Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

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💎 एक बार किसी देश का राजा अपनी प्रजा का हाल-चाल पूछने के लिए गाँवों में घूम रहा था। घूमते-घूमते उसके कुर्ते का बटन टूट गया, उसने अपने मंत्री को कहा कि इस गांव में कौन सा दर्जी है, जो मेरे बटन को सिल सके।

🍥 उस गांव में सिर्फ एक ही दर्जी था, जो कपडे सिलने का काम करता था। उसको राजा के सामने ले जाया गया । राजा ने कहा कि तुम मेरे कुर्ते का बटन सी सकते हो ?

🍥 दर्जी ने कहा यह कोई मुश्किल काम थोड़े ही है ! उसने मन्त्री से बटन ले लिया, धागे से उसने राजा के कुर्ते का बटन फौरन टांक दिया। क्योंकि बटन भी राजा का था, सिर्फ उसने अपना धागा प्रयोग किया था, राजा ने दर्जी से पूछा कि कितने पैसे दूं ?

🍥 उसने कहा :- “महाराज रहने दो, छोटा सा काम था।” उसने मन में सोचा कि बटन राजा के पास था, उसने तो सिर्फ धागा ही लगाया है।

🍥 राजा ने फिर से दर्जी को कहा कि नहीं-नहीं,
बोलो कितने दूं ?

🍥 दर्जी ने सोचा की दो रूपये मांग लेता हूँ। फिर मन में यही सोच आ गयी कि कहीं राजा यह न सोचे की बटन टांकने के मेरे से दो रुपये ले रहा है, तो गाँव बालों से कितना लेता होगा, क्योंकि उस जमाने में दो रुपये की कीमत बहुत होती थी।

🍥 दर्जी ने राजा से कहा कि :- “महाराज जो भी आपकी इच्छा हो, दे दो।”

🍥 अब राजा तो राजा था। उसको अपने हिसाब से देना था। कहीं देने में उसकी इज्जत ख़राब न हो जाये। उसने अपने मंत्री को कहा कि इस दर्जी को दो गांव दे दो, यह हमारा हुक्म है।

🍥 यहाँ दर्जी सिर्फ दो रुपये की मांग कर रहा था पर राजा ने उसको दो गांव दे दिए ।

🍥 इसी तरह जब हम प्रभु पर सब कुछ छोड़ते हैं, तो वह अपने हिसाब से देता है और मांगते हैं, तो सिर्फ हम मांगने में कमी कर जाते हैं । देने वाला तो पता नहीं क्या देना चाहता है, अपनी हैसियत से और हम बड़ी तुच्छ वस्तु मांग लेते हैं ।

