Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

ऋषिकेश में गंगा जी के किनारे एक संत रहा करते।। वह जन्मांध थे ।और उनका नित्य का एक नियम था कि वह शाम के समय ऊपर गगन चुंबी पहाड़ों में भृमण करने के लिये निकल जाते और हरी नाम का संकीर्तन करते जाते।।
एक दिन उनके एक शिष्य ने उनसे पूछाबाबा आप हर रोज इतने ऊंचे ऊंचे पहाड़ों पर भृमण हेतु जाते हैं
वहां बहुत गहरी गहरी खाइयां भी हैं और आपको आंखों से दिखलाई नहीं देता।क्या आपको डर नहीं लगता ?
अगर कभी पांव लड़खड़ा गये तो बाबा ने कुछ नहीं कहा और शाम के समय शिष्य को साथ ले चले।।
पहाड़ों के मध्य थे तो बाबा ने शिष्य से कहा जैसे ही कोई गहरी खाई आये तो बताना।दोनों चलते रहे और जैसे ही गहरी खाई आयी
शिष्य ने बताया कि बाबा गहरी खाई आ चुकी है।बाबा ने कहा मुझे इसमें धक्का दे दे।अब तो शिष्य इतना सुनते ही सकपका गया।।
उसने कहा बाबा मैं आपको धक्का कैसे दे सकता हूँ।मैं ऐसा हरगिज नहीं कर सकता।आप तो मेरे गुरुदेव हैं मैं तो किसी अपने शत्रु को भी इस खाई में नहीं धकेल सकता।।
बाबा ने फिर कहामैं कहता हूं कि मुझे इस खाई में धक्का दे दो।।यह मेरी आज्ञा है और मेरी आज्ञा की अवहेलना करोगे तो नर्क गामी होगे।।शिष्य ने कहा बाबा मैं नर्क भोग लूंगा मगर आपको हरगिज इस खाई में नहीं धकेल सकता।।
तब बाबा ने शिष्य से कहा रे नादान बालक जब तुझ जैसा एक साधारण प्राणी मुझे खाई में नहीं धकेल सकता तो बता मेरा मालिक भला कैसे मुझे खाई में गिरने देगा।उसे तो सिर्फ गिरे हुओं को उबारना आता है गिरे हुओं को उठाना आता है वह कभी भी किसी को गिरने नहीं देता।वह पल पल हमारे साथ है बस हमें विश्वास रखना होगा उस पर।जय श्री महाकाल 🚩🚩🚩🚩🚩

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ज्ञानी महात्मा जी जंगल में कहीं जा रहे थे कि उनको एक गड़रिया दिखाई दिया। वह प्रार्थना कर रहा था,’ ऐ भगवान मुझे अगर तेरा दीदार हो जाए तो मैं तेरी खूब सेवा करूंगा। तेरे शरीर की मालिश करूंगा, तुझे अच्छी तरह से नहलाऊंगा। तू अगर बीमार पड़ेगा तो तेरी खूब दवा करूंगा और तुझे चंगा करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ूंगा। मेरे अच्छे ईश्वर मैं जिंदगीभर तेरा गुलाम बनकर रहूंगा और तेरे ऊपर अपनी जान कुर्बान कर दूंगा।’ज्ञानी महात्मा गड़रिए की इस अजीब प्रार्थना को सुनकर हैरत में पड़ गए। उन्होंने गड़रिये से कहा मूर्ख! यह तू किससे बात कर रहा है? और किसकी सेवा की मंशा करने की इच्छा जाहिर कर रहा है?गड़रिये ने कहा ईश्वर की और उनसे ही मैं बात कर रहा था। इस पर ज्ञानी महात्मा ने उसको डांटते हुए कहा, ‘अरे बेवकूफ ईश्वर भी कभी बीमार पड़ता है? वह तो अशरीरी, अजन्मा है और सब जगह मौजूद है। उसको भला तेरी सेवा की क्या जरूरत है। उसकी रहमत से तो सभी चंगे होते हैं तू उसकी क्या खिदमत करेगा?’
गड़रिया चुपचाप रह गया और उसने ज्ञानी महात्मा से माफी मांगी और उनसे प्रार्थना की विधि सीखकर उसी तरह से पूजा आराधना शुरू कर दी। पहले वह जिस जुबान में बात करता था उसको बिलकुल भुला दिया गया, लेकिन रात को जब ज्ञानी महात्मा पूजा करने लगे तो एक आवाज आई, ‘मैने तुझे लोगों का ध्यान मुझमें लगाने के लिए धरती पर भेजा था। लेकिन तू तो उनको मुझसे दूर करने में लगा हुआ है। तुने गड़रिए को मुझसे दूर ले जाना चाहा। यह तेरा एक अपराध है। क्या तुझे मालूम नहीं कि सच्चे मन से मुझे याद करना और दिल खोलकर रख रखा देना ही मेरी सच्ची सेवा है भाइयो भगवन को प्राथना करने के किन्ही हजारों वस्तुओ की और हजारों मंत्रो की आवश्यकता नहीं पडती सिर्फ एक पल शुद्ध आत्मा से किया हुआ ईश्वर सुमिरण हजारों मंत्रो के बराबर फलदायी होता है… जय श्री महाकाल 🚩🚩🚩🚩🚩

