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પુસ્તકપ્રેમીઓ માટે ઉપયોગી વેબસાઈટસ

[1] Readgujarati.com :-

  • ટૂંકી વાર્તા, પ્રવાસવર્ણન, નિબંધ, હાસ્ય-લેખ, કાવ્ય, ગઝલ, બાળસાહિત્ય, લઘુકથા, વિજ્ઞાનકથા સહિત વિવિધ પ્રકારના ગુજરાતી સાહિત્યનો રસથાળ. રોજેરોજ પ્રકાશિત થતી બે કૃતિઓ સાથે 3000થી વધુ લેખોનો સંગ્રહ.

[2] mavjibhai.com :-

  • ગુજરાતી સુગમ સંગીત, લોકગીત, ગઝલ તેમજ કાવ્યનો સમન્વય. મનગમતા ગીતો સરળતાથી શોધવા માટે કક્કાવાર અનુક્રમણિકા. 300 થી વધુ કવિઓ, 75થી વધુ સંગીતકારોની 1500થી વધુ કૃતિઓ.

[3] Layastaro.com :-

  • રોજેરોજ કવિતા, કવિતાનો આસ્વાદ અને વિવિધ પ્રકારના પદ્યસાહિત્યનું રસપાન કરાવતી વેબસાઈટ. સુપ્રસિદ્ધ કવિઓ તેમજ ગઝલકારોની ઉત્તમ રચનાઓ.

[4] Aksharnaad.com :-
ચૂંટેલા સાહિત્ય-લેખો, વાર્તાઓ, ગીરના પ્રવાસવર્ણનો, પુસ્તક સમીક્ષા તેમજ અનુવાદીત કૃતિઓ સહિત પ્રાર્થના-ગરબા-ભજનનું મનનીય સંપાદન.

[5] Gujaratilexicon.com :-

  • આશરે 25 લાખ શબ્દો ધરાવતો ઓનલાઈન ગુજરાતી શબ્દકોષ. ગુજરાતીથી અંગ્રેજી અને અંગ્રેજીથી ગુજરાતી શબ્દાર્થ શોધવાની સુવિધા. ગુજરાતી જોડણી તપાસવા સહિત વિવિધ પ્રકારની અન્ય ઉપયોગી સુવિધાઓ.

[6] Bhagwadgomandal.com :-

  • ૨.૮૧ લાખ શબ્દો અને ૮.૨૨ લાખ અર્થોને સમાવિષ્ટ કરતો ગુજરાતી ભાષાના સાંસ્કૃતિક સીમાસ્તંભરૂપ જ્ઞાનનો વ્યાપક, વૈજ્ઞાનિક અને ઉત્તમ ખજાનો. ડિજિટલરૂપમાં ઇન્ટરનેટ અને સીડી માધ્યમ દ્વારા ઉપલબ્ધ. સંપૂર્ણ રીતે યુનિકોડમાં ઓનલાઈન નિ:શુલ્ક ઉપલબ્ધ.

[7] Vmtailor.com :-

  • ડૉ. વિવેક ટેલરના સ્વરચિત કાવ્યોની સૌપ્રથમ બ્લોગ પ્રકારની વેબસાઈટ. સુંદર ગઝલો, ગીતો, હાઈકુ અને કાવ્યો. સચિત્ર ગઝલો સાથે પ્રત્યેક સપ્તાહે એક નવી કૃતિનું આચમન.
    (8) dadabhagwan.in
    આધ્યાત્મિક ક્ષેત્રે ગુજરાતનો ડંકો દેશ પરદેશ માં વગાડનાર દાદા ભગવાન વડોદરા ના જ હતા. તેમના બધાજ પુસ્તકો ઉપલબ્ધ છે. Free download.
    [8] Vicharo.com :-
  • વ્યાખ્યાતા શ્રી કલ્પેશ સોનીના સ્વરચિત ચિંતનલેખોનું સરનામું. એ સાથે કવિતા, ગીત, જીવનપ્રસંગ અને હાસ્યલેખનો સમાવેશ. દર સપ્તાહે એક નવી કૃતિનું પ્રકાશન.

[9] Mitixa.com :-

  • કાવ્ય અને સંગીત સ્વરૂપે ગુજરાતી લોકગીતો, ભક્તિગીતો, શૌર્યગીતો, ગઝલો, ફિલ્મી ગીતો તેમજ અન્ય સુપ્રસિદ્ધ રચનાઓ.

[10] Sheetalsangeet.com :-

  • ઈન્ટરનેટ પર 24 કલાક પ્રસારીત થતો ગુજરાતી રેડિયો.

[11] Rankaar.com :-

  • પ્રાચીન-અર્વાચીન ગીતો, ગઝલો, કાવ્ય, ભજન, બાળગીતો, લગ્નગીત, સ્તુતિ, હાલરડાં સહિત નિયમિત પ્રકાશિત થતી સંગીતબદ્ધ રચનાઓનો સમન્વય.

[12] Urmisaagar.com :-

  • સ્વરચિત ઊર્મિકાવ્યો તેમજ ગુજરાતી સાહિત્યના કેટલાક ચૂંટેલા કાવ્યો,ગઝલોનું સંપાદન.

[13] Cybersafar.com

  • કોલમિસ્ટ શ્રી હિમાંશુ કિકાણીની ટેકનોલોજીના વિષયોને સરળ ભાષામાં સમજાવતી વેબસાઈટ.

[14] Saurabh-shah.com :-

  • જાણીતા પત્રકાર-લેખક શ્રી સૌરભ શાહની વેબસાઈટ.

[15] Jhaverchandmeghani.com :-

  • રાષ્ટ્રીય શાયર શ્રી ઝવેરચંદ મેઘાણીની વેબસાઈટ.