🔮 इसलिए संत-महात्मा कहते है, ईश्वर को सब अपना सर्मपण कर दो, उनसे कभी कुछ न मांगों, जो वो अपने आप दें, बस उसी से संतुष्ट रहो। फिर देखो इसकी लीला। वारे के न्यारे हो जाएंगे। जीवन मे धन के साथ सन्तुष्टि का होना जरूरी है।
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सच्ची_घटना
गद्दारकांग्रेसकीकङवीसच्चाई
“अरे बुढिया तू यहाँ न आया कर , तेरा बेटा तो चोर-डाकू था, इसलिए #गोरों ने उसे मार दिया“
जंगल में लकड़ी बिन रही एक मैली सी धोती में लिपटी बुजुर्ग महिला से वहां खड़ें भीर ने हंसते हुए कहा .
“ नही #चंदू ने आजादी के लिए कुर्बानी दी हैं “ बुजुर्ग औरत ने गर्व से कहा।
उस बुजुर्ग औरत का नाम #जगरानीदेवी था और इन्होने पांच बेटों को जन्म दिया था, जिसमे आखरी बेटा कुछ दिन पहले ही शहीद हुआ था। उस बेटे को ये माँ प्यार से चंदू कहती थी और दुनियां उसे “ #आजाद “ जी हाँ ! #चंद्रशेखरआजाद के नाम से जानती हैं।
हिंदुस्तान आजाद हो चुका था , आजाद के मित्र #सदाशिव_राव एक दिन आजाद के माँ-पिता जी की खोज करतें हुए उनके गाँव पहुंचे।
आजादी तो मिल गयी थी लेकिन बहुत कुछ खत्म हो चुका था।
चंद्रशेखर आज़ाद की शहादत के कुछ वर्षों बाद उनके पिता जी की भी मृत्यु हो गयी थी।
आज़ाद के भाई की मृत्यु भी इससे पहले ही हो चुकी थी।
अत्यंत निर्धनावस्था में हुई उनके पिता की मृत्यु के पश्चात आज़ाद की निर्धन निराश्रित वृद्ध माताश्री उस वृद्धावस्था में भी किसी के आगे हाथ फ़ैलाने के बजाय जंगलों में जाकर लकड़ी और गोबर बीनकर लाती थी तथा कंडे और लकड़ी बेचकर अपना पेट पालती रहीं।
लेकिन वृद्ध होने के कारण इतना काम नहीं कर पाती थीं कि भरपेट भोजन का प्रबंध कर सकें।
कभी ज्वार कभी बाज़रा खरीद कर उसका घोल बनाकर पीती थीं क्योंकि दाल चावल गेंहू और उसे पकाने का ईंधन खरीदने लायक धन कमाने की शारीरिक सामर्थ्य उनमे शेष ही नहीं थी।
शर्मनाक बात तो यह कि उनकी यह स्थिति देश को आज़ादी मिलने के 2 वर्ष बाद (1949 ) तक जारी रही।
चंद्रशेखरआज़ाद जी को दिए गए अपने एक वचन का वास्ता देकर #सदाशिव जी उन्हें अपने साथ अपने घर झाँसी लेकर आये थे, क्योंकि उनकी स्वयं की स्थिति अत्यंत जर्जर होने के कारण उनका घर बहुत छोटा था अतः उन्होंने आज़ाद के ही एक अन्य मित्र #भगवानदास_माहौर के घर पर आज़ाद की माताश्री के रहने का प्रबंध किया था और उनके अंतिम क्षणों तक उनकी सेवा की।
मार्च 1951 में जब आजाद की माँ जगरानी देवी का #झांसी में निधन हुआ तब सदाशिव जी ने उनका सम्मान अपनी माँ के समान करते हुए उनका अंतिम संस्कार स्वयं अपने हाथों से ही किया था।
आज़ाद की माताश्री के देहांत के पश्चात झाँसी की जनता ने उनकी स्मृति में उनके नाम से एक सार्वजनिक स्थान पर पीठ का निर्माण किया।
प्रदेश की तत्कालीन सरकार (प्रदेश में #कांग्रेस की सरकार थी और मुख्यमंत्री थे #गोविन्दबल्लभपन्त) ने इस निर्माण को गयासुदीन गाजी खान उर्फ नेहरू के कहने पर झाँसी की जनता द्वारा किया हुआ अवैध और गैरकानूनी कार्य घोषित कर दिया।
किन्तु झाँसी के नागरिकों ने तत्कालीन सरकार के उस शासनादेश को महत्व न देते हुए चंद्रशेखर आज़ाद की माताश्री की मूर्ति स्थापित करने का फैसला कर लिया।
मूर्ति बनाने का कार्य चंद्रशेखर आजाद के ख़ास सहयोगी कुशल शिल्पकार #रूद्रनारायणसिंह जी को सौपा गया। उन्होंने फोटो को देखकर आज़ाद की माताश्री के चेहरे की प्रतिमा तैयार कर दी।
जब सरकार को यह पता चला कि आजाद की माँ की मूर्ती तैयार की जा चुकी है और सदाशिव राव, रूपनारायण, भगवान् दास माहौर समेत कई क्रांतिकारी झांसी की जनता के सहयोग से मूर्ती को स्थापित करने जा रहे है तो उसने अमर बलिदानी चंद्रशेखर आज़ाद की माताश्री की मूर्ति स्थापना को देश, समाज और झाँसी की कानून व्यवस्था के लिए खतरा घोषित कर उनकी मूर्ति स्थापना के कार्यक्रम को प्रतिबंधित कर पूरे झाँसी शहर में कर्फ्यू लगा दिया।
चप्पे चप्पे पर पुलिस तैनात कर दी गई ताकि अमर बलिदानी चंद्रशेखर आज़ाद की माताश्री की मूर्ति की स्थापना ना की जा सके।
जनता और क्रन्तिकारी आजाद की माता की प्रतिमा लगाने के लिए निकल पड़ें।
अपने आदेश की झाँसी की सडकों पर बुरी तरह उड़ती धज्जियों से तिलमिलाई तत्कालीन सरकार ने अपनी #पुलिस को सदाशिव को #गोली मार देने का आदेश दे डाला
किन्तु आज़ाद की माताश्री की #प्रतिमा को अपने सिर पर रखकर पीठ की तरफ बढ़ रहे सदाशिव को जनता ने चारों तरफ से अपने घेरे में ले लिया।
जुलूस पर पुलिस ने #लाठी_चार्ज कर दिया।
सैकड़ों लोग घायल हुए, दर्जनों लोग जीवन भर के लिए अपंग हुए और कुछ लोग की मौत भी हुईं।
(हालांकि मौत की पुष्टि नही हुईं )
चंद्रशेखर आज़ाद की माताश्री की मूर्ति स्थापित नहीं हो सकी।
आजाद हम आपको कौन से मुंह से आपको श्रद्धांजलि दें ?
जब हम आपकी माताश्री की 2-3 फुट की मूर्ति के लिए उस देश में 5 फुट जमीन भी हम न दे सकें।
जिस देश के लिए आप ने अपने प्राणों का बलिदान दे दिया उसी देश की #कांग्रेसी सरकार ने आप सभी क्रांतिकारियों का अपमान किया ।
🙏🙇सभार 🙏🙇
द्वारा 👉भूतपूर्व आर्मी कमांडो श्री लिलाधर लमोरिया जब तक यह गद्दार कांग्रेस मिट नही जायेगी तब तक देश को इसकी कङवी सच्चाई बताता रहुगा 👈
जय हिंद वंदेमातरम्
जय श्री राम
देशभक्त पोस्ट को शेयर जरूर करेंगे
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—– टूटी चप्पल —–

