Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

एक दिन एक बहुत बड़े कजूंस सेठ के घर में

कोई मेहमान आया!!

कजूंस ने अपने बेटे से कहा,

आधा किलो बेहतरीन मिठाई ले आओ।

बेटा बाहर गया और कई घंटों बाद वापस आया।

😊😊

कंजूस ने पूछा मिठाई कहाँ है।

बेटे ने कहना शुरू किया-” अरे पिताजी,

मैं मिठाई की दुकान पर गया और हलवाई से बोला कि

सबसे अच्छी मिठाई दे दो। हलवाई ने कहा कि

ऐसी मिठाई दूंगा बिल्कुल मक्खन जैसी।

फिर मैंने सोचा कि क्यों न मक्खन ही ले लूं।

मैं मक्खन लेने दुकान गया और बोला कि

सबसे बढ़िया मक्खन दो। दुकान वाला बोला कि

ऐसा मक्खन दूंगा बिल्कुल शहद जैसा।

मैने सोचा क्यों न शहद ही ले लूं।

मै फिर गया शहद वाले के पास और उससे कहा कि

सबसे मस्त वाला शहद चाहिए। वो बोला

ऐसा शहद दूंगा बिल्कुल पानी जैसा साफ।

तो पिताजी फिर मैंने सोचा कि पानी तो अपने घर पर ही है

और मैं चला आया खाली हाथ।

कंजूस बहुत खुश हुआ और अपने बेटे को शाबासी दी।

लेकिन तभी उसके मन में कुछ शंका उतपन्न हुई।

“लेकिन बेटे तू इतनी देर घूम कर आया।

चप्पल तो घिस गयी होंगी।”

“पिताजी ये तो उस मेहमान की चप्पल हैं जो घर पर आया है।”

बाप की आंखों मे खुशी के आंसू आ गए ।

🤣🤣🤣😝😝😝

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बॉलीवुड का इस्लामीकरण कैसे हुआ….? ध्यान से पढ़ें…

सभी जानते हैं कि संजय दत्त के पिता सुनील दत्त एक हिंदू थे और उनकी पत्नी फातिमा राशिद यानी नर्गिस एक मुस्लिम थीं।

लेकिन दुर्भाग्य देखिए कि संजय दत्त ने हिंदू धर्म को छोड़कर इस्लाम कबूल कर लिया लेकिन वह इतना चतुर भी है कि अपना फिल्मी नाम नहीं बदला।

जरा सोचिए कि हम सभी लोग इन कलाकारों पर हर साल कितना धन खर्च करते हैं। सिनेमा के मंहगा टिकटों से लेकर केबल टीवी के बिल तक।

हमारे नादान बच्चे भी अपने जेबखर्च में से पैसे बचाकर इनके पोस्टर खरीदते हैं और इनके प्रायोजित टीवी कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए हजारों रुपए के फोन करते हैं।

एक विचारणीय बिन्दू यह भी है कि बाॅलीवुड में शादियों का तरीका ऐसा क्यों है कि शाहरुख खान की पत्नी गौरी छिब्बर एक हिंदू है।

आमिर खान की पत्नियां रीमा दत्ता /किरण राव और सैफ अली खान की पत्नियाँ अमृता सिंह / करीना कपूर दोनों हिंदू हैं।

इसके पिता नवाब पटौदी ने भी हिंदू लड़की शर्मीला टैगोर से शादी की थी।

फरहान अख्तर की पत्नी अधुना भवानी और फरहान आजमी की पत्नी आयशा टाकिया भी हिंदू हैं।

अमृता अरोड़ा की शादी एक मुस्लिम से हुई है जिसका नाम शकील लदाक है।

सलमान खान के भाई अरबाज खान की पत्नी मलाइका अरोड़ा हिंदू हैं और उसके छोटे भाई सुहैल खान की पत्नी सीमा सचदेव भी हिंदू हैं।

अनेक उदाहरण ऐसे हैं कि हिंदू अभिनेत्रियों को अपनी शादी बचाने के लिए धर्म परिवर्तन भी करना पड़ा है।

आमिर खान के भतीजे इमरान की हिंदू पत्नी का नाम अवंतिका मलिक है। संजय खान के बेटे जायद खान की पत्नी मलिका पारेख है।

फिरोज खान के बेटे फरदीन की पत्नी नताशा है। इरफान खान की बीवी का नाम सुतपा सिकदर है। नसरुद्दीन शाह की हिंदू पत्नी रत्ना पाठक हैं।

एक समय था जब मुसलमान एक्टर हिंदू नाम रख लेते थे क्योंकि उन्हें डर था कि अगर दर्शकों को उनके मुसलमान होने का पता लग गया तो उनकी फिल्म देखने कोई नहीं आएगा।