[16] Anand-ashram.com :-

  • સંતવાણી અને સંતસાહિત્ય ક્ષેત્રે કાર્ય કરનાર ડૉ. નિરંજન રાજ્યગુરુની વેબસાઈટ.

[17] Adilmansuri.com :-

  • કવિ શ્રી આદિલ મન્સૂરીની વેબસાઈટ.

[18] Rajendrashukla.com :-

  • જાણીતા કવિ-ગઝલકાર શ્રી રાજેન્દ્ર શુક્લની વેબસાઈટ.

[19] Manojkhanderia.com :-

  • કવિશ્રી મનોજ ખંડેરિયાની વેબસાઈટ.

[20] Pannanaik.com :-

  • કવિયત્રી પન્ના નાયકની વેબસાઈટ.

[21] Rameshparekh.in :-

  • કવિશ્રી રમેશ પારેખની વેબસાઈટ.

[22] Harilalupadhyay.org :-

  • સાહિત્યકાર શ્રી હરિલાલ ઉપાધ્યાયની વેબસાઈટ.

[23] Gujaratisahityaparishad.org :-

  • ગુજરાતી સાહિત્ય પરિષદની વેબસાઈટ.

[24] Nirmishthaker.com :-

  • સુપ્રસિદ્ધ કવિ, કાર્ટૂનિસ્ટ અને હાસ્યલેખક શ્રી નિર્મિશ ઠાકરની વેબસાઈટ.

[25] Vicharvalonu.com :-

  • જાણીતા સામાયિક ‘વિગેરે

[26] http://pustakalay.com/sahitya.htm :-

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Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

Her her mahadev her Ji
Om namah shivaye Ji
(((सकारात्मक सोच का जाद,)))
एक ऋषि के दो शिष्य थे जिनमें से एक शिष्य सकारात्मक सोच वाला था वह हमेशा दूसरों की भलाई का सोचता था और दूसरा बहुत नकारात्मक सोच रखता था और स्वभाव से बहुत क्रोधी भी था एक दिन महात्मा जी अपने दोनों शिष्यों की परीक्षा लेने के लिए उनको जंगल में ले गये

जंगल में एक आम का पेड़ था जिस पर बहुत सारे खट्टे और मीठे आम लटके हुए थे ऋषि ने पेड़ की ओर देखा और शिष्यों से कहा की इस पेड़ को ध्यान से देखो फिर उन्होंने पहले शिष्य से पूछा की तुम्हें क्या दिखाई देता है

शिष्य ने कहा कि ये पेड़ बहुत ही विनम्र है लोग इसको पत्थर मारते हैं फिर भी ये बिना कुछ कहे फल देता है इसी तरह इंसान को भी होना चाहिए, कितनी भी परेशानी हो विनम्रता और त्याग की भावना नहीं छोड़नी चाहिए फिर दूसरे शिष्या से पूछा कि तुम क्या देखते हो, उसने क्रोधित होते हुए कहा की ये पेड़ बहुत धूर्त है बिना पत्थर मारे ये कभी फल नहीं देता इससे फल लेने के लिए इसे मारना ही पड़ेगा

इसी तरह मनुष्य को भी अपने मतलब की चीज़ें दूसरों से छीन लेनी चाहिए गुरु जी हँसते हुए पहले शिष्य की बढ़ाई की और दूसरे शिष्य से भी उससे सीख लेने के लिए कहा सकारात्मक सोच हमारे जीवन पर बहुत गहरा असर डालती है नकारात्मक सोच के व्यक्ति अच्छी चीज़ों मे भी बुराई ही ढूंढते हैं

उदाहरण के लिए:- गुलाब के फूल को काँटों से घिरा देखकर नकारात्मक सोच वाला व्यक्ति सोचता है की “इस फूल की इतनी खूबसूरती का क्या फ़ायदा इतना सुंदर होने पर भी ये काँटों से घिरा है ” जबकि उसी फूल को देखकर सकारात्मक सोच वाला व्यक्ति बोलता है की “वाह! प्रकर्ती का कितना सुंदर कार्य है की इतने काँटों के बीच भी इतना सुंदर फूल खिला दिया” बात एक ही है लेकिन फ़र्क है केवल सोच का
Her her mahadev her Ji

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

महान लेखक टालस्टाय की एक कहानी है – “शर्त “

इस कहानी में दो मित्रो में आपस मे शर्त लगती है कि, यदि उसने 1 माह एकांत में बिना किसी से मिले,बातचीत किये एक कमरे में बिता देता है, तो उसे 10 लाख नकद वो देगा । इस बीच, यदि वो शर्त पूरी नहीं करता, तो वो हार जाएगा ।
पहला मित्र ये शर्त स्वीकार कर लेता है । उसे दूर एक खाली मकान में बंद करके रख दिया जाता है । बस दो जून का भोजन और कुछ किताबें उसे दी गई ।

उसने जब वहां अकेले रहना शुरू किया तो 1 दिन 2 दिन किताबो से मन बहल गया फिर वो खीझने लगा । उसे बताया गया था कि थोड़ा भी बर्दाश्त से बाहर हो तो वो घण्टी बजा के संकेत दे सकता है और उसे वहां से निकाल लिया जाएगा ।
जैसे जैसे दिन बीतने लगे उसे एक एक घण्टे युगों से लगने लगे । वो चीखता, चिल्लाता लेकिन शर्त का खयाल कर बाहर किसी को नही बुलाता । वोअपने बाल नोचता, रोता, गालियां देता तड़फ जाता,मतलब अकेलेपन की पीड़ा उसे भयानक लगने लगी पर वो शर्त की याद कर अपने को रोक लेता ।

