Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

(((( प्रभु मोये गोपी बना ले ))))
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एक भक्त थे कुम्भनदासजी जो गोवर्धन की तलहटी में रहते थे।
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एक बार की बात है कि भक्त कुम्भनदास जी भगवान श्रीनाथजी के पास गये और उन्हें जाकर देखा कि श्रीनाथजी अपना मुँह लटकाये बैठे हैं।
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कुम्भनदास जी बोले – प्रभु क्या हुआ, मुँह फुलाये क्यों बैठे हो।
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श्रीनाथजी बोले – क्या बताऊ कुम्भन आज माखन खाने का मनकर रहयो है।
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कुम्भनदास जी – बताओ प्रभु क्या करना चाहिए और माखन कहा से लाये।
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श्रीनाथजी – देख कुम्भन एक गोपी है, जो रोज मेरे दर्शन करने आवे और मोते बोले कि प्रभु मोय अपनी गोपी बना लो सो आज वाके घर चलते हैं ।
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कुम्भनदास जी – प्रभु काऊ ने देख लिये तो कहा होगो।
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श्रीनाथजी – कोन देखेगो आज वाके घर में वाके शादी है, सब बरात में गये हैं घर पर सब गोपी ही गोपी है और हम तो चुपके से जायेगे याते काहु हे न पतो हो।
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कुम्भनदास जी – ठीक प्रभु मैं बुढ़ा और तुम हट्टे – कट्टे हो कोई बात है गयी तो छोड़ के मत भाग आई ओ।
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श्रीनाथजी – ठीक है पक्की साथ – साथ भागेगे कोई गोपी आ गयी तो नही तो माखन खाके चुप चाप भाग आयेगे।
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श्रीनाथजी और कुम्भनदासजी दोनों गोपी के घर में जाने के लिये निकले, और चुपके से घर के बगल से एक छोटी सी दीवार से होकर जाने की योजना बना ली।
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श्रीनाथजी – कुम्भन तुम लम्बे हो पहले मुझे दीवार पर चढ़ाओ।
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कुम्भनदासजी – ठीक है प्रभु.. कुम्भनदासजी ने प्रभु को ऊपर चढ़ा दिया और प्रभु ने कुम्भनदासजी को और दोनों गोपी के घर में घुसकर माखन खाने लगे…
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प्रभु खा रहे थे और कुम्भनदासजी को भी खिला रहे थे, कुम्भनदासजी की मूँछों में और मुँह पर माखन लग गयो…
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तभी अचानक श्रीनाथजी को एक बुढ़ी मईय्या एक खाट पर सोती हुई नजर आई जिसकी आँख खुली सी लग रही थी…
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और उसका हाथ सीधा बगल की तरफ लम्बा हो रहा था यह देख प्रभु बोले…
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श्रीनाथजी – कुम्भन देख यह बुढ़ी मईय्या कैसी देख रही हैं और लम्बा हाथ करके माखन माग रही है, थोडो सो माखन याकू भी दे देते हैं।
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कुम्भनदासजी – प्रभु न मरवाओगे क्या बुढ़ी मइय्या जग गयी न तो लेने के देने पड़ जायेगे।
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श्रीनाथजी गये और वा बुढ़ी मईय्या के हाथ पर माखन रख दिया…
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माखन ठण्डा – ठण्डा लगा की बुढ़ी मईय्या जग गयी और जोर – जोर से आवाज लगाने लगी चोर – चोर अरे कोई आओ घर में चोर घुस आयो।
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बुढिया की आवाज सुनकर कर घर में से जो जो स्त्री थी वो भगी चली आयी…
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इधर श्रीनाथजी भी भागे और उस दीवार को कुदकर भाग गये, उनके पीछे कुम्भनदासजी भी भागे और दीवार पर चढ़ने लगे..
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वृद्ध होने के कारण दीवार पार नही कर पाये आधे चढ़े ही थे की एक गोपी ने पकड़ कर खींच लिये और…
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अन्धेरा होने के कारण उनकी पीटाई भी कर दी।
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जब वे उजाला करके लाये और देखा की कुम्भनदासजी है, तो वे अचम्भित रह गयी क्योंकि कुम्भनदासजी को सब जानते थे कि यह बाबा सिद्ध है, और बोली…
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गोपी बोली – बाबा तुम घर में रात में घुस के क्या कर रहे थे और यह क्या माखन तेरे मुँह पर लगा है क्या माखन खायो…
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बाबा तुम कह देते तो हम तुम्हारे पास ही पहुँचा देते। इतना कष्ट करने की क्या जरूरत थी।
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बाबा चुप थे, बोले भी तो क्या बोले।
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गोपी बोली – बाबा एक शंका है कि तुम अकेले तो नही आये होगे क्योंकि इस दीवार को पार तुम अकेले नही कर सकते।
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कुम्भनदासजी – अरी गोपी कहा बताऊ कि या श्रीनाथजी के मन में तेरे घर को माखन खाने के मन में आ गयी…
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कि यह प्रतिदिन कहे प्रभु मोये गोपी बना ले सो आज गोपी बनावे आ गये आप तो भाग गये मोये पीटवा दियो।
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गोपी बडी प्रसन्न हुई कि आज तो मेरे भाग जाग गये।
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यह सख्यभाव की लीला हैं, भक्त बड़े विचित्र और उनके प्रभु उनसे से विचित्र होते हैं। ((((((( जय जय श्री राधे )))))))