“पता नहीं ये सामने वाला सेठ हफ्ते में 3-4 बार अपनी चप्पल कैसे तोड़ आता है?” मोची बुदबुदाया, नजर सामने की बड़ी किराना दूकान पर बैठे मोटे सेठ पर थी।
हर बार जब उस मोची के पास कोई काम ना होता तो उस सेठ का नौकर सेठ की टूटी चप्पल बनाने को दे जाता। मोची अपनी पूरी लगन से वो चप्पल सी देता की अब तो 2-3 महीने नहीं टूटने वाली। सेठ का नौकर आता और बिना मोलभाव किये पैसे देकर उस मोची से चप्पल ले जाता। पर 2-3 दिन बाद फिर वही चप्पल टूटी हुई उस मोची के पास पहुंच जाती।
आज फिर सुबह हुई, फिर सूरज निकला। सेठ का नौकर दूकान की झाड़ू लगा रहा था।
और सेठ……..
अपनी चप्पल तोड़ने में लगा था ,पूरी मश्शकत के बाद जब चप्पल न टूटी तो उसने नौकर को आवाज लगाई।
“अरे रामधन इसका कुछ कर, ये मंगू भी पता नहीं कौनसे धागे से चप्पल सिता है, टूटती ही नहीं।”
रामधन आज सारी गांठे खोल लेना चाहता था “सेठ जी मुझे तो आपका ये हर बार का नाटक समझ में नहीं आता। खुद ही चप्पल तोड़ते हो फिर खुद ही जुडवाने के लिए उस मंगू के पास भेज देते हो।”
सेठ को चप्पल तोड़ने में सफलता मिल चुकी थी। उसने टूटी चप्पल रामधन को थमाई और रहस्य की परते खोली… “देख रामधन जिस दिन मंगू के पास कोई ग्राहक नहीं आता उसदिन ही मैं अपनी चप्पल तोड़ता हूं… क्यों की मुझे पता है… मंगू गरीब है… पर स्वाभिमानी है, मेरे इस नाटक से अगर उसका स्वाभिमान और मेरी मदद दोनों शर्मिंदा होने से बच जाते है तो क्या बुरा है।”
आसमान साफ था पर रामधन की आँखों के बादल बरसने को बेक़रार थे।