कुछ दिन और बीते तो धीरे धीरे उसके भीतर एक अजीब शांति घटित होने लगी।अब उसे किसी की आवश्यकता का अनुभव नही होने लगा। वो बस मौन बैठा रहता। एकदम शांत उसका चीखना चिल्लाना बंद हो गया।

इधर, उसके दोस्त को चिंता होने लगी कि एक माह के दिन पर दिन बीत रहे हैं पर उसका दोस्त है कि बाहर ही नही आ रहा है ।
माह के अब अंतिम 2 दिन शेष थे,इधर उस दोस्त का व्यापार चौपट हो गया वो दिवालिया हो गया।उसे अब चिंता होने लगी कि यदि उसके मित्र ने शर्त जीत ली तो इतने पैसे वो उसे कहाँ से देगा ।
वो उसे गोली मारने की योजना बनाता है और उसे मारने के लिये जाता है ।

जब वो वहां पहुँचता है तो उसके आश्चर्य का ठिकाना नही रहता ।
वो दोस्त शर्त के एक माह के ठीक एक दिन पहले वहां से चला जाता है और एक खत अपने दोस्त के नाम छोड़ जाता है ।
खत में लिखा होता है-
प्यारे दोस्त इन एक महीनों में मैंने वो चीज पा ली है जिसका कोई मोल नही चुका सकता । मैंने अकेले मे रहकर असीम शांति का सुख पा लिया है और मैं ये भी जान चुका हूं कि जितनी जरूरतें हमारी कम होती जाती हैं उतना हमें असीम आनंद और शांति मिलती है मैंने इन दिनों परमात्मा के असीम प्यार को जान लिया है । इसीलिए मैं अपनी ओर से यह शर्त तोड़ रहा हूँ अब मुझे तुम्हारे शर्त के पैसे की कोई जरूरत नही। इस उद्धरण से समझें कि लॉकडाउन के इस परीक्षा की घड़ी में खुद को झुंझलाहट,चिंता और भय में न डालें,उस परमात्मा की निकटता को महसूस करें और जीवन को नए दृष्टिकोण से देखने का प्रयत्न कीजिये,

इसमे भी कोई अच्छाई होगी यह मानकर सब कुछ भगवान को समर्पण कर दें।
विश्वास मानिए अच्छा ही होगा ।
लॉक डाउन का पालन करे।स्वयं सुरक्षित रहें,परिवार,समाज और राष्ट्र को सुरक्षित रखें।
लॉक डाउन के बाद जी तोड़ मेहनत करना है,स्वयं,परिवार और राष्ट्र के लिए…देश की गिरती अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए👍🏻👍🏻👍🏻

सभी को🙏🏻🙏🏻🙏🏻

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[यह जापान में घटी, एक सच्ची घटना है।]

अपने मकान का नवीनीकरण करने के लिये, एक जापानी अपने मकान की दीवारों को तोड़ रहा था। जापान में लकड़ी की दीवारों के बीच ख़ाली जगह होती हैं, यानी दीवारें अंदर से पोली होती हैं।

जब वह लकड़ी की दीवारों को चीर-तोड़ रहा था, तभी उसने देखा कि दीवार के अंदर की तरफ लकड़ी पर एक छिपकली, बाहर से उसके पैर पर ठुकी कील के कारण, एक ही जगह पर जमी पड़ी है।

जब उसने यह दृश्य देखा तो उसे बहुत दया आई पर साथ ही वह जिज्ञासु भी हो गया। जब उसने आगे जाँच की तो पाया कि वह कील तो उसके मकान बनते समय पाँच साल पहले ठोंका गई थी!

एक छिपकली इस स्थिति में पाँच साल तक जीवित थी! दीवार के अँधेरे पार्टीशन के बीच, बिना हिले-डुले? यह अविश्वसनीय, असंभव और चौंका देने वाला था!

उसकी समझ से यह परे था कि एक छिपकली, जिसका एक पैर, एक ही स्थान पर पिछले पाँच साल से कील के कारण चिपका हुआ था और जो अपनी जगह से एक इंच भी न हिली थी, वह कैसे जीवित रह सकती है?

अब उसने यह देखने के लिये कि वह छिपकली अब तक क्या करती रही है और कैसे अपने भोजन की जरुरत को पूरा करती रही है, अपना काम रोक दिया।

थोड़ी ही देर बाद, पता नहीं कहाँ से, एक दूसरी छिपकली प्रकट हुई, वह अपने मुँह में भोजन दबाये हुये थी – उस फँसी हुई छिपकली को खिलाने के लिये! उफ़्फ़! वह सन्न रह गया! यह दृश्य उसके दिल को अंदर तक छू गया!

एक छिपकली, जिसका एक पैर कील से ठुका हुआ था, को, एक दूसरी छिपकली पिछले पाँच साल से भोजन खिला रही थी!

अद्भुत! दूसरी छिपकली ने अपने साथी के बचने की उम्मीद नहीं छोड़ी थी, वह पहली छिपकली को पिछले पाँच साल से भोजन करवा रही थी।

अजीब है, एक छोटा-सा जंतु तो यह कर सकता है, पर हम मनुष्य जैसे प्राणी, जिसे बुद्धि में सर्वश्रेष्ठ होने का आशीर्वाद मिला हुआ है, नहीं कर सकता!

कृपया अपने प्रिय लोगों को कभी न छोड़ें! लोगों को उनकी तकलीफ़ के समय अपनी पीठ न दिखायें! अपने आप को महाज्ञानी या सर्वश्रेष्ठ समझने की भूल न करें! आज आप सौभाग्यशाली हो सकते हैं पर कल तो अनिश्चित ही है और कल चीज़ें बदल भी सकती हैं!

