Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

, :       🙏श्री गणेशाय नम:🙏    : , *जय माता दी*

रात्रि कथा ,, *(((( सद्गुरु की कृपा ))))* ,,

एक बार एक चोर ने गुरु से नाम ले लिया, और बोला गुरु जी चोरी तो मेरा काम है ये तो नहीं छूटेगी मेरे से..

अब गुरु जी बोले ठीक है मैं तुझे एक दूसरा काम देता हुँ, वो निभा लेना…

बोले पराई इस्त्री को माता बहन समझना..

चोर बोला ठीक है जी ये मैं निभा लूंगा।

एक राजा के कोई संतान नहीं थी तो उसने अपनी रानी को दुहागण कर रखा था

10-12 साल से बगल मे ही एक घर दे रखा उसमे रहती और साथ ही सिपाहियों को निगरानी रखने के लिए बोल दिया।

उसी चोर का उस रानी के घर मे चोरी के लिए जाना हुआ.. रानी ने देखा के चोर आया है।

उधर सिपाहियों ने भी देख लिया के कोई आदमी गया है रानी के पास…

राजा को बताया राजा बोला मैं छुप-छुप के देखूंगा… अब राजा छुप छुप के देखने लगा।

रानी बोली चोर को कि तुम किस पे आये हो..

चोर बोला ऊंट पे..

रानी बोली की तुम्हारे पास जितने भी ऊंट हैं मैं सबको सोने चांदी से भरवां दूंगी बस मेरी इच्छा पुरी कर दो।

चोर को अपने गुरु का प्रण याद आ गया.. बोला नहीं जी.. आप तो मेरी माता हो..

जो पुत्र के लायक वाली इच्छा हो तो बताओ और दूसरी इच्छा मेरे बस की नहीं है।

राजा ने सोचा वाह चोर होके इतना ईमानदार…

राजा ने उसको पकड़ लिया और महल ले गया.. बोला मैं तेरी ईमानदारी से खुश हुँ तू वर मांग..

चोर बोला जी आप दोगे पक्का वादा करो..

राजा बोला हाँ मांग..

चोर बोला मेरी मां को जिसको आपने दुहागण कर रखा है उसको फिर से सुहागन कर दो..

राजा बड़ा खुश हुआ उसने रानी को बुलाया.. और बोला रानी मैंने तुझे भी बड़ा दुख दिया है तू भी मांग ले कुछ भी आज..

रानी बोली के पक्का वादा करो दोगे और मोहर मार के लिख के दो के जो मांगूंगी वो दोगे।

राजा ने लिख के मोहर मार दी।

रानी बोली राजा हमारे कोई औलाद नहीं है इस चोर को ही अपना बेटा मान लो और राजा बना दो।

अब सतसंगियों गुरु के एक वचन की पालना से राज दिला दिया।

अगर हमारा विश्वास है तो दुनिया की कोई ताक़त नहीं जो हमें डिगा दे.. सतगुरु के वचनों अनुसार चलते रहे।

  . “卐 ज्योतिषी और हस्तरेखाविद 卐”
   :                      :🙏🙏:                    :
                  पं,संजय आमले
                     (  शास्त्री )
               मो,9860298094
,,, 8790466194,,,

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।।अब कोई बांझ नही बोलेगा ।।।

आधी रात का समय था रोज की तरह एक बुजुर्ग शराब के नशे में अपने घर की तरफ जाने वाली गली से झूमता हुआ जा रहा था, रास्ते में एक खंभे की लाइट जल रही थी, उस खंभे के ठीक नीचे एक 15 से 16 साल की लड़की पुराने फटे कपड़े में डरी सहमी सी अपने आँसू पोछते हुए खड़ी थी जैसे ही उस बुजुर्ग की नजर उस लड़की पर पड़ी वह रूक सा गया, लड़की शायद उजाले की चाह में लाइट के खंभे से लगभग चिपकी हुई सी थी, वह बुजुर्ग उसके करीब गया और उससे लड़खड़ाती जबान से पूछा तेरा नाम क्या है, तू कौन है और इतनी रात को यहाँ क्या कर रही है…?

