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गोकुला जाट: एक वीर की गाथा-

मेरे गांव तथा मेरे गांव के समीपवर्ती प्रायः प्रत्येक गांव में एक जाट का नाम गोकुला अवश्य होता था। बाल्यकाल में हमें यह ज्ञान नहीं था कि गोकुला जाट इतने निःशंक, वीर, और महान थे। उन्होंने औरंगजेब के विरुद्ध दीर्घकाल तक युद्ध लड़ा। अंततः औरंगजेब ने उनके प्रति अमानुषिक व्यवहार प्रदर्शित करते हुए उन्हें एवं उनके परिवार को मृत्युदंड दे दिया। 
आगरा में हॉस्पिटल मार्ग पर एक स्थान है, जिसे ‘फवारा’ कहते हैं। मान्यता है कि इसी चबूतरे पर गोकुला जाट को बाँधकर औरंगजेब ने उनके एक-एक अंग को कटवाया था। उनके कटे शरीर से रक्त की धारा फवारे के समान फूटी थी, इसी कारण उस चबूतरे का नाम ‘फवारा’ पड़ गया।
मैं आगरा में अनेक वर्षों तक आता-जाता रहा, चार वर्षों तक वहाँ निवास किया, कई बार फवारे के समीप भी गया, किंतु मुझे यह नहीं ज्ञात था कि इस स्थान का संबंध गोकुला जाट से है। आज मेरे फेसबुक मित्र श्री Pradeep Singh जी के यूट्यूब चैनल ‘आपका अखबार’ पर उनके द्वारा प्रस्तुत वीडियो को सुनकर यह तथ्य प्रकाश में आया। श्री प्रदीप सिंह जी को इस ऐतिहासिक घटना से अवगत कराने हेतु हृदय से धन्यवाद। 
मैं गोकुला जाट के प्रति श्रद्धा और सम्मान सहित उन्हें नमन करता हूँ। 
परंतु आज यह प्रश्न मन को उद्वेलित करता है कि जाट समाज, जो समाजवादी पार्टी और कांग्रेस जैसी पार्टियों—जो औरंगजेब की प्रशंसा करती हैं—के साथ क्यों और कैसे जुड़ा है? यह न केवल गोकुला जाट के साथ विश्वासघात है, अपितु सनातन धर्म और भारत देश के प्रति भी द्रोह है। 
~ भगवान स्वरूप शर्मा

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