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મધ્યમ વર્ગનું બજેટ

ડાયરી માં બે કલાક થી આવક જાવક ને મેળવવા હું નિર્થક પ્રયત્ન કરતો હતો…

અગરબત્તી.અને શ્રીફળ ના Rs.150
દૂધ. દર મહિને Rs.3000
ઘર નો હપ્તો. Rs.7000
વીજળી બિલ Rs.1500
LPG ગેસ. Rs 700
ઘર ચલાવવા મહિને કરિયાણું Rs5000
(તેલ,ઘઉં,ચોખા,દાળ સાબુ, કઠોળ ઘી ગોળ વગેરે)
બે બાળકો ની ફી અને સ્કૂલ રીક્ષા મહિને. Rs 3000
તેનો ભણતર ખર્ચ મહિને Rs.1000
( ટ્યૂશન..ચોપડી પેન્સીન વગેરે)
ફ્લેટ નું મેન્ટનેશન. મહિને Rs.700
TV કેબલ કનેક્શન. ..Rs400
વેજીટેબલ….Rs 1200
છાપું…..Rs.150
ઘર કામ. (ફક્ત વાસણ)Rs 700
પેટ્રોલ ઘરે થો.ઓફીસે
ઑફિસે થી ઘરે મહિને Rs.3000

ટોટલ Rs.27500
પગાર Rs.30000
Balance 2500

ક્યાર ના શુ લખો છો…ડાયરી ની અંદર…?
અચાનક મારી પત્ની બાજુ માં આવી બેસી ગઈ….

મેં ડાયરી ઊંઘી કરી ચશ્મા અને કેલ્ક્યુલેટર બાજુ ઉપર મુક્યા…

અરે ગાંડી..કહી નહીં….મેં વાત બદલવા પ્રયત્ન કર્યો

તમે ખોટું બોલો છો….લાવો ડાયરી…કહી પત્ની એ..
મારી ડાયરી ઉઠાવી લીધી….અમારા બન્ને ના ચશ્મા નંબર સરખા હોવાથી…તેને મારા ચશ્મા પહેરી…લીધા..
જાણે દેશ ના નાણા. …મંત્રી નિરીક્ષણ કરતા હોય તેમ..એ મારી ડાયરી નું નિરીક્ષણ કરવા લાગી….
જેમ..જેમ ડાયરી માં લખેલ હિસાબ તે વાંચતી તી હતી તેમ પત્ની ના ચેહરા ઉપર ધીરે ધીરે ગંભીરતા અને ચિતા આવતી જતી હતી….એ ધીરે થી બોલી… આમા હજુ….મેડિકલેમ નો હપ્તો ???

વાર્ષિક 15000
કોર્પોરેશન નું વાર્ષિક ટેક્ષ બિલ 3000
આકસ્મિક નાની મોટી બીમારી કે વ્યવહાર તો દેખતા નથી…

પત્ની ને ખબર હતી….. હું ચિંતા માં હતો.. તેને વાત ને હળવી બનાવવા માટે કીધુ…..