प्रकृति ने हमारी अंगुलियों के बीच शायद जगह भी इसीलिये दी है ताकि हम किसी दूसरे का हाथ थाम सकें!

आप आज किसी का साथ दीजिये, कल कोई-न-कोई दूसरा आपको साथ दे देगा!

धर्म चाहे जो भी हो बस अच्छे जीवन ही धर्मपाल, मालिक हमारे कर्म देखता है धर्म नहीं..

Copied ..

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एक बार की बात है कि किसी तालाब में दो मेंढक रहते थे जिनमें से एक बहुत मोटा था और दूसरा पतला| सुबह सवेरे जब वे दोनों खाने की तलाश में निकले थे, अचानक वे दोनों एक दूध के बड़े बर्तन में गिर गये, जिसके किनारे बहुत चिकने थे और इसी वजह से वो उसमें से बाहर नहीं निकल पा रहे थे|दोनों काफ़ी देर तक दूध में तैरते रहे उन्हें लगा कि कोई इंसान आएगा और उनको वहाँ से निकाल देगा लेकिन घंटों तक वहाँ कोई नहीं आया अब तो उनकी जान निकली जा रही थी | मोटा मेढक जो अब पैर चलाते चलाते थक गया था, बोला कि मेरे से अब तैरा नहीं जा रहा और कोई बचाने भी नहीं आ रहा है| अब तो डूबने के अलावा और कोई चारा ही नहीं बचा है|
पतले वाले ने उसे थोड़ा ढाँढस बंधाते हुए कहा कि मित्र कुछ देर और मेहनत से तैरते रहो ज़रूर कुछ देर बाद कोई ना कोई हल निकलेगा| इसी तरह फिर से कुछ घंटे बीत गये, मोटे मेंढक ने अब बिल्कुल उम्मीद छोड़ दी और बोला मित्र मैं अब पूरी तरह थक चुका हूँ और अब नहीं तैर सकता मैं तो डूबने जा रहा हूँ|
दूसरे मेंढक ने उसे बहुत रोका लेकिन वह जिंदगी से हार चुका था और खुद ही तैरना छोड़ दिया और डूब कर मर गया| पतले मेंढक ने अभी तक हार नहीं मानी थी और वो पैर चलाता रहा कुछ देर बाद उसने महसूस कि ज्यादा देर दूध के मथे जाने से उसका मक्खन बन चुका है|
और अब उसके पैरों के नीचे ठोस जगह हो चुकी थी| उसी का सहारा लेकर मेंढक ने छलाँग मारी और बाहर आ गया और अंत में उसकी जान बच गयी| अपने मित्र की मौत का उसे बड़ा दुख था, काश कुछ देर और संघर्ष करता तो वे दोनों बच सकते थे|शिक्षा-तो मित्रों, परेशानियाँ हर इंसान की जिन्दगी में आती हैं और कई बार तो हमारे सामने इतनी कठिन परिस्थितियां होती हैं जिनसे बाहर निकलना असंभव सा प्रतीत होता है, लेकिन यकीन मानिये हालात चाहे कितने भी बुरे क्यों ना हों, अगर आप हिम्मत ना हारें तो कोई ना कोई हल जरुर निकल सकता है| इसलिए कभी उम्मीद ना छोड़ें और समस्या कितनी भी बड़ी हो कभी उससे हारना नहीं चाहिए, प्रयास करते रहिए एक ना एक बार आप ज़रूर सफल होंगे यही इस कहानी की शिक्षा है|*

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अपनो से अपनी बातें
😆😆😆😆😆😆

हंस जैन रामनगर खण्डवा
98272 14427

दोस्तों,आजकल व्हाट्सएप, फेसबुक आदि सोशल मीडिया पर ज्ञान देने वाले कितने आ गए । कभी कभी लगता हैं कि यदि कोई गम्भीर बीमार पड़ा तो उसकी सर्जरी तक लोग घर पर कैसे करे भी बता देंगे। एक आम इंसान जब छोटे से दर्द से परेशान होता हैं तो जो रायचन्द टाइप लोग होते हैं सलाह देने में कमी नही छोड़ते। अच्छा सबसे अच्छी बात तो ये हैं कि दूसरे की सलाह सब गलत बताकर अपनी सलाह की तारीफ करते कि ये कर लो सब ठीक हो जायेगा।

मतलब बीमारी एक – व्यक्ति एक – नजरिये अनेक

एक दिन मेरे पेट में थोड़ी सी तकलीफ हुई में डॉक्टर के पास गया डॉक्टर ने बताया जाच करवा लो आंतो में तकलीफ है ।

अचानक मेने सोचा बहुत दिनों से किसी ज्योतिष को कुंडली नही दिखाई।

ज्योतिष ने कहा गृह दोष हे शनि ख़राब हे शांति करवा लो।

फिर आगे जंहा जंहा गया वँहा का बताता हूँ।

रत्न बेचने वाले ने कहा शनि का नग नीलम पहन लो ।

देवी आराधक ने कहा देव दोष हे देवता निमित्त लोगो को भोजन करवा दो ।

यंत्र बेचने वाले ने कह दिया गुरु और शनि का यंत्र स्थापित कर पूजन करो
ठीक हो जायेगा।

कर्मकांडी ने कहा टेंशन मत लो एक महामृत्युजय का अनुष्ठान कर देते हे सभी ठीक हो जायेगा।

जानकर ने कहा किसी ने कुछ कर दिया हे झाड़ा फूंकी से ठीक हो जायेगा ।

मेरे जेन मित्र ने बताया तू जैन होकर नियम से नही चलता जैन नियम से चलो सुर्यास्त से पूर्व भोजन करो सभी समस्या दूर।

