2010 जब कांग्रेस सत्ता में थी मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे तब देखिए किस तरह से सूचना के अधिकार का बलात्कार किया जा रहा था
आप जानकर चौंक जाएंगे वजाहत हबीबुल्लाह जो भारत के पहले सीआईसी यानी चीफ इनफॉरमेशन कमिश्नर थे उन्होंने एक अर्जी के सुनवाई के जवाब में आदेश दिया था कि राजीव गांधी फाउंडेशन को आरटीआई के तहत नहीं लाया जा सकता
मनमोहन सरकार यह नहीं बताना चाहती थी कि राजीव गांधी फाउंडेशन में कौन डोनेशन देता है कितना डोनेशन देता है भारत सरकार कितना पैसा राजीव गांधी फाउंडेशन को दे रही है और राजीव गांधी फाउंडेशन का पैसा कहां खर्च होता है कि कम पर खर्च होता है
मजे की बात यह कि पूरे भारत में उन्होंने सिर्फ राजीव गांधी फाउंडेशन को ही आरटीआई से बाहर किया था किसी और फाउंडेशन को उन्होंने आरटीआई के दायरे से बाहर नहीं किया
और जब वह रिटायर हुए जब सरकार बदली तब पता चला कि राजीव गांधी फाउंडेशन में वजाहत हबीबुल्लाह भी खुद ट्रस्टी थे
कभी अपना कुकर्म याद करो अपना बदबूदार गिरेबान भी देखो।
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