ऐसे लोगों में सबसे मशहूर नाम युसूफ खान का है जिन्हें दशकों तक हम दिलीप कुमार समझते रहे।

महजबीन अलीबख्श मीना कुमारी बन गई और मुमताज बेगम जहाँ देहलवी मधुबाला बनकर हिंदू ह्रदयों पर राज करतीं रहीं।

बदरुद्दीन जमालुद्दीन काजी को हम जॉनी वाकर समझते रहे और हामिद अली खान विलेन अजित बनकर काम करते रहे।

हममें से कितने लोग जान पाए कि अपने समय की मशहूर अभिनेत्री रीना राय का असली नाम सायरा खान था।

आज के समय का एक सफल कलाकार जॉन अब्राहम भी दरअसल एक मुस्लिम है जिसका असली नाम फरहान इब्राहिम है।

जरा सोचिए कि पिछले 50 साल में ऐसा क्या हुआ है कि अब ये मुस्लिम कलाकार हिंदू नाम रखने की जरूरत नहीं समझते बल्कि उनका मुस्लिम नाम उनका ब्रांड बन गया है।

यह उनकी मेहनत का परिणाम है या हम लोगों के अंदर से कुछ खत्म हो गया है?

जरा सोचिए कि हम कौनसी फिल्मों को बढ़ावा दे रहे हैं?
क्या वजह है कि बहुसंख्यक बॉलीवुड फिल्मों में हीरो मुस्लिम लड़का और हीरोइन हिन्दू लड़की होती है?

क्योंकि ऐसा फिल्म उद्योग का सबसे बड़ा फाइनेंसर दाऊद इब्राहिम चाहता है। टी-सीरीज का मालिक गुलशन कुमार ने उसकी बात नहीं मानी और नतीजा सबने देखा।

आज भी एक फिल्मकार को मुस्लिम हीरो साइन करते ही दुबई से आसान शर्तों पर कर्ज मिल जाता है। इकबाल मिर्ची और अनीस इब्राहिम जैसे आतंकी एजेंट सात सितारा होटलों में खुलेआम मीटिंग करते देखे जा सकते हैं।

सलमान खान, शाहरुख खान, आमिर खान, सैफ अली खान, नसीरुद्दीन शाह, फरहान अख्तर, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, फवाद खान जैसे अनेक नाम हिंदी फिल्मों की सफलता की गारंटी बना दिए गए हैं।

अक्षय कुमार, मनोज कुमार और राकेश रोशन जैसे फिल्मकार इन दरिंदों की आंख के कांटे हैं।

तब्बू, हुमा कुरैशी, सोहा अली खान और जरीन खान जैसी प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों का कैरियर जबरन खत्म कर दिया गया क्योंकि वे मुस्लिम हैं और इस्लामी कठमुल्लाओं को उनका काम गैरमजहबी लगता है।

फिल्मों की कहानियां लिखने का काम भी सलीम खान और जावेद अख्तर जैसे मुस्लिम लेखकों के इर्द-गिर्द ही रहा जिनकी कहानियों में एक भला-ईमानदार मुसलमान, एक पाखंडी ब्राह्मण, एक अत्याचारी – बलात्कारी क्षत्रिय, एक कालाबाजारी वैश्य, एक राष्ट्रद्रोही नेता, एक भ्रष्ट पुलिस अफसर और एक गरीब दलित महिला होना अनिवार्य शर्त है।

इन फिल्मों के गीतकार और संगीतकार भी मुस्लिम हों तभी तो एक गाना मौला के नाम का बनेगा और जिसे गाने वाला पाकिस्तान से आना जरूरी है।

इन अंडरवर्ड के हरामखोरों की असिलियत को पहचानिये और हिन्दू समाज को संगठित करिये तब ही हम अपने धर्म की रक्षा कर पाएंगे ।

इस पोस्ट को हर हिन्दू तक पहुँचाना हम सब हिन्दुओं की प्राथमिकता है।
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Posted in भारत के भव्य नगर - Bharat ke Nagar

बनारसी पान… बनारसी साड़ी.. बनारस के घाट … बनारस के मंदिर… बनारस की गलियाँ… बनारस के साधु … बनारस के साँड़ .. बनारस की मीठी बोली …

क्या- क्या प्रसिद्ध नहीं है बनारस का !!!!
पर क्या कोई जानता भी है बनारस को ???