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एक बच्चा अपनी माँ के साथ खरदारी करने एक दुकान पर गया तो दुकानदार ने उसका मासूम चेहरा देख कर टोफियो का डिब्बा खोला और उसे आगे करके कहा,’लो जितनी चाहे टोफिया ले लो |

लेकिन बच्चे ने उसे बेहद शालीनता से मना कर दिया | दुकानदार ने दुबारा कहा लेकिन बच्चे ने खुद टोफिया नहीं ली |

बच्चे कि माँ ने बच्चे को टोफिया ले लेने के लिए कहा | लेकिन बच्चे ने खुद टोफिया लेने के बजाए दुकानदार के आगे हाथ फेला दिया और कहा,’आप खुद ही देदो अंकल|’

दुकानदार ने टोफिया निकलकर उसे देदी तो बच्चे ने दोनों जेंबो में दाल ली |

वापस आते वक्त उसकी माँ ने पुचा कि ‘जब दुकानदार ने डिब्बा आगे किया तब टॉफी क्यों नहीं ली और उन्होंने खुद निकलकर दी तब ले ली ? इसका क्या मतलब ?’

बच्चे ने बड़े मासूमियत से जवाब दिया कि ‘माँ मेरे हाथ छोटे हैं खुद निकलता तो एक या दो टोफिया आती |

अंकल के हाथ बड़े थे, उन्होंने निकली तो देखो कितनी सारी मिल गई’

ठीक इसी तरह हमें उस ईश्वर कि मर्जी में खुश रहना चाहिए |

क्या पता वह किसी दिन हमें पूरा सागर देना चाहता हो और हम अज्ञानतावश बस एक चम्मच लिए ही खड़े हो |… जय श्री महाकाल 🚩🚩🚩🚩🚩

