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साबरमती आश्रम का वास्तविक नाम साबरमती सेटलमेंट था।
अंग्रेज कोई भी जगह बसाते या नामांकरण करते थे तो उसका नाम सेटलमेंट ही रखते थे। उदाहरण के स्वरूप दक्षिण अफ्रीका के फिनिक्स में फिनिक्स सेटलमेंट अंग्रेजों ने ही बसाया था और गांधी को जमीन और घर अंग्रेजों ने नहीं दिया था।
आपको यह जानकर बहुत आश्चर्य होगा कि दक्षिण अफ्रीका में जो गांधी के चेले चपाटे फिनिक्स सेटलमेंट में रहते थे, वही सभी चेले चपाटे साबरमती सेटलमेंट से अपना वही सामान लेकर आ गए थे। तो क्या यह सब एक मात्र संयोग था?
दूसरी बात गांधी जून 1914 में दक्षिण अफ्रीका से भारत के लिए चले और जनवरी 1915 में मुंबई के बंदरगाह पर उतरे। एक महीने की समुद्री यात्रा में उसे 7 महीने क्यों लगे?
क्या वह लंदन में रुके थे? वहां पूरी स्ट्रेटजी तय की गई? उनका ड्रेस कोड तय किया गया? मुंबई बंदरगाह पर के लिए खर्च किसने किया था?
भारत में गांधी के आगमन के समय मीडिया में माहौल कौन बना रहा था?
मुंबई के ग्रांट रोड क्षेत्र में लेबरनम रोड है। यह ग्रांट रोड और लेबरनम रोड अंग्रेजों का क्षेत्र होता था। बड़े बड़े अंग्रेज ऑफिसर वहां रहते थे। गांधी को तीन मंजिला इमारत लेबर्नम रोड पर कैसे मिल गई? अभी वर्तमान में बिल्डिंग का नाम मणि भवन है, जिसे गांधी ने 1915 से लेकर 1947 तक उपयोग में लिया था।
आज एक नई जानकारी यह मिली कि गुजरात में सबसे पहला टेलीफोन किसी बड़े उद्योगपति मिल मालिक के घर पर नहीं बल्कि साबरमती आश्रम में गांधीजी के टेबल पर लगा था।
इतन ही नय यह टेलीफोन अंग्रेजों ने विशेष लाइन डलवा कर लाखो रुपये खर्च करके लगवाया था ताकि अंग्रेज गांधी जी से बात कर सके।
समझे भाई…✍️
Mr.satish kaler

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