તમારા મસાલા નો.ખર્ચ તો લખવા નો રહી ગયો ?

મેં કીધું.. ડાર્લીંગ મસાલા છોડે એક મહિનો થઈ ગયો

મતલબ તમારૂ બજેટ ખાધ વાળું છે..આવક કરતા જાવક વધી રહી છે….પત્ની બોલી

ડાર્લીંગ એજ ચિંતા માં હું છું….

નથી આપણે ગરીબ કે નથી આપણે મધ્યમ વર્ગ
આપણે બોટોમ મિડલકલાસ છીયે….

હું…તને બચત કરવાનું પણ શું કહું..બધી જીવન માટે જરૂરી વસ્તુ અને સર્વિસ છે..ક્યાં કાપ મુકવો…તું જ બતાવ .?

પત્ની બોલી.. ચિંતા ન કરો…

વાસણ હું જાતે સાફ કરીશ. .Rs700x12 Rs8400
TV ચેનલ કઢાવી નાખો આમે છોકરા ભણતા નથી 400 x 12 Rs4800 ટોટલ Rs13200 બચી જશે …
તે આપણા મેડિકલેમ માટે કામ આવશે

મેં પત્ની ના માથે હાથ ફેરવી કીધુ..ડાર્લીંગ..જેની પત્ની સમજદાર…અને પ્રેમાળ હોય તે જીંદગી ની અડધી લડાઈ તો હસ્તા હસ્તા જીતી લે…છે….I love you

ફકત ફેસબુક કે વોટ્સ એપ ઉપર વાણીવિલાસ થી જીંદગી ની સફર ચાલતી નથી….લગ્ન ના ચારફેરા વખતે એકબીજા નો પકડેલ મજબૂત હાથ કોઈ પણ વિકટ પરિસ્થતિ માં ન છૂટે… તેને તો સફળ દામ્પત્ય જીવન કહેવાય..

ડાર્લીંગ આપણે.. વર્ષ માં એક વખત તારા જન્મ દિવસે ફક્ત પિક્ચર જોવા જઈએ છીયે…એ પણ બે વર્ષ થી ગયા..નથી છતાં પણ તે કદી મને ફરિયાદ કે અસંતોષ જાહેર નથી કર્યો….ડાર્લીંગ…..આવી સ્થતિ.માં ઘરમા TV એક તો સસ્તું મનોરંજન નું સાધન છે..તે તું બંધ કરવાની વાત કરે છે…..સમય તારો કેમ જાય…

TV જોવા પાછળ સમય બગડવા કરતા…હું પણ બે ત્રણ આર્થિક પ્રવૃત્તિ..જેવી કે સીવણ કામ અને ટ્યૂશન કરી તમને મદદ રૂપ.કેમ.ન થાવ… પત્ની…..ઢીલી હતી પણ પરિસ્થિતિ સામે લડવા તે મક્કમ હતી….

મેં કીધું..ડાર્લીંગ… ચિંતા ન કર….હજુ તકલીફ ગળા સુધી આવી નથી .. એ .નાક સુધી આવે તે પેહલા હું..એક.મોટો નિર્ણય લઈશ..

કયો….પત્ની એ ડાયરી બાજુ ઉપર મૂકી ચશ્મા કાઢ્યા…

મેં કીધું.. આપણા લગ્ન વખતે..મારી ઈચ્છા ધામધૂમ થી લગ્ન કરવા ની હતી..દુનિયા ને બતાવી દઈએ કે
“હમ કિસીસે કમ નહીં” એવી મારી વાતો અને વહેમ હતો
પપ્પા એ મને વાસ્તવિકતા સમજાવી રૂપિયા નું મહત્વ સમજાવ્યું….અને એ વખતે પપ્પા એ મારી બચત અને તેમની બચત ભેગી કરી…એક મોટો પ્લોટ ખરીદી લીધો હતો…અને કીધુ હતું..જયારે જીંદગી માં તકલીફ આવે ત્યારે આ પ્લોટ વેચી નાખજે…12 વર્ષ માં આ.પ્લોટ શહેર ની મધ્ય માં આવી ગયો છે…લગભગ આ પ્લોટ ના 75 લાખ રૂપિયા આવે તેમ છે….

