वर्ष 1980 जनवरी 15 तारीख को कथित आयरन लेडी (इंदिरा गांधी)प्रधानमंत्री पद की सपथ लेती है और सरकार बनती है ✋कांग्रेस की, तब उत्तरप्रदेश में “जनता पार्टी” की सरकार ठीक ठाक चल रही थी मुख्यमंत्री थे “बनारसी दास” UP सरकार न अल्पमत में थी और न कोई टूट फूट थी…
दिल्ली की गद्दी पर बैठते ही कांग्रेस और इंदिरा गाँधी को लगा की उत्तरप्रदेश सबसे बड़ा प्रदेश है और हमें यहाँ कब्जा करना चाहिये…
स्क्रिप्ट लिखी जाने लगी और दिल्ली के लुटियन मीडिया के दलालों को सक्रिय किया गया और फोटो खिंचवाकर ही पूरा खेल किया गया था 7 फरबरी यानि सरकार बनाने के 20 से 25 दिनों में ही खेल किया गया…
सरकार बनने के मात्र 2/3 दिन बाद “देवरिया” जिले के “नारायणपुर गाँव” में एक सड़क दुर्घटना होती है, जो कि सामान्य सी बात है, होती रहती है उसमें एक दलित महिला की मृत्यु हो जाती है…
गाँव का नाम नारायणपुर जरूर था लेकिन 70 से 75% आबादी छोटा पायजामा लम्बे कुर्ता वालों की थी और शेष 25 से 30% दलित और आदिवासी थे…
दिल्ली में प्लान बना कि कैसे इस दुर्घटना को उत्तरप्रदेश के कानून व्यवस्था से जोड़कर तमाशा बनाया और घेरा जाये सरकार को…
मृत महिला के बेटे बहू को पहले ही काल ने निगल लिया था, उनके एक बेटा (8)और बेटी(6) थी जो अपने दादी के साथ रहती थी…
उसी गाँव का एक कांग्रेस का नेता था “सिद्दीकी” जिसने मृत महिला के शव को लेकर रास्ता रोक दिया कि मुआवजा दो और दोषियों को सजा दो… उसके बाद उसने वहाँ तोड़फोड़, आगजनी करवा दिया और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस आई जिसपर जमकर पत्थरबाजी करी गई, दरोगा समेत दर्जनभर से अधिक पुलिस वाले बुरी तरह घायल हो जाते हैं, उसके बाद एक्स्ट्रा फोर्स बुलाकर उसे तैनात कर दिया जाता है…
दूसरे दिन गाँव वाले सुबह सोकर उठते हैं तो 2 लाश मिलती है उन्हें दलितों की एक पुरुष और महिला की…उने शरीर और सर पर चोट के निशान थे, गाँव के कोंग्रेसी नेता “सिद्दीकी” ने फिर बवाल शुरू किया कि रात में पुलिस वालों ने पूरे गाँव की महिलाओं के साथ बलात्कार किया है…
और इस बवाल को विकराल रूप धारण करवाया गया…
उस बवाल को इतना बड़ा करवाया गया कि दिल्ली से चलकर मालकिन इंदिरा गाँधी स्वयं पहुँची उस “नारायणपुर गाँव” में…
वहाँ इंदिरा गाँधी ने बड़े बड़े दावे किए कि दोषियों को सजा दिलवाई जायेगी मुआवजा दिया जायेगा…
और उस मृत महिला के दोनों पोते पोती को मालकिन ने अपनी गोद में लिया और बोली आज से ये दोनों बच्चे मेरी अमानत हैं और अब ये मेरे साथ ही दिल्ली में मेरे घर में रहेंगे और वहीं पढ़ेंगे लिखेंगे दोनों , खूब जमकर फोटो शूट हुआ… मालकिन इंदिरा गाँधी दिल्ली वापस लौट गई फोटो शूट करवाकर… तब “संजय गाँधी”जीवित थे और उन्होंने इन 20 /25 दिनों में डेढ़ दर्जन चक्कर लगाये थे उस “नारायणपुर गाँव” के…
अब जिन 2 लोगों की मौत हुई थी उसे कैसे साबित किया जाये उसके लिए दिल्ली और लखनऊ से बड़े बड़े दलाल पत्तलकारों की टीम को लाया गया…और उस छोटे से नारायणपुर गाँव में press कॉन्फ्रेंस करवाया गया और उन महिलाओं को प्रस्तुत किया गया था जिसने बलात्कार होने का अफवाह फैलाई गई थी…
