदगी है यारों पल-पल घटेगी !

बार बार रफू करता रहता हूँ,
…जिन्दगी की जेब !!
कम्बखत फिर भी,
निकल जाते हैं…,
खुशियों के कुछ लम्हें !!

ज़िन्दगी में सारा झगड़ा ही…
ख़्वाहिशों का है !!
ना तो किसी को गम चाहिए,
ना ही किसी को कम चाहिए !!

खटखटाते रहिए दरवाजा,
एक दूसरे के मन का;
मुलाकातें ना सही,
आहटें आती रहनी चाहिए !!

उड़ जाएंगे एक दिन …,
तस्वीर से रंगों की तरह !
हम वक्त की टहनी पर…,
बेठे हैं परिंदों की तरह !!

बोली बता देती है,
इंसान कैसा है!
बहस बता देती है, ज्ञान कैसा है!
घमण्ड बता देता है, कितना पैसा है !
संस्कार बता देते है, परिवार कैसा है !!

ना राज़ है…ज़िन्दगी,
ना नाराज़ है… “ज़िन्दगी”;
बस जो है, वो आज है, ज़िन्दगी!

जीवन की किताबों पर,
बेशक नया कवर चढ़ाइये;
पर…बिखरे पन्नों को,
पहले प्यार से चिपकाइये !!!
— रीता पाठक