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इमरजेंसी रपट- 1

इमरजेंसी लागू हुए एक दिन बीत चुका है। अब आप खुदाई रिपोर्टर की एक विशेष रपट पढ़िए। रपट के मुख्य किरदार है मुहम्मद यूनुस।

मामू फ्रंटियर गांधी उर्फ़ बादशाह ख़ान उर्फ़ अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान के भांजे यूनुस को बादशाह ख़ान ने गांधी बाबा और चाचा से मिलाया था। अलीगढ़ गैंग के सदस्य यूनुस को चच्चा और नेहरू ने बड़ा पसन्द किया। चच्चा ने अपने घर में इन्हें एक कमरा दे दिया था- प्रियदर्शिनी की तन्हाई सबसे पहले इन्ने ही दूर की थी।

गांधी बाबा के आश्रम में भी यूनुस साहब रहे- अनेक प्रार्थना सभा में गांधी बाबा की स्पीच तैयार करने में यूनुस का अहम योगदान रहा – ये बात इन्होंने ख़ुद अपनी किताब में लिखी है। गांधी बाबा के ये इतने मुँहलगे थे कि गांधी बाबा के जन्मदिन पर इन्होंने बाबा से मटन पार्टी माँग ली थी। बताये- आज तक भारत में गांधी बाबा का राज्य ड्राई स्टेट है और इन्होंने गांधी बाबा से सीधे मटन और सुरा पार्टी ही माँग ली।

यूनुस साहब इतने सेक्युलर थे कि निकाह भी इन्होंने बिहारी लाल रालिया राम की लड़की लाजवंती से किया। यूनुस के ससुर आज़ाद पाकिस्तान की ऐक्टिव राजनीति में शामिल थे। ससुर और साले पाकिस्तान के ईसाई अल्पसंख्यक समुदाय के सिरमौर थे। ससुर पाकिस्तान के मंत्री और दामाद यूनुस सीधे चच्चा के घर के बाशिंदे- यही तो हिंदुस्तान की सुंदरता है जनाब।

चच्चा साहब तो यूनुस पर इतने फ़िदा थे कि इन्हें आईएफ़एस में सीधे डाल दिया- बिना किसी परीक्षा के। १९४७ से १९७४ तक आईएफ़एस में रहे- सोचे कितने टैलेंटेड रहे होंगे कि बिना किसी एग्जाम के सचिव बने रहे। फिर आपातकाल में यूनुस ने संजय गांधी की तमाम सनक में साथ दिया। “पकड़ लो- जकड़ लो- अरेस्ट करो” जैसे स्लोगन देने वाले यूनुस ने तुर्कमान गेट में भी चू तक नहीं की। संजय गांधी का विवाह भी इन्होंने अपने घर करवाया। बाद में इंदिरा को भी इन्होंने अपने घर में पनाह दी।

प्रगति मैदान को अपनी खाला का घर समझ वही डेरा बसाने वाले यूनुस का लड़का आदिल शहयर गांधी और बच्चन लड़कों का वो पाँचवा स्तंभ था जिन्होंने दिल्ली के कारचोरी और लड़कीबाज़ी को नये आयाम दिये। आदिल तो इतना शातिर था कि अमेरिका में पैंतीस साल की सजा काट रहा था और फिर बड़े भैया राजीव ने प्रेसिडेंट रीगन से सीधे उसे आज़ाद करा भारत की रिटर्न टिकट थमा दी। स्वर्गीय सुषमा स्वराज जी ने बाक़ायदा इस बात का उल्लेख संसद में किया था।

खुलासे तो और भी अनेक है – किंतु इतना लंबा पढ़ेगा कौन।

चुनांचे इस रपट को इधरीच खतम करते है!

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