Posted in भारतीय उत्सव - Bhartiya Utsav

🌷 कैसे मनायें होली 🌷
🙏🏻 होली भारतीय संस्कृति की पहचान का एक पुनीत पर्व है, भेदभाव मिटाकर पारस्परिक प्रेम व सदभाव प्रकट करने का एक अवसर है |अपने दुर्गुणों तथा कुसंस्कारों की आहुति देने का एक यज्ञ है तथा परस्पर छुपे हुए प्रभुत्व को, आनंद को, सहजता को, निरहंकारिता और सरल सहजता के सुख को उभारने का उत्सव है |
यह रंगोत्सव हमारे पूर्वजों की दूरदर्शिता है जो अनेक विषमताओं के बीच भी समाज में एकत्व का संचार करता है | होली के रंग-बिरंगे रंगों की बौछार जहाँ मन में एक सुखद अनुभूति प्रकट कराती है वहीं यदि सावधानी, संयम तथा विवेक न रख जाये तो ये ही रंग दुखद भी जाते हैं | अतः इस पर्व पर कुछ सावधानियाँ रखना भी अत्यंत आवश्यक है |
प्राचीन समय में लोग पलाश के फूलों से बने रंग अथवा अबीर-गुलाल, कुमकुम- हल्दी से होली खेलते थे |किन्तु वर्त्तमान समय में रासायनिक तत्त्वों से बने रंगोंका उपयोग किया जाता है | ये रंग त्वचा पे चक्तों के रूप में जम जाते हैं | अतः ऐसे रंगों से बचना चाहिये | यदि किसी ने आप पर ऐसा रंग लगा दिया हो तो तुरन्त ही बेसन, आटा, दूध, हल्दी व तेल के मिश्रण से बना उबटन रंगो हुए अंगों पर लगाकर रंग को धो डालना चाहिये |यदि उबटन करने से पूर्व उस स्थान को निंबु से रगड़कर साफ कर लियाजाए तो रंग छुटने में और अधिक सुगमता आ जाती है |
रंग खेलने से पहले अपने शरीर को नारियल अथवा सरसों के तेल से अच्छी प्रकार लेना चाहिए | ताकि तेलयुक्त त्वचा पर रंग का दुष्प्रभाव न पड़े और साबुन लगाने मात्र से ही शरीर पर से रंग छुट जाये | रंग आंखों में या मुँह में न जाये इसकी विशेष सावधानी रखनी चाहिए | इससे आँखों तथा फेफड़ों को नुकसान हो सकता है |
जो लोग कीचड़ व पशुओं के मलमूत्र से होली खेलते हैं वे स्वयं तो अपवित्र बनते ही हैं दूसरों को भी अपवित्र करने का पाप करते हैं | अतः ऐसे दुष्ट कार्य करने वालों से दूर ही रहें अच्छा |
वर्त्तमान समय में होली के दिन शराब अथवा भंग पीने की कुप्रथा है | नशे से चूर व्यक्ति विवेकहीन होकर घटिया से घटिया कुकृत्य कर बैठते हैं | अतः नशीले पदार्थ से तथा नशा करने वाले व्यक्तियों से सावधान रहना चाहिये |आजकल सर्वत्र उन्न्मुक्तता का दौर चल पड़ा है | पाश्चात्य जगत के अंधानुकरण में भारतीय समाज अपने भले बुरे का विवेक भी खोता चला जा रहा है | जो साधक है, संस्कृति का आदर करने वाले हैं, ईश्वर व गुरु में श्रद्धा रखते हैं ऐसे लोगो में शिष्टता व संयम विशेषरूप से होना चाहिये | पुरुष सिर्फ पुरुषों से तथा स्त्रियाँ सिर्फ स्त्रियों के संग ही होली मनायें | स्त्रियाँ यदि अपने घर में ही होली मनायें तो अच्छा है ताकि दुष्ट प्रवृत्ति के लोगों कि कुदृष्टि से बच सकें |
होली मात्र लकड़ी के ढ़ेर जलाने त्योहार नहीँ है |यह तो चित्त की दुर्बलताओं को दूर करनेका, मन की मलिन वासनाओं को जलाने कापवित्र दिन है | अपने दुर्गुणों, व्यस्नों व बुराईओं को जलाने का पर्व है होली …….अच्छाईयाँ ग्रहण करने का पर्व है होली ………समाज में स्नेह का संदेश फैलाने का पर्व है होली……….
आज के दिन से विलासी वासनाओं का त्याग करके परमात्म प्रेम, सदभावना, सहानुभूति, इष्टनिष्ठा, जपनिष्ठा, स्मरणनिष्ठा, सत्संगनिष्ठा, स्वधर्म पालन , करुणा दया आदि दैवी गुणों का अपने जीवन में विकास करना चाहिये | भक्त प्रह्लाद जैसी दृढ़ ईश्वर निष्ठा, प्रभुप्रेम, सहनशीलता, व समता का आहावन करना चाहिये |
सत्य, शान्ति, प्रेम, दृढ़ता की विजय होती है इसकी याद दिलाता है आज का दिन | हिरण्यकश्यपु रूपी आसुरी वृत्ति तथा होलिका रूपी कपट की पराजय का दिन है होली, यह पवित्र पर्व परमात्मा में दृढ़ निष्ठावान के आगे प्रकृति द्वारा अपने नियमों को बदल देने की याद दिलाता है | मानव को भक्त प्रह्लाद की तरह विघ्न बाधाओं के बीच भी भगवदनिष्ठा टिकाए रखकर संसार सागर से पार होने का संदेश देने वाला पर्व है ‘होली’ !
🙏🏻 *लोक कल्याण सेतु 🙏