लड़की चुपचाप डरी सहमी नजरों से दूर किसी को देखे जा रही थी उस बुजुर्ग ने जब उस तरफ देखा जहाँ लड़की देख रही थी तो वहाँ चार लड़के उस लड़की को घूर रहे थे, उनमें से एक को वो बुजुर्ग जानता था, लड़का उस बुजुर्ग को देखकर झेप गया और अपने साथियों के साथ वहाँ से चला गया लड़की उस शराब के नशे में बुजुर्ग से भी सशंकित थी फिर भी उसने हिम्मत करके बताया मेरा नाम रूपा है मैं अनाथाश्रम से भाग आई हूँ, वो लोग मुझे आज रात के लिए कहीं भेजने वाले थे, दबी जुबान से बड़ी मुश्किल से वो कह पाई…!

बुजुर्ग:- क्या बात करती है..तू अब कहाँ जाएगी..! लड़की:- नहीं मालूम…..! बुजुर्ग:- मेरे घर चलेगी…..? लड़की मन ही मन सोच रही थी कि ये शराब के नशे में है और आधी रात का समय है ऊपर से ये शरीफ भी नहीं लगता है, और भी कई सवाल उसके मन में धमाचौकड़ी मचाए हुए थे! बुजुर्ग:- अब आखिरी बार पूछता हूँ मेरे घर चलोगी हमेशा के लिए…? बदनसीबी को अपना मुकद्दर मान बैठी गहरे घुप्प अँधेरे से घबराई हुई सबकुछ भगवान के भरोसे छोड़कर लड़की ने दबी कुचली जुबान से कहा जी हाँ

उस बुजुर्ग ने झट से लड़की का हाथ कसकर पकड़ा और तेज कदमों से लगभग उसे घसीटते हुए अपने घर की तरफ बढ़ चला वो नशे में इतना धुत था कि अच्छे से चल भी नहीं पा रहा था किसी तरह लड़खड़ाता हुआ अपने मिट्टी से बने कच्चे घर तक पहुँचा और कुंडी खटखटाई थोड़ी ही देर में उसकी पत्नी ने दरवाजा खोला और पत्नी कुछ बोल पाती कि उससे पहले ही उस बुजुर्ग ने कहा ये लो सम्भालो इसको “बेटी लेकर आया हूँ हमारे लिए” अब हम बाँझ नहीं कहलाएंगे आज से हम भी औलाद वाले हो गए, पत्नी की आँखों से खुशी के आँसू बहने लगे और उसने उस लड़की को अपने सीने से लगा लिया।
🌹राज 🌹

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“दूध में पानी, बेईमानी”

🚩🌹 👁❗👁 🌹🚩
पालार नदी के किनारे एक ग्वाला रहता था। उसका नाम था ‘श्रीनिवास।’ वह प्रतिदिन नगर में दूध बेचने जाता था। उसका दूध सदा खालिस (शुद्ध) होता। ग्राहक सदा दूध की तारीफ करते थे किंतु उन दिनों दूध के दाम बेहद कम होते थे। अतः इतनी मेहनत करने पर भी श्रीनिवास को दो समय की पेट-भर रोटी नसीब नहीं होती थी।

एक दिन उसका साला आया। वह एक चतुर और धोखेबाज व्यक्ति था। उसने श्रीनिवास को सलाह दी, ‘क्यों नहीं तुम दूध में पानी मिलाते? सभी तो ऐसा ही करते हैं।’ श्रीनिवास ने दोनों दाँतों से जीभ काटी और कानों को हाथ लगाकर बोला- ‘न बाबा, मैं यह पाप कभी नहीं करूँगा।’

उसके साले ने समझाया, ‘अरे भई, इसमें पाप-पुण्य कहाँ से आ गया? दूध में पानी मिलाओगे तो ज्यादा पैसे मिलेंगे। ज्यादा पैसे आएँगे तो परिवार खुशहाल होगा।’‘हाँ, मुझे भी कांजीवरम की साड़ी पहनने को मिलेगी। बच्चे भी पेट-भरकर दही-भात खाएँगे,’ श्रीनिवास की पत्नी ने भी भाई की हाँ में हाँ मिलाई।