दिल्ली के दलालों ने उन महिलाओं के घूँघट में फोटो खिंचा गया और दिल्ली में लम्बे लम्बे आर्टिकल लिखे गए…फ्रंट पेज पर छपवाने के लिए इतना कुकृत्य और नृसंसता हुई है गाँव की महिलाओं के साथ…(2/3 उस गाँव में दीन वालों की आबादी थी)…ये खबर दिल्ली के अख़बारों में छपते ही नेशनल न्यूज़ बन गई…कि उत्तरप्रदेश की कानून व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो चुकी है और इसका परिणाम ये निकला कि “7 फरबरी” को उत्तरप्रदेश की सरकार को बर्खास्त कर दिया जाता है केंद्र द्वारा 20/22 दिनों के अंदर ही…4 महीने बाद चुनाव होता है UP में और मुद्दा होता सिर्फ #नारायणपुर बलात्कार कांड और उस मुद्दे को हवा देने का काम दिल्ली और लखनऊ में बैठे दलाल कर रहे थे…
लेकिन यहीं ये कहानी समाप्त नहीं होती है… चुनाव के बाद जनता पार्टी बुरी तरह चुनाव हार जाती है और कांग्रेस की प्रचंड मतो से सरकार बनती है उत्तरप्रदेश में और सरकार बनते ही “नारायणपुर” का मुद्दा समाप्त हो जाता है एकदम से… कांग्रेस की सरकार जो जाँच कमेटी बनाती है वो रिपोर्ट देती है कि कोई बलात्कार नहीं हुआ था और जो 2 लोग मरे थे उनके हत्यारे कौन थे आजतक नहीं पता चला 45 साल बीत चुके हैं…
वो नारायणपुर केस की फाइल बन्द कर दी जाती है…
जिन 2 बच्चों की फोटो गोद में लेकर मालकिन ने फोटो खिंचवाया था उन बच्चों ने दोबारा कभी इंदिरा गाँधी की शक्ल नहीं देखी…
उन बच्चों की भी काफ़ी दर्दनाक कहानी है बच्चों को उनके रिश्तेदार अपने साथ ले गए कि चलो इनको इंदिरा गाँधी अपने साथ दिल्ली ले जायेंगी… लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने भी दोनों बच्चों को त्याग दिया और बच्चे भीख माँगने लगे उसी गाँव में… और उसी भीख मांगने के दौरान जो 8 साल का लड़का था उसी गाँव के तालाब में डूबकर मर जाता है 😥 न इंदिरा और न संजय गाँधी कोई नहीं आया…
लड़के का नाम था #जयप्रकाश और लड़की का नाम था #सोनकेसिया… वो सिद्दीकी तब भी उसी गाँव में नेतागिरी कर रहा था…
“सोनकेसिया” भीख माँगकर किसी तरह जीवित रही लेकिन न तो गाँधी परिवार और और किसी कोंग्रेसी ने इसका सुध बुध लिया…1990 में जब कांग्रेस कि सरकार जाने के बाद कांशीराम आवास योजना में “सोनकेसिया” को घर मिला फोटो ऊपर है…👆
सबकुछ होने के बाद जो सबसे बड़ा खुलासा हुआ था कि जो औरतें आई थी दिल्ली और लखनऊ के दलालों के सामने इंटरव्यू देने घूँघट में वो औरतें सामान्य औरतें नहीं थी देवरिया जिला बिहार से सटा हुआ है और वो बिहार से लगभग एक दर्जन #वेश्याएँ लाई गई थी क्योंकि कोई भी अच्छे घर की महिला झूठ बोलने को तैयार नहीं थी कि उनके साथ बलात्क़ार हुआ है…
आज से 45 साल पहले देश ने देखा था कि कैसे किसी दूसरे दल की सरकार को गिराकर “वेश्याओं “का फोटो शूट कर सत्ता हासिल करती थी नीच कांग्रेस…
*Note 👆ये फोटो उसी सोनकेसिया की है 4 साल पहले की अब पता नहीं किस अवस्था में है…*