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महाकाल महाकाल

एक व्यक्ति रेगिस्तान मे भटक गया ।प्यास के मारे उसे अपनी मौत नजदीक ही दिख रही थी । तभी उसे एक झोँपड़ी दिखाई दी झोपडी मे जाने पर उसे एक हेण्डपम्प दिखा जो बरसो से बंद था !तभी उसे झोँपड़ी की छत से बंधी पानी से भरी एक बोतल दिखाई दी जिसपे एक कागज चिपका था उस पर लिखा था -इस पानी का प्रयोग हैण्ड पम्प चलाने के लिए करो और वापिस बोतल भरकर रखना ना भूले ? उस व्यक्ति को समझ नहीं आ रहा था कि वह पानी पीये या उसे हैण्ड पम्प में डालकर चालू करे । उसे लगा की अगर पानी डालने पर भी पम्प नहीं चला । अगर यहाँ लिखी बात झूठी हुई तो प्यास से ही मेरी मौत निश्चित है लेकिन क्या पता पम्प चल ही पड़े,फिर कुछ सोचने के बाद उसने बोतल खोली और कांपते हाथों से पानी पम्प में डालने लगा। पानी डालकर उसने भगवान से प्रार्थना की और पम्प चलाने लगा । एक, दो, तीन और हैण्ड पम्प से ठण्डा-ठण्डा पानी निकलने लगा वह पानी किसी अमृत से कम नहीं था । उस व्यक्ति ने जी भरकर पानी पिया,। उसने बोतल में फिर से पानी भर दिया और उसे छत से बांध दिया । जब वो ऐसा कर रहा था, तभी उसे अपने सामने एक और शीशे की बोतल दिखी । खोला तो उसमें एक पेंसिल और एक नक्शा पड़ा हुआ था, जिसमें रेगिस्तान से निकलने का रास्ता था ।उस व्यक्ति ने रास्ता याद कर लिया और नक़्शे वाली बोतल को वापस वहीँ रख दिया । इसके बाद उसने अपनी बोतलों में (जो पहले से ही उसके पास थीं) पानी भरकर वहाँ से जाने लगा । कुछ आगे बढ़कर उसने एक बार पीछे मुड़कर देखा, फिर कुछ सोचकर वापिस उस झोँपडी में गया और पानी से भरी बोतल पर चिपके कागज़ को उतारकर। उसने लिखा -मेरा यकीन करिए यह हैण्ड पम्प काम करता है
यह कहानी हमारे सम्पूर्ण जीवन को दर्शाती है .. कुछ बहुत बड़ा पाने से पहले हमें अपनी ओर से भी कुछ देना होता है । जैसे उस व्यक्ति ने नल चलाने के लिए मौजूद पूरा पानी उसमें डाल दिया देखा जाए तो इस कहानी में पानी जीवन में मौजूद महत्वपूर्ण चीजों को दर्शाता है, किसी के लिए मेरा यह सन्देश ज्ञान हो सकता है तो किसी के लिए प्रेम तो किसी और के लिए पैसा । यह जो कुछ भी है, उसे पाने के लिए पहले हमें अपनी तरफ से उसे कर्म रुपी हैण्ड पम्प में डालना होता है और फिर बदले में आप अपने योगदान से कहीं अधिक मात्रा में उसे वापिस पाते हैं….जय श्री महाकाल 🚩🚩🚩🚩

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महाकाल महाकाल

एक राजा के पास कई हाथी थे,
लेकिन एक हाथी बहुत शक्तिशाली था, बहुत आज्ञाकारी,
समझदार व युद्ध-कौशल में निपुण था।
बहुत से युद्धों में वह भेजा गया था
और वह राजा को विजय दिलाकर वापस लौटा था,
इसलिए वह महाराज का सबसे प्रिय हाथी था। समय गुजरता गया और एक समय ऐसा भी आया,
जब वह वृद्ध दिखने लगा। अब वह पहले की तरह कार्य नहीं कर पाता था।
इसलिए अब राजा उसे युद्ध क्षेत्र में भी नहीं भेजते थे।एक दिन वह सरोवर में जल पीने के लिए गया, लेकिन वहीं कीचड़ में उसका पैर धँस गया और फिर धँसता ही चला गया। उस हाथी ने बहुत कोशिश की,
लेकिन वह उस कीचड़ से स्वयं को नहीं निकाल पाया।उसकी चिंघाड़ने की आवाज से लोगों को यह पता चल गया कि वह हाथी संकट में है। हाथी के फँसने का समाचार राजा तक भी पहुँचा राजा समेत सभी लोग हाथी के आसपास इक्कठा हो गए और विभिन्न प्रकार के शारीरिक प्रयत्न उसे निकालने के लिए करने लगे।
जब बहुत देर तक प्रयास करने के उपरांत कोई मार्ग नहीं निकला तो राजा ने अपने सबसे अनुभवी मंत्री को बुलवाया। मंत्री ने आकर घटनास्थल का निरीक्षण किया और फिर राजा को सुझाव दिया कि सरोवर के चारों और युद्ध के नगाड़े बजाए जाएँ। सुनने वालोँ को विचित्र लगा कि भला नगाड़े बजाने से वह फँसा हुआ हाथी बाहर कैसे निकलेगा, जो अनेक व्यक्तियों के शारीरिक प्रयत्न से बाहर निकल नहीं पाया आश्चर्यजनक रूप से जैसे ही युद्ध के नगाड़े बजने प्रारंभ हुए, वैसे ही उस मृतप्राय हाथी के हाव-भाव में परिवर्तन आने लगा।
पहले तो वह धीरे-धीरे करके खड़ा हुआ और फिर सबको हतप्रभ करते हुए स्वयं ही कीचड़ से बाहर निकल आया। अब मंत्री ने सबको स्पष्ट किया कि हाथी की शारीरिक क्षमता में कमी नहीं थी, आवश्यकता मात्र उसके अंदर उत्साह के संचार करने की थी।हाथी की इस कहानी से यह स्पष्ट होता है कि यदि हमारे मन में एक बार उत्साह – उमंग जाग जाए तो फिर हमें कार्य करने की ऊर्जा स्वतः ही मिलने लगती है और कार्य के प्रति उत्साह का मनुष्य की उम्र से कोई संबंध नहीं रह जाता।जीवन मे उत्साह बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि मनुष्य सकारात्मक चिंतन बनाए रखे और निराशा को हावी न होने दे।
कभी – कभी निरंतर मिलने वाली असफलताओं से व्यक्ति यह मान लेता है कि अब वह पहले की तरह कार्य नहीं कर सकता, लेकिन यह पूर्ण सच नहीं है।
।।जय श्री महाकाल ।।