પત્ની એ મારા પપ્પા ના દીવાલ ઉપર લટકતા ફોટા સામે જોઈ….
બોલી..વાહ….પપ્પા…વડીલો ની સલાહ જો યોગ્ય સમયે માનીએ તો… આપણે કોઈ પાસે હાથ લાંબા કરવા નો વખત ન આવે
સ્વમાન ની જીંદગી જીવવા…માટે સંતોષ ,ધૈર્ય જરૂરી છે..
ઘણી વખત તકલીફ આવતી નથી..આપણે તેને આમંત્રિત કરતા હોય છે….અને એ માટે ફક્ત આપણે જ જવાબદાર હોઈએ છીયે…

મિત્રો..
આજે દેખાદેખી મા…. આપણે આપણી જીવનશૈલી બદલી નાખી .. આનંદ તો બેન્ક ના હપ્તા ભરવા મા ખોવાઈ ગયો…બિનજરૂરી લોન લીધા પછી….તેના હપ્તા..કાંટા ની જેમ.ખૂંચવા લાગ્યા…એક વખત ખોટી લાઈફ સ્ટાઇલ સ્વીકર્યા પછી વાસ્તવિકતા આપણે સ્વીકારી શકતા નથી….પરિણામ સ્વરૂપ… અસંતોષ… અપેક્ષા અને અશાંતિ ને આપણે આમંત્રિત કરીયે છીયે

માટે આજે જ નિર્ણય લ્યો….
જેવો છું..તેવો તમારી સામે હું ઉભો છું ….. મને સ્વીકરવો કે ન સ્વીકરવો એ તમારી.માનશીકતા ઉપર આધાર છે. મારો.કોઈ આગ્રહ નથી
હું મારી વ્યક્તિગત જીંદગી. માં ખુશ છું…તમારે ખુશ રેહવું હોય તો મારા દિલ અને ઘર ના દરવાજા 24 કલાક ખુલ્લા છે…..તમને મારી સાથે સબંધ રાખવા માં શરમ સંકોચ નો અનુભવ થતો હોય… તો…. જય શ્રી કૃષ્ણ કહી સબંધ તોડતા વાર ન લગાડો.. આવી વ્યક્તિઓ ને કારણે ઘણી વખત આપણી વ્યક્તિગત જીંદગી માં તોફાન આવી જાય છે

– પ્રેમાળ પતિ

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क्या आप जानते हैं:

लातिनी अमेरिकी देश वेनेजुएला में भी एक केजरीवाल था। जिसने वेनेजुएला की जनता को मुफ्तखोर बनाकर वेनेजुएला को बर्बाद और दिवालिया कर दिया। फा

अभी 5-6 वर्ष पहले तक दुनिया में सबसे सस्ता पैट्रोल वेनेज़ुएला में मिलता था। 64 पैसे प्रति लीटर (2014)

वेनेज़ुएला में 5-6 वर्ष पहले तक किसी तरह का कोई टैक्स नहीं था।

वहां शुरु से अन्त तक पूरी पढ़ाई मुफ्त, हर तरह की मैडिकल मदद पूरी तरह से मुफ्त, बिजली मुफ्त, पानी मुफ्त, लोकल ट्रांसपोर्ट मुफ्त थी।

वहां हर व्यक्ति को नौकरी, और नौकरी न होने की स्थिति में पर्याप्त बेरोजगारी भत्ता और प्रत्येक नागरिक को एक निर्धारित मासिक भत्ते का सरकारी “लालीपॉप” थमा दिया।

