एक व्यक्ति जो अपनी 40 संस्थाओं के जरिए इस्लामी धर्मांतरण का रैकेट चला रहा था, वो अब जाकर पकड़ा गया है! जो नुक़सान होना था वो तो हो चुका, अब क्या…………?
50 युवाओं की कमांडो फ़ोर्स के साथ वो अपना एक पूरा का पूरा थाना चला रहा था 330 जिलों में ,,,,,,,,
‘लव जिहाद’ की ट्रेनिंग देता था,
हिन्दू महिलाओं का धर्मांतरण कराने वालों को इनाम देता था। विदेश से करोड़ों रुपए आते थे।
साज़िश पूरी भारत-नेपाल सीमा को हाईजैक करने की थी।
करोड़ों की ज़मीनें उसने हथियाकर रखी थीं……..
‘छांगुर’ बाबा जैसे एक नहीं, बल्कि कितने हो सकते हैं ?
वो तो एक ठेकेदार का पैसा नहीं दे रहा था तो उसकी पुलिस कंप्लेंट पर ये अरैस्ट हुआ नहीं तो बहुत आगे तक काम करता रहता,,,,,,,,,,,,,,,,
याद कीजिए,
4 वर्ष पूर्व इसी यूपी में एक गिरोह धराया था जिसने देशभर में दिव्यांगों को शिकार बनाया था…….सैकड़ों दिव्यांग बच्चों को इस्लाम कबूल करवाया गया था। उस गिरोह के भी कई लोग गिरफ़्तार हुए थे, तार विदेश तक गए थे…………….
समस्या ये है कि इनसे निपटने के लिए हमारे पास न कोई नीति है और न कोई क़ानून। कोई सामान्य क़ानून इनसे नहीं निपट सकता।
जब कन्हैया लाल तेली की हत्या के मामले में ज़मानत मिल सकती है,
कमलेश तिवारी के हत्यारे को ज़मानत दी जा सकती है –
तो इसका अर्थ है कि मौजूदा व्यवस्था इनसे निपटने में नाकाम रही है। ये समाज में भीतर तक धँस चुके हैं……
भारत-नेपाल सीमा पर मदरसों का जाल बिछाना इसका हिस्सा है। कैराना, किशनगंज, नूहं और मुर्शिदाबाद जैसे इलाक़ों का पाकिस्तान बन जाना इसका उदाहरण है।
कश्मीर से पंडितों के पलायन से लेकर मुर्शिदाबाद से हिन्दुओं के पलायन तक, कहानी अबतक वही रही है।
ये एक राष्ट्रीय खतरा है,
और जिससे निपटने में NSA और UAPA जैसे क़ानूनों के भी पसीने छूट रहे हैं…….