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🔆 अच्छा इंसान 🔆

🔷 एक 6 वर्ष का लडका अपनी 4 वर्ष की छोटी बहन के साथ बाजार से जा रहा था। अचानक से उसे लगा कि, उसकी बहन पीछे रह गयी है। वह रुका, पीछे मुड़कर देखा तो जाना कि, उसकी बहन एक खिलौने के दुकान के सामने खडी कोई चीज निहार रही है।

🔶 लडका पीछे आता है और बहन से पूछता है, “कुछ चाहिये तुम्हें?” लडकी एक गुड़िया की तरफ उंगली उठाकर दिखाती है। बच्चा उसका हाथ पकडता है, एक जिम्मेदार बडे भाई की तरह अपनी बहन को वह गुड़िया देता है। बहन बहुत खुश हो गयी।

🔷 दुकानदार यह सब देख रहा था, बच्चे का प्रगल्भ व्यवहार देखकर आश्चर्यचकित भी हुआ। अब वह बच्चा बहन के साथ काउंटर पर आया और दुकानदार से पूछा, “सर, कितनी कीमत है इस गुड़िया की ?”

🔶 दुकानदार एक शांत और गहरा व्यक्ति था, उसने जीवन के कई उतार देखे थे, उन्होने बड़े प्यार और अपनत्व से बच्चे से पूछा, “बताओ बेटे, आप क्या दे सकते हो ?” बच्चा अपनी जेब से वो सारी सीपें बाहर निकालकर दुकानदार को देता है जो उसने थोड़ी देर पहले बहन के साथ समुंदर किनारे से चुन चुन कर बीनी थी!

🔷 दुकानदार वो सब लेकर यूँ गिनता है जैसे कोई पैसे गिन रहा हो।सीपें गिनकर वो बच्चे की तरफ देखने लगा तो बच्चा बोला,”सर कुछ कम हैं क्या?” दुकानदार : “नहीं – नहीं, ये तो इस गुड़िया की कीमत से भी ज्यादा है, ज्यादा मैं वापस देता हूँ” यह कहकर उसने 4 सीपें रख ली और बाकी की बच्चे को वापिस दे दी। बच्चा बड़ी खुशी से वो सीपें जेब मे रखकर बहन को साथ लेकर चला गया।

🔶 यह सब उस दुकान का कामगार देख रहा था, उसने आश्चर्य से मालिक से पूछा, “मालिक ! इतनी महंगी गुड़िया आपने केवल 4 सीपों के बदले मे दे दी?” दुकानदार एक स्मित संतुष्टि वाला हास्य करते हुये बोला, “हमारे लिये ये केवल सीप है पर उस 6 साल के बच्चे के लिये अतिशय मूल्यवान है और अब इस उम्र में वो नहीं जानता, कि पैसे क्या होते हैं?

