अटल जी की ही तरह मोदी जी ने भी सोनिया कांग्रेस को जूतों में दाल पीने पर मजबूर कर दिया….
कैसे..
तो जानिए ऐसे…
लालकृष्ण आडवाणी की एक पुस्तक है ….
“माय कंट्री माय लाइफ।”
जब अमेरिका मे 9/11 का हमला हुआ तो अफगानिस्तान की धुलाई निश्चित हो गयी।
दिल्ली मे विदेश मंत्री जसवंत सिंह को पत्र आया वाजपेयी सरकार से अपील थी कि मुंबई का बंदरगाह और कश्मीर के पूँछ सेक्टर मे एक फ्यूल स्टेशन अमेरिका को प्रयोग करने दे।
जसवंत सिंह ने
वाजपेयी को बताये बिना इसे स्वीकृति दे दी और वाजपेयी के लिये सिरदर्द बढ़ा दिया।
भारत नहीं चाहता था कि कल को वो तालिबान के निशाने पर आये।
वाजपेयी ने तब अपने विरोधी सोनिया गाँधी और हरकिशन सिंह सुरजीत को याद किया। वाजपेयी ने उन्हें कहा कि मैं चाहता हुँ अमेरिका अफगानिस्तान के विरुद्ध हमारी धरती प्रयोग करें।
बस फिर क्या था ……
कांग्रेस और कम्युनिस्टो ने विरोध शुरू कर दिया।
विरोध इतना तीव्र था कि वाजपेयी ने अमेरिका संदेश भेज दिया कि वे सहायता नहीं दे पाएंगे।
उस समय
अमेरिकी चैनलों पर यह विरोध प्रसारित हो रहा था कि सोनिया गाँधी अमेरिका विरोधी है।कांग्रेसी संसद भवन घेरकर खड़े थे और वाजपेयी अपने ऑफिस से उन्हें देखकर मुस्कुरा रहे थे।
बाद मे ज़ब जॉर्ज बुश की अटल बिहारी से मुलाक़ात हुई तो वाजपेयी ने मदद ना कर पाने का खेद जताया।
इस पर बुश ने कहा …..
“मैं भी जानता हुँ कि राजनीति कैसे खेली जाती है!!”
इतना कहकर बुश ठहाके मारकर हँस पड़े।
यदि विपक्ष अंधविरोधी हो तो कई बार आपके ही काम कर देता है।
कल जो संसद मे बहस हुई उसका निचोड़ कुछ यू है
पाकिस्तान और कश्मीर समस्या की जननी कांग्रेस है।
सीजफ़ायर किसी विदेशी शक्ति ने नहीं करवाया और कांग्रेस ने ऑपरेशन महादेव के लिये मेज ना थपथपाकर एक घटिया राजनीति का उदाहरण पेश किया।
कांग्रेस जो धूल उड़ाने चली थी वही उसके चेहरे पर चिपक गयी और ये लोग मोदीजी के भाषण के पीछे पड़े तो थे लेकिन मोदीजी ज़ब आए तो ये फिर जलील होकर बैठे है।
मोदीजी ने ट्रम्प का नाम नहीं लिया, जाहिर है अभी ट्रेड डील करनी है और ऊपर से टेरीफ का संकट भी है। जो लोग विदेश नीति समझते है वे समझ जाएंगे कि सत्ता पक्ष के लिये एक अल्पविराम या पूर्ण विराम का भी बहुत महत्व होता है।
डोनाल्ड ट्रम्प का सीधे नाम लेना एक बचकानी बात होती।
राहुल गाँधी और कांग्रेस ले सकते है और इन्होने नाम लेकर वैसे ही मदद की जैसे 2001 मे सोनिया ने की थी।
पश्चिमी देशो ने इसे वैसे ही कवर किया है कि भारत का विपक्ष डोनाल्ड ट्रम्प से नाराज है और सरकार ने डोनाल्ड ट्रम्प का सीजफ़ायर का दावा खारिज कर दिया।
कल को यदि अमेरिकी दूतावास आपत्ति ले कि आप बार बार ट्रम्प की जग हँसाई क्यों कर रहे है तो सरकार कह सकती है कि हम आगे से नहीं कर रहे।
विपक्ष हमसे ट्रम्प का दावा बार बार रिजेक्ट करवा रहा है।
कल एक तीर से बहुत से निशान सध गए, पप्पू के चक्कर मे अखिलेश फ्री मे पिस गया। नेहरूजी को कोसने का फिर एक कारण मिल गया।
26/11 के लिये कांग्रेस फिर जलील हो गयी और ऑपरेशन सिंदूर की सुखद यादें भी ताज़ा हो गयी।
इसके अलावा ट्रम्प चाचा को बिना देखे ठेंगा भी दिखा दिया।
मूर्ख विपक्ष सत्तापक्ष के लिये मोहरे का काम करता है, कल यह दोबारा सिद्ध हुआ।