Posted in छोटी कहानिया - १००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

🌹💖🙏 माँ का तोहफ़ा 🙏💖🌹

एक मर्मस्पर्शी कहानी, अवश्य पढ़ें।

एक दंपती दीपावली की ख़रीदारी करने को हड़बड़ी में था। पति ने पत्नी से कहा, “ज़ल्दी करो, मेरे पास टाईम नहीं है।” कह कर कमरे से बाहर निकल गया। तभी बाहर लॉन में बैठी माँ पर उसकी नज़र पड़ी।

कुछ सोचते हुए वापस कमरे में आया और अपनी पत्नी से बोला, “शालू, तुमने माँ से भी पूछा कि उनको दिवाली पर क्या चाहिए?

शालिनी बोली, “नहीं पूछा। अब उनको इस उम्र में क्या चाहिए होगा यार, दो वक्त की रोटी और दो जोड़ी कपड़े……. इसमें पूछने वाली क्या बात है?

यह बात नहीं है शालू…… माँ पहली बार दिवाली पर हमारे घर में रुकी हुई है। वरना तो हर बार गाँव में ही रहती हैं। तो… औपचारिकता के लिए ही पूछ लेती।

अरे इतना ही माँ पर प्यार उमड़ रहा है तो ख़ुद क्यों नहीं पूछ लेते? झल्लाकर चीखी थी शालू …और कंधे पर हैंड बैग लटकाते हुए तेज़ी से बाहर निकल गयी।

सूरज माँ के पास जाकर बोला, “माँ, हम लोग दिवाली की ख़रीदारी के लिए बाज़ार जा रहे हैं। आपको कुछ चाहिए तो..

माँ बीच में ही बोल पड़ी, “मुझे कुछ नहीं चाहिए बेटा।”

सोच लो माँ, अगर कुछ चाहिये तो बता दीजिए…..

सूरज के बहुत ज़ोर देने पर माँ बोली, “ठीक है, तुम रुको, मैं लिख कर देती हूँ। तुम्हें और बहू को बहुत ख़रीदारी करनी है, कहीं भूल न जाओ।” कहकर सूरज की माँ अपने कमरे में चली गईं। कुछ देर बाद बाहर आईं और लिस्ट सूरज को थमा दी।……

सूरज ड्राइविंग सीट पर बैठते हुए बोला, “देखा शालू, माँ को भी कुछ चाहिए था, पर बोल नहीं रही थीं। मेरे ज़िद करने पर लिस्ट बना कर दी है। इंसान जब तक ज़िंदा रहता है, रोटी और कपड़े के अलावा भी बहुत कुछ चाहिये होता है।”

अच्छा बाबा ठीक है, पर पहले मैं अपनी ज़रूरत का सारा सामान लूँगी। बाद में आप अपनी माँ की लिस्ट देखते रहना। कहकर शालिनी कार से बाहर निकल गयी।

पूरी ख़रीदारी करने के बाद शालिनी बोली, “अब मैं बहुत थक गयी हूँ, मैं कार में A/C चालू करके बैठती हूँ, आप अपनी माँ का सामान देख लो।”

अरे शालू, तुम भी रुको, फिर साथ चलते हैं, मुझे भी ज़ल्दी है।

देखता हूँ माँ ने इस दिवाली पर क्या मँगाया है? कहकर माँ की लिखी पर्ची ज़ेब से निकालता है।

बाप रे! इतनी लंबी लिस्ट, ….. पता नहीं क्या – क्या मँगाया होगा? ज़रूर अपने गाँव वाले छोटे बेटे के परिवार के लिए बहुत सारे सामान मँगाये होंगे। और बनो श्रवण कुमार, कहते हुए शालिनी गुस्से से सूरज की ओर देखने लगी।

पर ये क्या? सूरज की आँखों में आँसू…….. और लिस्ट पकड़े हुए हाथ सूखे पत्ते की तरह हिल रहा था….. पूरा शरीर काँप रहा था।

शालिनी बहुत घबरा गयी। क्या हुआ, ऐसा क्या माँग लिया है तुम्हारी माँ ने? कहकर सूरज के हाथ से पर्ची झपट ली….

हैरान थी शालिनी भी। इतनी बड़ी पर्ची में बस चंद शब्द ही लिखे थे…..

पर्ची में लिखा था….

“बेटा सूरज मुझे दिवाली पर तो क्या किसी भी अवसर पर कुछ नहीं चाहिए। फिर भी तुम ज़िद कर रहे हो तो…… तुम्हारे शहर की किसी दुकान में अगर मिल जाए तो फ़ुरसत के कुछ पल मेरे लिए लेते आना…. ढलती हुई साँझ हूँ अब मैं। सूरज, मुझे गहराते अँधियारे से डर लगने लगा है, बहुत डर लगता है। पल – पल मेरी तरफ़ बढ़ रही मौत को देखकर…. जानती हूँ टाला नहीं जा सकता, शाश्वत सत्‍य है….. पर अकेलेपन से बहुत घबराहट होती है सूरज।…… तो जब तक तुम्हारे घर पर हूँ, कुछ पल बैठा कर मेरे पास, कुछ देर के लिए ही सही बाँट लिया कर मेरे बुढ़ापे का अकेलापन।…. बिन दीप जलाए ही रौशन हो जाएगी मेरी जीवन की साँझ…. कितने साल हो गए बेटा तुझे स्पर्श नहीं किया। एक बार फिर से, आ मेरी गोद में सर रख और मैं ममता भरी हथेली से सहलाऊँ तेरे सर को। एक बार फिर से इतराए मेरा हृदय मेरे अपनों को क़रीब, बहुत क़रीब पा कर….और मुस्कुरा कर मिलूँ मौत के गले। क्या पता अगली दिवाली तक रहूँ ना रहूँ…..

