Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas, हिन्दू पतन

Satish Chandra Mishra-
महमूद गजनवी की गिनती दुनिया के सबसे क्रूर शासकों में होती है। सैयद सालार मसूद गाजी इसी गजनवी का भांजा था और उसकी सेना का सेनापति भी था।
1033 ई. में सैयद सालार मसूद गाजी बहराइच तक पहुंच गया। वहां उसका सामना महाराजा सुहेलदेव राजभर से हुआ। महाराजा सुहेलदेव राजभर ने उस वक्त तक 21 पासी राजाओं के साथ मिलकर गठबंधन में एक संयुक्त सेना तैयार कर ली थी। बहराइच में हुए युद्ध में महाराजा सुहेलदेव राजभर की सेना ने सालार मसूद गाजी को करारी शिकस्त दी। हार के साथ ही युद्ध में सालार मसूद गाजी को जान भी गंवानी पड़ी। इसके बाद उसकी सेना ने बहराइच में ही उसको दफना दिया। काफी समय के बाद दिल्ली के सुल्तानों के दौर में यहां मजार बनी और इसे दरगाह के रूप दे दिया गया। बाद में यहां मेला लगने लगा। उसी हत्यारे लुटेरे की याद में वर्षों से संभल में मेला लगाकर जश्न मनाने का कुकर्म किया जाता रहा। अब मंदिरों को तोड़ने लूटने वाले गजनवी गिरोह के प्रमुख गुर्गे की याद में लगाने वाले गद्दारों को योगी प्रशासन ने कठोरता  से समझा दिया है कि, किसी लुटेरे हत्यारे की याद में संभल में कोई मेला नहीं लगेगा।

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