शराबी मित्र ने भी कहा तुम फालतू परेशान होते हो रात को खाना खाने के पहले 2 पेग लगा लिया करो यह पेट वगेरा की तकलीफ छू हो जाएगी।

योगाचार्य ने बताया भाई साहेब आपको कितनी बार कहा योग करो सुबह भुजंग आसन किया कीजिये।

बीबी भी चिल्ल्लाती हे फोकट लोगो में घूमते रहते हो पैसा खर्च करते हो और मेरी बात नही मानते यह मुंनक्का रोज खावो।

वेद्य को नाडी दिखाई उसने कहा जठराग्नि मन्द पड़ चुकी हे यह चूर्ण रोज खावो ।

मित्र ने भी कहा तेरे को अनेको बार बताया की त्रिफला चूर्ण खाया कर मानता ही नही ।

हलवाई मित्र ने भी कहा भाई साहेब आप भोजन के समय रोज लौंग की 50 ग्राम सेव खाया करो पेट साफ हो जाएगा।

पहलवान ने भी कहा यार तू दिन भर बेठा रहता हे अखाड़े में आ कुछ कसरत कर सारी बीमारी खत्म हो जाएगी।

एक्यू प्रेशर वाले ने कहा पॉइंट लगा देते हे ठीक हो जाओगे।

ढाबे वाले पंजाबी मित्र ने भी बताया बाबूजी आप बस थोडा तेज मिर्च खाया करो बस ।

तेली ने भी कहा आप मेरा मूंगफली का तेल इस्तेमाल करो यह सोयाबीन का छोड़ दो ।

वास्तु वाले ने भी बताया आप वास्तु घर का सही करवाओ जल का बहाव आपके घर का जब तक ठीक नही होगा यह चलता रहेगा।

फेंग्सुई वाले ने बताया घर के दरवाजे पर अष्टकोण मिरर लगा लो नेगेटिव ऊर्जा का प्रवेश नही होगा ।

गोशाला वाले ने बताया बाबूजी आप आधा कप गो मूत्र सुबह पिया करो बगैर पैसे का इलाज ।

ढोर चराने वाले दूधवाले ने कहा बाबाजी आप सब छोडो में कल से आपको एक पाव बकरी का दूध ला कर दूंगा वह पिया करो ।

सिग्नेचर स्पेसलिष्ट ने कहा साइन डिजाइन करवा लो 5000 लेता हु आप 500 दे देना बस यह डॉट लगाना बंद करो और इस तरह साइन करो ठीक बाबूजी ने उससे कहा फिर तू परेशान क्यों हे खुद का डिजाइन कर न पहले ।

सड़क साफ करने वाले स्वीपर ने पूछा बाबूजी बड़े परेशान लगते हो क्या बात पेट तकलीफ हो रहा हैं
उसने कहा कोई बात नही आपकी नाभ खसकी हे
2 मिनट लेटोगे तो चड़ा देते है।पेट मसलो वह ठीक हो जागयी।

दोस्तो को मालूम पड़ा तो व्हाट्स एप्प एवम फेसबुक पर 212 उपाय आ गए। अब सोच रहा हूं कि यदि एक उपाय रोज भी करता या सलाह मानता हूं तो साल भर में पेट दर्द ठीक हो जाएगा। दोस्तो, मेरा इस लेख के प्रति अभिप्राय यही है कि ज्यादा दिमाग मत दौड़ाया कीजिये। आजकल जो ज्ञान हमे दे रहे उन्हें खुद को नही ज्ञात की एक बीमारी आने के कितने कारण होते हैं। खैर आप स्वस्थ रहे मस्त रहे। कोरोना वायरस से सम्बंधित सरकार एवम डाक्टस द्वारा दिये गए निर्देशों का पालन करे। धन्यवाद।

हंस जैन रामनगर खण्डवा
98272 14427

अपनो से अपनी बातें

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🌹प्रार्थना का बल 🌹

  • 🌹संत श्री आशारामजी बापू के सत्संग-प्रवचन से🌹

🌹किसी ने कहा हैः
जब और सहारे छिन जाते, कोई न किनारा मिलता है।
तूफान में टूटी किश्ती का, भगवान सहारा होता है।।
सच्चे हृदय की पुकार को वह हृदयस्थ परमेश्वर जरूर सुनता है, फिर पुकार चाहे किसी मानव ने की हो या किसी प्राणी ने। गज की पुकार को सुनकर स्वयं प्रभु ही ग्राह से उसकी रक्षा करने के लिए वैकुण्ठ से दौड़ पड़े थे, यह तो सभी जानते हैं।

🌹पुराणों में कथा आती हैः
एक पपीहा पेड़ पर बैठा था। वहाँ उसे बैठा देखकर एक शिकारी ने धनुष पर बाण चढ़ाया। आकाश से भी एक बाज उस पपीहे को ताक रहा था। इधर शिकारी ताक में था और उधर बाज। पपीहा क्या करता ?
कोई ओर चारा न देखकर पपीहे ने प्रभु से प्रार्थना कीः “हे प्रभु ! तू सर्वसमर्थ है। इधर शिकारी है, उधर बाज है। अब तेरे सिवा मेरा कोई नहीं है। हे प्रभु ! तू ही रक्षा कर….”