🔷 पर जब वह बडा होगा ना.. और जब उसे याद आयेगा कि उसने सीपों के बदले बहन को गुड़िया खरीदकर दी थी। तब उसे मेरी याद जरुर आयेगी, और फिर वह सोचेगा कि, “यह विश्व अच्छे मनुष्यों से भी भरा हुआ है।”

👉 यही बात उसके अंदर सकारात्मक दृष्टिकोण बढाने में मदद करेगी और वो भी एक अच्छा इंन्सान बनने के लिये प्रेरित होगा।

✍ साभार: awgpskj[dot]blogspot[dot]com (अखण्ड ज्योति)

🙏 जय गुरुदेव 🙏
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महाकाल महाकाल

एक जाने-माने स्पीकर ने हाथ में पांच सौ का नोट लहराते हुए अपनी सेमीनार शुरू की. हाल में बैठे सैकड़ों लोगों से उसने पूछा ,” ये पांच सौ का नोट कौन लेना चाहता है?” हाथ उठना शुरू हो गए.फिर उसने कहा ,” मैं इस नोट को आपमें से किसी एक को दूंगा पर उससे पहले मुझे ये कर लेने दीजिये .” और उसने नोट को अपनी मुट्ठी में चिमोड़ना शुरू कर दिया. और फिर उसने पूछा,” कौन है जो अब भी यह नोट लेना चाहता है?” अभी भी लोगों के हाथ उठने शुरू हो गए.“अच्छा” उसने कहा,” अगर मैं ये कर दूं ? ” और उसने नोट को नीचे गिराकर पैरों से कुचलना शुरू कर दिया. उसने नोट उठाई , वह बिल्कुल चिमुड़ी और गन्दी हो गयी थी.” क्या अभी भी कोई है जो इसे लेना चाहता है?”. और एक बार फिर हाथ उठने शुरू हो गए.” दोस्तों , आप लोगों ने आज एक बहुत महत्त्वपूर्ण पाठ सीखा है. मैंने इस नोट के साथ इतना कुछ किया पर फिर भी आप इसे लेना चाहते थे क्योंकि ये सब होने के बावजूद नोट की कीमत घटी नहीं,उसका मूल्य अभी भी 500 था.जीवन में कई बार हम गिरते हैं, हारते हैं, हमारे लिए हुए निर्णय हमें मिटटी में मिला देते हैं. हमें ऐसा लगने लगता है कि हमारी कोई कीमत नहीं है. लेकिन आपके साथ चाहे जो हुआ हो या भविष्य में जो हो जाए , आपका मूल्य कम नहीं होता. आप स्पेशल हैं, इस बात को कभी मत भूलिए.कभी भी बीते हुए कल की निराशा को आने वाले कल के सपनो को बर्बाद मत करने दीजिये. याद रखिये आपके पास जो सबसे कीमती चीज है, वो है आपका जीवन.”
🚩🚩🚩🚩🚩जय श्री महाकाल

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महाकाल महाकाल

शहर के नज़दीक बने एक farm house में दो घोड़े रहते थे. दूर से देखने पर वो दोनों बिलकुल एक जैसे दीखते थे , पर पास जाने पर पता चलता था कि उनमे से एक घोड़ा अँधा है. पर अंधे होने के बावजूद farm के मालिक ने उसे वहां से निकाला नहीं था बल्कि उसे और भी अधिक सुरक्षा और आराम के साथ रखा था. अगर कोई थोडा और ध्यान देता तो उसे ये भी पता चलता कि मालिक ने दूसरे घोड़े के गले में एक घंटी बाँध रखी थी, जिसकी आवाज़ सुनकर अँधा घोड़ा उसके पास पहुंच जाता और उसके पीछे-पीछे बाड़े में घूमता. घंटी वाला घोड़ा भी अपने अंधे मित्र की परेशानी समझता, वह बीच-बीच में पीछे मुड़कर देखता और इस बात को सुनिश्चित करता कि कहीं वो रास्ते से भटक ना जाए. वह ये भी सुनिश्चित करता कि उसका मित्र सुरक्षित; वापस अपने स्थान पर पहुच जाए, और उसके बाद ही वो अपनी जगह की ओर बढ़ता.

दोस्तों, बाड़े के मालिक की तरह ही भगवान हमें बस इसलिए नहीं छोड़ देते कि हमारे अन्दर कोई दोष या कमियां हैं. वो हमारा ख्याल रखते हैं और हमें जब भी ज़रुरत होती है तो किसी ना किसी को हमारी मदद के लिए भेज देते हैं. कभी-कभी हम वो अंधे घोड़े होते हैं, जो भगवान द्वारा बांधी गयी घंटी की मदद से अपनी परेशानियों से पार पाते हैं तो कभी हम अपने गले में बंधी घंटी द्वारा दूसरों को रास्ता दिखाने के काम आते हैं.
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एक बार अकबर बीरबल हमेशा की तरह टहलने जा रहे थे!