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🚩जय श्रीराधे कृष्णा🚩

🌷🌻🌷🌻🌷🌻🌷(((( लालची बुढिया ))))
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किसी गांव में एक सास और बहू रहती थी .
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सास बहुत दुश्ट थी और अपने बहू को बहुत सताती थी . बहू बेचारी सीधी साधी सास के अत्याचारों को सहती रहती थी . एक दिन तीज का त्यौहार था बहू ने अपने पति की लम्बी उम्र के लिए व्रत रक्खा था . मुहल्ले की सभी औरते अच्छे अच्छे पकवान बना रही थी . नए नए कपड़े पहन कर और सज संवर कर मन्दिर जाने की तैयारी कर रही थी .
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पर सास ने अपनी बहू से कहा – अरे कलमुंही तू बैठे बैठे यहाँ क्या कर रही है..
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जा खेत में मक्का लगा है.. कौंवे और तोते फसल नश्ट कर रहे है जा कर उन्हें उड़ा.
बहू ने कहा माँ आज मेरा व्रत है मै तो पूजा की तैयारी कर रही थी, आज मुझे मन्दिर जाना है . सास ने कहा – तू सज संवर कर मन्दिर जा कर क्या करेगी, कौन सा जग जीत लेगी , बहू को गालिया देने लगी .
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बहू बेचारी क्या करती मन मार कर जाना पड़ा लेकिन उसे रोना आ रहा था उसकी आँखे भर आई , वह और औरतों को मन्दिर जाते देख रही थी , औरतें मंगल गीत गा रही थी . उसके सब अरमान पलकों से टपक रहे थे . वह आज सजना चाहती थी , अपने पति के नाम की चुड़िया पहनना चाहती थी , मांग में अपने पति के नाम का सिंदूर लगाना चाहती थी और वह साड़ी पहनना चाहती थी जो उसके पति ने उसे अपनी पहली कमाई पर दिया था,
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आज उसके लिए मंगल कामना ईश्वर के चरणों में जा कर करना चाहती थी . वह अन्दर ही अन्दर रो रही थी और खेत की तरफ़ जा रही थी , खेत पर पहुंच कर , को – कागा – को , यहाँ ना आ , मेरा खेत ना खा – कही और जा जा कहती जा रही थी .
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उसी समय पृथ्वी पर शंकर और पार्वती जी भ्रमन करने निकले थे ,
पार्वती जी को बहू का रोना देख कर ह्रदय भर आया और उन्होंने शिव जी से कहा की नाथ देखिये तो कोई अबला नारी रो रही है . रूप बदल कर शंकर और पार्वती जी बहू के पास पंहुचे और पूछा की बेटी क्या बात है ? क्यूं रो रही हो ? क्या कष्ट है तुम्हे तो वह बोली की मै अपनी किस्मत पर रो रही हूँ . आज तीज का व्रत है गांव की सारी औरतें पूजा पाठ कर रही है और मेरी सास ने मुझे यहाँ कौवे उड़ाने के लिए भेज दिया है और मै अभागी यहाँ कौवे उड़ा रही हूँ भोले बाबा को बहू पर दया आ गई उन्होंने बहू को ढेर सारे गहने और चांदी और सोने के सिक्के दे कर कर कहा की तुम घर जाओ और अपनी पूजा करो , मै तुम्हारे खेत की देख भाल करूँगा .
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जब बहू घर पहुँची तो सास बहू के पास इतना धन देख कर आश्चय चकित रह गई ..
बहू ने सारी बात सास को बता दी . सास बहू से अच्छे से बोली अच्छा तू जा कर पूजा कर ले और अगले साल मै खेत की रखवाली करने जाउंगी .अगले साल जब तीज आई बुढ़िया तैयार हो कर खेत पर पहुँच गई और खूब तेज तेज रोने लगी ,
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ठीक उसी समय शंकर और पार्वती उधर से गुजर रहे थे और उन्होंने ने पूछा की क्या बात है तो उस बुढिया ने बताया की मेरी बहू मुझे बहुत परेशान करती है और उसने आज भी उसने मुझे खेत की रखवाली के लिए भेज दिया जबकि आज मेरा व्रत है .
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भगवान शंकर उस बुढिया को समझ गए और उन्होंने ने कहा तुम घर जाओ ,तो बुढिया ने कहा की आपने मुझे कुछ दिया नही तो भोले बाबा ने कहा की घर जाओ तुम्हे मिल जायेगा .
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जब वह घर पहुची तो उसके पुरे शरीर में छाले पड़ गए .
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बुढ़िया बहू को गलिया देने लगी . बहू ने पूछा तो बुढ़िया ने पुरी कहानी बताई ,
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तब बहू ने कहा की भगवान हमेशा सरल, सच्चे और भोले भाले लोगों की ही सहायता करते है , लालची लोगो की नही .

🌹🌷जय जय श्री राधे कृष्ण🌹🌷

राहुल शिवहरे जिला छतरपुर भोपाल

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