हो सकता है इस तरह की चरस आपको भी किसी व्हाट्सएप ग्रुप में नजर आई हो की शांतिदूतों ने लिखा है कि जलियांवाला बाग में हजारों मुसलमान मरे और जब पोस्टमार्टम हुआ किसी भी मुसलमान के पीठ पर गोली नहीं लगी थी बल्कि छाती पर गोली लगी थी
जबकि सच्चाई यह है उस वक्त अमृतसर शहर में 15% सिख आबादी थी और शहीदों में 30% सिख है, शहीदों में 55% हिंदू थे और 15% मुस्लिम थे
आप अमृतसर के कलेक्टर कार्यालय से दस्तावेज मंगा सकते हैं 20 अब्दुल कुएं में गिरे थे यानी जब गोली चली थी तब भागे थे और उनकी कुएं में गिरने से मौत हो गई थी
और मुसलमानों को वहां पर सैफुद्दीन किचलू नामक व्यक्ति ने बुलाया था जो कट्टरपंथी मौमीन था और जिसने तुर्की के ऑटोमान साम्राज्य यानी अपनी मुसलमानों के खिलाफत साम्राज्य के लिए अंग्रेजो के खिलाफ हो गया था और उसने सभी मुसलमानों को तुर्की के खलीफा के साम्राज्य के वास्ते बुलाया था यानी जितने भी मुसलमान जलियांवाला बाग में इकट्ठे हुए थे वह भारत की आजादी के लिए इकट्ठे नहीं हुए थे बल्कि अपने इस्लामिक सपने यानी खलीफा साम्राज्य की स्थापना के लिए इकट्ठे हुए थे