जनता इस लालीपॉप को चूसती रही और उसका योगदान देश की अर्थव्यवस्था में न के बराबर रहा। सरकार केवल तेल बेचकर इन सब खर्चों की पूर्ति करती रही। ल

सिर्फ 5-6 वर्ष पहले तक वेनेज़ुएला में जीवन गुज़ारना वहां के नागरिकों के लिए एक जीवन भर की मौज मस्ती थी।

और आज, वर्तमान समय के हालात इतने बुरे हैं कि दुनिया को सबसे अधिक विश्व सुन्दरी देने वाले देश की बेटियां जो कल तक अपने देश में पुलिस ऑफिसर, प्रोफेसर, अध्यापिका, नर्स, अखबार की रिपोर्टर आदि बतौर सम्मानजनक नौकरियां कर रही थीं, आज पड़ोसी देश कोलम्बिया जाकर 10-10 अमेरिकन डॉलर के लिए अपना शरीर बेचने को मजबूर हो गयी है, ताकि अपने देश में छूट गये मां बाप, या भाई बहन, या पति व बच्चों के लिये महीने में 500-600 अमेरिकन डॉलर भेज सकें। तू

आखिर ऐसा क्या हुआ कि 5-6 वर्ष पहले का स्वर्ग इतनी जल्दी वहां के लोगों के लिए नरक बन गया?

जवाब बहुत साफ है। वेनेज़ुएला में पिछले लम्बे समय से वामपंथी सरकारों का ज़ोर चल रहा था, भ्रष्टाचार चरम पर था, खर्चे व सब्सिडी भयंकर थीं, तेल उत्पादन के अलावा किसी भी दूसरे उत्पादन पर किसी तरह की कोशिश की ही नहीं जा रही थी, भ्रष्टाचार और सब्सिडी की वजह से वेनेजुएला का खज़ाना लगभग खाली था। ब

और इसीलिए 2014 में अचानक ही वेनेज़ुएला में हर चीज दिन दुगनी, रात चौगुनी मंहगी होती गई। आज इतनी मंहगाई है कि एक महीने की सैलरी से सिर्फ एक पैकेट पास्ता खरीदने के अलावा कुछ नहीं कर सकते, UN के अनुसार 2019 में मंहगाई 1 लाख प्रतिशत तक बढ़ गई। 1 लाख प्रतिशत, मतलब जो चीज आज 1 रुपये की है वही साल भर बाद 1 लाख रुपये की।

वेनेजुएला की मुद्रा बोलिवर है और इसका सबसे बड़ा नोट एक लाख बोलिवर का है। मगर बाजार में इसकी कीमत कुछ भी नहीं। वेनेजुएला में अब एक लाख बोलिवर में कुछ नहीं खरीदा जा सकता। वित्तीय संकट की वजह से सरकार लगातार नोट छाप रही है जिससे यहां की मुद्रा बोलीवरकी कीमत लगातार घट रही है। हालत यह है कि एक डॉलर 35 लाख बोलिवर के बराबर हो गया है।

जब तक वेनेजुएला में तेल बेच-बेचकर पैसा आ रहा था और शावेज (वेनेजुएला का केजरीवाल) जनता पर पैसा बरसा रहे थे, तब तक सब ठीक था। हालांकि, अर्थशास्त्री तब भी’ शावेज की सोशलिस्ट (मुफ्तखोरी) पॉलिसी को खतरा बता रहे थे, लेकिन तब सबके कानों में मुफ्तखोरी का तेल पड़ा हुआ था। आज वेनेजुएला की करंसी बोलिवर का आलम यह है कि लोग एक किलो मीट के लिए 1.5 करोड़ बोलिवर तक दे रहे हैं। एक कप कॉफी के लिए 25 लाख बोलिवर तक दे रहे हैं। औरतें अपने बाल बेचकर पैसे इकट्ठा कर रही हैं। हर 35 दिनों में चीज़ों के दाम दोगुने हो रहे हैं। आज यहां 5 में से 4 लोग गरीब हैं। होटल-रेस्ट्रॉन्ट में लोग अपना बैंक बैलेंस दिखा रहे है कि उनके पास पेमेंट करने के लिए पैसे हैं। जिनके पास खाने का पैसा नहीं, वो लूट-मार कर रहे हैं। क