रास्ते में एक तुलसी का पौधा दिखा .. मंत्री बीरबल ने झुक कर प्रणाम किया !

अकबर ने पूछा कौन हे ये ?
बीरबल — मेरी माता हे !

अकबर ने तुलसी के झाड़ को उखाड़ कर फेक दिया और बोला .. कितनी माता हैं तुम हिन्दू लोगो की …!

बीरबल ने उसका जबाब देने की एक तरकीब सूझी! .. आगे एक बिच्छुपत्ती (खुजली वाला ) झाड़ मिला .. बीरबल उसे दंडवत प्रणाम कर कहा: जय हो बाप मेरे ! !
अकबरको गुस्सा आया .. दोनों हाथो से झाड़ को उखाड़ने लगा .. इतने में अकबर को भयंकर खुजली होने लगी तो बोला: .. बीरबल ये क्या हो गया !

बीरबल ने कहा आप ने मेरी माँ को मारा इस लिए ये गुस्सा हो गए!

अकबर जहाँ भी हाथ लगता खुजली होने लगती .. बोला: बीरबल जल्दी कोई उपाय बतायो!

बीरबल बोला: उपाय तो है लेकिन वो भी हमारी माँ है .. उससे विनती करी पड़ेगी !

अकबर बोला: जल्दी करो !

आगे गाय खड़ी थी बीरबल ने कहा गाय से विनती करो कि … हे माता दवाई दो..

गाय ने गोबर कर दिया .. अकबर के शरीर पर उसका लेप करने से फौरन खुजली से राहत मिल गई!
अकबर बोला .. बीरबल अब क्या राजमहल में ऐसे ही जायेंगे?

बीरबलने कहा: .. नहीं बादशाह हमारी एक और माँ है! सामने गंगा बह रही थी .. आप बोलिए हर -हर गंगे .. जय गंगा मईया की .. और कूद जाइए !

नहा कर अपनेआप को तरोताजा महसूस करते हुए अकबर ने बीरबल से कहा: .. कि ये तुलसी माता, गौ माता, गंगा माता तो जगत माता हैं! इनको मानने वालों को ही हिन्दू कहते हैं ..!

*हिन्दू एक संस्कृति है , सभ्यता है .. सम्प्रदाय नहीं…..!

🔱🌻🔱 ।। जय श्री राम ।।🔱🌻🔱
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जरुर पढे

नेल्सन मंडेला दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति बनने के बाद, एक दिन अपने सुरक्षा कर्मियों के साथ रेस्तरां में खाना खाने गए। खाने का आर्डर दिया और उसके आने का इंतजार करने लगे ।

उसी समय मंडेला की सीट के सामने एक व्यक्ति भी अपने खाने का आने का इंतजार कर रहा था । मंडेला ने अपने सुरक्षाकर्मी को कहा, उसे भी अपनी टेबुल पर बुला लो। ऐसा ही हुआ, खाना आने के बाद सभी खाने लगे, वो आदमी भी साथ खाने लगा, पर उसके हाथ खाते समय काँप रहे थे। माथा पसीने से तर था। खाना खत्म कर वो आदमी सिर झुका कर होटल से निकल गया । उस आदमी के खाना खा के जाने के बाद मंडेला के सुरक्षा अधिकारी ने मंडेला से कहा कि वो व्यक्ति शायद बहुत बीमार था। खाते वक़्त उसके हाथ लगातार कांप रहे थे। वह भी कांप रहा था और पसीना भी आ रहा था। घबराया सा भी लग रहा था।

मंडेला ने कहा नहीं ऐसा नहीं है। वह उस जेल का जेलर था, जिसमें मुझे रखा गया था। जब कभी मुझे यातनाएं दी जाती और मै कराहते हुये पानी मांगता तो ये गाली देता हुआ मेरे ऊपर पेशाब करता था ।

मंडेला ने कहा , मै अब राष्ट्रपति बन गया हूं, उसने समझा कि मै भी उसके साथ ऐसा ही व्यवहार करूंगा। पर मेरा यह चरित्र नहीं है।

मुझे लगता है बदले की भावना से काम करना विनाश की ओर ले जाता है। यही धैर्य और सहिष्णुता की मानसिकता ही हमें विकास की ओर ले जाती है ।