Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

गुरु और परमात्मा में- एक अंतर है।

‼️वेद पुराण की प्रस्तुति‼️

एक आदमी के घर परमात्मा और गुरु दोनो पहुंच गये, वह बाहर आया और चरणों में गिरने लगा।

वह परमात्मा के चरणों में गिरा तो परमात्मा बोले- रुको-रुको पहले गुरु के चरणों में जाओ।

वह दौड़ कर गुरु के चरणों में गया। गुरु बोले- मैं परमात्मा को लाया हूँ,
पहले परमात्मा के चरणों में जाओ।

वह परमात्मा के चरणों में गया तो परमात्मा बोले- इस परमात्मा को गुरु ही लाया है न,
गुरु ने ही बताया है न, तो पहले गुरु के चरणों में जाओ।
फिर वह गुरु के चरणों में गया।

गुरु बोले- नहीं-नहीं मैंने तो तुम्हें बताया ही है न, लेकिन तुमको बनाया किसने?

परमात्मा ने ही तो बनाया है न, इसलिये पहले परमात्मा के चरणों में जाओ।
वो फिर वह परमात्मा के चरणों में गया।
परमात्मा बोले- रुको मैंने तुम्हें बनाया, यह सब ठीक है। तुम मेरे चरणों में आ गये हो।
लेकिन मेरे यहाँ न्याय की पद्धति है। अगर तुमने अच्छा किया है,
अच्छे कर्म किये हैं, तो तुमको स्वर्ग मिलेगा।
फिर अच्छा जन्म मिलेगा, अच्छी योनि मिलेगी।
लेकिन अगर तुम बुरे कर्म करके आए हो,
तो मेरे यहाँ दंड का प्रावधान भी है, दंड मिलेगा।

चौरासी लाख योनियों में भटकाए जाओगे, फिर अटकोगे, फिर तुम्हारी आत्मा को कष्ट होगा।
फिर नरक मिलेगा, और अटक जाओगे।

लेकिन यह गुरु है ना, यह बहुत भोला है।
इनके पास, इसके चरणों में पहले चले गये तो तुम जैसे भी हो, जिस तरह से भी हो
यह तुम्हें गले लगा लेगा।
और तुमको शुद्ध करके मेरे चरणों में रख जायेगा। जहाँ ईनाम ही ईनाम है।
यही कारण है कि गुरु कभी किसी को भगाता नहीं।
गुरु निखारता है, जो भी मिलता है उसको गले लगाता है।
उस पतित को पावन करता है और सदा के लिए जन्म-मरण के आवागमन से मुक्ति दिलाकर परमात्मा के चरणों में भेज देता है…🙏🏻

🙏🏻👏🏻ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय नमो नमः👏🏻🙏🏻

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