बस, अब क्या था, श्रीनिवास का दिमाग घूम गया। अब दूध में पानी मिलाने लगा। पहले तो वह थोड़ा पानी डालता था किंतु जब लालच बढ़ गया तो वह आधा दूध व आधा पानी मिलाने लगा। ग्राहकों को पता ही नहीं लगा कि श्रीनिवास उन्हें मिलावटी दूध पिला रहा है।

श्रीनिवास की आमदनी बढ़ गई। उसने एक थैली भरकर सिक्के जोड़ लिए। एक दिन उसकी पत्नी ने कहा-‘जाओ जी, बाजार से सबके कपड़े खरीद लाओ।’ श्रीनिवास ने राह के लिए डोसा व सांभर बँधवाया और बाजार की ओर चल पड़ा।

चलते-चलते उसे भूख लग आई। पेलार नदी समीप ही थी। नहाने का मन हुआ तो उसने कपड़े और सिक्कों की थैली किनारे पर रखी और पानी में कूद गया। नहाकर उसने कपड़े पहने और स्वादिष्ट डोसे खाए। चलते वक्त उसे पैसों की थैली की याद आई। पर यह क्या? वह तो वहाँ थी ही नहीं।

श्रीनिवास ने इधर-उधर नजर दौड़ाई। एक बंदर थैली लिए पेड़ पर बैठा था। श्रीनिवास ने पत्थर से बंदर को डराया तो वह भी उस पर झपटने को तैयार हो गया। हारकर श्रीनिवास वहीं पेड़ तले बैठ गया। बंदर महाराज ने थैली खोली। वह हर सिक्के को दाँत से चबाकर फेंकने लगा।

कुछ सिक्के पानी में गिरे तो कुछ जमीन पर, श्रीनिवास ने जमीन पर गिरे सिक्के बटोरे और वहाँ से भाग लिया। आगे चलकर सिक्के गिने तो वह कुल पूँजी का आधा भाग ही निकले। श्रीनिवास ने अपना माथा पीट लिया। पानी की कमाई पानी में ही चली गई थी। इसलिए कहते हैं, ईमानदारी की कमाई में ही बरकत होती है, चोरी का पैसा सदा मोरी में ही जाता है।
🚩 जय सियाराम 🌹
🌹 जय श्री महाकाल 🚩
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
*निरन्तर ज्ञान प्राप्ति हेतु पढ़ते रहिए

राहुल शिवहरे जिला छतरपुर भोपाल

📲📲📲93402 75910

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निराशा से आशा की और
एक कदम ग्रुप
🌟🌟🌟🌟🌟🌟🌟

हंस जैन रामनगर खंडवा
9827214427

अपने आप को पहचानो
👀👀👀👀👀👀👀

💥💥💥💥💥

*एक बार चार लड़के अपने प्रतिभा और ज्ञान को जानने के लिए एक संत के पास पहुंचे।

संत के वहाँ पहुँचने के बाद उन्होंने अपने दिल की बात संत को बताई। . तब संत ने कहा – इससे पहले की मै आपको ज्ञान और प्रतिभा के बारे में कुछ बताऊ आप मेरा एक छोटा सा काम करके लाओ। . उन्होंने चारो को एक-एक तोता दिया और उनसे कहा की इनकी गर्दन ऐसी जगह जाकर मरोड़ना जहा आपको कोई देख न सके।

बस फिर क्या था चारो चले गये गर्दन मरोड़ने के लिए। . पहला लड़का दोपहर में एक सुनसान रास्ते में गया उस समय लोग अपने घरो में सो रहे थे तो उसको मौका मिल गया और तोता की गर्दन मरोड़कर उसे लाकर संत के सामने रख दिया।

दूसरे लड़का चुपचाप एक गली में गया जहा से लोग कम गुजरते थे, तो उसने तोता की गर्दन पकड़ी और मरोड़ दी फिर उसे संत के पास ले आया।

तीसरे लड़के ने सोचा की मुझे अभी कोई भी देख सकता है क्योंकि मै अगर यहाँ आ सकता हूँ तो कोई और भी आ सकता है . तो उसने रात तक इंतजार करने की सोची फिर रात होते ही गर्दन मरोड़कर तोता को संत के सामने रख दिया।