गंगा किनारे बसी भगवान शंकर की प्रिय नगरी… पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस काशी नगर की स्थापना स्वयं भगवान शंकर ने 5000 साल पहले की थी। यह संसार के प्राचीनतम बसे शहरों में से एक है। ऋग्वेद, अथर्ववेद, शतपथ, रामायण, महाभारत आदि हिंदू ग्रंथो में भी इस नगर का उल्लेख है। स्कन्द पुराण के काशी खंड में इस नगर की महिमा 15,000 श्लोकों में कही गयी है। भगवान शिव के त्रिशूल पर बसी इस काशी नगरी को अविमुक्त क्षेत्र भी कहा जाता है।

यहाँ मृत्यु सौभाग्य से ही प्राप्त होती है। हिंदू तथा जैन धर्म में इसे सात पवित्र नगरों (सप्तपुरी) में से सबसे पवित्रतम नगरी कहा गया है। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से प्रमुख यहाँ वाराणसी में स्थापित है। प्रजापति दक्ष के द्वारा शिव की उपेक्षा किए जाने पर बनारस के

मणिकर्णिका घाट पर ही माता सती ने अपने शरीर को अग्नि को अर्पित कर दिया था और यहीं उनके कान का गहना भी गिरा था। इस घाट पर अग्नि कभी नहीं बुझती …

दिन रात बिना रुके यहाँ दाह-संस्कार होता रहता है। यहाँ के हरीशचंद्र घाट पर ही राजा हरीशचंद्र ने डोम का काम करते हुए अपनी पत्नी से पुत्र के अंतिम-संस्कार के लिए कर लिया था।

यहाँ जीवन और मृत्यु का अजीब मेल देखा जा सकता है…. जहाँ एक तरफ़ दशाश्वमेध घाट पर मंत्रोच्चारण और आरती के साथ जीवन का उत्सव मनाया जा रहा होता है वही साथ में दूसरे घाट पर जीवन को अंत होते हुए भी देखा जा सकता है।

भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश यहाँ सारनाथ में ही दिया था। 1507 में गुरु नानक देव शिव रात्रि के अवसर पर बनारस आए और उनकी इस यात्रा का सिख धर्म की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान था।
यहाँ बनारस में गुरु नानक जी ने पंडित चतुरदास को रामकली मोहल्ला १ दक्ख़िनि ओंकार पहली बार सुनाई थी। गोस्वामी तुलसीदास जी ने बनारस के तुलसी घाट पर ही बैठ कर रामचरितमानस की रचना की थी। आज भी उनकी खड़ाऊँ वहाँ रखी है ।

महारानी लक्ष्मीबाई, जो झाँसी की रानी के रूप में जानी जाती हैं, वो बनारस की ही बेटी हैं… उनकी रगों में बहने वाला वीर रक्त बनारस का ही है।

संत कबीर, संत रविदास, वल्लभाचार्य, स्वामी रामानन्द,धर्मसम्राट स्वामी श्री करपात्री महराज , त्रैलँग स्वामी, मुंशी प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, भारत रत्न पंडित रविशंकर, पंडित हरी प्रसाद चौरसिया, भारत रत्न + पद्मविभूषण उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ान, पंडित मदन मोहन मालवीय (BHU के संस्थापक), लाल बहादुर शास्त्री, भारतेंदु हरीशचंद्र, देवकी नंदन खत्री, पद्मश्री सितारा देवी, पद्मविभूशन बिरजु महाराज, पद्मविभूषण किशन महाराज, पद्मभूषण चुन्नुलाल मिश्रा, पद्मभूषण गिरिजा देवी, पद्मश्री सिद्धेश्वरी देवी, पद्मविभूषण उदय शंकर, भारत रत्न भगवान दास एवं लहरी महासया बनारस के अमूल्य रत्नों में से कुछ हैं।

बनारस के राजा- काशी नरेश … इन्हें भगवान शिव का अवतार माना जाता है।
ज्ञान नगरी, मंदिरो की नगरी, दीपों का शहर, घाटों का शहर…. चाहे किसी भी नाम से इस शहर को बुलाओ …

इसकी हर बात अनोखी है… इसकी हर गली में एक कहानी है … इसकी हवा में एक कहानी है …. गंगा के बहते पानी में भी कहानी है …

जो बनारस की गलियों में एक बार आ जाता है , बनारस उस के अंदर बस जाता है… इसे ख़ुद से अलग करना मुश्किल ही नहीं… नामुमकिन है …!!!

हर हर महादेव 🚩

Posted in सुभाषित - Subhasit

हिंदी का थोडा़ आनंद लीजिये ….मुस्कुरायें …

हिंदी के मुहावरे, बड़े ही बावरे है,
खाने पीने की चीजों से भरे है…
कहीं पर फल है तो कहीं आटा-दालें है,
कहीं पर मिठाई है, कहीं पर मसाले है ,
चलो, फलों से ही शुरू कर लेते है,
एक एक कर सबके मजे लेते है…

आम के आम और गुठलियों के भी दाम मिलते हैं,
कभी अंगूर खट्टे हैं,
कभी खरबूजे, खरबूजे को देख कर रंग बदलते हैं,
कहीं दाल में काला है,
तो कहीं किसी की दाल ही नहीं गलती है,