2014 से अब तक पेट्रोल कीमतें 8000% से ज़्यादा बढ़ चुकी हैं। राशन लेने के लिए लोग 65-65 घंटे कतार में खड़े होते हैं। गोदामों के बाहर सैनिक तैनात रहते हैं।

बाल काटने के एवज में नाई ले रहा अंडे और केले लोग फिलहाल खाने और दवाइयों के लिए भी मोहताज हैं।
बिजली, पानी और यातायात से जूझ रहे हैं वेनेजुएला के लोग। (ये सब पहले इन्हें मुफ्त में मिल रहा था)

  • बेरोजगारी बढ़ने से अपराध में तेजी से इजाफा हो रहा है

जूता मरम्मत के 20 अरब बोलिवर

आज वेनेजुएला में न्यूनतम मजदूरी 1 अमेरिकी डॉलर प्रति माह के करीब है.
इसके असर का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वेनेजुएला में एक यूनिवर्सिटी प्रोफेसर को अपना पुराना जूता मरम्मत करवाने के लिए चार महीने की सैलरी के बराबर 20 अरब बोलिवर (करीब 4 लाख रुपये) देने पड़े। कैब सर्विस लेने के लिए सिगरेट का डब्बा देना पड़ रहा है. रेस्त्रां खाना खिलाने के बदले पेपर नैपकिन ले रहा है। अनाज, दूध, दवाइयों और बिजली का घोर अभाव है। बेरोजगारी बढ़ने के अपराध में तेजी से इजाफा हो रहा है। एक बर्गर को खरीदने के लिए 50 लाख बोलिवर खर्च करने पड़ेंगे। एक कप काॅफी की कीमत 25 लाख बोलिवर, एक टमाटर 5 लाख बोलिवर।
वा
दिल्ली वासियों, आप भी अपनी दिल्ली को दूसरा वेनेज़ुएला नहीं बनने देना। क्योंकि ये केजरीवाल कुछ हजार करदाताओं से इकट्ठा रुपये मुफ्त खोरी में बांट देगा। जब दिल्ली का खजाना खाली हो जायेगा तो इन सुविधाओं को जारी नहीं रख सकता, फिर केन्द्र सरकार की तरफ ऊँगली उठा कर बोलेगा कि ये मुझको कुछ नहीं करने दे रहे हैं। बाद में आपकी स्थिति भी वेनेजुएला की जनता जैसी हो जाए इससे बचें। आपको ये मुफ्त की और सब्सिडी वाली घोषणाएं आज तो अच्छी लग रही हैं लेकिन बाद में ये आपके लिए दुखदायी साबित हो सकती है।

इसलिए,

लालच में न आये
अपनी अक्ल लगाये

मुफ्तखोर नहीं
समझदार बनिए

विकास खुराना

Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

इतिहासकारों ने लिखा लालकिला मुगल शाहजहां ने 1638 में बनवाया।
👆👆
लेकिन oxford संग्रहालय लंदन में 1628 की पेटिंग है। जिसमें 1628 में शाहजहां दीवाने आम लालकिले में विदेशी राजदूत से मुलाकात कर रहा है।
“1638” में बनाना शुरु किया तो “1628” में शाहजहा अंदर !!
😟😬❓❓‼
लालकिला बारहवीं शताब्दी मे पृथ्वीराज का महल था, लालकोट।

जिसनेयेइतिहासलिख़ाउसेगालीदेनेका #मनकरेतोशेयरकरेंसच्चाई