🌹पपीहा प्रार्थना में तल्लीन हो गया। वृक्ष के पास बिल में से एक साँप निकला। उसने शिकारी को दंश मारा। शिकारी का निशाना हिल गया। हाथ में से बाण छूटा और आकाश में जो बाज मँडरा रहा था उसे जाकर लगा। शिकारी के बाण से बाज मर गया और साँप के काटने से शिकारी मर गया। पपीहा बच गया।
इस सृष्टि का कोई मालिक नहीं है ऐसी बात नहीं है। यह सृष्टि समर्थ संचालक की सत्ता से चलती है।

🌹कुछ समय पहले की बात हैः
जबलपुर (म.प्र.) में किसी कुम्हार ने देखा कि चिड़िया ने ईंटों के बीच में घोंसला बनाकर अण्डे दे दिये हैं। उसने सोचाः ‘आँवों में ईँटों को पकाते समय घोंसला निकाल देंगे।’ किन्तु वह भूल गया और आँवों में आग लगा दी। फिर उसे याद आया किः ‘अरे ! घोंसला तो रह गया !’ कुम्हार उनकी प्राणरक्षा के लिए ईश्वर से प्रार्थना करने लगा। लोगों ने कहाः
“तुम पागल हो गये हो ? यह कैसे सम्भव है कि आँवों की आग से घोंसला बच जाये ?”

🌹कुम्हारः “जब प्रह्लाद के जमाने में सम्भव था तो इस जमाने का स्वामी भी तो वही है ! जमाना बदला है, पर परमात्मा थोड़े बदला है !”*
उस कुम्हार ने आर्तभाव से प्रार्थना की और उस समर्थ सत्ता में खो गया। सुबह जब उसने अपना आँवाँ खोला और एक-एक करके ईंटें उठायीं तो क्या देखता है कि आँवों के बीच की ईंटों तक आग की आँच नहीं लगी है। चिड़िया उड़कर आकाश की ओर चली गयी और घोंसले में अण्डे ज्यों के त्यों !
यह घटित घटना है। ‘हिन्दुस्तान’ समाचार-पत्र में यह घटना छपी भी थी।
वह परमात्मा कैसा समर्थ है ! वह ‘कर्तुं अकर्तुं अन्याथाकर्तुं समर्थः’ है। असम्भव भी उसके लिए सम्भव है।

🌹1970 की एक घटना अमेरिका के विज्ञान जगत में चिरस्मरणीय रहेगी।
अमेरिका ने 11 अप्रैल, 1970 को अपोलो-13 नामक अंतिरक्षयान चन्द्रमा पर भेजा। दो दिन बाद वह चन्द्रमा पर पहुँचा और जैसे ही कार्यरत हुआ कि उसके प्रथम युनिट ऑडीसी (सी.एस.एम.) के ऑक्सीजन की टंकी में विद्युत तार में स्पार्किंग होने के कारण अचानक विस्फोट हुआ जिससे युनिट में ऑक्सीजन खत्म हो गयी और विद्युत आपूर्ति बंद हो गयी।
उस युनिट में तीन अंतरिक्षयात्री थेः जेम्स ए. लोवेल, जॉन एल. स्वीगर्ट और फ्रेड वोलेस हेईज। इन अंतरिक्षयात्रियों ने विस्फोट होने पर सी.एस.एम. युनिट की सब प्रणालियाँ बंद कर दीं एवं वे तीनों उस युनिट को छोड़कर एक्वेरियस (एल.एम.) युनिट में चले गये।
अब असीम अंतरिक्ष में केवल एल.एम. युनिट ही उनके लिए लाइफ बोट के समान था। परंतु बाहर की प्रचंड गर्मी से रक्षा करने के लिए उस युनिट में गर्मी रक्षा कवच नहीं था। अतः पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में प्रविष्ट होकर पुनः पृथ्वी पर वापस लौटने में उसका उपयोग कर सकना सम्भव नहीं था।
पूर्वनिर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पृथ्वी पर वापस लौटने में अभी चार दिन बाकी थे। इतना लम्बा समय चले उतना ऑक्सीजन एवं पानी का संग्रह नहीं बचा था। इसके अतिरिक्त इस युनिट के अंदर बर्फ की तरह जमा दे ऐसा ठंडा वातावरण एवं अत्यधिक कार्बन डाईऑक्साइड था। जीवन बचने की कोई गुंजाइश नहीं थी।

🌹अंतरिक्षयात्री पृथ्वी के नियंत्रणकक्ष के निरंतर सम्पर्क में थे। उन्होंने कहाः “अंतरिक्षयान में धमाका हुआ है…. अब हम गये….”
लाखों मील ऊँचाई पर अंतरिक्ष में मानवीय सहायता पहुँचाना सम्भव नहीं था। अंतरिक्षयान गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से भी ऊपर था। इस विकट परिस्थिति में सब निःसहाय हो गये। कोई मानवीय ताकत अंतरिक्षयात्रियों को सहाय पहुँचा सके यह सम्भव नहीं था। नीचे नियंत्रण कक्ष से कहा गयाः
“अब हम तो कुछ नहीं कर सकते। हम केवल प्रार्थना कर सकते हैं। जिसके हाथों में यह सारी सृष्टि है उस ईश्वर से हम केवल प्रार्थना कर सकते हैं…… May God help you ! We too shall pray to God. God will help you.” और देशवासियों ने भी प्रार्थना की।
युवान अंतरिक्षयात्रियों ने हिम्मत की। उन्होंने ईश्वर के भरोसे पर एक साहस किया। चंद्र पर अवरोहण करने के लिए एल.एम. युनिट के जिस इन्जन का उपयोग करना था उस इन्जन की गति एवं दिशा बदलकर एवं स्वयं गर्मी-रक्षक कवचरहित उस एल.एम. युनिट में बैठकर अपोलो – 13 को पृथ्वी की ओर मोड़ दिया। ….और आश्चर्य ! तमाम जीवनघातक जोखिमों से पार होकर अंतरिक्षयान ने सही सलामत 17 अप्रैल, 1970 के दिन प्रशान्त महासागर में सफल अवरोहण किया।