परन्तु एक हफ्ता हो गया वह चौथा लड़का अभी तक नहीं आया था तो संत ने उन तीनो को उसे खोजने के लिए भेजा।

वे तीनो उसे ढूंढ के ले आये तो संत ने उससे एक हफ्ते तक गायब होने का कारण पूछा। . तब वह लड़का बोला – मैंने दिन के बजाय इसकी गर्दन रात को मरोड़ने की सोची पर रात को चाँद-तारे देख रहे थे।

फिर में अँधेरी कोठरी में गया और जैसे ही गर्दन पर हाथ रखा तो देखा की तोता देख रहा है। . उसकी आँखे चमक रही थी। फिर मैंने इसकी आँखे बांध दी। जब वह तोते की गर्दन मरोड़ने वाला था … . उसे संत का ख्याल आया कि संत ने कहा था , जहां कोई न देख रहा हो, पर यहाँ तो मैं खुद ये देख रहा हूँ।

वह मुश्किल में था इसलिए उसने बड़े विनम्रता से तोता संत को लौटा दिया और कहा की मैं ये नहीं कर सकता …. . क्योंकि मैं चाहे कितने ही अँधेरे में चला जाऊं की कोई मुझे न देखे पर मैं तो ये देख रहा होऊंगा और आपने कहा था की कोई न देख पाये।

यह सब देखने के बाद संत ने उन तीनो लड़को को वहां से विदा कर दिया और कहा , कि तुम तीनो अपनी प्रतिभा नही पहचान सकते।

संत ने उस चौथे लड़के को रोक लिया , क्योंकि वह एक बहुत ही गहरे अनुभव में पंहुचा था और खुद को जान पाया था। . मित्रों…. यही बात हमें खुद के लिए देखनी चाहिए, जैसे कस्तूरी मृग खुद के अंदर से निकलने वाली गंध को ढूंढने के लिये पूरे जंगल में घूमता रहता है, . ठीक उसी तरह हम अपनी प्रतिभा, अपने हुनर को ढूंढने के लिये इधर-उधर भटकते रहते है जबकि हमें क्या पसंद है, हमारा मजबूत पक्ष क्या है, इस चीज को हम खुद के अंदर नहीं तलाशते है. . अगर आप खुद के लिए समय निकालोगे तो आपको आपके हुनर, आपके दिल की ख्वाइश जो आपको सच में ख़ुशी देता है वो जरूर ढूंढने में कामयाब रहोगे. . आज कई लोग ऐसे है जिनको खुद की प्रतिभा का अंदाजा नहीं है। वो बिना अपनी ख़ुशी जाने ज़िंदगी को यूँ ही काट रहे है जैसे ज़िंदगी जीना कोई सजा हो. . मेरे कहने का तात्पर्य सिर्फ यह है की आप यूँ ही लाइफ को बर्बाद मत करो बल्कि जो आपका टेलेंट है उसको जानो और अगर एक बार जान गए तो फिर पूरे दिल से जुट जाओ उसे पाने के लिए.

बाकी आप समझदार हो। अपनी प्रतिभा को पहचानिए ।
बस कोयले पर जो राख लगी हैं, उसे हटा लीजिये, अंदर की आग आज भी बरकरार है।

हंस जैन रामनगर खण्डवा मध्यप्रदेश
9827214427

✨🌟✨👀✨😄👏🏻

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हंस जैन रामनगर खंडवा
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अपने आप को पहचानो
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*एक बार चार लड़के अपने प्रतिभा और ज्ञान को जानने के लिए एक संत के पास पहुंचे।

संत के वहाँ पहुँचने के बाद उन्होंने अपने दिल की बात संत को बताई। . तब संत ने कहा – इससे पहले की मै आपको ज्ञान और प्रतिभा के बारे में कुछ बताऊ आप मेरा एक छोटा सा काम करके लाओ। . उन्होंने चारो को एक-एक तोता दिया और उनसे कहा की इनकी गर्दन ऐसी जगह जाकर मरोड़ना जहा आपको कोई देख न सके।

