कल संसद के दोनों सदनों की स्थिति देखकर ये समझना कतई भी मुश्किल नहीं है कि आखिर केंद्र सरकार पिछले 12-13 सालों से सत्ता में रहने के बावजूद भी बांग्लादेशी-रोहिंग्या को भगाने, वक्फ बोर्ड को हटाने, मुसरिम पर्सनल लॉ बोर्ड को समाप्त करने अथवा टेक्स्ट बुक में इतिहास सुधार जैसे आमूलचूल परिवर्तन क्यों नहीं कर पा रही है.
आश्चर्य तो विपक्षी पार्टियों के साहस को देखकर लगता है कि.. 80-85% हिन्दू बाहुल्य वाले देश में भी हिंदुओं द्वारा संचालित कुछ राजनीतिक पार्टियाँ खुलेआम संसद में वक्फ बोर्ड , मुसरिम पर्सनल लॉ बोर्ड और बांग्लादेशी-रोहिंग्या का समर्थन करते हैं..
वो भी… ये जानते हुए कि संसद की इस कारवाई का पूरे देश में सीधा प्रसारण हो रहा है.
लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है आखिर ऐसी राजनीतिक पार्टियों को इतना साहस आता कहाँ से है ???
इसमें ये जानना कोई रॉकेट साइंस नहीं है किसी भी राजनीतिक पार्टी को उसके स्टैंड के लिए शक्ति मिलती है उसके फॉलोवर या कहें कि वोटर से..!
ऐसे में संसद में जो आज वक्फ बोर्ड के समर्थन में आवाजें उठ रही है उसके दोषी राजनीतिक पार्टियों के साथ-साथ हमलोग भी हैं.
क्योंकि, वो हम लोग ही हैं जो यहाँ सोशल मीडिया पर जाने-अनजाने वक्फ बोर्ड, बांग्लादेशी-रोहिंग्या आदि की प्रबल विरोधी भाजपा के खिलाफ और उनकी समर्थक पार्टियों के लिए माहौल बनाने वाले वाले उनके छिपळूनकर सरीखे पेड कार्यकर्ताओं के लेख पढ़ते हैं और उसे प्रसारित करते हैं.
परिणामतः , उससे ये देश/धर्मद्रोही पार्टियाँ उत्साहित होती हैं और उन्हें एक हिन्दू बाहुल्य देश तक में हिंदुओं का विरोध करते हुए कोई झिझक नहीं होती है.
अन्यथा, किसी की इतनी साहस नहीं हो सकती है कि कोई राजनीतिक पार्टी किसी धर्म के बाहुल्य वाले देश में उसी धर्म के खिलाफ बात कर सके.
और हाँ… “वे भी तो या हम भी तो हिन्दू हैं” वाला भोकाल मत ही देना…
क्योंकि, हम ये बात अभी तक नहीं भूले हैं कि महारानी पद्मावती समेत 16,000 हिन्दू महिलाओं के जौहर का कारण था अर्थात खिलजी को किसने महारानी पद्मावती के बारे जानकारी थी..
और, न ही ये भूले हैं कि मुहम्मद गोरी को 16 बार महाराज पृथ्वीराज चौहान से हारने के बाद भी 17वीं बार हमला करने का साहस कहाँ से आया था…!!