🌹उन अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने बाद में वर्णन करते हुए कहाः “अंतरिक्ष में लाखों मील दूर से एवं एल.एम. जैसे गर्मी-रक्षक कवच से रहित युनिट में बैठकर पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में प्रवेश करना और प्रचण्ड गर्मी से बच जाना, हम तीनों का जीवित रहना असम्भव था…. किसी भी मनुष्य का जीवित रहना असम्भव था। यह तो आप सबकी प्रार्थना ने काम किया है एवं अदृश्य सत्ता ने ही हमें जीवनदान दिया है।”
सृष्टि में चाहे कितनी भी उथल-पुथल मच जाय लेकिन जब अदृश्य सत्ता किसी की रक्षा करना चाहती है तो वातावरण में कैसी भी व्यवस्था करके उसकी रक्षा कर देती है। ऐसे तो कई उदाहरण हैं।

🌹कितना बल है प्रार्थना में ! कितना बल है उस अदृश्य सत्ता में ! अदृश्य सत्ता कहो, अव्यक्त परमात्मा कहो, एक ही बात है लेकिन वह है जरूर। उसी अव्यक्त, अदृश्य सत्ता का साक्षात्कार करना यही मानव जीवन का अंतिम लक्ष्य है।

स्रोतः ऋषि प्रसाद, जनवरी 2002, पृष्ठ संख्या 12-14, अंक 109

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🌻एक और एक ग्यारह🌻
एक बार की बात हैं कि बनगिरी के घने जंगल में एक उन्मुत्त हाथी ने भारी उत्पात मचा रखा था। वह अपनी ताकत के नशे में चूर होने के कारण किसी को कुछ नेहीं समझता था। बनगिरी में ही एक पेड पर एक चिडिया व चिडे का छोटा-सा सुखी संसारथा चिडिया अंडो पर बैठी नन्हें नन्हें प्यारे बच्चों के निकलने के सुनहरे सपने देखती रहती एक दिन क्रूर हाथी गरजता, चिंघाडता पेडों को तोडता-मरोडता उसी ओर आया देखते ही देखते उसने चिडिया के घोंसले वाला पेड भी तोड डाला घोंसला नीचे आ गिरा अंडे टूट गए और ऊपरसे हाथीका पैर उस पर पडा चिडिया और चिडा चीखने चिल्लाने के सिवा और कुछ न कर सके हाथी के जाने के बाद चिडिया छाती पीट-पीटकर रोने लगी। तभी वहां कठफोठवी आई वह चिडिया की अच्छी मित्र थी कठफोडवी ने उनके रोने का कारण पूछा तो चिडिया ने अपनी सारी कहानी कह डाली कठफोडवी बोली इस प्रकार गम में डूबे रहने से कुछ नहीं होगा उस हाथी को सबक सिखाने के लिए हमे कुछ करना होगा चिडिया ने निराशा दिखाई हमें छोटे-मोटे जीव उस बलशाली हाथी से कैसे टक्कर ले सकते हैं कठफोडवी ने समझाया एक और एक मिलकर ग्यारह बनतेहैं हमअपनी शक्तियां जोडेंगे कैसे चिडियाने पूछा मेरा एक मित्र वींआख नामक भंवरा हैं हमें उससे सलाह लेना चाहिए चिडिया और कठफोडवी भंवरे से मिली भंवरा गुनगुनाया यह तो बहुत बुरा हुआ मेरा एक मेंढक मित्र हैं आओ,उससे सहायता मांगे अब तीनों उस सरोवर के किनारे पहुंचे,जहां वह मेढक रहता था भंवरे ने सारी समस्या बताई। मेंढक भर्राये स्वर में बोला आप लोग धैर्य से जरा यहीं मेरी प्रतीक्षा करें मैं गहरे पाने में बैठकर सोचता हूं ऐसा कहकर मेंढक जल में कूद गया आधे घंटे बाद वह पानी से बाहर आया तो उसकी आंखे चमक रही थी वह बोला दोस्तो उस हत्यारे हाथी को नष्ट करने की मेरे दिमाग में एक बडी अच्छी योजना आई हैं उसमें सभी का योगदान होगा मेंढक ने जैसे ही अपनी योजना बताई,सब खुशी से उछल पडे योजना सचमुच ही अदभुत थी मेंढक ने दोबारा बारी-बारी सबको अपना-अपना रोल समझाया कुछ ही दूर वह उन्मत्त हाथी तोडफोड मचाकर व पेट भरकर कोंपलों वाली शाखाएं खाकर मस्ती में खडा झूम रहा था पहला काम भंवरे का था वह हाथी के कानों के पास जाकर मधुर राग गुंजाने लगा राग सुनकर हाथी मस्त होकर आंखें बंद करके झूमने लगा। तभी कठफोडवी ने अपना काम कर दिखाया वह् आई और अपनी सुई जैसी नुकीली चोंच से उसने तेजी से हाथी की दोनों आंखें बींध डाली हाथी की आंखे फूट गईं वह तडपता हुआ अंधा होकर इधर-उधर भागने लगा जैसे-जैसे समय बीतता जा रहा था,हाथी का क्रोध बढता जा रहा था आंखों से नजर न आने के कारण ठोकरोंऔर टक्करों से शरीरजख्मी होता जा रहा था जख्म उसे और चिल्लाने पर मजबूर कर रहे थे चिडिया कॄतज्ञ स्वर में मेढक से बोली बहिया, मैं आजीवन तुम्हारी आभारी रहूंगी तुमने मेरी इतनी सहायता कर दी मेढक ने कहा आभार मानने की जरुरत नहीं। मित्र ही मित्रों के काम आतेहैं एक तो आंखों में जलन और ऊपर से चिल्लाते-चिंघाडते हाथी का गला सूख गया उसे तेज प्यास लगने लगी अब उसे एक ही चीज की तलाश थी पानी। मेढक ने अपने बहुत से बंधु-बांधवों को इकट्ठा किया और उन्हें ले जाकर दूर बहुत बडे गड्ढे के किनारे बैठकर टर्राने के लिए कहा सारे मेढक टर्राने लगे मेढक की टर्राहट सुनकर हाथी के कान खडे हो गए वह यह जानता ता कि मेढक जल स्त्रोत के निकट ही वास करते हैं वह उसी दिशा में चल पडा टर्राहट और तेज होती जा रही थी प्यासा हाथी और तेज भागने लगा जैसे ही हाथी गड्ढे के निकट पहुंचा,मेढकों ने पूरा जोर लगाकर टर्राना शुरु किया। हाथी आगे बढा और विशाल पत्थर की तरह गड्ढे में गिर पडा, जहां उसके प्राण पखेरु उडते देर न लगे इस प्रकार उस अहंकार में डूबे हाथी का अंत हुआ।
सीखः-
1.एकता में बल हैं!
2.अहंकारी का देर या सबेर अंत होता ही हैं..!!
🙏🏻🙏🏽🙏🏼जय जय श्री राधे🙏🏿🙏🏾🙏