बस फिर क्या था चारो चले गये गर्दन मरोड़ने के लिए। . पहला लड़का दोपहर में एक सुनसान रास्ते में गया उस समय लोग अपने घरो में सो रहे थे तो उसको मौका मिल गया और तोता की गर्दन मरोड़कर उसे लाकर संत के सामने रख दिया।

दूसरे लड़का चुपचाप एक गली में गया जहा से लोग कम गुजरते थे, तो उसने तोता की गर्दन पकड़ी और मरोड़ दी फिर उसे संत के पास ले आया।

तीसरे लड़के ने सोचा की मुझे अभी कोई भी देख सकता है क्योंकि मै अगर यहाँ आ सकता हूँ तो कोई और भी आ सकता है . तो उसने रात तक इंतजार करने की सोची फिर रात होते ही गर्दन मरोड़कर तोता को संत के सामने रख दिया।

परन्तु एक हफ्ता हो गया वह चौथा लड़का अभी तक नहीं आया था तो संत ने उन तीनो को उसे खोजने के लिए भेजा।

वे तीनो उसे ढूंढ के ले आये तो संत ने उससे एक हफ्ते तक गायब होने का कारण पूछा। . तब वह लड़का बोला – मैंने दिन के बजाय इसकी गर्दन रात को मरोड़ने की सोची पर रात को चाँद-तारे देख रहे थे।

फिर में अँधेरी कोठरी में गया और जैसे ही गर्दन पर हाथ रखा तो देखा की तोता देख रहा है। . उसकी आँखे चमक रही थी। फिर मैंने इसकी आँखे बांध दी। जब वह तोते की गर्दन मरोड़ने वाला था … . उसे संत का ख्याल आया कि संत ने कहा था , जहां कोई न देख रहा हो, पर यहाँ तो मैं खुद ये देख रहा हूँ।

वह मुश्किल में था इसलिए उसने बड़े विनम्रता से तोता संत को लौटा दिया और कहा की मैं ये नहीं कर सकता …. . क्योंकि मैं चाहे कितने ही अँधेरे में चला जाऊं की कोई मुझे न देखे पर मैं तो ये देख रहा होऊंगा और आपने कहा था की कोई न देख पाये।

यह सब देखने के बाद संत ने उन तीनो लड़को को वहां से विदा कर दिया और कहा , कि तुम तीनो अपनी प्रतिभा नही पहचान सकते।

संत ने उस चौथे लड़के को रोक लिया , क्योंकि वह एक बहुत ही गहरे अनुभव में पंहुचा था और खुद को जान पाया था। . मित्रों…. यही बात हमें खुद के लिए देखनी चाहिए, जैसे कस्तूरी मृग खुद के अंदर से निकलने वाली गंध को ढूंढने के लिये पूरे जंगल में घूमता रहता है, . ठीक उसी तरह हम अपनी प्रतिभा, अपने हुनर को ढूंढने के लिये इधर-उधर भटकते रहते है जबकि हमें क्या पसंद है, हमारा मजबूत पक्ष क्या है, इस चीज को हम खुद के अंदर नहीं तलाशते है. . अगर आप खुद के लिए समय निकालोगे तो आपको आपके हुनर, आपके दिल की ख्वाइश जो आपको सच में ख़ुशी देता है वो जरूर ढूंढने में कामयाब रहोगे. . आज कई लोग ऐसे है जिनको खुद की प्रतिभा का अंदाजा नहीं है। वो बिना अपनी ख़ुशी जाने ज़िंदगी को यूँ ही काट रहे है जैसे ज़िंदगी जीना कोई सजा हो. . मेरे कहने का तात्पर्य सिर्फ यह है की आप यूँ ही लाइफ को बर्बाद मत करो बल्कि जो आपका टेलेंट है उसको जानो और अगर एक बार जान गए तो फिर पूरे दिल से जुट जाओ उसे पाने के लिए.

बाकी आप समझदार हो। अपनी प्रतिभा को पहचानिए ।
बस कोयले पर जो राख लगी हैं, उसे हटा लीजिये, अंदर की आग आज भी बरकरार है।

हंस जैन रामनगर खण्डवा मध्यप्रदेश
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