कोई डेड़ चावल की खिचड़ी पकाता है,
तो कोई लोहे के चने चबाता है,
कोई घर बैठा रोटियां तोड़ता है,
कोई दाल भात में मूसरचंद बन जाता है,
मुफलिसी में जब आटा गीला होता है,
तो आटे दाल का भाव मालूम पड़ जाता है,

सफलता के लिए कई पापड़ बेलने पड़ते है,
आटे में नमक तो चल जाता है,
पर गेंहू के साथ, घुन भी पिस जाता है,
अपना हाल तो बेहाल है, ये मुंह और मसूर की दाल है,

गुड़ खाते हैं और गुलगुले से परहेज करते हैं,
और कभी गुड़ का गोबर कर बैठते हैं,
कभी तिल का ताड़, कभी राई का पहाड़ बनता है,
कभी ऊँट के मुंह में जीरा है,
कभी कोई जले पर नमक छिड़कता है,
किसी के दांत दूध के हैं,
तो कई दूध के धुले हैं,

कोई जामुन के रंग सी चमड़ी पा के रोई है,
तो किसी की चमड़ी जैसे मैदे की लोई है,
किसी को छटी का दूध याद आ जाता है,
दूध का जला छाछ को भी फूंक फूंक पीता है,
और दूध का दूध और पानी का पानी हो जाता है,

शादी बूरे के लड्डू हैं, जिसने खाए वो भी पछताए,
और जिसने नहीं खाए, वो भी पछताते हैं,
पर शादी की बात सुन, मन में लड्डू फूटते है,
और शादी के बाद, दोनों हाथों में लड्डू आते हैं,

कोई जलेबी की तरह सीधा है, कोई टेढ़ी खीर है,
किसी के मुंह में घी शक्कर है, सबकी अपनी अपनी तकदीर है…
कभी कोई चाय-पानी करवाता है,
कोई मख्खन लगाता है
और जब छप्पर फाड़ कर कुछ मिलता है,
तो सभी के मुंह में पानी आ जाता है,

भाई साहब अब कुछ भी हो,
घी तो खिचड़ी में ही जाता है, जितने मुंह है, उतनी बातें हैं,
सब अपनी-अपनी बीन बजाते है, पर नक्कारखाने में तूती की आवाज कौन सुनता है, सभी बहरे है, बावरें है ये सब हिंदी के मुहावरें हैं…

ये गज़ब मुहावरे नहीं बुजुर्गों के अनुभवों की खान हैं…
सच पूछो तो हिन्दी भाषा की जान हैं..!
“जयश्री राधेकृष्णा”

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

बोध कथा

एक बार होस्टल कैंटीन वाले के रोज़ रोज़ नाश्ते में उपमा दे देने से परेशांन 80 लोगो ने होस्टल वार्डन से शिकायत की और बदल बदल के नाश्ता देने को कहा ……
100 में से सिर्फ 20 लोग ऐसे थे जिनको उपमा बहुत पसंद था और वो लोग चाहते थे कि उपमा तो रोज़ ही बने……बाकी के 80 लोग परिवर्तन चाहते थे……….

वार्डन ने वोट करके दिनवार नाश्ता तय करने को कहा….

उन 20 लोगो ने …..जिनको उपमा बहुत पसंद था उपमा के लिए वोट किया बाकी बचे 80 लोगो ने आपस में कोई सामंजस्य नहीं रखा और कोई वार्तालाप भी नहीं किया और अपनी बुद्धि एवम् विवेक से अपनी रूचि अनुसार वोट दिया ।

18 ने डोसा चुना , 16 ने परांठा , 14 ने रोटी , 12 ने ब्रेड बटर , 10 ने नूडल्स और 10 ने पूरी सब्जी को वोट दिया……………

अब सोचो
क्या हुआ होगा

उस कैंटीन में आज भी वो 80 लोग रोज़ उपमा खाते है

जब तक 6 हिस्सों में वे 80 बंटे रहेंगे तक 20% वालों का वर्चस्व रहेगा. इसलिए 🙏🌿🙏

Posted in Laxmi prapti

आदि लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु परब्रह्म स्वरूपिणि।
यशो देहि धनं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
सन्तान लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु पुत्र-पौत्र प्रदायिनि।
पुत्रां देहि धनं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
विद्या लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु ब्रह्म विद्या स्वरूपिणि।
विद्यां देहि कलां देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
धन लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्व दारिद्र्य नाशिनि।
धनं देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
धान्य लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वाभरण भूषिते।
धान्यं देहि धनं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
मेधा लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु कलि कल्मष नाशिनि।
प्रज्ञां देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।

गज लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वदेव स्वरूपिणि।
अश्वांश गोकुलं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
शुभ प्रभात दोस्तों 🙏