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पप्पू चरसी ने आज कोलंबिया से लाया हुआ एकदम प्योर माल नाक से सूंघने के बाद बोला कि मोदी इतने तानाशाह है कि कोई विदेशी राष्ट्र प्रमुख आता है तो मोदी जी मुझको मिलने नहीं देते।

दरअसल पप्पू चरसी पुतिन से मिलना चाहता था।

अब मैं आपको महत्वपूर्ण बात बता देता हूं।

कोई भी विदेशी राष्ट्र प्रमुख या विदेशी राजनेता दुनिया के किसी भी देश में जाता है तो वह किससे मिलेगा और किससे नहीं मिलेगा यह पूरा का पूरा उसका दफ्तर और उसे देश का राजदूत तय करता है, मेजबान देश का प्रधानमंत्री नहीं।

इसमें उस देश की सरकार कुछ नहीं कर सकती। भारत में कोई भी राष्ट्र प्रमुख आ रहा है तो वह किससे मिलना चाहता है, यह पूरा प्लानिंग उस देश का दूतावास तथा वह राष्ट्र प्रमुख या राजनेता खुद तय करता है।

मोदी सरकार अगर यह कहे कि भाई साहब उनसे मिल लो या इनसे मिल लो तो यह नहीं चलता है।

पप्पू चरसी जॉर्ज सोरेस का एजेंट है, यह बात पूरी दुनिया के राजनेताओं को पता है। इसीलिए जॉर्ज सोरेस  के खिलाफ रहने वाला कोई भी राजनेता पप्पू चरसी से कभी नहीं मिल सकता।

पुतिन कभी भी पप्पू चरसी से नहीं मिलेंगे क्योंकि जॉर्ज सोरेस ने पुतिन के खिलाफ भी काफी बयान बाजी किया है।

और सबसे बड़ी बात : जब पप्पू चरसी फ्रांस के राष्ट्रपति से मिलने के बाद उन्हीं के हवाले से राफेल समझौते के बारे में कितना बड़ा झूठ बोला था, यह पूरे विश्व के नेताओं को मालूम है है जिसे बाद में फ्रांस के राष्ट्रपति ने एक वक्तव्य देकर यह बताया था कि पप्पू चरसी सरासर झूठ बोल रहा है।

मोदी जी भी अमेरिका, सऊदी अरब या किसी देश में जाते हैं तो किससे मिलेंगे, उनका क्या कार्यक्रम होगा, यह मोदी जी तय करते हैं, अमेरिका या सऊदी अरब नहीं।

मोदी जी जब सऊदी अरब की यात्रा पर थे तब वहां उन्होंने भारतीयों की एक सभा को संबोधित करने का प्लान बनाया। शुरू में सऊदी अरब हुकूमत डर रही थी, क्योंकि सऊदी अरब में कभी कोई सभा नहीं होती, वहां एक ही परिवार सत्ता पर काबिज है तो शुरू में सऊदी अरब सरकार को लगा कि कहीं इससे प्रेरित होकर यहां भी बगावत वाली भावना ना उत्पन्न हो जाए।

लेकिन भारतीय दूतावास  ने कहा कि मोदी जी अपने लोगों को हर हाल में संबोधित करेंगे। फिर सऊदी अरब में मोदी जी का भारतीयों को संबोधित करने वाला कार्यक्रम हुआ।

अब देखिए जितने भी कट्टर क्रिश्चियन या कट्टर मुस्लिम राष्ट्र प्रमुख भारत आते हैं वह पप्पू चरसी से जरूर मिलते हैं।

कुछ दिन पहले मलेशिया का प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम आया था, वह पप्पू चरसी से मिला था।

अनवर इब्राहिम वही है जो प्रधानमंत्री होते हुए भी एक मस्जिद में एक हिंदू युवक का धर्मांतरण करवाकर पूरी दुनिया में सुर्खियों में आया था। क्योंकि एक प्रधानमंत्री अगर कलमा पढ़वा कर एक हिंदू का धर्मांतरण करवा रहा है तो यह बहुत बड़ा विषय है, पाकिस्तान में भी ऐसा नहीं हुआ है।

फिर बांग्लादेश में जब शेख हसीना प्रधानमंत्री थी, भारत आई थी तो पप्पू चरसी  से मिली थी। शेख हसीना परिवार पप्पू के खानदान के बहुत करीब है क्योंकि इंदिरा गांधी ने शेख मुजीबुर रहमान की हर हालत में मदद की थी। शेख हसीना को भी भारत में 8 साल तक इंदिरा गांधी ने शरण दिया था यहां तक कि उनके पति को भारत में नौकरी भी दी गई थी।

इसके अलावा नार्वे जो एक कट्टर कैथोलिक है जो भारत में कई क्रिश्चियन मिशनरीज को तथा मोदी विरोधी पार्टियों को फंडिंग करता है, उसके विदेश मंत्री भी पप्पू चरसी से मिले थे।

न्यूजीलैंड के वामपंथी और घर हिंदू विरोधी मानसिकता के प्रधानमंत्री भी जब भारत आए थे तब पप्पू चरसी से मिले थे यह वही न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने कई बार RSS की आलोचना किया था।

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