पर्ची की आख़िरी लाइन पढ़ते – पढ़ते शालिनी फफक-फफक कर रो पड़ी…..

ऐसी ही होती हैं माँ…..

दोस्तो, अपने घर के उन विशाल हृदय वाले लोगों, जिनको आप बूढ़े और बुढ़िया की श्रेणी में रखते हैं, वे आपके जीवन के कल्पतरु हैं। उनका यथोचित आदर-सम्मान, सेवा-सुश्रुषा और देखभाल करें। यक़ीन मानिए, आपके भी बूढ़े होने के दिन नज़दीक ही हैं।…उसकी तैयारी आज से ही कर लें। इसमें कोई शक़ नहीं, आपके अच्छे-बुरे कृत्य देर-सवेर आप ही के पास लौट कर आने हैं।।

कहानी अच्छी लगी हो तो कृपया अग्रसारित अवश्य कीजिए। शायद किसी का हृदय परिवर्तन हो जाए और…..

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Posted in Nehru Family

Misuse of Power.

26th Dec 1988 and the Prime Minister and Congress President Rajiv Gandhi planned a ten-day holiday at Bangaram Island.

The Lakshwadeep Archipelago consists of 30 islands of which Bangaram is one, an uninhabited island, covering a mere half a sqkm.
The Indian Navy’s aircarft carrier, INS Virat picked up the holiday-goers from Mangalore & sailed them to Karavatti, the capital of the Lakshwadeep Islands.

Let that sink in.
Not a luxury cruise ship
Not a hired, private yatch
Not a plane
But Indian Navy’s aircraft carrier.
An aircraft carrier is not an ordinary ship; alone on the seas.
It is a warship that serves as a seagoing airbase.
It is the capital ship, heading a Carrier Battle Group, requiring exceptional protection for itself.
A vulnerable aircraft carrier is a useless white elephant.
The security for an aircarft carrier is a layered, in-depth protection against all conceivable threats at sea.
An outer-most layer of aircraft on airborne early warning, surveillance & air defence tasks.
The next layer; anti-submarine patrols by ships as well as specialised
aircraft / helicopters.
Another layer of destroyers & frigates, specifically for anti-air, anti-missile, & anti-submarine tasks.
The inner-most, close-in-defence by the systems on the carrier itself are needed.
In this case, a submarine was rumoured to be lurking around too.

The holiday-goers list included:
The PM, his Italian-born wife & 2 children,4 friends of Rahul & Priyanka Sonia’s sister, husband & daughter.
Sonia’s widowed mother Sonia’s brother, Sonia’s maternal uncle.
Amitabh Bachchan’s wife & their 2 kids
His brother Ajitabh’s daughter.
Wife & daughter of *Birendra Singh, brother of former Union Minister, Arun Singh.

A total of:
6 Italian nationals
2 unknown foreigners
14 Indians (including Sonia who had surrendered Italian passport 5 years earlier)
On a joy-ride on the Indian Navy’s aircraft carrier
Bangaram is an uninhabited island.
So, everything was set-up from scratch.

An Administration helicopter ferried to the party,
The Society for the Promotion of Recreation, Tourism and Water Sports (SPORTS), a wing of the Lakshadweep administration was at their service.
A temporary farm with 100 chickens was set-up, two cooks worked full-time, under the personal supervision of the Gandhi’s personal cook.

Crates of liquor were brought from New Delhi, cold drinks and drinking water suppplied from Karavatti.
The island’s choicest fruits.
There is nothing wrong in a Prime Minister taking a break from his/her hectic schedule. The US President at Camp David and Putin’s shirtless escapades come to mind.

Contrast this with our current PM, who has never taken a holiday, sleeps on overnight long-haul flights.

It is in the manner in which virtually the entire State machinery was exploited & security compromised that raises several questions and reveals why the Gandhi parivaar, their scions feel they are entitled; that the country owes it to them to take care of all their needs.

The sight of an entitled Prince celebrating his birthday on board a Chartered Aircraft with his sis, mamma & granny, then PM, pales in comparision to the Bangaram holiday.

The sense of entitlement, that put the State machinery to be at their beck and call, is mind-boggling.

Was there an outrage on the use of an aircraft carrier for a joy-ride?

Who at Naval HQ agreed to divert an entire aircraft carrier for ten days, for private use?

Why did no one object to the presence of foreign nationals?
Who were the 2 unknown foreign nationals?
At least now, hard questions should be asked.

Admiral J G Nadkarni passed away in 2018 but Navy records should reveal how the decision came by.

What security checks were made of the foreign nationals?

What was the occupation of the foreign nationals?

Was Q among them?

After the vacation, the group dispersed separately, with Rahul & Rajiv going back from Karavatti to Mangalore on the INS Virat.
Again!

The Gandhis are entitled to an immense sense of entitlement because, we the people of India, have placed them on a pedestal based, merely because of who they are born or married to.

Till now, we have believed that it is OUR privilege & their right to be on that pedestal.

So, don’t begrudge the arrogance of Rahul & Priyanka Or their hate towards Modi & his new India.
Deprived of an India as their private jagir With its snake charmers, riverboat safaris, dinner with the natives, temple-hopping & other exquisite entitlements.

We, the people of India, have given them that exalted place.
And it is time, to change that

Our leaders MUST earn our respect,
MUST work for the privilege to represent us
And when they do, it is not a gravy train to enrichment
but an opportunity to serve
#CongressNeverAgain

For exquisite details of the vacation,
https://t.co/3ebsLAouq8