सोचिए कांग्रेसी कुत्ते कितने नीच होते हैं
आज इन कांग्रेसी कुत्तों के पेट में दर्द है कि मोदी ने शेख हसीना को भारत में क्यों शरण दिए हैं
लेकिन इन कांग्रेसी कुत्तों की अम्मा इंदिरा गांधी ने शेख हसीना के लिए क्या किया आप सुनकर दंग रह जाएंगे
1971 में शेख मुजीबुर रहमान पाकिस्तान की कैद में थे तब बांग्लादेश में पाकिस्तानी सैनिकों ने उनके पूरे परिवार को कैद किया था और उनका सामूहिक कत्लेआम करने का प्लानिंग था
तब इंदिरा गांधी ने भारतीय सेना को कहा था कि आप शेख मुजीबुर रहमान के परिवार को किसी तरह भारत लाइए
और कर्नल अशोक तारा को यह जिम्मेदारी दी गई कि वो शेख मुजीबुर रहमान के पूरे परिवार को बचाकर भारत लाएं
कर्नल अशोक तारा अपनी जान की बाजी लगाकर पाकिस्तानी सैनिकों से भिड़े और उन्होंने शेख मुजीबुर रहमान के परिवार को जिसमें शेख हसीना बाजी शेख रिहाना वासी शेख मुजीबुर रहमान के तीनों बेटे उनकी पत्नी को पाकिस्तानी सैनिकों के चंगुल से मुक्त किया
एक तस्वीर में मोदी जी और कर्नल अशोक तारा है जब भी शेख हसीना भारत आती थी तो उनसे जरूर मिलती थी
बाद में 1975 में शेख मुजीबुर रहमान, उनकी पत्नी उनके तीनों बेटे यहां तक कि उनका 10 साल का बेटा उनकी दोनों पुत्रवधू और बड़े बेटे का 4 साल के बच्चे को यानी सब को बांग्लादेश की सेना द्वारा क़त्ल कर दिया गया
फिर कत्लेआम करने वाला बांग्लादेशी सेना का कर्नल खंडेकर मुस्ताक अहमद ने जब घर के नौकर से पूछा कि शेख मुजीबुर रहमान की दोनों बेटियां कहां है तब पता चला कि उनकी दोनों बेटियां पेरिस जाने के लिए निकल गई और यह सुनकर कत्लेआम की साजिश रचने वाले सैन्य अधिकारियों को बहुत अफसोस हुआ कि उनकी दो बेटियां बच गई है
शेख मुजीबुर रहमान की दोनों बेटियां शेख हसीना वाजेद अपने पति परमाणु वैज्ञानिक डॉक्टर वाजेद और शेख रेहाना पेरिस जा रही थी उस वक्त ढाका से पेरिस की डायरेक्ट लाइट नहीं थी इसलिए वह ब्रुसेल्स में रुककर कुछ दिन बाद पेरिस जाने वाले थी
और वह ब्रुसेल्स स्थित बांग्लादेश के दूतावास गई 4 घंटे बाद पता चला कि बांग्लादेश में तख्तापलट हो गया है तब बांग्लादेश के दूतावास ने उन्हें दूतावास में रुकने से रोक दिया
फिर जैसे ही खबर ब्रेक हुई कि शेख मुजीबुर रहमान और उनके पूरे परिवार की हत्या हो गई है और उनकी दोनों बेटियां विदेश में है उसके बाद इंदिरा गांधी ने उन्हें भारत बुलाने का पूरा इंतजाम किया
ब्रुसेल्स में भारतीय राजदूत ने ही कार की व्यवस्था किया और उन्हें जर्मनी भेजा फिर जर्मनी में भारतीय राजदूत वाई के पूरी ने दोनों बहनों यानी शेख हसीना वाजेद और शेख रेहना तथा शेख हसीना वाजिद के पति डॉक्टर वाजेद को सरकारी आवास में रखा
इंदिरा गांधी ने भारत के दूतावास को कहा कि इनको बहुत सिक्योरिटी में रखो क्योकि उस वक्त जो बांग्लादेश का तानाशाह कर्नल खन्दकार मोशताक अहमद सत्ता पलट कर के राष्ट्रपति बना था वह हर कीमत पर इन दोनों बहनों का कत्ल करना चाहता था
इंदिरा गांधी ने फिर एयर इंडिया का विशेष विमान से उन्हें गुपचुप तरीके से दिल्ली लाया
उसके बाद उनकी सुरक्षा की विशेष व्यवस्था की गई क्योंकि बांग्लादेश की मिलिट्री सरकार इन दोनों बहनों का किसी भी कीमत पर खात्मा करना चाहती थी
शेख़ हसीना को इंडिया गेट के पास पंडारा पार्क के सी ब्लाक में एक बंगला आवंटित कर दिया गया.
दो बंगाली अधिकारियों को उनकी घर की सुरक्षा में तैनात किया गया ताकि वह बांग्ला में उनसे बातचीत कर सकें
एक थे कर्नल सत्तो घोष और दूसरे थे 1950 बैच के आईपीएस अधिकारी IG पी के सेन. ये दोनों अधिकारी साए की तरह हसीना के साथ रहते थे.”
हसीना के पति डाक्टर वाज़ेद को भी परमाणु ऊर्जा विभाग में फ़ेलोशिप प्रदान कर दी गई. और उन्हें परमाणु ऊर्जा विभाग में एक अच्छी नौकरी भी दे दी गई
6 सालों तक शेख हसीना के पूरे परिवार को भारत सरकार ने अपने शरण में और बेहद चुस्त सरकारी व्यवस्था में रखा जिसका पूरा खर्चा भारत सरकार उठा रही थी
शेख हसीना की छोटी बहन शेख रेहाना कोलकाता स्थित शांति निकेतन में पढ़ना चाहती थी भारत सरकार ने उनका दाखिला वहां करवाया लेकिन जब IB को भनक लगी बांग्लादेश सरकार शेख रिहाना के कत्ल की साजिश रच रही है तब उन्हें दिल्ली लाया गया
24 जुलाई, 1976 को शेख़ रेहाना ने लंदन में अपने दोस्त शफ़ीक सिद्दीकी से शादी किया शादी करने का पूरा खर्चा भी भारत सरकार ने उठाया था और शेख रेहाना को दिल्ली से लंदन एक विशेष विमान में भेजा गया था
इस तरह कुल 6 साल 8 महीने भारत में सरकारी खर्चे पर शेख हसीना उनकी बहन रेहाना अपने परिवार के साथ रहे।
ताकि सनद रहे