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महान लेखक टालस्टाय की एक कहानी है – “शर्त “

इस कहानी में दो मित्रो में आपस मे शर्त लगती है कि, यदि उसने 1 माह एकांत में बिना किसी से मिले,बातचीत किये एक कमरे में बिता देता है, तो उसे 10 लाख नकद वो देगा । इस बीच, यदि वो शर्त पूरी नहीं करता, तो वो हार जाएगा ।
पहला मित्र ये शर्त स्वीकार कर लेता है । उसे दूर एक खाली मकान में बंद करके रख दिया जाता है । बस दो जून का भोजन और कुछ किताबें उसे दी गई ।

उसने जब वहां अकेले रहना शुरू किया तो 1 दिन 2 दिन किताबो से मन बहल गया फिर वो खीझने लगा । उसे बताया गया था कि थोड़ा भी बर्दाश्त से बाहर हो तो वो घण्टी बजा के संकेत दे सकता है और उसे वहां से निकाल लिया जाएगा ।
जैसे जैसे दिन बीतने लगे उसे एक एक घण्टे युगों से लगने लगे । वो चीखता, चिल्लाता लेकिन शर्त का खयाल कर बाहर किसी को नही बुलाता । वोअपने बाल नोचता, रोता, गालियां देता तड़फ जाता,मतलब अकेलेपन की पीड़ा उसे भयानक लगने लगी पर वो शर्त की याद कर अपने को रोक लेता ।

कुछ दिन और बीते तो धीरे धीरे उसके भीतर एक अजीब शांति घटित होने लगी।अब उसे किसी की आवश्यकता का अनुभव नही होने लगा। वो बस मौन बैठा रहता। एकदम शांत उसका चीखना चिल्लाना बंद हो गया।

इधर, उसके दोस्त को चिंता होने लगी कि एक माह के दिन पर दिन बीत रहे हैं पर उसका दोस्त है कि बाहर ही नही आ रहा है ।
माह के अब अंतिम 2 दिन शेष थे,इधर उस दोस्त का व्यापार चौपट हो गया वो दिवालिया हो गया।उसे अब चिंता होने लगी कि यदि उसके मित्र ने शर्त जीत ली तो इतने पैसे वो उसे कहाँ से देगा ।
वो उसे गोली मारने की योजना बनाता है और उसे मारने के लिये जाता है ।

जब वो वहां पहुँचता है तो उसके आश्चर्य का ठिकाना नही रहता ।
वो दोस्त शर्त के एक माह के ठीक एक दिन पहले वहां से चला जाता है और एक खत अपने दोस्त के नाम छोड़ जाता है ।
खत में लिखा होता है-
प्यारे दोस्त इन एक महीनों में मैंने वो चीज पा ली है जिसका कोई मोल नही चुका सकता । मैंने अकेले मे रहकर असीम शांति का सुख पा लिया है और मैं ये भी जान चुका हूं कि जितनी जरूरतें हमारी कम होती जाती हैं उतना हमें असीम आनंद और शांति मिलती है मैंने इन दिनों परमात्मा के असीम प्यार को जान लिया है । इसीलिए मैं अपनी ओर से यह शर्त तोड़ रहा हूँ अब मुझे तुम्हारे शर्त के पैसे की कोई जरूरत नही। इस उद्धरण से समझें कि लॉकडाउन के इस परीक्षा की घड़ी में खुद को झुंझलाहट,चिंता और भय में न डालें,उस परमात्मा की निकटता को महसूस करें और जीवन को नए दृष्टिकोण से देखने का प्रयत्न कीजिये,

इसमे भी कोई अच्छाई होगी यह मानकर सब कुछ भगवान को समर्पण कर दें।
विश्वास मानिए अच्छा ही होगा ।
लॉक डाउन का पालन करे।स्वयं सुरक्षित रहें,परिवार,समाज और राष्ट्र को सुरक्षित रखें।
लॉक डाउन के बाद जी तोड़ मेहनत करना है,स्वयं,परिवार और राष्ट्र के लिए…देश की गिरती अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए👍🏻👍🏻👍🏻

सभी को🙏🏻🙏🏻🙏🏻